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September, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सुंदर पिचई - ज्यादा से ज्यादा भारतीयों को इंटरनेट से जोड़ने की एक पहल - 1 करोड़ रेल यात्रियों प्रतिदिन से शुरुआत

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ज्यादा से ज्यादा भारतियों को इंटरनेट से जोड़ने की एक पहल - 1 करोड़ रेल यात्रियों प्रतिदिन से शुरुआत
जब मैं एक छात्र था, मैं चेन्नई सेंट्रल स्टेशन (तब मद्रास सेंट्रल के रूप में जाना जाता था) से आईआईटी खड़गपुर की दिन की रेल यात्रापसंद करता था । मुझे विभिन्न स्टेशनों पर उन्मत्त ऊर्जा की याद आज भी ताजा है और मैं भारतीय रेल के अविश्वसनीय स्तर और विस्तार पर अचम्भा करता था । आज गूगलप्लेक्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुझे यह घोषणा करते हुए बहुत गर्व हो रहा है कि ये भारत के रेलवे स्टेशन हैं जो करोड़ों लोगों को ऑनलाइन लाने में मदद करेंगे । पिछले साल, भारत में 10 करोड़ लोगों ने पहली बार इंटरनेट उपयोग शुरू किया है । इसका मतलब यह है कि भारत में अब चीन को छोड़ कर हर देश से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं । पर चौंकाने वाली बात ये है की भारत में अभी भी 100 करोड़ से ज़्यादा लोग ऑनलाइन नहीं हैं ।
हम इन 100 करोड़ भारतवासियों को ऑनलाइन लाने में मदद करना चाहते हैं - ताकि उन्हें पूरे वेब तक पहुँच मिल सके, और वहां मौजूद जानकारी और अवसर भी । और किसी पुराने कनेक्शन से नहीं - तेज़ ब्रॉडबैंड से ताकि वे वेब का सबसे अच्छा …

नेट न्युट्रिलिटी, फ़ेसबुक और तिरंगी तस्वीर

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आशीष श्रीवास्तवपिछले कुछ दिनों से इस पर फ़ेसबुक पर बहस चल रही है। विद्वान अपने अपने तर्क दे रहे हैं, ज्ञान बांट रहे हैं। कुछ तर्क/कुतर्क मजेदार लगे, कुछ थोथा चना बाजे घना वाले भी थे। कुछ लोगों ने नेट न्युट्रिलिटी को "Survival of Fittest" से भी जोड़ दिया, कहने लगे कि नेट न्युट्रिलिटी संभव नहीं है, जो बेहतर है वही बचेगा। जाहिर है अधिकतर लोगों को नेट न्युट्रिलिटी का अर्थ ही नहीं पता। नेट-बाबा आशीष जी महाराज को भी प्रवचन का मौका मिला: सबसे पहले कुछ शब्दों से परिचय करते हैं -   1. इंटरनेट सेवा प्रदाता (Internet Service Provider-ISP) - अर्थात वह कंपनी जो आपको इंटरनेट सेवा प्रदान कर रही है। यह सेवा आपको मोबाईल सेवा के द्वारा, केबल के द्वारा या लैंडलाईन के द्वारा हो सकती है।
उदाहरण :
मोबाईल इंटरनेट सेवा प्रदाता : एअरटेल, आइडीया, रिलायंस,
केबल इंटरनेट सेवा प्रदाता : हैथवे, एअरटेल ब्राडबैंड, तिकोना, रैपीडलिंक 2. इंटरनेट आधारित सेवा : वह सेवा जो आपको इंटरनेट पर उपलब्ध है, इन सेवाओ का किसी विशिष्ट ISP से कोई सीधा संबंध नहीं होता है। ये सेवायें निशुल्क या सशुल्क हो सकती है। इसके उदाहरण है, …

जितनी बड़ी गाड़ियाँ, उतनी बड़ी - उतनी महंगी चीटिंग

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कल तक जो शान से ऑडी चलाता घूमता था, वो आज डीज़ल के धुँए में मुंह काला किए घूम रहा है. बेचारा!

