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April, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अपने हिन्दी ऑफ़िस में जोड़िए एक लाख शब्दों की कस्टम डिक्शनरी

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माइक्रोसॉफ़्ट हिन्दी ऑफ़िस 2003 / 2007 में अंतर्निर्मित हिन्दी वर्तनी जाँच उपलब्ध तो है, मगर बहुत बेकार किस्म का (वैसे ये अब तक उपलब्ध हिन्दी वर्तनी जाँच के तमाम औजारों में सर्वोत्तम भी है, तो इससे असरकारी हिन्दी वर्तनी जाँचक के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है,) – और आमतौर पर लड़की, लड़कियों, लड़कियाँ इत्यादि की वर्तनी जाँच में (स्क्रीनशॉट नीचे देखें-) मार खा जाता है.तो, यदि आप शुद्ध हिन्दी का कोई एक पेज का पाठ इसके अंतर्निर्मित वर्तनी जाँच से जाँच करेंगे तो पाएंगे कि आपके पाठ में कोई 10 से 40 प्रतिशत तक अशुद्धियाँ यह बता रहा है!इसे दूर करने के लिए आपको अपने कस्टम डिक्शनरी में सही वर्तनी वाले शब्दों को एकत्र करते रहना होता है. अच्छी वर्तनी जाँच के लिए हर किस्म और रूप के शुद्ध हिन्दी शब्दों को एकत्र किया जाना टेढ़ी खीर है. फिर भी आपकी सुविधा के लिए एक लाख से ऊपर के हिन्दी शब्दों की एक कस्टम डिक्शनरी फ़ाइल यहाँ अपलोड की गई है जिसका प्रयोग आप कर सकते हैं. कृपया ध्यान दें कि वैसे तो आमतौर पर प्रचलित शब्दों के सही वर्तनी वाले शब्दों को ही इस संकलन में लिया गया है, मगर फिर भी वर्तनी की बहु…

एक्सक्यूज़ मी...

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बोलने की इच्छा तो ये हुई – “साला सांड, बीचों बीच रस्ते में खड़ा है, आने जाने के लिए जगह पर टाँग फैलाकर खड़ा है, परे हट!” मगर प्रकटत: बहुत ही नम्र स्वर में बोला – एक्सक्यूज़ मी, थोड़ा सा जाने देंगे...जाहिर है, सामने वाले को मेरे मन में उसके प्रति उठे विचारों का कोई भान नहीं था, अतएव मेरे नम्र निवेदन को उसने उतनी ही विनम्रता से स्वीकारा और जाने के लिए उसने जगह दे दी. यदि वो मेरे मन में उठे भावों को जान लेता तो यकीनन, नूरा कुश्ती वहीं शुरू हो जाती.तो, आपने देखा कि किस तरह से, एक्सक्यूज़ मी का फंडा कितना कारगर होता है. सामने वाले को आप हजार लानत मलामत मन में भेजते रहें, मगर प्रकटत: उससे एक्सक्यूज़ मी, एक्सक्यूज़ मी कहते रहेंगे.ठीक इसी तरह का एक शब्द है सॉरी - माफ कीजिएगा. सॉरी शब्द ने दुनिया में जाने कितनी लड़ाईयाँ रोकी होंगी. कितनों के आँसुओं को टपकने से रोका होगा. कितने कत्ल और मर्डर रोके होंगे. आपका मन तो सामने वाले के पेट में छुरा भोंकने का हो रहा होता है, मगर आप प्रेम से कहते हैं – सॉरी! भले ही सामने वाले के मन में आपके ऊपर बम फेंकने का हो रहा हो, वो आपसे कहेगा कोई बात नहीं. कभी कभी …

मेरे शहर में शराब इफरात मिलता है, मगर पानी नहीं!

