2012

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पर हो सकता है कि आप पहले पूछ लें कि भई आखिर वो कौन सा गॅजेट है जो अभी सर्वाधिक बिक रहा है?

वर्तमान में गरमा-गरम पकौड़ों की तरह बिक रहे आई-फ़ोन5 के बारे में बताया जा रहा है कि यह अब तक के इतिहास में सर्वाधिक बिकने वाला इलेक्ट्रॉनिक गॅजेट बनने जा रहा है.

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पर, आप बता सकते हैं कि आज से 30 साल पहले उस वक्त तक के इतिहास के हिसाब से सर्वाधिक बिकने वाला इलेक्ट्रॉनिक गॅजेट क्या था?

आपका अनुमान कुछ कुछ सही है. उस वक्त रेडियो कॅसेट रेकॉर्डर ही सबसे ज्यादा बिकते थे.

अपने भारत में बुश कंपनी का रेडियो कॅसेट रेकॉर्डर सबसे ज्यादा बिकता था. हाथ कंगन को आरसी क्या? ये देखिए 30 वर्ष पहले छपा इसका विज्ञापन - जो सरिता पत्रिका के 1980 के किसी अंक में छपा था -

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इन तीस वर्षों में दुनिया बहुत बदल गई है, मगर गॅजेट के प्रति मनुष्यों की दीवानगी अभी भी नहीं बदली है!



                 हमें चाहिये देश भर में बलात्कारों के विरुद्ध फास्ट ट्रैक कोर्ट

चित्र के लिए श्री काजल कुमार व श्री गिरिजेश राव का शुक्रिया.
 विवरण के लिए यहाँ देखें - http://girijeshrao.blogspot.in/2012/12/blog-post_28.html 

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आर्ची तो मुझे आज भी पसंद है. उन्मुक्त जी को भी यह पसंद है. आपको पसंद है या नहीं? कुछ अरसा पहले आर्ची के हिंदी में आने की खबर सुनी थी तो बड़ी उत्सुकता बनी हुई थी.

परंतु उस खबर के बाद लंबे समय हिंदी आर्ची तक आस-पास के न्यूज-स्टैंड पर दिखाई नहीं दिया और न ही इसके किसी ऑनलाइन खरीदी-बिक्री का लिंक मिला तो यह फिर दिमाग से एक तरह से उतर ही गया था.

अभी कुछ दिनों पूर्व पुस्तक मेले में एक स्टाल पर यह दिख गया. उत्सुकतावश इसके भाग 5 के कुल 7 अंकों में से तीन खरीद लिए.

परंतु हिंदी-आर्ची ने मुझे पूरी तरह निराश कर दिया. एक तरह से पूरा पैसा बरबाद!

अब आपको कुछेक कारण तो गिनाने ही होंगे.

लीजिए -

  • अनुवाद - अनुवाद और भाषा सामान्य है. अनुवाद का स्तर और भाषा प्रवाह थोड़ा सा और युवा केंद्रित और बेहतर हो सकता था.
  • एक अंक की कीमत है तीस रुपए. जो बहुत ही ज्यादा है. 30 रुपए और वह भी ज्यादा? जी हाँ. तीस रुपए में आपको मिलते हैं सिर्फ 2 - 3 छोटी छोटी कहानियाँ. छोटे-छोटे 11 पन्ने (22 पृष्ठ) की कीमत 30 रुपए! यह तो सरासर लूट है. और, शायद इसीलिए, कहानी के किसी भी पन्ने पर पृष्ठ संख्या नहीं लिखी है. और शायद इसीलिए एक अंक में पृष्ठ उलटे पुलटे लग गए हैं!
  • आधे अधूरे अंक - आप तीस रुपए का कोई एक अंक खरीदते हैं, और अपने प्रिय आर्ची की कोई कहानी पढ़ते पढ़ते पाते हैं आखिरी पन्ने में क्रमश: लिखा मिलता है - यानी कहानी अधूरी रह गई, और उस पूरी कहानी को पढ़ने के लिए आपको उसका अगला अंक खरीदना होगा. वह भी पूरे 30 रुपए में, ऊपर से, भाग्य से यदि मिल जाए तो. हद है!
  • किताब का आकार - मूल आर्ची कॉमिक्स का आकार पॉकेट बुक साइज का होता है और वो आमतौर पर रीसाइकल पेपर में प्रिंट होता है. हिंदी आर्ची का आकार एकदम बेहूदा किस्म का है. न तो वो पत्रिका के आकार का है, न वो अपने मूल आकार में है. एकदम बेसुरे, आकार में है. ऊपर से गिनती के दस पन्ने! लगता है कोई विज्ञापन पैम्प्लेट पढ़ रहे हों.
  • आज के जमाने में फ़िजूल-खर्ची? ना ना! पर हिंदी आर्ची तो फिज़ूलखर्च है. दोनों ही इनर कवर कोरे हैं. इनमें में न तो कोई आर्टवर्क है और न ही कोई कार्टून स्ट्रिप. जब पत्रिका इतनी पतली सी है तो खाली स्थान का भरपूर उपयोग भी तो होना चाहिए था - वह भी नहीं!

कुल मिलाकर, आर्ची को हिंदी में लाने में प्रोफ़ेशनल टच कहीं नहीं दिखा. पूरा चलताऊ एटीट्यूड ही नजर आया जिससे इसका फ्लॉप होना तय है. मैंने तीन अंक खरीदे थे - नब्बे रुपए देकर. वह शायद मेरी पहली और आखिरी खरीद थी.

मुझे एक ईमेल प्राप्त हुआ  -
Dear Raviji,
I am management consultant at Indore and very much intersted in research in computer how ever I am not having any formal computer training. Now a days I am trying to work on Ubuntu and able to install it, and also installed Ibus keyboard for remington keyboard, however I am not able to write बडी इ using the same. As evident hear. I am now well conversant with webdunia's indic IME in windows.
I would be very grateful to if you can spare your some time and provide me solutions.

मुझे लगा कि ये कौन सी बड़ी बात है, कहीं पर ई की कुंजी छुपी होगी, और बस खोज कर बता दूंगा.
आमतौर पर रेमिंगट की-बोर्ड में ई लिखने के लिए bZ कुंजियों का कॉम्बीनेशन प्रयोग में लेना होता है. परंतु यहाँ इस कॉम्बीनेशन से इर् लिखा जा रहा था.

फिर मैंने यहाँ दिए गए रेमिंगटन कुंजीपट का लेआउट देखा.

जरा आप भी देखें - और जरा ध्यान से!

हे भगवान! ये कैसा की-बोर्ड है?
आप देखेंगे कि इस पूरे की-बोर्ड में तथा लिखने के लिए कोई भी कुंजी आबंटित नहीं है!
तो यदि आप लिनक्स में रेमिंगटन की-बोर्ड का प्रयोग कर हिंदी लिख रहे होंगे तो ई लिखने के लिए आपको कुछ अन्य जुगाड़ करना पड़ रहा होगा या फिर आप इसके बगैर ही काम चला रहे होंगे.

परंतु लिनक्स तंत्र की ख़ूबी यह है कि इसमें सबकुछ आप अपने मुताबिक कर सकते हैं और यह कोई रॉकेट साइंस नहीं होता है.

तो इसके लिए आपको अपने लिनक्स तंत्र में उपलब्ध रेमिंगटन कुंजीपट लेआउट फ़ाइल को थोड़ा सा संपादित करना होगा और बस आपका काम हो जाएगा.

इसके लिए, एक फ़ाइल - hi-remington.mim ढूंढें. यह आमतौर पर यहाँ होता है -
/usr/share/m17n/hi-remington.mim
इसे आपको रूट उपयोगकर्ता (सुपर-यूजर मोड) में संपादित करना होगा.
इसके लिए कमांड दें (gedit की जगह कोई भी टैक्स्ट एडीटर चलेगा) -
sudo gedit /usr/share/m17n/hi-remington.mim
जीएडिट खुलेगा और hi-remington.mim फ़ाइल को लोड कर लेगा. अब आप नीचे स्क्रॉल करते जाएं और यह पंक्ति देखें -
("$" "+")

यहाँ पर अंग्रेजी के $ के बदले + का चिह्न हिंदी में मैप किया गया है जो कि आमतौर पर ज्यादा काम नहीं आता इसीलिए यहाँ हम ई को प्रतिस्थापित करेंगे. तो यह लाइन हो जाएगी -
("$" "ई")

[यहाँ आपको ई यहीँ से कॉपी करना होगा - इसीलिए जब आप ऊपर दिए गए फ़ाइल को संपादित करने जाएं तो इस पृष्ठ को पहले से लोड कर लें और ई को + से प्रतिस्थापित करने के लिए यहीँ से, या अनयत्र किसी अन्य वेबसाइट की सामग्री से कॉपी करें.]

इसी तरह, ऊ के लिए,
("@" "/") पर जाएं और उसे इस तरह बदलें -
("@" "ऊ")

बस अब आप इस फ़ाइल को सहेज लीजिए और अपने लिनक्स तंत्र को रीस्टार्ट कर लीजिए  (यदि एडवांस यूजर हैं तो इनपुट मैथड एडीटर इंजिन को ही रीलोड कर लीजिए) और आपकी समस्या हो गई गुल! अब जब भी ई छापना होगा तो अंग्रेज़ी के $ कुंजी को दबाइए (यानी शिफ़्ट4) और ऊ छापना हो तो @ कुंजी दबाइए (यानी - शिफ़्ट 2).

अब भी यदि कोई समस्या है तो टिप्पणी बक्से में पूछें.







सड़क पर चलते चलते एक पेड़ के तने पर रखे इस उपकरण ने मेरा ध्यान खींचा -

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यह एक सोलर पैनल था जिसे बड़े तरतीब से पेड़ के तने पर इस तरह से रखा गया था कि दिन भर उस पर धूप पड़ती रहे.

उसे देख मैं रुका. पास ही एक पान का ठेला था. सोलर पैनल से तार का कनेक्शन पान के ठेले तक जा रहा था जहाँ पर एक बैटरी व चार्जर जुड़े थे.

और पान के ठेले पर मौजूद था - घनश्याम साहू. 'हरित पुरुष' - घनश्याम साहू -

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पेड़ के तने पर रखे सोलर पैनल को लेकर मेरी जिज्ञासा बढ़ी तो घनश्याम साहू ने बताया -

पहले वो आस पास से वैध-अवैध कनेक्शन लेकर और इमर्जेंसी लाइट जैसे साधनों से अपनी गुमटी को रात में रौशन रखता था. परंतु एक बार कहीं से पता चला कि 3 हजार रुपए (किसी गुमटी धारक के लिए यह रकम बड़ी है) में यह सोलर पैनल मिलता है जिससे इन सबकी जरूरत नहीं रहती तो पैसे जमा कर यह खरीद लिया और अब उसे अपनी गुमटी को रौशन करने के लिए किसी चीज के लिए एक पैसा भी खर्च करने की जरूरत नहीं रहती. उसने गुमटी को रौशन करने के लिए बेहद कम खपत करने वाले एलईडी लैंप की पट्टी भी लगवा ली है. उसका सोलर पैनल बरसात के दिनों में भी उसकी गुमटी को 5 घंटे तक भरपूर रौशन करने लायक बैटरी तो चार्ज कर ही लेता है.

क्या आप भी घनश्याम साहू की तरह हरित नहीं होना चाहेंगे?

मैंने अपने घर को सोलर पैनल से ऊर्जित करने के लिए कुछ समय पूर्व कुछ सोच-विचार किया भी था, परंतु इसकी उच्च आरंभिक लागत (750 वॉट के लिए कोई 80-90 हजार, वह भी 30 प्रतिशत सरकारी सबसिडी के उपरांत) ने मेरे पांव वापस खींच लिए. यदि इसकी कीमतें और भी कम हों - 750 वॉट के लिए 30-35 हजार के रेंज पर - तो मुझे लगता है कि मेरे जैसे ढेरों लोग इस पद्धति को अपनाएंगे और फलस्वरूप न सिर्फ वातावरण का भला होगा, बिजली की कमी से जूझ रहे देश को भी राहत मिलेगी.




