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May, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बच्चों के लिए खास – लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम – क्विमो लिनक्स4किड्स तथा ऑफ़िस सूट – ओपनऑफ़िसऑर्ग4किड्स

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ओपनसोर्स की अपनी महिमा है. सॉफ़्टवेयर अनुप्रयोगों को आप अपने हिसाब से बदल सकते हैं, परिष्कृत कर सकते हैं, परिमार्जित कर सकते हैं.इसी फलसफे के आधार पर तैयार किया गया है बच्चों के लिए खास – लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम – क्विमो लिनक्स4किड्स तथा ऑफ़िस सूट – ओपनऑफ़िस4किड्स. वैसे तो वन लैपटॉप पर चाइल्ड योजना में सुगर नाम का लिनक्स आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम खास पढ़ने वाले बच्चों के लिए बनाया गया है, मगर नर्सरी के बच्चों के लिए यह भी थोड़ा उन्नत है, और काम का नहीं ही है. ऐसे में क्विमो लिनक्स4किड्स एक बेहतर विकल्प है.आइए, पहले देखते हैं बच्चों के लिए खास – क्विमो लिनक्स4किड्स ऑपरेटिंग सिस्टम में बच्चों के लिए आखिर क्या है-क्विमो लिनक्स4किड्स ऑपरेटिंग सिस्टम डेस्कटॉप वातावरण एक्सएफ़सीई को खास बच्चों के लिए परिमार्जित कर क्विमो सत्र बनाया गया है जो कि उबुन्टु लिनक्स संस्करण पर आधारित है. इसका  लाइव/इंस्टालेसन सीडी भी है तथा इसका क्विमो सत्र उबुन्टु के नए ताजा संस्करण में संस्थापित भी किया जा सकता है.क्विमो लिनक्स4किड्स में बच्चों के लिए तमाम मुफ़्त उपलब्ध शैक्षणिक व कंप्यूटर गेम्स हैं. इसे नर्सरी से ले…

मेरे मोबाइल नंबर ने जीता रु. 2 करोड़ का ईनाम!

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इसी का तो इंतजार था. अब तक तो ईमेल भेज भेज कर पका डाला था इन लोगों ने. यहाँ तक कि इन लोगों ने हिन्दी में भी ईनाम खुलने के संदेश मुझे भेजे थे. पर जब इन फर्जी ईमेलों पर ध्यान नहीं दिया तो जाने कैसे इन्हें मेरा मोबाइल नंबर मिल गया. और भेज दिया माइक्रोसॉफ़्ट इंटेल मोबाइल ड्रा में चार लाख पचास हजार पाउंड ईनाम जीतने का एसएमएस.ऐसे फर्जी एसएमएस संदेशों से सावधान रहें. हालांकि इस आभासी दुनिया में सुरक्षा एक रिलेटिव शब्द है जहाँ सुरक्षा और भेदिए तू डाल डाल मैं पात पात की तर्ज पर चलते हैं, फिर भी कुछ टिप्स आपको सुरक्षित बने रहने में सहयोग करेंगे -अपने प्रोफ़ाइल या हस्ताक्षर में मोबाइल नंबर कभी भी नहीं लिखें. विभिन्न फोरमों में अपने नाम के साथ साथ मोबाइल नंबर कतई नहीं लिखें. किसी साइट पर मोबाइल नंबर मांगा जाता है तो पुष्टि करें कि क्या यह अति आवश्यक है? यदि आवश्यक नहीं हो, वैकल्पिक हो तो मोबाइल नंबर कतई न भरें.  यदि सिर्फ फोन नंबर से काम चलता हो तो सदैव ही लैंडलाइन नंबर भरें. चित्र में दर्शित इसी प्रकार के ईनाम व लॉटरी, टैक्स रीफंड, पासवर्ड रीसेट इत्यादि के एसएमएस संदेशों को पूरी तरह से अनदेखा कर…

सिल कन्वर्टर + गूगल तकनीकी हिन्दी समूह फ़ॉन्ट कन्वर्टर = पाठ फ़ॉर्मेटिंग सुविधा सहित दर्जनों फ़ॉन्ट कन्वर्टर

