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मरे हुए हैं मेरे शहर के लोग...

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व्यंज़लडरे हुए हैं मेरे शहर के लोगमरे हुए हैं मेरे शहर के लोगकभी तो चिंगारी सुलगेगीभरे हुए हैं मेरे शहर के लोगजब भी परीक्षा की घड़ी आईखरे हुए हैं मेरे शहर के लोगबात बे बात लाल पीले फिरहरे हुए हैं मेरे शहर के लोगदेश को चने के खेत सा रविचरे हुए हैं मेरे शहर के लोग--

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 47

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी327प्रेमकीदेवी"वीनस'औरबिल्लीएक बार एक बिल्ली को एक नौजवान से प्यार हो गया। उसने प्रेम की देवी "वीनस' से प्रार्थना की कि वे उसे एक सुंदर लड़की बना दें। देवी वीनस को उस पर तरस आ गया और उन्होंने बिल्ली को एक सुंदर लड़की बना दिया। परिणाम स्वरूप वह नौज़वान सुंदर लड़की बनी बिल्ली के प्रेम पाश में फंस गया और उसने उससे विवाह कर लिया। एकदिन वे दोनों कमरे में बैठे थे, तब वीनस ने यह जानने के लिए कि बिल्ली ने अपने रूप के साथ-साथ अपनी प्रकृति को बदला है या नहीं, उसके सामने एक चूहा फेंका। जैसे ही बिल्ली ने उस चूहे को देखा, वह भूल गयी कि अब वह एक लड़की है। वह तुरंत चूहे पर झपटी और उसे अपने मुँह में दबोच लिया। इस भयावह दृश्य से क्रोधित होकर प्रेम की देवी ने उसे दोबारा बिल्ली बना दिया। "अपनीजन्मजातआदतोंकोबदलनाबहुतमुश्किलहै।'328किसेनौकरीमिलीएक व्यापारी को एक क्लर्क की आवश्यकता थी। उसने क्लर्क के पद पर भर्ती के लिए विज्ञापन दिया। उसे कई आवेदन प्राप्त हुए। उसने बारह अभ्यर्थियों को साक्षात्क…

इस बेदर्द जमाने में यारों, छटांक भर विनम्रता आखिर लाएँ कहाँ से?

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी325तैरने गया लड़काएक लड़का नदी में तैर रहा था। तैरते-तैरते वह दूर तक चला गया और डूबने लगा। सौभाग्य से, वहाँ से एक व्यक्ति गुजर रहा था। लड़के ने पूरी ताकत से उस व्यक्ति को आवाज़ लगाकर मदद मांगी। उस व्यक्ति ने तत्काल सहायता देने के बजाए लड़के को उसके मूर्खतापूर्ण कार्य और गहरे पानी में तैरने के लिए फटकारना शुरू कर दिया। अंततः लड़के ने चिल्लाते हुए कहा - "श्रीमान कृपया पहले मेरी जान बचाये, बाद में उपदेश दीजियेगा।' "व्यावहारिकमददकेबिनाकोईभीपरामर्शव्यर्थहोताहै।'326शिकारीऔरलकड़हाराएक शिकारी जंगल में शेर के शिकार के लिए गया। जंगल में उसे एक लकड़हारा मिला। शिकारी ने उससे पूछा कि क्या उसने शेर के झुंड को देखा है और क्या वह जानता है कि शेर की मांद कहां है। बोला -"जी हाँ, श्रीमान! और यदि आप मेरे साथ आयें तो मैं आपकी मुलाकात शेर से कर भी सकता हूँ।' यह सुनते ही शिकारी का चेहरा डर के मारे पीला पड़ गया और उसके दाँत कटकटाने लग गए। घबराते हुए वह बोला - "जी कोई बात नहीं दरअसल मैं तो शेर …

गूगल पर हिंदी के सर्च इंजन की जरूरत!

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और, यह किसी फेकिंग न्यूज की हेडलाइन नहीं है.जी हाँ!!!गूगल पर हिंदी के सर्च इंजन की बेहद जरूरत है.साथ ही हिंदी के स्पेल चेक की!यह मेरा नहीं, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति, कुठियाला महोदय का कहना है.और इस समचार को प्रमुखता से प्रकाशित किया है भारत के नंबर 1 हिंदी समाचार पत्र - दैनिक भास्कर ने.जबकि गूगल में हिंदी सर्च बाबा आदम के जमाने से अंतर्निर्मित है, और गूगल के तमाम उपक्रमों में उन्नत स्तर की हिंदी की वर्तनी जाँच की सुविधा भी पिछले कई वर्षों से उपलब्ध है.यह सही है कि हम सभी को सभी चीज का ज्ञान नहीं हो सकता. मगर विद्वानों का सही कहना भी तो है - गधा तब तक ही विद्वान बना रहता है, जब तक कि वो रेंकना न शुरू कर दे!

