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December, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

फेसबुक उपयोग करने के फायदे

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क्या सही मायने में आपको कुछ फायदा हुआ भी है?

आकाशीय चित्रकारी

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कल भोपाल शहर में (संभवतः अन्य शहरों में भी दिखा होगा) अद्भुत नजारा दिखा. अंतर्राष्ट्रीय उड़ान की जेट प्लेनें ऊपर आकाश में अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर उड़ते हुए गुजरीं तो अद्भुत पेंटिंग की तरह नजारा बन गया. पहले एक दो, फिर तो सिलसिला चल पड़ा और आकाशीय केनवस पर लगा कि किसी नटखट बच्चे ने आड़ी तिरछी रेखाओं के जरिए नीले कैनवस पर सफेद तूलिका से रंग बिखेर दिए हों.

स्मार्टफ़ोन की स्मार्ट समस्याएँ

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हाल ही में, दुनिया को देखते हुए और उसके पीछे चलते हुए, मैंने भी अपना स्मार्टफ़ोन अपग्रेड कर लिया. और इस तरह एप्पल, सेमसुंग और एलजी आदि आदि कंपनियों को घाटे से उबारने में मैंने भी अपना थोड़ा सा योगदान दे दिया. मगर समस्या यह नहीं थी कि मेरा योगदान कितना क्या रहा. समस्या कुछ दूसरे किस्म की रही. अब आपका फ़ोन जब स्मार्ट हो गया है तो समस्या को भी स्मार्ट होना चाहिए कि नहीं! मेरा पुराना डेटा, कॉन्टैक्ट, हजारों-लाखों की संख्या में बारंबार ठेले गए वाट्सएप्प चुटकुले और चित्र और वीडियो आदि आदि तो मेरे पुराने फ़ोन से आराम से नए फ़ोन में आ गए. इसमें मुझे कहीं कोई समस्या नहीं आई. नया फ़ोन वाकई स्मार्ट है. परंतु इसका इंटरफ़ेस पुराने से कुछ जुदा है कुछ अलग सा है. ठीक है, वो भी झेल लेंगे कोई बात नहीं. प्ल्टेफ़ॉर्म एक ही (एंड्रायड) होने से कोई ज्यादा समस्या भी नहीं. पर, जल्द ही समस्याएँ सामने आने लगीं. स्मार्टफ़ोन जनित स्मार्ट समस्याएँ. मेरे नए स्मार्टफ़ोन में एक अदद अतिरिक्त सेंसर लगा है. फिंगर प्रिंट सेंसर तो खैर लगा ही है जिससे कि अब लॉगइन करने के लिए न पिन डालना पड़ता है न कोई निशान खींचना पड़ता है…

दुनिया में कहीं नहीं मिलती फोकट की दारू, क्या सही में फ्री है फ़ेसबुक फ्रीबेसिक्स?

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फ़ेसबुक का फ्रीबेसिक्स का भ्रामक गोयबल्सिया अभियान जारी है.  आज भी अखबारों में पूरे दो पन्नों का विज्ञापन है. फ़ेसबुक के पास इफरात पैसा होने का यह दो पेजिया विज्ञापन सबूत है, और इस पैसे के दम पर लोगों को गुमराह करने की नाकाम कोशिश है. बड़ी ही सफाई से कॉपी राइटरों ने नैटन्यूट्रैलिटी का तोड़ डिजिटल इक्वैलिटी निकाला है. मगर फ़ोकट में फ़ेसबुक (और बंडल में एक दो और साइटें दे ) दे देने मात्र से क्या डिजिटल इक्वैलिटी मिल जाएगी? वॉट्स्एप्प में पिली पड़ी भारतीय जनता क्या इतनी बेवकूफ़ है? शायद नहीं!।व्यंज़लइंटरनेट के मैदान पर एक और सिक्स
लगाने की चाल है फ़ेसबुक फ्रीबेसिक्सनैटन्यूट्रैलिटी का हमें क्या करना है
जब मुफ़्त में है फ़ेसबुक फ्रीबेसिक्सदुनिया अब जल्द भूल जाएगी गूगल
इंटरनेट का मतलब फ़ेसबुक फ्रीबेसिक्सदुनिया में नहीं मिलती फोकट की दारू
क्या सही में फ्री है फेसबुक फ्रीबेसिक्सयाहू से चला था रवि गूगल पे आया
खत्म करेगा सफर फेसबुक फ्रीबेसिक्स

इंटरनेट मतलब फ्री-बेसिक्स!

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फ़ेसबुक का और अधिक कमाई करने का महा विज्ञापन अभियान जारी है. आज तो मामला हाईप्रोफ़ाइल एनबीए (नर्मदा-बचाओ-आंदोलन) की तरह नजर आ रहा है.
फ़ेसबुक का भारतीय जनता को बेवकूफ़ बनाने (समझने?) और  नेटन्यूट्रैलिटी कार्यकर्ताओं का छीछालेदर करने का नया अभियान है ये -

फ़ेसबुक के मुफ़्त इंटरनेट के झांसे में न आएँ, कृपया!

