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March, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सावधान! ऊर्जा बचत के लिए ‘अर्थ आवर’ बन सकता है ‘डिज़ॉस्टर आवर’

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ऊर्जा बचत के लिए ‘अर्थ आवर’ जैसी विचारधारा काग़ज़ी तौर पर तो बड़ी उम्दा दिखाई देती है, मगर यह किसी बड़े डिज़ॉस्टर को निमंत्रण देती भी प्रतीत होती है. ‘अर्थ आवर’ में पूरी पृथ्वी पर हर तरफ (स्थानीय समयानुसार)  रात 8.30 बजे से 9.30 बजे तक एक साथ बिजली बत्ती बंद रखने की बात कही जा रही है. और अगर सचमुच हम सभी एक साथ बिजली बन्द कर दें, तो यह हमारे लिए बन सकता है ‘डिज़ॉस्टर आवर’. आइए, देखें कि कैसै.वैसे तो आमतौर पर तमाम भारतीय क्षेत्रों में बिजली की खासी किल्लत बनी रहती है और शेड्यूल्ड, नॉन-शेड्यूल्ड तथा अंडर-फ्रिक्वेंसी बिजली कटौती के फलस्वरूप रोज ब रोज कई कई घंटे बिजली बन्द रहती है. ऐसे में ‘अर्थ आवर’ की अवधारणा भारतीय क्षेत्रों के लिए तो काम की ख़ैर नहीं ही है. मगर, कल्पना करें कि जहाँ चौबीसों घंटे बिजली मिलती रहती है, वहाँ पर आप अचानक, एक साथ तमाम बिजली (के तमाम उपकरणों को) बन्द कर दें तो क्या होगा? ये तो एक हादसे को निमंत्रण देने जैसा है.आपको उदाहरण देकर स्पष्ट करते हैं. कल्पना करें कि कोई मालगाड़ी टनों वजन लेकर अपनी अधिकतम रफ़्तार से दौड़ रही है. अचानक ही कोई दैत्याकार राक्षस मालगाड़ी …

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में भारतीय भाषाई ब्लॉग : हिन्दी क्रासवर्ड, तमिल स्टॉक मार्केट, ब्लॉगर्स डूइंग इट आल!

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया दिल्ली संस्करण में पेज 12 – टाइम्स नेशन में श्रेया रॉय चौधरी का एक आलेख भारतीय भाषाई ब्लॉगों पर प्रकाशित हुआ है. इसे टाइम्स ईपेपर पर (थोड़े कांट-छांट युक्त) यहाँ पढ़ा जा सकता है -यह लेख अपने पूरे आकार में टाइम्स ऑफ़ इंडिया की साइट में प्रकाशित हुआ है, जिसे यहाँ पढ़ा जा सकता है.

यदि कोई आपको आपके (ब्लॉग) साइट की सामग्री के कॉपीराइट संबंधी क़ानूनी नोटिस भेजे तो आप क्या करेंगे?

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यदि किसी वकील या किसी लॉ फर्म से आपके पास कोई ईमेल आता है कि आपके साइट पर कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है और उससे संबंधित कॉपीराइट उल्लंघन का क़ानूनी नोटिस की वर्ड/आरटीएफ फ़ाइल आपके अवलोकनार्थ संलग्न है तो आप क्या करेंगे? आप चिंतित हो उठेंगे और उस दस्तावेज़ को तत्काल खोल कर देखेंगे. जाहिर है, कोई भी चिंतित हो सकता है, और संलग्न दस्तावेज़ को तत्काल खोल कर देखेगा ही कि उसमें क्या लिखा है. और ये क्या! दस्तावेज़ को खोलने का नतीजा आपके लिए बेहद अफसोसनाक होता है – खासकर तब जब आपने अपने कम्प्यूटर पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं की है.इंटरनेट के बदमाश फ़िशर रोज नई-नई चालाकियाँ करते हैं, और नए जाल लाते हैं. हाल ही में इन्होंने इसी तरह के कॉपीराइट उल्लंघन के नोटिस दस्तावेज़ संलग्न कर बेतरतीब ईमेल लाखों लोगों को भेजे हैं. इनके भेजे ईमेल में संलग्न दस्तावेज़ में ट्रोजन वायरस का कूट होता है जिसे उपयोक्ता के खोलते ही उसका कम्प्यूटर संक्रमित हो जाता है और कंप्यूटर की जानकारियाँ – चोरी कर ली जाती हैं.तो ऐसे में अतिरिक्त सावधान रहिए. कॉपीराइट उल्लंघन का नोटिस यदि ईमेल से आता है तो उसे नजरअंदाज कीजिए, और ऐसे …

