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May, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्या आप भी टोरेंट डाउनलोड करते हैं? यदि हाँ तो हर्जाना भरने के लिए तैयार रहिए

अमरीकी इतिहास में पहली मर्तबा कोई एक लाख चालीस हजार कंप्यूटर उपयोक्ताओं पर हर्जाना भरने का मुकदमा दायर किया गया है. उन पर टोरेंट से फ़िल्में अवैध तरीके से डाउनलोड करने का आरोप है. टोरेंट से डाउनलोड करने वालों को उनके आईपी पते से पहचाना जाकर उन पर अवैध तरीके से फिल्म डाउनलोड करने और इस वजह से फिल्म कंपनी को हुए नुकसान की भरपाई का मुकदमा दायर किया गया है.और, ऐसा एक नहीं कई फ़िल्मों के निर्माताओं ने किया है. हर्टलाकर फ़िल्म के लिए 24583 लोगों को, एक्सपांडेबल्स के लिए 23000 लोगों को चिह्नित किया जाकर उनपर मुकदमे दर्ज किए गये हैं. इसी तर्ज पर कई अमरीकी शहरों में कई बी ग्रेड फ़िल्मों व पॉर्न फ़िल्मों को टोरेंट से डाउनलोड करने वाले कोई 1 लाख 40 हजार लोगों के ऊपर हर्जाना वसूलने के  अलग-2 मुकदमे दर्ज किए गए हैं. प्रत्येक मुकदमे के लिए डेढ़ हजार से 3000 डालर (करीब डेढ़ लाख रुपए) हर्जाना वसूला जा रहा है. हर्जाना वसूलने का यह धंधा वहाँ इतना बढ़िया फल फूल रहा है कि कई कंपनियाँ एक ही व्यक्ति को कई कई बार अभियुक्त बना रही हैं.तो यदि आप भी टोरेंट जंकी हों तो चेत जाइए. भारत में जब गली कूचों में पायरेट…

सत्यकथा - हेलमेट

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"सर, पिछले वर्ष हमने नागपुर, मुम्बई, चेन्नई यानी लगभग सारे वेस्टर्न सदर्न बिग सिटीज कवर कर लिए थे, और अब सेंट्रल सिटीज की बारी है.""गुड. गो अहेड""सर, हम एमपी के इंदौर, भोपाल, जबलपुर से शुरू करेंगे और फिर यूपी की तरफ आगे बढ़ेंगे.""ग्रेट प्लान.""सर, हमने इन सिटीज के डीएम, एसपी को पहले ही लाइन में ले लिया है - तो पूरी सरकारी मशीनरी हमारे साथ है. दो-एक मेनस्ट्रीम अखबार के बिग हेड्स को भी सेट कर लिया है, ये हमारे कैंपेन में अपने अखबारों में साथ देंगे.""दैड्ट गुड. एनीथिंग एक्स्ट्रा नीड्स टू बी मैनेज्ड?""यस सर, कुछ लोकल पॉलिटिशियन को भी मैनेज करना पड़ सकता है, नहीं तो कैंपेन की हवा निकल जाएगी.""ओके, दैट विल बी डन."और इस तरह इन शहरों में बारी बारी से हफ़्ते दस दिन के लिए हेलमेट पहनो-पहनाओ अभियान हेलमेट कंपनियों के बैकग्राउण्ड प्रायोजन में चलता रहा. और जनता की हलाकान जिंदगी दस-बारह दिनों में वापस पटरी पर आती रही...(डिस्क्लेमर और वैधानिक चेतावनी - सुरक्षा के लिहाज से दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट अवश्य पहनें.)

3 जी अभी जी या नहीं जी?

