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August, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आइए, थोड़ा उदास हो जाएँ...

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आह! अब तो उल्टी गंगा बहानी होगी. उदास रहने के बहाने ढूंढने होंगे, जुगाड़ लगाने होंगे. अब तक तो हम खुश रहने के हजार बहाने ढूंढते रहे थे. जिधर देखो उधर आदमी खुश दिखाई देता है. भीतर से दुःखी भी हो तो ऊपरी तौर पर खुश नजर आने की कोशिश में लगा रहता है. और नहीं तो खुशी पाने की जुगाड़ में लगा दीखता है. अगर आप अपने आसपास नजर दौड़ाएँ तो पाएंगे कि हर आदमी खुश रहने के जुगाड़ में जी जान से लगा हुआ है. सामने कोई प्रेमी अपने नए, हाई टैक, डबल प्रोसेसर युक्त और कैपेसिटिव टच स्क्रीन युक्त लेटेस्ट एंड्राइड फ़ोन को प्रेम से निहारता हुआ, 3 जी वीडियो कॉलिंग के जरिए अपनी प्रेमिका से लाइव चैट में मस्त है, खुश है. उधर सड़क पर कोई बंदा अभी ही सर्र से अपने नए हीरो करिज़्मा को फुल थ्रॉटल से टेस्ट करता निकला है. वैसे वो जाना पहचाना सा बंदा है जो अकसर इधर से गुजरता है और भीड़ हो या खाली सड़क हर कहीं अपनी बाइक को फुल थ्रॉटल पर रखता है. उसे इसी में खुशी मिलती है. इधर अपने क्यूबिकल में आपका कुलीग अपने कम्प्यूटर स्क्रीन पर ऐंवें.कॉम में क्षणिक खुशी की तलाश कर रहा है. मगर बंधु, रुकिए. ठहरिए. खुशी के पीछे पागल मत बनिए. …

मेरा लोकपाल कैसा हो? बिलकुल मेरे जैसा हो!

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चलिए, प्रस्ताव पास हो गया, आश्वासन मिल गया. लोकपाल की वास्तविकता अब महज चंद दिनों दूर की बात है. दिल्ली बेहद करीब है. समझिए कि हम सीमा में दाखिल हो ही चुके हैं. लोकपाल बन रहा है. मगर सवाल ये है कि लोकपाल कैसा हो? बहुत ही सीधा-सा, सरल-सा उत्तर है – बिलकुल मेरे जैसा हो. कांग्रेसी बंधु चाहेंगे कि वो पूरा, पक्का कांग्रेसी हो. भाजपाई-संघी चाहेंगे कि वो पूरा पक्का संघी हो. लेफ़्टिस्ट चाहेंगे कि वो पक्का माओवादी हो. बाम्हन चाहेगा कि वो पिछले सात पुश्त से कान्यकुब्ज हो. कायस्थ चाहेगा कि वो असल ‘लाला’ हो, और राजपूत चाहेगा कि उसके ख़ून में शुद्ध क्षत्रिय खून बहता हो. माइनरिटी चाहेंगे कि लोकपाल माइनरिटी में से ही होना चाहिए. पिछड़ों को बहुजन लोकपाल चाहिए होगा. ..... अफ़सरों का लोकपाल खांटी अफ़सर नुमा होगा. नेताओं का पुख्ता नेता टाइप. व्यापारी और उद्योग घराने तो चाहेंगे ही कि लोकपाल कोई पार्टटाइम उद्योग-पति हो. इक्वेलिटी वाले चाहेंगे कि दसों के दसों लोकपाल कम्पटीशन से आएँ. अब, कम्प्टीशन के लिए कितना जुगाड़ चलेगा ये दीगर बात है. इधर कोटा सिस्टम वाले पचास प्रतिशत से कम में नहीं मानेंगे. स्त्रीवाद…

