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October, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नेविगेशन पट्टी रहित ब्लॉगर ब्लॉग को फ्लैग कैसे करें?

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इलाहाबाद संगोष्ठी में चर्चा के दौरान यह तकनीकी प्रश्न किया गया था कि उन ब्लॉगर ब्लॉगों को फ़्लैग कैसे करें जिनमें नेविगेशन पट्टी को हटा दिया गया होता है. ब्लॉगस्पाट के ब्लॉगों में यह सुविधा दी गई है कि यदि आपको लगता है कि किसी ब्लॉग में आपत्तिजनक सामग्री है, तो ब्लॉगस्पाट ब्लॉग के सबसे ऊपरी खंड में दिए गए नेविगेशन पट्टी में ‘रिपोर्ट एब्यूज’ को क्लिक कर अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं. और यदि आवश्यक परिपूर्ण मात्रा में ऐसी शिकायतें ब्लॉगस्पाट को मिलती हैं तो उस पर कार्यवाही की जाकर उस सामग्री को वे हटा भी देते हैं.जिन ब्लॉगस्पाट ब्लॉगों में नेविगेशन पट्टी दिखती है, उसमें तो कोई समस्या नहीं, मगर बहुत से ब्लॉगों में सजावट के नाम पर उसे हमेशा के लिए हटा दिया गया होता है. और आप ऐसे ब्लॉगो को चाह कर भी फ्लैग नहीं कर सकते जिनमें नेविगेशन पट्टी नहीं होता है. ऐसे ब्लॉगों को फ्लैग कैसे करें?इसके लिए दो विधियाँ हैं –1) पहली आसान सी विधि है – यदि आप फ़ायरफ़ॉक्स प्रयोग करते हैं तो ब्लॉगस्पाट नेवबार रिस्टोरर नाम के इस ग्रीजमंकी स्क्रिप्ट का प्रयोग करें. इस स्क्रिप्ट के जरिए आमतौर पर प्राय: सभी ब्लॉग…

इलाहाबाद चिट्ठाकार सम्मेलन के कुछ हा हा ही ही , हाय हैलो के ऑडियो - वीडियो

आइए, आग को कुछ और हवा दें. दूर-सुदूर प्रांतों-देशों में कान-नाक-मुँह खोलकर अपने कम्प्यूटर के सामने चिंतित होकर ब्लॉगियाती-टिपियाती जनता के लिए, कि इलाहाबाद में क्या क्या न हुआ और क्यों न हुआ और हुआ तो क्यों हुआ इत्यादि के लिए   प्रस्तुत है सम्मेलन के कुछ हा – हा – ही – ही , हाय हैलो के ऑडियो वीडियो.सबसे पहले मनीषा पाण्डेय को सुनें. उनका ओजस्वी वक्तव्य पूरा रेकॉर्ड न कर पाया इसका अफसोस है. – कारण - वही : हार्डवेयर फ़ेल्योर.अब विनीत कुमार को सुनें. ऑडियो क्वालिटी बहुत खराब है – (सेमिनार हाल में ही ऑडियो गूंज रहा था बेसबब) मगर विनीत को सुनना उनको पढ़ने से ज्यादा आनंददायी है. यकीन मानें.आगे विनीत से लिया गया छोटा सा साक्षात्कार. छोटा इसलिए, कि साक्षात्कार के बीच में ही बैटरी जाने कैसे माशाअल्ला हो गई और एक वीडियो करप्ट हो गया. फिर भी, जो थोड़ा सा बचा है वह भी इसलिए महत्वपूर्ण है कि विनीत ने जब से ब्लॉग लिखना शुरू किया, उनका लेखन, उनकी लेखनी का तेवर, उनकी शैली सबकुछ कूदती फांदती नित्य नई ऊँचाईयाँ पाती गई. उन्होंने बातों बातों में बताया कि पिछले साल-डेढ़ साल में ही उन्हें कई-कई प्रमुख जगहों…