आओ यारों, सीटी बजाएँ

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ये तो सरासर सिनेमा के दर्शकों, छोकरों, मनचलों का अपमान है. उनकी तुलना सीटी बजाते सांसदों से की जा रही है. सिनेमा हॉल और सड़क-चौराहे के साथ संसद की तुलना बेमानी है, अत्याचार है. सीटी बजाते सिनेमा के दर्शक, या किसी हसीन कन्या को देख कर सीटी बजाते मनचले छोकरे किसी सूरत सीटी बजाते सांसदों के समतुल्य नहीं हो सकते. सांसद तो जूतम-पैजार, सीट-फेंक, माइक उखाड़, गाली गलौज, हाथा-पाई इत्यादि इत्यादि के लिए जाने जाते हैं. जबकि सीटी बजाते सिनेमा के दर्शक या मनचले लड़के मासूम किस्म के होते हैं जो दरअसल सिनेमा के किसी हसीन दृश्य की प्रशंसा स्वरूप – मसलन माधुरी के ठुमके को देख कर सीटी बजाते हैं. संसद में सीटी नहीं सीटों का गणित बजता है, और यदि सीटी बजती भी है तो मार्शलों की. और आगे कभी सीटी बजाने की प्रक्रिया सांसदों द्वारा की जाने लगे तो वो हसीन दृश्यों के प्रतिक्रिया स्वरूप नहीं, बल्कि औचित्यहीन विरोध, घोर विरोध और एक दूसरे को नीचा दिखाने के फल स्वरूप होगी. सांसदों में अधिसंख्य हिस्ट्रीशीटर, करोड़-पति मिल जाएंगे. सीटी बजाते दर्शक-लड़के तो रोड छाप रोमियो ही होते हैं. अब आप बताएँ कहाँ हिस्ट्री शीटर और …

हिन्दी में फास्ट एंड फ्यूरियस सर्च – भाग 2

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एवरीथिंग के जरिए आप हिन्दी शीर्षक वाली  फ़ाइलों को विद्युत गति से खोज सकते हैं. पर तब क्या करें जब हमें फ़ाइलों के अंदर हिन्दी में लिखी इबारत में से खोजना है?आपके पास दो मुफ़्त के बढ़िया विकल्प हैं. 1 विंडोज डेस्कटॉप सर्च2 गूगल डेस्कटॉप सर्चदोनों में से कौन बढ़िया है? रीव्यू तथा तुलना के लिए यहाँ देखें.विंडोज डेस्कटॉप सर्च विंडोज़ 7 के साथ अंतर्निर्मित है. वस्तुतः यह स्टार्ट मेन्यू से लेकर विंडोज एक्सप्लोरर सभी में शामिल रह कर पृष्ठभूमि में काम करता हुआ बढ़िया परिणाम देता है. मैंने विंडोज एक्सप्लोरर के सर्च विंडो पर हिन्दी में फ़ाइलों के भीतर कहानी शब्द को ढूंढने की कोशिश माईडाक्यूमेंट फ़ोल्डर (विंडोज 7 में लाइब्रेरीज) में की. टाइप करते करते ही परिणाम हाजिर होते हैं जिन पर क्लिक कर आप सीधे उस डाक्यूमेंट को खोल सकते हैं. कुल मिलाकर, परिणाम त्वरित और उम्दा तथा बेहद काम का.यह रहा स्क्रीनशॉट:मगर, फिर भी, यदि आपने लिनक्स में ग्रेप कमांड का प्रयोग किया हो तो फिर आप ही बता सकते हैं कि ग्रेप क्या होता है, और सटीक, त्वरित और सचमुच का सर्च क्या होता है! जी हाँ, लिनक्स में आप कमांड लाइन के जरिए …

फ़ॉन्ट सुविधा एक्सटेंडेड : अब हिन्दी डाटाबेस व एक्सएमएल फ़ाइलों के फ़ॉन्टों को भी यूनिकोड में परिवर्तित करें