हिंदी ब्लॉगरों के लिए मुफ़्त ग्राफ़िक डिज़ाइनिंग सेवा

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हाजिर है आपके हिंदी ब्लॉग के लिए मुफ़्त प्रोफ़ेशनल ग्राफ़िक डिजाइनिंग सेवा. कुछ दिन पहले श्री भरत चौधरी का ईमेल प्राप्त हुआ जिसमें उन्होंने लिखा - हिंदी ब्लॉगिंग के बढते विस्तार को देख दिल प्रसन्नता से भर जाता है। इसी प्रसन्नता से प्रेरित हो मैने निर्णय लिया है कि मै हिंदी के उत्कृष्ट ब्लॉगर्स को मुफ्त ग्राफिक डिजाइनिंग सेवा प्रदान करूंगा।
             इस हेतु आपके अनुरोध विशेष आमंत्रित है। आपके ब्लॉग की गुणवत्ता देखकर मै आपको अपनी सेवा प्रदान करूंगा। बस, क्या था. मैंने अपना अनुरोध भेज दिया. रचनाकार (http://rachanakar.org)  पर अभी जो हेडर है (यहाँ ऊपर दिए गए चित्र में) वो भरत जी द्वारा ही मूलतः बनाया गया है जिसमें मामूली फेरबदल कर प्रयोग में लिया गया है. भरत जी को उनके हिंदी प्रेम व रचनाकार व छींटे और बौछारें के  हेडर तैयार करने हेतु धन्यवाद. कृपया बताएँ कि नया डिजाइन पुराने की अपेक्षा कैसा है. आप भी अपने हिंदी ब्लॉगों के मुफ़्त ग्राफ़िक डिज़ाइनिंग के लिए भरत जी की सेवा ले सकते हैं. श्री भरत चौधरी से संपर्क का पता है - i.designing.u@gmail.com---

असली बंगला खरीदने की औक़ात नहीं है? यहाँ चले आइए...

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ये आभासी योजना तो, लगता है जैसे हम ग़रीबों के लिए ही बनाई गई है.बीस हजार स्क्वेयर फ़ीट जमीन पर लैंडस्केपिंग गार्डन के साथ स्वयं के स्वीमिंग पूल युक्त पैंटहाउस का सपना मेरा सदा से रहा है. पर इतना पैसा मेरे पास कभी भी नहीं हो सकता और मेरा ये ख्वाब कभी पूरा नहीं हो सकता ये भी मुझे अच्छी तरह मालूम है.मगर वास्तविक दुनिया में न सही, इंटरनेटी-आभासी दुनिया में, इस तरह के भव्य आभासी जमीन और बंगले का मालिक तो अब मैं बन ही सकता हूँ. वो भी कौड़ियों के मोल.आप भी शानदार बंगले, महल, रैंच, पैंटहाउस और न जाने क्या क्या कौड़ियों के मोल खरीद सकते हैं इस इंटरनेटी आभासी दुनिया में. यहाँ तक कि पूरा का पूरा आईलैंड भी आप खरीद सकते हैं. हाँ, आभासी दुनिया में आभासी बंगले और ज़मीन खरीदने के लिए आपको रोकड़ा असली, और नक़दी लगेगा. अलबत्ता आप आभासी पैसे लिंडेन डॉलर (सेकंड लाइफ़) अथवा बिटक्वाइन का प्रयोग जरूर कर सकते हैं.उदाहरण के लिए, नीचे दिया गया खूबसूरत आइलैंड आप मात्र 80 डॉलर में खरीद सकते हैं -इन आभासी प्रॉपर्टी को बेच बेच कर एंशे चुंग विश्व की पहली आभासी करोड़पति बन चुकी हैं.आप भी सस्ते में प्रॉपर्टी खरीदना च…

अन्ना वापस जाओ!

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देश का अन्नाकरण हो रहा है और इधर आम-आदमी का हृदय धड़क रहा है. यदि भारत में सचमुच लोकपाल आ गया, यदि सचमुच भ्रष्टाचार मिट गया तो हमारे जैसे आम-आदमी का क्या होगा? वैसे तो आम-नेता लोग पानी पी-पीकर, आँखें तरेर कर यह बताने और भरोसा दिलाने में नहीं चूक रहे हैं कि लोकपाल आ भी गया तो क्या खाक होगा. नेताओं की बातों से आम-आदमी भी थोड़ा मोड़ा ही सही आश्वस्त तो हो ले रहा है कि भारत में लोकपाल-फोकपाल जैसे कितने आ जाएँ, मगर होगा जाएगा कुछ नहीं. फिर भी, भीतर से सभी डरे हुए हैं. आम-आदमी की तरह आम-नेता भी डरे हुए हैं. कल्पना करें कि लोकपाल आ गया. शक्तिशाली. बल्कि महाशक्तिशाली. भ्रष्टाचार जड़-मूल से समाप्त हो गया. अब आपको अचानक कहीं जाना है. ट्रेन का टिकट बाबू लोकपाल का भय दिखाकर हाथ खड़े कर देगा. ट्रेवल एजेंट लोकपाल के भय के कारण अपना धंधा बदल चुका होगा. टीटीई का सबसे बड़ा दुश्मन तो लोकपाल ही है. वो मजबूरी का नाम लोकपाल बन चुका है. उसके पास पच्चीस बर्थ खाली होंगे चार्ट में, मगर वो किसी को भी नहीं देगा. एक तो खुन्नस कि सालों (देहली बेली ने गालियों को सांभ्रांत करार दे दिया है ये ध्यान रहे,) मुझे सुविधा…

सोचती, बोलती तस्वीरें...

