फ़ेसबुकिया स्त्रियों की सोच निगेटिव?

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और पुरूषों की - निगेटिव प्लस?

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7 Responses to "फ़ेसबुकिया स्त्रियों की सोच निगेटिव?"

  1. पते की बात । महिलाओ सावधान । ट्विटर पर शिफ्ट हो जायें ।

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  2. असहमत ! बल्कि अपने जैसे विचारों वाली अन्य स्त्रियों से संपर्क उन्हें खुशमिजाज बनाता है . विचार श्रेष्ठ होते हैं !

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  3. हम फेसबुक से दूर रहे हैं।
    कुछ साल पहले फेसबुक पर अपना खाता खोला था पर एक सप्ताह के अन्दर उसे बन्द भी कर दिया।

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  4. समाचार को पोस्ट शीर्षक से ही कुछ सीख लेनी चाहिए।

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  5. अब समझेंगी श्रीमतीजी।

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  6. फेस बुक अर्थात चेहरे की किताब. शोध से कुछ भी निकले मगर "इक चेहरे में कई चेहरे लगा लेते हैं लोग"

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  7. हमें तो फ़ेसबुक बड़ी हड़बड़िया चीज़ लगती है .

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