3Gबीएसएनएल 3 जी डाटा कार्ड का बड़े बुझे दिल से मैंने कुछ दिन पहले मर्सिया पढ़ दिया. बाद में पता चला कि मैं अकेला नहीं हूं.पीसी क्वैस्ट के प्रशांतो के राय ने अपना अनुभव बताते हुए लिखा है कि भले ही वे अपने विदेशी दौरे में अपने दैनिक भत्ते का अच्छा खासा हिस्सा 3जी डाटा कनेक्शन के लिए खर्च कर लेते हों, भारत में अभी 3 जी से दूर का नाता बनाए रखेंगे. क्यों? कनेक्शन और सिग्नल स्टेबिलिटी की समस्या.कुछ और कारण हैं हाल फिल हाल 3 जी से दूरी बनाए रखने के -5 एमबीपीएस पीक सिगनल आमतौर पर मिलता तो है परंतु बुरी तरह अनस्टेबल रहता है. दूसरे ही क्षण केबीपीएस में आ जाता हैबारंबार और कभी भी (फ्रीक्वेंट) काल ड्राप3जी एनेबल्ड फ़ोन में बैटरी की जिंदगी 2 जी की अपेक्षा 3 जी में आधी डाटा डाउनलोड अपलोड फास्ट, परंतु एक दो मिनट बाद ही कनेक्टिविटी की समस्यागूगल मैप्स, वीडियो, मल्टीमीडिया इत्यादि भारी भरकम डाटा डाउनलोड के लिए तो ठीक है, परंतु सामान्य ब्राउजिंग, ईमेलिंग के लिए 2 जी पर्याप्त है.पीसी क्वैस्ट 3 जी शूटआउट में यह समस्या प्रायः सभी कैरियरों में पाई गई है.अतः आप भी अभी 3 जी से पर्याप्त दूरी बनाए रखिए जी. कम …

आखिरकार, लीजिए पेश है इंटरनेट एक्सप्लोरर के लिए हिंदी वर्तनी जांचक

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माइक्रोसॉफ़्ट की कुटिल व्यवसायिक नीति के चलते इंटरनेट एक्सप्लोरर में हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा अभी तक उपलब्ध नहीं थी. जबकि माइक्रोसॉफ़्ट हिंदी ऑफ़िस में यह उपलब्ध है, और थोड़े से बदलाव के साथ इसे आसानी से इंटरनेट एक्सप्लोरर में जोड़ा जा सकता है. परंतु तब फिर हिंदी ऑफ़िस कौन खरीदेगा? इधर  आप आकाश के  दूसरी तरफ दृष्टि डालें तो पाएंगे कि गूगल क्रोम में हिंदी वर्तनी जाँच की सुविधा अंतर्निर्मित है, और मोजिल्ला के लिए दो-एक हिंदी वर्तनी जांच प्लगइन जारी किए जा चुके हैं. यही वजह है कि (सुविधाएँ कम होने के कारण व सुरक्षा खतरों इत्यादि के चलते) एक समय जहाँ माइक्रोसॉफ़्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर का प्रयोग 80 प्रतिशत से अधिक इंटरनेट प्रयोक्ता करते थे, अब मामला सिमट कर आधे से भी कम रह गया है और इंटरनेट एक्सप्लोरर का यह पतन जारी है. मैं शर्त लगा सकता हूँ कि यदि मूलभूत सुविधाएँ, जैसे कि हिंदी वर्तनी जांच जैसी चीजें इंटरनेट एक्सप्लोरर में दे दी जाएँ, तो इसके प्रयोक्ता अच्छे खासे बढ़ेंगे, क्योंकि ऑफ़िस प्लेटफ़ॉर्म में उपलब्ध हिंदी वर्तनी जाँच सुविधा उन्नत है और थिसॉरस समेत है.बहरहाल, इंटरनेट एक्सप्लोरर क…

आईआईटी और आईआईएम : कौन किसे कह रहा है स्तरहीन?

