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January, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

एक पद्म पुरस्कार जो मुझे मिलते-मिलते रह गया!

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जैसे ही मुझे पता चला कि मेरा नाम भी इस वर्ष दिए जाने वाले पद्म पुरस्कारों की सूची में है, मेरे पैरों तले धरती खिसक गई. दिल बैठ गया. वल्लाह! ये क्या हादसा होने जा रहा है मेरे साथ? क्या तुझे मैं ही मिला था इस दुनिया में मुझे इतना दुख दर्द देने को?पद्म पुरस्कार मिलते ही मेरे आगे पद्मश्री या पद्मविभूषण जबर्दस्ती जुड़ जाता और फिर, नतीजतन मैं मुँह छिपाए फिरता. लोग मुझे भी ठग, झूठा, दीवालिया समझते. सेटिंगबाज किस्म के बॉलीवुड का कलाकार समझते या कोई अमरीकी दीवालिया व्यापारी या चुटकुलेबाज. मैं ऐसी स्थिति के लिए कतई तैयार नहीं था. किसी सूरत तैयार नहीं था.मैंने भगवान से विनती की, मंदिर में लाइचीदाने-नारियल चढ़ाए, मजार पर इबादतें की, गुरुद्वारे में अरदास किया और गिरजे में प्रार्थनाएँ की. मगर बहरे भगवान को तो सुनना ही नहीं था. एक ग़रीब मैं ही था जो न जाने किस जन्म की सजा भुगतने वाला था.जब भगवान ने नहीं सुनी तो मैं डेस्पेरेट हो गया. अब जब पानी नाक से ऊपर जा रहा था तो जिंदा रहने के लिए कुछ जद्दोजहद तो करनी ही थी. मैंने अपने सम्पर्कों को टटोला. एक मंत्री तक जैसे तैसे बात पहुँचाई. चुनावों तक तो मंत्री …

लिनक्स में बीएसएनएल ईवीडीओ कार्ड से इंटरनेट कैसे कनेक्ट करें?

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यह रही त्वरित गाइड - (उबुन्टु के नवीनतम संस्करण के लिए)

1 –यदि आपके लिनक्स तंत्र  में केपीपीपी संस्थापित नहीं है तो कमांड दें (रूट यूजर के रूप में):
# apt-get install kppp
2 -अब केपीपीपी को चलाएं निम्न कमांड देकर:
# kpppनीचे दिया गया विंडो खुलेगा. यदि आपका तंत्र अंग्रेजी में है तो अंग्रेजी में खुलेगा. जापानी में भी खुल सकता है यदि आप जापानी भाषा  में तंत्र  में काम करते हों तो,

अब केपीपी को थोड़ा कॉन्फ़िगर करना पड़ेगा. कॉन्फ़िगर पर क्लिक करें तथा खाता टैब पर क्लिक करें. नया में क्लिक करें फिर कनेक्शन नाम दें बीएसएनएल, नंबर भरें #777. ठीक OK पर क्लिक करें. अब मॉडम टैब पर क्लिक करें और नया पर क्लिक करेंइसे ईवीडीओ या अन्य कोई नाम दें फिर मॉडम उपकरण ड्रापडाउन मेन्यू में चुनें /dev/ttyUSB0. ठीक पर क्लिक करें और सेटिंग सहेजें. अब केपीपीपी मुख्य विंडो में जुड़ें (कनेक्ट) पर क्लिक करें. प्रयोक्ता नाम व पासवर्ड दें (डिफ़ॉल्ट सीडीएमए होता है यदि आपने बदला नहीं है तो) और बिंगो - आपका नेट कनेक्ट हो गया.
यह विधि उबुन्टु में तो बढ़िया काम करता ही है, बस केपीपीपी की संस्थापना अन्य लिनक्स तं…

अपग्रेड ऑर नाट टू अपग्रेड?