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अपने पिछले प्रवास में खींची गई कुछ तस्वीरें. बहुत कुछ बोलती तो बहुत कुछ सोचती सी...ड्रीमहाउसमाँचूड़ियाँ -1चूड़ियाँ 2दो-स्त्रियाँबस स्टैण्डचूड़ियाँ 3चूड़ियाँ 4घर-आंगनहीरो नं 1शीर्षक-हीनधूल का फूलबस स्टैण्ड 2गुड़ियाफ्रूट-बाजारहुम्म्...और, अंत में ...

ई-शिष्टाचार (e-Etiquette) - आपके डिजिटल जीवन के लिए 101 गाइडलाइन 91-100

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101 ई-शिष्टाचार
एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.
ई-शिष्टाचार – 91-10091.  …

ई-शिष्टाचार (e-Etiquette) - आपके डिजिटल जीवन के लिए 101 गाइडलाइन 81-90

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101 ई-शिष्टाचार
एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.
ई-शिष्टाचार – 81-9081.   …

ई-शिष्टाचार (e-Etiquette) - आपके डिजिटल जीवन के लिए 101 गाइडलाइन 71-80

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101 ई-शिष्टाचार
एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.
ई-शिष्टाचार – 71-8071.   …

ई-शिष्टाचार (e-Etiquette) - आपके डिजिटल जीवन के लिए 101 गाइडलाइन 61-70

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101 ई-शिष्टाचार
एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.
ई-शिष्टाचार – 61-7061.   …

ई-शिष्टाचार (e-Etiquette) - आपके डिजिटल जीवन के लिए 101 गाइडलाइन 51-60

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101 ई-शिष्टाचार
एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.
ई-शिष्टाचार – 51-6051.   …

ई-शिष्टाचार (e-Etiquette) - आपके डिजिटल जीवन के लिए 101 गाइडलाइन 41-50

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101 ई-शिष्टाचार
एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.
ई-शिष्टाचार – 41-5041.   …

ई-शिष्टाचार (e-Etiquette) - आपके डिजिटल जीवन के लिए 101 गाइडलाइन 31-40

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101 ई-शिष्टाचार
एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.
ई-शिष्टाचार – 31-4031.   …

ई-शिष्टाचार (e-Etiquette) - आपके डिजिटल जीवन के लिए 101 गाइडलाइन 21-30

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101 ई-शिष्टाचार
एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.
ई-शिष्टाचार – 21-3021.   …

ई-शिष्टाचार (e-Etiquette) - आपके डिजिटल जीवन के लिए 101 गाइडलाइन 11-20

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101 ई-शिष्टाचार

एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.
ई-शिष्टाचार – 11-20


11.…

ई-शिष्टाचार - आपके डिजिटल जीवन के लिए 101 गाइडलाइन 1-10

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101 ई-शिष्टाचार

एक समय था, जब आदमी जेंटलमेन (सभ्य पुरुष) होता था और स्त्री - लेडी. परंतु आज? आज हम रोज कुछ इस तरह के प्रश्नों का सामना करते हैं – “क्या यह ठीक होगा कि मैं किसी अजनबी के फ़ेसबुक मित्र निवेदन को अनदेखा कर दूं?” “रेस्त्रॉ में टेबल पर मोबाइल फ़ोन रखना क्या शिष्टाचार के विरुद्ध है?” या “कैफ़े कॉफ़ी डे के फ्री वाई-फ़ाई को मैं बिना कुछ ऑर्डर किए कितनी देर तक मुफ़्त में प्रयोग करता रह सकता हूँ?”
डिजिटल लाइफ़ स्टाइल हमारे दैनिंदनी जीवन और आचार व्यवहार तथा शिष्टाचार में बड़ी मात्रा में परिवर्तन ला रहे हैं. अब लाख टके का सवाल ये है कि ऐसे में, नए, डिजिटल जमाने में ई-शिष्टाचार सीखने के लिए हम किसकी शरण में जाएँ?
यहाँ पर ई-एटीकेट में संकलित 101 ई-शिष्टाचारों को विशेष अनुमति से खास आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं. इन ई-शिष्टाचारों को लंबे समय के अंतराल में तमाम प्रयोक्ताओं के सुझावों के आधार पर संकलित किया गया है, और हर किसी के लिए उपयोगी हैं. तो, आपके लिए पहला शिष्टाचार यह है कि इसे अधिकाधिक लोगों तक प्रेषित करें ताकि हम सबका डिजिटल जीवन शिष्टाचार मय हो.
ई-शिष्टाचार – 1-10 1. क…