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(यह पोस्ट – बॉब ईटन, अनुनाद तथा नारायण प्रसाद को समर्पित है.)
कम्प्यूटरों में हिन्दी भाषा में काम करने वालों के लिए फ़ॉन्ट कन्वर्टर बेहद आवश्यक हैं. तमाम कई कारण हैं. पिछले दस से अधिक वर्षों से मैं दर्जनों फ़ॉन्ट कन्वर्टर प्रयोग कर रहा हूँ, जिनमें कई मुफ़्त हैं, और कई तो अच्छे खासे पैसे देकर खरीदे गए हैं. मगर हर एक में कुछ न कुछ समस्या है.
फ़ॉन्ट कन्वर्टर में सबसे पहला गुण क्या होना चाहिए? – उसमें 100 प्रतिशत शुद्धता से फ़ॉन्ट को कन्वर्ट करने की क्षमता होनी चाहिए. इस काम को अभी कुछ सॉफ़्टवेयर बढ़िया अंजाम दे रहे हैं जिनमें डांगी सॉफ़्ट का प्रखर फ़ॉन्ट कन्वर्टर प्रमुख है – जिसमें कोई दो सौ से अधिक फ़ॉन्टों से परिवर्तन की सुविधा है. यह लाइसेंसी सॉफ़्टवेयर है. इसकी सबसे बड़ी खामी ये है कि यह बेहद धीमा है और अगर आप चाहें कि पूरी किताब को कन्वर्ट करें तो यह इसमें असंभव सा काम है. साथ ही यह एक तरफा ही परिवर्तन करता है – पुराने फ़ॉन्टों से यूनिकोड में.
शत प्रतिशत शुद्धता से फ़ॉन्ट कन्वर्ट करने वाला एक और प्रोग्राम है – सिल कन्वर्टर. सिल कन्वर्टर में और भी ख़ूबियाँ हैं कि आप वर्ड, एक्सेल डाक…

ब्लॉग / साइट खुलने में समस्या? वेब-प्रॉक्सी / ओपनडीएनएस प्रयोग करें – चरण दर चरण विवरण

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बहुत से स्थानों पर ब्लॉगर ब्लॉग नहीं खुलने की शिकायतें आई हैं. पहले भी होती रही हैं. आमतौर पर ऐसा इंटरनेट सेवा प्रदाता के सर्वरों में समस्या होने के कारण होता है. बी.एस.पाबला जी ने समस्या का एक समाधान यहाँ सुझाया है, मगर यदि आपके पास दूसरे इंटरनेट सेवा प्रदाता का विकल्प नहीं है तो यह समाधान काम का नहीं है. ऐसे में आपके सामने कुछ और विकल्प हैं – जैसे कि वेब प्रॉक्सी सर्वरों का प्रयोग – जैसे कि हाइडमाइआस.कॉम या फिर ओपनडीएनएस का प्रयोग.वेब प्रॉक्सी सर्वर का प्रयोग आसान है. वेब प्रॉक्सी साइट जैसे कि हाइडमाइआस.कॉम  पर जाकर वहाँ पर जो साइट/ब्लॉग नहीं खुल रहे हैं उनका यूआरएल भरने से वे आमतौर (यदि सर्वर इत्यादि की समस्या हो या आपके प्रतिष्ठान में प्रतिबंधित हों) पर खुल जाते हैं. परंतु हर बार आपको पता प्रॉक्सी सर्वर पर भरना झंझट का काम है और कई दफा स्वयं प्रॉक्सी सर्वरों में ही समस्या होती है.दूसरा निरापद तरीका है – ओपन डीएनएस का प्रयोग. ओपन डीएनएस के दूसरे दीगर फ़ायदे भी हैं जिनमें शामिल है – फ़िशिंग व नक़ली, वायरस साइटों से स्वचालित बचाव तथा एडल्ट साइट फ़िल्टरिंग इत्यादि.ओपन डीएनएस विंडोज़ ए…