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी323 ज्यूपिटर, नेप्च्यून, मिनर्वा और मोमसएक कथा के अनुसार स्वर्ग में ज्यूपिटर(बृहस्पति), नेप्च्यून(वरुण) और मिनर्वा(ग्रीक मान्यता के अनुसार कला और ज्ञान की देवी) में यह शर्त लग गयी कि उनमें से कौन इस संसार की सर्वश्रेष्ठ वस्तु बना सकता है। मोमस भी स्वर्ग में रहने वाले एक देवता थे। उन्हें इस प्रतियोगिता का निर्णायक बनाया गया। ज्यूपिटर ने इंसान, मिनर्वा ने घर और नेप्च्यून ने सांड को बनाया। निर्णायक की सीट पर बैठे मोमस ने सभी रचनाओं में दोष निकालने शुरू कर दिये। सबसे पहले उसने सांड में यह दोष निकाला कि उसके सींग आँखों के नीचे नहीं हैं जिससे वह उन्हें देख नहीं पाता। फिर उसने इंसान में यह दोष ढूंढा कि उसकी छाती में कोई खिड़की नहीं है जिससे उसके मन के विचार और भावनायें दिखायी नहीं देतीं है। अंत में उसने घर में दोष निकाला कि इसमें पहिए नहीं लगे हैं। पहिए न होने के कारण उसके निवासी उसे बुरे पड़ोसियों से दूर नहीं ले जा सकते। जैसे ही मोमस ने अपना निर्णय समाप्त किया, ज्यूपिटर ने उसे स्वर्ग से बाहर का रास्…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी321हवा और सूरजएक दिन हवा और सूरज में इस बात को लेकर नोकझोक हो गयी कि उनमें से कौन ज्यादा ताकतवर है। उन्होंने इस बात का फैसला एक प्रतियोगिता के जरिए करने का निर्णय लिया। उन्होंने यह तय किया कि जो भी उस यात्री को अपना कोट उतारने को विवश कर देगा, वही ज्यादा ताकतवर कहलायेगा। हवा ने कहा कि पहले वह प्रयास करेगी। इसके बाद हवा अपनी पूरी रफ्तार से बहने लगी। बादल उमड़ने लगे और यात्री को ऐसा प्रतीत हुआ जैसे बर्फ का तूफान आ गया हो। हवा जितनी तेज बहती जाती, वह यात्री अपना कोट उतनी ही मजबूती से अपने शरीर से जकड़े रहता। इसके बाद सूरज की बारी आयी। अपनी पहली किरण से ही उसने घने बादलों और ठंड को दूर भगा दिया। यात्री को अचानक गर्मी महसूस हुयी। जैसे - जैसे सूरज गर्म होता गया, यात्री को गर्मी का अहसास होता गया और अंततः उसने गर्मी से छटपटाते हुए अपना कोट उतारकर जमीन पर फेंक दिया। सूरज को इस प्रतियोगिता का विजेता घोषित कर दिया गया। वास्तविकता यह है कि प्रकृति की भयावह शक्तियों और खतरों की तुलना में सूरज की गुनगुनी धूप…

वाय दिस कोलावरी डी?

