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April, 2009 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

निन्यान्बे चीजों की हिट लिस्ट

अमित ने अपने फालतू बड़बड़ में 99 चीजों की हिटलिस्ट दी. हिटलिस्ट बढ़िया लगी और लगा कि इसका उत्तर तो दिया जाना चाहिए. नियमानुसार मैं भी बोल्ड या इटैलिक्स में अपना उत्तर भर सकता था, मगर उससे बात नहीं बनती. कभी कभी चीजों को विस्तार से भी बताना पड़ता है. अमित ने किसी को टैग नहीं किया था – यानी टैगिंग स्वयंसेवी आधार पर था. मैं हिन्दी समेत विश्व के तमाम भाषाओं के हर आम और ख़ास (ब्रेक द लैंगुएज बैरियर, डोंट यू?) ब्लॉगर को टैग करता हूं. मेरी सूची कुछ यूं है -अपना ब्लॉग आरंभ किया – हाँ, किया है तो? अब जब हर टॉम डिक और हैरी का ब्लॉग है तो? तारों की छांव में नींद ली – हाँ, रोज लेते हैं. छत ऊपर से टूट गया है. खपरैल उखड़ गया है. संगीत बैन्ड में कोई वाद्य यंत्र बजाया – मंदी में भइए, यहाँ तो अपना ही बैण्ड बज रहा है. अमेरिका के हवाई द्वीपों की सैर करी – जावा सुमात्रा की कर लें? फिर सोचेंगे. उल्का वर्षा देखी – रोज ही देख रहे हैं. अपने बॉस के रैन्ट की ऊल्का (उ पर दम लगाया है...) वर्षा. बीवी के नैगिंग की ऊल्का वर्षा. बच्चों के फरमाइशों की ऊल्का वर्षा... औकात से अधिक दान दिया – औकात की बात करते हैं? हमारी…

स्मार्ट दिखो, अच्छे और ढेर टिप्पणी पाओ

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स्मार्ट लिखने से कुछ नहीं होगा. दिखने से होगा. अपने हाव-भाव-आचरण-व्यवहार में री-बॉकिया और अदिदासिया व्यवहार दिखाएँ और झमाझम टिप्पणियों की बरसात पाएँ.व्यंज़ल-------.वक्त वाकई बहुत स्मार्ट निकला ।
वो गंवई तो बड़ा स्मार्ट निकला ।। सोचा था यूं ही गच्चा दे जाऊंगा ।
पर हालात साला स्मार्ट निकला ।। वहम था कौन समझेगा नारों को ।
हर वोटर अच्छा स्मार्ट निकला ।। उत्तर वैसे यूं तो छटांक भर था ।
प्रश्न मगर ग़जब स्मार्ट निकला ।। बीते समय को याद करे है रवि ।
दर्द सहने में कैसे स्मार्ट निकला ।।----.(समाचार कतरन – साभार, दैनिक भास्कर)

थकेला वोट

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मैं आपका फॉर्मर पीयेम बोल रहा हूं,
आज नेता लोगों की पॉल खोल रहा हूं.
दिल्ली इंडिया की राजधानी है,
मगर यहाँ बिजली है ना पानी है. सब अपना भला करते हैं,
इंडिया के ग़रीब मरते रहें.
हमारे बच्चे अमेरिका में पढ़ते हैं,
इनकम टॅक्स वालों से हम क्या डरते हैं? पाँच साल बाद वोटर के पास गये, '
इंडिया शाइनिंग' की मिठास लिए.
फिल्मी सितारों ने भी डाइलॉग मारे,
पता नहीं हम फिर क्यूँ हारे? एग्ज़िट पोल वालों का कमाल देखा,
रिसर्च के नाम में कुछ भी फेंका.
आंध्रा में आ गयी आँधी,
टीवी चॅनेल्स की हो गयी चाँदी. पॉलिटिक्स में वो सितारे जिन्हें काम नहीं,
बंबई में अब एमपी गोविंदा, राम नहीं.
बंबई वो नगरी जहाँ फिल्में बनती हैं,
और एक्टर धर्मेंन्द्र की दोनों पत्नी हैं.
पत्नी वो जो पॉलिटीशियन को ज़रूरी है,
एक फॅमिली में दो सीट की हज़ूरी है.
मेरा कभी सक्सेस्फुल रोमॅन्स होता,
तो आज मेरे बेटे को चान्स होता. राहुल बेटे, एक अच्छी अड्वाइज़ है,
अब जल्दी से ढूंढ कर एक वाइफ ले.
चाहे कश्मीर से या कन्याकुमारी से,
मगर कर किसी इंडियन नारी से.  इंडिया के वोटर अजीब…