फ़ेकिंग न्यूज़ - सबसे असरदार खबरें, सबसे ईमानदार खबरें!

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आह! हिंदी इंटरनेट को तो इसका जैसे बरसों से इंतजार था. फ़ेकिंग न्यूज़ - एक किस्म का द ऑनियन इन हिंदी. पर क्या ये सचमुच द ऑनियन की तरह है?शायद कुछ-कुछ. यदि फ़ेकिंग न्यूज़ को अनबायस्ड तरीके से बिना किसी पॉलिटिकल-रिलीजियस एजेंडा के तहत सिर्फ और सिर्फ हास्य-व्यंग्य पर सीमित रख कर परोसा जाए तो इसको सुपरह हिट होने से कोई नहीं रोक सकेगा. अभी की पोस्टों में वैसे साफ तौर पर राजनीतिक झुकाव परिदृश्य तो होता ही है. जिस तरह की सामग्री इसमें अभी आ रही है उस हिसाब से इसके हिट होने में देरी नहीं है. फिर भी, सामग्री की प्रचुरता और निरंतरता इसे बनाए रखनी होगी.फ़ेकिंग न्यूज के कुछ नए ताज़ा समाचार के शीर्षकों से इसकी सामग्री का अंदाजा लगाएँ -हरभजन के खिलाफ चलेगा “प्रतिभा से अधिक विकेट” का मामला
संदेसे आते हैं, हमें फुसलाते हैं!
हॉल ऑफ शेम
विवाह-बंधन में बंधे राहुल गांधी, कलावती की बेटी से की शादी
सुरेश कलमाड़ी करेंगे जेलगांव का निर्माण!
कश्मीरियों के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका से मांगे पत्थरों के ट्रक
जानवरों पर भी पड़ता है रिएलिटी शो का बुरा असर!
“किसी काले कुत्ते को ग्रिल्ड सैंडविच खिलाएं”
अब दिल्ली मैट्रो की छत …

नईख़बर.कॉम - चोरी की सामग्री से सजी साहित्यिक दुकान?

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यदि आपकी साइट की सारी की सारी सामग्री की चोरी कर कोई अन्य साइट अपनी दुकान सजा ले तो आपको कैसा लगेगा? आज मैं गूगल में कुछ सर्च कर रहा था तो नईख़बर.कॉम (http://www.naikhabar.com/poems-story-and-jokes.html) सर्च रिजल्ट में पहले आया. जबकि सामग्री ठेठ रचनाकार.ऑर्ग (http://rachanakar.org) की थी. मेरा माथा ठनका. मुझे लगा कि रचनाकार.ऑर्ग की रचनाओं को उदाहरण के लिये फिर से छापा गया होगा या कोई एकाध सामग्री साभार पुनःप्रकाशित हुई होगी या किसी लेखक की सहमति से उसकी रचनाएँ रचनाकार.ऑर्ग सहित दोबारा वहाँ प्रकाशित हुई होगी. तो मैं महज जाँच पड़ताल के लिए वहाँ गया. वहाँ दुख और आश्चर्य के साथ मैंने पाया कि रचनाकार.ऑर्ग की तमाम रचनाएँ वहाँ बड़े शान से प्रकाशित हैं. प्रकटतः रचनाकार.ऑर्ग की फुल फ़ीड को वो बेशर्मी से पुनः प्रकाशित कर रहे हैं और अपने साइट में सामग्री भर रहे हैं. नईखबर के साहित्य खंड के आज का स्क्रीनशॉट ये है जिसमें रचनाकार.ऑर्ग की तमाम नई रचनाएँ यहाँ कॉपी-पेस्ट की गई हैं - आप देखेंगे कि रचनाकार की तमाम रचनाओं को यहाँ बड़ी ही खूबसूरती से सजाया गया है. यहाँ तक कि अजय 'अज्ञात' की प…

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