अब यह बात मैं नहीं कर रहा हूँ. नहीं तो लोग मुझ पर पिल पड़ेंगे और मेरी खुद की पोस्टों में से वर्तनी की सैकड़ों गलतियाँ निकाल कर दिखा देंगे. भई, यह बात मैं नहीं, स्पेलगुरू कह रहे हैं. और यदि वे स्पेलगुरू हैं, तो जरूर सही ही कह रहे होंगे. यह स्क्रीनशॉट देखें -



और, यदि सचमुच में ऐसा है तो आपको निराश होने की जरूरत नहीं है. अब आप मात्र 399 रुपए में अपनी वर्तनी सुधार सकते हैं. यह ऑफर सीमित समय के लिए ही है.

वैसे तो यह बेहद सस्ता मगर काम का सॉफ़्टवेयर वर्तनी जांच में आपकी सचमुच में सहायता करेगा, मगर पूरी तरह नहीं. क्योंकि कहाँ कि का प्रयोग करना है और कहाँ की का, वो ये नहीं बता पाएगा (आखिर यह भी तो एक तरह की गलत वर्तनी हुई ना)! फिर भी यह है तो काम का.

स्पेलगुरू की एक विस्तृत समीक्षा पहले भी दी जा चुकी है.

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जो पारम्परिक मीडिया पंडित यह मान बैठे थे कि इंटरनेट के नए मीडिया की पैठ और असर कभी भी अख़बार या टीवी जितनी नहीं हो सकते, उनकी खुशफहमी अब टूटने लगी है। जो स्वर पहले नए मीडिया को नामंजूर करने के लिए उठ रहे थे, अब वे उसे समझने के लिए सवाल पूछ रहे हैं. जो लोग नए मीडिया को खाए-पिए-अघाए, प्रतिक्रियावादी, उपभोक्तावादी, ‘साइबर नागरिकों’ का शगल कहते थे वे अपनी इस राय पर दोबारा सोच रहे हैं. कल तक नए मीडिया को नामंजूर करने वाला पारम्परिक मीडिया भी अब नए मीडिया से कंटेंट ले रहा है, यहाँ तक कि उसकी मौजूदगी को महत्वपूर्ण खबर बना रहा है. ब्लॉग पोस्ट करने या घटनाओं को रिकार्ड करने वाले किसी भी दर्शक का मोबाइल फोन जैसा छोटा उपकरण अब समाचार पत्रों और चैनलों का स्रोत बन रहा है.

आर. अनुराधा द्वारा संपादित, 'न्यू मीडिया – इंटरनेट की भाषायी चुनौतियाँ और सम्भावनाएँ' नामक पुस्तक के बैक कवर पर छपा यह संक्षिप्त उद्धरण साबित करता है कि पुस्तक में विषय वस्तु को वर्णित करने में कहीं कोई कोर कसर छोड़ी नहीं गई है.

 

इस पुस्तक में नौ अलग अलग शोधपूर्ण आलेखों को समायोजित किया गया है –

1. नए संचार माध्यम – एक परिचय - आर. अनुराधा

2. न्यू मीडिया व नागर पत्रकारिता : अनाहूत क्रांति – पृथ्वी परिहार

3. अभिव्यक्ति की निलम्बित आजादी और न्यू मीडिया – दिलीप मंडल

4. फेसबुक का समाज और हमारे समाज में फेसबुक – आशीष भारद्वाज

5. भाषा कम्प्यूटरी _ हिन्दी विकास का नया दौर – अनुनाद सिंह

6. हिन्दी ब्लॉग का सफर – रविशंकर श्रीवास्तव

7. हिन्दी में इंटरनेट – अवरूद्ध विकास की गाथा – आर. अनुराधा

8. वर्चुअल स्पेस में चोखेरबाली

9. कबाड़खाना : एक ब्लॉग का फलसफा – अशोक पाण्डे

उपर्युक्त शीर्षक युक्त आलेखों से पुस्तक की प्रकृति का अंदाजा आप लगा सकते हैं. वैसे, पुस्तक की सामग्री में विषय के तकनीकी पक्ष को जानबूझ कर छोड़ दिया गया है और आमतौर पर न्यू मीडिया के बढ़ते कदम और समाज में इसके व्यापक रूप से अपनाए जाने के कारणों व साधनों संसाधनों पर विशद चर्चाएं की गई है.

इस विषय में रुचि रखने वालों व विषय के विद्यार्थियों व संदर्भ के लिए यह पुस्तक बेहद उपयोगी व संकलन योग्य है.

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पुस्तक – न्यू मीडिया - इंटरनेट की भाषायी चुनौतियाँ और सम्भावनाएँ

संपादक – आर. अनुराधा

पृष्ठ – 131, हार्ड कवर, मूल्य 200 रुपए.

प्रकाशक – राधाकृष्ण प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड, 7/31 अंसारी मार्ग, दरियागंज, नई दिल्ली - 110002

यूनिकोड हिंदी डिस्प्ले की समस्या यदा कदा मुंह मारते ही रहती है. हाल ही में एक पाठक ने अपनी समस्या रखी -

 

आदरणीय रतलामी जी ,
सादर सप्रेम प्रणाम ।

जब जीमेल पृष्ठ पर टाइप मैटर एम एस वर्ड पर पेस्ट करता हूँ तो सिर्फ
डिब्बे दिखाई पड़ते हैं ।

मैं चाहता हूँ कि आज तक जीमेल में संरक्षित समस्त रचनाएँ एम एस वर्ड में
पेस्ट कर मेमॉरीकार्ड में रख लूँ ।

कृपया अवगत कराएँ कम्प्यूटर में कौन-सा फॉन्ट होना जरूरी होगा ।उसकी कोई
लिंक हो तो बेहतर ।

कृपया आपके अति व्यस्त समय में विघ्न डालने का अपराध माफ कीजिएगा ।

आपका स्नेहाकांक्षी
****
 
यह एक बड़ी समस्या है. वैसे आमतौर पर ऐसी समस्या तब आती है जब यूनिकोड सामग्री का फ़ॉन्ट सिस्टम में इंस्टाल न हो. मगर यहाँ ऊपर दी गई समस्या में यह बात नहीं है. आप कोई यूनिकोड टैक्स्ट कॉपी पेस्ट करते हैं तो पाते हैं कि गंतव्य में तो डब्बा दिख रहा है. लगता है यह सारा मैटर कूड़ा हो गया. परंतु ऐसा नहीं होता, दरअसल पाठ तो मौजूद रहता है, बस डिस्प्ले में समस्या के कारण डिब्बे दिखते हैं.
ये डिब्बे आमतौर पर एमएस वर्ड 2007 तथा कुछ एमएस वर्ड 2010 की फ़ाइलों में होता है. इसके लिए कुछ सरल से उपाय हैं -
1 - ऐसी फ़ाइलों का मैटर कॉपी कर नोटपैड में पेस्ट करें और इसे सेव-एज विकल्प लेकर एनकोडिंग में यूटीएफ -8 एनकोडिंग चुन कर फ़ाइल सहेजें और फिर फ़ाइल बंद कर फिर से ओपन करें. आपका मैटर अब सही दिखना चाहिए. यदि इससे भी काम नहीं बनता है या यह झंझट वाला लगता है और यदि आपकी समस्या वर्ड 2010 में है तो आपके लिए यह दूसरा विकल्प उत्तम है -
2 - ऐसी फ़ाइलों को एमएस वर्ड 2010 में सेव एज विकल्प चुन कर docx फ़ॉर्मेट (ध्यान दें कि doc फ़ॉर्मेट में नहीं,)में सहेज लें और फ़ाइल बन्द कर दें. एमएस वर्ड भी बन्द कर दें. अब जो नई फ़ाइल docx फ़ॉर्मेट में सहेजी गई है उसे खोलें. डब्बे गायब हो गए होंगे और आपका मैटर सही दिख रहा होगा. यह एमएस ऑफिस का एक बग है जो उम्मीद है कि नए संस्करणों में दूर कर लिया जाएगा.
3 - यदि आपके पास विंडोज लाइव राइटर है तो डब्बे-दार सामग्री को वहाँ कॉपी-पेस्ट करें. आपको तत्काल ही सामग्री देवनागरी में दिखने लगेगी.
4 - यदि आपके पास वर्ड 2010 नहीं है तो डब्बेदार पाठ सामग्री को एचटीएमएल फ़ाइल के रूप में सहेजें, और फिर इस फ़ाइल को किसी ब्राउजर में खोले. ब्राउजर में हिंदी बढ़िया दिखेगी. अब यहाँ से सामग्री कॉपी-पेस्ट कर काम में लें.
 
यदि अब भी कोई समस्या हो तो नीचे टिप्पणी में विस्तार से लिखें. कोई न कोई समाधान अवश्य निकलेगा.

पर, ये वो कहानी नहीं है जिसमें शेर है. अलबत्ता कंप्यूटरी दुनिया का एक ऐसा शेर है जो चहुंओर तहलका मचा रहा है, दहाड़ें मार रहा है.

मैंने पहले भी थोड़ी सी झलकी इस बारे में दिखाई थी.

पर, पहले पहली बात.

मैंने अपना सबसे पहला कंप्यूटर, कोई 18 वर्ष पहले, 1994 में खरीदा था, 40 हजार रुपयों में, अपने जीपीएफ़ के पैसे से लोन लेकर. उसका स्पेसिफ़िकेशन था –

486 प्रोसेसर 433 मे. हर्त्ज, 8 मे.बा. रैम, 1 जीबी हार्ड-डिस्क. चूंकि यह रतलाम में उस वक्त उपलब्ध नहीं था, तो इसे मुंबई से मंगवाया गया था – पूरे पैसे एक हफ़्ते पहले एडवांस में देकर. यह मिनि-टॉवर केबिनेट विशाल आकार में आता था, जो नया नया चला था. चलते समय यह गर्म हो जाता था और इसके पावर सप्लाई का पंखा बड़ी आवाजें करता था.  कुल पॉवर खपत था - 80 वॉट से अधिक (मॉनीटर का अलग)

और, अभी हाल ही में मैंने अपना नया कंप्यूटर खरीदा. क्रेडिट कार्ड के आकार का. महज 2400 रुपयों में. (वैसे तो इसकी असली कीमत 1200 रुपए (25 डॉलर) है, परंतु तमाम टैक्स और शिपिंग खर्चे मिलाकर यह मुझे दो-गुनी कीमत में मिला).  अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि टेक्नोलॉजी कहाँ से कहाँ पहुँच गई है!

 

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(सेमसुंग 22 इंच मॉनीटर के नीचे वास्तविक आकार के गौरैया के पैरों के पास वास्तविक आकार का रास्पबेरी पाई कंप्यूटर है - जो कि वस्तुतः एक सर्किट बोर्ड ही है)

इस क्रेडिट-कार्ड आकार कंप्यूटर का स्पेसिफ़िकेशन है –

ARM प्रोसेसर - 700 मे.हर्त्ज, 512 मेबा रैम, 2 जीबी एसडी कार्ड. इसे मैंने इंटरनेट पर घर बैठे खरीदा, कैश ऑन डिलीवरी पर. – और इस सेंसेशनल कंप्यूटर का नाम है – रास्पबेरी पाई. चूंकि इसका आकार ही क्रेडिट कार्ड जितना है, अतः इसकी बिजली की खपत बेहद कम है. चार पेंसिल सेल से अथवा अपने मोबाइल चार्जर से इसे चला सकते हैं. और, सांसें थाम लीजिए - कुल पॉवर खपत है 1 वॉट से भी कम. पंखा-आवाज-रहित.

रास्पबेरी पाई – पिछले छः महीने से अधिक समय से इसकी इतनी मांग है कि पूर्ति नहीं हो पा रही है और लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. मैंने भी बैक-ऑर्डर बुकिंग कर इसे मंगवाया तो कोई पंद्रह दिन बाद मेरा नंबर लगा. पहले यह प्रतीक्षा समय और भी अधिक था.

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(रास्पबेरी पाई कंप्यूटर - गौरैया भी हो गई दीवानी? एक यूएसबी पोर्ट में नेटगीयर वाई-फाई डांगल लगा है)

आखिर क्या है इस रास्पबेरी पाई के प्रति लोगों की दीवानगी में?

आप कुछ अंदाजा यहाँ से लगा सकते हैं.