77 रीयूनियन – 33 वर्षों के पश्चात् हाईस्कूल सहपाठी पुनर्मिलन आयोजन की यादें

हाईस्कूल की यादें हम सब के मन में बनी हुई रहती हैं. ऐसे में यदि कभी अरसे बाद रीयूनियन जैसा आयोजन हो तो पुरानी यादें एकदम से ताज़ा हो जाती हैं. सर्वेश्वर दास न.पा. स्कूल के 1977 मैथ्स बैच का रीयूनियन कार्यक्रम 9 मई 2010 को 33 वर्षों के पश्चात् रखा गया था. इस वन्स-इन-अ-लाइफ़-टाइम आयोजन में दुर्भाग्यवश मैं शामिल नहीं हो पाया, मगर यह आयोजन धुंआधार तरीके से सफल रहा. इस आयोजन को सफल बनाने में मित्र अजय पाण्डे, योगेश बागड़ी और तमाम दूसरे मित्र जी जान से जुटे रहे. इस अवसर पर यादों को संजोने के लिहाज से एक स्मारिका भी निकाली गई. स्मारिका की पीडीएफ़ ई-बुक आप आर्काइव.ऑर्ग से डाउनलोड कर पढ़ सकते हैं.इस स्मारिका को आप यहीं पर नीचे आनलाइन स्क्रिब्ड ई-पेपर पर भी पढ़ सकते हैं. ------ 1977 Batch Reunion 2010 Sarveshwar Das Nagar Palika School Rajnandgaon-Final

छींटें और बौछारें के पाठकों को जेनुइन (असली, लाइसेंस्ड) माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस 2010 मुफ़्त में प्राप्त करने का सुनहरी मौका

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माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस 2010 नई विशेषताओं के साथ बाजार में आ चुका है. क्लाउड कम्प्यूटिंग की सुविधा युक्त ऑफ़िस 2010 के नए संस्करण में बहुत सी नई ख़ूबियों को शामिल किया गया है.ऑफ़िस 2010 तकनीकी पूर्वावलोकन संस्करण की एक संक्षिप्त समीक्षा आप यहाँ पढ़ सकते हैं.भारत में भी ऑफ़िस 2010 जारी किया जा रहा है. इस मौक़े पर माइक्रोसॉफ़्ट की तरफ से ऑफ़िस 2010 के बारे में और अधिक जानने-समझने तथा सीखने के लिए 25 और 26 मई 2010 को माइक्रोसॉफ़्ट कम्यूनिटी वर्चुअल लांच इवेंट आयोजित कर रही है. आप चाहें तो अपने पास के शहर के आयोजन स्थल पर या इंटरनेट के वेबकास्ट पर इस आयोजन का लाभ निशुल्क ले सकते हैं. इसके लिए आपको मेराऑफ़िस.कॉमhttp://www.meraoffice.com पर पंजीकृत होना होगा.इसी प्रकार, जून 2010 के महीने में भारत के कई शहरों में ऑफ़िस 2010 लांच इवेंट आयोजित किया जाएगा. इस अवसर पर प्रतिभागी, ऑफ़िस 2010 के बारे में न सिर्फ बहुत सी नई खूबियों के बारे में जान सकेंगे, बल्कि उन पर काम करने का अनुभव भी प्राप्त कर सकेंगे. अधिक विवरण यहाँ http://office.merawindows.com दर्ज है.अब आते हैं असली बात पर.इस ब्लॉग के 2 चयनित प…

