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July, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जाको राखे साइंया चुरा सके न कोय...

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(स्कूटी की चाबी का चित्र - मेरे मोबाइल के कैमरे से.)

सुबह-सुबह 5 बजे मेरे मोबाइल के अलार्म की घंटी की हल्की सी आवाज सुनाई दी तो मेरी नींद खुली.  आवाज बेहद हल्की आ रही थी. मुझे लगा कि कहीं किताब या तकिये इत्यादि के नीचे वह दब गया होगा और इस वजह से उसकी आवाज दब रही होगी.

चूंकि अलार्म पूरे 1 मिनट बजता है इसीलिए मैं उठा और उसे बंद करने के लिए ढूंढने लगा. वह कमरे में कहीं नहीं मिला, मगर उसकी घंटी की बेहद हल्की आवाज आ रही थी - यह आवाज अन्य किसी मोबाइल के अलार्म की नहीं हो सकती थी क्योंकि मैंने बड़ा विशिष्ट किस्म का अलार्म टोन लगाया हुआ था. जल्द ही अलार्म बंद भी हो गया. परंतु अलार्म हर दस मिनट के अंतराल से बजता रहता है जब तक कि उसे बंद न कर दिया जाए, अतः मैंने मोबाइल को ढूंढने की गरज से घर के दूसरे फ़ोन से काल किया. मेरे मोबाइल की घंटी कुछ इस तरह से बजी जैसे कहीं सुदूर मंदिर में घंटी बज रही हो.

मेरा माथा ठनका. दिमाग की बत्ती जली. मैं तुरंत नीचे बाहर की ओर दौड़ा.

मेरा मोबाइल बाहर सड़क पर रखी मेरी स्कूटी की सीट पर पड़ा था. सुरक्षित. पूरी तरह से. रात में बारिश के मौसम के बावजूद पानी भी नहीं गि…

ई-पण्डित के गूगल+ पर किए गए बकबक की फ़ीड कैसे प्राप्त करें?

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यह है नो-नॉनसेंस, ईडियटों का गाइड - किसी मित्र के गूगल+ पर किए गए पब्लिक बकवासों की फ़ीड प्राप्त करने के लिए.
अपने मित्र का गूगल+ प्रोफ़ाइल नंबर प्राप्त करें. यह बेहद लंबे अंकों का होता है जो गूगल+ के प्रोफ़ाइल यूआरएल में क्लिक करने पर ब्राउजर के एड्रेसबार में नमूदार होता है. उदाहरण के लिए, ई-पण्डित का प्रोफ़ाइल नंबर  है 113298719968436587792.


इस नंबर को प्लसफ़ीड.एप्पस्पॉट.कॉम यूआरएल के आगे जोड़ कर उस गूगल+ प्रोफ़ाइल के सार्वजनिक सामग्री (पब्लिक कंटेंट) का फ़ीड का यूआरएल बना सकते हैं.
जैसे कि यूआरएल -  http://plusfeed.appspot.com/113298719968436587792
के जरिए ई-पण्डित की पब्लिक बकवासों की फ़ीड अपने फ़ीड रीडर पर पढ़ सकते हैं. और जब भी नया सार्वजनिक सामग्री प्रकाशित होगा, वो आपके फ़ीड रीडर में स्वयंमेव आ जाएगा. यानी आपको गूगल+ पर बारंबार झांकने की जरूरत नहीं!
ई-पण्डित का गूगल+ पर पब्लिक सामग्री फ़ीड रीडर पर  कुछ इस किस्म का दिखेगा -

हैप्पी +  रीडिंग!
टीप - मेरे गूगल+ प्रोफ़ाइल नंबर की फ़ीड प्राप्त करने की कोशिश करेंगे तो आपको शून्य परिणाम मिलेगा. वहाँ कोई सार्वजनिक सामग्री अभी नहीं है!

आवश्यकता, - माई फ्रेंड्स बीन हैक्ड - आविष्कार की जननी है...

