March 2015

इट कैन हैप्पन ओनली इन इंडिया...

मेरे कन्ने दो-दो आधार कार्ड है!

प्रारब्ध - एक सत्य लघुकथा

लेखक आज सुबह से ही प्रारब्ध पर एक तड़कता भड़कता लेख लिखने पर तुला था . कंप्यूटर पर उसकी उंगलियाँ मानों नाच रही थीं. टॉपमोस्ट गीयर पर, फुल ...

जीमेल को 1,00,000 धन्यवाद

भाई, अचानक, क्यों? जरा ये स्क्रीनशॉट देखें - एक लाख ईमेल. जब से जीमेल चालू हुआ, लगभग तभी से इसका उपयोग प्रारंभ है . तब केवल आमंत्रितों क...

आपकी हिंदी सामग्री को कौन कहाँ से पढ़ रहा है?

जब हिंदी ब्लॉग लेखन की शुरूआत हुई थी - कोई एक दशक पहले, तब स्मार्टफ़ोन - यानी हाई-एंड मोबाईल उपकरण नहीं थे . जनता केवल डेस्कटॉप कंप्यूटरों ...

सोशल मीडिया का समाज शास्त्र - एक दिलचस्प, मनोरंजक रेडियो रूपक सुनें

सोशल मीडिया का समाज शास्त्र - एक उम्दा रेडियो रूपक - अवश्य देखें सुनें - प्रस्तुति - महेश परिमल तथा राकेश डौंडियाल. कलाकार शम्पा शाह, फ़िल्म...

जल्दी से बड़े हो जा, गूगल!

पता नहीं, कैसे कैसे अनुवादकों को भर रखा है! एक और बानगी - ये एडसेंस में आ रहा हिंदी विज्ञापन. न तो वाक्य (शब्द-दर-शब्द अनुवाद?) सही, न शब्...

जरा संभल के... कहीं कोई आपका स्टिंग तो नहीं कर रहा?!!

  व्यंज़ल   तब आदमी जानता नहीं था स्टिंग अब प्यार मुहब्बत में भी है  स्टिंग   ये कैसा जमाना आ गया है यारों प्यार आसां नहीं है बिना स...