आइए आज शाम को ऑनलाइन सीखें कि विंडोज़ 7 पर हिन्दी में काम कैसे करें

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जैसी कि पूर्व सूचना आपको थी, आज 28 अक्तूबर 2009 को भारतीय समयानुसार शाम 4 बजे से लेकर 5.30 बजे तक एक ऑनलाइन वेबकास्ट है. वेबकास्ट यानी इंटरनेट के जरिए ऑनलाइन ट्यूटोरियल. इसमें वीडियो (स्क्रीनकास्ट) के जरिए विंडोज़ 7 को हिन्दी के लिए सेट करने व उनमें विभिन्न कुंजीपटों व इंटरनेट, हिन्दी फ़ॉन्टों में काम करने के बारे में विस्तार (ऑडियो वीडियो के माध्यम से) से बताया जाएगा. आपके प्रश्नों के उत्तर चैट के माध्यम से भी वहीं, तत्काल दिया जाएगा. जाहिर है, यह वेबकास्टिंग मेरे द्वारा होस्ट की जा रही है.इस वेबकास्ट में शामिल होने के लिए इस कड़ी पर 3.45 बजे शाम (भारतीय समयानुसार, इससे पहले यह कड़ी उपलब्ध तो होगी, पर काम नहीं करेगी) को क्लिक करें -http://msevents.microsoft.com/cui/Register.aspx?culture=en-IN&EventID=1032429276&CountryCode=INपर, इससे पहले आपको अपने विंडोज में विंडोज लाइव मीडिया प्रोग्राम (LMSEtup.exe) इंस्टाल करना होगा जो आपको वेबकास्टिंग दिखाता है. यह प्रोग्राम यहाँ से डाउनलोड करें -http://download.microsoft.com/download/4/F/7/4F712B94-C6A5-4A66-AD8F-53E04085B939/LMSetup.exe

चिट्ठाकारी (हिन्दी?) में निहित ख़तरे…

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इलाहाबाद में मैंने अपनी प्रस्तुति में चिट्ठाकारी में निहित खतरों के बारे में भी बताया था. अभिषेक ओझा ने कई पोस्टों में ब्लॉगिंग के खतरे के बारे में विस्तृत विवरण दिए हैं. इनमें से एक है – अनर्गल, व्यक्तिगत आक्षेप. यह टिप्पणी सुरेश चिपलूणकर के चिट्ठे से ली गई है. मुलाहिजा फरमाएँ :)





Vishal Pandey said...



सुरेश जी आपने सही मुद्दा उठाया है। जैसे नामवर जी मठाधीश है वैसे ही हमारे हिन्दी ब्लाग जगत के भी कुछ मठाधीश है। इनमे से दो को हम सब बखूबी जानते है। एक गंजी होती खोपडी वाला मरियल सा शख्स और दूसरा बाहर निकले दाँतो वाला हँसोड। आप यदि इन दोनो के चमचे नही तो हिन्दी ब्लाग जगत की मलाई कभी नही खा सकते।
आज हिन्दी बलाग जगत का विकास क्यो नही हुआ। ऐसे लोगो के कारण जो भाई-भतीजावाद को बढावा देते रहे और गूगल से हिन्दी प्रोमोशन के नाम पर पैसे उगाहते रहे। पैसे तो पा गये पर कुनबा बढाओ की नीति छूटी नही। आप ही बताये क्यो चिठठा-चर्चा मे खास ब्लागो की ही चर्चा होती है। यदि ये हिन्दी के सेवक है और उस नाम से पैसे कमा रहे है तो सभी चिठ्ठो की चर्चा करे।
मरियल से दूसरे मठाधीश को हिन्दी ब्लागिंग के नाम …

द अदर साइड ऑफ अ ब्लॉगर

क्या आप जानते हैं कि अजित वडनेरकर कभी अहमद हुसैन – मोहम्मद हुसैन के शिष्य हुआ करते थे और वे एक उम्दा गायक भी हैं? देखिए उनके लाइव परफ़ॉर्मेंस का वीडियो – जब से हम तबाह हो गए, तुम जहाँपनाह हो गए.----(वीडियो – साभार अनूप शुक्ल के कैमरे से)