प्रॉबेबिलिटी टू बिकम पी.एम…

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सुबह सुबह मेरी दाढ़ी बनाते समय मेरे मुहल्ले के नाई ने जब मुझसे कहा कि वो पीएम बनने के बारे में गंभीरता से विचार कर रहा है तो अचानक मैं चौंक पड़ा और इस वजह से उसका उस्तुरा मेरे चेहरे पर एक कट मार गया. खून की बहती बूंदों को फिटकरी रगड़ कर बंद करने की नाकाम कोशिश करते उसने कहा – अरे साहब, मैंने अपने पीएम बनने के सपने की जरा सी बात कह दी तो इतना बड़ा हादसा हो गया. अगर मैं सचमुच पीएम बन जाऊं तो?मैंने उसे विश्वास दिलाया कि वो कतई कमजोर और बंधुआ मार्का नहीं रहेगा. उसके पास कम से कम उसका उस्तुरा तो रहेगा. मौके बे मौके लहराने के लिए ताकि कोई उसे कमजोर न कह सके और यदि उसे कमजोर कह भी दिया तो उसपर उस्तुरा चला कर दिखा देगा कि वो कमजोर कतई नहीं है. और, हाथ में उस्तुरा लेकर वो बंधुआ तो किसी सूरत में नहीं हो सकता – क्योंकि अपने उस्तुरे से वो हर बंधन काटने के लिए हर हमेशा तैयार रहेगा.वह खुश हो गया और मेरे जख्म पर और भी जोर से फिटकरी रगड़ने लगा जो उस वक्त जाने क्यों नमक की माफिक प्रतीत हो रहा था.रक्त स्राव रोकने के लिए अपने जख़्म को रूमाल से दबाए हुए वापस घर की ओर आ रहा था तो याद आया कि मुहल्ले के धोब…

एक भारतीय {अ}सत्यकथा

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(प्रस्तुत है हम देसियों के बीच एक बेहद अग्रेषित मूल अंग्रेज़ी ईमेल फारवर्ड [तथा चिट्ठों पर बेहद कॉपी-पेस्ट] का हिन्दी अनुवाद. मूल (अज्ञात?) लेखक को धन्यवाद सहित)पुरानी कहानी:
तमाम गर्मियां चींटी जुटी रही और उसने अपने रहने के लिए बढ़िया सा बिल बनाया और उसमें ढेर सारी खाने की चीजें एकत्र कर रख ली ताकि ठंड में काम आवे. चिड्डा ये देखकर हंसा और बोला चींटी तू मूर्ख है. देखो मैं दिनभर कैसे मजे में खाता पीता नाचता कूदता और मस्ती करता रहता हूं. ठंड का मौसम आया. चींटी अपने बिल में सुरक्षित थी. उसके पास खाने पीने की चीजों की कोई कमी नहीं थी. चिड्डे के पास न घर था न भोजन व्यवस्था. ठंड में ठिठुरकर उसने अपनी जान दे दी.
भारतीय संस्करण:
तमाम गर्मियां चींटी जुटी रही और उसने अपने रहने के लिए बढ़िया सा बिल बनाया और उसमें ढेर सारी खाने की चीजें एकत्र कर रख ली ताकि ठंड में काम आवे. चिड्डा ये देखकर हंसा और बोला चींटी तू मूर्ख है. देखो मैं दिनभर कैसे मजे में खाता पीता नाचता कूदता और मस्ती करता रहता हूं. सर्दी का मौसम आया तो ठंड में ठिठुरते चिड्डे ने प्रेस-कॉफ्रेंस बुलाया और मांग रखी कि जब दूसरे ठंड में भूखे-प्…

