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July, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मेरी सरकार की हिंदी की खुल गई पोल : क्या ऐसे अच्छे दिन आएंगे?

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मीडिया में जब हल्ला मचा कि भारत-सरकार अब अपना चोला बदल कर मेरी-सरकार यानी अपनी हमारी सरकार होने जा रही है तो आश्चर्यमिश्रित प्रसन्नता हुई. और जब ये पता चला कि http://mygov.nic.in साइट पर जाकर हम-आप अपनी सरकार के लिए राय भी दे सकते हैं तो और भी अच्छा लगा. जब उस सरकारी साइट पर पहुँचे तो आनंद आ गया. साइट बाइ डिफ़ॉल्ट भले ही अंग्रेज़ी में खुलता हो, परंतु वहाँ हिंदी के लिए विकल्प था. तो अपन ने तुरंत हिंदी वाला बटन दबा दिया. बटन दबाते ही पूरा भले न सही, परंतु पंजीकरण करने का फ़ॉर्म हिंदी में मिला. साथ ही नीचे बाएं कोने में हिंदी टाइपिंग के लिए सुविधा भी – वह भी टाइपराइटर, रेमिंगटन और फ़ोनेटिक यानी तीन तरीकों से. पहली नजर में तो यह वाह क्या बात है वाला मामला था. परंतु यह क्या? जैसे ही मैंने हिंदी में अपना नाम दर्ज करना चाहा, तो इनपुट बक्से में त्रुटि संदेश आया – कृपया वर्ण दर्ज करें. (ओपेरा ब्राउज़र में हिंदी में पंजीकरण के समय दर्शित त्रुटि) मैंने अपना ब्राउज़र जांचा. यह ओपेरा था. कभी कभी ब्राउज़र में समस्या होती है. वे भले ही यूनिकोड प्रदर्शन के लिए सेट होते हैं, परंतु इनपुट किसी …

हिंदी वालों के लिए ताज़ा उपहार - ओपेरा ब्राउज़र में हिंदी वर्तनी जांच की शानदार सुविधा उपलब्ध

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ओपेरा ब्राउज़र तो हिंदी वालों की बाबा आदम के जमाने से सेवा करता आ रहा है. बहुत से मोबाइल उपकरणों, और यहाँ तक कि कंप्यूटिंग उपकरणों में जब हिंदी का कोई समर्थन नहीं होता था, और हिंदी कचरे के रूप में दिखाई देती थी तो ओपेरा मिनी का संस्करण हमारे उद्धारक के रूप में काम आता था और वेब की कचरा हिंदी उसमें बढ़िया दिखाई देती थी. यूँ तो ओपेरा ब्राउज़र में हिंदी इंटरफ़ेस भी काफी पहले से आ चुका है, परंतु इसमें हाल ही में अभी काफी कुछ साज संवार किया गया है और पुराने घटिया अनुवादों को भी दूर किया गया है. परंतु बड़ी खबर यह है कि अब इसमें हिंदी (तथा साथ ही एक अन्य भारतीय भाषा, तमिल) वर्तनी जाँच भी डिफ़ॉल्ट रूप में उपलब्ध है. इस समृद्ध शब्दकोश को जनभारती ने बनाया है. साथ ही यह भी, कि इसके वर्तनी जाँच की गुणवत्ता सामान्य पाठ के मामले में, माइक्रोसॉफ़्ट हिंदी ऑफ़िस 2013 से किसी मामले में कम नहीं है! ब्राउज़र में हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा किसी भी इनपुट विंडो में, यूनिकोड हिंदी पाठ में उपलब्ध है. इसका अर्थ यह है कि अब आप गूगल तकनीकी समूह के फ़ॉन्ट कन्वर्टरों की फ़ाइलों से कन्वर्ट किए गए हिंदी पाठों क…

क्या आप भी कहीं कुत्ता पालने तो नहीं जा रहे…?

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12,06,53,161 बार देखा गया!

