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December, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तरकश.कॉम : विश्व की ऐसी पहली हिन्दी समाचार साइट जिसकी सामग्रियों को आप रुचि अनुरूप जोड़ घटा सकते हैं

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वैसे तो इस तरह की सुविधा आई-गूगल इत्यादि (व्यक्तिगत पन्नों) में भी है, और बहुत पहले से है. मगर समाचार साइटों में ऐसी सुविधा हिन्दी साइटों में अब तक नहीं थी. अंग्रेज़ी समाचार साइटों – जैसे कि बीबीसी अंग्रेज़ी में कुछ समय से ऐसी सुविधा उपलब्ध थी.  तरकश.कॉम जिसे हाल ही में प्रतिष्ठित मंथन पुरस्कार भी मिला है, में ऐसी सुविधाओं को हाल ही में जुटाया गया है. अब आप इस साइट के मुख पृष्ठ की सामग्री को अपने रुचि अनुरूप विषयों से सजा संवार सकते हैं और जिन विषयों में आपको रूचि नहीं है, उन्हें आप निकाल बाहर कर सकते हैं.उदाहरण के लिए, तरकश का डिफ़ॉल्ट पन्ना:मेरी रूचि तो, विज्ञान में है -और ये कुछ और विषय बन्द!तो, अगर आपको लगता है कि तरकश सेमी पॉर्न परोस रहा है, तो ऐसे विषयों को नजरों से कर दें बाय-बाय. स्पैनर, एंकर, तीर के निशान और रेडियो चयन बटनों से आप तरकश के अपने होम पेज की अपनी सेटिंग बदल सकते हैं. पूरा, विस्तृत  ट्यूटोरियल यहाँ देखें. ध्यान दें कि यह सुविधा सिर्फ मुख पृष्ठ (होम पेज) पर ही उपलब्ध है, भीतर के पन्नों में नहीं.

पक्षियों की बीट के आकार प्रकार और रूप रंग से भविष्यवाणियाँ

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सबसे पहले एक सत्य कथा. मेरे एक मित्र कलाकार हैं. केनवस पर चित्र उकेरते हैं. बहुत पहले जब वे जमने के लिए संघर्ष कर रहे थे तब का वाकया है. एक मर्तबा अपनी कलाकृतियों को लेकर वे दिल्ली की किसी आर्टगैलरी को जा रहे थे और ऑटो में अपना कैनवास इत्यादि चढ़ा रहे थे. इतने में उनके गहरे रंग के शर्ट पर ऊपर उड़ रही चिड़िया का सफेद बीट गिरा. मित्र परेशान हुए कि ये क्या! उनके कुर्ते का सत्यानाश हो गया. पर ऑटो चालक ने दिलासा दिया – भइए, रंज न करो. आज तुम्हारा भाग्य जग गया. आज तो तुम्हें पैसा मिलेगा. संयोगवश, उस दिन उन मित्र की एक पेंटिंग, किसी प्रदर्शनी में पहली मर्तबा अच्छे, मुंह-मांगे दामों में बिकी.तो, सवाल उठता है कि क्या पक्षियों की बीट से किसी तरह की भविष्यवाणी संभव है? यदि हम अपने कार के शीशे या झक सफेद कुर्ते पर चिड़ियों की बीट पर अपने भाग्योदय संबंधी बात न करें और कुछ वैज्ञानिक आख्यानों के पूर्वानुमानों की बातें करें, तो कह सकते हैं कि हाँ!अचानक ही मेरे हाथ में एक किताब आई, जिसका शीर्षक है – व्हाट बर्ड डिड दैट? इस किताब में बेहद मनोरंजक और ज्ञानवर्धक तरीके से यह बताया गया है कि आपके कार के छत …

पोस्टरस : हिन्दी में ब्लॉग लिखना इतना आसान कभी नहीं रहा…

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वैसे तो पोस्टरस की हिन्दी क्षमता की जाँच परख 23 मई 2009 को ही कर ली गई थी, मगर तब कुछ नुक्स नजर आए थे. अभी दोबारा कुछ जांच परख करने पर पाया गया कि यह हिन्दी ब्लॉग पोस्टिंग के लिए एक दम चुस्त दुरूस्त होकर तैयार हो गया है. जैसा कि पोस्टरस द्वारा दावा किया गया है – ब्लॉग पोस्ट करना इससे आसान नहीं हो सकता. सही है. न तो आपको खाता खोलने की जरूरत न ही पंजीकृत होने की. न टैम्प्लेट, ब्लॉग नाम इत्यादि कि चिंता और झंझट. बस, अगड़म बगड़म पोस्ट लिखकर एक ईमेल post@posterous.com को भेजें और आपकी ब्लॉग प्रविष्टि बन कर तैयार. ब्लॉग प्रविष्टि की लिंक के बारे में आपको वापस ईमेल भेज कर बताया जाएगा. किसी ईमेल खाते से पहली बार भेजेंगे तो आपका ब्लॉग भी स्वयं बन कर तैयार हो जाएगा. और, आप ब्लॉग में चित्र, एमपी3 या वीडियो भी जोड़ सकते हैं – बस अपने ईमेल में इनका अटैचमेंट लगा दीजिए. ब्लॉग पाठ को गाढ़ा, मोटा, रंगीन, तिरछा भी बना सकते हैं.ये रही जाँच पोस्टें -मेरे ईमेल खाते से बनाया व थोड़ा सजाया संवारा गया -http://raviratlami.posterous.com/और ये रचनाकार ईमेल खाते से सादा ईमेल भेज कर बनाया गया ब्लॉग -http://ravish…

भाऊ, तो ये है मेरी दिनचर्या!