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वैसे भी, कहावत है कि किसी चलती चीज को न छेड़ें. तो, जब आपका कम्प्यूटर अच्छा भला चलता होता है, किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं आती होती है तो फिर आप अपग्रेड के चक्कर में आखिर पड़ते ही हैं क्यों भला?कुछ समय पहले उन्मुक्त ने अपना लिनक्स का संस्करण अपग्रेड किया था और उनका हिन्दी लिखने का कुंजीपट स्किम उनके अच्छे खासे चलते लिनक्स तंत्र से गायब हो गया था. पिछले दिनों मेरे कम्प्यूटर पर बारंबार फ्लैश होते संदेश कि - नया संस्करण अपडेट के लिए बहुत समय से आ चुका है और आप बुद्धू अपग्रेड ही नहीं कर रहे हो – को देख देख कर जब बोर हो गया तो अंतत: मैंने भी हथियार डाल दिए.और, नतीजा बड़ा हौलनाक रहा!वैसे, कंपनियाँ अपने सॉफ़्टवेयरों के अपग्रेड संस्करण निकालती हैं – तो अपने प्रयोक्ताओं के भले के लिए. नया संस्करण ज्यादा सुविधा वाला, तेज, अतिरिक्त फ़ंक्शनलिटी और आसान इत्यादि इत्यादि युक्त होता है. होता करे, मगर हमारे जैसा गरीब उपयोक्ता क्या करे जब उसका अच्छा खासा चलता सिस्टम समस्या पैदा करने लगे?ऊपर दिया स्क्रीनशॉट लिनक्स उबुनन्टु 9.10 पर चल रहे अनुप्रयोग लोकलाइज का है. जहाँ एडिटिंग विंडो है वहाँ देख रहे हैं कि …

जहाँ डाल-डाल पर भ्रष्ट कोड़े करते हैं बसेरा वो भारत देश है मेरा

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कल से स्पीकर पर चारों ओर से देश भक्ति पूर्ण गाने बज रहे हैं. एक गाना बारंबार बज रहा है – जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया… सुन सुन कर कोफ़्त सी होने लगी. वास्तविकता तो कुछ और है. वास्तविकता कड़वी है मेरे दोस्त. बहुत कड़वी. कुछ इस तरह -जहाँ डाल-डाल पर भ्रष्ट कोड़े करते हैं बसेरा
वो भारत देश है मेरा
जहाँ असत्य, हिंसा और अधर्म का पग-पग लगता डेरा
वो भारत देश है मेरा
ये धरती वो जहाँ एसपीएस राठौर जैसे अधिकारियों का बोलबाला
जहाँ हर बालक एक बाल मजदूर है और हर राधा एक हाला
जहाँ देश के लुटेरे नेता सबसे पहले आ कर डाले अपना फेरा
वो भारत देश है मेरा
अलबेलों की इस धरती के व्यवहार भी हैं अलबेले
कहीं रिश्वत की जगमग है कहीं हैं भाई-भतीजावाद के मेले
जहाँ लालफीताशाही और अकर्मण्यता का चारों ओर है घेरा
वो भारत देश है मेरा
जब कटुता पैदा करते मस्जिद और शिवाले
जहाँ हर नगर में कूड़ाकरकट गंदगी धूल फैला डाले
भ्रष्टाचार की बंसी जहाँ बजाता है ये शाम सवेरा
वो भारत देश है मेरा
(राजेन्द्र किशन से क्षमायाचना सहित)(चित्र – सौजन्य अनुज नरवाल रोहतकी)धन्यवाद …

लीजिए, पेश है आल लैंग्वेज टू मराठी कन्वर्टर प्रोग्राम एंड गॅजेट

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महाराष्ट्र में जैसे ही हल्ला मचा कि टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य होने जा रहा है, हर ओर हल्ला मच गया. मचना ही था. टैक्सी ड्राइवरों के रस्ते महाराष्ट्र में होटल के बेयरे से लेकर मैनेजर, डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक यहाँ तक कि आईएएस अफसरों पर भी मराठी बोलना-लिखना-पढ़ना अनिवार्य होने की संभावना जो थी.इधर खालिस भारतीय सॉफ़्टवेयर प्रोग्रामरों में भी इस कंट्रोवर्सी में नई संभावनाएँ दिखाई देने लगीं. कुछ रातों रात प्रोग्राम और गॅजेट्स लेकर आ गए तो कुछेक ने कुछ प्रोग्रामों/गॅजेट्स में हैक कर अपना नया उत्पाद बना लिया. कुछ खालिस भारतीय इंटरप्रेन्योर किस्म के लोगों ने सरकार में सेंध मार दी और अपने-अपने उत्पादों के लिए रातों रात न सिर्फ टेंडर निकलवा लिए, बल्कि कार्टेल बना कर सर्वोच्च कीमत में सर्वाधिक न्यूनतम कीमत दिखाते ऑर्डर खैंच लिए. बाजार में देखते ही देखते मराठी लैंग्वेज प्रोग्रामों, सॉफ़्टवेयर सॉल्यूशन्स की भरमार हो गई. आपके लिए पेश है कुछ विशिष्ट किस्म के मराठी भाषाई उत्पादों के बारे में बेहद जरूरी जानकारी. अपने आपको इन जानकारियों से अद्यतन रखिए और इस मराठी क्राइसिस से उबरिए…* मर…