पाई के साथ मेरा पहला दिन

चूंकि पाई को आप अपने मोबाइल चार्जर से चला सकते हैं, तो मैंने पाई को अपने मोबाइल चार्जर से जोड़ा, इसके एचडीएमआई पोर्ट (वीडियो आउट भी है) को मॉनीटर/टीवी स्क्रीन से जोड़ा, यूएसबी पोर्ट में कीबोर्ड और माउस को जोड़ा और पहले से तैयार रास्पबेरी ओएस (वस्तुतः लिनक्स का एक रूप) युक्त 2 जीबी एसडी कार्ड को एसडी कार्ड स्लॉट में लगाया और चार्जर का स्विच ऑन कर दिया.

पंद्रह सेकण्ड के भीतर मेरा रास्पबेरी पाई कंप्यूटर – वह भी मल्टीमीडिया युक्त - चालू हो गया.

अब बारी थी

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(रास्पबेरी पाई डेस्कटॉप)

हिंदी समर्थन के जांच-परख की. इंटरनेट (लैन पोर्ट व यूएसबी डांगल दोनों का ही बढ़िया समर्थन है) पर रचनाकार.ऑर्ग शानदार दिख रहा था. याने हिंदी (व अन्य भारतीय भाषाओं के) के फ़ॉन्ट डिफ़ॉल्ट रूप में शामिल किए गए हैं.

हिंदी की-बोर्ड जोड़ने (एनेबल करने) के लिए थोड़ा उपक्रम करना पड़ा, हालांकि यह भी सिस्टम में अंतर्निर्मित ही है.

बस यह एक कमांड दिया और काम बन गया –

setxkbmap in,us -option grp:ctrl_shift_toggle

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(पाई में इंटरनेट पर हिंदी साइट रचनाकार, टैक्स्ट एडीटर पर हिंदी टाइपिंग, एसेसरीज फ़ोल्डर)

पाई के साथ एडवेंचर चालू है...

 

(बहुत से पाठकों ने रास्पबेरी पाई के प्रति अपनी जिज्ञासा जाहिर की है. इस कंप्यूटर के बारे में बिगिनर गाइड यहाँ है - http://elinux.org/RaspberryPiBoardBeginners तथा  रास्पबेरी पाई सचित्र गाइड बुक पीडीएफ में यहाँ है. )

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और यदि अब तक नहीं देखा है तो कभी देखिएगा भी मत!

ठंड रखिए. जल्द ही बताता हूँ कि क्यों.

जब से भारत का पहला एचडी म्यूजिक चैनल एमट्यून्स एचडी चालू हुआ था, तब से बड़ी इच्छा थी कि इसे देखा जाए. मेरे टाटा स्काई एचडी में यह बंडल नहीं था, और कहीं और इसे देखने का सौभाग्य भी नहीं मिला था. मैंने एमट्यून्स और टाटा स्काई में विशलिस्ट में भी लिखा कि इसे जल्द ही टाटास्काई में बंडल किया जाए.

और, मेरी मुंह मांगी मुराद दो दिन पहले पूरी भी हो गई.

टाटा स्काई एचडी चैनल में एमट्यून्स एचडी आने लगा.

मैं तो मारे खुशी के उछल पड़ा और जल्द ही एमट्यून्स एचडी लगाया. एचडी ऑडियो-वीडियो के साथ संगीत के आनंद का अपना अलग ही मजा है. मैं आसन जमा कर अपने टीवी स्क्रीन के सामने बैठ गया.

परंतु यह क्या? जैसे ही एमट्यून्स एचडी चालू हुआ मुझे लगा कि मैं ठगा गया. घंटे भर में तो मेरी सारी आशाएं धूल धूसरित हो गईं और दूसरे घंटे से मैंने उस चैनल को अपने पसंदीदा से हटा लिया.

लगा कि मन में फालतू ही इच्छा पाले बैठे थे एमट्यून्स एचडी देखने को.

अगर आपके मन में भी इस एचडी म्यूजिक चैनल को देखने की इच्छा हो, तो बिलकुल त्याग दीजिए.

कारण?

कोई एक हो तो बताएं. फिर भी, -

  • इसका एचडी वीडियो स्पष्टतः अपस्केल्ड है, और बेहद पैची वीडियो आता है, जिसे देखने में बिलकुल भी मजा नहीं आता.
  • इसमें विज्ञापनों की भरमार रहती है, वो भी प्रायः एसडी क्वालिटी वाले, जो कि एचडी फार्मेट में फूले-फैले और बिगड़े हुए नजर आते हैं.
  • गानों के नाम पर प्रोमो के अलावा और कुछ नहीं आता

पर, अभी बम फूटना बाकी है -

इसका ऑडियो एकदम घटिया क्वालिटी का मोनो है. जी हाँ, आपने सही पढ़ा! एचडी ऑडियों में 5.1 - 7.1 चैनल होते हैं, और स्टीरियो में 2. परंतु इस तथाकथित एचडी चैनल में वीडियो गानों के साथ बहुत ही घटिया क्वालिटी का 'मोनो ऑडियो' प्रसारित होता है.

 

यानी, कुल मिलाकर दर्शकों को बेवकूफ बनाया जा रहा है, उनका मजाक बनाया जा रहा है. एचडी के नाम पर कूड़ा परोसा जा रहा है. किसी अन्य सेवा से मैं इतना डिसएप्वाइंट नहीं हुआ था जितना इससे.

ऐसा नहीं है कि इस चैनल में कैपेबिलिटी नहीं है या टाटास्काई की स्ट्रीमिंग में समस्या है. दरअसल इस चैनल में प्रसारित होने वाले कुछ अच्छे क्वालिटी के विज्ञापनों में वीडियो और ऑडियो बाकायदा अच्छे, एचडी क्वालिटी के ही आते हैं. जिससे यह पता चलता है कि चैनल को चलाने वाले साउंड इंजीनियर्स इसे बेहद चलताऊ अंदाज में चलाते हैं, और क्वालिटी पर कोई ध्यान ही नहीं देते.

वैसे, गीत-संगीत के एकाध चैनलों को छोड़कर सभी के यही हाल हैं, और सभी ऑडियो के मोनो प्रसारण करते रहते हैं. एमटीवी और सोनी मिक्स में स्टीरियो प्रसारण होता है मगर उसमें भी ट्रेबल हाई और बास गायब रहता है.

जीटीवी एचडी का भी यही हाल है. उसका वीडियो तो भले ही थोड़ा ठीक रहता है, मगर सारेगामापा जैसे संगीत के प्रोग्रामों में इसका एचडी ऑडियो बेहद घटिया रहता है और यह बारी बारी से कभी सेंटर, कभी लेफ्ट तो कभी राइट से आता रहता है!

एमट्यून्स एचडी - एचडी? माई फूट!

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यहाँ जनता भोजन उपलब्ध है - वह भी आदेशानुसार. भोजन फ़ॉर मैंगो पीपुल?

जरा और दरयाफ़्त किया तो पता चला कि सिर्फ देखने-दिखाने के लिए छाप कर चिपकाया गया है. यानी भोजन नदारद! जनता भोजन आप सिर्फ देख सकते हैं, खा नहीं सकते.

तो अब सवाल ये है कि अंबानीज़, वाड्राज़ भोजन कहाँ मिलता होगा?

खा तो ख़ैर, मैं इसे भी नहीं सकता, मगर देख तो सकता हूँ. यदि कोई बताए (चित्रादि के लिंक भी चलेंगे!) कि कहां मिलता है तो दर्शन लाभ लेने की कोशिश करूंगा!



दीपावली आता है और हमारे आपके लिए तो जैसे मुसीबतों का पहाड़ ले आता है. और मैं घर की रँगाई-पुताई से लेकर नए लिबास-जूतों या इसी तरह के दीगर खर्चों की बात नहीं कर रहा. मैं तो बधाईयों की बात कर रहा हूँ!
अब देखिए ना, अपना मेल बॉक्स दीपावली के सप्ताह भर पहले से जेनुइन क़िस्म के (कतई स्पैम नहीं!) ईमेलों से भरने लग जाता है. और नित्य कोई तीन-चार गुना ज्यादा ईमेल चला आता है इन दिनों. सबमें घुमा-फिरा कर एक ही बात कही जाती है – दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ! लफ़्जों के खेल, चित्रों के अखाड़ों, मल्टीमीडिया ऑडियो-वीडियो संलग्नकों के सर्कसों - सबका सार यही होता है – दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ!

एक भारी मुसीबत और है. वो है अलादीन के जिन्न की तरह आपके आगे पीछे लगा हुआ आपका मोबाइल फोन. अभी पता नहीं किसने और किसलिए यह अजीब तुलनात्मक गिनती कर डाली कि भारत में जितने तो शौचालय नहीं हैं उससे कई गुना मोबाइल फ़ोन हैं – नंबर डायल करो और बात करने के लिए, सॉरी – बधाई देने के लिए जिन्न की तरह बंदा हाजिर! बहरहाल, बात बधाईयों की हो रही थी. तो आपका मोबाइल भी हर दूसरे मिनट कालर ट्यून बजा कर टां टूं करता है और इसका इनबॉक्स पीं पीं करते हुए हर घंटे फुल हो जाता है. यानी बधाईंयाँ सुनते भी रहें और दुबले पर दो आषाढ़ की तरह एक और अतिरिक्त झंझट कि एसएमएस पढ़ते रहें और खाली करते रहें नहीं तो यह हर एसएमएस पर अतिरिक्त रूप से आगाह करता है कि बक्सा खाली करो! बक्सा खाली करो! – उलटी-सीधी किस्म की भाषाओं, बोलियों और मल्टीमीडिया युक्त इन एसएमएसों का अंततः यही संदेश होता है – दीपावली की हार्दिक बधाईयां!

समस्या यहीं समाप्त नहीं होती कि आपको बधाईयाँ मिलती हैं. आप तो गर्व कर सकते हैं कि आपको संसार में सबसे ज्यादा दीपावली की बधाईयाँ मिल रही हैं. असल समस्या आगे होती है. अब आपको भी हर एक को प्रत्युत्तर में धन्यवाद देना होगा, बदले में हार्दिक बधाईयाँ टिकाने ही होंगे अन्यथा क्या पता अगला बुरा मान जाए. भई, मुझे तो लगता है, पर, प्रत्याशित-अप्रत्याशित बधाईयों का प्रत्युत्तर देना मुसीबत से कम अगर किसी को लगता हो तो वो व्यक्ति सचमुच वंदनीय है.

इधर ट्विटरियों और फेसबुकियों की हालत तो और खराब है. आप फ़ेसबुकिये हैं तो आपकी वाल पे आपके पूरे पाँच हजार मित्रों, उनके मित्रों, उनके मित्रों के मित्रों के बधाई संदेश कोई सप्ताह भर पहले से चिपकने चालू हो जाते हैं तो सिलसिला छोटी-दीपावली के आगे दो सप्ताह तक भी थमता नजर नहीं आता. अब सवाल ये है कि इतनी सारी बधाईयाँ आदमी ले के कहाँ जाए, और यदि वो प्रत्युत्तर में हरेक के वाल पर अपनी बधाईयाँ व धन्यवाद चिपकाने लगे तो इसमें लगने वाले समय की गिनती के लिए स्टीफ़न हाकिंग को हायर करना पड़े!
इसीलिए सोचता हूँ कि प्रत्येक बधाई संदेशों के अलग-अलग प्रत्युत्तर देने (व मेरे अपने कोटे के, आप सभी पाठकों को मेरे प्रत्यक्ष बधाई संदेशों को देने) के बजाए अपने इस लेख के माध्यम से कुछ अ-हार्दिक क़िस्म की अ-बधाईयाँ (कु-बधाईयाँ नहीं,) आपको दे देता हूँ. वैसे भी, इस क़िस्म के अ-हार्दिक, अ-बधाईयों की दरकार आजकल हर किसी को है. अब यह आप पर निर्भर है कि आप इसे स्वीकारते हैं या नहीं. अलबत्ता आपकी इसी किस्म की अहार्दिक अबधाईयों को मैं तहे दिल से स्वीकार करूंगा. तो पेश है आपके लिए मेरी तरफ से कुछ अहार्दिक किस्म की अबधाईयाँ –

•    दीपावली पर आपके क्षेत्र-शहर का ट्रांसफ़ॉर्मर का फ़्यूज उड़ जाए/ जनरेशन बैठ जाए और इस कारण बिजली गुल हो जाए ताकि सजावट के लिए लगाए गए हजारों-लाखों झालरों में बिजली का अपव्यय न हो (और, यदि कंटिया नहीं लगी हो तो आपका बिल भी कम आवे,) और नतीजतन, कुछ ग्लोबल वार्मिंग कम हो, पर्यावरण को थोड़ा कम नुकसान हो, मानवता का भला हो.

