टेढ़ी दुनिया पर रवि रतलामी की तिर्यक, तकनीकी रेखाएँ...

February 2013

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आप कहेंगे, सांग्स.पीके क्या बंद हो गया है? या फिर गली-गली बिकने वाले 20 रुपल्ली के एमपी-3 डीवीडी पर क्या बैन लग गया है?

नहीं. ऐसा नहीं है. सांग्स.पीके धड़ल्ले से चल रहा है और 20 रुपल्ली के एमपी3 डीवीडी में हर किस्म का गीत संगीत आप खरीद सकते हैं. परंतु, एक तो यह गैरकानूनी है, दूसरा, अपवादों को छोड़ इनकी क्वालिटी एकदम घटिया रहती है.

तो, यदि आप बढ़िया क्वालिटी में एमपी3 म्यूजिक एलबम डाउनलोड करना चाहते हैं (आपको 128 तथा 320 केबीपीएस में से चुनने का विकल्प मिलता है, और जाहिरा तौर पर अच्छी क्वालिटी के लिए 320 केबीपीएस चुनें) वह भी एकदम मुफ़्त तो फ्लिपकार्ट पर उसके एमपी3 म्यूजिक डाउनलोड साइट पर जाएं. वहाँ अपनी सेवा के शानदार एक वर्ष पूरे होने पर आने वाले दस दिनों तक नित्य 100 एलबम निःशुल्क डाउनलोड की सुविधा दी गई है.

मैंने आज कुछ एलबम डाउनलोड किए. क्वालिटी वाकई बेहद शानदार है. यदि आपको वाकई अच्छी क्वालिटी का एमपी3 गीत-संगीत डाउनलोड करना है तो अवश्य आजमाएं. डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर जाएं -

http://www.flipkart.com/flyte/birthday

फिर वहाँ से अपने पसंदीदा संगीत कैटलॉग पर क्लिक कर जहाँ FREE लिखा है उस एलबम के डाउनलोड लिंक पर क्लिक कर डाउनलोड करें. आपको फ्लिपकार्ड का पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है. यदि नहीं हैं, तो पंजीकरण बेहद आसान है.

अच्छे, तेज व ढेर सारी फ़ाइलों को एक साथ डाउनलोड करने के लिए फ्लाइट डाउनलोड मैनेजर का इस्तेमाल करें. इसे यहाँ - http://flipkart.com/help/downloadmanager  से डाउनलोड कर इंस्टाल करें

मैंने पाया है कि कुछ मामलों में मेरे हंगामा.कॉम से पैसे देकर डाउनलोड किए एमपी3 की क्वालिटी से भी बेहतर है यह मुफ़्त का माल.

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नंदन नीलेकनी, मैं आपसे पूरी तरह निराश हूँ...

आखिर वही हुआ जिसकी न चाहते हुए भी मुझे प्रत्याशा थी.

कोई तीन साल पहले भारत में आधार कार्ड बनने की शुरूआत हुई. तब कहा गया कि यह गरीब का पहचान पत्र गरीबों का भाग्य बदल देगा. मगर बीच में यह राजनीति का शिकार होता दिखाई दिया जब बांग्लादेशी घुसपैठियों के भाग्य भी बदलने लगा. खैर, वह तो राजनीति की बात हुई. हम यहां तकनीकी समस्याओं की बात करेंगे.

जब नंदन नीलेकनी को आधार कार्ड तैयार करने के प्रकल्प का मुखिया चुना गया तो उनसे बड़ी उम्मीदें थीं. लगा था कि कंप्यूटरी चपलता से आनन-फानन में सालेक भर में सभी भारतीयों के हाथों में आधार कार्ड होगा.

मगर हम हमेशा की तरह, गलत थे.

मेरे शहर में भी आधार कार्ड बनने का काम पिछले दो वर्षों से चल रहा है. कभी गति पकड़ता है तो कभी बन्द हो जाता है. सितम्बर 2012 में एक ऐसे ही आधार कार्ड बनाने वाले केंद्र में मैं भी परिवार समेत चला गया. यह सोचकर कि सरकारी योजना है, इसमें हम सब को सहयोग करना ही चाहिए.

केंद्र में कोई भीड़-भाड़ नहीं थी. बमुश्किल पंद्रह बीस लोग थे. और तीन कंप्यूटर सिस्टम लगे थे जिसके जरिए फ़ोटो-पहचान और निवासी प्रमाण-पत्र के साथ साथ व्यक्ति के उंगलियों के निशान और आँखों की पुतलियों के निशान की जानकारी दर्ज की जा रही थी, जिसके आधार पर आधार कार्ड बनना था.