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फ़ॉन्ट सुविधा एक्सटेंडेड से अब अपने ऑनलाइन-ऑफ़लाइन डाटाबेस, एक्सएमएल फ़ाइलों तथा और भी ढेरों फ़ॉर्मेट की फ़ाइलों के हिन्दी फ़ॉन्टों को आपस में परिवर्तित कर सकते हैंआपके पास यदि दो-चार पन्ने का साधारण टैक्स्ट फ़ाइल में डाटा हो तो वह किसी भी साधारण फ़ॉन्ट परिवर्तक से बढ़िया परिवर्तित किया जा सकता है. परंतु विशाल डाटाबेस की फ़ाइलों में रखी प्रचुर हिन्दी सामग्री के फ़ॉन्ट को (पुराने फ़ॉन्टों से यूनिकोड तथा इसके विपरीत तथा पुराने हिन्दी फ़ॉन्टों में आपसी परिवर्तन सम्मिलित) परिवर्तित करना अब तक तो टेढ़ी खीर मानी जाती रही है.साइबरशॉपी (http://www.cybershoppee.com/ ) जिन्होंने पहले भी फ़ॉन्ट सुविधा नामक एक बेहद उपयोगी फ़ॉन्ट परिवर्तक जारी कर चुके हैं, ने इस अनुप्रयोग का एक्सेटेंडेड संस्करण निकाला है जिसमें यह तमाम सुविधाएँ हैं.अब आप अपने ऑनलाइन/ऑफ़लाइन डाटाबेस, एक्सएमएल फ़ाइलें तथा और भी अन्य फ़ॉर्मेट की फ़ाइलों को आसानी से एक-दूसरे हिन्दी फ़ॉन्टों में बदल सकते हैं. वर्ड, एक्सेल व एक्सेस डाटाबेस फ़ाइलों का समर्थन तो पहले से ही उपलब्ध था.मैंने इसका प्रोफ़ेशनल संस्करण प्रयोग किया है व पाया है क…

1000 के करेंसी नोटों को इस्तेमाल करने के लिए रिजर्व बैंक की #10 नई गाइड-लाइनें

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सामाजिक दूल्हे तक तो ठीक था, मगर जब राजनीति के दुल्हे दुलहिनों को जब करारे कुरकुरे नए 1000 के करेंसी नोटों की मालाएँ पहनाए जाने की खबरें मिलीं तो रिजर्व बैंक चौकन्ना हुआ. रिजर्व बैंक ने #10 नए गाइड लाइन तैयार किए हैं नोटों, ख़ासकर नए, कुरकुरे करारे 1000 के करेंसी नोटों के लिए. इन गाइड लाइनों का सख्ती से पालन करने की हिदायत भी दी गई है, अन्यथा प्रयोगकर्ताओं पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा भी दायर किया जा सकता है इसकी ताकीद की गई है.रिजर्व बैंक के प्रवक्ता से पूछा गया कि नई गाइड लाइनें क्यों बनाई गईं हैं और क्या पुरानी गाइड लाइनें उपयुक्त नहीं थीं, तो प्रवक्ता ने भाषण झाड़ा –“देखिए, वस्तुओं का प्रयोग बदलता रहता है. समय के अनुरूप प्रचलन बदलता है. आदमी को समय के हिसाब से चलना भी चाहिए. जैसी राजा वैसी प्रजा. तो नोटों का प्रचलन व प्रयोग भी बदलेगा और बदलना चाहिए. नोटों का प्रयोग बदल भी गया है. ऐसे में नए गाइड लाइनों की आवश्यकता अपरिहार्य है. उदाहरण के लिए, मोबाइल को ही लें. पहले इनका इस्तेमाल फोन काल के लिए किया जाता था. इन्हें बनाया ही इसीलिए गया था. मगर भाई लोगों ने इसमें इतनी सुविधाएँ जोड़ दी ह…

मेन, बेसिकली इज़ ए पिग इन डिस्गाइज़…

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नो कमेंट!---(चित्र कतरन – साभार – आर्ट इंडिया पत्रिका)

21 वीं सदी का व्यंग्य कोश

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पुस्तक मेले में विचरते हुए इस एक अलग, विशिष्ट किताब पर नजर गई. 21 वीं सदी का व्यंग्य कोश. उत्सुकतावश पन्ने पलटे कि आखिर इस कोश में क्या संकलित है, तो विषय वस्तु को देखकर लेखक के नायाब विचार और प्रयास को देखकर आनंद आ गया. यह कोश कुछ कुछ टेन-वर्ड-विकि जैसा है. एकाध पृष्ठ पर आप भी नजर मारें ----.विवरण-व्यंग्य कोश लेखक - सरन माहेश्वरीप्रकाशक एवं वितरकराजस्थानी ग्रन्थागारसोजती गेट, जोधपुर (राज.)द्वितीय संस्करण - मूल्य 200.00 रु.आईएसबीएन नं. 81-86103-00-7http://rgbooks.net

आख़िर, क्यों करें काम, जब काम है आराम!

