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May, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आपने अपने कंप्यूटर को मानवाधिकार दिया है कि नहीं?

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आपके कंप्यूटर को भी अब चाहिए उसका अपना मानवाधिकार।

आप अपनी भावनाओं को छुपाते तो नहीं?

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आपके पास लेटेस्ट फोन नहीं है?

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यह तो, यकीनन बड़े शर्म की बात है।

गाय पूजकों, अब क्या कहते हो?

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देखा-देखी, अब जल्द ही काऊ, बकरा, टर्की मोबाइल आएंगे?

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अब निश्चिंत होकर जम के घी पियो!

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हर खलनायक के दिल में एक नर्म कोना होता है

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या फिर, साला ये धंधा बिल्कुल ही बकवास था, धेला भर का फायदा नहीं था!

पुर्तगाल जिंदाबाद!

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पर, पुर्तगाल आखिर है ही कितना बड़ा। फिर भी,।

ये हैं सबसे सरल, कभी न भूलने वाले पासवर्ड

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सोशल साइट लिंक्डइन के उपयोगकर्ताओं के पासवर्ड लीक हो गए.एक साइट पर शीर्ष पासवर्ड उपयोग के आंकड़े दिए गए हैं. ये हैं सबसे सरल, कभी न भूलने वाले पासवर्ड.इनमें से छांटकर आप भी उपयोग में ले सकते हैं, और फिर आप कभी न भूलेंगे. पर हाँ, अपने खाते में उतनी ही आसानी से हैकिंग के लिए भी तैयार रहें

क़सम से, आज तक मैंने एक भी सेल्फी नहीं ली है!

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क्या आप भी टेक्नॉलजी पर आंख मूंद कर भरोसा करते हैं?

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तेरा धियान किधर है?

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मेरा स्मार्टफ़ोन जिधर है।

क्रोमकास्ट ऑडियो को विंडोज़ से कैसे चलाएँ?

एंड्रायड से क्रोमकास्ट धुंआधार चलता है, कोई समस्या नहीं. परंतु मामला विंडोज़ पर अटक जाता है. खासकर विंडोज डेस्कटॉप कंप्यूटर पर. यहाँ क्रोम ब्राउज़र से आप टैब को कास्ट कर सकते हैं, परंतु यदि आपको कोई प्लेलिस्ट प्ले करनी हो या कई मीडिया फ़ाइलें प्लेलिस्ट में जोड़नी हों तो समस्या आती है. कुछ क्रोमकास्ट एक्सटेंशन तो हैं, परंतु यदि आप विनएम्प जैसे एमपी3 प्लेयर के ऑडियो को क्रोमकास्ट में स्ट्रीम करना चाहें तो? इससे पता चलता है कि विंडोज हर मामले में एंड्रायड से पिछड़ क्यों रहा है, और कुछ वर्षों में विंडोज का कोई नामलेवा क्यों नहीं रहेगा यह भी तयशुदा है - विडोज़ में नवाचार का पूरा अभाव है. नई टेक्नोलॉज़ी का समर्थन इसमें उस तेजी से नहीं मिल रहा है जिस तेजी से एंड्रायड में मिल रहा है. एंड्रायड वैसे भी फुल डेस्कटॉप कंप्यूटर की शक्ति दिखाने की ओर अग्रसर है.बहुत खोजबीन करने के बाद एक उपाय यहाँ दिखा -http://lifehacker.com/how-to-send-your-computers-audio-to-a-chromecast-1750297581उपाय सरल है, एक एप्लिकेशन है क्रोमकास्ट ऑडियो स्ट्रीम. डाउनलोड कर फ़ाइल एक्सट्रैक्ट करें, एप्लीकेशन ऑ़डियोकास्ट.ईएक्सई …

फ़ेसबुक में कैसे खोजें

फ़ेसबुक दैत्याकार है, और यह कुछ कुछ ब्लैक होल की तरह है. आज जो दिख रहा है, कल गायब और ऐसा कि नजर ही न आए.साथ ही, इसका इंटरफ़ेस और शैली इस तरह नित्य परिवर्तित होती रहती है (शायद नित्य डेवलपमेंट साइकल के कारण) कि खोज बीन करना मुश्किल प्रतीत होता है, और बहुधा सर्च बॉक्स या सर्च आइकन ही पेज से गायब मिलता है.ऐसे में फ़ेसबुक में सर्च कर सामग्री कैसे खोजेंवैसे, फ़ेसबुक में खोजना बेहद आसान है, भले ही सामग्री की प्रचुरता के कारण सार्थक सार सामग्री प्राप्त करना भले ही खासा मुश्लिक हो. फिर भी, जो सामग्री खोजना है, उसे निम्न तरीके से खोजें तो बहुत कुछ वाजिब परिणाम मिल सकते हैं.  जो इनपुट हिंदी में उदाहरण के रूप में दिए गए हैं, उन्हें बदलना न भूलें.फ़ेसबुक सर्चसामान्य सर्च -
https://www.facebook.com/search/results.php?q=अनूप+शुक्ल&init=publicसबकुछ में से खोजें -
https://www.facebook.com/search/all/?q=कहानीव्यक्ति खोजें -
https://www.facebook.com/search/people/?q=अनूप+शुक्लपेज खोजें -
https://www.facebook.com/search/pages/?q=रचनाकारस्थान खोजें -
https://www.facebook.com/search/places/?q=भोपालसमूह खो…

आइए, आज थोड़ा और धार्मिक हो जाएं :)

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आ गया! नेताओं का झूठ पहली नजर में पकड़ने का यंत्र!

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अब तो खूब खाओ पिओ और मस्त रहो!

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ओ तेरी! तो क्या अब नेता जाति और धर्म विहीन होंगे?