और ज्यादा डिजिटल कमाई की ओर फ़ेसबुकिया पहला कदम…

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आखिर भारत की जनसंख्या के कुछ मायने भी तो हैं!

म्यूजिक्समैच : गानें सुनें ही नहीं, गाने पढ़ें भी - वो भी हिंदी में!

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अंग्रेज़ी गानों के लिए लिरिक यानी गीतों के बोल पढ़ने की सुविधा तो बहुत पहले से है. परंतु हिंदी में, वो भी देवनागरी में किसी प्लेयर में गीत सुनते सुनते गीत पढ़ने की सुविधा जरा कम ही मिलती है. अचानक ही मुझे एक ऐप्प मिला - म्यूजिक्समैच (गूगल प्ले स्टोर पर सर्च करें - musixmatch) यह हिंदी देवनागरी में तथा हिंदी रोमन में हिंदी गानों के बोलों को रीयल टाइम में दिखाता चलता है. तमाम लोकप्रिय गीतों के बोल यह इंटरनेट से ढूंढ-ढांढ कर आपको दिखाता है. बहुत से स्वयंसेवी लोगों ने तथा गीत-संगीत प्रेमियों ने विभिन्न डेटाबेसों में हिंदी गानों के बोलों को इंटरनेट पर अपलोड कर रखा है. यह ऐप्प, आपके स्मार्टफ़ोन पर बज रहे गाने को पहचान कर, वहीं से गीतों के बोल उठाता है, औ आपको दिखाता है (यदि डेटाबेस में आपका गीत मिल गया तो) जरा नीचे देखें - इसकी खूबी यह है कि यह एक म्यूजिक प्लेयर तो है ही, गीतों के बोल दिखाने के लिए आपके दूसरे संगीत प्लेयर के साथ भी काम कर सकता है.



स्कार्प लेजर रेजर - सदियों पुराने रेजर ब्लेड से छुटकारा

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वह भी एक झटके में ! अब हमें अपने सदियों पुराने रेजर ब्लेड से छुटकारा मिल जाएगा। क्योंकि अब एकदम नई टेक्नॉलजी का लेजर रेजर ब्लेड आ गया है। जिसमें  आपको मिलेगा बेहतरीन  क्लोज शेव वह भी बिना पानी साबुन के। ऊपर से कट लगने का डर भी नहीं।  कब खरीद रहे हैं इसे आप? 

इट कैन हैप्पन ओनली इन इंडिया

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इट  हैप्पन्स ओनली इन इंडिया!

डॉल्बी ऑडियो अब आपके ब्राउज़र में!

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यदि आप गीत-संगीत के दीवाने हैं, तो डॉल्बी को जानते होंगे. और अच्छी तरह से.

अभी तक तो मैं समझता रहा था कि डॉल्बी ऑडियो के लिए न्यूनतम हार्डवेयर आवश्यकताएँ होंगी ही, कोई खास चिप या सर्किटरी होती ही होगी.
परंतु टेक्नोलॉज़ी जो न कर दें कम है!

अब आपके विंडोज 10 पीसी पर डॉल्बी डिजिटल और डॉल्बी डिजिटल प्लस दोनों ही माइक्रोसॉफ़्ट एज ब्राउज़र के जरिए उपलब्ध होंगे - सॉफ़्टवेयर के जरिए.

ओह आह वाह! क्या बात है! आज ही एक स्टीकर ले आते हैं - अपने पुराने जमाने के पीसी के लिए जिस पर अभी ही हमने एज ब्राउजर चढ़ाया है - डॉल्बी डिजिटल प्लस का! क्योंकि हमारा पीसी भी अब हो गया है डॉल्बी डिजिटल युक्त. अब महंगे संगीत प्लेयरों का क्या काम जब हमारा पीसी ही डॉल्बी डिजिटल युक्त है!


विंडोज़ लाइव राइटर की मौत और ओपन लाइव राइटर का जन्म

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खांटी ब्लॉगरों को विंडोज लाइव राइटर का नाम न केवल मालूम होगा, बल्कि वे इसकी उपयोगिता से वाकिफ भी होंगे.
मेरे लिए यह औजार जीमेल से भी बढ़कर था, और अब तक नित्य उपयोग में आता था. मेरी ब्लॉगिंग की उत्पादकता को श्रेय यदि दिया जाए, तो उसमें बड़ा हाथ विंडोज लाइव राइटर का भी होगा.

परंतु अब विंडोज लाइव राइटर की मौत हो गई है. कम से कम मेरे लिए.
बहुत तकनीकी तो नहीं, परंतु मोटे तौर पर जो बात समझ में आई है वो यह है कि माइक्रोसॉफ़्ट ने इस 10 साल पुरानी तकनीक को डेवलप करना बंद कर दिया था और यह केवल ऑक्सीजन के सहारे चल रही थी. इधर गूगल ब्लॉगर ने नई ऑथेंटिकेशन और लॉगिन तकनीक 2 निकाली है, जिसका समर्थन विंडोज लाइव राइटर में नहीं है.

