मरे हुए हैं मेरे शहर के लोग...

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

image

 

व्यंज़ल

 

डरे हुए हैं मेरे शहर के लोग

मरे हुए हैं मेरे शहर के लोग

 

कभी तो चिंगारी सुलगेगी

भरे हुए हैं मेरे शहर के लोग

 

जब भी परीक्षा की घड़ी आई

खरे हुए हैं मेरे शहर के लोग

 

बात बे बात लाल पीले फिर

हरे हुए हैं मेरे शहर के लोग

 

देश को चने के खेत सा रवि

चरे हुए हैं मेरे शहर के लोग

--

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

7 टिप्पणियाँ "मरे हुए हैं मेरे शहर के लोग..."

  1. देश को चने के खेत सा रवि
    चरे हुए हैं मेरे शहर के लोग

    वाह! जी।

    उत्तर देंहटाएं
  2. मेरे शहर के लोग, भगवान करे कि जाग जायें।

    उत्तर देंहटाएं
  3. शुक्र अदा करो खुदा का कि,
    (तुम्‍हें) सह रहे हैं मेरे शहर के लोग

    उत्तर देंहटाएं
  4. क्या क्या रंग मे सने हुए है मेरे शहर के लोग!!!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  5. ravijee ,pataa nahee kya ho gayaa hai ,har shahar ka yahee hal hain. aap nirash n hon.

    उत्तर देंहटाएं

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
कृपया ध्यान दें - स्पैम (वायरस, ट्रोजन व रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त)टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहां पर प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.