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July, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्या कभी किसी किस्म की जिज्ञासा आपको हुई है?

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यदि हाँ, तो कुछ करने का यही समय है.हम आप सभी के मन में ढेरों जिज्ञासाएँ रहती हैं. बहुत बार बहुत सी चीजों के बारे में जानने समझने की इच्छा होती है और समस्याओं के  हल जानने की आवश्यकता होती है.अंग्रेज़ी में तो इंटरनेट पर आपको आपकी हर किस्म की जिज्ञासा का हल मिलेगा.मगर हिंदी में?हिंदी में जब सामग्री का ही घोर अकाल है, प्रयोक्ताओं के सूने जंगल में कव्वे-चमगादड़ भी नहीं उड़ते तो हिंदी में आपकी किसी जिज्ञासा का हल मिलना असंभव है. कम से कम हाल फिलहाल.मगर आप इसमें अपना थोड़ा सा योगदान दे सकते हैं.पिछले एक पोस्ट में मैंने आपसे तकनीकी हिंदी गूगल समूह से जुड़ने का आह्वान किया गया था. ऐसे समूह बड़े ही लाभकारी हैं, और इनमें से कई आपकी जिज्ञासाओं की पूर्ति के लिए वाकई बढ़िया परिणाम दे रहे हैं.मगर इनके साथ एक कमी ये है कि इनमें बिखरी सार्थक सामग्री, ज्ञान की बातें बड़ी बिखरी हुई पड़ी हैं और गूगल की इंडेक्सिंग में भी इन्हें तरजीह नहीं दी जाती!ऐसे में विकल्पों की तलाश लाजिमी है.देबाशीश ने इसका एक हल तलाथा और तकनीकी हिंदी समूह पर ये ईमेल लिखा -मित्रों,
चिट्ठाकार समूह पर मुख्यतः दो किस्म के संदेश आते…

बजा फरमाया महोदय, अनाज इंडियन है तो सड़ेगा ही…

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व्यंज़लसिस्टम इंडियन है सड़ेगा हीसियासत में समग्र सड़ेगा हीमुहब्बत कब की मर चुकीमॉडर्न लव है तो सड़ेगा हीदुनिया बदल देने का यहखयाली पुलाव है सड़ेगा हीमरा हुआ ही पैदा होता है जब आदमी तो सड़ेगा हीसोचता रहता है बैठे रविकरे कुछ नहीं तो सड़ेगा ही

जिओ जियोसिटीज़ – ओओसिटीज बनकर!

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याहू का जिओसिटीज 1994 में चालू हुआ था और जब यह अंततः 27 अक्तूबर 2009 को अपनी मौत मरा तब तक इसमें तमाम भाषाओं के लाखों करोड़ों उपयोगी पन्ने जोड़े जा चुके थे. इसके इस तरह मरने से मेरे जैसे बहुतों को बेहद दुख हुआ था. हम सभी ने ऑनलाइन सामग्री प्रकाशित करने की शुरूआत जियोसिटीज़ से ही की थी, और हममें से बहुतों की बहुत  सी सार और सार्थक सामग्री जियोसिटीज में थी.हालांकि जियोसिटीज ने अपना धंधा समेटने से पहले कई बार स्पष्ट तौर पर चेतावनी दे दी थी, मगर फिर भी बहुत से मामलों में लिंक तथा सामग्रियों को उसी रूप में नेट पर रखना जियोसिटीज के सभी प्रयोक्ताओं के लिए अंत तक संभव नहीं हो पाया.बाद में जियोसिटीज के आमतौर पर सभी पेज आर्काइव.ऑर्ग पर भी उपलब्ध किए गए (मेरा भी पन्ना सुरक्षित है वहां), परंतु फिर भी वो बात नहीं बनी. इस बीच एक सेवा ओओसिटीज चली आई जो आपके याहू जियोसिटीज़ को उसी रूपरंग में मिरर के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है.तो, यदि आप बहुत से – जै हनुमान जी की तरह भाग्यशाली लोगों में से हों तो आपका जियोसिटीज का पन्ना ओओसिटीज में मिल जाए. मेरा पन्ना तो खैर नहीं मिला, मगर वो आर्काइव.ऑर्ग में…

