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शनिवार, 31 मार्च 2012

118 आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ

संकलन – सुनील हांडा

अनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी

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दर्द -हाँ, पीड़ा - वैकल्पिक

इसमें कोई संदेह नहीं कि किसी भी तरह की चोट या क्षति, चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक, दर्द का कारण बनती है। दर्द होना तय है परंतु उसकी पीड़ा वैकल्पिक है - चाहे महसूस करो या नहीं।

एक सर्जन का साक्षात्कार आ रहा था जिसने एक संत के नितंब का ऑपरेशन किया था। सर्जन ने बताया कि सर्जरी के बाद जब संत ने दर्द की कोई शिकायत नहीं की तो उन्हें यह कहना पड़ा - "स्वामी जी, यदि आप अपने दर्द के बारे में नहीं बतायेंगे तो मुझे कैसे पता चलेगा कि घाव ठीक हो रहा है या नहीं? आपके कथन से तो मुझे कुछ स्पष्ट ही नहीं हो रहा है।"

संत ने उत्तर दिया - "इसमें कोई संदेह नहीं कि शरीर को दर्द महसूस हो रहा है परंतु मुझे इसकी पीड़ा नहीं है।"

 

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गंगा में स्नान करने से सभी पाप धुल जायेंगे?

एक व्यक्ति ने स्वामी रामकृष्ण से कहा - "मैं गंगा में स्नान करने जा रहा हूं। क्या आप मानते हैं कि पवित्र गंगा में स्नान करने से सभी पाप धुल जायेंगे?"

स्वामी रामकृष्ण बहुत साधारण व्यक्ति थे। वे बोले - "निश्चित रूप से गंगा में स्नान करने से आपके सभी पाप धुल जायेंगे। जब आप पवित्र गंगा में डुबकी लेंगे तो सभी पाप आपसे अलग होकर गंगा के तट पर लगे पेड़ के ऊपर बैठ जायेंगे। लेकिन स्नान के बाद जैसे ही आप गंगा से बाहर आयेंगे, सभी पाप पेड़ पर से वापस आपके ऊपर छलांग लगा देंगे। पवित्र गंगा के कारण ही वे आपसे दूर गए थे न कि आपके कारण। यदि तुम गंगा से बाहर ही न आओ और हमेशा के लिए वहीं रह जाओ तभी तुम्हें पापों से मुक्ति मिल सकती है।"

उस व्यक्ति ने कहा - "लेकिन यह कैसे संभव है? मुझे कभी तो बाहर आना ही होगा।"

रामकृष्ण ने उत्तर दिया - "तब फिर गंगा में स्नान करने का कोई फायदा नहीं है।"

(सुनील हांडा की किताब स्टोरीज़ फ्रॉम हियर एंड देयर से साभार अनुवादित. कहानियाँ किसे पसंद नहीं हैं? कहानियाँ आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं. नित्य प्रकाशित इन कहानियों को लिंक व क्रेडिट समेत आप ई-मेल से भेज सकते हैं, समूहों, मित्रों, फ़ेसबुक इत्यादि पर पोस्ट-रीपोस्ट कर सकते हैं, या अन्यत्र कहीं भी प्रकाशित कर सकते हैं.अगले अंकों में क्रमशः जारी...)

1 टिप्पणी:

  1. जब दर्द सहने की क्षमता आ जाती है, पीड़ा नहीं होती है।

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