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August, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

थकेले दिग्गजों की तरफ से आपके लिए ब्लॉगिंग टिप्स...

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वैसे तो अपने तमाम हिन्दी चिट्ठाकारों ने समय समय पर ब्लॉग उपदेश दिए हैं कि चिट्ठाकारी में क्या करो और क्या न करो. परंतु अभी हाल ही में दो सुप्रसिद्ध, शीर्ष के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले भारतीय अंग्रेज़ी-भाषी ब्लॉगरों की गिनती में शामिल, अमित वर्मा (इंडिया अनकट) तथा अर्नाब –ग्रेटबांग (रेंडम थॉट्स ऑफ डिमेंटेड माइंड) ने अपने अपने ब्लॉगों में कुछ काम के टिप्स दिए हैं. उनके टिप्स यहाँ दिए जा रहे हैं. अमित वर्मा से विशेष अनुमति ली गई है तथा ग्रेटबांग के चिट्ठे की सामग्री का क्रियेटिव कामन्स के अंतर्गत प्रयोग किया गया है.तो, सबसे पहले, पहली बात. पेंगुइन की एक किताब – गेट स्मार्ट – राइटिंग स्किल्स के लिए लिखे अपने लेख में अमित वर्मा कहते हैं:ब्लॉग लेखन मनुष्य की सर्जनात्मकता का सर्वाधिक आनंददायी पहलू है. एक चिट्ठाकार पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं होता कि वो क्या लिखे, कैसे लिखे, कितना लिखे. आप चार शब्दों में अपना पोस्ट समेट सकते हैं तो चालीस पेज भी आपके लिए कम हो सकते हैं. इसी तरह, न तो विषयों पर कोई रोक है, और न आपकी शैली पर कोई टोक.(अमित वर्मा – चित्र – साभार http://labnol.org )अमित अपने ब्ल…

आइए, अपन भी खारिज करें चारसौबीस को

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चार सौ बीस की संख्या से कौन सबसे ज्यादा भय खाता है? चार सौ बीस के अंक से सबसे ज्यादा आतंकित कौन रहता है? चार सौ बीस का आंकड़ा दिन रात जागते सोते उठते बैठते किसे सबसे ज्यादा परेशान करता है?जाहिर है, भारतीय नेताओं को. इसीलिए, आखिरकार लोकसभा में चार सौ बीस नंबर की कुर्सी ही ग़ायब कर दी गई. लोक सभा में कुर्सियों के नंबर सिस्टम से चार सौ बीस की संख्या ही निकाल बाहर कर दी गई. चारसौबीस नंबर की कुर्सी को चारसौउन्नीस ए कर दिया गया है. फिर अगले नंबर की कुर्सी का क्रमांक चारसौ इक्कीस है. राज्य सभा और दीगर राज्यों की विधान सभाओं में भी आगे यही हाल होने वाला है लगता है. फिर दीगर सरकारी कार्यालयों, भवन, सड़क इत्यादि का नंबर जल्द ही आ जाएगा.अब ये तो मामला एक माँद में दो तलवार या एक पिंजरे में दो शेर जैसा लगता है. या तो जनप्रतिनिधि चारसौबीस रहे या उसकी कुर्सी का नंबर. अब जबकि जग जाहिर है, दुनिया भर के जनप्रतिनिधियों का चारसौबीसी से चोलीदामन का साथ है, तो उनकी कुर्सी कैसे चारसौबीस हो सकती है भला? फिर, अंधे को अंधा कहना किसे अच्छा लगता है?अब यह नंबर हम सबको – जनता को भी खारिज कर देना चाहिए. वाहन का नंब…