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व्यंज़ल
क्यों करें कामकाम है आराम
काम में आरामगुठलियों के दाम
काम बिना दाम?सरकारी है काम
काम बिना नाम!सरकारी है काम
रवि तेरा काम?कुर्सी पे आराम
---.(संबंधित प्रविष्टि – आओ आराम फरमाएँ भी देखें)

निवेदन दुर्लक्षित करें…?

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फ़ेसबुक पर मित्र निवेदन साज-संभाल रहा था. एक कड़ी को क्लिक करने पर यह बटन प्रकट हुआ – निवेदन दुर्लक्षित करें. हे! भगवान!! इसका अर्थ क्या है? कोई बताएगा? वर्षों से कम्प्यूटर अनुप्रयोगों व वेब सामग्री के हिन्दी अनुवादों में सक्रिय हिस्सेदारी के बावजूद इस बटन पर लिखे का अर्थ मुझे तो समझ में नहीं आया. किसी को आया हो तो बताएँ, ताकि आगे मित्र निवेदन की साज-संभाल की जा सके. अभी तो अपनी गाड़ी दुर्लक्षित (?) हो गई है…

एमएस हिन्दी ऑफ़िस में वर्तनी जाँच हेतु कस्टम हिन्दी शब्दकोश जोड़ें

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आपकी हिन्दी भले ही अच्छी खासी अच्छी हो, पर लंबे व बड़े पाठों की वर्तनी पर निगाह मारने के लिए व गलत वर्तनी को पकड़ने के लिए कम्प्यूटर आधारित वर्तनी जाँच का कोई सानी नहीं है.

एमएस ऑफ़िस हिन्दी 2003 / 2007 के संस्करणों में वैसे तो हिन्दी की वर्तनी जाँच अंतर्निर्मित है, मगर वर्तनी जाँच की सुविधा हेतु प्रयुक्त हिन्दी शब्दों का डाटाबेस बेहद ही अपूर्ण क़िस्म का है (क्या कोई कम्प्यूटर आधारित हिन्दी वर्तनी जाँचक कभी परिपूर्ण बन भी सकता है? और व्याकरण जाँच?), जिससे यह आपको वर्तनी जाँच के समय हिन्दी के सही शब्दों को भी लाल रेखा से रेखांकित कर गलत बताता है और कई मर्तबा अच्छे जानकारों को भी धोखा हो जाता है. कई मर्तबा गलत सुझाव देता है (चूंकि डाटाबेस में सही शब्द शामिल ही नहीं हैं).

ऐसे में अपना स्वयं का हिन्दी शब्दकोश डाटाबेस बनाना व उसे जोड़ना बहुत ही आवश्यक व महत्वपूर्ण हो जाता है. इसके लिए सही हिन्दी शब्दों पर दायाँ क्लिक कर शब्द कोश में जोड़ें का विकल्प चुना जा सकता है. आप देखेंगे कि कुछ दिनों के प्रयोग के उपरांत आपके पास एक अच्छा खासा डाटाबेस तैयार हो जाता है. तो यदि आपके पास ऐसा अच्छा डाटाब…

महिला आरक्षण विधेयक पास नहीं करने के उम्दा # 10 कारण

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चहुँ और चिल्ल पों मची है कि महिला आरक्षण बिल पास होना चाहिए/नहीं होना चाहिए. आपके अपने टेक हो सकते हैं कि महिला आरक्षण बिल पास होना चाहिए या नहीं. मेरे विचार में महिला आरक्षण बिल किसी सूरत पास नहीं होना चाहिए. कदापि नहीं. शीर्ष # 10 कारण जानें कि क्यों –1. महिला आरक्षण बिल पास हो गया तो शहाबुद्दीनों, पप्पू यादवों का क्या होगा और राजनीतिक पार्टियाँ चुनाव जीतने के लिए महिला-शहाबुद्दीनों, स्त्री-पप्पू यादवों को कहाँ से लाएँगे?2. मंत्री/सांसद जो देश/राज्य को छोड़कर सिर्फ और सिर्फ अपने चुनाव क्षेत्र के लिए काम करते हैं, योजना बनाते हैं, बाकी दूसरे क्षेत्र की और आँख मूंद लेते हैं उनको अब दूसरे क्षेत्र की और भी जबरिया देखना होगा. क्योंकि क्या पता अगले चुनाव में उनका क्षेत्र महिला के लिए आरक्षित हो गया तो उन्हें कहीं और से लड़ना पड़ेगा. ये कहां की तुक और कहां का न्याय है. ये तो प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है.3. महिला आरक्षण बिल पास हो गया तो देश में राबड़ी और माया जैसे देवियों और वतियों का राज होने की संभावना प्रबल है – जिसके बारे में सोचकर रूह कांप जाती है.4. देश के कुंवारे राहुलों को शादी करनी…

