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व्यंग्य जुगलबंदी - 40 - योग करो, सुख से जियो

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भूमिका : जबकि हिंदी व्यंग्य की दुनिया व्यंग्य क्या है, व्यंग्यकार क्या है, क्या व्यंग्य केवल उंगली में गिने जाने वाले व्यंग्यकारों तक सिमट गया है, समकालीन टॉप 10 कितने व्यंग्यकार हैं, वन लाइनर को व्यंग्य मानें या नहीं, व्यंग्य में करुणा और सरोकार होने चय्ये कि नईं आदि आदि पर उलझी हुई है, इधर तकनीकी क्रांति अपनी रफ़्तार से चल रही है, और एक ऐसा ऐप्प ईजाद हो गया है जो महज एक टच पर व्यंग्य पैदा कर देता है. आपको विश्वास नहीं हो रहा? मुझे भी नहीं हो रहा था. तो मैंने इस ऐप्प की टेस्टिंग की. इस ऐप्प में गूगल एलो, अलेक्सा, सिरी आदि की सम्मिलित एआई की शक्ति है और यह सचमुच महज एक टच पर झकास व्यंग्य पैदा कर देता है. मैंने इस बार की जुगलबंदी के लिए अपने स्मार्टफ़ोन पर इस ऐप्प को इंस्टाल किया और विषय दर्ज कर केवल एक टच मारा और इसने संपूर्ण ब्रह्मांड में से खोज खंगाल कर बढ़िया तरतीब से लाइनें जमाकर एक शानदार व्यंग्य लिख कर मेरे सामने पेश कर दिया. नीचे इस झकास व्यंग्य को पढ़ें – इस व्यंग्य आलेख में मेरा कोई योगदान नहीं है, बल्कि इस व्यंग्य-लेखक ऐप्प का योगदान है. यह ऐप्प किसी भी – जी हाँ, किसी भी (मे…

हास्य-व्यंग्य पॉडकास्ट - जुगलबंदी - खेती

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हास्य-व्यंग्य की जुगलबंदी 38 - खेती पर लिखी मेरी व्यंग्य रचना को अर्चना चावजी ने आवाज दी है. उनका धन्यवाद और आभार. व्यंग्य में, जाहिर है ड्रामा का आनंद भी जुड़ गया है. सुनें और आनंद लें -
पॉडकास्ट नीचे प्लेयर के प्ले बटन (बटन को प्रकट / लोड होने में कुछ समय लग सकता है, कृपया धैर्य बनाए रखें) पर क्लिक कर सुनें -

32 और या 64 बिट विंडोज़ 10 में रेमिंगटन हिंदी - कृतिदेव लेआउट में यूनिकोड में टाइप कैसे करें

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how to type in remington kritidev layout in 32 / 64 bit windows 10मरफ़ी का नियम यहाँ सत्य है - हर दिए गए सॉफ़्टवेयर का नया, उन्नत संस्करण तमाम नई, उन्नत समस्याएँ लेकर आता है.विंडोज 10 में रेमिंगटन कीबोर्ड (कृतिदेव लेआउट) से यूनिकोड हिंदी टाइप करने की सुविधा ही छिन गई, और बहुत से लोग जिन्होंने अपने कंप्यूटर मुफ़्त में अपग्रेड किए (अपग्रेड के लिए विंडोज 10 मुफ़्त था) या नए कंप्यूटर लिए जो केवल विंडोज 10 प्रीइंस्टाल हैं, और केवल रेमिंगटन से टाइप करना जानते हैं उनके लिए बड़ी समस्या हो गई.अंततः इसका समाधान आ गया है और विंडोज 10 के प्रायः हर संस्करण, यहाँ तक कि टैबलेट संस्करण के लिए भी ये समाधान काम करते हैं. आपको ट्रायल एंड एरर विधि अपना कर इनमें से कोई एक चुन कर इंस्टाल करना होगा. समाधान राजभाषा.नेट की साइट पर उपलब्ध है.इस साइट पर तीन अलग तरह के समाधान हैं. एक पुराना इंडिक आईएमई हिंदी टूलकिट नाम  से है, जो संभवतः विंडोज 10 के 32 बिट संस्करण में बढ़िया काम करता है.दूसरा समाधान है रेमिंगटन ईएक्सई नाम की एक इंस्टालर फ़ाइल जो कि विंडोज 10 के 32 बिट टैबलेट पर बढ़िया काम करता है (यह मेरे टैबलेट…

बिन पेंदी का....

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लोटा नहीँ, डस्टबिन!
स्वच्छ भारत अभियान की तो....

कोडी kodi : अपने क्रोमकास्ट, अमेजन फायर और एप्पल टीवी का विसर्जन करने का समय आ गया!