यानी मेरे लिए अब विंडोज़ लाइव राइटर की मौत हो चुकी है. 11 दिसम्बर से यह काम करना भी बंद कर चुका है. शायद भविष्य में कोई काम न आए. रेस्ट इन पीस विंडोज लाइव राइटर - WLW जैसा कि लोगबाग प्यार से संक्षिप्त में कहते थे.
परंतु जीवन चक्र चलता रहता है. पुनर्जन्म की अवधारणा के सहारे.
जब विंडोज़ लाइव राइटर के विकल्पों की खोज हुई तो सामने आया - ओपन लाइव राइटर.
वस्तुतः यह विंडोज़ लाइव राइ…

डिफ़ीट टेक्नोलॉज़ी तो हम भारतीयों के जीन में है

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फ़ॉक्सवैगन (या वॉक्सवैगन?) कारों में प्रदूषण का स्तर वास्तविक से कम दिखाने के लिए डिफ़ीट टेक्नोलॉज़ी (चीटिंग या मूर्ख बनाने वाली भी कह सकते हैं) का प्रयोग करने को लेकर उसकी दुनिया भर में थू-थू हो रही है. फ़ॉक्सवैगन को न केवल सफाई देनी पड़ रही है, दुनिया-भर से इस तरह की कारों को वापस बुला कर उन्हें ठीक करने का काम भी कर रही है. इस वजह से न केवल फ़ॉक्सवैगन, बल्कि जर्मनी में स्थित, विश्व की सबसे बड़ी कार निर्माताओं में से एक होने के कारण जर्मनी की अर्थव्यवस्था को झटका लगा है.

मगर यह डिफ़ीट टैक्नोलॉज़ी तो बाई डिफ़ॉल्ट हम भारतीयों के जीन में होता है. इसलिए फ़ॉक्सवैगन की इस डिफ़ीट या चीटिंग टेक्नोलॉज़ी का न केवल स्वागत किया जाना चाहिए, बल्कि उच्चतम टेक्नोलॉज़ी का कोई पुरस्कार भी देना चाहिए जो किसी नोबल-फोबल से कम कतई न हो. क्या गजब की, उन्नत टेक्नोलॉज़ी लगाई थी उन्होंने. जब कारों को दौड़ाया जाता था तब डीजल इंजन धुँए-प्रदूषण की चिंता किए बगैर कार को पूरी शक्ति प्रदान करता था, जिससे चालकों को गाड़ी भगाने में असली आनंद आता था. परंतु जैसे ही इस कार की प्रदूषण जांच की जाती थी, इसकी उन्नत टेक्नो…

बस इंक्रीमेंट? मलाईदार पोस्ट क्यों नहीं!

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वी वांट बेस्ट आफ बोथ वर्ल्ड!

मोर एंड मोर जजेस आर गोइंग बीइंग ह्यूमन...

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जरा दूसरे विभागों की जानकारी भी तो रखिए माननीय मंत्री महोदय

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बुरा हो तेरा इंटरनेट, तूने मुझे बहुत बुद्धिहीन बनाया!

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मुक्त स्रोत सॉफ़्टवेयरों के अच्छे दिन तो समझो आ ही गए!

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भारत सरकार ने सरकारी कार्यालयों में मुक्त स्रोत (ओपन सोर्स) सॉफ़्टवेयरों का उपयोग अनिवार्य कर दिया है.कोई तेरह वर्ष पहले, मुक्त स्रोत का लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम तथा ऐप्लिकेशन सूट हमने इंडलिनक्स परियोजना के तहत हिंदी भाषा (तथा अन्य भारतीय भाषाओं में) जारी किया था. भागीरथी प्रयास किए थे, जुनून की हद तक जाकर कार्य किये थे, परंतु कोई लेवाल नहीं था - मुफ़्त में भी!कम से कम अब उस ओर लोगों की निगाहें तो पड़ेंगी ही.भारत की केंद्रीय सरकार को साधुवाद, जिसने यह बहु प्रतीक्षित, कड़ा, विवेकपूर्ण निर्णय लिया - आप समझ सकते हैं - प्रोप्राइटरी सॉफ़्टवेयर विक्रेताओं की दशकों पुरानी पैठ व लॉबीइंग को धता बता कर यह निर्णय लिया गया है, जो निश्चय ही स्वागत योग्य है. आप समझ सकते हैं कि प्रोप्राइटरी सॉफ़्टवेयर विक्रेताओं के लिए केंद्र सरकार कितनी असहिष्णु हो गई है!केंद्र सरकार को एक और काम तुरंत करना चाहिए. सीडैक जिस्ट के तमाम उत्पादों को मुक्त स्रोत में तत्काल जारी करना चाहिए. जनता के पैसे से बने उत्पादों का विक्रय किया जाता है जो किसी सूरत उचित नहीं है. सीडैक के उत्पादों के डाउनलोड के लिए बाबूगिरी किस्म की व…

डीजे वाले बाबू मेरा गाना बजा दे...

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गाना बजा दे... गाना बजा दे...

विशाल लाइब्रेरी में से पढ़ें >

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