सबकुछ बिकता है यहाँ…

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सिर्फ न्यायालय ही क्यों श्रीमान?गुजरात उच्च-न्यायालय का मानना है कि वहां की ज्यूडिशियरी में किसी को भी खरीदा जा सकता है. बजा फरमाया योर ऑनर! पर सिर्फ ज्यूडिशियरी की बात क्यों, भारत में ऐसा कोई इन्टैक्ट तंत्र बता दें जहाँ किसी को खरीदा नहीं जा सकता.आप बता सकते हैं?--- व्यंज़ल --- हर कोई बिकता है यहाँ लेवाल चाहिए सोहनी के देश में एक महिवाल चाहिए
जवाब तो हर किसी के पास है इधर यहाँ तो बस एक अदद सवाल चाहिए
मुरदों के शहर में हमारा क्या काम हमें तो रोज एक नया बवाल चाहिए
मेरे मोहल्ले के बाशिंदों को दोस्तों  खिड़की दरवाजे नहीं दीवाल चाहिए
मामूली से रवि को कोई पूछता नहीं सब को अब हर तरफ कमाल चाहिए ----.(समाचार कतरन – साभार टाइम्स ऑफ इंडिया)

क्या आप माइक्रोसॉफ़्ट की तकनीकी सामग्रियाँ हिन्दी में पढ़ना चाहेंगे?

यदि हाँ तो इस सर्वे में भाग लीजिए. यह सर्वे माइक्रोसॉफ़्ट के अभिषेक कांत ने पोलडैडी पर चढ़ाया है. जितना ज्यादा लोग पढ़ना चाहेंगे, उतनी ज्यादा संभावना. तो दौड़ लगाइए, अपनी स्वीकृति दीजिए और इंतजार कीजिए हिन्दी में तकनीकी सामग्री का. सर्वे एक पन्ने का है और आपका आधा मिनट ही जाया होगा. तो जल्दी करें.सर्वे में भाग लेने के लिए इस कड़ी पर चटका लगाएँ

जॉनी तुम यूँ निकला न करो बन ठन के, न जाने किस गली तुम्हें लूट लिया जाए.

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एक शेर पेश है -
रात में सड़क पे निकलना मना है मेरे देश में यारों ,
न जाने किस अंधे मोड़ पे मौत से भिड़ंत हो जाए.

यह शेर मेरा नहीं है, और न ही किसी मंजे हुए शायर का. यह शेर तो हमारे प्रदेश के मुख्य-मंत्री महोदय का है. वे अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों को यह सुझाव दे रहे हैं. और, हो सकता है ऐसी सलाह कल को वे तमाम जनता को दें. अभी तो वे मंत्रियों को कह रहे हैं कि भई, रात-बेरात बाहर सड़क पर न निकलो. तुम्हारे जान-माल का खतरा है. मंत्री वैसे भी जनता जनार्दन से ऊंचे दर्जे के होते हैं, तो उनकी चिंता खास रखनी ही होगी. तो, यदि मंत्रियों को रात-बेरात बाहर जाना हो तो? सड़क मार्ग नहीं, वायुमार्ग का प्रयोग करें. मंत्री बन गए हैं, पर इतना भी नहीं जानते! और जब जनता जनार्दन हो हल्ला मचाने लगेगी तो? चुनावों के समय वोटों का भय दिखाएगी तब? तब उन्हें जनता को भी ऐसी हिदायतें देने में देर नहीं लगेगी. जनता को तैयार रहना चाहिए, ऐसी किसी भी मुश्किल का सामना करने के लिए.
मगर, फिर, रात में ही क्यों? दिन में सड़क में निकलना क्या सुरक्षित है? जनता के लिए तो रात और दिन बराबर हैं. रात में अंधेरी, गड्ढेदार सड़कें आपकी जा…

टाइगर ईमेल और टाइगर ब्लॉग?