द ओपन मूवी प्रोजेक्ट

एक ओर जहाँ काईट्स और रा-वन के प्रदर्शन के इंतजार में बाजार के पंडित फ़िल्म में लगे करोड़ों रुपए और उसके एवज में होने वाली कमाई और फ़िल्मों सफलता-असफलता की भविष्यवाणियाँ करने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर, क्या आपको पता है कि कुछ उच्चस्तरीय, तकनीकी दक्ष फ़िल्में बनती तो अच्छी खासी लागत, मेहनत और प्रतिबद्धता से हैं, मगर उन्हें मुफ़्त/फोकट में देखे व वितरित किए जाने के लिए रिलीज किया जाता है?जी हाँ, ऐसा ही एक प्रोजेक्ट है द ओपन मूवी प्रोजेक्ट. मुफ़्त  एनीमेशन सॉफ़्टवेयर ब्लेंडर की सहायता से इन फ़िल्मों को बनाया गया है.इस प्रोजेक्ट के जरिए अब तक दो उच्चस्तरीय एनीमेटेड फ़िल्में रिलीज की जा चुकी हैं -1) एलीफेंट्स ड्रीम2) बिग बक बन्नीऔर ब्लेंडर गेम इंजिन के सहारे बनाया गया वीडियो -3) यो फ्रेंकी!भी देखने लायक है.बिग बक बन्नी के बारे में चवन्नी चैप में एक छोटी सी समीक्षा छपी थी -“…तीन घंटों की हिन्दी फ़िल्में क्या आपको बोर नहीं करतीं? आम अंग्रेज़ी फ़िल्में भी डेढ़-दो घंटे से कम नहीं होतीं.
आमतौर पर किसी भी फ़िल्म में एक छोटी सी कथा होती है - बुराई पर अच्छाई की जीत. इसे कहने के लिए, इसी बात…

देश तो साला जैसे सुबह का अख़बार हो गया

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व्यंज़ल
देश तो साला जैसे सुबह का अख़बार हो गया
वो तो एक नॉवेल था कैसे अख़बार हो गया तमाम जनता ने लगा लिए हैं मुँह पे भोंपू
मेरा शहर यारों कुछ ऐसे अख़बार हो गया दुश्वारियाँ मुझपे कुछ ऐसी गुजरीं कि मैं
एक कॉलम सेंटीमीटर का अख़बार हो गया लोगों ने कर डाली हैं विवेचनाएँ इतनी कि
धर्म तो बीते कल का रद्दी अख़बार हो गया बहुत गुमाँ था अपने आप पे यारों रवि को
जाने क्या हुआ कि वो बस अख़बार हो गया----(समाचार कतरना – साभार – अदालत ब्लॉग)

अपने आपको ऑनलाइन कैसे छुपाएँ और नक़ली आईपी पता कैसे प्रयोग करें

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अनामों और बेनामों को अकसर इस बात की धमकी दी जाती है कि उनका आईपी पता नोट कर लिया गया है और उन्हें पहचान लिया गया है. यह बात सत्य है कि सही आईपी पते से फोरेंसिक जाँच पड़ताल के जरिए किसी व्यक्ति के सटीक भौगोलिक स्थान और यहाँ तक कि उसके विशिष्ट कंप्यूटर की पहचान की जा सकती है. मगर, चतुरों के लिए अपने आईपी पते को छुपाने के बहुत से तरीके हैं – अनुप्रयोग प्रॉक्सी से लेकर वेब आधारित प्रॉक्सी का प्रयोग तथा टॉर प्रोजेक्ट और हॉट स्पॉट शील्ड जैसे अनुप्रयोगों का बारीकी से प्रयोग.कुछ वेब आधारित प्रॉक्सी सर्वर – जैसे कि एनोनिमस.ऑर्ग या हाइडमाइआस.कॉम यह दावा तो करते हैं कि वे आपके आईपी पते को छुपा देते हैं, मगर वास्तव में स्थिति भिन्न होती है. एक प्रयोग मैंने बी.एस.पाबला के ब्लॉग जिंदगी के मेले पर किया. उनके ब्लॉग में बाजू पट्टी में पाठक का आईपी पता दर्ज करने का विजेट लगा हुआ है. सामान्य ब्राउज़िंग में मेरा आईपी पता वहाँ पर कुछ यूँ दर्ज हुआ-आई पी पता – भारत का. हूइज़ क्वैरी से आप इस पते से स्थान का पता आसानी से लगा सकते हैं. चलिए, अप प्रॉक्सी का प्रयोग किया जाए. वेब प्रॉक्सी आजमाते हैं -जब मैंने वेब…

…और, अब लीजिए, पेश है बहुप्रतीक्षित गूगल – उर्दू – हिन्दी अनुवाद!