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यह बोरीवली, बंबई मुम्बई, भारत महाराष्ट्र के रहने वाले एक मनसे कार्यकर्ता की टॉप सीक्रेट डायरी के कुछ पन्नों के संक्षिप्त अंश हैं.मेरी डायरी का यह पहला पन्ना. परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना है कि मेरी इस डायरी के बारे में मेरे कॉमरेड ताजिंदगी कभी भी न जान पाएँ! क्योंकि यदि उन्हें पता चलेगा कि मैं इसे मराठी में नहीं, बल्कि हिन्दी में लिख रहा हूं, तो वो तो मुझे वडा पाव में दबा कर खा जाएं! हालांकि हिन्दी में लिखने का अलग मजा है क्योंकि बहुत से पार्टी सदस्य हिन्दी से घोर नफरत करते हैं, और उनके सामने इस डायरी को लहराने पर भी वे इसकी ओर देखेंगे भी नहीं. वे तो सिर्फ और सिर्फ मराठी देखने-पढ़ने के लिए प्रोग्राम्ड हैं!कल का दिन हम सभी के लिए बहुत ही विशिष्ट और अच्छा गुजरा! हमने यूपी के दस भैयाओं को सुबह सुबह तब पकड़ लिया जब वे निपटने के लिए समुद्र किनारे जा रहे थे! हमने उन्हें अपने शानदार मराठी अलंकार “हलकट” से पुकारा और वहां से मार भगाया.चूंकि शुरूआत शानदार रही थी, तो बाकी का दिन और भी बढ़िया गुजरना ही था. दोपहर में तो आज गुरूजी का भाषण था ना! गुरु रा* ठाकरे एमएनएस कार्यकर्ताओं की आमसभा को संबोध…

मॉज़िल्ला थंडरबर्ड प्रयोग करने हेतु एक और नं1 सॉलिड कारण

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अगर आप भी मेरी तरह अकसर अपने संलग्नकों को संलग्न करना भूल जाते हैं, तो इससे निजात पाने के लिए थंडरबर्ड अपना सकते हैं.मॉजिल्ला थंडरबर्ड में नित्य नई ख़ूबियाँ जुड़ती जा रही हैं. सबसे बड़ी खूबी तो यह है कि आप इसमें जीमेल खाते को बड़ी आसानी से सिंक्रोनाइज कर सकते हैं – आईमैप और पॉप3 दोनों ही विधियों से, और ऑफलाइन काम कर सकते हैं. कुछ समय से थंडरबर्ड में जीमेल की तरह ही संलग्नकों के लिए रिमाइंडर सुविधा इसमें जोड़ी गई है. यही नहीं, अब आप इसमें संलग्नकों को जोड़ने से न भूल जाएं इसके लिए आपकी अपनी ही भाषा में कीवर्ड जोड़ने की भी सुविधा दी गई है. यह सुविधा थंडरबर्ड में तो वैसे कुछ समय से उपलब्ध है, मगर हिन्दी कीवर्डों पर यह ठीक से काम नहीं करता था. अब इसके नए संस्करण में हिन्दी कीवर्डों पर भी बढ़िया काम करता है.मैं अकसर संलग्नकों को जोड़ना भूल जाता था और ईमेल लिखने के उपरांत भेजें बटन पर चटका लगा देता था. अब मैंने थंडरबर्ड में संलग्नक हेतु स्मरण दिलाने के लिए हिन्दी में ही संलग्न’ नाम से कीवर्ड जोड़ दिया है. अब जब भी मेरे ईमेल में संलग्न शब्द आता है, और यदि संलग्नक नहीं जुड़ा हुआ होता है तो य…

भारतवंशियों स्वदेश लौटो!

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अंग्रेज़ों भारत छोड़ो की तर्ज पर ये गुहार है. गुहार नहीं, बल्कि एक आंदोलन है. भारत के शीर्ष पर बैठे राजनेता द्वारा छेड़ा गया आंदोलन. ऐसे में भारतवंशियों को भारत लौटना ही चाहिए. वैसे भी, भारतवंशियों को भारत से बाहर किसी सूरत जाना ही नहीं चाहिए, और यदि चले गए हैं तो बिना देरी के, तुरंत वापस आ जाना चाहिए. बिना किसी आंदोलन या गुहार के उन्हें वापस आना चाहिए. भारतवंशियों के वापस भारत लौटने के बढ़िया, कुछ टॉप के कारण ये हो सकते हैं –#1 – भारत की धूल भरी, गड्ढेदार, भीड़ भरी, सांडों और गायों से अटी-पटी, षोडशी नारी की कमर से भी पतली, सदैव जाम युक्त सड़कों का क्या मुकाबिला? सिक्स लेन की खाली सड़क पर गाड़ी दौड़ाने में भी कोई मजा है लल्लू?#2 – सत्यम के राजू की याद है आपको? या ताजातरीन कोडा? बोफ़ोर्स और चारा घोटाला? हजारों करोड़ रुपए देखते ही देखते बना सकने की सुविधा किसी और देश में है? फिर क्यों बुड़बक की तरह बाहर चले गए हो? जल्द लौट आओ. भारतवंशियों, आपके टैलेंट की जरूरत भारत में बहुत है.#3 – राजा-महाराजा तो बीते जमाने की बातें हैं? हो सकता है. पर यहाँ भारत में आप अब भी ठसके से राजा-महाराजा की तरह…

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