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वैसे तो, इस फ़ीचर को ईमेल के साथ पहले दिन से ही उपलब्ध होना था, मगर ख़ैर ये बात तब किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि बुरे लोग किसी प्रयोक्ता के ईमेल खाते को हैक कर उसके तमाम संपर्कों को स्पैम भेज कर लूट-खसोट की भी कोशिशें करेंगे.
ईमेल खातों को हैक कर उसके तमाम संपर्कों को ईमेल के जरिए स्पैम संदेश भेजने की घटनाओं में दिनों दिन उत्तरोत्तर वृद्धि होती गई है. और बहुत बार हैक किए गए प्रयोक्ता को न तो कोई जानकारी रहती है और न ही उसके पास अपने खाते को वापस पाने के रास्ते. क्योंकि कई बार हैकर उन तमाम रास्तों को भी बंद कर चुका होता है. और बहुधा अपने खाते को फिर से वापस पाने का तरीका आसान नहीं होता वरन बेहद कष्टकारी होता है और समय खाऊ होता है.
इस समस्या से प्रभावकारी तरीके से निपटने के लिेए हॉटमेल ईमेल सेवा में एक बेहद नायाब फ़ीचर जोड़ा गया है - माई फ्रेंड्स बीन हैक्ड!
तो, अब जब आपको आपके किसी मित्र के किसी ईमेल से लगे कि उनका खाता हैक कर लिया गया है, तो इस बटन को दबा दें. हॉटमेल न सिर्फ हैकर के क्रियाकलाप पर रोक लगाएगा, वरन आपके मित्र को उनका खाता वापस प्राप्त करने में सहायता भी करेगा.
क्या कहा? आ…

जिजीविषा

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पिछले दिनों गृहनगर की यात्रा पर था तो जब एक बचपन के मित्र के घर जा रहा था तो वहाँ गली के एक कोने में यह देखा.  एक छोटी सी  दीवार के सहारे फलता फूलता बड़ा सा विशाल वृक्ष. यह पीपल समूह का वृक्ष है. आपने भी ऐसे बहुत से पीपल या वट के पेड़ देखे होंगे अकल्पनीय जगहों पर, जहाँ वे जीवन के लिए हर किस्म के संघर्ष करते हुए दिखते होंगे. चट्टानों में, छतों में दीवारों में. और आमतौर पर मरियल, सूखे एक दो डाल युक्त दिखते हैं. मगर यह एकदम अलग है. विशाल और हरा भरा जबकि इसकी जड़ें जमीन पर नहीं हैं, दीवार पर ही चिपकी हैं.पास पड़ोस के लोगों ने बताया कि यह कोई 15-20 वर्ष पुराना है और मकान मालिक द्वारा कई बार काटने उखाड़ने के बाद भी यह इतना हरा भरा और विशाल है.जिजीविषा शायद इसे ही कहते हैं.

और, अब लीजिए आपकी सेवा में आ गया नया! गूगल(-) माइनस

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धमाकेदार गूगल+ आया तो गूगल(-) को तो आना ही था. गूगल माइनस को रिलीज करने वाली पार्टी के बारे में तो अभी एंटीसेक और एनॉनिमस हैकर समूहों को भी पता नहीं है, मगर है यह बेहद काम का. आप सोच रहे होंगे कि ये गूगल माइनस आखिर है क्या बला? दरअसल, गूगल माइनस एंटी-सोशल-नेटवर्किंग वेब एप्प है जो आपको गूगल+ तथा फ़ेसबुक जैसी वेब विपदाओं से प्रभावी तरीकों से बचाता है. गूगल माइनस क्या क्या कर सकता है?सवाल ये है कि ये नया जारी किया गया गूगल माइनस आखिर कर क्या सकता है और क्या सचमुच ये हमारे काम का है भी? तो उत्तर है – हाँ, ये बहुत कुछ कर सकता है और ये हमारे बहुत काम का है. इसकी स्केलेबिलिटी अंतहीन है. इसमें आप अपनी सुविधानुसार सुविधाएँ और फीचर्स आसानी से जोड़ घटा सकते हैं. वस्तुतः इसको काम में लेने के लिए आपके पास क्षमता होनी चाहिए. आप अपनी क्षमता के मुताबिक इस मुफ़्त एप्प से चाहे जो काम ले सकते हैं. अपुष्ट खबरों के मुताबिक कुछ हैकरों ने इससे सुबह का नाश्ता भी तैयार करवाने में सफलता प्राप्त कर ली है. वर्तमान में गूगल माइनस में उपलब्ध मुख्य फ़ीचर्स हैं -अपने इनबॉक्स को जो गूगल+ इनवाइटों से अथवा या गूगल+ मे…

आम के आम गुठलियों, छिलकों के भी दाम !