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गूगल अनुवाद में उर्दू जुड़ गया है. और उर्दू – हिन्दी तो क्या कमाल का जुड़ा है. हालांकि अभी उर्दू बीटा है, मगर अभी से इसकी उपयोगिता झलक रही है. नीचे स्क्रीनशॉट पर नजर मारें -यह उर्दू में लिखे गए पेज का गूगल उर्दू-हिन्दी स्वचालित अनुवाद से लिया गया है! है न कमाल? कुछ समय से उर्दू से हिन्दी स्वचालित लिप्यंतरण और अनुवाद की कोशिशें जारी थीं, मगर उर्दू को संदर्भ के अनुसार लिखने व पढ़ने की दिक्कतों के कारण भले ही उर्दू बोलने में हिन्दी जैसा ही हो, लिप्यंतरण में भारी समस्याएँ थीं. अब गूगल ने अपने भारी भरकम डाटाबेस के जरिए इस समस्या को हल कर लिया है ऐसा लगता है. और, ये रही बीबीसी उर्दू के पाकिस्तान पृष्ठ का हिन्दी अनुवाद -मूल उर्दू पेज -गूगल अनुवादित हिन्दी पेज-है न मजेदार? तो, चलिए, क्यों न अब उर्दू की दुनिया में टहल आएं…? और, अरे, ये तो उर्दू ट्विटर हिन्दी में क्या मस्त दिख रहा है-और, ये रही उर्दू ब्लॉगिस्तान में चमक करे उर्दू ब्लॉगरों की सूची – हिन्दी में!---

किसने किसको कितना निचोड़ा?

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इस दफा आईपीएल ने वाकई बहुतों को निचोड़ा. धोनी तो खुले आम स्वीकारते हैं कि आईपीएल में खेल खेल कर भारतीय खिलाड़ी पूरे निचुड़ गए हैं इसीलिए विश्वकप में उनकी हार हो गई. आइए, देखें कि आईपीएल ने और किनको कितना निचोड़ा –· सबसे पहले तो दर्शक निचुड़ा. बुद्धू बक्से के सामने फिक्स किए मैचों को वो पूरे दो महीनों तक बेवकूफ़ों की तरह घंटों निहारता रहा, तमाम कयास लगाता रहा, हर बॉल पर अपना दिल फ़ालतू में धड़काता रहा, सट्टे के दांव लगाता रहा और हारता रहा...· मीडिया निचुड़ा – हर तरफ आईपीएल. चाहो तो और न चाहो तो. चर्चा करो, समाचार दो तो लोगों ने कहा – आईपीएल के अलावा और कुछ नहीं सूझता क्या? और समाचार न दो तो निचोड़ने लगे – इतने बड़े महत्वपूर्ण आयोजन को कवर नहीं करते – बेवकूफ हो क्या?· पूर्व आईपीएल आयुक्त मोदी निचुड़ा – इस पर भी कोई प्रकाश डालने की जरूरत है क्या?· थरूर और सुनंदा निचुड़े – इस पर भी प्रकाश डालना फजीहत नहीं होगी?· आईपीएल ने भारत के न सिर्फ तमाम दीगर खेलों – राष्ट्रीय खेल हॉकी समेत – को निचोड़ डाला, बल्कि वन डे और टेस्ट मैचों को भी निचोड़ डाला!.... और, इससे पहले कि आगे की सूची पढ़ते पढ़ते आप…

गूगल ट्रांसलेट में हिन्दी टैक्स्ट टू स्पीच – अब हिंदी में सुनकर आनंद लें किसी भी भाषा की डिजिटल सामग्री का

