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December, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तब और अब - 30 वर्ष पहले का सर्वाधिक बिकने वाला इलेक्ट्रॉनिक गॅजेट क्या था?

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पर हो सकता है कि आप पहले पूछ लें कि भई आखिर वो कौन सा गॅजेट है जो अभी सर्वाधिक बिक रहा है?वर्तमान में गरमा-गरम पकौड़ों की तरह बिक रहे आई-फ़ोन5 के बारे में बताया जा रहा है कि यह अब तक के इतिहास में सर्वाधिक बिकने वाला इलेक्ट्रॉनिक गॅजेट बनने जा रहा है.पर, आप बता सकते हैं कि आज से 30 साल पहले उस वक्त तक के इतिहास के हिसाब से सर्वाधिक बिकने वाला इलेक्ट्रॉनिक गॅजेट क्या था?आपका अनुमान कुछ कुछ सही है. उस वक्त रेडियो कॅसेट रेकॉर्डर ही सबसे ज्यादा बिकते थे.अपने भारत में बुश कंपनी का रेडियो कॅसेट रेकॉर्डर सबसे ज्यादा बिकता था. हाथ कंगन को आरसी क्या? ये देखिए 30 वर्ष पहले छपा इसका विज्ञापन - जो सरिता पत्रिका के 1980 के किसी अंक में छपा था -इन तीस वर्षों में दुनिया बहुत बदल गई है, मगर गॅजेट के प्रति मनुष्यों की दीवानगी अभी भी नहीं बदली है!

हमें न्याय चाहिए!

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                 हमें चाहिये देश भर में बलात्कारों के विरुद्ध फास्ट ट्रैक कोर्ट

चित्र के लिए श्री काजल कुमार व श्री गिरिजेश राव का शुक्रिया.
 विवरण के लिए यहाँ देखें - http://girijeshrao.blogspot.in/2012/12/blog-post_28.html 

आर्ची, ये तूने क्या किया!

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आर्ची तो मुझे आज भी पसंद है. उन्मुक्त जी को भी यह पसंद है. आपको पसंद है या नहीं? कुछ अरसा पहले आर्ची के हिंदी में आने की खबर सुनी थी तो बड़ी उत्सुकता बनी हुई थी. परंतु उस खबर के बाद लंबे समय हिंदी आर्ची तक आस-पास के न्यूज-स्टैंड पर दिखाई नहीं दिया और न ही इसके किसी ऑनलाइन खरीदी-बिक्री का लिंक मिला तो यह फिर दिमाग से एक तरह से उतर ही गया था.अभी कुछ दिनों पूर्व पुस्तक मेले में एक स्टाल पर यह दिख गया. उत्सुकतावश इसके भाग 5 के कुल 7 अंकों में से तीन खरीद लिए.परंतु हिंदी-आर्ची ने मुझे पूरी तरह निराश कर दिया. एक तरह से पूरा पैसा बरबाद!अब आपको कुछेक कारण तो गिनाने ही होंगे.लीजिए -अनुवाद - अनुवाद और भाषा सामान्य है. अनुवाद का स्तर और भाषा प्रवाह थोड़ा सा और युवा केंद्रित और बेहतर हो सकता था. एक अंक की कीमत है तीस रुपए. जो बहुत ही ज्यादा है. 30 रुपए और वह भी ज्यादा? जी हाँ. तीस रुपए में आपको मिलते हैं सिर्फ 2 - 3 छोटी छोटी कहानियाँ. छोटे-छोटे 11 पन्ने (22 पृष्ठ) की कीमत 30 रुपए! यह तो सरासर लूट है. और, शायद इसीलिए, कहानी के किसी भी पन्ने पर पृष्ठ संख्या नहीं लिखी है. और शायद इसीलिए एक अंक में…

लिनक्स के रेमिंगटन हिंदी की-बोर्ड में 'ई तथा ऊ' कैसे लिखें / ई तथा ऊ लिखने का समाधान

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मुझे एक ईमेल प्राप्त हुआ  -
Dear Raviji,
I am management consultant at Indore and very much intersted in research in computer how ever I am not having any formal computer training. Now a days I am trying to work on Ubuntu and able to install it, and also installed Ibus keyboard for remington keyboard, however I am not able to write बडी इ using the same. As evident hear. I am now well conversant with webdunia's indic IME in windows.
I would be very grateful to if you can spare your some time and provide me solutions.

मुझे लगा कि ये कौन सी बड़ी बात है, कहीं पर ई की कुंजी छुपी होगी, और बस खोज कर बता दूंगा.
आमतौर पर रेमिंगट की-बोर्ड में ई लिखने के लिए bZ कुंजियों का कॉम्बीनेशन प्रयोग में लेना होता है. परंतु यहाँ इस कॉम्बीनेशन से इर् लिखा जा रहा था.

फिर मैंने यहाँ दिए गए रेमिंगटन कुंजीपट का लेआउट देखा.

जरा आप भी देखें - और जरा ध्यान से!