•    दीपावली पर ईश्वर करे कि पटाखों पर पेट्रोल व सातवें एलपीजी सिलेंडर की तरह महंगाई की मार कुछ यूँ हो कि आप उन्हें खरीद न सकें, सिर्फ प्रतीकात्मक ही इक्का दुक्का फ़ोड़ सकें – ताकि आपके कानों की सुरक्षा हो और आपके पास-पड़ोस के पर्यावरण का संरक्षण हो.

•    आपके लिए ईश्वर से कामना है कि दीपावली (या ऐसे ही वार-त्यौहारों पर) में सप्ताह भर के लिए इंटरनेट, मोबाइल, टेलीफोन के नेटवर्क जाम हो जाएँ, बैठ जाएँ ताकि आप प्रत्यक्ष रूप आ-जाकर एक दूसरे के गले लगकर बधाईयों का आदान प्रदान कर सकें.

तो, आपके लिए ये थीं मेरी कुछ अहार्दिक, अबधाईयाँ. मेरे लिए आपकी भी ऐसी ही कुछ होंगी. ऐसी तमाम अहार्दिक, अबधाईयों का हार्दिक स्वागत है.

  

तकनीक दृष्टा विनय प्रजापति ने बड़ी मेहनत से  वर्ष 2012 के टॉप 15 हिन्दी ब्लॉगों की एक सूची जारी की है. इस सूची में छींटे और बौछारें 7 वें क्रम पर है. इससे पूर्व एक आलसी का चिट्ठा और परिकल्पना में भी आपके इस चहेते ब्लॉग को इसी वर्ष शीर्ष रैंकिंग मिल चुकी है. यह इस ब्लॉग के प्रति आप सभी के प्यार व उत्साहवर्धन का नतीजा है. आप सभी पाठकों व प्रशंसकों का हार्दिक धन्यवाद.

मैं कोशिश करूंगा कि आने वाले समय में अपने ब्लॉग लेखन में थोड़ी सी और नियमितता लाऊं - जो अभी हाल ही में थोड़ी अनियमित सी हो चली थी.

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आप सभी को दीप-पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!

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ये आईक्यू का फंडा बड़ा अजीब है. हो सकता है कि आपका आईक्यू ओसामा या अल-जवाहिरी के बरोबर हो! बहरहाल, ये आईक्यू का मामला गर्म इसलिए हुआ है कि भाजपाध्यक्ष नितिन गडकरी के मुताबिक स्वामी विवेकानंद और भाई दाऊद आईक्यू के मामले में एक समान हैं!

 

"...यह कहा था गडकरी ने -
गडकरी ने रविवार को भोपाल में ओजस्विनी समारोह में स्वामी विवेकानंद के आईक्यू की तुलना आतंकी दाऊद इब्राहिम से कर डाली। उन्होंने कहा कि दाऊद ने अपने आईक्यू का उपयोग अपराध के क्षेत्र में किया तो वह अपराधी बन गया, जबकि विवेकानंद ने समाज,देश के हित में अपने आईक्यू का इस्तेमाल किया तो वे महान बन गए। आईक्यू दोनों जगह समान है, पर महत्वपूर्ण ये है कि बुद्धिमत्ता, कौशल का उपयोग किस तरह होता है...."

समाचार स्रोत - पत्रिका

 

जो भी हो, इस वक्तव्य से तो नितिन गडकरी के आईक्यू का पता पूरी तरह से लग जाता है!

कुछ इस तरह जैसे कि बहुत से फेसबुकिए, ट्विटरिए, ब्लॉगरिये के पोस्टों-टिप्पणियों और स्टेटस अपडेट से उनके आई-क्यू का पता पूरी तरह से लग जाता है.

पर, अब जरा आप भी  अपनी पड़ताल कर लें कि आपका अपना आईक्यू कितना है, और किसके बराबर है!

अपनी हिंदी सुधारने के लिए अब आपके पास विकल्पों की कमी नहीं रही.

हाल ही में भाषागिरी.कॉम ने हिंदी सुधारने - यानी हिंदी वर्तनी जाँच के लिए एक बेहतरीन प्रोग्राम जारी किया है - स्पेलगुरू.

आरंभिक जांच पड़ताल में यह प्रोग्राम उम्दा लग रहा है. इसका शब्द-भंडार भी विशाल है.

और, जो चीज इसे विशिष्ट बनाती है वह है इसका इंटेलिजेंट वर्तनी जांच सिस्टम जो आपके कर्सर पोजीशन और क्लिक के आधार पर आपको वर्तनी जांच की अलग अलग सुविधा प्रदान करता है.

जैसे कि यदि आप गलत वर्तनी वाले शब्द के शुरू में बायां क्लिक करेंगे तो शुरुआती अक्षर को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक शब्द का सुझाव देगा, और यदि आप शब्द के आखिर में दायां क्लिक करेंगे तो शब्द के अंतिम अक्षरों को ध्यान में रखते हुए शब्द का सुझाव देगा. यह आखिरी अक्षरों वाला सुझाव तुकांत कविता लिखने वालों के लिए शायद काम आये.

मैंने रचनाकार में प्रकाशित एक आलेख का वर्तनी जांच इस प्रोग्राम के जरिए किया - जिसका स्क्रीनशॉट नीचे है -
(चित्र को पूरे आकार में देखने के लिए उस पर क्लिक करें)

तो आप देखेंगे कि इसका शब्द भंडार काफी विस्त़त है और यह कुछ नाम और अंग्रेज़ी के शब्दों को ही नहीं पहचान पा रहा है, परंतु आप इन्हें भविष्य में प्रयोग के लिहाज से इसके शब्द भंडार में जोड़ भी सकते हैं.

यदि आप वर्तनी जांच की सुविधा वाला प्रोग्राम चाहते हैं तो यह आपके बेहद काम का है. इसमें कॉपी-पेस्ट कर मैटर के वर्तनी जांच की सुविधा तो है ही,  इस प्रोग्राम में बेसिक लेखन की भी सुविधा है. फ़ोनेटिक रोमन में भी हिंदी लिख सकते हैं.

और सबसे बड़ी बात ये है कि आप इसमें इस्की व यूनिकोड दोनों में ही हिंदी वर्तनी की जांच कर सकते हैं. इस तरह का यह शायद अकेला प्रोग्राम है.

अधिक जानकारी व डेमो डाउनलोड के लिए भाषागिरी.कॉम की साइट - http://www.bhashagiri.com/#!home/mainPage पर जाएं. वहाँ एक बढ़िया डेमो वीडियो भी दिया है जिसे आप जरूर देखें.

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लगता है कि माइक्रोसॉफ़्ट अपने नए ताजातरीन विंडोज 8 ऑपरेटिंग सिस्टम को हर किसी के गले में एक तरह से मुफ़्त में ठूंसना चाहता है ताकि चहुँ ओर विंडोज का ही साम्राज्य बना रहे. और इसीलिए विंडोज 8 के संस्करण बेहद सस्ते में बेचे जा रहे हैं.

यदि आपके कंप्यूटर विक्रेता ने आपके कंप्यूटर में पायरेटेड विंडोज एक्सपी, विंडोज 7 या ऐसा ही कोई अन्य संस्करण डाला हुआ है और आपको गाहे बगाहे इसके जेनुइन नहीं होने की चेतावनी मिलती रहती है और इसके अपग्रेड इत्यादि की सुविधा नहीं मिलती है तो आप सिर्फ 699 रुपए (14.99 डॉलर)  खर्च कर अपने विंडोज को जेनुइन बनाने की सुविधा पा सकते हैं. खासतौर पर भारतीय उपमहाद्वीप के उपयोगकर्ताओं के लिए तो यह सुविधा अभी भी उपलब्ध है.

दरअसल (जिसे डेलिबरेट लूप-होल - यानी जान बूझ कर छोड़ी गई कमी बताया जा रहा है) आपके वर्तमान विंडोज एक्सपी या विंडोज 7  इंस्टालेशन को सिर्फ 699 रुपए में विंडोज 8 से अपग्रेड करने के लिए एक विकल्प माइक्रोसॉफ़्ट ने दिया है , यदि आपने अपना कंप्यूटर 2 जून 2012 से 31 जनवरी 2013 के बीच खरीदा है. और इसकी पुष्टि के लिए आपसे ऑनलाइन सिर्फ कुछ मूलभूत जानकारियाँ और एक डिक्लेरेशन मांगा जाता है और कुछ नहीं.

चूंकि किसी तरह का ऑनलाइन वेरीफ़िकेशन नहीं किया जा रहा तो आप इस तरह इस सुविधा का लाभ आप अपने पुराने याने उक्त अवधि से पहले खरीदे गए  कंप्यूटरों व पायरेटेड इंस्टाल किेए गए विंडोज संस्करणों पर भी ले सकते हैं.  इस हिसाब से वैसे यह भी अवैध और पायरेसी जैसी ही चीज हुई, मगर इसमें माइक्रोसॉफ़्ट की मौन सहमति मिलती तो दिखती ही है.

इस बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर जाएं -

http://techpp.com/2012/10/27/windows-8-promo-code/

निर्णय लेने से पहले उक्त लेख पर आई टिप्पणियों पर भी गौर कर लें.

 

डिस्क्लेमर - इस लेख का उद्देश्य महज पाठकों को ज्ञान देना है.  उत्पाद के किसी तरह की ब्रांडिंग, कैनवासिंग, पाइरेसी इत्यादि को बढ़ावा देना या अन्य किसी व्यापारिक नफा-नुकसान का उद्देश्य नहीं है.

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कल अखबार था रवि,

आज हो गया है रद्दी।

सर्टिफ़िकेट जारी हो गया है कि पैदा होने के लिए अपना एमपी पूरे देश में सबसे खराब, सबसे रद्दी जगह है. अब एमपी में पैदा तो हो लिए, जिस पर अपना कोई दखल नहीं था. सोचते हैं कि मामले को कम्पनसेट करने के लिहाज से अब कम से कम मरने के लिए तो सबसे शानदार जगह का जुगाड़ पहले से क्यों न कर लें!

जैसे 'नेता' शब्द एक गाली के रूप में प्रचलित हो गया है, उसी तरह से एमपी वाला के भी बदलने के खतरे हैं. किसी को बताओ कि भोपाल, एमपी से हूँ, तो वो दन्न से पूछेगा - क्या पैदा भी वहीं हुए थे? या नहीं भी पूछेगा तो मन में कहेगा ही - साला यहीं, इस सबसे खराब जगह में पैदा भी हुआ होगा!

इस खतरे से बचने के लिए संभावित माता-पिताओं को डिलीवरी के समय एमपी से अन्यत्र कहीं ले जाना चाहिए. भले ही एमपी का बार्डर शामगढ़ क्यों न हो. रद्दी जगह में पैदा होने के ताउम्र मलाल या लांछन से तो बच सकेंगे. माता पिताओं को यह संतुष्टि रहेगी कि उन्होंने अपने बच्चे के लिए इतना कुछ किया और बच्चे भी अपने माता-पिता का अहसान मानेंगे कि उन्होंने रद्दी जगह पैदा होने से बचाया.

पर, जो आलरेडी रद्दी एमपी में पैदा हो गए हैं, उन्हें अपना आखिरी सांस लेने के शानदार स्थान का जुगाड़ कर लेना चाहिए. नहीं तो लोग बोलेंगे - साला पैदा भी रद्दी जगह हुआ और मरा भी रद्दी जगह. कम से कम किसी शानदार जगह तो जाकर मरता!

एक बार एक शादीशुदा रचनाकार ने शाइरी ठोंकी - मेरी तो ख्वाहिश है कि मेरी आखिरी सांसें उनके आगोश में निकले. तो दन्न से किसी ने पूछा ये 'उनके' कौन हैं? किसी ने उनकी यह शाइरी उनकी पत्नी तक पहुँचा दी. नतीजतन उन रचनाकार महोदय को अपनी वर्तमान सांसें लेना भी भारी पड़ गईं.