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बारह करोड़ छः लाख तिरपन हजार एक सौ इकसठ बार देखा गया! आप पूछेंगे कि क्या?तो यह यू-ट्यूब का कोई वायरल वीडियो नहीं है. और न ही कोई मनोरंजक ट्वीट.यह मेरे गूगल+ प्रोफ़ाइल को देखे जाने का आंकड़ा है.झटका लगा ना?यूं ही जब कुछ विचरण कर रहा था तो इस आंकड़े को देख कर मुझे भी तगड़ा झटका लगा था!नीचे का चित्र देखें -और, यदि पुष्टि करना चाहें तो मेरे गूगल+ प्रोफ़ाइल के पृष्ठ के लिंक पर जाएं . पर, वहां जाकर आप इन आंकड़ों में वृद्धि ही करेंगे!3 ख़ान + रोशन + कुमार के संयुक्त आंकड़ों से भी संभवतः अधिक!परंतु लोगों को किसी के प्रोफ़ाइल में इतनी अधिक दिलचस्पी क्यों होगी भला? हाँ, बॉट्स (स्वचालित कंप्यूटर प्रोग्राम जो पेज को बार बार लोड / रीफ़्रेश करते रहते हैं) की करतूत यह ज्यादा लगती है. जो भी हो, असल बात तो गूगल बाबा ही बता सकते हैं. पर, उनसे पूछे कौन?

गाय हमारी माता है, हमको कुछ नहीं आता है

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फिर भी, कलेक्टर बन जाता है!

हिन्दी ब्लॉग गूगल+ कार्यकलाप - an Initiative started by Google

गूगल द्वारा नेट पर हिंदी सामग्री बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.  इस संबंध में श्री मुकुट जी से प्राप्त ईमेल आप सभी सुधी पाठकों के अवलोकनार्थ प्रस्तुत है - नमस्ते रवि  जी,मेरा नाम मुकुट है और मैं गूगल में काम करता हूं। ऑनलाइन हिंदी कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए गुगल की यह एक कोशिश है। गूगल एैसा प्लाटफ़र्म बनाना चाहता है जिसमें आपके जैसे और भी रचनाकार जुड़ सकें और आपके साथ मिल कर  ज़्यादा से ज़्यादा  हिंदी ऑनलाइन कंटेंट की रचना हो सके। इस प्रयास को सफल बनाने के लिए गुगल की सहायता करें।इस सूत्रपात का उद्देश्य है online हिंदी वेब पेजेज को बढ़ावा देना ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका प्रयोग कर सकें। गूगल के साथ काम करने पर हिंदी ब्लोग्गर्स को जो मिलेगा वह है
हिंदी ब्लॉगिंग से जुड़े कोई भी समस्या का गूगल से प्रत्यक्ष सहारा
एक निर्दिस्ट प्लेटफार्म सभी हिंदी ब्लोग्गर्स के लिए जहांपे वह आपस में और गूगल से बात कर सकते हैं।
गूगल+ द्वारा उनके ब्लॉग की दृश्यता बढ़ाना
Adsense पर जानकारी, जब Adsense हिंदी में प्रारंभ होगा तब इन ब्लोग्गर्स को मिलेगी पहली जानकारी और यह उपभोग करने की सुविधा
Open Source Ri…

काम के बोझ का मारा

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सुप्रीम कोर्ट बेचारा! और क्यों न हो.  सरकार (माने सरकारी बाबू ) ही सबसे बड़ी मुकदमेबाज है.
एक उदाहरण है -  मप्र में उच्च शिक्षा विभाग में आपाती नियुक्त सहायक प्राध्यापकों के नियमितीकरण का, जो पिछले पंद्रह साल से ज्यादा से हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में अपील पर अपील में चल रही है. जबकि हर बार हर कोर्ट सरकार के विरुद्ध निर्णय देती रही  है. परंतु सरकार कोई न कोई बहाना बनाकर तारीख पर तारीख,  तारीख पर तारीख लगवाने में ही लगी हुई है. 
ऐसे सैकड़ों, हजारों उदाहरण हैं.
मुझे सुप्रीम कोर्ट से पूरी सहानुभूति है!