मोटे हैं तो क्या हुआ दिमाग वाले हैं…

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एक नई खोज जो दुनिया को बदल कर रख देगीयह तो चक्के के आविष्कार की तरह है, जिसने सदियों पहले दुनिया को बदल कर रख दिया था. वैज्ञानिकों ने अब यह खोज कर दिखाया है कि महिलाएँ जितनी ज्यादा मोटी होंगी, उनका दिमाग उतना ही ज्यादा तेज, सक्षम और दक्ष होगा.इस खोज से तो, अचानक ही, जैसे दुनिया बदल गई है. आज के अख़बार में इस समाचार को पढ़कर आधी दुनिया खुशियाँ मना रही है, जिसमें मेरी बीवी भी शामिल है. अचानक ही उसका टेंशन जैसे कि टें बोल गया है. हर सुबह उठने पर वो वेइंग स्केल में अपने कम न होते वज़न को देख कर दिन भर व्यथित होती रहती थी, आज इस समाचार को पढ़कर वो सुबह से ही खुश है! आज वो अपने भारी भरकम, तेज दिमाग वाली होने के अहसास से बेहद प्रसन्न है.इस क्रांतिकारी खोज की वजह से चहुँओर उथल पुथल मचनी ही है. अखबारों में वैवाहिक विज्ञापनों में गोरी स्लिम कन्या चाहिए के बजाए गोरी वज़नी कन्या चाहिए दिखाई देने लगेंगे. क्योंकि जितनी ज्यादा वज़नी कन्या उतना वज़नी दिमाग. अब विवाह योग्य कन्या को दिखने में न सिर्फ खाते-पीते घर का होना चाहिए, बल्कि खुद उसे ओवर-डाइट वाली होना चाहिए ताकि दिनों दिन उत्तरोत्तर उसका वज़न …

लाइफ़ इज़ इनक्लूडेड इन द टर्म्स ऑफ़ द ब्राइब…

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आप चौंकेंगे कि इस पोस्ट का ये अजीब सा शीर्षक क्या बला है? मैं भी चौंक गया था इस शीर्षक को पढ़कर.सदा की तरह कुछ खोजबीन कर रहा था तो यह लिंक मिला.म्लूवी – स्पीक टू योर वर्ल्ड!और, वहीं पर मिला मेरे ब्लॉगरविरतलामी का हिंदी ब्लॉग - छींटें और बौछारें का अंग्रेज़ी संस्करण!यह रहा म्लूवी पर मेरे ब्लॉग का अंग्रेज़ी संस्करण :यह रहा मूल हिंदी संस्करण :म्लूवी क्या है? म्लूवी – एक ऐसी सेवा है जो आपके ब्लॉग के आरएसएस फ़ीड को गूगल अनुवाद की सहायता से विश्व की 43 भाषाओं में अनुवाद कर नए पोस्ट जनरेट करती है और उसे प्रकाशित कर देती है. सब कुछ स्वचालित तरीके से.तो मैंने आज एक पोस्ट लिखी थी – जीवन के शर्त में शामिल है रिश्वत.इसे म्लूवी ने अंग्रेज़ी में अनुवादित कर प्रकाशित किया – और उसका शीर्षक दिया – लाइफ़ इज इनक्लूडेड इन द टर्म्स ऑफ़ द ब्राइब…स्वचालित, मशीनी अनुवाद और स्वचालित पोस्टिंग के लिहाज से क्या बुरा है? और खासकर तब, जब आपकी पोस्टें स्वयंमेव विश्व की 43 भाषाओं में अनुवादित होकर पोस्ट हो रही हैं?यानी आपने इधर चार लाइन हिंदी में लिख मारा नहीं, और उधर आपकी सर्जना 43 भाषाओं में अनुवादित होकर प्रका…

जीवन के शर्त में शामिल है रिश्वत…

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आदम और हव्वाव्यंज़ल/*/*/
जीने के शर्त में शामिल है रिश्वत 
मुरदे दे रहे  कफ़न के लिए रिश्वत
क़िस्सों में भी नहीं प्यार की बातें 
आदम-हव्वा के बीच घुसी रिश्वत
ऐसे दौर की कामना नहीं थी हमें 
खुद को देना पड़ता है यहाँ रिश्वत
बदल चुके हैं इबादतों के अर्थ भी 
कोई फ़र्क़ बताए रस्म है या रिश्वत
हवालात की हवा खानी ही थी रवि
तूने ली/दी नहीं थी जो कोई रिश्वत---(व्यंजल – फरवरी 2005 की पोस्ट से संशोधित रीठेल. रिश्वत विषय से संबंधित अन्य पोस्टें यहाँ पढ़ें)