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उम्मीद तो कर ही सकते हैं। आशा में ही आकाश टंगा है।

आ गया! सड़ियल चुटकुलों को 1000 बार फारवर्ड मारने का औजार

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आपके डेस्कटॉप पर आ गया!

वही तो! चौर्य कर्म तो मेरे जीन में है

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जिसका जिम्मेदार मैं भला कैसे हो सकता हूँ!

एक चेहरे पे कई परतें लगा लेते हैं लोग

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अब, अपने फेसबुक स्टेटस की खुश्बू जानें

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और इसे कितने लाईक मिलेंगे यह जानें

सोशल मीडिया में देवनागरी में धड़ल्ले से कैसे लिखें?

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सोशल मीडिया के निर्विवाद बादशाह - फ़ेसबुक ने हाल ही में बड़े गर्व से घोषणा की कि अब आप फ़ेसबुक में आसानी से हिंदी – माने देवनागरी में लिख सकते हैं. इसके लिए उसने एक औजार भी प्रस्तुत किया जो फ़ेसबुक उपयोगकर्ता के सामने इनपुट बक्से में वैकल्पिक रूप से उपलब्ध रहेगा. यह औजार है रोमन फ़ोनेटिक देवनागरी टाइपिंग – जिसका लब्बोलुआब ये हुआ कि आपको राम लिखने के लिए ram कुंजी दबाना होगा. वैसे, यदि आप थोड़ी नजदीकी दृष्टि डालेंगे तो आप पाएंगे कि कोई भी सोशल मीडिया हो – चाहे फ़ेसबुक, ब्लॉग, ट्विटर या वाट्सएप्प – हिंदी सामग्री भरपूर उपयोग में ली जा रही है – मगर उसमें देवनागरी हिंदी की मात्रा अभी भी बहुत कम है – लोगबाग अभी भी रोमन हिंदी में ही काम चला ले रहे हैं, जो बेहद अजीब बात है. और, शायद इसी बात को ताड़कर, भले ही अब उतनी जरूरत नहीं रह गई हो, फिर भी, फ़ेसबुक ने अपना नया देवनागरी टाइपिंग टूल प्रस्तुत किया. अब जब सब तरफ चहुँओर – कंप्यूटरों से लेकर मोबाइल फ़ोनों – सभी में देवनागरी टाइप करने की उन्नत सुविधाएँ उपलब्ध हो गई हैं, तो हिंदी जनता को जवाब देना ही चाहिए कि वो क्यों अभी तक रोमन हिंदी में चिपकी …

हमें खूब पता है कि आप जानबूझकर क्यों भूल जाते हैं!

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अब आपकी चाल नहीं चलेगी!

निर्विवादित रूप से मानव जाति के लिए अब तक का सबसे बड़ा उपहार!

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धोने पोंछने और सुखाने में बचने वाले हजारों श्रम घंटे का फायदा अलग से!

अलबत्ता, सीयम साहब पड़ सकते हैं बेकार डिग्री के फेर में!

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चिट्टिया, टेस्टी कलाईयां वे...

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नेल पॉलिश लगा के, और भी नमकीन हो गई हो हो हो...

ये ल्यौ! इधर की गंगा तो उल्टी बह रही है!

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वैसे, सच कहूँ तो एंड्रॉयड और लिनक्स में मैंने भी कभी एंटी वायरस अब तक उपयोग नहीं किया है।

क्या आप लोकप्रिय हैं?

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वो भी अपनी असल जिंदगी में?



तो फिर, फेसबुक से जरा दूरी बना के ही रखना!

जाने क्यों मन मेरा अब मंदिर में रमने लगा है

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तो ये बात है पुत्तर, मंदिर में फ्री वाई-फाई मिलने लगा है!

लाल नीले पीले हरे काले तरबूज़

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जीएम की जय हो!
ये पीला तरबूज़ पहली बार देखा।
कस्टमाइजेशन का विकल्प मिले तो चटख बैंगनी रंग का तरबूज़ खाना चाहूँगा, अब स्वाद भले ही उन्नीसा हो।

बढ़ावा & क्लीनर क्या है?

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कोई बताएगा जरा?
मामला अनुवाद में खो जाने (लास्ट इन ट्रांसलेशन) का लगता है।
वैसे ये स्क्रीनशॉट विज्ञापन के रूप में जबरिया दिखने में आ रहा है जिस पर भरोसा न ही करें तो बेहतर।

जाने क्यों रो पड़ा

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हंसते बोलते जाने क्यों रो पड़ा
चोट खाई नहीं फिर भी रो पड़ा

लोग सब अपनों को ही देखते हैं
वो तो दूसरों के हाल पर रो पड़ा

ऐसी कौन-सी चूक हो गई हमसे
लोग समझे खुशी के मारे रो पड़ा

शायद जीवन का डिफ़ॉल्ट है ये
आदमी यहाँ आया और रो पड़ा

ये तो महज समझ का फेर है रवि
जिस पर ठहाके लगे वो रो पड़ा

हमें भी चाहिए एक अदद नेतारबॉक्स!

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लीजिए सुनिए! वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कैटरबॉक्स बना लिया है जिसे बिल्लियों के गले में टांगने के बाद उसके मुँह से निकली हुई मियाँऊँ को मनुष्य (के समझने ) की आवाज में रूपांतरित किया जा सकता है।
अब, आपको नहीं लगता है कि हमारे नेताओं के श्रीमुख से निकलने वाले उवाचों के सही सही अर्थों के लिए नेतारबॉक्स बनाना चाहिए? फिर ये समस्या नहीं होगी कि उन्हें संदर्भ से बाहर समझा गया या उन्हें गलत उद्धृत किया गया।

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