चोर चोरी से जाए हेराफेरी से न जाए!

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जय हो!

हिंदी ब्लॉगर / चिट्ठाकार संबंधी एक विशिष्ट और बेहद मजेदार शोध-सर्वे में अपना अभिमत प्रदान करें

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मित्रों, निम्न पत्र सुश्री अनीता कुमार जी ने भेजा है. वे हिंदी ब्लॉगरों के संबंध में मनोविज्ञान के क्षेत्र में पीएच. डी. कर रही हैं जिसके लिए उन्हें आप सभी चिट्ठाकार मित्रों का अभिमत चाहिए. आप सभी से गुजारिश है कि आप अपना अभिमत अवश्य प्रदान करें. इसके लिए अनीता जी ने सर्वे-मंकी में तीन-पृष्ठों का एक सर्वे बनाया है, जिसे आप ऑनलाइन भर कर उनके इस शोध में न केवल मदद कर सकते हैं, बल्कि हिंदी ब्लॉगरों के विषय में एक मुकम्मल सी बात निकालने में सहयोग कर सकते हैं. अधिक विवरण के लिए उनका पत्र नीचे उद्घृत किया जा रहा है. अलबत्ता यदि सीधे सर्वे में जा कर अपना अभिमत दर्ज कराना चाहते हैं तो लिंक है - https://www.surveymonkey.com/s/GDM9KD3कृपया ध्यान रखें कि यह सर्वे 3 पृष्ठों में फैला है, अतः कृपया कोई भी पृष्ठ रिक्त न छोड़ें. अनीता जी का पत्र:मैं ये खत आप से एक मदद की उम्मीद में लिख रही हूँ। याद है मैं पी एच डी करना चाह रही थी, आप से भी मदद ली थी। लेकिन तब कुछ हो न पाया था । आखिरकार मुझे एडमिशन मिला औरंगाबाद यूनिवर्स्टी में और अब मैं मनोविज्ञान के क्षेत्र में पी एच डी कर रही हूँ और मेरा विषय है ह…

फेसबुक में पास, ट्विटर में फेल!

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ये देखो सरकारी खेल!!

कैसा होगा आपका स्मार्ट शहर?

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मेरा स्मार्ट शहर जब से भारत में स्मार्ट शहर बनने की खबरें आई हैं, मेरे मन में भयंकर स्मार्ट सी उम्मीदें जग रही हैं. स्मार्ट शहर में रहने का कितना मजा रहेगा. हमारे ये स्मार्ट शहर, स्मार्टफ़ोन की तर्ज पर हमें हर एंगल से स्मार्ट बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रखेंगे. क्या इन स्मार्ट शहरों में रहने के लिए आदमी का स्वयं का स्मार्ट होना भी एक जरूरी न्यूनतम क्वालिफ़िकेशन होगा और क्या हम जैसे कम स्मार्ट – रतलामी, भोपाली टाइप के लोगों को इन शहरों में घुसने-रहने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा? वैसे, अभी तो कोई रतलामी होता है, कोई भोपाली, कोई मुंबइया तो कोई कानपुरी. कल को इन प्रतीकों और तखल्लुसों के वजूद पर स्मार्ट शहरों का बड़ा खतरा आने वाला है. कल को अधिकतर लोगों के तखल्लुस उनके अपने स्मार्ट शहरों के नाम पर स्मार्टी, स्मार्टी प्लस और या स्मार्टी 1, 2, 3 होने वाले हैं. अब सवाल ये है कि अपने अतुलनीय भारत का स्मार्ट शहर क्या और कितना अतुलनीय स्मार्ट होगा? क्या वो इतना स्मार्ट होगा कि सड़क पर खुले आम गुटखा खाकर थूकने वालों का ऑटोमेटिक चालान काट देगा, या, अधिक बेहतर – थूक और गुटखा की पन्नी को ऑटोमे…

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