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किसने कैसी है उँगली उठाई स्तरहीन देखिए कौन किसे कह रहा स्तरहीन मुश्किल से राज की ये बात पता चली शान से जीते हैं वही जो हैं स्तरहीन कोई भी आता नहीं है यहाँ इस तरह क्यों जमाने भर की भीड़ है स्तरहीन जवाब की कामना किस मुँह से करोगे सवाल ही जब दागा गया है स्तरहीन रवि का तो बड़ा नाम है ईमानदारों में दरअसल वो है जरा सा कम स्तरहीन

हिंदी के #टॉप बेस्ट ब्लॉग

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हिंदी के शीर्ष के चुनिंदा श्रेष्ठ ब्लॉगों की कोई सूची हो सकती है?पिछले कई मौकों पर और हाल ही में कुछ ऐसे प्रयोग होते रहे हैं, और इनमें से कई खासे विवादास्पद होते रहे हैं क्योंकि कोई भी ऐसी सूची, यकीन मानिए, मुकम्मल हो ही नहीं सकती. वजह, जाहिर है - पसंद अपनी अपनी, खयाल अपना अपना.फिर भी कहीं कहीं कुछ संकलन अवश्य उपलब्ध हैं जहाँ हिंदी के शीर्ष क्रम के चिट्ठों को अपने अपने अंदाज में संकलित किया गया है.ऐसा ही एक और प्रयास जागरण जंक्शन के बेस्ट वेब ब्लॉग में किया गया है. जागरण जंक्शन का अपना स्वयं का ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म है, जिसमें हिंदी ब्लॉगिंग को कंटेंट क्रिएशन के रूप में जबरदस्त पुश दिया जा रहा है. इसके बावजूद, शीर्ष के हिंदी ब्लॉगों में ब्लॉगर और वर्डप्रेस के अच्छे हिंदी ब्लॉगों को भी स्थान दिया गया है.पर, जैसा कि मैंने पहले भी कहा, कोई ऐसी सूची परिपूर्ण या आइडियल बन ही नहीं सकती. हरेक में खामियाँ होंगी ही. जागरण जंक्शन की इस सूची में भी गंभीर खामियाँ हैं. भी  फिर भी प्रयास साधुवाद का पात्र है क्योंकि अन्य प्लेटफ़ॉर्म के कुछ चुनिंदा अच्छे चिट्ठे जागरण जंक्शन में सामने नजर तो आ ही रहे ह…

एयरटेल डिजिटल टीवी (डीटीएच टीवी) ? कभी नहीं!

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एयरटेल सक्स. आलवेज.जैसे एयरटेल डीटीएच कनेक्शन लेकर मैंने पाप कर लिया हो. पर साल भर तक तो इसका अहसास नहीं ही हुआ था.जब डीटीएच और टीवी देखने वालों की  दुनिया एचडी फ़ॉर्मेट में जाने लगी तो अपने राम ने भी सोचा कि चलो डीटीएच एचडी पर शिफ़्ट हुआ जाए. हालांकि अभी भारत में डीटीएच में एचडी का तो एक तरह से जन्म ही नहीं हुआ है, मगर शुरूआती प्लेयरों को तो हम जैसे नवीन टेक्नोलॉज़ी के प्रयोक्ताओं के द्वारा संबल तो दिया ही जाना चाहिए?तो, तमाम एचडी डीटीएच की जाँच पड़ताल की गई तो पाया गया कि या तो जीटीवी के एचडी डीटीएच से जुड़ा जाए या फिर टाटा स्काई के डीटीएच से, क्योंकि एयरटेल में तो अभी एचडी डीटीएच के नाम मात्र के ही चैनल हैं.तो हमने एयरटेल डीटीएच काल सेंटर को बोल दिया कि भइए, हमारा कनेक्शन का समय खतम हो रहा है, हम एचडी में जाना चाहते हैं, तो हमें अब ये कनेक्शन नहीं रखना है.और हमने यह संदेश देकर अपना एयरटेल डीटीएक का सब्सक्रिप्शन रीन्यू नहीं करवाया.और, लगता है कि यहीं हमने आफत मोल ले ली.सब्सक्रिप्शन रीन्यू ड्यू होने के हफ़्ते दिन पहले से सुबह-शाम-रात-दोपहर मेरे रजिस्टर्ड मोबाइल फोन में एसएमएस और ऑटोम…