विंडोज 7 सीखने के लिए आपके लिए कुछ मुफ़्त वेबकास्ट

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विंडोज का हर संस्करण चलने चलाने में अपने पूर्व के संस्करणों से बहुत कुछ भिन्न होता है. विंडोज 7 में हिन्दी कैसे चलाएँ? विंडोज 7 में नया क्या है? विंडोज 7 में इंटरनेट-नेटवर्किंग कैसे करें? इत्यादि. यह सब और बहुत कुछ जानिए मुफ़्त वेबकास्ट से.अब तक का सर्वश्रेष्ठ, चलने में तीव्र और आसान, अत्यधिक सुरक्षित विंडोज संस्करण 7 बस आने वाला ही है. 22 अक्तूबर 09 को इसे अधिकृत रूप से तमाम विश्व में जारी किया जा रहा है. इसके कुछ शानदार पहलुओं के बारे में तथा इसमें कैसे काम करें इत्यादि के बारे में जीवंत वेबकास्टों की शृंखला 23 से 30 अक्तूबर 09 के बीच चलेगी. विवरण निम्न है –(चित्र बड़े आकार में देखने के लिए उस पर क्लिक करें)23 अक्तूबर - विंडोज 7 खेल-खेल में – अभिषेक कांत व अन्य विशेषज्ञ 26 अक्तूबर - विंडोज 7 परफ़ॉर्मेंस के नये आयाम – शांतनु कौशिक 27 अक्तूबर - विंडोज 7 इंटरनेट व होम नेटवर्किंग – एलन बी तुलादार व रमेश के. 28 अक्तूबर - विंडोज 7 में हिन्दी में काम कैसे करें – रविशंकर श्रीवास्तव 29 अक्तूबर - विंडोज 7 मनोरंजन व मीडिया सेंटर – सौमित्र सेनगुप्ता 30 अक्तूबर - विंडोज 7 एसेंशियल्स: विंडोज लाइव…

आपकी एक अदद टिप्पणी की कीमत महज़ पांच 5.00 रुपए?

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वैसे तो हर पोस्ट की हर टिप्पणी (स्पैम को छोड़ दें) अमूल्य और अनमोल होती है, मगर किसी ब्लॉग पर आपकी एक टिप्पणी के बदले पाँच रुपए का दान दिया जा रहा है तो वहाँ आप एक टिप्पणी तो दे ही सकते हैं?अनघ देसाई इस दफ़ा दीपावली कुछ खास तरीके से मना रहे हैं. वे अपने ब्लॉग पर 15 अक्तूबर से 19 अक्तूबर 2009 के बीच मिले प्रत्येक टिप्पणी के बदले 5 रुपए का दान देंगे. इसी तरह इस दौरान फेसबुक/ईमेल/ट्विटर पर (स्पैम नहीं) मिले शुभकामना संदेशों पर वे 0.25 रुपए का दान देंगे तथा प्रत्येक एसएमएस पर वे 0.50 रुपए का दान देंगे. उनके इस विचार को लोगों ने हाथों हाथ लिया है और बहुत से लोग अनघ के साथ दान देने के लिए जुड़ गए हैं और मामला इन पंक्तियों के लिखे जाने तक रुपए 17.50 प्रति शुभकामना संदेश तक जा चुका है. ये दान बालिका शिक्षा (एजुकेटिंग गर्ल चाइल्ड) के लिए दिए जाएंगे.अनघ के इस पोस्ट पर टिप्पणी करेंअनघ को ईमेल से शुभकामना संदेश भेजें. ईमेल पता उनके प्रोफ़ाइल से यहाँ से हासिल करें.ट्विटर पर शुभकामना संदेश #deepwish विषय से भेजें (अपने ट्विटर पोस्ट में #deepwish जोड़ दें बस). अनघ का ट्विटर पृष्ठबूंद बूंद से घट भरता…

भारत में कार्पोरेट ब्लॉगिंग

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आदमी की (सद्यः संशोधित?) मूल भूत आवश्यकताओं में अब शामिल हैं – रोटी, कपड़ा, मकान और जी हाँ, सही पहचाना - ब्लॉगिंग! बहुत पहले की मजाक में कही गई बात अब सत्य प्रतीत होती दीखती है. आदमी (और, औरतों की भी,) की मूलभूत आवश्यकताओं में अब रोटी, कपड़ा और मकान के साथ साथ इंटरनेट तो जुड़ ही गया है. फ़िनलैण्ड विश्व का ऐसा पहला देश बन गया है जहाँ इंटरनेट – वो भी 1 एमबीपीएस ब्रॉडबैण्ड को अब व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताओं में शामिल मान लिया गया है और इसके लिए क़ानून बना दिया गया है. इधर, इंटरनेट से ब्लॉगिंग जुड़ा हुआ है. तो हम आगे क्यों न एक बात मजाक में ही सही, कहें – आदमी की मूल भूत आवश्यकताओं में अब शामिल हैं – रोटी, कपड़ा, मकान और ब्लॉगिंग!और, जब चहुँओर ब्लॉगिंग की धूम मच रही हो तो कार्पोरेट जगत में, कार्पोरेट स्टाइल में कार्पोरेट ब्लॉगिंग क्यों नहीं? कार्पोरेट ब्लॉगिंग नाम के किताब में राजीव करवाल और प्रीति चतुर्वेदी ने इसी विषय को केंद्र में रखते हुए बहुत सी काम की बातें बताईं हैं. डेढ़ सौ पृष्ठों की इस किताब का मूल्य तीन सौ पैंतालीस रुपए है जो कि थोड़ा ज्यादा प्रतीत होता है, मगर जब बात कार्पोरेट…

आपको अपने आप पर भरोसा है या नहीं?