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कोई दो-एक हफ़्ते एक अख़बार (जी हाँ, आपने सही पढ़ा, अख़बार में,) में सुबह-सुबह पढ़ा कि यू-ट्यूब पर कोलावरी डी नामक कोई म्यूजिक वीडियो लीक हो गया है और वो वायरल हो गया है. घंटे भर बाद ऑनलाइन हुआ तो दो तीन ईमेल और इतने ही न्यूज फ़ीड गा रहे थे – वाय दिस कोलावरी डी? एक में तो बाकायदा लिंक भी था. कोलावरी वायरल हो गया था तो इधर भी इन्फ़ैक्शन होना ही था. देखने के लिए कि कोलावरी क्यों इतना भयंकर रूप से वायरल हो रहा है, यू-ट्यूब लिंक पर क्लिक किया तो जाने अनजाने हमने भी वहाँ आंकड़ा बढ़ाने में अपना योगदान कर ही दिया. वहाँ धनुष गा रहे थे – वाय दिस कोलावरी डी? बाजू में संबंधित वीडियो की सूची में कोलावरी रीमिक्स, हिंदी कोलावरी, लेडी कोलावरी, इंस्ट्रूमेंटल कोलावरी और न जाने क्या क्या कोलावरी मौजूद थे. इतने कम समय में इतने सारे वाय दिस कोलावरी डी?! थोड़ी देर में ब्लॉग जगत की हलचल लेने चले तो यहाँ भी लेटेस्ट पोस्टों में वाय दिस कोलावरी डी? के दर्शन होने लगे. कहीं वीडियो का लिंक था तो कहीं एमपी3 गाने डाउनलोड का तो कहीं पर पूरा गीत लिखा हुआ था. नाश्ते के समय आदतन रेडियो मिर्ची लगाया तो जो पहला गाना सु…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी319चरमराते हुए पहियेएक ऊबड़खाबड़ रोड पर दो बैल एक बैलगाड़ी को खींचते ले जा रहे थे। तभी बैलगाड़ी के पहियों से चरमराने की आवाज़ आने लगी। गाड़ीवान ने पहियों को कोसते हुए कहा - "अरे निर्दयी! जब कठोर परिश्रम करके गाड़ी खींचने वाले ये जानवर नहीं कराह रहे हैं तो तुम क्यों शोर मचा रहे हो?" 320भेड़िया ओर मेमनानदी के किनारे एक भेड़िये को कुछ दूरी पर एक भटकता हुआ मेमना दिखायी देता है। वह उस पर हमला करके अपना शिकार बनाने का निश्चय करता है। निरीह मेमने के शिकार के लिए वह बहाना ढूंढने लगता है। वह मेमने पर चिल्लाता है - "अरे दुष्ट! जिस नदी का मैं पानी पी रहा हूँ उसे गंदा करने की तेरी हिम्मत कैसे हुयी?" मेमना नम्रतापूर्वक बोला - "माफ कीजिए श्रीमान! लेकिन मुझे यह समझ में नहीं आया कि मैं किस तरह पानी गंदा कर रहा हूँ, जबकि पानी तो आपकी ओर से बहता हुआ मेरे पास आ रहा है।" "हो सकता है! पर सिर्फ एक वर्ष पहले मैंने सुना था कि तुम मेरी पीठ पीछे बहुत बुराई कर रहे थे।" - भेड़िये ने बात बना…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी317प्रसन्न चीनी नागरिकयदि आप अमेरिका के चाइनाटाउन इलाके में घूमने जाये तो प्रायः हर जगह कपड़े का थैला लादे एक मोटे व्यक्ति की मूर्ति देखने को मिलेगी। चीनी व्यापारी उसे प्रसन्न चीनी नागरिक या लाफिंग बुद्धा कहते हैं। होतेई नामक यह व्यक्ति चीन के प्रसिद्व तांग साम्राज्य काल में रहता था। उसे अपने आप को प्रसिद्व चीनी विद्या “ज़ैन” का विद्वान कहलाने और आसपास कई शिष्यों के जमावड़े में कोई रुचि नहीं थी। इसके बजाए वह उपहार, टाफियाँ, फल, और मेवों से भरा कपड़े का बैग उठाकर सडक पर टहलता रहता थ। वह अपने आस-पास जुटे बच्चों को उपहार व टाफियाँ बांटा करता था। एक तरह से उसने सडक पर ही बच्चों का स्कूल स्थापित कर लिया था। लेकिन जब भी वह किसी “ज़ैन विद्या के अनुयायी” से मिलता, अपना हाथ फैलाकर उनसे पैसे मांगता। एक दिन वह अपने रोजमर्रा के कार्य में लगा हुआ था कि एक ज़ैन गुरू वहाँ आये और पूछने लगे- “बताओ ज़ैन विद्या का क्या महत्व है?” होतेई ने उत्तर देने के बजाए सांकेतिक रूप से अपना बैग जमीन पर पटक दिया। गुरू जी ने फिर प्…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी315बुजुर्ग व्यक्ति और मृत्युएक बुजुर्ग व्यक्ति काफी दूर से लकड़ियों का गट्ठर अपने सिर पर लादे चला आ रहा था। वह बुरी तरह थक चुका था। जब उससे बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने अपने बोझ को जमीन पर फेंक दिया और मृत्यु को इस दर्द से निजात दिलाने के लिए पुकारा। अगले ही पल मृत्यु उसके समक्ष आ खड़ी हुयी और पूछने लगी कि वह क्या चाहता है? बुजुर्ग व्यक्ति बोला - "मुझ पर सिर्फ इतनी कृपा करें कि यह लकड़ी का गट्ठर फिर से मेरे सिर पर रखने में सहायता कर दें।" "जीवन अत्यंत प्रिय होता है। हताशा में मृत्यु को पुकारना तो आसान है परंतु वास्तव में मृत्यु का वरण करना बहुत कठिन।" 316 शेरनी एक बार जंगल के सभी जानवरों में यह बहस छिड़ गयी कि कौन सा जानवर सबसे ज्यादा बच्चे पैदा कर सकता है। जब विवाद शांत नहीं हुआ तो वे इसके निपटारे के लिए शेरनी के पास गए। उन्होंने शेरनी से पूछा - "और तुम्हारे कितने बच्चे हैं?" शेरनी ने तत्परतापूर्वक उत्तर दिया - "सिर्फ एक। लेकिन वह जंगल का राजा है।" "प…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी313 काना सांभरएक काना सांभर समुद्र के किनारे घास चर रहा था। अपने आपको किसी संभावित हमले से बचाने के लिए वह अपनी नज़र हमेशा ज़मीन की ओर रखता था जबकि अपनी कानी आँख समुद्र की ओर रखता था क्योंकि उसे समुद्र की ओर से किसी हमले की आशंका नहीं थी। एक दिन कुछ नाविक उस ओर आए। जब उन्होंने सांभर को चरते हुए देखा तो आराम से उस पर निशाना साधकर अपना शिकार बना लिया। अंतिम आंहें भरते हुए सांभर बोला - "मैं भी कितना अभागा हूँ। मैंने अपना सारा ध्यान ज़मीन की ओर लगा रखा था जबकि समुद्र की ओर से मैं आश्वस्त था। पर अंत में शत्रु ने उसी ओर से हमला किया।" "खतरा प्रायः उसी ओर से दस्तक देता है जिस ओर से आपने अपेक्षा न की हो।" 314 मित्र बनाओ और तबाह करोसिविल वॉर के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति लिंकन दक्षिणी इलाके में रहने वाले व्यक्तियों को शत्रु कहने के बजाए गुमराह व्यक्ति कहकर संबोधित किया करते थे। एक बुजुर्ग एवं उग्र देशभक्ति महिला ने लिंकन को यह कहते हुए फटकार लगायी कि वे अपने शत्रु को तबाह करने के बजाए…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी311कामनहींतोभोजननहींहयाजूको चीनी जैन विद्या के एक प्रसिद्ध गुरू थे। वे अस्सी वर्ष की उम्र में भी अपने शिष्यों के साथ कठोर श्रम करते थे जैसे - बागवानी करना, मैदान साफ करना, पेड़ों की कटाई-छटाई करना....आदि। उनके शिष्यों को यह देखकर दु:ख होता कि उनके वृद्ध शिक्षक इतना कठिन श्रम करते हैं। वे भी यह जानते थे कि उनके गुरू उनकी यह बात कभी नहीं मानेंगे कि वे कठिन श्रम न करें। इसलिये शिष्यों ने भी एक दिन उनके औजार छुपा दिये। औजार नहीं मिलने से गुरूजी उस दिन कोई श्रम नहीं कर पाये। उस दिन गुरूजी ने कुछ नहीं खाया। अगले दिन भी उन्होंने कुछ नहीं खाया, और उसके अगले दिन भी नहीं। उनके शिष्यों ने आपस में चर्चा की कि गुरूजी यह जानकर बहुत क्रोधित होंगे कि हम लोगों ने उनके औजार छुपा दिये इसलिये अच्छा होगा कि हम उनके औजार वापस रख दें। उन्होंने ऐसा ही किया। गुरूजी ने उस दिन फिर परिश्रम किया और बाद में खाना खाया। उस शाम गुरूजी ने अपने शिष्यों को "काम नहीं तो भोजन नहीं" विषय पर व्याख्यान दिया। ******312सबसेम…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी309 लीलाएक गुरू जी अपने शिष्यों को हिंदू मान्यताओं को समझाते हुये बोले - "सारा जगत प्रभु की लीला है, यानि यह संसार एक खेल है और यह ब्रहांड खेलकूद का मैदान है। आध्यात्म का लक्ष्य जीवन को एक खेल बनाना है। " एक शुद्धतावादी पर्यटक को उनकी बातें निरर्थक लगीं। वह बोला - " तो क्या कर्म का कोई महत्त्व नहीं है ?" गुरू जी उत्तर दिया - "जरूर है। लेकिन कोई कार्य तब आध्यात्मिक हो जाता है जब इसे खेल की तरह किया जाये। " 310 नेता के कार्यजब एक धार्मिक नेता के चेलों ने एक कार्यक्रम के दौरान अपने नेता की तारीफों के पुल बांधे, तो नेता बहुत खुश हुए। बाद में उनसे इस बारे में पूछा गया तो वे बोले - "जो व्यक्ति दूसरों को अपनी शक्ति दिखाता है, वह धार्मिक नेता नहीं हो सकता।" तब उनसे पूछा गया कि "फिर धार्मिक नेता के क्या कर्का होते हैं?" नेता जी ने उत्तर दिया - लोगों को प्रेरित करना न कि कानूनी पचड़ों में डालना। उन्हें जागृत करना, न कि मजबूर करना ।" -- 62 संस…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी307 अनुपातज्ञान प्राप्त करने की तमाम आकांक्षाऐं मन में लिए एक पर्यटक आश्रम में शिक्षा प्राप्त करने पहुंचा परंतु गुरू की साधारण बातों से वह जरा भी प्रभावित नहीं हुआ। उसने आश्रम के एक अन्य शिष्य से कहा - "मैं यहाँ गुरू की तलाश में आया था। लेकिन इन गुरूजी में ऐसी कोई खास बात नज़र ही नहीं आयी।' शिष्य ने उत्तर दिया - "गुरू ऐसे मोची के समान होते हैं जिनके पास कभी न खत्म होने वाला चमड़े का भंडार है। लेकिन वे आपके पैरों के आकार के हिसाब से ही कटाई और सिलाई का कार्य करते हैं।' 308 अपनेभाग्यविधाताबनोएक दिन नसरुद्दीन अपने गाँव में टहल रहा था। तभी उसके कुछ पड़ोसी पास आकर बोले - "नसरुद्दीन। तुम बहुत बुद्धिमान और नेक इंसान हो। हम लोगों को अपना चेला बना लो। तुम हमें यह समझाओ कि हम किस तरह अपना जीवन व्यतीत करें और जीवन में सुख और शांति के लिए हमें क्या करना चाहिये?" नसरुद्दीन ने कहा - "ठीक है। मैं तुम्हें पहला शिक्षा अभी दिए देता हूँ। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि तुम अपने पैर…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी305 कोयल , पंख और कीड़ेएक जंगल में एक कोयल अपने सुर में गा रही थी। तभी एक किसान वहाँ से एक बक्सा लेकर गुजरा जिसमें कीड़े भरे हुये थे। कोयल ने गाना छोड़ दिया और उसने किसान से पूछा - "इस बक्से में क्या है और तुम कहाँ जा रहे हो?' किसान ने उत्तर दिया कि बक्से में कीड़े भरे हुये हैं जिन्हें वह पंख के बदले शहर में बेचने जा रहा है। यह सुनकर कोयल ने कहा - "मेरे पास बहुत से पंख हैं जिनमें से एक पंख तोड़कर मैं आपको दे सकती हूँ। इससे मेरा बहुत समय बच जाएगा और आपका भी।' किसान ने कोयल को कुछ कीड़े निकालकर दिए जिसके बदले में कोयल ने अपना एक पंख तोड़कर दिया। अगले दिन भी यही हुआ। फिर ऐसा रोज ही होने लगा। एक दिन ऐसा भी आया जब कोयल के सभी पंख समाप्त हो गए। सभी पंख समाप्त हो जाने के कारण कोयल उड़ने में असमर्थ हो गयी और कीड़े पकड़कर खाने लायक भी नहीं बची। वह बदसूरत दिखने लगी, उसने गाना बंद कर दिया और जल्द ही भूख से मर गयी। "भोजन प्राप्त करने का जो आसान मार्ग कोयल ने चुना, वही मार्ग अंततः सबसे कठिन …