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वैधानिक चेतावनी – यदि आप क्रोमकास्ट, अमेजन फायर या एप्पल टीवी जैसे मीडिया रेंडरर का इस्तेमाल करते हैं, तो इस आलेख को पढ़ने के बाद उन्हें कचरे की टोकरी में फेंकना चाहेंगे तो इसके लिए यह आलेख कतई जिम्मेदार नहीं होगा.बहुत दिनों के बाद टेक्नोलॉज़ी की दुनिया में हल्ला मचा है. हल्ला तो ख़ैर चालक-रहित कारों का भी हो रहा है, मगर वो बाजार में अभी उपलब्ध नहीं हैं. हाँ, तो हल्ला मचा है - टेक्नोलॉज़ी की दुनिया में, इतना कि अमेजन जैसी कंपनियों ने हाल ही में अपने प्लैटफ़ॉर्म पर इनकी बिक्री पर प्रतिबंध भी लगा दिया. जी हाँ, आपने सही अनुमान लगाया – फुल्ली लोडेड कोडी मीडिया बॉक्स. नया हल्ला, मगर वाकई काम का.क्या है कोडी?कोडी एक मुक्त-स्रोत मीडिया सेंटर ऐप्प है जो विंडोज़, लिनक्स, एंड्रायड और एप्पल के लिए बनाया गया है. इसका पुराना संस्करण एक्सबीएमसी मीडिया प्लेयर के नाम से बहुत पहले से आता रहा है, मगर हाल ही में इसने लोगों का ध्यान तब खींचना चालू किया जब कोडी प्रोग्राम की विशिष्ट सुविधा - थर्ड पार्टी एड ऑन - के जरिए लोगों को इंटरनेट के तमाम वैध और अवैध और चाइल्ड और एडल्ट हर किस्म के ऑडियो-वीडियो मीडिया …

व्यंग्य जुगलबंदी–38 : भारतीय खेती की असली, आखिरी कहानी

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दृश्य एक
पहला : यार! बहुत दिनों से कोई स्कीम नहीं लाए
दूसरा : सर, एक एकदम चकाचक स्कीम लाया हूँ. दिल खुश हो जाएगा.
पहला (खुश होकर, उम्मीद से) : बताओ बताओ
दूसरा : सर, एक योजना आई है. सेंट्रल की है. 50% सब्सिडी की. हर्बल, एलोवीरा या जेट्रोफा की खेती पर.
पहला : अच्छा! ये तो बढ़िया है.
दूसरा : सर, कोई पचासेक बड़े क्लाइंट आ गए हैं. सबसे बात हो गई है. सबके कागज़ात भी तैयार हो गए हैं. हर एक को उनकी जमीन के रकबे के अनुसार दो से पांच करोड़ के बीच फाइनेंस का मामला बनता है.
पहला : वाह! यार, तुम तो बड़े तेज निकले. इधर गाय बियाई नहीं, उधर दुहना चालू. हे हे हे... (कुटिल हँसी)
दूसरा :  हे हे हे... (बड़ी कुटिल हँसी). अब आप देख लीजिएगा, काम जल्दी हो जाए. कहीं अड़चन न आने पावे.
पहला : बिल्कुल. दृश्य दो
पहला : यार! बहुत दिनों से कोई स्कीम नहीं लाए?
दूसरा : सर, वही तो लेके आया हूँ. याद है, पिछली दफा की 50% हर्बल खेती सब्सिडी योजना?
पहला :  हाँ हाँ, वो तो क्या बढ़िया स्कीम थी यार. मजा आ गया था.
दूसरा : हाँ, सर तो उसी में आगे हुआ ये है कि कुछ क्षेत्रों को अवर्षाग्रस्त घोषित किया जा रहा है, और 25% कर्जमाफी …

भारतीय सिस्टम फरार है!

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पूरे एक दशक में भी भारत नहीं बदला. एक जज फरार है और भारतीय पुलिस उसे खोज नहीं पाई है! पूरा सिस्टम ही फरार है. प्रस्तुत है 2005 में फरार पर लिखी पोस्ट का रीपोस्ट -
बिहार के पाँच विधायक अर्से से फरार थे, जो, जाहिर है, चुनावी बेला पर नमूदार हो गए. इससे पूर्व केंद्रीय मंत्री शिबूसोरेन को कोर्ट का समन जारी हुआ था तो वे मंत्री पद छोड़ कुछ दिनों तक फरार हो गए थे. इस बीच वे मीडिया को साक्षात्कार देते रहे. जब समन बीत गया तो वे प्रकट हो फिर मंत्री बन गए. यूं तो सारा देश फरार हो गया है. सोने की चिड़िया भारत, हिन्दुस्तान बचा है क्या? उसे हमने कहीं फरार करवा दिया है और जो हमारे पास बचा है वह प्लास्टिक, पॉलिथीन का इंडिया है...
*-*-*
व्यंज़ल
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समग्र मुल्क फरार है
जिस्म है जाँ फरार है
अवाम बैठी मुँह खोले
और हाकिम फरार है
क़ैदी है जेल में लेकिन
वहाँ सिपाही फरार है
देखो दुनिया दीवानी
जिए वही जो फरार है
सोचे है रवि बहुत पर
उसका कर्म फरार है
--**--