दर्जन भर से अधिक भारतीय भाषाओं में लीजिए आनंद विंडोज़ ७ का

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साथ ही विंडोज विस्ता और ऑफ़िस २००७/२००३ का भी. प्रतीत होता है कि माइक्रोसॉफ़्ट भी गूगल की तरह भारतीय भाषाई कम्प्यूटिंग में गंभीरता से घुस रही है. नतीजा है दर्जन भर भारतीय भाषाओं में जिनमें असमी, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कोंकणी, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल और तेलुगु शामिल हैं, विंडोज प्रोग्रामों की उपलब्धता.इसके लिए आपको अपनी मूल संस्थापना में लिप (लैंग्वेज इंटरफेस) संस्थापित करना होगा. लैंग्वेज इंटरफ़ेस डाउनलोड करने के लिए भाषा इंडिया की साइट पर जाएँ. कड़ियाँ भाषानुसार निम्न हैं -Windows 7 LIP AssameseBengali (India)GujaratiHindiKannadaKonkaniMalayalamMarathiOriyaPunjabiTamilTelugu
Windows Vista LIP AssameseBengali (India)GujaratiHindiKannadaKonkaniMalayalamMarathiOriyaPunjabiTamilTelugu
Office 2007 LIP AssameseBengali(India)GujaratiKannadaKonkaniMalayalamMarathiOriyaPunjabiTamilTeluguOffice 2003 LIP Office 2003 LIP (Konkani)Office 2003 LIP (Gujarati)Office 2003 LIP (Punjabi)Office 2003 LIP (Kannada)Office 2003 LIP (Tamil)Office 2003 LIP (Marathi)Office 2003 LIP (Telugu)

एंटरटेनमेंट का बाप - माईवे आईपीटीवी : 50 लोकप्रिय रेकॉर्डेड चैनल अब देखें 7 दिनों के भीतर कभी भी वो भी विज्ञापनों के बिना!

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माईवे आईपीटीवी की एक विस्तृत समीक्षा कुछ समय पूर्व मैंने लिखी थी, तब से आईपीटीवी के जरिए बहुत से चैनल देखे जा चुके हैं, और अब मामला बहुत कुछ मजेदार और रंग जमता जमाता प्रतीत होता है. क्वालिटी और सेवा में सुधार हुआ है. मनोरंजन सामग्री भी जुटाई गई है.चंद शुरूआती मुश्किलों को झेलने के बाद मेरा माईवे आईपीटीवी बढ़िया चलने लगा और अभी अभी इसमें बहु-प्रतीक्षित नई सुविधा जोड़ी गई है. ऑटो रेकॉर्डिंग की. 50 लोकप्रिय चैनलों (जिनमें सोनी, स्टार प्लस, स्टार वन, कलर, जूम, आजतक इत्यादि शामिल हैं) के रेकॉर्डेड सीरियल और प्रोग्राम अब आप पिछले 7 दिनों के भीतर कभी भी देख सकते हैं. और न सिर्फ आप इन्हें देख सकते हैं, इन प्रोग्रामों को फारवर्ड, रिवर्स और पॉज कर सकते हैं. साथ ही यदि आप चाहें तो यूएसबी एक्सटर्नल हार्डडिस्क लगाकर अपने अन्य पसंदीदा चैनल को भी स्वयं रेकॉर्ड कर सकते हैं. एक तरह से दर्शकों को एंटरटेनमेंट का जैकपॉट दिया गया है.इसका अर्थ है कि टीवी पर अब आपको बारंबार लगातार एक ही सीरियल में और एक ही ब्रेक में एक ही विज्ञापन को सिर धुनते हुए देखने की आवश्यकता नहीं है. आप लाइव प्रोग्राम के बजाए घंटाभर …

नक़ली नोट – तेरी महिमा अपरम्पार!