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी303स्वयं को बदलकर ही दुनिया को बदलोसूफी संत बयाज़िद ने अपने बारे में बताते हुए कहा - ‘मैं अपनी जवानी के दिनों में क्रांतिकारी विचारों से ओतप्रोत था। मैं हर समय ईश्वर से यही मांगता कि मुझे इतनी शक्ति दो कि मैं दुनिया बदल सकूँ।’ जैसे-जैसे मैं अधेड़ावस्था में पहुँचा, मैंने यह महसूस किया कि मेरा आधा जीवन यूँ ही व्यर्थ गुजर गया है और मैं एक भी व्यक्ति को नहीं बदल पाया हूँ। तब मैंने अपनी प्रार्थना बदल दी। मैं यह प्रार्थना करने लगा कि हे प्रभु, मुझे इतनी शक्ति दो कि मैं अपने संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति को बदल सकूँ। मैं अपने संपर्क में आने वाले मित्रों और संबंधियों को बदलकर ही संतुष्ट हो जाऊँगा। अब जबकि मैं वृद्धावस्था में पहुँच गया हूँ और जीवन के कुछ दिन ही शेष हैं, प्रभु से मेरी सिर्फ एक ही विनती है कि मुझे सिर्फ इतनी शक्ति दो कि मैं अपने आप को बदल सकूँ। यदि मैंने प्रारंभ से ही यह प्रार्थना की होती तो मेरा जीवन व्यर्थ नहीं गया होता। --304मुर्गा और आभूषणएक मुर्गा अपनी मुर्गियों व स्वयं का पेट भरने …