व्यंग्य जुगलबंदी–38 : साहित्यिक खेती

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साहित्यिक खेतीयदि आपमें पत्रकारीय गुण हैं तो आप साहित्यिक खेती के लिए सदा-सर्वदा से उपयुक्त पात्र होंगे, वो भी इस सृष्टि के प्रारंभ से, और इसके अंत होने तक. क्योंकि, जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे साहित्यकार. ठीक है, तुकबंदी में थोड़ी तुक मिल नहीं रही है, मगर मसला अब खांटी-कवि से आगे बढ़कर बहु-विध-साहित्यकार तक पहुँच गया है, इसलिए बेतुका भी चलेगा.तो, बात साहित्यिक खेती की और पत्रकारीय गुण की हो रही थी. यदि आपमें पत्रकारीय गुण हैं तो आप हर विषयों में लिखने में पैदाइशी सक्षम होंगे. सृष्टि के हर अंधे कोने में प्रकाश डालने में सक्षम होंगे. हर विषयों के ज्ञाता होंगे. आपके लिखे के हर हर्फ, हर वाक्य और हर पैराग्राफ में ज्ञान-गंगा बहती मिलेगी. इतनी, कि आप लता को लता नहीं, केवल भजन गायिका भी कह लेंगे, और ऐसा कहते हुए आपको कान पकड़ने की भी जरूरत नहीं होगी. अब भले ही उस किस्म का लेखन केल्कुलेटेड मूव हो, टीआरपी बटोरक हो, मगर भई, बात खेती की हो रही है तो उपज तो अच्छा मंगता है ना? इसलिए, कंट्रोवर्सी की  शातिराना खाद, इन्वोकिंग की कीटनाशक-खरपतवार नाशक और ट्रॉलिंग की निराई-गुड़ाई भी भरपूर होती है और ऐ…

जितना भी दो, थोड़ा ही है

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ख्वाहिशें ऐसी कि हर मेगा बाइट पर स्ट्रीमिंग रूके!

व्यंग्य जुगलबंदी–37 : टॉपरों से भयभीत

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(कार्टून – साभार काजल कुमार के कार्टून)दुनिया में केवल और केवल दो तरह के लोग होते हैं. या तो टॉपर या फिर टॉपरों से भयभीत. मैं दूसरे किस्म का व्यक्ति हूँ. टॉपरों से भयभीत. टॉप और टॉपरों से मुझे सदैव भय लगता आया है. जिस तरह से कुछ लोगों को ऊंचाई से भय लगता है, बिलावजह, शायद जेनेटिक खामियों की वजह से. ठीक उसी तरह मुझे भी टॉप और टॉपरों से भय लगता रहा है. कुछ केमिकल लोचा है. कुछ जेनेटिक खामी है मुझमें.पढ़ाई के दौरान टॉपरों से अधिक भय लगता रहा. पता नहीं कब, कौन, कैसा साथी टॉप कर जाए और अपन टीपते रह जाएँ, और पालकों की तिर्यक निगाहों का सामना करना पड़ जाए! प्रायोगिक विषयों के विद्यार्थी होने के कारण, बिना किसी आग्रह-पूर्वग्रह के, जब कुछ विशिष्ट सहपाठियों के प्रति कुछ विशिष्ट शिक्षकों के कुछ विशिष्ट अति उदारमना होने और उन्हें अतिरिक्त दक्षिणा की तरह सोत्साह अतिरिक्त अंक प्रदान करने की टॉप घटनाओं से कई-कई बार आहत होते रहे और टॉप की अंकीय-चोटें खाते रहे.इस तरह, टॉपरों से जूझते-उलझते जब नौकरी में आए तो ऐसे विभाग से पाला पड़ गया जहाँ हर महीने और हर महत्वपूर्ण कार्यालयीन बैठकों में टॉपरों, टॉप की स…

जियो प्रभाव

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पर, मुफ्त के माल का कोई लेवाल है भी?

भाषाई दीवार ढहाने में एक और ठोस हथौड़ा

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टेक्नॉलजी की जय हो!