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नूरजहाँ नामक  3.5 किलो के 1 नग आम की कीमत यदि 300 रुपए हो तो ये कहावत सच साबित तो होगी ही!
-- नूरजहाँ - एक और दृश्य :

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चलिए, इसी बहाने अब आम-उत्सव मना ही लेते हैं -
-- लोटिया चौसा :

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-- लंगड़ा :

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-- तोतापरी :

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-- लखनऊ सफेदा :

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-- सुर्खा झाखड़बाग :

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-- काला पहाड़ :

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-- पायरी :

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-- हुस्न आरा :

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-- केसर :

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-- नायाब :

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-- राजापुरी

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-- देसी :

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-- अम्बिका

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-- अरदायू :

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-- सिन्धु :

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-- तोतापरी -2 :

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-- दशहरी :
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-- आम्रपाली :

.... गुलाब खास :

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-- चितला :

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मुंह में पानी आया कि नहीं ?

भाषाई दीवार को तोड़ने की एक और उम्दा, जोरदार कोशिश - नया! ई-पण्डित आइऍमई

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पहले, पहली बात. इतिहास की बात.मैं 1988 से कंप्यूटरों पर हिंदी में काम कर रहा हूँ, तब बिना हार्ड-डिस्क या 20 मेबा की हार्डडिस्क युक्त 286 कंप्यूटर होते थे जिनकी स्पीड 33 मेहर्त्ज होती थी और जिनमें रैम 1-2 मेबा होता था. अविश्वसनीय? जी हाँ. और फिर भी हमारा काम हो जाता था. हम खुश थे कि कंप्यूटर हमारा काम कितना आसान कर देता है!तब डास ऑपरेटिंग सिस्टम से फ्लापी से बूट कर काम करते थे. बूटेबल फ्लॉपी में ही कुछ प्रोग्राम होते थे. हिंदी के लिए उन दिनों अक्षर नामक वर्ड प्रोसेसर होता था. उसमें हिंदी कीबोर्ड हिंदी रेमिंगटन टाइपराइटर के कीबोर्ड जैसा होता था. बहुत दिनों तक इसी में काम करते रहे. बाद में विंडोज 3.x / 95 आया तो डास आधारित अक्षर कालातीत हो गया, और एमएस ऑफ़िस आ गया जिसमें तोड़ निकाल कर कृतिदेव जैसे हिंदी टाइफ़ेस दिखने वाले मूल रूप में अंग्रेज़ी फ़ॉन्टों से काम चलाना पड़ा. कृतिदेव भी रेमिंगटन हिंदी कीबोर्ड आधारित था. चूंकि अक्षर भी रेमिंगटन कीबोर्ड पर था, अतः यहाँ कुछ अक्षरों के अलावा समस्या उतनी नहीं हुई, मगर लिखी हिंदी सामग्री में से माल ढूंढना टेढ़ी खीर होती थी क्योंकि बैकग्राउण्ड में त…

ग़रीबों का काइनेक्ट - इंटेक्स वेब कैम...