अइयो रब्बा कभी किताब न छपवाना

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वैसे तो अपनी किताब छपवाने का सपना मैं तब से देख रहा हूँ जब मैं राम-रहीम पॉकेट बुक पढ़ता था. बाद में गुलशन नन्दा पर ट्रांसफर हुआ तब भी अपना स्वयं का रोमांटिक नॉवेल मन में कई बार लिखा और उससे कहीं ज्यादा बार छपवाया. कुछ समय बाद रोमांस का तड़का जेम्स हेडली चेइज, अगाथा क्रिस्टी और एलिएस्टर मैक्लीन में बदला तब तो और भी न जाने कितने जासूसी नॉवेल मन ही मन में लिख मारे और छपवा भी डाले और बड़े-बड़ों से लोकार्पण भी करवा डाले. इस बीच कभी कभार जोर मारा तो कविता, तुकबंदियों और व्यंज़लों का संग्रह भी आ गया. मगर, वास्तविक में, प्रिंट में छपवाने के मंसूबे तो मंसूबे ही रह गए थे. बहुत पहले एक स्थापित लेखक की एक और कृति बढ़िया प्रकाशन संस्थान से छपी और लोकार्पित हुई. एक समीक्षक महोदय ने प्राइवेट चर्चा में कहा – सब सेटिंग का खेल है. देखना ये किसी कोर्स में लगवाने की जुगत कर लेंगे. वो किताब कोर्स में लगी या नहीं, मगर किताब छपवाने में भी सेटिंग होती है ये पहली बार पता चला. एक बार एक कहानीकार मित्र महोदय चहकते हुए मिल गए. उनके हाथों में उनका सद्यःप्रकाशित कहानी संग्रह था. एक प्रति मुझे भेंट करते हुए गदगद …

"...अधिकारी ने कहा - हिन्दी सॉफ़्ट्वेयर बहुत अच्छा है... पर ... हमें क्या मिलेगा?"

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"....अगर हमारे देश में भ्रष्टाचार नहीं होता तो आज हमारी तस्वीर संसार के विश्वपटल पर कुछ और ही होती। सरकार में बैठे लोग चाहे मंत्री हों या अधिकारी ईमानदारी और शिष्टाचार के तहत कुछ नहीं करते। २००४ में सर्वप्रथम यह हिन्दी सॉफ़्टवेयर मैंने प्रदेश सरकार के एक सचिव स्तर के अधिकारी को दिखाए थे। उन्होंने वल्लव भवन में अपने चैम्बर में मुझसे कहा था की आपका हिन्दी सॉफ़्ट्वेयर का कार्य बहुत अच्छा है, लेकिन आप यहाँ जिस कुर्सी पर बैठे हैं वहाँ माइक्रो***** जैसी कम्पनी वाले भी आकर बैठते हैं जोकि हम पर करोड़ों रूपये खर्च करते हैं। आपसे हमें क्या मिलेगा?तो मैंने कहा था, मैं क्या दे सकता हूँ, आप तो जानते हैं मैं तो एक साधारण से किसान परिवार से हूँ।” तो उस अधिकारी ने बहुत ही रूखा व्यवहार किया था और देश के लाखों लोगों के काम आ सकने वाले मेरे कार्य को इस अधिकारी ने फ़ाइलों में ही दबा दिया..."  आगे पढ़ें >>>यह बात हिंदी सॉफ़्टवेयर डेवलपर जगदीप डांगी ने अपने ताज़ा साक्षात्कार में कही है. साक्षात्कार में जगदीप ने हिंदी कंप्यूटिंग पर और भी बहुत सी बेबाक बातें कही हैं. पूरा साक्षात्कार आप य…

एक शाम जबलपुर के नाम...