विंडोज़ क्रिएटर्स अपडेट और डॉल्बी एटमॉस साउंड सिस्टम

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यदि आप गीत संगीत वह भी अच्छी गुणवत्ता का सुनने-सुनाने का शौक फरमाते हैं तो डॉल्बी एटमॉस के बारे में जरूर जानते होंगे और बहुत संभव है कि आपके पास कोई न कोई उपकरण – ऑडियो या वीडियो उपकरण ऐसा होगा जो डॉल्बी एटमॉस संगत होगा. डॉल्बी एटमॉस उच्च गुणवत्ता का ध्वनि प्रभाव उत्पन्न करता है और आजकल बहुत से फ़िल्मों में भी यह तकनीक आ रही है – खासकर 3डी एनीमेशन में.अभी तक कुछ लैपटॉप आदि में तथा कुछ उच्च गुणवत्ता के डेस्कटॉप पीसी में डॉल्बी और डॉल्बी एटमॉस उपलब्ध थे, जो अतिरिक्त हार्डवेयर लगा कर सक्षम किए जाते थे. बहुत से मोबाइल उपकरणों में भी यह उपलब्ध है. परंतु हाल ही में उपलब्ध विंडोज क्रिएटर्स अपडेट के जरिए अब यह सुविधा हर डेस्कटॉप पीसी पर उपलब्ध हो सकेगी.हाल ही में मैंने भी अपने डेस्कटॉप कंप्यूटर पर विंडोज क्रिएटर्स अपडेट स्थापित किया और पाया कि डॉल्बी एटमॉस की मल्टीचैनल संगीत सुनने की सुविधा  डॉल्बी ऐक्सेस नाम का ऐप्प इंस्टाल करने पर हासिल हो गई है. 7.1 स्पीकर वर्चुअल सराउंड की सुविधा हेडफ़ोन से मिलती है और यदि आपके पास 7.1 या 5.1 स्पीकर सिस्टम है तो अपने डेस्कटॉप पीसी के ऑप्टिकर आडियो आउट या …

(विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर विशेष ) तम्बाकू का जहर / यशवंत कोठारी

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31-5-17(विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर विशेष )तम्बाकू  का जहरयशवंत कोठारीतम्बाकू `निकोटियाना” नामक पौधे की सुखी पत्तियों के रूप में पाया जाता है. इस पौधे की लगभग 60 किस्में होती है जिनमें से केवल 2 निकोटीयाना टबेकुम और निकोटी याना रसटीका बहुतायत से उगाई जाती है. भारत में निकोटी याना टबेकम का उपयोग सिगरेट ,सिगार,चुरुट ,बीड़ी ,हुक्का और सुन्गनी के लिए किया जाता है. यह पूरे देश में उगाई जाती हैं. लेकिन निकोटीयाना रसटिका के लिए ठंडी जलवायु चाहिए ,  अतः:यह पंजाब,हिमाचल बिहार आसाम में होती है. भारत में हजारों करोड़ की तम्बाकू हर साल पैदा होती हैं. काफी भाग निर्यात किया जाता है. तम्बाकू की पैदावार का मूल्य व् लाभ काफी अधिक है. इस आय को मूर्खों का सोना कहा जाता है. क्योंकि इस आय के कारण कई प्रकार के नुकसान होते हैं. दवा, बीमारी , कैंसर  , असामयिक मृत्यु आदि के कारण केवल अमेरिका में ही सौ करोड़ डालर का नुकसान हर साल होता है. भारत में यह नुकसान और भी ज्यादा है. [ads-post]इस फसल के कारण अधिक आय के लोभ के कारण किसान अनाज , फल सब्जी की खेती कम कर देता है. नाइजीरिया में यही हालत हो गयी है. तंबाकू से क…

व्यंग्य जुगलबंदी 36 : मानहानि के देश में

मानहानि का तो अपने देश में ऐसा है कि बच्चा पैदा होते ही अपने साथ एक अदद मानहानि साथ लेकर आता है. दरअसल बच्चा कोख में कंसीव होते ही अपने पालकों के लिए संभाव्य मानहानि लेकर आता है. तमाम भ्रूण-लिंग-परीक्षणोपरांत कन्या-भ्रूण-हत्या इस बात के जीवंत उदाहरण हैं कि उन बेचारी लाखों अजन्मा-कन्याओं ने इस नश्वर संसार में पदार्पण से जबरिया इन्कार कर अपने पालकों, रिश्तेदारों, समाज आदि की संभाव्य मानहानि को अपनी कुर्बानी देकर किस तरह से बचाया है. [ads-post]जन्मोपरांत भी मामला मानहानि का ही रहता है. सदैव. शाश्वत. सर्वत्र. नवजात शिशु – चाहे वो पुत्र हो या - सोनोग्राफ़ी की पकड़ में आने से बच निकल चुकी - पुत्री - यदि वो अल्पसंख्यक जमात में पैदा होते हैं तो वो बहुसंख्यकों की मानहानि करते हैं. यदि वो बहुसंख्यक जमात में पैदा होते हैं तो फिर जाति-कुनबे-अगड़े-पिछड़े-ब्राह्मण-दलितों-आदि के बीच मानहानि का मामला बनता है. ऊपर से, लोग दलित को दलित बना-बता कर मानहानि करते हैं तो इधर ब्राह्मण-ठाकुर को ब्राह्मण-ठाकुर बना-बता कर मानहानि करते हैं. अर्थ ये कि किसी जात में शांति नहीं. भारत में आदमी आदमी से मिलता है तो प्…