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी301 वर्तमान में जियोएक कंजूस व्यक्ति ने जीवन भर कंजूसी करके पांच लाख दीनार एकत्रित कर लिये। इस एकत्रित धन की बदौलत वह एक साल तक बिना कोई काम किए चैन की बंशी बजाने के स्वप्न देखने लगा। इसके पहले कि वह उस धन को निवेश करने का इरादा कर पाता, यमदूत ने उसके दरवाज़े पर दस्तक दे दी। उस व्यक्ति ने यमदूत से कुछ समय देने की प्रार्थना की परंतु यमदूत टस से मस नहीं हुआ। उसने याचना की - "मुझे तीन दिन की ज़िंदगी दे दो, मैं तुम्हें अपना आधा धन दे दूँगा।" पर यमदूत ने उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। उस व्यक्ति ने फिर प्रार्थना की - "मैं आपसे एक दिन की ज़िंदगी की भीख मांगता हूं। इसके बदले तुम मेरी वर्षों की मेहनत से जोड़ा गया पूरा धन ले लो।" पर यमदूत फिर भी अडिग रहा। अपनी तमाम अनुनय-विनय के बाद उसे यमदूत से सिर्फ इतनी मोहलत मिली कि वह एक संदेश लिख सके। उस व्यक्ति ने अपने संदेश में लिखा - "जिस किसी को भी यह संदेश मिले, उससे मैं सिर्फ इतना कहूँगा कि वह जीवनभर सिर्फ संपत्ति जोड़ने की फिराक में …