इस खबर के मुताबिक अगर आप भारत में गोआ और मणिपुर के अलावा कहीं भी अन्यत्र पैदा हुए हैं, तो आप भी मेरी तरह ही रद्दी जगह में ही पैदा हुए हैं. रद्दी का मामला थोड़ा ऊपर नीचे है, उन्नीसा-बीसा है तो क्या हुआ, है तो रद्दी जगह ही. तो आप भी मेरी तरह मामले को कम्पनसेट करने के लिहाज से मरने के लिए शानदार जगह का जुगाड़ पहले से क्यों नहीं कर के रख लेते?

पैदा होने और मरने के शानदार और सबसे रद्दी जगहों की चर्चा तो हो गई. मगर ये मौजूं सवाल तो हाल फिलहाल जीने के लिए है बंधु. आप क्या समझते हैं, आप जहाँ, जिस शहर में अभी जैसे तैसे रह रहे हैं, ले दे के जी रहे हैं,  क्या वो वाकई शानदार है या है एकदम रद्दी?

--

व्यंज़ल

आऊँ कैसे तुझसे मिलने

तेरा शहर बड़ा है रद्दी

 

शहरों में नई होड़ है

कि कौन ज्यादा है रद्दी

 

देखो साठ साल में तो

संसद भी हो गया है रद्दी

 

जीना आसाँ होगा भी

ये सवाल ही है रद्दी

 

कल अखबार था रवि

आज हो गया है रद्दी

--

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क्या कभी आपके मन में ये अफसोस हुआ है कि आप या आपके पति/पत्नी कलेक्टर क्यों न हुए?

क्या आप या आपके बच्चे कलेक्टर बनने का सपना पाले हुए हैं?

यदि हाँ, तो अफसोस भूल जाएं, और उस तुच्छ सपने को त्याग दें - अभी, तुरंत.

 

आधुनिक भारत के दो प्रमुख, टॉप प्रोफ़ेशनों - कलेक्टरी और नेतागिरी के बीच अंतरंग संबंध की है ये बानगी !

पेश है (आमतौर पर होने वाले?) बेहद मनोरंजक वार्तालाप के मुख्य अंश जो दैनिक भास्कर में 9 अक्तूबर 2012 को छपे:

"गुड्डू और भूरिया बोले- हमें समझा रहे हो कलेक्टर

 
रतलाम जिला सतर्कता समिति की बैठक में कलेक्टर के देरी से पहुंचने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया व सांसद प्रेमचंद गुड्डू नाराज हुए। उनके बीच कुछ इस तरह से वार्तालाप हुआ-

अंदर आते ही सांसद कांतिलाल भूरिया- कहां है कलेक्टर।

गुड्डू- ये कोई तरीका है। कलेक्टर अभी तक नहीं पहुंचे। मजाक बना रखा है।

(इसी बीच कलेक्टर अंदर पहुंचते हैं।)

गुड्डू- तुम हो कलेक्टर, तमीज है तेरे को?

कलेक्टर- बैठिए, बैठिए।

गुड्डू- क्या बैठिए, बैठिए

भूरिया- आप अफसर हैं और समिति के सेक्रेटरी हैं। अध्यक्ष आ गया है सांसद आ गए। आपके पते नहीं हैं। ऐसे प्रोटोकाल का पालन करते हो।

गुड्डू- प्रोटोकाल क्या होता है पता है तुझको। हम कब से बाहर खड़े हैं।

भूरिया- सर्किट हाउस पर हमने बुलाया, आपने मना कर दिया, मैं नहीं आ सकता।

कलेक्टर- प्लीज बैठिए।

गुड्डू और भूरिया दोनों- तुम्हारे कहने से बैठेंगे, हमें समझा रहे हो।

कलेक्टर- आप बैठिए।

गुड्डू- प्रोटोकॉल सीखो पहले। तुम्हारी कलेक्टरी भूला दूंगा।

कलेक्टर- मैं रिक्वेस्ट कर रहा हूं, तुम ऐसे बात करोगे तो ठीक नहीं होगा।

भूरिया और गुड्डू- क्या कर लोगे आप, गलती आपकी और हमें सिखा रहे हो।

भूरिया- कौन लिख रहा है प्रोसिडिंग, निंदा प्रस्ताव पास करिए हमारी ओर से। मीटिंग के सेके्रटरी हो आप। आपको तौर-तरीके याद नहीं।

गुड्डू- तुम्हारे जैसे कई कलेक्टर देखे हैं। व्यवहार ठीक करो, नहीं तो हम इलाज भी कर देंगे। एम. गीता को भी मैंने बैठा दिया है। आपके यहां के मालपानी को भी बाबू बनाकर बैठा दिया है।

भूरिया - मीटिंग का एजेंडा आज भिजवा रहे हो। तुम्हे प्रोटोकाल की जानकारी नहीं है।

गुड्डू (जिला पंचायत सीईओ से)- प्रोसिडिंग कौन लिख रहा है। हमारी ओर से कलेक्टर का निंदा प्रस्ताव लिखो। हमारे यहां 8-9 घंटे मीटिंग होती है। खाना-पीना सब होता है। यहां एजेंडा भी नहीं बना।  "

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टायलेट मंदिर दोऊ सामने जाऊं काके बताय

बलिहारी प्रेशर आपनो जल्दी टायलेट जाय

वैसे, समस्त ब्रह्मांड में किसी मंत्री का सर्वकालिक सत्यवचन इसे माना जाना चाहिए. या ये भी कहा जा सकता है कि भारत के किसी मंत्री ने पहली बार सत्यवचन कहे हैं.

सवाल ये है कि टायलेट (शौचालय से गरीबी की बू आती है, जबकि टायलेट से अमीरी की खुशबू, इसीलिए हम इसी शब्द का प्रयोग करेंगे) मंदिर से ज्यादा पवित्र क्यों है. आइए, जरा पड़ताल करें.

तो पहले ये देखें कि आप मंदिर क्यों जाते हैं? (मंदिर की जगह आप गिरिजाघर, मस्जिद, गुरुद्वारा कुछ भी प्रतिस्थापित करने को स्वतंत्र हैं)

  • · मंदिर में आप अपने पिछले कर्मों के पाप धोने जाते हैं.
  • · मंदिर आप शांति की तलाश में जाते हैं
  • · मंदिर आप सर्वशक्तिमान परमेश्वर की पूजा प्रार्थना करने जाते हैं
  • · मंदिर आप मृत्युपरांत स्वर्ग प्राप्ति के लिए जाते हैं
  • · मंदिर आप अपने अगले जन्म में शानदार जीवन प्राप्ति के लिए जाते हैं

अब जरा देखें कि आप टायलेट क्यों जाते हैं.

  • · टायलेट में आप पिछले दिन का पाप धोने जाते हैं. चाहे वो मूली के पराँठे हों या केएफसी का बर्गर सब कुछ धुलता है, और आपके किए गए पाप (खानपान) के मुताबिक होता है. यहाँ भी आप वही दुआ करते हैं कि कल बहुत पाप हो गया था, अब आगे कोई पाप नहीं करेंगे, मगर टायलेट से बाहर आने के घंटे भर बाद भूल कर उन्हीं मॅकडोनल्ड्स और डोमिनोज़ के चक्कर लगाते नजर आते हैं.
  • · टायलेट के भीतर की शांति का कोई मुकाबला कर सकता है? आपकी खुद की सांसें भी यहाँ सुनाई पड़ती हैं. और कभी कभी तो शांति के (शांति से निपटने) के लिए अपनी खुद की सांसें भी रोकनी पड़ती हैं.
  • · टायलेट आप इस लिए जाते हैं कि आप फिर से, ज्यादा अच्छे से पेट पूजा कर सकें. पेट पूजा से बड़ी बड़ी पूजा इस दुनिया में है ही नहीं. सर्वशक्तिमान परमेश्वर की भी नहीं!
  • · टायलेट आप टायलेटोपरांत की स्वर्गिक अनुभूति के लिए जाते हैं. जरा एक नंबर और दो नंबर के प्रेशर को घंटे भर क्या, दस पंद्रह मिनट के लिए ही सही, रिलीज होने से रोक देखिए. और इसके बाद जब आपका प्रेशर रिलीज होगा तो उस स्वर्गिक अनुभूति की कल्पना इस या उस जीवन के स्वर्ग से शर्तिया कम ही होगी. और, लगता है कि मनुष्य ने स्वर्ग की कल्पना इसी अनुभूति को भोग कर ही की होगी.
  • · टायलेट आप इसलिए जाते हैं कि आपका आगे का आने वाला समय शानदार हो. यही नहीं, आपके आसपास का वातावरण भी दुर्गंध रहित, आवाज रहित, कष्टरहित हो.

अब तो आप मानेंगे न कि टायलेट मंदिर से ज्यादा पवित्र है.

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टेक्नोलॉज़ी दिनोंदिन कितना छलांग मार रही है यह इसका अप्रतिम उदाहरण है. क्रेडिट कार्ड साइज के एक संपूर्ण एचडी सक्षम कंप्यूटर – रास्पबेरी पाई की कीमत महज ढाई हजार रुपए है, और इसकी मांग इतनी अधिक है कि पिछले छः महीने से लगातार यह मांग पर उपलब्ध ही नहीं है (आरएस कंपोनेंट पर आज की स्थिति में, ऑर्डर करने के बाद दो महीने का इंतजार करना होगा). यानी इसे खरीदने के लिए आपको प्रीऑर्डर कर बुक करना होता है. आप पूछेंगे कि इसके पीछे कारण क्या है, तो उत्तर है – क्रेडिट कार्ड के आकार के, इस डर्ट-चीप – बेहद सस्ते संपूर्ण कंप्यूटर सिस्टम जिसमें आप एसडी कार्ड या यूएसबी ड्राइव से लिनक्स का विशिष्ट संस्करण चला सकते हैं, जिसके उपयोग की अनंत संभावनाएं हैं! और यही इसके अत्यधिक मांग की वजह है. महज ढाई हजार रुपए के रास्पबेरी पाई को अपने एचडी टीवी से जोड़ कर उसे न सिर्फ स्मार्ट टीवी बना सकते हैं बल्कि उसे पूरे कंप्यूटर में बदल सकते हैं. परंतु इसके लिए आपको थोड़ा सा टैकी होना पड़ेगा.

 

और अब इसी लाइन पर चलते हुए आम जनता के उपयोग के लिेए टीवी और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक कंपनी अकाई ने ६,९९० रुपये की कीमत का एक स्मार्ट बॉक्स जारी किया है. कुछ चीनी कंपनियों के इसी तरह के स्मार्ट बॉक्स तो और भी सस्ते हैं. यह उपकरण किसी भी टेलीविजन के साथ जोड़ा जा सकता है भले ही वह सीआरटी, प्लाज्मा, एलसीडी या एलईडी हो. और यह स्मार्ट बॉक्स आपके सामान्य टीवी को न सिर्फ स्मार्ट टीवी में बदलता है, बल्कि यह आपके टीवी को एक संपूर्ण गूगल एण्ड्रॉयड पीसी के रूप में भी बदल देता है जिसमें आप कंप्यूटिंग की तमाम चीजें कर सकते हैं और एण्ड्रॉयड मार्केट से हर किस्म के एप्लिकेशन डाउनलोड कर उन्हें चला सकते हैं.

 

स्मार्ट बॉक्स में इंटरनेट व फ़ाइल ट्रांसफर के लिए वाई-फाई सुविधा है, ईथरनेट पोर्ट है, 3 ​​जी डांगल से हाईस्पीड इंटरनेट चला सकते हैं तथा सिम कार्ड से 2 जी नेटवर्क का लाभ ले सकते हैं. इसमें 1.25 गीगा हर्त्ज प्रोसेसर है जिसमें एण्ड्रॉयड 2.3 जिंजरब्रेड संस्करण है. इसमें 4 जीबी आंतरिक भंडारण, माइक्रो एसडी कार्ड स्लॉट, एचडीएमआई पोर्ट, और 4xUSB 2.0 पोर्ट भी है. इस उपकरण से आप लगभग सभी लोकप्रिय ऑडियो और वीडियो को चला सकते हैं.

 

" जिस तरह से भारत में टेलीविजन देखा जाता है यह स्मार्ट बॉक्स उस आदत को पूरी तरह से बदलने की तैयारी में है. दर्शकों को अपने मौजूदा टीवी को बदले बिना पूर्ण एचडी में देखने की सुविधा प्रदान करता है. आप अपने मौजूदा टीवी को एक स्मार्ट टीवी में इस बॉक्स के जरिए अपग्रेड कर सकते हैं. यूँ तो बाजार में अब बहुत से स्मार्ट टीवी आ रहे हैं, मगर उनकी कीमत अधिक है. और ऊपर से यह विकल्प आपके मौजूदा टीवी को बहुत ही कम और वाजिब दाम में कंप्यूटर में बदल कर स्मार्ट-टीवी बना देता है.