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--.ये भरोसे का बड़ा चक्कर है. आपको भले ही अपने आप पर भरोसा न हो, मगर दुनिया है कि आप पर पूरा भरोसा करती है. ठीक वैसे ही जैसे आप अपने बच्चे के ऊपर भरोसा करते हैं कि वो बड़ा होकर पढ़ लिख कर आई.ए.एस. अफ़सर बनेगा. बड़ा नाम और नांवा कमाएगा. भरोसा बाद में टूटे या रहे – जिसके कि बहुतेरे कारक और कारण हो सकते हैं, जैसे कि उसे तो बड़ा होकर सलमान बनने का भरोसा है जिसे आपका आई.ए.एस अफ़सर बनने-बनाने का भरोसा खुद टूटते टूटते तोड़ देगा. मगर, जैसा भी हो, भरोसा अभी तो बना रहता है ना! पालक के मन में भी और बालक के मन में भी.मुझे भी अपने आप पर भरोसा भले ही नहीं हो, मगर मैं भी दूसरों पर पूरा भरोसा करता हूं, और दूसरे भी अपने आप पर भले न करें, मुझ पर पूरा, पक्का भरोसा करते हैं. वैसे, भरोसा रिलेटिव होता है. सापेक्ष. निरपेक्ष वो कतई नहीं होता. किसी का भरोसा तोड़ने टूटने के उतने ही ज्यादा चांसेज होते हैं जितना ज्यादा भरोसा होता है. किसी शासकीय कार्यालय में किसी काम के लिए जाओ तो आपको अपने काम के होने का कितना भरोसा होता है? यदि कोई ईमानदार अफ़सर मिल गया तो काम होने को भरोसा तो नहीं होता है, मगर इस बात का पूरा …

अगर गिनती के दस लोग भी मेरा ब्लॉग पढ़ते रहें तो मैं ताउम्र ब्लॉग लिखता रहूंगा – राजकुमार केसवानी

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देश-विदेश के जाने-माने पत्रकार-संपादक-स्तंभकार राजकुमार केसवानी ताज़ा-ताज़ा हिन्दी ब्लॉग जगत में कूदे हैं. बाजे वाली गली नाम का उनका हिन्दी ब्लॉग देखते ही देखते अच्छा खासा चर्चित हो गया है. संगीत को ओढ़ते बिछाते फिरते और संगीत में रमते से प्रतीत होते राजकुमार केसवानी के संग्रह में पुराने जमाने के विनाइल और लाख के बने एलपी, एसपी, ईपी के हजारों रेकार्ड हैं. उनके पास अभी भी चालू हालत में गियर से चलने वाला बाजा है जिसे चाभी भरकर बजाया जाता है. इसमें गाना सीधे सुई-और-डायाफ्राम से घूमते रेकार्ड के जरिए बजता है. ध्वनि पैदा करने के लिए इसमें इलेक्ट्रॉनिक सर्किटरी नहीं है – और इस वजह से जादुई संगीत का वातावरण पैदा होता है. जिन्होंने रूबरू इसे सुना है (मैंने अभी अभी ही इसे सुना है,), वही इसके जादू को महसूस कर सकते हैं.
हाल ही में राजकुमार केसवानी से लंबी बातचीत हुई. उनके हिन्दी ब्लॉग जगत के थोड़े से समय के अनुभव तथा उनके प्रिय शगल संगीत पर हुई बातचीत और उनके बाबा आदम के जमाने के मगर अभी भी बढ़िया काम कर रहे चाबी वाले बाजे पर बजते गाने के बेहद दिलचस्प वीडियो आप भी देखें -