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सच ही तो है. पानी हमारे शहरी परिदृश्य से ग़ायब हो गया लगता है. पानी के नाम पर आसपास जो दिखता है वो या तो बिसलरी या किंगफ़िशर का रिवर्स ऑस्मोसिस फ़िल्टर्ड, यूवी क्लीयर्ड तथाकथित मिनरल वाटर होता है या फिर एक रुपल्ली का पाऊच. और नहीं तो कोला-पेप्सी-स्प्राइट जैसा कोई पेय.अब न कहीं छागल दिखता है, न मटका. ऊषा और बजाज के वाटर कूलर पानी को कुछ इस तरह से अभिजात्य रंग में रंग देते हैं कि कितना ही चिल्ड वाटर पी लें प्यास नहीं मिटती.गांवों में ग़नीमत है कि कहीं हैंडपंप और कहीं कुएँ बचे हैं. मगर कितने दिनों तक? प्लास्टिक की पारदर्शी बोतलें तमाम असलहों समेत वहाँ भी सेंघ लगाने की पूरी तैयारी में हैं.---.व्यंज़लमेरे शहर में शराब तो है पानी नहींजाने क्यों प्यास बुझाती पानी नहीं
मुल्क के वाशिंदों का हाल है अजबलहू तो है आँखों में मगर पानी नहीं
ग़ुमान है उन्हें कई समंदर रखते हैंये पता नहीं है कि उनमें पानी नहीं
जिस्म जला लिए हैं नीट पी पी करविकल्पहीन हैं चूंकि पास पानी नहीं
जाग़ीरें खड़ी कर लीं तुमने बहुत रविमगर कहीं हवा नहीं कहीं पानी नहीं
---.

हिन्दी के अगले सूर और तुलसी ब्लॉगिंग के जरिए ही पैदा होंगे….

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यकीनन. और भी बहुत कुछ, ब्लॉग संबंधी बेबाक बातें आप पाएँगे मेरे साक्षात्कार में जिसे परिकल्पना ब्लॉगोत्सव 2010 के अंतर्गत यहाँ प्रकाशित किया गया है. रवीन्द्र प्रभात जी का शुक्रिया.

हिन्दी में फोटोशॉप जैसा मुफ्त का, छोटा मगर बढ़िया पेंट प्रोग्राम - फोटोग्राफ़िक्स

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फोटोशॉप जैसी सुविधा युक्त, मगर बेहद तेज, पोर्टेबल (इंस्टालेशन की जरूरत नहीं) और छोटा (मात्र 700 किबा का), मुफ़्त का फोटो पेंट प्रोग्राम फोटोग्राफ़िक्स जिसमें तमाम फ़िल्टर इत्यादि भी हैं, अब हिन्दी में भी उपलब्ध है. इस उन्नत पेंट प्रोग्राम में आप चित्रों में यूनिकोड हिन्दी में पाठ भी जोड़ सकते हैं.कुछ स्क्रीनशॉट देखें -एम्बॉस फ़िल्टर -फोटोग्राफ़िक्स फ़ाइल मेन्यू:हिन्दी फोटोग्राफ़िक्स यहाँ - fotografix141HINDI.zip  से डाउनलोड करें. डाउनलोड करने के पश्चात इसे किसी फोल्डर में अनजिप करें. और सीधे फोटोग्राफ़िक्स.ईएक्सई को दोहरा क्लिक कर चलाएँ. किसी इंस्टालनेशन का झंझट नहीं!फोटोग्राफ़िक्स को एल. माधवन ने बनाया है. मूल साइट http://lmadhavan.com/software/ से भी फोटोग्राफ़िक्स (अंग्रेज़ी संस्करण) डाउनलोड कर सकते हैं.

