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December, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आईटी/कंप्यूटर टेक्नोलॉजी की ऑनलाइन पत्रिका 'डिजिट' अब हिंदी में

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डिजिट पत्रिका के हिंदी में ऑनलाइन उपलब्ध होने की सूचना कुछ यूं मिली -तो, जाहिर है, तुरंत ही दौड़ पड़े digit.in हिंदी साइट पर.पर, अरे! यह क्या?नयी स्टोरिज (?? यह क्या होता है?) में 1 दिसम्बर को छापा गया माल है. और शायद 2 दिसंबर के बाद - यानी महीना होने को आया, और हिंदी साइट अपडेट नहीं हुई है. क्या यह मासिक डिजिट पत्रिका का हिंदी ऑनलाइन रूप है जो महीने में एक बार अपडेट होगा? तब तो यह चल चुका! इस साइट पर अब तक महज दर्जन भर आलेख ही हैं, वे भी सतही किस्म के.खुदा खैर करे!!हिंदी डिजिट वालों, जब आपने गूगल हिंदी वाइस सर्च को टेस्ट किया तो खुद ही बताया कि हिंदी में ऑनलाइन सामग्री कम होने के कारण हिंदी सर्च परिणाम सही नहीं आते, तो सामग्री तो नियमित भरो!!! और, हिंदी को हिंग्लिश भी मत बनाओ!!!

आपके लिए एक नया, ज़रूरी सॉफ़्टवेयर - झटफ़ोटो (हिंदी में, निःशुल्क)

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कंप्यूटर उपयोग के अपने शुरूआती दिनों से लेकर आजतक, मेरे कुछ अत्यंत उपयोगी, नित्य उपयोग में लिए जाने वाले सॉफ़्टवेयरों में "इमेज रीसाइजर" शामिल रहा है, जिसमें कंप्यूटर पर इमेज के आकार (वास्तविक पिक्सेल आकार तथा साथ ही बाइट आकार) को छोटा बड़ा करने की सुविधा होती है.अब आपके लिए, इस सुविधा को खास आपकी अपनी भाषा,  हिंदी में लेकर आए हैं हिंदी जगत के प्रसिद्ध विकासक श्री बालेंदु दाधीच. और वह भी पूरी तरह मुफ़्त.इससे पहले कि आप इस सॉफ़्टवेयर को  http://balendu.com/labs/jhatphoto/  से डाउनलोड करें, सॉफ़्टवेयर के बारे में नीचे दिया गया विवरण पढ़ें. मैंने इसे प्रयोग किया तो पाया कि यह बहुत ही कमाल का है. खासकर, चीटकोड की सहायता से इसका चित्र की फ़ाइल को किसी भी आकार में बदलने की सुविधा.इसके अगले संस्करण में मैं दो अति उपयोगी संशोधन देखना चाहूंगा -1 - विंडोज़ कॉन्टैक्स्ट मेनू में इसका इंटीग्रेशन, तथा2 - रीसाइज किए गए चित्र को क्लिपबोर्ड में (स्वचालित) कॉपी करने की सुविधातथा यदि संभव हो तो -3 - बैच फ़ाइल (एक से अधिक फ़ाइलों का एक साथ) रीसाइज की सुविधा.यदि ये सुविधाएं मिल जाएं तो यह एक परि…

ऐडसेंस कार्यक्रम में आपका स्वागत है...

गूगल ने अंततः आधिकारिक रूप से हिंदी में ऐडसेंस की घोषणा कर दी.नीचे उनके ब्लॉग पर दी गई जानकारी है -AdSense now speaks HindiPosted: Sunday, December 14, 2014 We're proud to announce that AdSense now supports Hindi, one of India's most widely spoken languages.
With over 500 million speakers around the world*, a wealth of quality Hindi content is available on the web.  We’re excited to launch AdSense Hindi language support today to help fuel even more quality content creation on the web, and to help advertisers connect with a rapidly growing online audience.
If you have a website in Hindi, you'll now be able to earn money by displaying Google AdSense ads on your website. To get started: Make sure your website is compliant with the AdSense program policies. Sign up for an AdSense account by enrolling your Hindi website. Once your AdSense account has been approved, simply add the AdSense code to start displaying relevant ads to your users.ऐडसेंस कार्यक्रम में आपका स्वागत है!
Wel…

पुलिया पर फुरसतिया

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फुरसतिया “अनूप शुक्ल” की एक पुस्तक ई-बुक / प्रिंट ऑन डिमांड के माध्यम से  पोथी.कॉम पर सद्य:प्रकाशित हुई है.पुस्तक के पीडीएफ ई-बुक की कीमत 50 रुपए है.पुस्तक को इस लिंक पर जाकर खरीदा जा सकता है.ध्यान दें कि पीडीएफ़ बुक को डाउनलोड एस्सेलरेटर जैसे प्रोग्राम से डाउनलोड नक ब्राउज़र से ही डाउनलोड करें, अन्यथा फ़ाइल सही प्राप्त नहीं होती है.पुस्तक तो फ़ेसबुक में पहले ही अघोषित रूप से, बाजार में आने से पहले ही बेस्ट सेलर हो चुकी है, क्योंकि पब्लिक की भारी डिमांड से ही इस पुस्तक को प्रकाशित किया गया है, इसकी कीमत रखी गई है और इसे प्रकाशित होने पर अनिवार्य और आवश्यक रूप से खरीदने का प्रॉमिस किया गया है. इसलिए इस चर्चित किताब को खरीदें और पढ़ें – जैसे कि मैंने खरीदा है. वैसे तो इस पीडीएफ किताब को किसी  तरह के पासवर्ड से सुरक्षित आदि नहीं किया गया है, परंतु जैसा कि चित्र में दर्शित है - हर पन्ने पर सबसे नीचे खरीदार का ईमेल पता प्रकाशित किया गया है. फुरसतिया को अग्रिम बेस्ट सेलर किताब के लिए ढेरों बधाईयाँ.

अब गूगल एडसेंस हिंदी में भी! क्या ब्लॉगों के दिन फिरेंगे?

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यह रचनाकार.ऑर्ग के एक हिंदी पृष्ठ पर आज छपा एडसेंस का हिंदी में फ़ेसबुक का विज्ञापन है -लगता है कि अब हिंदी ब्लॉगों और हिंदी के पृष्ठों के लिए गूगल एडसेंस विज्ञापन, वह भी हिंदी में,  आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो गया है.शायद ब्लॉगों के दिन फिरें.ब्लॉग पर फ़ेसबुक के विज्ञापन से तो यही दिख रहा है – फ़ेसबुकिया लोग ब्लॉगों की तरफ वापस दौड़ पड़ेंगे क्या?

जग सुरैया का व्यंग्य- हिंदी - शिंदी

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जग सुरैया का यह मजेदार व्यंग्य आज के टाइम्स ऑफ इंडिया में छपा है. यदि आपने नहीं पढ़ा है तो नीचे पढ़ें और मजे लें. 

विशाल लाइब्रेरी में से पढ़ें >

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