एमएस ऑफ़िस 2010 – तकनीकी पूर्वावलोकन

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दुनिया भर के तमाम कम्प्यूटरों पर ऑफ़िस अनुप्रयोगों में पहले नंबर पर सदा सर्वदा से दौड़ रहे एमएस ऑफ़िस का नया ताज़ा संस्करण – ऑफ़िस 2010 टेक्नीकल प्रीव्यू लगता है एक और लंबी कूद लगाने वाला है जिससे कि आने वाले बहुत समय तक उनके प्रतिद्वंद्वी और भी पीछे ही रहें. वैसे तो बहुत सी तमाम खूबियाँ हैं ऑफ़िस 2010 तकनीकी पूर्वावलोकन संस्करण में. इसके पूर्ण संस्करण में कुछ और खूबियों और सुविधाओं की उम्मीद तो कर ही सकते हैं. विंडोज़ 7 (पी4, हायपरथ्रेडिंग 3 गीगाहर्त्ज, 1 जीबी रॅम ) पर वर्ड 2010 को चालू करने हेतु क्लिक करने पर इसका स्प्लैश स्क्रीन 1 सेकण्ड से कम में नमूदार होता है और पाँच सेकण्ड के भीतर प्रोग्राम आपकी सेवा में हाजिर. वाह! क्या स्पीड है.काम करने हेतु सुविधाओं में अच्छा खासा इजाफ़ा किया गया है. आप वर्ड (माने ऑफ़िस अनुप्रयोगों – मसलन एक्सेल, पावरपाइंट) के भीतर से ही स्क्रीनशॉट खींच सकते हैं, सीधे लाइव राइटर की तरह इस्तेमाल करके ब्लॉग पोस्ट कर सकते हैं (बहुत कुछ साफ सुथरे एचटीएमएल के साथ) दस्तावेज़ों (प्रेजेन्टेशन इत्यादि में) में वीडियो एम्बेड कर सकते हैं तथा न जाने और क्या क्या. दस्ताव…

हिन्दी वालों के लिए काम का, मुफ़्त औजार - Bilingual Smart tag dictionaries (English-Hindi)

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यदि आप एमएस वर्ड (एक्सेल, पावरपाइंट, आउटलुक इत्यादि में भी) में हिन्दी या अंग्रेज़ी में काम करते हैं तो बाइलिंग्वल स्मार्ट टैग अंग्रेज़ी हिन्दी डिक्शनरी नाम का मुफ़्त का, द्विभाषी औजार आपके बहुत काम का हो सकता है. यदि आप अंग्रेज़ी से हिन्दी अनुवाद में रुचि रखते हैं, तब तो आपके लिए यह बेहतरीन, मदद करने वाला औजार बेहद काम का है जो आपको शब्दों के संदर्भानुसार अर्थों का चयन करने की सुविधा देता है. वैसे तो यह औजार द्विभाषी है – यानी अंग्रेज़ी हिन्दी दोनों में ही काम करता है, मगर हिन्दी से अंग्रेज़ी में यह उतना उन्नत नहीं है जितना अंग्रेज़ी से हिन्दी में. इसका अंग्रेज़ी शब्द भंडार अच्छा खासा है और अनुवादों में अच्छी खासी सहायता तो मिलती ही है, कार्य भी आसानी से और जल्द हो जाता है.इसे प्रयोग करना बेहद आसान है. इसे इंस्टाल करने के बाद इसे एमएस ऑफ़िस अनुप्रयोगों में कुछ आसान चरणों से सक्षम करना होता है, जिसकी चरण-दर-चरण चित्रमय जानकारी इसके इंस्टालर फ़ाइल के साथ उपलब्ध पीडीएफ़ तथा डॉक फ़ाइल में उपलब्ध है.एक उदाहरण आपके सामने है – दो वाक्य हैं – एक अंग्रेज़ी में और एक हिन्दी में. आप देखेंगे कि …

ये वेबिनार क्या है ये वेबिनार?

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अभी तक तो सेमिनार से वास्ता पड़ा था. धन्यवाद इंटरनेट और इंटरनेट तकनॉलाज़ी. अब आप वेबिनार के जरिए घर बैठे अपने कम्प्यूटर पर वेब यानी इंटरनेट के जरिए तमाम तरह के सेमिनार जैसे आयोजनों का न सिर्फ लुत्फ़ उठा सकते हैं, बल्कि बहुत से शैक्षणिक सेमिनारों – ओह, माफ़ कीजिएगा, वेबिनारों से सीख भी सकते हैं.हाथ कंगन को आरसी क्या? यदि आप अपने कम्प्यूटर पर लिनक्स संस्थापित कर उसे चलाना सीखना चाहते हैं, तो 19 अगस्त का दिन बुकमार्क कर लें.भारत की लोकप्रिय कम्प्यूटिंग पत्रिका डिजिट 19 अगस्त को भारतीय समयानुसार शाम 3 बजे ‘लिनक्स बेसिक्स पर संपूर्ण गाइड’ विषय पर वेबिनार आयोजित कर रही है. यह रहा उनका निमंत्रण -This wednesday Digit brings to you a webinar - The complete guide to Linux Basics.About the Webinar:The Linux webinar will be a guide to setting up Linux on a target machine using a number of approaches Including an installation CD/DVD and dual booting with another operating systems.The webinar will have step-by-step screenshots for each of these and some basics on getting started, including setting …

गुमशुदा की तलाश : अक्षरग्राम, सर्वज्ञ, परिचर्चा – जहां कहीं भी हो चले आओ, तुम्हें कोई कुछ नहीं कहेगा.