ब्लॉग “छम्मकछल्लो कहिस” प्रतिष्ठित यूएनएफ़पीए लाडली मीडिया पुरस्कार से सम्मानित

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पॉपुलेशन फर्स्ट तथा यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (यूएनएफ़पीए) द्वारा जेंडर सेंसिटिविटी के लिए उत्तरी व पश्चिमी क्षेत्र के यूएनएफपीए-लाडली मीडिया पुरस्कारों की घोषणा आज भोपाल के समन्वय भवन में की गई. टाइम्स ऑफ इंडिया, आउटलुक, तहलका जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के मीडिया व्यक्तित्वों के साथ साथ विभारानी को भी उनके हिन्दी ब्लॉग – छम्मकछल्लो कहिस   के लिए एक रंगारंग समारोग में इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया. उन्हें बधाई व शुभकामनाएँ.पुरस्कार समारोह की कुछ झलकियाँ-नृत्यांगनाओं द्वारा भव्य शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति.मुख्य मंत्री, म.प्र. तथा भोपाल मेयर से ट्रॉफ़ी व प्रमाणपत्र ग्रहण करती हुई विभारानीट्रॉफ़ी व प्रमाणपत्र के साथ प्रसन्न मुद्रा में विभारानी---

आइए, खोजें कि गूगल बज़ में लोग आखिर क्या बजा रहे हैं…

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अगर आप समझते हैं कि गूगल बज़ में आप सिर्फ अपने समूह के बीच वार्तालाप कर रहे हैं तो आप गलत हैं. गूगल बज़ में आपकी बजबजाहट एक तरह से सार्वजनिक होती है (अपनी गोपनीयता सेटिंग जाँच लें!) और आमतौर पर उसे हर कोई देख-पढ़ सकता है. यहाँ तक कि सर्च इंजिनों के जरिए आपके बज़ पर खोज-खबर भी रखी जा सकती है. अतएव, गूगल बज़ पर अपनी निजी वार्तालाप के दौरान – आपको सलाह दी जाती है कि मर्यादा बनाए रखें – कौन जाने कब आपका गुस्सैल बज़ आपके लिए आफत की पुड़िया बन जाए.ये हैं कुछ बज़ जिन्हें गूगल रीयलटाइम खोज के जरिए खोजा गया है. जाहिर है, बज़ बड़े रोचक होते हैं, इसलिए ही समझ में आ जाता है कि जनता बजबजाने में क्यों पिली रहती है…---New results will appear below as they become available. PauseUpdating stopped. ResumeUpdating stopped. To resume, reload the page.धड़कते, साँस लेते, रुकते-चलते मैंने देखा है कोई तो है जिसे अपने मैं पलते मैंने देखा है... तुम्हारी आदतों में ख़ुद को ढलते मैंने देखा है मेरी ख़ामोशियों में तैरती हैं,तेरी ... - More »Rupesh Gupta‎ - Google Buzz - 2584 minutes agoना मुज़्दा-ए-विसाल ना नज़ारा…

मोबाइल फ़ोनों में हिंदी (किताब) पढ़ने हेतु एक आसान और बढ़िया औजार – एमटैक्स्टरीडर

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यदि आपके मोबाइल फ़ोन में हिंदी प्रदर्शन करने की क्षमता है और ये जावा प्रोग्रामों को चला सकता है, तब तो एमटैक्स्टरीडर समझिए कि आपके लिए ही है. आमतौर पर हिंदी सक्षम फ़ोनों में हिन्दी टैक्स्ट को पढ़ने हेतु सीमित मात्रा में सुविधा होती है परंतु आप हिंदी की बड़ी फ़ाइलों – मसलन 100-150 किबा की टैक्स्ट ई-बुक को आप नहीं पढ़ सकते. एमटैक्स्टरीडर के जरिए आप 200 किबा तक की हिंदी टैक्स्ट सामग्री को आसानी से पढ़ सकते हैं. एमटैक्स्टरीडर की और भी खासियतें हैं. इसका इंटरफेस आसान है.  आप इसके फ़ॉन्ट को छोटा-बड़ा कर सकते हैं, पृष्ठभूमि स्क्रीन का रंग, फ़ॉन्ट का रंग बदल सकते हैं. यही नहीं, आप बुकमार्क भी कर सकते हैं ताकि बड़ी किताब को आप जिस जगह से पढ़ रहे होते हैं, बाद में दोबारा सीधे वहीं से खोल सकते हैं. स्वतः स्क्रॉलिंग की सुविधा भी है जिसकी गति आप अपनी पठन गति के अनुसार सेट कर सकते हैं – मोबाइल में पढ़ने हेतु एक अनिवार्य सुविधा.हिंदी फ़ाइल को पढ़ने के लिए खोलने से पहले एमटैक्स्टरीडर की सेंटिंग में जाकर एनकोडिंग को यूटीएफ़ सेट करना होगा.(नोकिया सीडीएमए 6275 पर यशवंत कोठारी के व्यंग्य उपन्यास – यथा यो…

