सोमवार, 27 फ़रवरी 2017

व्यंग्य जुगलबंदी - बुढ़ापे या बीमारी से नहीं, मैं मरा अपनी शराफ़त से!

ग़लती से मैं शराफ़त से पैदा हो गया, साथ में शराफ़त लेकर, शराफ़त से लबरेज़. अब देखिए ना, जिस दिन से मैंने होश सँभाला, अपने आप को निहायत ह...

सोमवार, 20 फ़रवरी 2017

व्यंग्य जुगलबंदी 22 - होली, चुनाव और बाबा; बोलो सा रा रा रा रा रा

  शौचालय तीन ताले में जनता निपटे मैदान में     बोलो सा रा रा रा रा रा     मुर्दा पूछे है कहाँ जाए श्मशान या कब्रिस्तान में            ब...

शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

व्यंग्य जुगलबंदी 21 - प्रेम दिवस / वेलेंटाइन डे विशेष : मरफी के प्रेम प्यार के नियम

  (व्यंग्य जुगलबंदी 21 - प्रेम दिवस - वेलेंटाइन डे के अवसर पर प्रेममय है, तो इस अवसर पर नियमावलि को धो-पोंछ कर चमका कर फिर से प्रस्तुत किय...

सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

व्यंग्य जुगलबंदी - हमारा बसंत

हमारा वसंत यूं तो यह ऋतुओं का राजा कहलाता है, परंतु किसलिए, यह बहुतों को पता नहीं. और, यह कब आता है और कब जाता है यह भी बहुतों को पता नही...

शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2017

प्यार और युद्ध में नहीं, धंधे में !

नए दौर में प्यार और युद्ध गौण हैं। बचा है तो केवल बिजनेस। यहां सब जायज है। और यह कोई रईस फिल्म का धांसू डायलॉग नहीं है। एप्पल कंपनी का सफलता...

बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

चोरी की पराकाष्ठा!

अभिनव, नवोन्मेषी, नायाब! फिर भी, दाढ़ी में तिनका? शायद इसीलिए तो पकड़े गए!

---------------------------------------------------------

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------