 

वैसे, यदि आप एक्सबॉक्स 360 जैसे गेमिंग डिवाइस लेते हैं और उसे अपने टीवी से जोड़ते हैं तो भी उनमें कुछ सीमित तरीके से आपके टीवी को स्मार्ट बनाने के विकल्प मिलते हैं – जैसे कि वेब ब्राउज करना, ईमेल चेक करना इत्यादि. मगर यह स्मार्ट बॉक्स तो आपके टीवी को पूरी तरह से गूगल एण्ड्रॉयड युक्त पीसी में ही बदल देता है.

 

और ये हैं इस स्मार्ट बॉक्स की तकनीकी विशेषताएँ:

 

एण्ड्रॉयड 2.3 ऑपरेटिंग सिस्टम

1.25 गीगा हर्त्ज सीपीयू

अंतर्निर्मित वाई-फाई और ईथरनेट पोर्ट

3 जी डांगल और 2 जी नेटवर्क की सुविधा

वाई - फाई हॉटस्पॉट

पूर्ण एचडी वीडियो प्लेबैक के लिए एचडीएमआई पोर्ट

ए वी पोर्ट

4 x USB 2.0 पोर्ट

एसडी / एमएमसी कार्ड स्लॉट (32 जीबी तक का समर्थन करता है)

हेड फोन्स और माइक्रोफ़ोन जैक

वायरलेस माउस (वायरलेस कीबोर्ड अलग से जोड़ सकते हैं)

4GB आंतरिक मेमोरी

अंतर्निर्मित आईएम (गूगल टॉक, स्काइप, याहू) और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों (फ़ेसबुक, लिंक्डइन, ट्विटर)

का समर्थन

यूट्यूब वीडियो

कंप्यूटर गेम

कैलेंडर और कैलकुलेटर सुविधा

साथ ही -

गूगल प्लेस्टोर अनुप्रयोगों के माध्यम से असीमित उपयोग

 

अब, आपको अपने स्मार्ट बन चुके टीवी से आखिर और क्या चाहिए?

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(शामिख फराज)

पॉलीकोला एक नये तरीके का सर्च इंजन है. इसको अनोखा कहने के पीछे भी एक कारण है. इसकी विशेषता यह है कि इसमें जो भी जानकारी आप चाहते है, वो दो सर्च इंजन में एक साथ देखी जा सकती है.

इसका इतिहास भी थोड़ा अजीब है. इसकी शुरूआत 2005 में हुई. शुरू में इसका नाम "गाहूयूगल.कॉम" रखा गया लेकिन कुछ विवादों के कारण इसका नाम बदलना पड़ा फिर "पॉलीकोला" रखा गया. यह दूसरे सर्च इंजन के मुकाबले तीव्र है और कोई भी जानकारी खोजते समय 70% तक समय की बचत करता है. यह अमेरिकी और यूरोपी देशों में प्रसिद्ध है और बहुत प्रयोग किया जाता है.

इसमें कोई भी खोज एक साथ दो सर्च इंजन में तो देखी ही जा सकती है, इसके साथ ही इसमें सर्च इंजन चुनने की भी आज़ादी है. दरअसल यह पांच सर्च इंजन को सपोर्ट करता है. GOOGLE.com, YAHOO.com, AOL.com, ASK.com & BING.com. इन पांच सर्च इंजन में से आप जो भी चाहे दो सर्च इंजन चुन सकते है और इन दोनों सर्च इंजन में आपको वो लिंक दिखाई देंगे जो आप खोजना चाहते थे. इसमें सर्च बार के नीचे पांच सर्च इंजन की लिस्ट दिखाई देती है और इसी के बराबर दूसरी ओर भी पांच सर्च इंजन की लिस्ट दिखाई देती है. आपको एक तरफ पहला सर्च इंजन और दूसरी तरफ दूसरा सर्च इंजन चुनना है. फिर ऊपर दी गई सर्च बार में वो लिखे जो आप खोजना चाहते है. आपको आपके द्वारा खोजी गई जानकारी के लिंक एक ही वेब पेज पर दो सर्च इंजन में एक साथ दिखाई देंगे.

पॉलीकोला में आप कोई भी सर्च इंजन अपनी सुविधा के अनुसार बदल भी सकते हैं. मान लीजिए आप गूगल और याहू चुनकर कुछ सर्च कर रहे हैं. लेकिन आप खोजी गई जानकारी से संतुष्ट नहीं है तो अपने अनुसार सर्च इंजन बदल लीजिए. आप BING और AOL पर खोज कर सकते है या कोई भी दो जो आप चाहे चुन सकते हैं. इसमें जो जानकारी आप खोजना चाहते है उससे जुड़े कुछ शब्द लिख कर जब सर्च पर क्लिक करेंगे तब एक साथ एक ही वेब पेज पर आधे भाग में पहले सर्च इंजन पर आपके द्वारा खोजी गई जानकारी के लिंक दिखाई देंगे और वेब पेज के बाकी बचे आधे भाग में दूसरे सर्च इंजन पर लिंक दिखाई देंगे. एक साथ दोनों सर्च इंजन के लिंक खोले भी जा सकते हैं और अपनी सुविधा अनुसार चाहे तो एक सर्च इंजन के लिंक खोल ले और दूसरे को ऐसे ही रहने दे.

इसमें सर्च बार के ऊपर आपको web, images, video & shopping नाम के चार लिंक और भी दिखाई देंगे. यदि इनमें से किसी के बारे में जानकारी चाहिए तो पहले ये आप्शन चुने फिर सर्च करे. इसके साथ ही आप इसको अपना होम पेज भी बना सकते है और फैवरिट में भी जोड़ सकते हैं.

सर्च को तेज़ और आसान बनाने वाले कुछ टिप्स

सर्च से जुड़े की-वर्ड को जैसे ही सर्च इंजन में डाला जाता है, हजारों रिजल्ट मिलते हैं। अब समस्या शुरू होती है कि इनमें से कौन से पेज को खोलकर देखा जाए, जिसमें जरूरत के मुताबिक रिजल्ट मिल सके। एक-एक कर पेज खोले जाते है कभी जल्द ही रिजल्ट मिल जाते है और कभी कई घंटे लग जाते। गहन और सटीक सर्च के लिए सर्च इंजन की भाषा समझना जरूरी है। सर्च को तेज़ बनाने के लिए जानिए कुछ टिप्स-

की-वर्ड्स का चयन (Selection of Keywords)

सर्च के लिए आपको सही की-वर्ड का selection करना होता है। जैसे अगर holidays india से आपको मनचाहे रिजल्ट नहीं मिल रहे हैं तो india vacation को आजमा सकते हैं। अगर आपको शब्दों की सही स्पेलिंग नहीं आती तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। गूगल और याहू जैसे अधिकतर सर्च इंजन सही स्पेलिंग खुद-ब-खुद दिखा देते हैं।

कैटेगरी का चयन (Selection of Category)

कई बार सही कैटेगरी नहीं चुनने की वजह से भी सर्च में समस्या आ सकती है। जैसे अगर आप देश दुनिया की कोई खबर तलाश रहे हैं तो आप वेब की बजाय न्यूज कैटेगरी में जाइए। इसी तरह इमेज, ग्रुप, मैप आदि कैटेगरी को चुनकर आप सर्च को तीव्र कर सकते हैं।

प्रिपोजिशन हटाएं (Remove Prepositions)

सर्च इंजन इस तरह डिजायन किए गए हैं कि अधिकतर प्रिपोजिशन उनमे प्रयोग नहीं हैं जैसे and, of, for, in जैसे शब्दों को ये इंजन अपनी सर्च में शामिल नहीं करते। इसलिए बेहतर है कि की-वर्ड्स में इस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाए।

फ्रेज को कैसे तलाशें (How to search phrase)

मान लीजिए आपको the long and winding road एक साथ तलाशना है तो इसके लिए इन्वर्टेड कॉमा की मदद लेनी चाहिए। अगर आप इसे इन्वर्टेड कॉमा के बीच "the long and winding road" लिखकर सर्च करेंगे तो आपको केवल वे ही रिजल्ट मिलेंगे जिसमें ये सभी शब्द एक साथ इसी क्रम में हैं।

यदि वर्ड नहीं चाहिए (If word is not required)

कई बार ऐसा होता है कि आपको clinton पर सामग्री चाहिए पर वो नहीं जिसमें lewinsky के बारे में जिक्र हो। इसके लिए आप एक शब्द के बाद स्पेस देकर माइनस चिन्ह का प्रयोग कर सकते हैं। जैसे अगर आप clinton -lewinsky तलाशेंगे तो आपको वे ही रिजल्ट मिलेंगे जिनमें केवल क्लिंटन है और लेविंस्की नहीं।

यूआरएल सर्च (URL)

यूआरएल या वेब एड्रेस में अगर आपको किसी शब्द की सर्च करनी है तो आप inurl की मदद ले सकते हैं। जैसे अगर आपको वे वेब एड्रेस चाहिए जिनमेंtime शब्द आता हो आप सर्च इंजन में inurl:time लिखकर एंटर करें। सभी रिजल्ट वे ही मिलेंगे जिनके वेब एड्रेस में कहीं न कहीं time शब्द आता है।

परिभाषा जानें (Know the defination)

अगर आपको किसी शब्द का अर्थ जानना है तो वेब डिक्शनरी पर जाने की जरूरत नहीं है। अगर आप define:time सर्च इंजन में डालेंगे तो आपको timeशब्द की परिभाषा मिल जाएगी। इसी तरह आप दूसरे शब्दों की परिभाषा और अर्थ जान सकते हैं।

आई एम फीलिंग लकी का मतलब

गूगल सर्च इंजन वक्त बचाने के लिए यह फेसिलिटी देता है जिसमें सर्च करते वक्त वही पेज खुलता है जो सबसे रेलेवेंट होता है। इसके लिए सर्च बॉक्स में की-वर्ड लिखकर सर्च की बजाय आई एम फीलिंग लकी बटन को प्रेस कीजिए। सबसे रेलेवेंट साइट के ही खुलने से वक्त की बचत होती है।

HAPPY SEARCHING !

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(इस अतिथि-आलेख (गेस्ट-पोस्ट) को विशेष रूप से शामिख फराज ने लिखा है)

शामिख फ़राज़

प्रवक्ता
कंप्यूटर साइंस विभाग
शफी डिग्री कॉलेज
बीसलपुर (पीलीभीत)

 

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पेश है डिजिटल सर्वाइवल गाइड.

31 अक्तूबर से पहले महानगरों को डिजिटल होना है, और अप्रैल आते आते भोपाल इंदौर सरीखे बड़े नगरों को भी. यानी यदि आप केबल से टीवी देखते हैं तो आपको सेटटॉप बॉक्स लगाना अनिवार्य होगा.

ठीक है, आपने सेटटॉप बॉक्स लगवाने का निर्णय ले लिया है. परंतु सवाल है कि कौन सा लगवाएं? क्या वो सड़ा वाला लगवा लें जो आपका केबल ऑपरेटर आपके माथे पर थोप कर चला जाएगा? भगवान के लिए, नहीं!

ये हैं कुछ चेक लिस्ट जिनके जरिए आप अपने मुताबिक सेटटॉप बॉक्स चुन सकते हैं या अपने केबल ऑपरेटर को बाध्य कर सकते हैं कि वो ऐसी सुविधाओं वाला सेटटॉप बॉक्स उपलब्ध करवाए.

सीआरटी टीवी के लिए

सीआरटी – यानी कैथोड रे ट्यूब वाले पुराने जमाने के भारी भरकम टीवी के लिए आप कोई सा भी सेट टॉप बॉक्स लगवा सकते हैं, क्योंकि इन पुराने जमाने के टीवी में आधुनिक टेक्नोलॉजी की टीवी – एचडी टीवी को दिखाने की सुविधा नहीं होती. यदि आपको आधुनिक टेक्नोलॉजी की एचडी टीवी और साथ ही 5.1 सराउंड सिस्टम युक्त होम थिएटर जैसा आनंद अपने टीवी से चाहिए तो जल्द ही ऐसे टीवी सेटों से छुटकारा पाएं और फ्लेट स्क्रीन, पतले एलसीडी, एलईडी या प्लाज़्मा टीवी खरीदें. प्लाज्मा को छोड़ कर बाकी एलसीडी और एलईडी टीवी आपके बिजली के बिलों को भी कम करते हैं क्योंकि ये कम बिजली खाते हैं. एलईडी टीवी सबसे कम बिजली की खपत करते हैं.