तबीयत नासाज लग रही है? शर्तिया यह कारण हो सकता है

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इससे सच्चा डायग्नोसिस नहीं ही हो सकता।

व्यंग्य जुगलबंदी : बिना शीर्षक

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(अनाम, अज्ञात कलाकार की अनटाइटल्ड कलाकृति)   मुफ़्त के बियर की तरह, “बिना शीर्षक” जैसा दुनिया में कुछ भी नहीं होता. यह एक काल्पनिक अवधारणा है. जैसे ही आप कुछ देखते पढ़ते हैं, आपके दिमाग में कुछ न कुछ शीर्षकीय विचार आते ही हैं. यही तो शीर्षक होता है. पर अकसर होता यह है कि सृजनकर्ता सामने वाले को ‘कुछ और’ समझ अपना विवादित किस्म का शीर्षक अलग से, सोच-विचार कर चिपका देता है. उदाहरण के लिए, आप कोई कहानी पढ़ रहे होते हैं जिसका कोई बढ़िया सा, आकर्षक सा शीर्षक होता है, और जिसकी वजह से ही आप उस कहानी को पढ़ने के लिए आकर्षित हुए होते हैं. पर, पूरी कहानी पढ़ लेने के बाद, और बहुत से मामलों में तो, पहला पैराग्राफ़ पढ़ने के बाद ही, आपको लगता है कि आप उल्लू बन गए और सोचते हैं कि  यार! ये कैसा लेखक है? इसे तो सही-सही शीर्षक चुनना नहीं आता. इस कहानी का शीर्षक यदि ‘यह’ के बजाय ‘वह’ होता तो कितना सटीक होता! [ads-post] ग़नीमत ये है कि कलाकारों के उलट, साहित्यकारों की दुनिया में बिना-शीर्षक कहानी-कविताएँ-गीत-व्यंग्य प्रकाशित प्रसारित होने की कोई खास परंपरा नहीं है! यही हाल कहानी-कविता-व्यंग्य-हाइकु-ग़ज़…

बहुधा, युवाओं के स्टेटस अपडेट से तो यह सही भी लगता है!

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वैसे, मैंने अपने आप को युवाओं से अलग अभी माना नहीं है 😁

अब, भगवान को कौन बचाए!

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हैकरों से खुदा डरे!

कटप्पा और बाहुबली पर भारी ये फिल्म...

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प्रभास पर धर्मेंद्र भारी। बाहुबली पर मेरा गांव मेरा देश।

मेरा स्मार्टफ़ोन कैसा हो? बिलकुल इसके जैसा हो...

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कोई दसेक साल पहले मैंने कुछ कल्पना की थी कि मेरा स्मार्टफ़ोन कैसा हो. मेरी बहुत सी इच्छाएँ पूरी हो गई है. परंतु इच्छाओं का क्या. एक पूरी हो तो दूसरी. और, इच्छाएं ऐसी हों कि हर इच्छा पे सांस फूले. बहरहाल, आने वाले समय के लिए मेरी स्मार्टफ़ोनी इच्छाएँ कुछ ऐसी हैं – 1 स्मार्टफ़ोन रीयल स्मार्ट हो नाम के नहींजी हाँ! अभी का, आपके हाथों का स्मार्टफ़ोन, भले ही फ्लैगशिप किस्म का हो, मार्केट में हाल ही में नया नकोर उपलब्ध हाई एंड कॉन्फ़िगुरेशन, डेका-कोर और 8 जीबी रैम, 128 जीबी रोम वाला हो, मगर है तो वो बिलकुल डम्ब ही. आप पूछेंगे कि भला कैसे? तो भइए, जरा ये बताओ, आपके वाट्सएप्प पे आने वाला हर दूसरा संदेश, वही, सड़ाऊ, पकाऊ, ठीक तीन संदेश ऊपर आया, और अनंत बार फारवर्ड मारा हुआ क्यों आता है? क्या इसीलिए आपने स्मार्टफ़ोन खरीदा है? क्या आपका स्मार्टफ़ोन ये बता नहीं सकता है फारवर्ड मारने वाले को कि भइए, इस सड़ेले, फेक संदेश को फारवर्ड मत मार, तेरी बड़ी किरकिरी होने वाली है. या कि, स्मार्टफ़ोन यह तो कर ही दे कि जिस संदेश को आप एक निगाह मार कर मुंह बिसूर कर तुरंत मिटा चुके हैं, उसे वो आपके स्मार्टफ़ोन म…

भारत के न्यायिक इतिहास का एकमात्र सटीक फैसला!

