रविवार, 9 अप्रैल 2017

व्यंग्य जुगलबंदी - सेल्फ़ीज़ फ्रॉम एनीमल एंड डेड वर्ल्ड

सेल्फ़ियों का जमाना है. जित देखो तित सेल्फियाँ.
मैंने पेड़ पौधों, जानवरों और निर्जीव दुनिया में खींची जा रही सेल्फ़ियों पर कुछ शोध किया और मेरा चित्रमय शोधपत्रक आपके अवलोकनार्थ प्रस्तुत है-

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गिरगिटिया सेल्फ़ी – शायद राजनेताओं ने इनसे सीख ले ली है. राजस्थान जाएंगे तो राजस्थानी पगड़ी पहन कर सेल्फ़ी, चेन्नई गए तो लुंगीदार सेल्फ़ी.

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झूला सेल्फ़ी. ऐसी मनोरंजक राइड कि डिज्नीवर्ल्ड की 10जी राइडें भी पानी मांगे.

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मंदिर इन मेकिंग सेल्फ़ी – ईश्वर ने मनुष्य को बनाया, अब मनुष्य ईश्वर को यत्र-तत्र-सर्वत्र बना रहा है. बनाए जा रहा है. यह एक सर्वथा नए ईश्वर की सगर्व, सर्वथा प्रथम सेल्फ़ी है.

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वृक्ष सेल्फ़ी. किराए पर झाड़. जब इस नवीन दुनिया में किराए पर कोख मिल रही है तो फिर पेड़ों  को तो किराए पर चढ़ना ही था…

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कटा झाड़ या गंदा नाला सेल्फ़ी? पाठकों के निर्णय पर…

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निर्जीव, निर्लिप्त सेल्फ़ी. या फिर, काला और गेहुंआ सेल्फ़ी. जो भी हो, शर्तिया, नस्लवादी सेल्फ़ी.

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एक नया शिकार सेल्फ़ी 1
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एक नया शिकार  सेल्फ़ी 2. (वैसे तो यह अनटाइटल्ड सेल्फ़ी है, सेल्फ़ एक्सप्लेंड. पीरियड.)

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मोहल्ला आईपीएल सेल्फ़ी. इस तरह के, बेहद मनोरंजक इवेंट के सभी प्रीमियम टिकट पहले ही ब्लैक में बिक चुके होते हैं!

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असली गौरक्षा सेल्फ़ी. नो कमेंट्स. नहीं तो गोरक्षकों का हमला होने की पूर्ण संभावना है.

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टायर्ड सेल्फ़ी.

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ऑब्सलीट (टेक्नोलॉजी) सेल्फ़ी

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असली भेड़चाल सेल्फ़ी

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द अर्बन जंगल सेल्फ़ी

कहावत है कि एक चित्र बराबर हजार शब्द. तो इस हिसाब से कोई दर्जन भर से अधिक सेल्फ़ी हो गई. याने दस हजार से अधिक शब्द! इतना लिखने के बाद थकावट दूर करने के लिए थोड़ा आराम, उसके बाद फिर सेल्फ़ी सत्र. ठीक है?

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  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्म दिवस - राहुल सांकृत्यायन जी और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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