हिंदी ब्लॉग, ब्लॉगिंग और ब्लॉग-मित्रों की, ब्लॉग-मित्रों से बातें - गिरीश बिल्लौरे मुकुल तथा विजय तिवारी किसलय के साथ :(शुरू के कुछ मिनट ऑडियो बेहद धीमा है, मगर बाद में ठीक है. आप चाहें तो शुरू के 4-5 मिनट स्किप कर सकते हैं)इसी प्रवास के कुछ और लाइव वीडियो -इस लाइव वीडियो को अपने सेल फ़ोन से लाइव किया विजय तिवारी किसलय ने : .Bambuser | देवर्षि  नारद  पत्रकारिता  सम्मान  समारोह  जबलपुर  (विजय तिवारी 5)और ऊपर दिए लाइव वीडियो के प्रारंभिक भाग की कड़ी -http://bambuser.com/v/1657858(इस वीडियो में साउंड की कुछ समस्या है, अतः अग्रिम क्षमा) जबलपुर की शाम यादगार बनाने हेतु भाई विजय व भाई गिरीश का हार्दिक धन्यवाद.

गूगल से कौन डरता है?

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नया याहू! मेल बीटा - टू फ़ास्ट एंड टू फ़्यूरियस!!

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(पुराना याहू! मेल)याहू! मेल का प्रयोग करते हुए 11 वर्ष कब बीत गए पता ही नहीं चला. बीच में याहू! मेल में स्पैम ईमेलों की भरमार होने और हिंदी समेत तमाम अन्य सुविधाओं के अंतर्निर्मित होने व प्रमुख रूप से पॉप-3 एक्सेस की सुविधा होने से जीमेल पर पूरी तरह शिफ़्ट हो गया, परंतु कुछ पुराने खातों को मेंटेनेंस और द्वितीय, वैकल्पिक ईमेल की सुविधा के चलते याहू! मेल खाता चलता रहा और महीने पंद्रह दिनों में वहाँ झांकता रहा था.पर इधर कुछ दिनों से मैं देख रहा था कि याहू! ईमेल में स्पैम ईमेलों की संख्या नगण्य सी हो गई है. तभी से लग रहा था कि याहू! मेल शायद किसी समय कमबैक करे. और आज ये नोटिस मिला -Dear ravi,
We appreciate that you have been with Yahoo! Mail for the past 11 years. We are looking forward to bringing you an even faster, safer, easier-to-use Yahoo! Mail very soon.
If you’ve already upgraded to the latest Yahoo! Mail, thank you.
If not, in about a month from the date of this email, when you sign in to your Yahoo! Mail account, we will ask you to upgrade to the newest version of Yahoo! Mail. At t…

झूठा कहीं का... (2)

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माइक्रोसॉफ़्ट विंडोज़ की हिंदी सुधारने में मदद करें

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माइक्रोसॉफ़्ट विंडोज़ प्लेटफ़ॉर्म में चहुंओर हिंदीकरण हो रहा है. ऑपरेटिंग सिस्टम स्तर से लेकर ऑफ़िस अनुप्रयोग और प्रोग्रामिंग हेतु भी हिंदी में इंटरफ़ेस उपलब्ध करवाए जा रहे हैं. बहुतों को शिकायत रहती है कि अनुवाद का स्तर ठीक नहीं है या अनुवाद सही नहीं हुआ है या अनुवाद और कहीं बेहतर हो सकता है. हिंदी कंप्यूटिंग की बेहतर एडॉप्टिबिलिटी के लिए व  अनुवादों का स्तर बढ़ाने में तथा गलतियों को सुधारने में आम जनता से जो हिंदी कंप्यूटिंग प्रयोग करती है, मदद चाही गई है.


आप भी माइक्रोसॉफ़्ट विंडोज़ की हिंदी सुधारने में मदद कर सकते हैं.


आपको क्या करना होगा?


आसान है. आपको नीचे दिए गए यूआरएल में जाकर विंडोज़ लाइव खाता से लॉगिन करना होगा.


http://www.microsoft.com/language/mtcf/mtcf_glossary.aspx?s=4&langid=2179&cult=hi-HI

वहाँ पर आप दिए गए तकनीकी शब्दों के वर्तमान अनुवाद को देखें और यदि आपको लगता है कि अनुवाद बेहतर हो सकता है तो अपने विकल्प सुझाएँ. यदि आपका विंडोज़ लाइव खाता नहीं है तब भी कोई बात नहीं आप खाता बना सकते हैं या फिर गेस्ट के रूप में वर्तमान अनुवादों को देख सकते हैं.