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भारतीय न्यायतंत्र की जय हो! सदा विजय हो!!

कड़ी निंदा पर कुछ नोट शीट्स

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(काजल कुमार के कार्टून की पैरोडी

एक आरटीआई आवेदन लगाकर एक मंत्रालय की “कड़ी निंदा” पर तैयार की गई नोट-शीट की 2 प्रतियाँ हासिल की गई हैं जिनका मजमून आपके अवलोकनार्थ प्रस्तुत है –
कड़ी निंदा नोटशीट 1

देश में विभिन्न प्रकार की वांछित-अवांछित अप्रत्याशित और अप्रिय घटनाओं की मजम्मत करने के लिए और जनता में यह संदेश देने के लिए कि सरकार कार्य कर रही है और इन अप्रिय घटनाओं पर उसका रूख प्रकट करने के लिए आमतौर पर “कड़ी निंदा” शब्द का इस्तेमाल किया जाता है.

इस बीच, सोशल मीडिया आदि की सर्वहारा और आम-जन में अतिसंलिप्तता के वर्तमान दौर में यह पाया गया है कि यह शब्द “कड़ी निंदा” हास्य-व्यंग्य और हंसी ठट्ठा का पात्र बन गया है. सरकार की ओर से जब भी “कड़ी निंदा” वाला बयान जारी किया जाता है, सोशल मीडिया में चुटकुलों, मजाक, रोस्ट आदि की बाढ़ आ जाती है. और अब तो मेनस्ट्रीम मीडिया यानी अख़बार और टीवी में भी मजाक और हँसी ठट्ठों के दौर चलने लग जाते हैं.
अतः इस शब्द “कड़ी निंदा” के विकल्प के तौर पर कोई अन्य समानार्थी शब्द का उपयोग करने का विचार किया गया, जिसके लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई. कमेटी…

यह तो, वाकई हद है!

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10 रुपल्ली के चिप्स के पैकेट में अंतर्निर्मित एमपी 3 प्लेयर मुफ्त वो भी मुफ्त संगीत के साथ ।

व्यंग्य की जुगलबंदी - हवाई चप्पल की घर वापसी

वुडलैंड, अडीडॉस, नाईकी आदि-आदि को कॉम्प्लैक्स हो गया है। बात ही कुछ ऐसी है। हवाई चप्पल घर वापस आ गया है और क्या खूब वापस आया है। हवाई चप्पल की घर वापसी हो गई है, उसके दिन फिर गए हैं। मोची और खादिम की रत्न जड़ित चप्पलों में अब वो मजा नहीं रहा जो अब हवाई चप्पलों में है। हवाई चप्पल आज के युग का नया फैशन स्टेटमेंट है। नई टेक्नोलॉजिकल क्रांति है। अब तक आप हवाई चप्पल डाल कर कहीं निकलते थे, भले ही चिकित्सकीय मजबूरीवश ही सही, लोग-बाग आपकी फटीचरी हैसियत का अंदाजा दूर से ही लगा लेते थे। तब के युग में, भले ही आपकी जेब में लाख रुपये हों, वो भी असली और नए वाले, अगर आपके पैरों में हवाई चप्पल होता था तो उस रकम की असल फ़ेस वैल्यू कोई मानता ही नहीं था, वह शून्य होता था, और उसे नोट बंदी के ठीक बाद के नोटों के जैसा महज कागज का टुकड़ा माना जाता था। यूं कहें कि माथे पर कोहिनूर हीरा भले ही लटका लो पर यदि आपके पैरों में हवाई चप्पल रहता था तो कोहिनूर हीरे की भी कोई पूछ परख नहीं होती थी । पर अब हवाई चप्पल में हैसियत के पंख लग गए हैं। कल ही की तो बात है। दुकालू अपनी एकमात्र फटीचर हवाई चप्पल, जिसकी बद्दी…

इट कैन हैप्पन ओनली इन इंडिया

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फुल रीसेल वैल्यू।
फुल्ली रीसाइकल्ड प्रॉडक्ट।