जाने क्यों, न्याय देने में हमको डर लगता है जी...

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ये निहत्था क़ानून है!

अपने मोबाइल को बनाएँ अपना हिंदी ओसीआर

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कुछ ही समय की देर है. यह सिद्ध हो गया है. आपका सारा का सारा कंप्यूटिंग कार्य अब मोबाइल फ़ोनों से ही होने लगेगा.ताज़ा उदाहरण है - हिंदी ओसीआर.हिंदी ओसीआर के लिए आउट-ऑफ़-द-बॉक्स सुविधा पीसी कंप्यूटरों के लिए गिनती के एक दो ही हैं. एक है इंडसैंज का हिंदी ओसीआर, तथा दूसरा टैसरेक्ट आधारित ओपन-सोर्स का बहुभाषी ओसीआर, जिसे हिंदी में काम करने के लिए बहुत सी सेटिंग अलग से करनी होती है.परंतु यदि आप मोबाइलों में देखेंगे, तो आश्चर्यचकित रह जाएंगे.लोकप्रिय एंड्रायड प्लेटफ़ॉर्म में गूगल प्ले स्टोर में हिंदी ओसीआर (hindi ocr) से खोज देखें.कोई आधा दर्जन ओसीआर मिल जाएंगे, जिनमें आप केवल हिंदी भाषा का पैक अतिरिक्त डाउनलोड कर उसमें सीधे-सीधे काम कर सकते हैं. आपके मोबाइल में चूंकि अंतर्निर्मित कैमरा होता है, अतः आप किसी छपे हुए हिंदी पाठ को अपने मोबाइल के कैमरे से स्कैन कर सीधे ही ओसीआर कर सकते हैं. अलबत्ता पहले से खींचे गए हिंदी पाठ के चित्र पर भी काम करने का विकल्प उपलब्ध होता है. जबकि यही सुविधा हासिल करने के लिए आपको अपने डेस्कटॉप कंप्यूटर में अलग से एक अदद स्कैनर की आवश्यकता पड़ती है.ठीक इसी तरह, यह…

क्या आपने फ़ेसबुक में किसी को अनफ्रेंड या ब्लॉक किया है?

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यदि हाँ, तो आपको थोड़ा-बहुत अपराध बोध तो हुआ ही होगा. मगर, ठहरिए, भाई साहब, बहन जी, वस्तुतः आपने अपराध ही किया है! गंभीर अपराध.और, अब आइंदा किसी को अनफ्रेंड या ब्लॉक करने से पहले दोबारा सोच लेना!!बड़े चले थे मुझे अनफ्रेंड करने!

सरकार, अब तक तो मैंने फ़ेसबुक पर भरपूर लाइक पाया है...

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... ले, अब भर भर के डिसलाइक पा!!!

नया स्पेलगुरू - अब हिंदी वर्तनी जाँचें कृतिदेव, चाणक्य अथवा यूनिकोड सामग्री में, बोनस में फ़ॉन्ट कन्वर्टर भी!

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स्पेलगुरू के पूर्व के एक संस्करण का रीव्यू मैंने यहाँ लिखा था.अब इसका नया संस्करण कृतिदेव, चाणक्य अथवा यूनिकोड - किसी भी फ़ॉन्ट में लिखी सामग्री की वर्तनी जांच सकता है. साथ ही इनमें किसी भी फ़ॉन्ट में आपसी त्वरित कन्वर्शन भी कर सकता है.इसका वर्तनी जांच का सिस्टम भी बहुत ही अलग और शानदार है.गलत वर्तनी के प्रारंभ, मध्य और अंत में क्लिक या दायाँ क्लिक करने पर कई तरह के विकल्प मिलते हैं.इसका शब्द भंडार विशाल है, और एमएस वर्ड तथा गूगल डॉक्स के वर्तनी जाँच से भी हर मामले में बेहतर है.स्पेलगुरू की साइट http://bhashagiri.com  से आप अन्य जानकारी ले सकते हैं.