ध्यान दें कि ज…

भगवान के लिए, टिप्पणियाँ माडरेट करें.​

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यह चित्र देखें -​



यहां एक  प्रविष्टि पर २२६ टिप्पणियाँ दर्ज हैं.​
शुरू के १०-१५ तो जेनुइन हैं, और उसके बाद के सारे के सारे स्पैम. फर्जी साइटों के लिंक लिए हुए.​

अगर आप अपनी टिप्पणियों को माडरेट नहीं करते हैं तो चेत जाइए. देखिए कि आपके चिट्ठे की पुरानी पोस्टों में ऐसे स्पैम कमेंट डेरा डाले तो नहीं बैठे हैं.​

यह जाँच प्रविष्टि लिपिक.इन (http://lipik.in/hindi.html) के आनलाइन इनस्क्रिप्ट (​आप रेमिंगटन यानी कृतिदेव और फ़ोनेटिक में भी लिख सकते हैं) हिंदी टाइपिंग औजार के जरिए बिना हार्ड ड्राइव युक्त नोटबुक कंप्यूटर (हार्डड्राइव खराब हो गया तो यूएसबी पेन ड्राइव प्रयोग में) में बूटेबल लिनक्स मिंट यूएसबी पेन ड्राइव के जरिए, रिलायंस डेटा कार्ड का प्रयोग करते हुए यात्रा के बीच लिखा जा रहा है.​\

टेक्नोलाजी वाकई एडवांस हो गई है. एक मरते हुए नोटबुक को काम लायक जिंदा देखना, वो भी ब्राउजर में उपलब्ध सारे संसाधनों के जरिए. रोचक, अचंभित करने वाला अनुभव है.

झूठा कहीं का

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व्यंज़लअचरज है ये मुद्दा नहीं हैमुद्दा है कि ये मुद्दा नहीं है.जवाब सबको मालूम हैंसवाल कोई मुद्दा नहीं है.समस्या तो कुरसी की  हैयूँ और कोई मुद्दा नहीं है.भूखे पेट, सड़ते अनाजकमाल है ये मुद्दा नहीं हैजीतना तो है रवि कोकि कैसे, ये मुद्दा नहीं है.---

पुस्तक समीक्षा : हिंदी ब्लॉगिंग - अभिव्यक्ति की नई क्रांति

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"हिंदी ब्लॉगिंग का विस्तृत दस्तावेज़..."  - डॉ. गिरिराज शरण अग्रवाल.कोई पौने चार सौ पृष्ठों की इस किताब में हिंदी ब्लॉगिंग के तमाम छुए-अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है. किताब वस्तुतः हिंदी ब्लॉगिंग के विविध आयामों में जमे और डटे ब्लॉगरों की लिखी सामग्री को लेकर संपादित व संयोजित किया गया है.  एक तरह से यह ब्लॉग, खासकर हिंदी ब्लॉग के लिए रेफरेंस बुक की तरह है, जहाँ आपको हिंदी ब्लॉगिंग के तकनीकी पहलुओं से लेकर इसकी सर्जनात्मकता और आर्थिकता आदि तमाम दीगर पहलुओं पर विस्तृत आलेख मिलेंगे.विविध विषयों पर विद्वान लेखकों का अपनी अपनी शैली में लेखन किताब को न सिर्फ पठनीय बनाता है, बल्कि रोचक और जानकारी परक भी है. अलबत्ता कहीं कहीं कथ्य और विषय में दोहराव है, मगर यह इसलिए भी जरूरी है कि किसी पाठ्य पुस्तक में कोई चैप्टर ठीक से समझ नहीं आता तो विद्यार्थी किसी अन्य लेखक की किताब का संदर्भ भी अपने फंडे क्लीयर करने में लेता है. तो यही बात यहाँ भी लागू है. ब्लॉगिंग के कुछ मूलभूत बातों को हर किसी ने अपने अपने एंगल और अपनी लच्छेदार शैली में बताने की भरपूर कोशिश की है. बहुत सा मसाला यूं तो ने…

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