तमाम विश्व के लिए एक नया नवेला लाभकारी व्यवसाय – चिट्ठाकारी

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और, वो भी शानदार, व्हाइट-कॉलर व्यवसाय. प्रतीत होता है कि चिट्ठाकारों के दिन बहुर चुके हैं. तो क्या बहुत जल्दी ही भारत में भी रेलमपेल मचेगी? वो भी हिंदी चिट्ठाकारी में?वाल स्ट्रीट जर्नल में मार्क पेन ने लिखा है कि अमरीका में आज की तारीख में उतने ही प्रोफेशनल ब्लॉगर (ब्लॉगर जिन्होंने ब्लॉगिंग को अपनी रोजी-रोटी का प्राथमिक साधन बनाया है) हैं जितने कि वहां वकील हैं. वे आगे लिखते हैं कि कम्प्यूटर प्रोग्रामरों और अग्निशामकों से कहीं ज्यादा संख्या में अब अमरीकी अपने ब्लॉगीय विचारों को छापकर आजीविका कमा रहे हैं.वे आंकड़े देते हुए बताते हैं कि 1% अमरीकी के पास ब्लॉगीय आय किसी न किसी रूप में पहुँच रही है. 2 करोड़ अमरीकी चिट्ठाकारों में से कोई 4 लाख 52 हजार ब्लॉगरों के प्राथमिक आय के संसाधन ब्लॉग लेखन ही है. यदि किसी चिट्ठे के महीने के 1 लाख से अधिक विशिष्ट पाठक होते हैं तो उसका चिट्ठा 75 हजार अमरीकी डॉलर सालाना आय अर्जित कर सकता है. बहुत से चिट्ठाकार किसी उत्पाद या सेवा के बारे में लिख-लिखकर 75 से 250 डॉलर तक आय प्राप्त करते हैं. वरिष्ठ व्यवसायिक चिट्ठाकारों जो कम्पनियों के लिए नियमित लिखते हैं…

हिन्दी कुंजीपट 300 रुपए मात्र में खरीदें

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हिन्दी चिट्ठों के नए-नए पाठकों और प्रयोक्ताओं द्वारा एक प्रश्न अकसर पूछा जाता है कि हिन्दी के कुंजीपट (हार्डवेयर हिन्दी कीबोर्ड) कहां से हासिल किए जाएं. वे पूछते हैं कि हिन्दी कुंजीपट कहीं बिकता भी है और यदि हाँ तो हिन्दी कीबोर्ड कहां से खरीदें. हिन्दी कीबोर्ड कौन सा अच्छा होता है और कौन सा खरीदना चाहिए. चूंकि कम्प्यूटर पर हिन्दी लिखने के दर्जनों आसान किस्म के तरीके हैं, और ढेरों विकल्प हैं – (माउस क्लिक के जरिए लिख सकने की भी सुविधा सहित) अत: हिन्दी कीबोर्ड बाजार में आसानी से नहीं बिकते. यदा कदा किसी कम्प्यूटर शॉप से हिन्दी के स्टीकर मिल जाते हैं, मगर वो भी सर्वाधिक प्रचलित कृतिदेव फ़ॉन्ट का.
फिर भी, मानक इनस्क्रिप्ट का हिन्दी कीबोर्ड (जिसके कीबोर्ड में हिन्दी पहले से छपा होता है – आम QWERTY कीबोर्डों की तरह) टीवीएस (तथा कुछ इक्का दुक्का अन्य कंपनी के भी) ने कुछ समय से बाजार में उतारा है, जिसे आप इनस्क्रिप्ट सीखने और उसके जरिए टच-टाइप करने के काम में आसानी से ले सकते हैं. वैसे यह आम कुंजीपट ही है, बस इसके कीबोर्ड में हिन्दी इनस्क्रिप्ट लेआउट छपा हुआ होता है. यानी इसमें आप तमाम दीगर …

मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी हिन्दी ब्लॉगों की दुनिया में कूदे