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गूगल ट्रांसलेट ने बिना किसी हो-हल्ला के 14 अप्रैल 2010 को बताया कि गूगल ट्रांसलेट में अब हिन्दी टैक्स्ट टू स्पीच भी उपलब्ध है -इसका क्या अर्थ है?इसका अर्थ है कि अब आप विश्व की 50 से अधिक (समर्थित) भाषाओं की सामग्री का ऑनलाइन आनंद गूगल ट्रांसलेट के जरिए सुनकर ले सकते हैं. हालांकि अभी अनुवाद कई मामलों में अपूर्ण, बेकार या उल्टा-सीधा होता है, मगर यदि छोटे-छोटे सरल से वाक्य लिए जाएँ, तो प्रायः अनुवाद से कथ्य को बखूबी समझा जा सकता है. और यही एक बड़ी उपलब्धि है. एक उदाहरण आपके सामने है -अभी यह सुविधा (हिंदी टैक्स्ट टू स्पीच) बक्से में टाइप करने पर (त्वरित अनुवाद सुविधा सक्षम करने पर) तथा छोटे-छोटे वाक्यों को कॉपी-पेस्ट करने पर मिल रही है. यदि आप पाठ बक्से में कॉपी-पेस्ट से लंबा चौड़ा पाठ भरेंगे तो यह सुविधा स्वचालित अक्षम हो जाती है. मशीनी आवाज बहुत कुछ मानवीय है और कर्णप्रिय है. भविष्य में मशीनी अनुवादों के और भी त्रुटि रहित होने पर यह कमाल की सुविधा (यदि स्पीच टू टैक्स्ट और जोड़ दिया जाए तो और भी कमाल!) तमाम उपकरणों पर मौजूद रहेगी – तो आप तकनॉलाज़ी की संभावनाएँ देख सकते हैं – आपका चीनी भा…

कितने दूर, कितने पास?

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वैसे भी, कहावत है ही – जर, जमीन और जोरू. जोरू याने नारी. सारे झगड़े की जड़ ये ही हैं. ये अगर दूर रहें, आदमी की जिंदगी से बहुत दूर रहें तो किसी तरह की समस्या ही न हो. महिलाएँ पुरूषों से दूर रहें तो फिर निरूपमा जैसे कांडों को सिरे से नकारा नहीं जा सकता?क्यों न अब आदमीयत की सारी शक्ति इस बात पर लगा देनी चाहिए कि महिलाओं को पुरुषों से कैसे दूर कर दिया जाए. अब भले ही महिलाएँ माँ, बहन, बेटियाँ हों, बहुएँ, सास हों, मामी – चाची हों. इन्हें पुरुषों से दूर करना ही होगा. दफ़्तर हो या घर. मस्जिद हो या मंदिर क्या फर्क पड़ता है? वैसे भी, किसी धर्म स्थल और पब में आखिर क्या कोई अंतर होता है? वहाँ भी दर और दीवार होते हैं यहाँ भी. पब तो फिर भी ज्यादा सुसज्जित और लाइवली होता है – और शायद इसी वजह से कुछ समय पूर्व महिलाओं को पब से दूर रहने की सलाहें दी गईं थीं…व्यंज़लकोई पास है कोई दूर हैवो पास रहकर भी दूर है
निरूपमा जैसी बेटियों कीदिल्ली अभी बहुत दूर है
आसमान तो मुट्ठी में हैमगर धरती क्यों दूर है
दूरी कदम भर की है परमंजिल क्यों बहुत दूर है
सबके के दिलों में है रविखुद से दूर, बहुत दूर है
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द रफ गाइड टू ब्लॉगिंग