एलसीडी, एलईडी और प्लाज़्मा टीवी के लिए

· सबसे पहले तो यह देखें कि आपका टीवी सेट एचडी है या नहीं. यदि आपका टीवी सेट फुल एचडी 1080p है तब तो बहुत ही बढ़िया है. वैसे भी, यदि आपने अपना टीवी सेट हाल ही में एकाध वर्षों के भीतर खरीदा है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं. आजकल हर टीवी एचडी कैपैबल ही आ रहे हैं.

· यदि आपका टीवी एचडी कैपेबल है तो उसके इनपुट इंटरफेस चेक करें और देखें कि उसमें न्यूनतम 1 एचडीएमआई इनपुट की सुविधा है या नहीं.

· यदि आपके टीवी में एचडीएमआई इनपुट की सुविधा नहीं है तो या तो आपका टीवी एचडी नहीं है, या फिर एचडी रेडी नाम से आपको गलत टीवी थमा दिया गया है. और यदि ऐसा है तो फिर आप भी सामान्य कोई सा भी सेटटॉप बॉक्स लगवा सकते हैं. आपके लिए कोई ज्यादा विकल्प नहीं है.

· यदि आपके टीवी में एचडीएमआई इनपुट की सुविधा है तब तो बहुत अच्छा है. फिर आप अपने केबल ऑपरेटर से एचडी सेटटॉप बॉक्स के लिए कहें, और अपने पसंदीदा चैनलों के एचडी चैनलों की ग्राहकी लें. जैसे कि जी, सोनी, कलर व स्टार सभी सामान्य टीवी तो ब्रॉडकास्ट करते ही हैं साथ में एचडी में भी ब्रॉडकास्ट करते हैं. इसीलिए, सामान्य सेटटॉप बॉक्स से आप अपने एचडी टीवी का पूरा मजा नहीं ले पाएंगे क्योंकि एचडी सेटटॉप बॉक्स से ही एचडी चैनल देख सकते हैं. सिटी केबल जैसे बढ़िया केबल टीवी सेवा प्रदाताओं के द्वारा 30 एचडी चैनल दिखाए जाते हैं. एचडी चैनल देखना अलग ही अनुभव होता है. देखो तो जानो!

· एचडी सेटटॉप बॉक्स लगवाने के बाद सेटटॉप बॉक्स को टीवी से एचडीएमआई केबल से ही कनेक्ट करवाएं. नहीं तो आपका अज्ञानी केबल वाला वीडियो इनपुट से (या अन्य उपलब्ध इंटरफेस जैसे कि एसवीडियो या एवीआई से) आपके टीवी को जोड़ देगा और आपकी पिक्चर क्वालिटी वही घटिया आएगी और आप सिर धुनते रह जाएंगे कि ये एचडी है क्या बला – दिखता तो वैसे ही घटिया है. हो सकता है कि आपको एचडीएमआई केबल खरीदना पड़े. अच्छा केबल खरीदें जो कि हो सकता है 300-400 रुपए में मिले. घटिया केबल खरीदेंगे तो जल्द ही खराब होगा और क्वालिटी भी सही नहीं आएगी.

· यदि आपके पास हाईफाई म्यूजिक सिस्टम या होम थिएटर सिस्टम है तो सेटटॉप बक्से का डिजिटल साउंड आउटपुट जो शायद कोएक्सिएल केबल हो सकता है या फिर ऑप्टिकल केबल उससे जोड़ें. यदि सेटटॉप बॉक्स में अतिरिक्त एचडीएमआई आउटपुट है तो उसे भी एचडीएमआई केपेबल होमथिएटर सिस्टम के इनपुट में जोड़ सकते हैं. इससे आपका पूरा सिस्टम फुल एचडीएमआई हो जाएगा और आपको ऑडियो-वीडियो दोनों ही हाई-डेफ़िनिशन में मिलेंगे. आपकी टीवी का अंतर्निर्मित ऑडियो सिस्टम (बोस को छोड़ कर) बेहद घटिया किस्म का होता है चाहे वे कितनी ही दावेदारी कर लें. तो यदि आपको एचडी टीवी देखने का सही आनंद लेना है तो एचडीएमआई युक्त बढ़िया 5.1 एवी रिसीवर सिस्टम व कम्पेटिबल स्पीकर में इन्वेस्ट करना चाहिए. डेनन या मरांज ब्रांड का कोई भी सिस्टम चलेगा. हमारे जैसे मितव्ययी लोगों के लिए ओन्क्यो भी ठीक है.

· यदि आपका कार्य शेड्यूल थोड़ा अव्यवस्थित किस्म का है और आप आमतौर पर निर्धारित समय पर पसंदीदा सीरियल नहीं देख पाते हैं या आपको बीच बीच के लंबे-लंबे बारंबार दिखाए जाने वाले सड़ियल विज्ञापन जी भर कर बोर करते हैं तो आपको यकीनन ऐसा सेटटॉप बॉक्स लगवाना चाहिए जिसमें रेकॉर्डिंग की सुविधा हो. ताकि आप बाद में मनपसंद समय पर मनपसंद सीरियल रीप्ले कर देख सकें और विज्ञापनों को फास्टफारवर्ड कर हटा सकें. इसके लिए आपके सेटटॉप बक्से में न्यूनतम 500 जीबी की रेकॉर्डिंग स्पेस हो ताकि आप जी भर कर मनपसंद प्रोग्राम शेड्यूल कर रेकॉर्ड कर सकें. आपका केबल वाला इस तरह का सेटटॉप बॉक्स नहीं दे पा रहा हो तो आप डीटीएच में शिफ़्ट कर सकते हैं. सभी डीटीएच में अब रेकॉर्डिंग की सुविधा युक्त सेटटॉप बॉक्स आ रहे हैं. वीडियोकॉन में सर्वाधिक एचडी चैनल हैं, वहीं टाटास्काई में चैनल तो कम हैं, परंतु सीरियल रेकॉर्डिंग की अच्छी सुविधा है.

क्या अभी भी कुछ कन्फ़्यूजन बाकी है कि कौन सा सेटटॉप बॉक्स लेना चाहिए? जो भी हो, परंतु भगवान के लिए, अपने एलसीडी, एलईडी और प्लाज्मा टीवी में सामान्य चैनलों को जो कि 4:3 फ़ॉर्मेट में होते हैं, उन्हें 16:9 फ़ॉर्मेट में फैला कर तो न देखें! बिलकुल देहाती (टेक्नोलॉज़ी रूप में) कहलाते हैं आप!

यूँ तो ओपनऑफ़िस के नवीनतम संस्करण इंस्टाल कर आप सेटिंग में जाकर हिंदी स्पेल चेक एक्सटेंशन जोड़कर उसमें भी हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा जोड़ सकते हैं, मगर उसका वर्तनी जांच का शब्द संग्रह 85 हजार शब्दों का ही है और बहुत सारा उसमें गलत शब्द भी संग्रहित है. ऊपर से शब्दों का सुझाव देते समय उसमें डब्बे नजर आते हैं और समस्या बनी रहती है.

इस समस्या का समाधान उपलब्ध है. आपको  लिब्रे ऑफ़िस पोर्टेबल एडीशन का नवीनतम संस्करण डाउनलोड कर इंस्टाल करना होगा. परंतु इसमें भी हिंदी वर्तनी हेतु महज 15 हजार शब्द ही हैं. तो इसे हम वृहद, पौने दो लाख शब्दों के शब्द संग्रह से बदल कर बढ़िया हिंदी वर्तनी जांच युक्त ऑफ़िस सूट में बदल लेंगे. यह महज 2 आसान चरणों में संभव है.

1

लिब्रे ऑफिस पोर्टेबल एडीशन डाउनलोड कर किसी फ़ोल्डर में इंस्टाल करें. पोर्टेबल एडीशन की खासियत यह है कि आप इसे पेन ड्राइव में कॉपी कर या किसी भी अन्य डिरेक्ट्री या फ़ोल्डर में कॉपी कर कहीं पर भी चला सकते हैं. बार बार इंस्टाल करने की जरूरत नहीं.

पोर्टेबल एडीशन यहाँ से डाउनलोड करें. लिब्रे ऑफ़िस आप विंडोज, मैक या लिनक्स किसी के लिए भी डाउनलोड कर सकते हैं. परंतु नीचे कड़ी विंडोज के लिए दी जा रही है -

http://www.libreoffice.org/download/?type=win-x86&lang=hi&version=3.6.1

यहाँ पर आपको इंस्टाल योग्य लिब्रे ऑफिस तथा पोर्टेबल एडीशन दोनों को डाउनलोड करने के विकल्प मिलेंगे. आप चाहें तो इंस्टाल वर्जन भी डाउनलोड कर सकते हैं.

पोर्टेबल एडीशन का डायरेक्ट डाउनलोड लिंक है -

http://download.documentfoundation.org/libreoffice/portable/3.6.1/LibreOfficePortable_3.6.1.1_MultilingualAll.paf.exe 

डाउनलोड के बाद इस फ़ाइल को चला कर किसी फ़ोल्डर में इंस्टाल करें. इंस्टालेशन सेटिंग डिफ़ॉल्ट (मल्टीलिंग्वल ही) रहने दें, और कोई परिवर्तन न करें.

अब आपको इसका  हिंदी वर्तनी जांच का शब्द संग्रह जो कि 15 हजार शब्दों वाला है उसे बदल कर पौने दो लाख शब्दों वाले शब्द संग्रह से बदलना है. इसके लिए नीचे दिए गए चरण अनुसार करें -

2

फ़ाइल hi_IN.dic इस कड़ी से डाउनलोड करें -

http://goo.gl/IMspZ

ऊपर की लिंक काम न करे तो नीचे दी गई कड़ी पर जाएं और वहाँ से hi_IN.dic फ़ाइल डाउनलोड करें-

https://skydrive.live.com/#cid=60EACE63E15A752A&id=60EACE63E15A752A%21113 

अब इस फ़ाइल को लिब्रे ऑफ़िस की फ़ाइल से बदलना है.

लिब्रे ऑफिस के पोर्टेबल एडीशन में यह फ़ाइल आपके चुने गए फ़ोल्डर में कुछ इस प्रकार होगा -

\LibreOfficePortable\App\libreoffice\share\extensions\dict-hi

फ़ोल्डर dict-hi के भीतर hi_IN.dic फ़ाइल है. इसे हटा दें और ऊपर लिंक से डाउनलोड किए इसी नाम की फ़ाइल वहाँ कॉपी कर दें.

अब आप लिब्रे ऑफिस का कोई भी एप्लिकेशन चलाएं - जैसे कि लिब्रे ऑफ़िस राइटर. और वहां हिंदी में ऑन - द - फ्लाई वर्तनी जांच का भरपूर लाभ लें.

यदि किसी शब्द की वर्तनी गलत दिखती है (लाल रंग से रेखांकित होती है) तो आप उस शब्द पर दायाँ क्लिक कर सही वर्तनी का विकल्प देख सकते हैं, और चुन सकते हैं या फिर अपने शब्द संग्रह में जोड़ सकते हैं.

आप इस लिब्रे ऑफ़िस का यूआई हिंदी में भी कर सकते हैं - सेटिंग में जाकर डिफ़ॉल्ट अंग्रेजी को हिंदी में बदल लें - जैसा कि इस स्क्रीन शॉट में दिखाया गया है -

और इस तरह यह आपके लिए एक संपूर्ण ऑफ़िस सूट है - खालिस हिंदी में. और हाँ. इसमें हिंदी / अंग्रेज़ी द्विभाषी स्पेल चेक की एक साथ सुविधा भी मिलती है.