मोदी भक्त बिल गेट्स और गूगल अंग्रेज़ी-हिंदी अनुवाद

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आप कहेंगे कि इनका क्या संबंध है? संबंध है भाई. पर, पहली बात. मोदी भक्तों में एक बड़ा नाम जुड़ा है. और कोई हवा हवाई नहीं. महान् बिल गेट्स. तमाम फैक्ट शीट और 360 डिग्री वर्चुअल रीयलिटी वीडियो सहित. आप उनका मूल ब्लॉग अंग्रेज़ी में यहाँ पढ़ सकते हैं. [ads-post] अब आगे. हाल ही में गूगल ने अपने मशीनी भाषाई अनुवाद तंत्र में अच्छा-खासा सुधार किया है. और यह वाकई बड़ा आश्चर्यकारी है. मैंने बिल गेट्स के पोस्ट को गूगल के नए अनुवाद तंत्र से हिंदी में अनुवादित किया और उसे जस का तस नीचे छापा है. आप मूल अंग्रेज़ी पढ़ें (शायद जरूरत भी नहीं है!) और नीचे अनुवाद पढ़ें. चमत्कारी. --- (बिल गेट्स के मूल अंग्रेज़ी ब्लॉग पोस्ट का गूगल मशीनी स्वचालित हिंदी अनुवाद - )भारत मानव अपशिष्ट पर इसका युद्ध जीत रहा है बिल गेट्स द्वारा | 25 अप्रैल, 2017 लगभग तीन साल पहले, भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य पर एक दमदार टिप्पणी की जिसमें मैंने कभी एक निर्वाचित अधिकारी से सुना है। आज भी इसका एक बड़ा प्रभाव रहा है। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता दिवस की स्मृति के दौरान अपने पहले भाषण के दौरान टि…

ओह, तो अब, बिल गेट्स भी 'भक्त'!

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बेचारे वामिए, और, बहुत - बहुत बेचारे आपिए!

वो तो ठीक है, पर, जनता इसका करेगी क्या?

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विंडोज वाली घड़ी। जब क्रैश होगी तब शायद समय थम सा जाएगा और बार बार थमेगा।

व्यंग्य जुगलबंदी–31 : लाल बत्ती में परकाया प्रवेश

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(चित्र – साभार – डॉ. अरविंद मिश्र का फ़ेसबुक पृष्ठ) परकाया प्रवेश विधा का उपयोग कर मैं एक वरिष्ठ आईएएस अफ़सर के शरीर में घुस गया था. बड़े दिनों से तमन्ना थी कि लाल-बत्ती वाली गाड़ी का आनंद लूं. परंतु ये क्या! इधर मैंने परकाया प्रवेश किया और उधर नोटबंदी की तरह लाल-बत्ती बंदी हो गई. मैंने सोचा, चलो, एक वरिष्ठ आईएएस के शरीर में प्रवेश किया है जो अब तक लाल-बत्ती वाली गाड़ी का आनंद उठाता फिरता था, उसके नए, गैर-लाल-बत्ती वाले अनुभव को एक दिन जी कर देख लिया जाए – “आज सुबह जब मैं उठा तो मुंह सूजा और आँखें फूली हुई थीं. मैंने मन में ही सोचा क्या शक्ल हो गई है एक वरिष्ठ अफसर की. पूरी रात करवटें बदलते गुजरी जो थीं. पूरी रात सपने में लाल-बत्ती वाली गाड़ियां अजीब अजीब शक्लों में, रूपाकारों में आती रहीं और डराती रही थीं तो नींद बार बार टूट जो जाती थी. जैसे लाल-बत्ती ने मुंह का पूरा नूर नोच लिया है लगता था. वैसे भी आज आफिस जाने का बिलकुल भी मन नहीं हो रहा था. जैसे तैसे आलस्य को त्यागकर तैयार होकर बाहर निकला, तो बिना लाल-बत्ती के अपनी सरकारी गाड़ी को देख कर दिल धक्क से हो गया और बुझ गया. लगा, जैसे…

याहू! थोड़ा सा सीख जा स्पैम फिल्टर करना!

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ऊपर जो स्क्रीनशॉट है वह याहू मेल में आया है। सभी लिंक यह बयान कर रहे हैं कि बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा है मगर याहू सो रहा है। इस ईमेल की भाषा ऐसी है कि कोई भी धोखा खा जाए।

नीचे का स्क्रीनशॉट भी कम नहीं है -


शायद इसीलिए याहू के बुरे दिन चल रहे हैं। 😕

तिरस्कृत, बहिष्कृत भगवान

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शायद ये भगवान अब किसी के धेले भर काम के नहीं!

द टिक टैक टो गॉड

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ईश्वर, तेरे रूप अनेक!