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चाहे आप नए नवेले हों या पुराने जमे हुए ब्लॉगर – यह किताब आपके लिए आवश्यक है – यह किताब – ‘द रफ गाइड टू ब्लॉगिंग’ का टैग लाइन है. और लगता है कि यह बात आंशिक रूप से सही भी है, क्योंकि छः सालों से ब्लॉगिंग में जमे होने और प्रोब्लॉगर और ब्लॉगर बस्टर जैसे ब्लॉगिंग टि्प्स प्रदान करने वाले ब्लॉगों के नियमित सब्सक्राइबर होने के बावजूद मैं मानता हूँ कि किताब से दो चार नई जानकारियाँ  मुझे भी मिलीं. कई मामलों में यह सदैव के लिए संदर्भ ग्रंथ के रूप में भी उपयोगी है.रफ गाइड सीरीज की यह पुस्तक जोनाथन यंग ने लिखी है. पुस्तक में बिना गूढ़ हुए, आसान सादे वाक्यों में रंगीन चित्रों समेत ब्लॉगिंग के फंडे बताए गए हैं. ब्लॉगिंग के हर क्षेत्र को समेटा गया है. ब्लॉग के इतिहास से लेकर आधुनिक माइक्रोब्लॉगिंग तक की चीजों को शामिल किया गया है.किताब में ऑडियो वीडियो पॉडकास्ट से लेकर ब्लॉग डिजाइन और एड-ऑन की बातें तो हैं ही, लेखन के टिप्स और ट्रैफ़िक बढ़ाने के श्योरशॉट तरीके भी दिए गए हैं. ब्लॉग को मॉनीटाइज करने  - यानी ब्लॉग से कमाई करने तथा ब्लॉग को पूर्णकालिक आजीविका के रूप में अपनाने के लिए कुछ बेहतरीन टिप्स भ…

गूगल के मराठी विज्ञापन?

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शायद आपकी नजरों में पहले भी आया हो, मगर मेरी नजर में पहली मर्तबा गूगल के मराठी विज्ञापन आए -वैसे इक्का दुक्का गुजराती विज्ञापन भी नजर आ चुके हैं. वैसे, गूगल के देवनागरी (हिन्दी ) में विज्ञापन का इतिहास बहुत पुराना है – नेट पर साल-दो-साल में तो कायापलट हो जाता है – इस लिहाज से. मुलाहिजा फरमाएँ आलोक के ब्लॉग का ये स्क्रीनशॉट -अभी फिर से गूगल के हिन्दी टैक्स्ट विज्ञापन यत्र तत्र नजर आने लगे हैं, मगर सुधार? लगता है मामला वहीं लटका है जहाँ से शुरू हुआ था – यह रहा आज वर्गपहेली पर प्रकट हुआ गूगल का हिन्दी विज्ञापन -लगता है कि गूगल को अपनी हिन्दी सुधारने में देर लगेगी. बहुत देर!अंत में-गूगल का एक और विज्ञापन -इससे लगता नहीं कि भारतीय बेहद धार्मिक होते हैं?

एक ग़रीब का पहचान पत्र

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भारत देश में एक ग़रीब आदमी रहता था. वह बड़ी बेसब्री से पहचान पत्र के लिए बाट जोह रहा था क्योंकि सब तरफ चर्चा चल रही थी कि कोई पहचान पत्र मिलने वाला है जिससे उसकी गरीबी देश में बाघों की तरह ग़ायब हो जाएगी.अंतत: वो दिन आ ही गया जब एक दिन उसे पता चला कि पहचान पत्र बनाने के लिए सरकारी ऑफ़िस में आवेदन मिल रहा है और जिसे भर कर जमा करना होगा तभी पहचान पत्र मिलेगा. चूंकि उसे अपनी गरीबी दूर करने हेतु, अमीरों के समकक्ष खड़ा रहने हेतु किसी भी कीमत पर पहचान पत्र बनवाना था, अतः वो अपनी दिहाड़ी छोड़कर आवेदन लेने वाली लाइन में लग गया.लाइन बहुत लंबी थी. उसका ओर छोर नहीं दिखाई दे रहा था. उसका नंबर आते आते शाम हो गई और दफ़्तर बंद होने का टाइम आ गया. इधर आजू-बाजू से बहुत से लोग ब्लैक में फ़ॉर्म बांट रहे थे. परंतु उसके पास ब्लैक में खरीदने लायक पैसा नहीं था, सो वह लाइन में ही लगा रहा. जैसे ही उसका नंबर आया, उस वक्त ठीक चार बजकर उनसठ मिनट और अट्ठावन सेकंड हो रहे थे. यह समय तो सरकारी दफ़्तर के बंद होने का होता है. बाबू ने उसके नाक के सामने यह कहकर फ़ॉर्म देने की खिड़की बंद कर दी कि ‘दफ़्तर बंद होने का समय …

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