 

इस कार्य में एक व्यक्ति के डेटा संग्रहण के लिेए बमुश्किल 5 से 10 मिनट का समय लगना चाहिए था, मगर पाया गया कि एक-एक व्यक्ति के लिए आधा से पौन घंटे का समय लग रहा था. जैसे तैसे यह काम पूरा हुआ, और हमें बताया गया कि 90 दिनों के भीतर आधार कार्ड मिल जाएगा. पर यह समय गुजर जाने के बाद भी अपना आधार कार्ड लापता है. तात्कालिक कोई आवश्यकता नहीं थी तो इस ओर ध्यान ही नहीं दिया.

कल हमारे मोहल्ले में आधार कार्ड बनाने वालों ने शिविर लगाया. चूंकि मुझे मेरा आधार कार्ड नहीं मिला था तो आधार कार्ड के साइट पर स्टेटस की दरियाफ्त की. स्टेटस से पता चला कि हम चार के परिवार में तीन के कार्ड तो तैयार हैं, जिसे भेजा जाने वाला है - जी हाँ, भेजा जाने वाला है. ये बात जुदा है कि कब भेजा जाएगा और कब मिलेगा. मेरे बारे में साइट पर बताया गया कि मेरा आधार कार्ड का डाटा अपलोड करते समय फेल हो गया और साइट पर ही मुझे सलाह दी गई कि फिर से रजिस्ट्रेशन करवाएं. टाइम्स ऑफ इंडिया में खबर है कि अप्रैल 1 से पहले यदि आपने आधार कार्ड बनवाया हो और यदि आपको वो नहीं मिला हो तो आपको फिर से यह कार्ड बनवाने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी!

 

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चूंकि मोहल्ले की बात थी तो हम भी पहुंच गए एक बार फिर से लाइन में. इस बार भी वही स्थिति. तीन कंप्यूटर सिस्टम लगाए गए थे 100 परिवार की कॉलोनी में आधार कार्ड बनाने के लिए. तय समय सुबह 11 बजे से मैं पहुँच गया. मेरा नंबर दूसरा था. मैं सोच रहा था कि बहुत हुआ तो 11.30 तक मेरा काम हो जाएगा. मगर मैं इस बार भी गलत था. और जब तक मेरी बारी आई, तीन बज चुके थे!

अब मैं आपको सिलसिलेवार बताता हूँ कि क्या तकनीकी खराबियाँ / खामियाँ हैं और इसकी वजह से आधार कार्ड का यह काम आने वाले पांच वर्षों में भी पूरा नहीं होने वाला है -

मेरे पहले जो सज्जन थे उनका फोटो कंप्यूटर में संलग्न कैमरे से लिया जाना था. परंतु कैमरा फ़ोटो ही नहीं ले रहा था. दल के साथ आए तकनीकी विशेषज्ञ ने बताया कि बैकग्राउण्ड में ज्यादा चमक है (पीछे की खिड़की के कारण) इसीलिए सॉफ़्टवेयर फोटो नहीं ले रहा है. तो सिस्टम नए सिरे से अरेंज करना पड़ा. फिर जब फ़ोटो खींच लिया गया तो उन सज्जन का फिंगर प्रिंट लेना था. उनका फिंगर प्रिंट लेने वाला डिवाइस फिंगर का प्रिंट ही नहीं ले रहा था. उन सज्जन को अपनी उंगलियाँ उस उपकरण पर दबाकर कोई दस-दस मिनट रखने पड़े. मुझे आश्चर्य हुआ तो मैंने ऑपरेटर से पूछा - ये इतना देर से प्रिंट क्यों लेता है? फिंगर प्रिंट तो एक क्षण में लिया जाना चाहिए. मेरे लैपटॉप में तो फिंगर प्रिंट से लॉगइन करने की सुविधा है. एक सेकंड में हो जाता है. पर उसने बड़ा विचित्र सा जवाब दिया - उम्र दराज लोगों का प्रिंट यह देर से लेता है. हम जैसे जवानों का प्रिंट यह एक मिनट में ले लेता है. बड़ी अजीब दलील थी यह.

खैर, फिंगर प्रिंट लेने के बाद आंखों के आइरिस के इमेज लेने की कोशिश हुई. तीन मर्तबा कोशिश हुई और डिवाइस फेल हो गया, तो दोबारा बूट किया गया और फिर चौथी कोशिश में यह सफल रहा. इस बीच लैपटॉप दोबारा बूट करने के कारण सारा सिलसिला फिर से दोहराना पड़ा. देखते हैं कि इस बार भी आधार कार्ड बन पाता है या नहीं!

 

और, अब तो आधार कार्ड का आधार ही खिसकता जा रहा है!

 

सवाल ये है कि आपने अपना आधार कार्ड बनवाया क्या?

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