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ब्लॉगों की ताक़त लगता है अब सबको दिखाई दे रही है. बिजनेस वीक में भारत के 50 प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में एक ब्लॉगर के शामिल होने की खबर आई ही थी कि मध्यप्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान के ब्लॉग जगत में पदार्पण की सूचना भी आ गई. अच्छी बात ये है कि वे हिन्दी में ब्लॉग लिख रहे हैं. अपने शुरूआती उद्बोधन में, जाहिर है स्वर्णिम मध्य प्रदेश की कल्पना करते हुए लिखते हैं - “अत्यंत क्षोभ के साथ मैं मानता हूँ कि ‘भ्रष्टाचार’ पूरी व्यवस्था के लिए नासूर बन चुका है और इसे एक झटके में समाप्त करना किसी के लिए संभव नहीं  है परन्तु मैं विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि चरणबद्ध तरीके से इसको जड़ से  समाप्त करने के लिए मैं कृतसंकल्प हूँ |  शासन में आईटी का प्रयोग इसी लिए प्रारंभ किया गया है |  परन्तु इस संघर्ष मैं समाज के हर वर्ग को मेरा साथ देना होगा, क्योंकि मेरी कल्पना जरूर “स्वर्णिम मध्यप्रदेश” की है  परन्तु सामूहिक प्रयासों से ही इसे मूर्त रूप दिया जा सकता है|”देखते हैं शिवराज सिंह चौहान का यह ब्लॉग लेखन कितने दिनों तक जारी रहता है और कितना नियमित रह पाता है. क्या यह भी एक चुनावी प्रोपेगंडा त…

जूते की अभिलाषा

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चाह नहीं मैं नेता मंत्री के ऊपर फेंका जाऊँ, चाह नहीं प्रेस कान्फ्रेंस में किसी पत्रकार को ललचाऊँ, चाह नहीं, किसी समस्या के लिए हे हरि, किसी के काम आऊँ चाह नहीं, मजनूं के सिर पर, किसी लैला से वारा जाऊँ! मुझे पहन कर वनमाली! उस पथ चल देना तुम, संसद पथ पर देस लूटने जिस पथ जावें वीर अनेक।(श्रद्धेय माखनलाल चतुर्वेदी की आत्मा से क्षमायाचना सहित,) (चित्र – साभार : सीएवीएस संचार)वैसे, एक लट्ठ की मार्मिक अभिलाषा भी आप यहाँ पढ़ सकते हैं.

जरा सामने तो आओ छलिए...

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इंटरनेट पर विचरण करते-करते हिन्दी की एक उम्दा साइट पर निगाह पड़ी. साइट का पता है – http://unmukt.com.इस साइट की सारी सामग्री उन्मुक्त जी के चिट्ठों की है. तो, प्रकटत: यही लगा कि उन्मुक्त जी ने डोमेन नाम खरीद लिया है और अपना वेबसाइट भी बनाकर लांच कर दिया है. परंतु नाम का शीर्षक उन्मुक्त की जगह उनमुक्त दिखा रहा था. इससे लगा कि मामला कहीं गड़बड़ है, और कोई क्यों अपना नाम गलत लिखेगा?तो, मैंने आनन-फानन में उन्मुक्त जी को बधाई देने के विचार को त्यागा और, उनसे पूछा कि भई माजरा क्या है?उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई डोमेन-वोमेन नहीं खरीदा है और न ही ऐसी कोई योजना है. अलबत्ता प्रतीत होता है कि इस साइट को उनके चिट्ठे के किसी प्रशंसक ने बनाया है और वे उसमें उनकी सारी सामग्री को प्रकाशित कर रहे हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वैसे भी उनकी रचनाएँ कॉपीलेफ़्टेड रहती हैं, और उनका उपयोग किसी भी रूप में किया जा सकता है – नाम व कड़ी दे दें तो उत्तम. और, तमाम दीगर चिट्ठाकारों के विपरीत, उन्मुक्त जी ने कहा कि उन्हें खुशी हुई और गर्व महसूस हुआ कि किसी प्रशंसक ने उनके चिट्ठों पर लिखी सामग्री इस तरह…