भारत में अपनी मातृभाषा हिंदी क्या सदैव ऐच्छिक ही बनी रहने को अभिशप्त है?

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हिंदी पखवाड़े में विश्व हिंदी दिवस और विश्व हिंदी सम्मेलन धूमधाम से सम्पन्न हो गया, और इधर, चहुँओर अंग्रेज़ी का साम्राज्य और अधिक तेजी से पसरने लगा. हालात अब हिंदी को हिंग्लिश और रोहिंदी (रोमनहिंदी) की ओर धकेल रहे हैं. एक ताज़ा उदाहरण - एक सच्चा योगी सन्यासी, जो सदा सर्वदा से स्वदेशी की वकालत करता रहा है, उसकी कंपनी ने जब स्वदेशी उत्पाद निकाले, तो उत्पादनों के विज्ञापन देते समय विज्ञापन एजेंसी ने स्वदेशी की हवा निकाल दी और सच्चा योगी सन्यासी को विदेशी घोषित कर दिया - वर्ल्ड क्लास क्वालिटी, लो प्राइस एंड 100% चेरिटी फ्रोम प्रोफिट्स।ऐसी दिव्य भाषा एक सच्चा स्वदेशी प्रेमी ही तो लिख सकता है! जाहिर है, हिंदी मर रही है और जो कुछ बची खुची रहेगी, वो रहेगी हिंग्लिश या रोहिंदी! मगर, अगर यह, और ऐसा, हो रहा है तो आखिर क्यों और कैसे? मुझे याद है, जब हम माध्यमिक स्कूल में पढ़ते थे तब अंग्रेज़ी हटाओ का नारा हमारे हिंदी प्रदेश - मध्य प्रदेश में भी आया था. तब, त्रिभाषा फार्मूले के तहत, अंग्रेज़ी माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा में अनिवार्य थी. तो सरकार ने अंग्रेज़ी की अनिवार्यता हटा दी. हमने जमकर ख…

टेक्नोलॉजी से सुलझती समस्याएं

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(आज के दैनिक भास्कर में प्रीतीश नंदी का टेक्नोलॉज़ी पर एक बढ़िया आलेख आया है. इसे साभार यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है. मूल आलेख आप यहाँ -http://www.bhaskar.com/news/ABH-pritish-nandi-in-dainik-bhaskar-5115634-NOR.html पढ़ सकते हैं)आज के तकनीकी विशेषज्ञों की सबसे अच्छी बात यह है कि वे हमारी कुछ सबसे पुरानी समस्याए सुलझा रहे हैं। ऐसी समस्याएं, जो कोई कभी सुलझाना ही नहीं चाहता था, क्योंकि मुनाफा यथास्थिति में ही था, इसलिए कोई नहीं चाहता था कि ये दूर हों। हर कोई इससे पैसे कमा रहा था। फिर तकनीक के विशेषज्ञ आए और उन्होंने सारा खेल बिगाड़ दिया। आइए कुछ उदाहरण देखते हैं : टैक्सी एप ने वह कर दिखाया है, जो कोई सरकार अब तक नहीं कर सकी थी। वे सड़कों पर निजी कारों की संख्या घटा रहे हैं और हमें सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। अब लोगों और कंपनियों को ज्यादा कारें खरीदने की जरूरत नहीं है। आप बेहतरीन ड्राइव पर जाना चाहते हैं? टैक्सी एप आपके दरवाजे पर बीएमडब्ल्यू एक्स 5 खड़ी कर देगा। आपको किफायती ड्राइव सु‌विधाजनक लगती है? आपका एप ऑटो को वहां बुला देगा, जहां आप मौजूद हैं। य…

मोबाइल आधारित हिंदी का नया सोशल नेटवर्क मूषक : #बोलेगा_भारत - हिंदी में!