यदि मेरा ब्लॉग नहीं होता तो हार्पर कोलिन्स मुझे घोड़े के लीद से ज्यादा कुछ नहीं समझते…

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यह कहना है (फ़ेक आईपीएल प्लेयर - FIP) नक़ली इंडियन प्रीमियर लीग खिलाड़ी का. सीजन 3 की पूरी तैयारी है. क्या  FIP अपनी अगली ब्लॉग पारी के लिए तैयार हैं? क्या FIP गेमचेंजरों का नक़ाब फिर एक दफा आपके सामने उतारने के लिए प्रकट होंगे? अपने ब्लॉग के जरिए देखते ही देखते क्रिकेट जगत में सनसनी बनने वाले, और क्रिकेटियरों से भी ज्यादा प्रसिद्ध और लोकप्रिय होने वाले ‘फ़िप’ अपनी किताब गेमचेंजर्स लेकर फरवरी में प्रकट हो रहे हैं. देखना ये है कि उनकी किताब भी उनके ब्लॉग की तरह प्रसिद्धि के आसमान छूती है या नहीं!यह सब और बहुत कुछ FIP के नेट पर पहले पहल दिए गए साक्षात्कार में पढ़ें – हिन्दी पत्रिका सामयिकी में यहाँ पर.

फ़िफ़्टीन सेकण्ड्स ऑफ़ फ़ेम – सीजन 2 : रविरतलामी का साक्षात्कार वेब-नी-टेक पर!

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माना कि वेब-नी-टेक (http://webneetech.com) कोई न्यूयॉर्क टाइम्स (जैसी बड़ी साइट) नहीं है, मगर मैं भी कौन सा बड़ा बिग ब्लॉगर हूं? जो भी हो, मेरा एक साक्षात्कार वहां पर छपा है. यदि आपको लगता है कि वहाँ बेकाम की कुछ बकवास पढ़ने को मिल सकती है तो सीधे वहाँ जाने के लिए यहाँ चटका लगाएँ.फ़िफ़्टीन सेकण्ड्स ऑफ फेम की कुछ पूर्व प्रविष्टियाँ -  छोटे शहरों की बड़ी चिट्ठाकारी , फ़िफ्टीन सेकण्ड्स ऑफ़ फ़ेम रिटर्न्स, फ़िफ़्टीन सेकण्ड्स ऑफ़ फ़ेम रीवाइन्डेड, फ़ाइव सेकण्ड्स ऑफ़ फ़ेम रील्लोडेड

मां, मुझे भी आइंस्टाइन के जैसा दिमाग दिलवा दे...

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जब दिमाग बँट रहा था, तब आप कहाँ चले गए थे? कई मर्तबा आपको ये ताना सुनने में आया होगा. मगर अब गम खाने की कोई बात नहीं. आने वाले समय में आप अपने दिमाग को कृत्रिम रूप से डिजाइनर दिमाग का स्वरूप इस तरह से दे सकेंगे कि दस-दस आइंस्टाइनी दिमाग वाले भी आपके दिमाग के सामने पानी भरें.मगर ठहरिए, क्या सचमुच आपको आइंस्टाइनी या लियोनार्दो दा विंची या चंद्रशेखरन जैसे दिमाग की चाहत है? भई, यदि मुझे विकल्प चुनने कहा जाएगा, तो मैं इसके बजाय कुछ दूसरे, अच्छे दिमागों को तरजीह दूंगा.मैं चाहूंगा कि मेरे पास कोड़ा की तरह दिमाग हो. चंद वर्षों में ही, हींग लगे न फ़िटकरी के तर्ज पर जादू की तरह आसमान से 4000 करोड़ रुपए कमाने वाला दिमाग. ऐसे दिमाग पर हर किसी को रश्क नहीं होगा? भले ही प्रकट में लोग नुक्ता चीनी करें, मगर मन में तो लड्डू फूटते रहते हैं कि काश उनके पास भी ऐसा शानदार दिमाग होता. लोग खुले आम स्वीकारने में भले ही हिचकें, मगर इस खबर को पढ़ने के बाद वे निश्चय ही मेरी तरह सपने संजोने लगे होंगे – जब ये तकनालॉजी हकीकत में बदलेगी तो इस तरह का डिजाइनर दिमाग लगवाने वालों में, यकीन मानिए, मैं पहला व्यक्ति होऊंग…

आख़िर, कौन किसके चंगुल में है?