छोटू गूगल : अब इंटरनेट पर खोजें सिर्फ शुषा या कृतिदेव फ़ॉन्ट की हिन्दी सामग्री

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यूनिकोड के आने से पहले भी हिन्दी प्रेमी इंटरनेट पर सक्रिय थे और तमाम जुगतों के जरिए अपनी रचनाएँ व कृतियाँ इंटरनेट पर प्रकाशित करते थे. बहुत सी साइटों मसलन प्रभासाक्षी.कॉम में कृतिदेव में तथा अभिव्यक्ति-हिन्दी.ऑर्ग में शुषा फ़ॉन्ट में लाखों पन्नों की हिन्दी सामग्री है.अब आप इन्हें प्रभावी तरीके से इंटरनेट पर खोज बीन कर सकते हैं व प्रयोग कर सकते हैं.यहाँ तक कि पीडीएफ़ फ़ाइलों की हिन्दी सामग्री को भी.यह सुविधा आपके लिए प्रस्तुत किया है – छोटू गूगल ने. वैसे तो रफ़्तार, गुरूजी इत्यादि विशिष्ट खोज सेवाओं के जरिए पुराने हिन्दी फ़ॉन्टों की सामग्री को ढूंढने की सुविधा पहले से उपलब्ध है, मगर मामला घालमेल सा हो जाता है. यदि आपको किसी विशेष फ़ॉन्ट की सामग्री ही ढूंढनी हो तो यह नया विकल्प बहुत काम का है.मैंने सरसरी तौर पर अभिव्यक्ति ढूंढा तो मेरे सामने एक बहुत ही शानदार हिन्दी पीडीएफ पत्रिका वाणी (http://hindipressclub.110mb.com/vaani/06/Vaani-06-high.pdf ) नमूदार हो गई. – पत्रिका शुषा फ़ॉन्ट में तैयार की गई है और उसका पीडीएफ़ इंटरनेट पर उपलब्ध है.छोटू गूगल में खोज शब्द भरने के लिए दो खिड़कियाँ है…

अगर मैं गृहमंत्री होता...

यह निबंध श्री आलोक पुराणिक के एक छात्र के परचे से ली गई है. निबंध का विषय था – अगर मैं गृहमंत्री होता...---अगर मैं गृहमंत्री होता तो बहुत बड़े बड़े काम करता. यूं ही नहीं बैठा रहता. जैसे कि यदि कोई विमान अपहर्ता विमान अपहरण कर उसे कांधार ले जाता और 5 आतंकवादियों की मांग करता तो मैं बापू की शांतिप्रियता का उदाहरण देकर 5 के बदले 50 आतंकवादियों को खुद ले जाकर उन्हें सौंपता.यदि मैं गृह मंत्री होता तो मुम्बई में आतंकवादी हमलों के समय कैमरे में इंटरव्यू देते समय हर घंटे कोई 2-3 ड्रेस बदलता. दिन भर में इस तरह 20-25 ड्रेस बदलता. स्मार्ट गृहमंत्री होने के नाते स्मार्ट दिखाई देना गृहमंत्री का धर्म है. और, करात-माया-लालू के जमाने में गृहमंत्री को वैसे भी इन दिनों लाइव कैमरे वाले, टीवी वाले रोज रोज पूछते कहां हैं भला?यदि मैं गृहमंत्री होता तो देश की तमाम ईमानदार जनता को हाथी के पांवों तले कुचलवा देता. इन ईमानदार जनता के कारण ही देश का बेड़ा गर्क हो रहा है. भारत का एक ही धर्म घोषित करता – बेईमानी. तब जातपांत धरम के दंगे फसाद फुर्र से दूर हो जाते. भारत की जनता बेईमानी करने लगे तो यहाँ की गरीबी और भु…

ए टू जैड ब्लॉगिंग : हिन्दी ब्लॉगिंग की पहली कट-पेस्ट किताब

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जब से यह खबर मिली थी कि हिन्दी में ब्लॉगिंग की किताब बाजार में आ गई है, उत्सुकता बनी हुई थी कि कब ये हाथ में आए. कल ही ये किताब मिली और लीजिए, आपके लिए आज हाजिर है इसकी बेबाक समीक्षा.तीन सौ से ऊपर पृष्ठों की, पॉकेटबुक साइज की इस किताब के लेखक हैं इरशादनामा के श्री इरशाद अली. प्रकाशन रवि पॉकेट बुक, मेरठ का है, और कीमत है एक सौ पचास रुपए. पुस्तक का काग़ज बढ़िया क्वालिटी का है और छपाई उत्तम है. किताब के फ़ॉन्ट पढ़ने में आसान हैं, और पृष्ठों का लेआउट भी बढ़िया है.किताब निम्न चौदह खंडों में विभाजित है –1. ब्लॉगिंग क्या है?2. ब्लॉगिंग का इतिहास3. ब्लॉग, ब्लॉगिंग, ब्लॉगर4. ब्लॉग एग्रीगेटरों की दुनिया5. कैसे जुड़ें ब्लॉगिंग से आप6. आपका हिन्दी ब्लॉग7. ब्लॉगिंग का बढ़ता क्षेत्र और लोकप्रियता8. कैसे बनाएँ प्रभावी ब्लॉग9. मशहूर ब्लॉग, ब्लॉगर और उनके किस्से10. मजेदार ब्लॉगिंग11. ब्लॉगिंग और कुछ सावधानियाँ12. एडवांस ब्लॉगिंग टिप्स13. कैसे हो ब्लॉगिंग से कमाई14. सितारों के ब्लॉग.अध्यायों को देखा जाए, तो ब्लॉगिंग की एक सम्पूर्ण किताब में जिन बातों को समावेश किया जाना आवश्यक है, वे तो प्रकटतः दिखाई द…

चेतावनी ! एडसेंस विज्ञापन कहीं आपको जेल की हवा न खिला दें!