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इंटरनेट पर हिन्दी के शुरूआती दिनों में हिन्दी के पाँव जमाने में कुछ खूबसूरत प्रकल्पों का बड़ा हाथ रहा है. इनमें अक्षरग्राम, उसका सर्वज्ञ, अनुगूंज तथा परिचर्चा का नाम सर्वोपरि रहा है. अक्षरग्राम में बहुत सी सामग्री है, जो हिन्दी और हिन्दी वालों के लिए बहुत काम की है. सर्वज्ञ में हिन्दी में लिखने पढ़ने की तकनीकी समस्याओं का तमाम समाधान उसमें संग्रहित आलेखों और कड़ियों में है. इसी प्रकार परिचर्चा फोरम में हिन्दी की तकनालाजी से लेकर घिसे-पिटे चुटकुले तक यानी हर मामले में परिसंवाद का अच्छा खासा और काम का संग्रह था. और, एक समय अक्षरग्राम साइट माइक्रोसॉफ्ट नेटवर्क तथा नवभारत टाइम्स के बाद तीसरे नंबर पर था. बीबीसी हिन्दी का नंबर 8 वां तथा वेबदुनिया हिन्दी का नंबर 10 वां था!अभी ये सभी मृत-प्राय: पड़े हैं. नारद जी का भी स्वास्थ्य ठीक नहीं है. क्या इनमें पुन: जान नहीं फूंका जाना चाहिए? इसी तरह से चिट्ठाविश्व था हिन्दी का पहला चिट्ठा-संकलक. (देखें इसका जुलाई 2004 का पृष्ठ!) इसे भी ऐतिहासिक दृष्टि से ही सही, कहीं पर पुनर्जीवित नहीं किया जाना चाहिए?क्या ये प्रकल्प चिट्ठाजगत् से जुड़ सकते हैं? या इन…

अमंगलकारी मंगल फ़ॉन्ट

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क्या आप अपने कम्प्यूटर के डिफ़ॉल्ट मंगल फ़ॉन्ट से परेशान हैं? देखें कि इसका रूप बदलने के लिए क्या कुछ किया जा सकता है-

लिनक्स गीक इसीलिए विंडोज़ को गरियाते हैं. जहाँ आप लिनक्स में सिस्टम फ़ॉन्ट को मनमर्जी का चुन सकते हैं, विंडोज पर यदि आप यूनिकोड हिन्दी में काम करना चाहते हैं तो सिस्टम के डिफ़ॉल्ट फ़ॉन्ट मंगल (जो यूआई या अन्य अनुप्रयोगों में डिफ़ॉल्ट तय होता है) को बदल ही नहीं सकते. विंडोज के यूनिकोड फ़ॉन्ट प्रदर्शक यूनिस्क्राइब में हिन्दी के लिए डिफ़ॉल्ट में मंगल फ़ॉन्ट ही तय है, और इसे बदला नहीं जा सकता! यदि आप कुछ तोड़ निकालते हैं, तो ये विंडोज़ के लाइसेंसिंग से छेड़छाड़ होगी. एमएस वर्ड जैसे अनुप्रयोगों में आप संपादन व पाठ के लिए तथा नए आधुनिक ब्राउज़रों में प्रदर्शन हेतु दूसरे अच्छे हिन्दी के यूनिकोड फ़ॉन्ट ले तो सकते हैं, पर फिर बात वही ढाक के तीन पात जैसी होगी यदि आपको नोटपैड++ जैसे अनुप्रयोगों पर काम करना होगा.

पिछले दिनों नोटपैड++ पर विंडोज़ एक्सपी पर काम करते समय नुक्ते, बिंदी इत्यादि प्रदर्शन की तमाम समस्याएँ आईं. समस्या नोटपैड++ पर नहीं थी, बल्कि मंगल फ़ॉन्ट में थी. छोटे आकार…

तेरे मिस कॉल ने तो बड़ा चूना लगा दिया मेरे दोस्त!