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मियाँ मनमोहन, अब जरा ये भी तो बता दें कि आख़िर आप किसके चंगुल में हैं?--व्यंज़लक्या फ़र्क कौन किसके चंगुल में हैजनता सदा से नेता के चंगुल में हैभविष्य  स्वर्णिम है यकीनन हमाराक़ानून बाहुबलियों के चंगुल में हैअपनी मांद में ख़ैर मना लिए बहुतअंतत: राठौर रूचिका के चंगुल में हैमेरे वतन का हो गया है अजब हालमंत्री अब नौकरशाहों के चंगुल में हैवक़्त ने पलटा है आज अपना पाँसावही वक़्त आज रवि के चंगुल में है

नए साल के नए संकल्पों के आपकी राहों के रोड़े

नए साल में हम-आप एक से बढ़िया एक संकल्प लेते हैं. पर, क्या करें, इन संकल्पों की राह में इतने ही या इससे भी बढ़िया रोड़े चहुँ-ओर से चले आते हैं और नतीजा वही होता है – ढाक के तीन पात! आपकी पूरी कोशिश होती है, आप जी जान से कोशिश करते हैं कि आप अपने नए साल के नए संकल्प को भरसक पूरा करें, मगर जालिम दुनिया आपके संकल्प को तोड़ने के लिए हर किस्म की साजिश करती नजर आती है. और, इसी वजह से, आमतौर पर प्राय: हम सभी के संकल्प, अगर आनन फानन नहीं, तो कुछ दिनों में, टूट ही जाते हैं.इस साल आपने एक बढ़िया संकल्प लिया. आपका संकल्प है कि आप आज से अपने कार्य स्थल पर, अपने ऑफ़िस या दुकान पैदल जाएंगे. आखिर दूरी महज चार-छः किलोमीटर की ही तो है. इस बहाने थोड़ी वर्जिश हो जाएगी और दुनिया में कार्बन फुटप्रिंट को थोड़ा सा कम करने में आपका भी महती योगदान रहेगा. वैसे भी पिछला पूरा माह कोपेनहेगेन-कोपेनहेगेन मय हो गया था.जैसे ही आप घर से निकलते हैं, आपके घर के नुक्कड़ का पनवाड़ी आपको टोकता है – क्या साहब जी, आज गाड़ी खराब हो गई है क्या? वो जेनुइन प्रश्न पूछता है, मगर आप झुंझला कर उसे बताते हैं कि नहीं भाई, दुनिया का ता…

हिन्दी पीडीएफ़ फ़ाइलों को यूनिकोड वर्ड डाक्यूमेंट में कैसे बदलें?

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नेट पर और अन्यत्र बहुत सी सामग्री पुराने हिन्दी फ़ॉन्टों (जैसे कि कृतिदेव तथा चाणक्य में) में पीडीएफ़ के रूप में उपलब्ध है. इसे यूनिकोड फ़ॉन्ट के दस्तावेज में बदलना अच्छा खासा सिरदर्द होता है, जब तक कि आपके पास कुछ ठीक-ठाक औजार न हों.पर अब आप नेट पर उपलब्ध मुफ़्त के जुगाड़ों से यह काम आसानी से कर सकते हैं. ध्यान रहे, पीडीएफ़ दस्तावेज स्कैन किया दस्तावेज न हो, बल्कि डिजिटल फ़ॉर्मेट से तैयार (जैसे कि कृतिदेव फ़ॉन्ट से तैयार वर्ड दस्तावेज से बनाया गया पीडीएफ़) हो, तभी यह जुगाड़ काम करेगा. इसके लिए, ये हैं आपके लिए कुछ आसान से चरण -( 1 ) सबसे पहले अपने पीडीएफ़ फ़ाइल को अपने जीमेल खाते में अपने ही नाम से भेजें.( 2 ) जीमेल खाते में संलग्नक रूप में दिखाई दे रहे पीडीएफ़ फ़ाइल के नीचे दिए गए लिंक देखें पर क्लिक करें.( 3 ) गूगल डॉक्स में एक नया पेज खुलेगा जहाँ पर बाएँ ऊपरी कोने पर उपलब्ध सामान्य एचटीएमएल कड़ी पर क्लिक करें.( 4 ) कुछ ही समय में उसी पेज पर हिन्दी सामग्री का रॉ डाटा (यानी कृतिदेव या चाणक्य फ़ॉन्ट इत्यादि में,) आपके सामने उपलब्ध होगा. इसे कॉपी पेस्ट कर कहीं सहेज लें, या इस पेज को स…

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