मोबाइल फ़ोनों के लिए पाणिनी हिंदी कीबोर्ड

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अगर आपके मोबाइल फ़ोन में हिंदी तथा जावा समर्थन उपलब्ध है, तब तो “पाणिनी कीपैड” आपके मोबाइल फ़ोन के लिए एक उम्दा औजार है हिंदी लेखन के लिए. इसका उन्नत किस्म का प्रेडिक्टिव तकनॉलाजी और इंटेलिजेंट इनपुट मैथड एक तरह से हिंदी (भारतीय भाषाओं) के लिए ही डिजाइन किया गया है.इस औजार के जरिए अन्य तमाम भारतीय भाषाओं में भी टाइप कर सकते हैं तथा रोमन में लिखी सामग्री को हिंदी या हिंदी सामग्री को रोमन में भी बदल सकते हैं. इसका इंटेलिजेंट इनपुट दो स्तर पर काम करता है. जैसे ही आप कोई व्यंजन चुनकर टाइप करते हैं, उसके लिए आवश्यक मात्राओं की सूची कुंजीपट पर स्वयमेव आ जाती है. इसी तरह स्वचालित रूप से शब्द पूर्णता (वर्ड कम्प्लीशन), प्रेडिक्टिव टैक्स्ट इत्यादि भी इसमें है. पणिनी कीपैड सांख्यिकिक प्रीडिक्टिव टेक्स्टिंग पर आधारित है, जो शब्द आप लिखना चाहते है, उसके प्रत्येक अक्षर का पूर्वानुमान यह स्वयं लगा लेता हैआप इस औजार को मुफ़्त में डाउनलोड कर अपने मोबाइल में संस्थापित कर जाँच परख कर सकते हैं.डाउनलोड लिंक - http://www.paninikeypad.com/वैसे, मैंने इसे नोकिया 6275 (इसमें नोकिया का अंतर्निर्मित, टाइपिंग सह…

बता, तेरा दिल किसके लिए धड़कता है बे?

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अब अगर दिल है तो धड़केगा ही. सवाल ये है कि वो किसके लिए धड़कता है. दिल आपका है, आप चाहे जिसके लिए धड़काएँ. मगर लोग-बाग आपके दिल के भीतर झांक कर देखने की कोशिश करते हैं और तमाम संभावित तरीकों से तहकीकात करने की कोशिश करते हैं कि आपके पास अगर दिल है, और वाकई धड़क रहा है तो फिर वो किसके लिए धड़क रहा है. यानी, किसी ऐसे वैसे या ऐरे गैरे के लिए तो नहीं धड़क रहा?और, यदि किसी तरीके से यह स्थापित हो गया कि आपका दिल सामने वाले के हिसाब से किसी अवांछित, ऐरे गैरे वस्तु के लिए धड़क रहा है तब तो समझो हो गई आपके लिए हो गई मुसीबत. इससे क्या फर्क पड़ता है कि दिल आपका है, इसे धड़काना या नहीं धड़काना आपकी मर्जी. मगर नहीं. आपके पास दिल है तो क्या हुआ. इसे धड़काना तो सामने वाले की मर्जी से होगा. या तो बेदिल बन जाओ और दिल धड़काना बंद करो या फिर धड़काना ही है, तो अगले की मर्जी से धड़काओ. चुपचाप जहाँ बताया जाता है वहाँ ले जाकर, उस पर धड़काओ नहीं तो नतीजा भुगतने के लिए तैयार रहो.एक और खतरा है. आपका दिल ख़ालिस हिन्दुस्तानी है या नहीं इसे चेक करा लें. आपने इसे पिछली मर्तबा कब और कहाँ चेक कराया था? उसका वैध जाँच…

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