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वीडियो गेम को रीडिफ़ाइन करने में काइनेक्ट ने बड़ा कमाल किया है, और ये अच्छा खासा सफल और लोकप्रिय रहा है. इसका एपीआई अब सब के लिए खोल दिया गया है, इसका मतलब है कि देखते ही देखते इसके सैकड़ों अकल्पनीय प्रयोग भी सामने आएंगे.काइनेक्ट वस्तुतः वेब कैम के सहारे फेस व बॉडी रिकग्नीशन के जरिए कॉम्प्लैक्स कंप्यूटिंग इनपुट हासिल कर उनका संपादन करता है. काइनेक्ट के जरिए आप अपने हाथों और पैरों को वास्तविक रूप में चला कर एक तरह से एक्सरसाइज करते हुए गेम खेल सकते हैं.काइनेक्ट चूंकि पूर्णतः एक गेमिंग कंसोल उपकरण है, अतः यह महंगा उपकरण है.अभी हाल ही में मुझे एक नए वेब कैम की जरूरत पड़ी तो सस्ता सा इंटेक्स आईटी 305 डबल्यूसी उठा लाया. वैसे तो यह प्लग-एंड प्ले है, परंतु इसके साथ एक सीडी भी थी और एक दो पन्ने का यूजर मैनुअल. यूँ ही सरसरी निगाह यूजर मैनुअल में मारी तो पाया कि अरे! यह तो ग़रीबों का काइनेक्ट है.(बच्चों के लिए एक छोटा सा मजेदार खेल - आप जहाँ जहाँ अपना सिर ले जाएंगे - वहाँ वहाँ नाक से पानी टपकता रहेगा)इस वेब कैम के साथ आए सीडी में में फेस व हैंड रिकग्नीशन सिस्टम के साथ बढ़िया तरीके से काम करने व…

द ग्रेट इंडियन ग्रेफ़ीटी

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(बेहतरीन भारतीय भित्तिचित्र)भारतीय रेलों के डिब्बों के भीतरी हिस्सों में और टॉयलेट पर ग्रेट इंडियन ग्रेफ़ीटी -  अजीबोग़रीब चित्रकला के नमूने आप सभी ने देखे होंगे. पर ये एकदम अलग किस्म का है - बिलकुल अनदेखा. लगता है किसी विद्यार्थी ने ट्रांजिस्टर सर्किट को याद रखने की कोशिश तब की है जब वो परीक्षा देने जा रहा था. पर, पास ही पारंपरिक चित्र में किसी दिलजले अभिषेक का हृदय खूना-खून भी हो रहा है. बाजू के सर्किट को देखकर? शायद हाँ, शायद ना!

गूगल ब्लॉगर का परिवर्तित रूप-रंग

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गूगल ब्लॉगर के गूगल+ में शामिल होने व उसके नाम में (अफ़वाहें हैं कि ब्लॉगर की जगह गूगल ब्लॉग नाम होने जा रहा है) परिवर्तन की अफ़वाहों के बीच एक बड़ा परिवर्तन आज नमूदार हुआ.

इसका यूआई रीडिजाइन किया हुआ, एकदम साफ सुथरा और इस्तेमाल में आसान और तेज है.
हो सकता है कि नए रीडिजाइन ब्लॉग में अतिरिक्त सुविधाएँ भी मिलें. एक बड़ी सुविधा की मांग बहुत समय से है - डिस्कशन स्टाइल में कमेंटिंग सिस्टम. देखते हैं यह कब मिलता है.
बस, एक समस्या है. सेटिंग में हिंदी रखे रहने के बावजूद अभी हिंदी यूआई ग़ायब है और उसे वापस लाने  के लिए जुगाड़ नहीं दिख रहा. शायद कुछ दिनों में यह भी आए.
हैप्पी ब्लॉगिंग

अद्यतन  - इसका नया ऑनलाइन एडीटर भी बढ़िया है.
इंटरफ़ेस के कुछ लिंक काम नहीं कर रहे, व कुछ लिंक गलत पाइंट कर रहे हैं.
लगता है इस अदला बदली में कुछ दिन समस्या बनी रहेगी.