चलिए, बिना सिक्के के सिक्का उछालते हैं....

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टेक्नॉलजी की जय हो!
काल्पनिक सिक्के की असली उछाल 😀

ईवीएम में छेड़छाड़ के ये हैं पूरे सौ, आईआईटीयाना तरीके….

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ईवीएम से छेड़छाड़ के आपको कितने तरीके पता हैं?
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यदि आप एक आईआईटी इंजीनियर हैं तो शर्तिया आपको ये दस तरीके तो पता होंगे ही–

1. एक हथौड़ी लें, ईवीएम पर दन्न से दे मारें. बल्कि हथौड़ा ठीक रहेगा. वो भी लुहार वाला.

2. एक प्लायर लें, ईवीएम के बटनों को, फिर सर्किट को और अंत में प्रोसेसर व रोम को प्लायर की सहायता से क्रम से उखाड़ें. बेतरतीब से उखाड़ने में न तो ईवीएम को मजा आएगा न देखने वालों को.

3. ईवीएम के बैटरी कंपार्टमेंट को खोलें और उसमें सीधे 440 वोल्ट का करेंट दें. करेंट कैसे दें यदि नहीं पता तो आईआईटी में फिर से एडमीशन लें. इस बार सब्जैक्ट मेटलर्जी लें. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में करेंट कैसे देना यह नहीं सिखाया जाता. वैसे, सीखकर भी क्या हासिल होगा? थ्योरी और प्रैक्टिक में जमीन आसमान का अंतर होता है. आजकल करेंट वैसे भी फेज़ में नहीं आती, आती भी है तो बार बार जाती है जबकि न्यूट्रल और अर्थ में आती है तो फिर जाती नहीं. 

4. गैस बर्नर को चालू करें. सब्सिडी छोड़ी गई वाली गैस से छेड़छाड़ अच्छी होगी. हाँ, तो गैस जलाएँ, उस पर चाय की पतीली जिस तरह रखी जाती है उस तरह ईवीएम को…

लिनक्स (लाइनक्स) एंड्रॉयड युग्म जिंदाबाद!

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लिनक्स उपयोग करने का एक और ठोस कारण।
अब आप चलाएँ लाखों एंड्रॉयड ऐप्प अपने लिनक्स डेस्कटॉप या लैपटॉप में। और यह वर्चुअल मशीन जैसी व्यवस्था में नहीं बल्कि नेटिव यानी मूल रूप में चलते हैं।

अपने फ़ोन को ठीक से पकड़ने की आपको तमीज़ है भी या नहीं?

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व्यंग्य जुगलबंदी - सेल्फ़ीज़ फ्रॉम एनीमल एंड डेड वर्ल्ड

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सेल्फ़ियों का जमाना है. जित देखो तित सेल्फियाँ.
मैंने पेड़ पौधों, जानवरों और निर्जीव दुनिया में खींची जा रही सेल्फ़ियों पर कुछ शोध किया और मेरा चित्रमय शोधपत्रक आपके अवलोकनार्थ प्रस्तुत है-


गिरगिटिया सेल्फ़ी – शायद राजनेताओं ने इनसे सीख ले ली है. राजस्थान जाएंगे तो राजस्थानी पगड़ी पहन कर सेल्फ़ी, चेन्नई गए तो लुंगीदार सेल्फ़ी.


झूला सेल्फ़ी. ऐसी मनोरंजक राइड कि डिज्नीवर्ल्ड की 10जी राइडें भी पानी मांगे.


मंदिर इन मेकिंग सेल्फ़ी – ईश्वर ने मनुष्य को बनाया, अब मनुष्य ईश्वर को यत्र-तत्र-सर्वत्र बना रहा है. बनाए जा रहा है. यह एक सर्वथा नए ईश्वर की सगर्व, सर्वथा प्रथम सेल्फ़ी है.


वृक्ष सेल्फ़ी. किराए पर झाड़. जब इस नवीन दुनिया में किराए पर कोख मिल रही है तो फिर पेड़ों  को तो किराए पर चढ़ना ही था…


कटा झाड़ या गंदा नाला सेल्फ़ी? पाठकों के निर्णय पर…


निर्जीव, निर्लिप्त सेल्फ़ी. या फिर, काला और गेहुंआ सेल्फ़ी. जो भी हो, शर्तिया, नस्लवादी सेल्फ़ी.


एक नया शिकार सेल्फ़ी 1

एक नया शिकार  सेल्फ़ी 2. (वैसे तो यह अनटाइटल्ड सेल्फ़ी है, सेल्फ़ एक्सप्लेंड. पीरियड.)


मोहल्ला आईपीएल सेल्फ़ी. इस तरह के, बेहद …

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