भाग 1 :  हिन्दी ब्लॉग …

सब ज़ीरो से सुपर हीरो : बनवारी लाल चौकसे की कहानी उनकी अपनी जुबानी

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वैसे तो बनवारी लाल चौकसे की आत्मकथात्मक किताब ‘श्रमिक से पद्मश्री’ स्मरणिका के रूप में ज्यादा नजर आती है मगर स्वेट मार्डेनों, दीपक चोपड़ाओं और जमात में ताज़ा तरीन शामिल हुए रश्मि बंसलों जैसे तमाम प्रेरणास्पद लेखकों की तमाम किताबों के जैसी प्रेरणा यह एक किताब पाठक के मन में भर सकती है. किताब बहुत ही सहज और बेहद सरल भाषा में लिखी गई है. शुरुआत के पन्नों में कुछ अनावश्यक से बधाई संदेशों को स्थान दे दिया गया है, और आखिरी के पृष्ठों में चित्रों के चयन में तारतम्यता नहीं बरती गई है, बावजूद इसके पूरी किताब पठनीय और बेहद प्रेरणास्पद है. किताब में बनवारी लाल चौकसे ने ये बताया है कि किस तरह उन्होंने एक दिहाड़ी श्रमिक – दैनिक वेतनभोगी मजदूर के रूप में अपना कैरियर एक नामालूम सी प्राइवेट कंपनी में प्रारंभ किया और अपनी लगन, अपनी क्षमता, नित्य सीखने की ललक, हर कार्य में, हर जाब में अपना शतप्रतिशत झोंक देने की प्रतिबद्धता के बल पर न सिर्फ बहुत ही कम समय में बीएचईएल व भारत के सर्वोच्च श्रम पुरस्कारों को प्राप्त किया, बल्कि भारत सरकार के बेहद प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार भी प्राप्त किया. अगर आप समझते हैं क…

द रीअल थिंग…

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यदा कदा हम सभी का सामना रीअल, वास्तविक चीजों से हो जाता है, और हम सन्न खड़े देखते रह जाते हैं. ऐसे ही कुछ वास्तविक चीजों से सामना पिछले दिनों अनायास हो गया. आप भी दर्शन-लाभ लें. यह है द रीअल कैटल क्लास -पौराणिक महत्व की, दैव नगरी – उज्जयिनी के रेलवे विश्रामगृह का 30 सितम्बर 09 की रात्रि का चित्र है यह. बताने की जरूरत नहीं कि हम भी शामिल थे रीअल कैटल क्लास में – झाबुआ तक के रात्रिकालीन सफर के दौरान क्षणिक विश्राम की तलाश में :)और, यह हैं  असली मदर मैरी.एक और एंगल से नहीं सराहेंगे?--(सभी चित्र – सौजन्य :  रेखा)

15 लाख रुपए की गाँधी की लँगोटी

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हमारी नामी कंपनी 'सो फ्लां' ने एक लिमिटेड एडीशन गाँधी लँगोटी बाजार में पेश किया है. लिमिटेड एडीशन की सिर्फ 3000 लँगोटियाँ तैयार की गई हैं. इन लँगोटियों की ढेरों ख़ासियतें हैं जो इन्हें व इनके खरीदारों और प्रयोगकर्ताओं को विशिष्ट बनाती हैं. पहली खासियत तो ये है  कि इन्हें अति विशिष्ट किस्म के खद्दर से बनाया गया है. वही खद्दर, जो देश के नेताओं को आजादी के पहले और आजादी के बाद बहुत ही मुफीद बैठता आ रहा है अब तक. खद्दर के लिए कच्चा माल खासतौर पर ऑस्ट्रेलिया के वर्जिन जंगलों से आयातित किया गया है. इसकी रुई प्राकृतिक रूप से उगे पौधों से तैयार की गई है और पूर्णतः जैविक पैदावार है, न कि रासायनिक और कृत्रिम रूप से उगी. इसे खास तौर पर डिजाइन किए गए हीरा मोती माणिक्य मढ़े करघे की सहायता से हाथ से बुना गया है. लँगोटी का डिजाइन प्रसिद्ध फ्रेंच फ़ैशन डिजाइनर 'विव सेंट फोरें' द्वारा रीडिजाइन कर बनाया गया है.
इसके बॉर्डर में विशेष किस्म के प्लेटिनम अलॉय का प्रयोग किया गया है जिससे लँगोटी सुन्दर, आकर्षक तो दिखती ही है, इस्तेमाल में नर्म और मुलायम भी होती है. इसकी ड्यूरेबिलिटी के लिए व…

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