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी299 उत्कृष्टता को साझा करनाएक किसान को हमेशा राज्य स्तरीय मेले में सर्वश्रेष्ठ मक्का उत्पादन के लिए पुरस्कार मिलता था। उसकी यह आदत थी कि वह अपने आसपास के किसानों को मक्के के सबसे अच्छे बीज बांट देता था। जब उससे इसका कारण पूछा गया तो उसने कहा - "यह मेरे ही हित की बात है। हवा अपने साथ पराग कणों को उड़ा कर लाती है। यदि मेरे आसपास के किसान घटिया दर्जे के बीज का प्रयोग करेंगे तो इससे मेरी फसल को भी नुक्सान पहुँचेगा। इसीलिए मैं चाहता हूँ कि वे बेहतरीन गुणवत्ता के बीजों का प्रयोग करें।" जो कुछ भी आप दूसरों को देते हैं, अंततः वही आपको वापस मिलता है। अतः यह आपके ही स्वार्थ की बात है कि आप स्वार्थरहित बनें।300 मैंने देखने से मना कर दिया!मूक और बधिर संस्था के दो छात्रों में आपस में झगड़ा हो गया। जब उस संस्था का कर्मचारी उनके बीच के विवाद के निपटारे के लिए आया तो उसने देखा कि एक मूक-बधिर दूसरे की ओर पीठ करके खड़ा है और ठहाके लगा रहा है। उसने पहले व्यक्ति से अंगुलियों के इशारों से पूछा - "आखि…

अपने अनलिमिटेड ब्रॉडबैण्ड में टाटा स्काई+ एचडी लगा डाला तो लाइफ डबल जिंगालाला

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यदि आपके पास असीमित उपयोग का इंटरनेट (वायर्ड) कनेक्शन है और साथ में टाटा स्काई+ एचडी है, तब तो सचमुच आप अपनी लाइफ को दोहरा जिंगालाला बना सकते हैं.टाटा स्काई+ एचडी में अब इंटरनेट कनेक्शन के जरिए नए-पुराने फ़िल्मों, टीवी सीरियलों के असीमित संख्या में डाउनलोड कर देखने की सुविधा उपलब्ध है. यानी अब आप अपने बुद्धू बक्से को थोड़ा स्मार्ट बना सकते हैं. वैसे भी अब स्मार्ट टीवी का जमाना है, जिसमें इंटरनेट की तमाम सुविधाएँ भी आने लगी हैं.  यदि आपके पास टाटा स्काई+ एच डी है तो आप अपने बुद्धू बक्से को थोड़ा सा ही सही, स्मार्ट बना सकते हैं. इसके लिए आपको कुछ नहीं करना होता. बस अपने इंटरनेट के वायर कनेक्टर को टाटा स्काई+ एचडी में लगा दीजिए. जैसे ही आपके सेटटॉप बक्से में इंटरनेट की सुविधा हासिल हो जाएगी, डाउनलोड के विकल्प दिखने लगेंगे. अब डाउनलोड मैनेजर से वांछित प्रोग्राम को चुनें और प्रोग्राम डाउनलोड कर उसका आनंद लें. मेरे 512 केबीपीएस कनेक्शन में कोई छः घंटे में एक पूरी फिल्म डाउनलोड हो जाती है. मैंने अभी राजकपूर की फ़िल्म आग को डाउनलोड करके देखा. अनुभव लाजवाब रहा.टाटा स्काई वीडियो ऑन डिमांड:टाटा …

