स्वाइन फ़्लू के इंटरनेटी ख़तरे

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

आप इस बात से निश्चिंत न रहें कि स्वाइन फ़्लू का पदार्पण आपके इलाके में नहीं हुआ है और आप इसके खतरे से बचे हुए हैं. नहीं. यदि आप इन पंक्तियों को पढ़ पा रहे हैं तो खतरा आपके लिए भी बना हुआ है. स्वाइन फ्लू संबंधी समस्या इंटरनेट के जरिए भी आपके लिए खतरनाक हो सकती है.

अलबत्ता ये खतरा दूसरी किस्म का है. इंटरनेटी उचक्कों व डाकुओं ने इंटरनेट पर मासूम प्रयोक्ताओं को लूटने के लिए स्वाइन फ्लू को भी नहीं छोड़ा है. बल्कि स्वाइन फ़्लू उनके लिए एक तरह से वरदान बनकर आया है.

स्वाइन फ्लू संबंधी ताजा जानकारी प्राप्त करने के लिए इंटरनेट से बड़ा और बढ़िया साधन और क्या हो सकता है भला? तो यदि आप स्वाइन फ़्लू के नाम से इंटरनेट पर सर्च करेंगे तो आपको हजारों पन्ने मिलेंगे. हाल ही में स्वाइन फ़्लू के नाम से मिलते जुलते सैकड़ों डोमेन नामों का पंजीकरण हुआ है. क्यों? स्वाइन फ़्लू जैसी डरावनी बीमारी के बारे में हर कोई जानना समझना चाहता है. ऐसे में अवसरवादियों की तो चाँदी है. स्वाइन फ़्लू शब्द से सर्च इंजिन ऑप्टीमाइज्ड किए गए इन साइटों पर कुछ पन्नों पर आपको दस-बीस डॉलर कीमत में स्वाइन फ़्लू से बचने के स्वाइन फ़्लू सर्वाइवल गाइडों के जरिए 100% तरीके व देसी औषधियों के बारे में जानकारी देने का वादा किया जा रहा है.

इसी प्रकार, अवसर वादियों ने ईमेल को स्वाइन फ्लू विषयक स्पैम से पाट दिया है. स्वाइन फ्लू से बचने के तरीके व औषधियों की जानकारी देने बाबत कुछ साइटों के लिंक लिए ये स्पैम जाहिर है, प्रयोक्ताओं को उल्लू बनाने के लिए भारी मात्रा में भेजे जा रहे हैं. स्पैमरों ने 2003 में सार्स वायरस के समय भी यही कारनामा किया था. और, इस बात में कोई शक नहीं कि दुनिया में जितने व्यक्ति सचमुच के स्वाइन फ्लू से संक्रमित होंगे उससे कई गुना इन स्पैमरों, इंटरनेटी चोरों-उचक्कों-लुटेरों के शिकार बनेंगे.

आप भी सावधानी बरतें. इंटरनेटी स्वाइन फ्लू के शिकार होने से बचें.

--- विज्ञापन ---

----------- *** -----------

_____________________________________

6 टिप्पणियाँ "स्वाइन फ़्लू के इंटरनेटी ख़तरे"

  1. आक्छीं...खो खो...क्या कहा आपने?

    एक बार रेल के डिब्बे में एक बाबाजी का विज्ञापन था. वे एड्स का शर्तिया इलाज करते है. तो अपनी अपनी पहूँच के हिसाब से हर कोई "लूट सके तो लूट" पर काम कर रहे हैं.

    "बच सको तो बचो" यह हमारा नारा है.... :)

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्छा चेताया आपने !

    उत्तर देंहटाएं
  3. अच्छा है आपने ये उपाय बता दिए.. वैसे ब्लॉग जगत में भी एक महामारी फैल रही है अनाम टिप्पणियों में अंट शंट लिखने वाली..

    उत्तर देंहटाएं
  4. यानी इण्टरनेट बन रहा है शूकरक्षेत्र!
    कलियुग में भगवान इण्टरनेटीय वाराह-अवतार लेंगे, ऐसी भविष्यवाणी की जा सकती है! :)

    उत्तर देंहटाएं

आपकी अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.
कृपया ध्यान दें - स्पैम (वायरस, ट्रोजन व रद्दी साइटों इत्यादि की कड़ियों युक्त)टिप्पणियों की समस्या के कारण टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहां पर प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.