हे भगवान! ये कैसा की-बोर्ड है?
आप देखेंगे कि इस पूरे की-बोर्ड में ई तथा ऊ लिखने के लिए कोई भी कुंजी आबंटित नहीं है!
तो यदि आप लिनक्स में रेमिं…

क्या आप भी 'हरित' होना नहीं चाहेंगे?

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सड़क पर चलते चलते एक पेड़ के तने पर रखे इस उपकरण ने मेरा ध्यान खींचा -यह एक सोलर पैनल था जिसे बड़े तरतीब से पेड़ के तने पर इस तरह से रखा गया था कि दिन भर उस पर धूप पड़ती रहे.उसे देख मैं रुका. पास ही एक पान का ठेला था. सोलर पैनल से तार का कनेक्शन पान के ठेले तक जा रहा था जहाँ पर एक बैटरी व चार्जर जुड़े थे.और पान के ठेले पर मौजूद था - घनश्याम साहू. 'हरित पुरुष' - घनश्याम साहू -पेड़ के तने पर रखे सोलर पैनल को लेकर मेरी जिज्ञासा बढ़ी तो घनश्याम साहू ने बताया -पहले वो आस पास से वैध-अवैध कनेक्शन लेकर और इमर्जेंसी लाइट जैसे साधनों से अपनी गुमटी को रात में रौशन रखता था. परंतु एक बार कहीं से पता चला कि 3 हजार रुपए (किसी गुमटी धारक के लिए यह रकम बड़ी है) में यह सोलर पैनल मिलता है जिससे इन सबकी जरूरत नहीं रहती तो पैसे जमा कर यह खरीद लिया और अब उसे अपनी गुमटी को रौशन करने के लिए किसी चीज के लिए एक पैसा भी खर्च करने की जरूरत नहीं रहती. उसने गुमटी को रौशन करने के लिए बेहद कम खपत करने वाले एलईडी लैंप की पट्टी भी लगवा ली है. उसका सोलर पैनल बरसात के दिनों में भी उसकी गुमटी को 5 घंटे तक भरपूर र…

90% हिन्दी ब्लॉगों व 60% हिन्दी वेबसाइटों में हिन्दी की ढेरों वर्तनी की गलतियाँ होती हैं...

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अब यह बात मैं नहीं कर रहा हूँ. नहीं तो लोग मुझ पर पिल पड़ेंगे और मेरी खुद की पोस्टों में से वर्तनी की सैकड़ों गलतियाँ निकाल कर दिखा देंगे. भई, यह बात मैं नहीं, स्पेलगुरू कह रहे हैं. और यदि वे स्पेलगुरू हैं, तो जरूर सही ही कह रहे होंगे. यह स्क्रीनशॉट देखें -

न्यू मीडिया – इंटरनेट की भाषायी चुनौतियाँ और सम्भावनाएँ

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जो पारम्परिक मीडिया पंडित यह मान बैठे थे कि इंटरनेट के नए मीडिया की पैठ और असर कभी भी अख़बार या टीवी जितनी नहीं हो सकते, उनकी खुशफहमी अब टूटने लगी है। जो स्वर पहले नए मीडिया को नामंजूर करने के लिए उठ रहे थे, अब वे उसे समझने के लिए सवाल पूछ रहे हैं. जो लोग नए मीडिया को खाए-पिए-अघाए, प्रतिक्रियावादी, उपभोक्तावादी, ‘साइबर नागरिकों’ का शगल कहते थे वे अपनी इस राय पर दोबारा सोच रहे हैं. कल तक नए मीडिया को नामंजूर करने वाला पारम्परिक मीडिया भी अब नए मीडिया से कंटेंट ले रहा है, यहाँ तक कि उसकी मौजूदगी को महत्वपूर्ण खबर बना रहा है. ब्लॉग पोस्ट करने या घटनाओं को रिकार्ड करने वाले किसी भी दर्शक का मोबाइल फोन जैसा छोटा उपकरण अब समाचार पत्रों और चैनलों का स्रोत बन रहा है.आर. अनुराधा द्वारा संपादित, 'न्यू मीडिया – इंटरनेट की भाषायी चुनौतियाँ और सम्भावनाएँ' नामक पुस्तक के बैक कवर पर छपा यह संक्षिप्त उद्धरण साबित करता है कि पुस्तक में विषय वस्तु को वर्णित करने में कहीं कोई कोर कसर छोड़ी नहीं गई है. इस पुस्तक में नौ अलग अलग शोधपूर्ण आलेखों को समायोजित किया गया है – 1. नए संचार माध्यम – एक परिच…

आपकी फ़ाइल में हिंदी टैक्स्ट के बजाए डब्बे दिखते हैं? कुछ समाधान हाजिर हैं...