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी297अंडेमुल्ला नसरुद्दीन अंडे बेचकर गुजारा करते थे। एक दिन एक व्यक्ति उनकी दुकान पर आया और बोला - "बताओ मेरे हाथ में क्या है ?' नसरुद्दीन बोला - "मुझे कोई सुराग दो।' वह व्यक्ति बोला - "एक क्या, मैं तुम्हें कई सुराग दूँगा। यह अंडे के आकार का है। यह अंडे की तरह लगता है। इसका स्वाद और गंध भी अंडे की तरह है। अंदर से यह सफेद और पीला है। वैसे तो यह तरल रूप में होता है पर पकाने या गर्म करने पर ठोस जाता है। इसके अलावा, यह मुर्गी से प्राप्त होता है...........' "हाँ में समझ गया। तुम शायद केक की बात कर रहे हो।' - मुल्ला नसरूद्दीन तपाक से बोला। "कभीकभीज्ञानीव्यक्तिकोभीप्रत्यक्षदिखनेवालीवस्तुदिखायीनहींपड़तीऔरपादरीकोमसीहादिखायी नहींदेते।'298क्याकुत्ताजानताहै?मुल्ला नसरुद्दीन एक गुर्राते हुये भयंकर दिखने वाले कुत्ते से भयभीत हो रहे थे। उस कुत्ते के मालिक ने कहा - "डरो मत। क्या तुमने यह कहावत नहीं सुनी कि जो भौंकते हैं, वे काटते नहीं।' नसरुद्दीन ने उत्तर द…

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 31

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी295 ठीक उस जगहएक गुरू जी नदी के तट पर ध्यान अवस्था में बैठे थे। उनके एक शिष्य ने उनके चरणों में श्रद्धा एवं समर्पण के प्रतीक के रूप में दो बेशकीमती मोती रखे। गुरू जी ने अपनी आँखें खोलीं, उनमें से एक मोती को उठाया और उसे इतनी असावधानी से पकड़ा कि वह उनके हाथ से छिटक कर लुढ़कता हुआ नदी में चला गया। शिष्य ने आव देखा न ताव, नदी में छलांग लगा दी। उसने कई गोते लगाये पर मोती को ढ़ूँढ़ने में असफल रहा। अंततः थककर उसने पुनः अपने गुरू का ध्यान भंग किया और बोला - "आप उस जगह को जानते हैं, जहाँ वह मोती गिरा है। कृपया मुझे वह जगह बता दें ताकि मैं आपके लिये मोती खोज़ कर ला सकूं। गुरू जी ने दूसरा मोती अपने हाथ में लिया और पानी में फेंकते हुए बोले - "ठीक उस जगह।' -- 296 चाय के कपएक छात्र ने गुरू सुजुकी रोशी से पूछा कि जापानी लोग अपने चाय के कपों को इतना पतला क्यों बनाते हैं कि वे आसानी से टूट जायें ? गुरू जी ने उत्तर दिया -"कप नाजुक नहीं हैं बल्कि तुम्हें उन्हें पकड़ने का सलीका नहीं आता। वाताव…

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 30

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी293 हम अपनी इच्छाओं के गुलाम हैंसिकंदर महान जब भारत से लौटने को हुआ तो उसे याद आया कि उसकी जनता ने उसे अपने साथ एक भारतीय योगी को लाने के लिए कहा था। उसने योगी की खोज़ प्रारंभ कर दी। उसे जंगल में पेड़ के नीचे ध्यानमग्न बैठे हुए एक योगी दिखायी दिये। सिकंदर, शाति से उनके सामने जाकर बैठ गया। जब योगी ने अपनी आँखें खोलीं, तो सिकंदर ने पाया कि उनके इर्द-गिर्द एक दैवीय प्रकाश फैल गया है। उसने योगी से कहा -"क्या आप मेरे साथ यूनान चलना पसंद करेंगे ? मैं आपको सब कुछ दूँगा। मेरे महल का एक भाग आपके लिए आरक्षित रहेगा और आपकी सेवा में हर समय सेवक तैयार रहेंगे।' योगी ने मुस्कराते हुए कहा - "मेरी कोई आवश्यकतायें नहीं हैं। मुझे किसी भी सेवक की आवश्यकता नहीं है और मेरी यूनान जाने की भी कोई इच्छा नहीं है।' योगी द्वारा दो-टूक मना करने पर सिकंदर नाराज हो गया। वह क्रोधित हो उठा। अपनी तलवार निकालते हुए उसने योगी से कहा, "क्या तुम जानते हो कि मैं तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े भी कर सकता हूँ ? मैं विश्व व…