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कल इसी ब्लॉग में भारतीय समयानुसार शाम पांच से नौ बजे के बीच एक अश्लील विज्ञापन प्रकाशित होता रहा. विज्ञापन एडसेंस की तरफ से स्वचालित आ रहा था और उसमें रोमन हिन्दी में पुरुष जननांगों के लिए आमतौर पर अश्लील भाषा में इस्तेमाल किए जाने वाले की-वर्ड्स (जिसे संभवत गूगल सर्च में ज्यादा खोजा जाता है) का प्रयोग किया गया था.इस विज्ञापन को तत्काल ही गूगल एडसेंस के कम्पीटीटिव एडसेंस फ़िल्टर का प्रयोग करते हुए उस वेबसाइट के यूआरएल को ब्लॉक कर दिया गया. मगर, इस ब्लॉक को अमल में आते आते कुछ समय लगता है और तब तक तो आपका नुकसान, जाहिर है हो चुका होता है. और, किसी यूआरएल को ब्लॉक करना इलाज नहीं है, क्योंकि ये शैतान फिर कोई नए यूआरएल से ऐसा खिलवाड़ करेंगे.वैसे, गूगल की नीति इस संबंध में बहुत कड़क है और वे इस तरह के अश्लील सामग्री अपने विज्ञापनों में कतई नहीं परोसते. मगर शैतान लोग गूगल के स्वचालित बॉट (क्योंकि अरबों पृष्ठों और लाखों विज्ञापनों को रीयल टाइम में दस्ती तौर पर जांचा परखा नहीं जा सकता) को बेवकूफ बनाते रहते हैं. यदि इस चिट्ठे पर ऐसी समस्या दुबारा आई, तो इन विज्ञापनों को सिरे से ही हटाने पर गंभ…

रविरतलामी घर आ जा वे...

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यदि आपके पास विचारों की कमी नहीं है तो इंटरनेट की दुनिया में आप कभी भी धूम-धड़ाका कर सकते हैं. और वो भी बढ़िया धूम धड़ाका.

मेरीधुन नाम के एक नए विचार ने जन्म लिया है और एक नजर में यह धूम धड़ाका ही है. मेरीधुन अपने तरह की एक नई सेवा है जिसे इंटरनेट पर जारी किया गया है. इसके बारे में आपको और बताएँ, इससे पहले आप ये गाना सुनें. और, ईमानदारी से, पूरा गाना सुनें, फिर आगे पढ़ें. (नोट - फ्लैश प्लेयर प्लगइन आवश्यक, नहीं तो यहाँ से डाउनलोड कर सुनें)

…. घर आजा वे…

सुन लिया गाना? कैसा लगा?
मूल गाना है – चन्ना वे घर आजा वे. इसे मनमाफिक परिवर्तित कर रविरतलामी घर आजा वे में बदल कर रीमिक्स रूप में रेकॉर्ड किया गया है.

जी हाँ, मेरीधुन सेवा प्रचलित प्रसिद्ध गीतों को आपके मनपसंद, मगर थोड़े से सीमित तरीके से फेरबदल कर रेकॉर्ड कर आपको प्रस्तुत करती है. इसके लिए आपसे न्यूनतम रु 99/- से लेकर और अधिक राशि गानों के हिसाब से ली जाती है. आप गीतों को जन्मदिन, सालगिरह इत्यादि के मौकों के हिसाब से उपहार देने योग्य तैयार करवा सकते हैं. नववर्ष, होली-दीपावली इत्यादि के मौकों के लिए भी आप अपने मनमाफिक गीत तैयार कर सकत…

जालिम जमाने ने मुहब्बत के मायने बदल दिए!