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मीठी, रसीली टेक्नोलॉजी का इससे बढ़िया उदाहरण और क्या हो सकता है भला? टाइगर टैक्स्ट नाम की एसएमएस सेवा से आप किसी की ऐसी तैसी करते एसएमएस करते हैं, वो एसएमएस सामने वाले के स्क्रीन पर 60 सेकंड के लिए नमूदार होता है, और इससे पहले कि वो कोई एक्शन ले पाए, आपका गाली भरा एसएमएस अपना काम कर खुद हाराकिरी कर लेता है. साथ ही आपके फोन से भी उसका नामोंनिशां मिट जाता है. इस तरह से इसका कोई सुराग कहीं बचा नहीं रह पाता. वैसे, इस तरह के 60 सेकंड में सेल्फ-डिस्ट्रक्टिव एसएमएस संदेशों का प्रयोग और भी विविध रूपों में किया जा सकता है. नेताओं के लिए पार्टी-छोड़, पार्टी-बदल जैसे ऑफ़र और सुझावों के लिए तो यह एविडेंस रहित बढ़िया विकल्प होगा ही, भ्रष्टाचारियों के लिए नेगोशिएशन और डील का मुफ़ीद हथियार भी रहेगा. मजनुओं के लिए ख़ब्ती लैलाओं जिनके पुलिस के पास जा कर शिकायत दर्ज करवाने का हमेशा भय बना रहता है, यह तो पसंदीदा, माफ़िक और मारक हथियार रहेगा. जाने कितने प्रेम निवेदन जो ऐसे भयों से अनभेजे पड़े रह जाते हैं मोबाइलों की मेमोरी में ड्रॉफ़्ट रूपों में और अनसेंट बक्सों में, उनका तो, कल्याण ही हो जाएगा.मगर बहुत …

(हिन्दी में पहली) विस्तृत समीक्षा – माईवे आईपीटीवी के साथ अड़तालीस घंटे

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पिछले कई महीनों से लगातार माईवे (बीएसएनएल-एमटीएनएल के साथ जो आईपीटीवी सेवा प्रदान करती है) के टेलीमार्केटियरों से बचते-बचाते अंतत: जब 1 महीने के लिए मुफ़्त जांच-परख का ऑफर आया तो सोचा कि चलो, इसी बहाने इस सेवा को न सिर्फ जांच परख लिया जाए और यदि काम का लगे तो इसकी सेवा क्यों न ली जाए. वैसे, नेट पर भारत के आईपीटीवी माईवे के लिए ऋणात्मक समीक्षाओं की भरमार है, और मैं कम से कम किसी चमत्कार की उम्मीद तो कर ही नहीं रहा था.मेरे हाँ करते ही, जल्द ही माईवे का प्रतिनिधि घर पर धमक गया. कुछ आसान सी फ़ॉर्मेलिटी करवाई गई, एक आवेदन भरवाया गया, सुरक्षा निधि के नाम पर 1500 रुपए लिए गए कि जब आपको यह सेवा पसंद न आए तो हम एक महीने के भीतर आपको यह पैसा वापस दे देंगे. माईवे आईपीटीवी के लिए घर पर बीएसएनएल-एमटीएनएल का ब्रॉडबैण्ड आवश्यक है. मैंने अपना ब्रॉड बैण्ड तब कटवा लिया था जब से मैंने बीएसएनएल की भरोसेमंद, आंशिक रोमिंग युक्त बढ़िया वायरलेस हाईस्पीड इंटरनेट सेवा – ईवीडीओ का प्रयोग करना प्रारंभ कर दिया था. तो मैंने एक सस्ती सेवा 125 रुपए प्रतिमाह, 250 मेबा डाउनलोड सीमा हेतु ब्रॉडबैण्ड ले लिया. यह बड़ी अजी…

हिन्दी कम्प्यूटिंग को होली का उपहार : ओएलपीसी पूर्णत: हिन्दी में

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ओएलपीसी – ( एक लैपटॉप प्रति बच्चा ) विश्व भर के तमाम बच्चों को कम्प्यूटर सिखाने वाली महात्वाकांक्षी परियोजना के हिन्दीकरण पर कार्य कुछ समय से जारी था.  यह प्रोजेक्ट अब पूरा हो गया है – अर्थ यह कि ओएलपीसी अब पूरा हिन्दीमय हो चुका है. परियोजना कोऑर्डिनेटर सत्यकाम गोस्वामी के साथ हाल ही में सम्पन्न इस प्रोजेक्ट में अनुवाद कार्य ख़ाकसार ने किया है.

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