आसपास बिखरी हुई शानदार कहानियाँ - Stories from here and there - 29

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी291 शेर और गधाएक बार एक शेर और गधा साथ-साथ शिकार पर जाने को राजी हो गए। कुछ समय बाद वे एक गुफा के पास पहुँचे जहाँ जंगली भेड़ों का झुण्ड घास चर रहा था। शेर गुफा के द्वार पर घात लगाकर बैठ गया जबकि गधा गुफा में प्रवेश कर गया। गुफा में पहुँच कर उसने दुलत्ती मारना और रेंकना प्रारंभ कर दिया जिससे भेड़े डर के मारे गुफा से बाहर को भागीं। जब शेर ने उनमें से कुछ भेड़ों को पकड़ लिया तो गधा बाहर आया और उसने शेर से यह पूछा कि वह उसके वीरतापूर्ण प्रदर्शन के बारे में क्या राय रखता है ? शेर ने कहा - "अरे मैं भी तुमसे डर गया होता। वो तो अच्‍छा है कि मुझे पता था कि तुम "गधे' हो ।' "कूटनीति द्वारा गुलामों की उपयोगिता भी बढ़ जाती है।'292 विरोधबार-बार होने वाली आलोचनाओं से व्यथित एक सामाजिक कार्यकर्ता से उसके गुरू ने कहा - "आलोचकों के शब्दों को ध्यान से सुनो। वे उस बात को बताते हैं जो तुम्हारे मित्र तुमसे छुपाते हैं।' लेकिन उन्होंने यह भी कहा - "आलोचकों द्वारा की गई बातों से …

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी289संसार की सबसे बहुमूल्य वस्तुचीनी गुरू सोज़ेन से उनके एक छात्र ने पूछा - "संसार की सबसे बहुमूल्य वस्तु कौन सी है?" गुरू ने उत्तर दिया - "मरी हुई बिल्ली की सिर।" छात्र ने अचंभित होते हुए पूछा - "मरी हुई बिल्ली का सिर आखिर कैसे सबसे बहुमूल्य हो सकता है?" गुरू सोज़ेन ने उत्तर दिया - "क्योंकि कोई उसका मूल्य नहीं बता सकता।" --- 290बात पलटनाएक दिन गुस्से से भरा मुल्ला नसरुद्दीन अपने पड़ोसी के घर पहुंचा और बोला - "तुम्हारे सांड ने मेरी गाय पर हमला कर उसे घायल कर दिया दिया है, और मैं मुआवज़ा पाने का हक़दार हूँ।" पड़ोसी को भी गुस्सा आ गया और वह बोला - "मुझसे मुआवज़ा मांगने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? जानवर की करतूत के लिए किसी आदमी को कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?" नसरुद्दीन बोले - "जी हाँ, आप बिल्कुल सही फरमा रहे हैं। लेकिन शायद मुझसे भी कहने में कुछ गल्ती हो गई है। मैं फिर से बताता हूँ। दरअसल, मेरे सांड ने आपकी गाय को घायल कर दिया है। लेक…

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आसपास की बिखरी हुई शानदार कहानियाँ संकलन – सुनील हांडाअनुवाद – परितोष मालवीयरवि-रतलामी287 जिंगऔरचुआनजिंग और चुआन ने स्नातक परीक्षा पास करने के तुरंत बाद एक थोक भंडार कंपनी में नौकरी करना शुरू कर दिया। दोनों ने बहुत मेहनत की। कुछ वर्ष बाद, उनके बॉस ने जिंग का प्रमोशन सेल्स एक्जीक्यूटिव पद पर कर दिया, जबकि चुआन को सेल्स रिप्रिजेन्टेटिव ही बने रहने दिया। चुआन को जब यह बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने अपने बॉस को इस्तीफा सौंप दिया एवं यह उनसे यह शिकायत की कि वे कठोर परिश्रम करने वालों को महत्व न देकर चापलूसों का प्रमोशन करते हैं। बॉस यह जानते थे कि चुआन ने भी इतने वर्ष परिश्रम से कार्य किया है लेकिन चुआन को उसमें और जिंग में अंतर समझाने के लिए उन्होंने चुआन को एक कार्य करने को कहा। उन्होंने चुआन से कहा कि वह बाजार जाकर ऐसे विक्रेता का पता लगाये जो तरबूज बेच रहा हो। चुआन ने बाजार से लौटकर बताया कि तरबूज बेचने वाला मिल गया है। बॉस ने पूछा - "कितने रू. किलो ?' चुआन फिर बाजार गया और लौटकर बोला - "12 रू. प्रति किलो।' तब बॉस ने चुआन से कहा - "अब मैं यही कार्य जिंग को सौंपूंग…

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