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मेरे प्यार को, मेरे मुहब्बत के इजहार के इस तरीके को जरा समझने की कोशिश तो करो जानेमन!व्यंज़लजालिम जमाने ने सबकुछ बदल दिए
हां मुहब्बत के मायने तक बदल दिए
हमारा प्रेम परवान चढ़ता किस तरह
उन्होंने तो जब चाहे रास्ते बदल दिए
वक्त का तो क्या बताएँ आपको साहब
वक्त ने तो अच्छे महिवाल बदल दिए
उनके जरा से अहसास के लिए हमने
अपने दिनरात सुबह शाम बदल दिए
अपने मुहब्बत की खातिर रवि हमने
क्या कहें खुद को कैसे तमाम बदल दिए
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(समाचार कतरन साभार – टाइम्स ऑफ इंडिया)

एक लाख वर्ष पुरानी चित्रकारी देखना चाहेंगे?

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तो, भीम बेटका (बैठकम या बैठका?) में आपका स्वागत है. भीम बेटका भोपाल (मप्र) से कोई 50 किमी दूर है. यह एक पर्वतीय स्थल है, जहाँ बहुत सी प्राकृतिक गुफाएँ हैं. इन्हीं गुफाओं में आदिमानवों का प्राकृतिक शैलाश्रय रहा था और अपने फुरसत के क्षणों में आदिमानवों ने गुफा की दीवारों पर विविध रूपाकारों में सैकड़ों दर्शनीय चित्र अंकित किए थे. यहां की कोई 500 से अधिक गुफाओं में सैकड़ों प्रागैतिहासिक चित्र है. यहाँ के कुछ चित्र पचास हजार वर्ष पुराने हैं, और एक प्याला नुमा आकृति के बारे में कहा जाता है कि वो कोई एक लाख वर्ष पुराना है. अलबत्ता समय, काल और वातावरण की वजह से लगातार होते क्षरण से हमें उस प्याले नुमा चित्र के दर्शन तो नहीं हुए, मगर बहुत से चित्र पुरातन काल की जीवनी की बयानी करते मिले. पाषाणआश्रय के इन चित्रों को देखकर बरबस ही अपने पुरखों की याद आती है कि उनका प्राचीन, वन्य जीवन कैसा रहा होगा. अधिसंख्य चित्र 9 हजार वर्ष पुराने हैं.भीम बेटका को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर भी घोषित किया जा चुका है. कुछ चित्र आप भी देखें –दुःख की बात है कि इन शैलाश्रयों और इनमें उकेरे चित्रों के पुख्ता संरक्षण क…

नीरो बर्निंग हिन्दी

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वैसे तो हिन्दी नामधारी फ़ाइलों व फ़ोल्डरों को सीडी/डीवीडी रोम डिस्क पर कई तरीके से बर्न किया जा सकता है,
और यदि आप लिनक्स में हैं (शायद सेब में भी कोई समस्या नहीं?) तो फिर तो कोई समस्या ही नहीं है. विंडोज में विस्ता व 7 में अंतर्निर्मित सीडीराइटरों के जरिए हिन्दी नामधारी फ़ाइलों व फ़ोल्डरों को सीडी में सीधे रेकार्ड किया जा सकता है. परंतु ये उतने उन्नत नहीं होते और इनमें बहुत सी कमियाँ होती हैं - जैसे कि मल्टी सेसन डिस्क तैयार करने के लिए बढ़िया सेवा जिससे कि रेकार्ड की हुई सीडी हर कम्प्यूटर पर बढ़िया चल सके, यह नीरो जैसे विशुद्ध सीडी बर्निंग प्रोग्रामों में ही उपलब्ध होता है. नीरो बर्निंग रोम के नए संस्करण (ट्रायल संस्करण 9.2.6 यहाँ से डाउनलोड करें) में हिन्दी नामधारी फ़ाइलों व फ़ोल्डरों को बिना किसी समस्या के बढ़िया तरीके से सीडी/डीवीडी पर रेकार्ड कर सकते हैं. यही नहीं, आप अपने सीडी/डीवीडी का नाम भी हिन्दी में रख सकते हैं. मैंने छत्तीसगढ़ी भाषा के केडीई अनुप्रयोगों को हिन्दी नाम देकर तथा इस डीवीडी को भी हिन्दी नाम देकर रेकार्ड किया है और इस हिन्दी नामधारी डीवीडी को किसी दूसरे कम्प…

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