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महीने की पहली तारीख़ को जैसे ही मैंने अपनी पत्नी के हाथ में अपनी तनख्वाह के हजार हजार के नए-नए करारे नोट रखे, उसने उन नोटों को आगे-पीछे से और रौशनी में ले जाकर इस तरह से जाँचा परखा कि गोया मैं कोई नक़ली नोट छापने वाला क्रिमिनल होऊँ, और उसके हाथ में नक़ली नोटों का बंडल थमा रहा होऊँ.मेरे चेहरे पर उभर आए अप्रसन्नता के भावों को वह ताड़ गई. पत्नियाँ वैसे भी ताड़ने में माहिर होती हैं जैसे कि पड़ोसिन ने आज नई साड़ी पहनी है तो क्यों और नहीं पहनी है तो क्यों. य़ा फिर पतिदेव आज नीला सूट पहन कर ऑफ़िस जा रहे हैं तो क्यों, और लाल सूट पहन कर नहीं जा रहे हैं तो क्यों. बहरहाल, चूंकि उसके हाथों में मेरी महीने भर की कमाई थी, तो उसने मिश्री-घुली आवाज में स्पष्टीकरण दिया – तुम्हारा क्या, जो सामने वाले ने पकड़ाया ले के चले आते हो – बाजार से सड़ी धनिया पत्ती की तरह. क्या पता इनमें से कोई नक़ली नोट हो? अख़बार में आए दिन नक़ली नोटों की खबरें छपती रहती हैं. उसके कहे गहरे अर्थ वाले भावों को मैं समझ गया था – शायद वो कम से कम एक मामले में तो सही कह रही थी - काश विवाह के समय मैं कुछ देख-दाख लिया होता!मैंने पूछना च…

ज्ञान दें, ज्ञान लें : तकनीकी हिंदी समूह के सदस्य बनें

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इस समूह के सदस्यों की संख्या अब सौ हो गई है! -- समूह के सभी साथियों को बधाई!

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सबको बधाई !
आइये इस समूह को और जीवंत बनायें। खूब प्रश्न करें। जितना जानते हैं उतना उत्तर अवश्य दें। पूछे, बताएँ। सोछें कि हम हिन्दी के लिये कौन सा काम कर सकते हैं। हिन्दी के उपकरण (प्रोग्राम/सॉफ्टवेयर) खोजें। अच्छे उपकरण सुझाएँ। यदि आपको किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता है तो अपनी आवश्यकता से इस समूह को अवश्य अवगत कराएं।

आइये हम सब मिलकर प्रयत्न करें कि हिन्दी में औजारों की कमी न हो , सामग्री (कन्टेन्ट) की कमी न रह जाय।

ये दो संदेश पिछले महीने गूगल तकनीकी हिंदी समूह में तब भेजे गए जब इस समूह के सदस्यों की संख्या 100 को छू गई. पर क्या यह एक बड़ी उपलब्धि है?

खासकर तब जब तमाम फोरमों में सक्रिय हिंदी चिट्ठाकारों की संख्या पचास हजार से ऊपर पहुँच रही है? और अभी भी हिंदी के कम्पयूटिंग में प्रयोग संबंधी तकनीकी दिक्कतों का सामना प्रयोक्ताओं को करना पड़ रहा है.


अभी भी बहुत से हिंदी के इंटरनेट प्रयोक्ताओं को हिंदी के इन समूहों की उपलब्धता तथा इनके द्वारा दिए जाने वाले सहयोग की जानकारी नहीं है. इसी वजह से न तो वे इसके …

ब्लॉगर स्टेट्स - भारी भरकम स्टेटकाउंटर को कहें गुडबॉय!

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ब्लॉगर का प्रयोग करने वाली जनता की लं$$$$$$$$बी डिमांड थी ये. भारी भरकम स्टेट काउंटर के कोड से अब राहत मिलेगी. और, जो लोग रीयल टाइम स्टेट के लिए फ्लैश आधारित घूमती हुई पृथ्वी अपने ब्लॉगों के साइडबार में लगा रखते हैं, उनसे निवेदन है - मित्रों, उससे तत्काल छुटकारा पा लो. क्योंकि, आपके आंकड़े दिखाते हुए एनीमेशन हमारे पेज लोड को बेहद धीमा करते हैं!

अब, सब कुछ आपके अपने ब्लॉगर के भीतर ही उपलब्ध है. डैशबोर्ड में जाएँ, अपने ब्लॉग के स्टेट्स पर क्लिक करें और देखें सारी जानकारी. सेवा चूंकि अभी ही चालू हुई है, अत: मासिक, साप्ताहिक या वार्षिक आंकड़ों के लिए आपको इंतजार करना होगा, मगर आंकड़े हैं चुस्त दुरूस्त.

रचनाकार के आंकड़े देखें - पिछले दिन एक हजार सात सौ (1700) से ऊपर पेज लोड्स. कंटेंट इज किंग!! गो क्रिएट कंटेंट मैन! एंड एंजॉय योर स्टैट्स!!
(चित्र को बड़े आकार में देखने के लिए उस पर क्लिक करें)

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