द ग्रेट इंडियन जुगाड़ 2

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यदि आपको गुटखा खाने की लत है और आपको किसी ऐसी जगह तीन घंटे के लिए (मसलन मल्टीप्लैक्स इत्यादि,) जाना है जहाँ गुटखा ले जाने की पाबंदी है तो आप क्या जुगाड़ करेंगे?आपके लिए तो बढ़िया, सरल सा जुगाड़ है.न तो आपको अपने जूतों के तसलों में गुप्त खाना बनवाने की जरूरत है और न ही अंतर्वस्त्रों में छुपाकर ले जाने की जरूरत है.आजकल मोबाइल सर्वत्र, सर्वव्यापी है. मोबाइल की बैटरी निकालिए, उसके बैटरी वाले खाने में गुटखे का पाउच रखिए, और बस ले चलिए.हिंट - 1- एक से अधिक पाउच रखने के लिए बड़ी बैटरी वाला मोबाइल रखें, न कि दो या अधिक मोबाइल.हिंट - 2 - बैटरी अलग से जेब में न रखें. बैटरी अलग से रखने पर चेकिंग में पकड़े जाने का खतरा रहता है. चेकिंग के दौरान  (नीचे) चित्र में दिया गया मोबाइल में रखा पाउच  दो-दो मोबाइल रखने व दोनों की ही बैटरी अलग निकाल कर जेब में रखने की वजह से ही पकड़ में आया!--

द ग्रेट इंडियन जुगाड़

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यदि आपके प्लास्टिक के स्टूल का एक पाया टूट जाए तो आप क्या करेंगे?अ - उसे रद्दी में बेच देंगेब - उसे कूड़े दान में डाल देंगेस - उसे कबाड़ वाले को मुफ़्त में दे देंगेद - उसके टूटे पाए को बोल्ट से जोड़कर प्रयोग में लेंगेसही जवाब - (द)देखिए, कि ये कैसे करें -हाँ, स्टूल के बाकी के तीन पैरों को काट कर बैलेंस करना न भूलें!(जुगाड़ - स्थानीय ऑटो रिपेयर शॉप पर, अच्छी कंडीशन में, कार्यरत पाया गया)

अवॉइड गर्ल्ज़ & सेव पेट्रोल & लाइफ़

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जैसा कि चित्र से जाहिर है, यह न तो डेल्ही बेली का डायलॉग है और न ही किसी पर्यावरण प्रेमी का.
किसी टूटे-दिल सोनू की आपबीती कहानी का शीर्षक नहीं है ये?

फ़ेसबुक का इंद्रासन हिलाने आया गूगल+?

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अंतर्जालफ़ेसबुक का इंद्रासन हिलाने आया गूगल+? इंटरनेट खोज, ईमेल, एप्स के बाद गूगल का नया बड़ा शगूफ़ालेखकः रविशंकर श्रीवास्तव | July 1st, 2011 इंटरनेट पर गूगल की एक नई नवेली सोशल नेटवर्किंग सेवा गूगल+ (उच्चारणः गूगल प्लस) चंद चुनिंदा आमंत्रितों के लिए प्रारंभ हो गई है। यह http://plus.google.com या http://www.google.com/+ पर उपलब्ध है। माना जा रहा है कि गूगल+ को फ़ेसबुक को मात देने की नीयत से अच्छी खासी मेहनत कर प्रस्तुत किया जा रहा है। गूगल यूं भी इंटरनेट पर खोज और ईमेल से लेकर ऑफ़िस अनुप्रयोगों तक की तमाम तरह की सेवाएं और वेब अनुप्रयोग प्रदान कर उस क्षेत्र पर अपना प्रभुत्व बना बैठा है। माईक्रोसॉफ्ट बिंग के प्रवेश के बाद विगत कुछ दिनों में गूगल की बादशाहत को सबसे बड़ा खतरा फ़ेसबुक से ही रहा है, जिसका प्रयोक्ता ने एक दफा रुख किया तो फिर वहीं की हो कर रह गई, ऐसा मुकाम जो आर्कुट को मयस्सर नहीं हो सका। कई क्षेत्रों में तो इंटरनेट प्रयोग के मामले में फ़ेसबुक ने गूगल को पछाड़ कर पहले स्थान पर कब्जा भी कर लिया है। अफवाह तो ये भी है कि गूगल को उसके घर में घुसकर मात देने के लिए फ़ेसबुक ने ईमेल क…

विशाल लाइब्रेरी में से पढ़ें >

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