लिब्रे ऑफ़िस आम उपयोग के लिए निःशुल्क जारी किया जाता है. इसका हिंदी स्पेल चेक शब्द संग्रह भी निःशुल्क उपयोग के लिए जारी किया गया है. शब्द संग्रह में योगदान कर्ताओं के नाम यहाँ देखें.

libre-office-hindi-with-hindi-spell-check

 

पौने दो लाख शब्दों को बढ़ाने व उन्हें शुद्ध करने के प्रयास जारी हैं ताकि आपको एक परिपूर्ण हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा मिले. शब्द संग्रह का परिपूर्ण, अधिक शुद्ध, संशोधित नया संस्करण शीघ्र ही जारी किया जाएगा. इसके लिए इन पृष्ठों को देखते रहें.



पिछली पोस्ट पर उन्मुक्त जी ने दुखी होकर कहा - ये तो लिनक्स में नहीं चलेगा. प्रवीण पाण्डेय जी ने मैक पर नहीं चला पाने का अफसोस जताया.

तो पेश है ब्राउजर आधारित हिंदी वर्तनी जांच का नया, अपडेटेड संस्करण, जिसमें पौने दो लाख हिंदी शब्दों का संग्रह युक्त शब्दकोश है.

इसके लिए आपको फायरफाक्स ब्राउज़र ही प्रयोग करना होगा. यदि आप फायरफ़ाक्स ब्राउजर प्रयोग करते हैं तब तो यह आपके बेहद काम का है. नहीं करते हैं तब भी फायरफाक्स का प्रयोग करना प्रारंभ कर दीजिए. क्योंकि अभी तो इससे उत्तम हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा, वह भी लिखते-लिखते (ऑन-द-फ़्लाई) और किसी ब्राउजर में उपलब्ध भी नहीं है. गूगल क्रोम में है, परंतु उसमें भी हिंदी शब्द भंडार बेहद कम है.

इसके लिए आपको क्या करना होगा?

आसान  है, यदि आप फायरफाक्स ब्राउजर का प्रयोग करते हैं तो.

नीचे दी गई कड़ी से फायरफाक्स हिंदी वर्तनी जांच प्लगइन डाउनलोड करें और फायरफाक्स के फ़ाइल ओपन डायलाग से खोल कर इंस्टाल करें. फायरफाक्स रीस्टार्ट करें और फायरफाक्स ब्राउजर के इनपुट बक्से में  जहाँ भी आप हिंदी लिखते हैं - जैसे कि इस ब्लॉगर डैशबोर्ड पर मैं यह पोस्ट लिख रहा हूँ, वहाँ दायाँ क्लिक करें और स्पेलिंग चुन कर हिंदी चुनें. बस यह अब अपने आप आपके हिंदी की वर्तनी जांच करता चलेगा जैसे जैसे आप लिखते चलेंगे.

हिंदी वर्तनी जांच फायरफाक्स प्लगइन डाउनलोड कड़ी  -

http://goo.gl/5sh07

यहाँ से hindi_spell_checker-0.05.xpi नाम की फ़ाइल डाउनलोड होगी

डाउनलोड / इंस्टालेशन इत्यादि में कोई समस्या हो तो बताएं.

ऊपर की डाउनलोड कड़ी में यदि समस्या आए तो नीचे लिंक पर जाकर उक्त फ़ाइल को डाउनलोड हेतु चुनें

http://goo.gl/xssZo

यदि आपने पहले ही फायरफाक्स में हिंदी वर्तनी जांच इसके ऑफीशियल डाउनलोड साइट से डाउनलोड किया है तो उसे निकाल कर इस नए, ज्यादा शब्द संग्रह वाले को लगाएं. दरअसल है यह वही प्लगइन, बस इसमें हिंदी शब्द संग्रह की फ़ाइल को नए, बेहतर वाले से बदल दिया गया है.

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यदि आप हिंदी ब्लॉग लिखने के लिए विंडोज लाइव राइटर का प्रयोग करते हैं, तब तो यह आपके लिए ही है. यदि आप लाइव राइटर का प्रयोग नहीं करते हैं तो इसे एक बार आजमा कर जरूर देखें. कमल ने इस औजार के बारे में एक शानदार आलेख लिखा है - विंडोज लाइव राइटर चिट्ठाकारों के लिए वरदान - इसे जरूर पढ़ें.

 

तो, यदि आप विंडोज लाइव राइटर प्रयोग करते हैं, वह भी एकदम नया ताजातरीन संस्करण (पुराने संस्करणों में यह ढंग से काम नहीं करेगा और बेहद धीमा चलेगा) तो सीधे चरण 2 में जाएं. यदि आपने अभी तक विंडोज लाइव राइटर नहीं आजमाया है, या इसका नया संस्करण इंस्टाल करना चाहते हैं तो इसे डाउनलोड करने व इंस्टाल करने की विधि ई-पण्डित के ब्लॉग से साभार नीचे दिया जा रहा है -

 

चरण 1

विण्डोज़ लाइव राइटर एक लोकप्रिय ब्लॉग क्लाइंट है जो कि चिट्ठा लिखना आसान एवं बेहतर बनाता है। इसमें चिट्ठा लिखना ब्लॉग के वेब ऍडीटर की तुलना में ज्यादा आनन्ददायक है। कई सुविधाओं से युक्त इसका ऍमऍस वर्ड जैसा ऍडीटर लिखने हेतु बेहतर वातावरण प्रदान करता है।

पढ़ें – विण्डोज़ लाइव राइटर समीक्षा एवं डाउनलोड

विण्डोज़ लाइव राइटर की तरह माइक्रोसॉफ्ट के कुछ दूसरे मुफ्त सॉफ्टवेयर जैसे स्काइड्राइव, विण्डोज़ मूवी मेकर, विण्डोज़ लाइव मैसेंजर आदि भी ऑनलाइन ही इंस्टाल होते हैं। सौभाग्य से इनको ऑफलाइन इंस्टाल करने हेतु फुल सैटअप का डाउनलोड लिंक उपलब्ध है हालाँकि विण्डोज़ असैंशियल्स में शामिल सभी सॉफ्टवेयरों हेतु एक ही संयुक्त डाउनलोड लिंक है, अलग-अलग डाउनलोड लिंक उपलब्ध नहीं हैं।

डायरैक्ट डाउनलोड लिंक

विण्डोज़ लाइव राइटर २०१२ तथा अन्य विण्डोज़ असैंशियल्स  के लिये वर्तमान में इसका डायरैक्ट डाउनलोड लिंक निम्नलिखित है।

» विण्डोज़ असैंशियल्स फुल सैटअप डाउनलोड करें (आकार:- १३१.३० ऍमबी)

हिन्दी संस्करण हेतु डाउनलोड लिंक में en की जगह hi कर दें। हालाँकि मैंने पाया कि हिन्दी संस्करण में मैन्यू के टैक्स्ट का फॉण्ट आकार काफी छोटा होने से सुपाठ्य नहीं होता इसलिये मैंने उसे हटाकर अंग्रेजी संस्करण ही स्थापित कर दिया। इसी प्रकार अन्य भारतीय भाषायी संस्करणों हेतु en की जगह उनके भाषा कोड प्रयोग करें जैसे मराठी के लिये mr, गुजराती के लिये gu, तमिल के लिये ta, तेलुगू के लिये te, कन्नड़ के लिये kn तथा मलयालम के लिये ml-in प्रयोग करें।

भविष्य में यह डाउनलोड लिंक परिवर्तित हो सकता है तो यदि आप यह लेख कभी बाद में पढ़ रहे हैं तो नीचे बताये गये तरीके से नवीनतम लिंक प्राप्त करें।

डायरैक्ट डाउनलोड लिंक प्राप्त करने का तरीका

» अपने ब्राउजर में विण्डोज़ असैंशियल्स के डाउनलोड पेज पर जायें। इस पेज पर विभिन्न भाषाओं हेतु वेब सैटअप के डाउनलोड लिंक दिये गये हैं। यहाँ होमपेज पर दिये गये आसमानी नीले रंग के Download Now बटन के नीचे भाषा बदलने के लिंक change पर क्लिक करके भी पहुँचा जा सकता है।

image

» यहाँ विभिन्न भाषाओं के वेब सैटअपों हेतु डाउनलोड लिंक दिये गये हैं।

image

अपनी वाँछित भाषा (जैसे English, हिन्दी आदि)  के नाम पर राइट क्लिक करके लिंक कॉपी कर लें (फायरफॉक्स – Copy Link Location, गूगल क्रोम – Copy link address, इंटरनेट ऍक्सप्लोरर – Copy shortcut) तथा इसे ब्राउजर के ऍड्रैस बार में पेस्ट कर लें।

image

यह लिंक कुछ इस तरह होगा। ध्यान दें कि भविष्य के संस्करणों में यह अलग प्रकार का भी हो सकता है।

http://g.live.com/1rewlive5-web/en/wlsetup-web.exe

» इस लिंक में दोनों जगह web शब्द को बदलकर all कर दें। नया लिंक कुछ इस तरह होगा।

http://g.live.com/1rewlive5-all/en/wlsetup-all.exe

» ऍण्टर बटन दबायें, डाउनलोड चालू हो जायेगा।

इस सैटअप में मैसेंजर, फोटो गैलरी, मूवी मेकर, मेल, लाइव राइटर, फैमिली सेफ्टी, माइक्रोसॉफ्ट स्काइड्राइव तथा आउटलुक कनैक्टर पैक  आदि शामिल हैं। सैटअप चलाने पर आप अपनी आवश्यकतानुसार सॉफ्टवेयर चुनकर इंस्टाल कर सकते हैं

 

चरण 2

विंडोज लाइव राइटर इंस्टाल हो जाने के बाद सिर्फ आपको हिंदी शब्द संग्रह की डिक्शनरी फ़ाइल जोड़नी होगी जो कि बेहद आसान है. इसके बाद आपका विंडोज लाइव राइटर हिंदी वर्तनी जांच ऑन-द-फ्लाई करने लगेगा. और, यकीन मानिए, इसकी जांच एमएस वर्ड हिंदी से कई मामलों में बेहतर होगी. अलबत्ता इसमें आपको सही वर्तनी क्या हों इसके विकल्प नहीं मिलेंगे. फिर भी, आपके पोस्टों में संभावित ( ध्यान रहे कि हिंदी के सारे शब्द इस संग्रह में नहीं हैं, अतः बहुत से सही वर्तनी वाले शब्दों को भी यह गलत दिखा सकता है. इसके लिए आपको इन शब्दों को डिक्शनरी में जोड़ना होगा) गलत वर्तनी पर लाल लकीर दिखने लगेगी जिससे आप भूले से भी गलत वर्तनी युक्त पोस्ट प्रकाशित नहीं कर पाएंगे.

विंडोज लाइव राइटर की डिक्शनरी फ़ाइल आमतौर पर विंडोज 7 में (विंडोज एक्सपी के लिए थोड़ा खोजबीन करें) निम्न डिरेक्ट्री में होती है -

C:\Users\a\AppData\Roaming\Windows Live Writer\Dictionaries

यहाँ Users के बाद a उपयोगकर्ता का नाम है, यदि आपका उपयोगकर्ता नाम suresh है तो a के बदले suresh हो जाएगा.

Dictionaries फ़ोल्डर  में आपको user.dic नाम की एक फ़ाइल दिखेगी.

अब नीचे दिए गए लिंक से hindi.dic फ़ाइल डाउनलोड करें. यह 3 मेबा की फ़ाइल है.

http://goo.gl/JILPZ

यदि यह कड़ी काम न करे तो नीचे दी गई कड़ी में जाएं और वहां से hindi.dic फ़ाइल डाउनलोड करें -

http://goo.gl/xssZo

डाउनलोड के बाद इस फ़ाइल का नाम बदल कर (दायां क्लिक कर रीनेम चुनें ) user.dic कर दें.

अब इस user.dic फ़ाइल को विंडोज लाइव राइटर की डिक्शनरीज़ फ़ोल्डर में पुरानी फ़ाइल से रीप्लेस कर दें.

विंडोज लाइव राइटर रीस्टार्ट करें और हिंदी वर्तनी जांच का लाभ उठाएं.

 

नीचे दो स्क्रीनशॉट दिए जा रहे हैं. जो अपनी कहानी खुद कहते हैं.

 

पहला - एमएस वर्ड हिंदी 2010 वर्तनी जांच

ms office hindi spell check

दूसरा - विंडोज लाइव राइटर हिंदी वर्तनी जांच

windows live writer spell check new

MKRdezign

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