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वह दिन दूर नहीं जब हर भारतीय के हाथ में एक अदद स्मार्टफ़ोन होगा.ऐसे में वह दूसरों से सोशल मीडिया - जैसे कि फ़ेसबुक, ट्विटर आदि के जरिए ही जुड़ा रहेगा और यह प्रत्यक्ष है, चूंकि इन सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के उपयोगकर्ताओं की संख्या दिन दूनी बढ़ती ही जा रही है, जिसमें अधिकांश उपयोगकर्ता भारत जैसे जनसंख्या संपन्न देशों से हैं. क्या हमें ट्विटर जैसे सोशल मीडिया का भारतीय विकल्प नहीं मिल सकता? बिलकुल मिल सकता है. http://मूषक.भारत (http://mooshak.in) के अनुराग गौड़ का न केवल यह मानना है, बल्कि वे तो आपके लिए खास - एंड्रायड स्मार्टफ़ोन के लिए  - ट्विटर जैसा सामाजिक नेटवर्क ऐप्प लेकर आए हैं जिसके जरिए आप कुछ कुछ वाट्स ऐप्प की तरह और बहुत कुछ ट्विटर की तरह आपसी संवाद कर सकते हैं. आपसी संवाद में आसानी और अपने विशिष्ट हिंदी मय फ़ीचरों के कारण मूषक ऐप्प तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और हजारों लोगों ने इसे इंस्टाल किया है. इस ऐप्प की कुछ प्रमुख सुविधाएँ - इसका यूआरएल हिंदी - देवनागरी में है, खाता देवनागरी में बना सकते हैं. पूरा ऐप्प देवनागरी हिंदी प्राथमिक भाषा में है, ऐप्प को हिंदी भाषियों को खास ध्या…

रवि रतलामी को राष्ट्रीय भाष्य गौरव पुरस्कार 2015-2016 प्रदत्त

Bashya gaurav puraskaar 2015-16from Ananda Hi Ananda इस नाचीज को राष्ट्रीय भाष्य गौरव पुरस्कार 15-16 प्रदान करने की घोषणा हाल ही में की गई है -राष्ट्रीय भाष्य गौरव पुरस्कार २०१५-२०१६> Bhashya gaurav आनंद ही आनंद फाउंडेशन वर्ष २०१५ – २०१६ के लिए राष्ट्रीय भाष्य गौरव पुरस्कार की घोषणा करता है। इस घोषणा के साथ भारतीय भाषाओं के प्रोत्साहन के लिए चयनित व्यक्तियों को उनके योगदान के लिए सहर्ष धन्यवाद ज्ञापित करता है। वर्ष २०१५ -१६ के लिए निम्नांकित नाम राष्ट्रीय भाष्य गौरव चुनाव समिति के द्वारा चुने गये हैं- १. आदरणीय सर्वश्री शहरोज़ क़मर – रांची , झारखंड, भारत २. आदरणीय अनुराग शर्मा – पिट्सबर्ग , संयुक्त राज्य अमेरिका ३. आदरणीय सुशील सिद्धार्थ – दरिया गंज , नई दिल्ली, भारत ४. आदरणीय शाहिद मिर्ज़ा शाहिद – सरधना ( मेरठ) , उत्तर प्रदेश, भारत ५. आदरणीय सरवत जमाल – बस्ती , उत्तर प्रदेश, भारत ६. आदरणीय रवि रतलामी – भोपाल , मध्य प्रदेश, भारत ७. आदरणीय राकेश खण्डेलवाल – सिल्वर स्प्रिंग , संयुक्त राज्य अमेरिका चयनित व्यक्तियों को राष्ट्रीय भाष्य गौरव पुरस्कार, ९ मार्च –२०१६ “कवि दिवस” के मौके पर बैतू…

क्या आपका ब्राउज़र अभी भी अंग्रेज़ी में ही है?

