लीजिए, पेश है - स्मार्ट चड्ढी

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और यह कोई केवल बच्चों या बूढ़ों के लिए नहीं है, जिसमें एब्जार्वेंट पैड लगा हो ताकि अप्रिय स्थिति का सामना न करना पड़े.

अब चूंकि शुरुआत हो ही चुकी है, मैं चाहूँगा कि मेरी एक अदद स्मार्ट चड्ढी में न्यूनतम, निम्न  लिखित सुविधाएँ तो हों, नहीं तो वो काहे की स्मार्ट!

  • चड्ढी आपको पहले से यह बता सकने में सक्षम हो कि आप अगले दस मिनट में पादने वाले हैं, पादने के आवाज का डेसीबल 45 रहेगा, और  यह कि तब तक आप कोई सुरक्षित स्थान तलाश लें ताकि किसी घोर अप्रिय स्थिति का सामना न करना पड़े.
  • अगले दस मिनट में पादने वाले हैं का प्रेडिक्शन शत प्रतिशत सही होना चाहिए, फ़ेल सेफ़ की कोई गुंजाइशन नहीं होना चाहिए.
  • केवल प्रेडिक्शन से काम नहीं बनेगा, स्मार्ट चड्ढी यह भी बता पाने में उतना ही स्मार्ट होना चाहिए कि एक से लेकर 10 के स्केल में आपकी पादी गई गैस का बदबू का स्तर क्या कैसा होगा. बेहतर होगा कि स्मार्ट चड्ढी में अंतर्निर्मित फ़िल्टर व कैमिकल लगे हों  और नॉइस कैंसलिंग सिस्टम लगे हों जिससे कि बदबू खत्म कर उसमें खुशबू डाली जा सके और पाद के आवाज का लेवल न्यूनतम किया जा सके. बेहतर यह होगा कि पाद की आवाज के साथ शहनाई या बांसुरी की आवाज को मिलाकर कोई फ़्यूज़न संगीत की रचना कर सकने में सक्षम हो तो सारा अनुभव खुशबूदार, खुशनुमा, संगीतमय भी हो सकता है.
  • आपकी स्मार्ट चड्ढी यह भी बता सकने में सक्षम होनी चाहिए कि जब आप लांग ड्राइव पर जा रहे हों तो यह आपको पहले से आगाह कर दे कि भइए, आने वाले 50 मील दूर दूर तक कोई ढंग का टायलेट नहीं है, अभी से अपना ब्लैडर खाली कर ले, या ज्यादा बीयर और थम्प्सअप के कैन खाली नहीं कर, नहीं तो किसी रोड साइड स्थल पर फारिग होने की कोशिश करनी होगी जिसे पूरी तरह से  असफल करने के प्रयास ओडीएफ़ वाले कार्यकर्ता और सीटी बजाने वाले गुरुजी लोग (भारतीय संदर्भ में पढ़ें) कर सकते हैं.
  • इस स्मार्ट चड्ढी की सबसे बड़ी स्मार्ट खासियत यह होनी चाहिए कि इसे धोने की जरूरत न हो. सेल्फ क्लीनिंग हो. इतिहास गवाह है, और इस बात पर बहुत बवाल मच सकता है, मगर यह सही है कि बहुत से कुंवारे मर्दों ने, केवल चड्ढी धोने के लिए ही शादियाँ कीं. मर्दों को चड्ढी न पहनना पसंद है, मगर चड्ढी धोना नहीं.
  • स्त्रियों के लिए, बकौल ट्विंकल खन्ना - इसमें स्मार्ट सेंसर लगे हों जो पहले से यह बताने में सक्षम हों कि सेनिटरी पैड ओवरफ्लो होने जा रहा है या नहीं. मगर बात इससे भी आगे हो तो बेहतर. पेडलैस फुल्ली ड्राई सिस्टम हो जो एनवायरनमेंटल फ्रेंडली भी हो - यानी महीनों के उन दिनों की कोई चिंता फिकर न हो - कब आया कब गया पता ही न चले - खासकर पुरातन पंथी सासु माताओं की सोच स्मार्ट बनाने में बेहद उपयोगी.

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1 टिप्पणी "लीजिए, पेश है - स्मार्ट चड्ढी"

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन सड़क दुर्घटनाओं से सब रहें सुरक्षित : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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