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आमतौर पर जब आपके मोबाइल में अज्ञात नंबर का मिस कॉल आता है तो आप क्या करते हैं? यदि आप बिजनेस में हैं, पत्रकार हैं, या सदैव संपर्क में रहने वालों में से हैं तो संभावित ग्राहक, समाचार या भूले बिसरे मित्र से गपशप के नाम पर अकसर उस मिस कॉल पर फोन लगाकर पूछते हैं कि भइए, आपने मुझे फोन लगाया था तो आप कौन हैं, क्या काम था या फिर कहीं गलती से तो नहीं लगाया था?पर, अब अगर आपके पास अज्ञात नंबर का मिस कॉल आए, तो उस अज्ञात नंबर पर वापस फोन कर तहकीकात करने से पहले दोबारा सोच लें.एफ़-सेक्यूर ब्लॉग के एक लेख  में मिस कॉल के जरिए मासूम मोबाइल प्रयोक्ताओं को चूना लगाने के खेल का भंडाफोड़ किया गया है!शातिर लोग मोबाइल नंबरों का प्रीमियम खाता खोलते हैं जिसमें इनकमिंग कॉल के लिए (मानो कि आप कोई सेवा ले रहे हैं – जैसे कि अपना ज्योतिष फल जानना चाह रहे हैं… तो इसके लिए प्रति मिनट आपको पच्चीस रुपए भुगतान करने होंगे जिसकी बिलिंग आपके मोबाइल फोन में होगी) कॉल करने वाले मोबाइल फोन के खाते से तगड़ी रकम कट कर उनके खाते में जमा हो जाती है. अब वे किसी स्वचालित तरीके से उस प्रीमियम नंबर से बेतरतीब तरीके से लोगों को मि…

हिन्दी में तीन लाख ब्लॉग?

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ये मैं नहीं कह रहा. आलोक तोमर ने अपने ब्लॉग में ने ये खुलासा किया है -“….मगर जहां तक नेट का समाज नहीं होने की बात है, वहां नेट से रोजी रोटी चलाने के कारण मैं कुछ तथ्य उनके सामने पेश करना चाहता हूं। ब्लॉगर और वर्ल्ड प्रेस नाम की दो मुफ्त ब्लॉगिंग सेवाओं के जरिए भारत में ही करीब नौ लाख ब्लॉग बने हैें और उनमें से तीन लाख हिंदी में हैं। एक ब्लॉग को एक दिन में ज्यादा नहीं, अगर दस लोग भी पढ़ते हैं तो तीन करोड़ का समाज तो ये हो गया।…”क्या सचमुच? चिट्ठा जगत् की मानें तो हम तो आंकड़ा दस हजार के पार जाने की आस लगाए बैठे थे और साल के अंत तक पच्चीस हजार को छूने की भविष्यवाणी किए बैठे थे. वैसे, रेडिफ, वेब-दुनिया, रोमन हिन्दी इत्यादि इत्यादि के हिन्दी ब्लॉगों को भी मिला दें तो क्या आंकड़ा 3 लाख तक पार हो सकता है? मुझे तो फिर भी नहीं लगता.आपका क्या विचार है? आलोक तोमर के ब्लॉग पर टिप्पणी बंद है, अन्यथा वहीं उनसे पूछते कि महोदय, आपने ये चमत्कृत कर देने वाले आंकड़े कहां से प्राप्त किए?और, अगर ये आंकड़े वाकई सही हैं, तब तो हिन्दी ब्लॉग जगत् के लिए है – पा र् टी टा इ म!

एक मच्छर साला आदमी को इम्यून बना देता है!

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कहावत है कि घूरे के भी दिन फिरते हैं. मच्छरों के भी दिन फिर गए हैं. अब तक तो हम सभी मच्छर भगाने के, मच्छर मारने के तमाम जतन करते फिरते थे. मच्छरदानी से लेकर आलआउट और बिजली के रैकेट, फ़ॉगिंग मशीन से लेकर गम्बूजिया मछली तक न जाने क्या क्या उपाय करते रहते थे और ओडोमॉस लगा लगाकर अपने चेहरे और हाथ पैरों का सत्यानाश करते रहते थे. यही मच्छर अब हमारे वैक्सीनेशन के काम आएंगे. अभी तो मलेरिया के वैक्सीन तैयार हुए हैं, जरा ठहरें. आगे मल्टीपल बीमारियों – जिनमें सर्दी-जुकाम से लेकर टाइफ़ाइड-कुकुर खांसी तक हो सकते हैं, उनके वैक्सीन मच्छरों के डंक से मिलने लगेंगे.मच्छरों के लिए ये बयार उलटी होगी. अचानक ही वे सबके प्रिय हो जाएंगे. कोई उन्हें हिजड़ों की तरह ताली मारकर अब नहीं मारेगा. बल्कि पुचकारेगा – मच्छर-मियाँ, आओ, जरा हमें भी काट खाओ. मगर होगा ये कि मच्छर-मियाँ आपको काटेंगे ही नहीं. उनका मूड ही नहीं होगा काटने को. या फिर, वे व्यक्ति की शख्सियत देख देख कर काटा करेंगे – जैसे कि ऐश्वर्या या हृतिक जैसों के पीछे तो मच्छर पड़े रहेंगे, या फिर सरकार में बैठे नेताओं के पीछे मच्छरों को जबर्दस्ती पीछे पड़वाया…

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