यूनिकोड हिंदी डिस्प्ले की समस्या यदा कदा मुंह मारते ही रहती है. हाल ही में एक पाठक ने अपनी समस्या रखी -आदरणीय रतलामी जी ,
सादर सप्रेम प्रणाम ।

जब जीमेल पृष्ठ पर टाइप मैटर एम एस वर्ड पर पेस्ट करता हूँ तो सिर्फ
डिब्बे दिखाई पड़ते हैं ।

मैं चाहता हूँ कि आज तक जीमेल में संरक्षित समस्त रचनाएँ एम एस वर्ड में
पेस्ट कर मेमॉरीकार्ड में रख लूँ ।

कृपया अवगत कराएँ कम्प्यूटर में कौन-सा फॉन्ट होना जरूरी होगा ।उसकी कोई
लिंक हो तो बेहतर ।

कृपया आपके अति व्यस्त समय में विघ्न डालने का अपराध माफ कीजिएगा ।

आपका स्नेहाकांक्षी
****यह एक बड़ी समस्या है. वैसे आमतौर पर ऐसी समस्या तब आती है जब यूनिकोड सामग्री का फ़ॉन्ट सिस्टम में इंस्टाल न हो. मगर यहाँ ऊपर दी गई समस्या में यह बात नहीं है. आप कोई यूनिकोड टैक्स्ट कॉपी पेस्ट करते हैं तो पाते हैं कि गंतव्य में तो डब्बा दिख रहा है. लगता है यह सारा मैटर कूड़ा हो गया. परंतु ऐसा नहीं होता, दरअसल पाठ तो मौजूद रहता है, बस डिस्प्ले में समस्या के कारण डिब्बे दिखते हैं.ये डिब्बे आमतौर पर एमएस वर्ड 2007 तथा कुछ एमएस वर्ड 2010 की फ़ाइलों में होता है. इसके लिए कुछ सरल से उपाय हैं -1 - ऐ…

माई लाइफ़ विथ पाई

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पर, ये वो कहानी नहीं है जिसमें शेर है. अलबत्ता कंप्यूटरी दुनिया का एक ऐसा शेर है जो चहुंओर तहलका मचा रहा है, दहाड़ें मार रहा है. मैंने पहले भी थोड़ी सी झलकी इस बारे में दिखाई थी. पर, पहले पहली बात. मैंने अपना सबसे पहला कंप्यूटर, कोई 18 वर्ष पहले, 1994 में खरीदा था, 40 हजार रुपयों में, अपने जीपीएफ़ के पैसे से लोन लेकर. उसका स्पेसिफ़िकेशन था – 486 प्रोसेसर 433 मे. हर्त्ज, 8 मे.बा. रैम, 1 जीबी हार्ड-डिस्क. चूंकि यह रतलाम में उस वक्त उपलब्ध नहीं था, तो इसे मुंबई से मंगवाया गया था – पूरे पैसे एक हफ़्ते पहले एडवांस में देकर. यह मिनि-टॉवर केबिनेट विशाल आकार में आता था, जो नया नया चला था. चलते समय यह गर्म हो जाता था और इसके पावर सप्लाई का पंखा बड़ी आवाजें करता था.  कुल पॉवर खपत था - 80 वॉट से अधिक (मॉनीटर का अलग) और, अभी हाल ही में मैंने अपना नया कंप्यूटर खरीदा. क्रेडिट कार्ड के आकार का. महज 2400 रुपयों में. (वैसे तो इसकी असली कीमत 1200 रुपए (25 डॉलर) है, परंतु तमाम टैक्स और शिपिंग खर्चे मिलाकर यह मुझे दो-गुनी कीमत में मिला).  अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि टेक्नोलॉजी कहाँ से कहाँ पहुँच गई …

एमट्यून्स एचडी - भारत का पहला एचडी म्यूज़िक चैनल : देखा क्या?

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और यदि अब तक नहीं देखा है तो कभी देखिएगा भी मत!ठंड रखिए. जल्द ही बताता हूँ कि क्यों.जब से भारत का पहला एचडी म्यूजिक चैनल एमट्यून्स एचडी चालू हुआ था, तब से बड़ी इच्छा थी कि इसे देखा जाए. मेरे टाटा स्काई एचडी में यह बंडल नहीं था, और कहीं और इसे देखने का सौभाग्य भी नहीं मिला था. मैंने एमट्यून्स और टाटा स्काई में विशलिस्ट में भी लिखा कि इसे जल्द ही टाटास्काई में बंडल किया जाए.और, मेरी मुंह मांगी मुराद दो दिन पहले पूरी भी हो गई.टाटा स्काई एचडी चैनल में एमट्यून्स एचडी आने लगा.मैं तो मारे खुशी के उछल पड़ा और जल्द ही एमट्यून्स एचडी लगाया. एचडी ऑडियो-वीडियो के साथ संगीत के आनंद का अपना अलग ही मजा है. मैं आसन जमा कर अपने टीवी स्क्रीन के सामने बैठ गया.परंतु यह क्या? जैसे ही एमट्यून्स एचडी चालू हुआ मुझे लगा कि मैं ठगा गया. घंटे भर में तो मेरी सारी आशाएं धूल धूसरित हो गईं और दूसरे घंटे से मैंने उस चैनल को अपने पसंदीदा से हटा लिया.लगा कि मन में फालतू ही इच्छा पाले बैठे थे एमट्यून्स एचडी देखने को.अगर आपके मन में भी इस एचडी म्यूजिक चैनल को देखने की इच्छा हो, तो बिलकुल त्याग दीजिए.कारण?कोई एक हो तो बत…

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