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फ़ायरफ़ॉक्स समेत अब दुनिया के तमाम बड़े, नामचीन ब्राउज़र जैसे कि क्रोम, ओपेरा, सफारी, एज (पूर्व नाम इंटरनेट एक्सप्लोरर) हिंदी में आ चुके हैं.अब तो सुधर जाओ, हिंदी दिवस, हिंदी पखवाड़े के लिए ही सही, अपने ब्राउज़र को हिंदी में रंग दो.सेटिंग में जाओ, भाषा चुनो और हिंदी चुन लो. बस. मोबाइल हो या कंप्यूटर - सभी में.

गूगल डॉक्स में बोल कर हिंदी लिखने की उम्दा सुविधा उपलब्ध

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अब गूगल डॉक्स में बोल कर हिंदी लिखने की उम्दा सुविधा उपलब्ध हो गई है.गूगल डॉक्स को आप चाहें अपने मोबाइल या टैबलेट से प्रयोग करें चाहे पर्सनल कंप्यूटरों या लैपटॉप से, सभी जगह से समान और बढ़िया परिणाम मिलते हैं.हाँ, यदि आपका इनपुट डिवाइस - यानी माइक्रोफ़ोन उम्दा हो, नॉइन कैंसिल करने वाला टाइप हो (आमतौर पर उन्नत स्मार्टफ़ोन में ये आते हैं) तो परिणाम 99% शुद्धता का होता है, और यदि आपका इंटरनेट कनेक्शन (अभी यह सुविधा ऑनलाइन ही है) बढ़िया है तो क्या कहने!यकीन नहीं होता? नीचे स्क्रीनशॉट देखें. पूरा पैराग्राफ एक ही सांस में बोलकर लिखा गया है, और गलती? लगभग शून्य!जै हो टेक्नोलॉज़ी की!!

विश्व हिंदी सम्मेलन भोपाल - तैयारियाँ - प्रगति रपट 3

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क्या आप भी फ़ेसबुक पर नहीं हैं?

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ज्यादा दिन नहीं हुए. यही कोई तीन-चार साल पहले की बात है. कोई आमो-खास मिलता था तो बड़े गर्व से बताता था कि वो (भी) फ़ेसबुक पर है. कोई आमो-खास मिलता था तो पूछता था - क्या आप (भी) फ़ेसबुक पर हैं? यदि आप फ़ेसबुक पर नहीं होते थे, और सामने वाला फ़ेसबुक पर होता था तो, वो सामने वाला थोड़ा फूल जाता था - क्योंकि वो फ़ेसबुक पर होता था, और आप नहीं होते थे. फ़ेसबुक पर होना एक किस्म का स्टेटस सिंबल था. तब लोग डिजिटल डिवाइड की बड़ी-बड़ी बातें करते थे.जल्द ही दुनिया की सारी जनसंख्या फ़ेसबुक पर आने लगी. कुछ दिन पहले, एक रेकॉर्ड बना. एक ही दिन में एक अरब उपयोगकर्ताओं ने फ़ेसबुक के पन्नों को रंगा. यदि आप भी फ़ेसबुक पर हैं, तो आप जानते होंगे कि अधिकांश जनता फ़ेसबुक के पन्ने कैसे रंगती है. बहरहाल, वो मुद्दा अलग है. अभी तो सेलेब्रेशन यह है कि दुनिया के हर सातवें व्यक्ति ने फ़ेसबुक का उपयोग उस दिन किया. जल्द ही यह स्थिति होगी कि दुनिया में जितने आदमी हैं, उससे डेढ़-दो गुने लोग फ़ेसबुक का उपयोग एक ही दिन में करेंगे.अब आप पूछेंगे कि भई, ये क्या माजरा है - जितने तो लोग नहीं हैं उससे कहीं ज्यादा लोग फ़ेसबुक का …

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