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तरकश.कॉम : विश्व की ऐसी पहली हिन्दी समाचार साइट जिसकी सामग्रियों को आप रुचि अनुरूप जोड़ घटा सकते हैं

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वैसे तो इस तरह की सुविधा आई-गूगल इत्यादि (व्यक्तिगत पन्नों) में भी है, और बहुत पहले से है. मगर समाचार साइटों में ऐसी सुविधा हिन्दी साइटों में अब तक नहीं थी. अंग्रेज़ी समाचार साइटों – जैसे कि बीबीसी अंग्रेज़ी में कुछ समय से ऐसी सुविधा उपलब्ध थी.  तरकश.कॉम जिसे हाल ही में प्रतिष्ठित मंथन पुरस्कार भी मिला है, में ऐसी सुविधाओं को हाल ही में जुटाया गया है. अब आप इस साइट के मुख पृष्ठ की सामग्री को अपने रुचि अनुरूप विषयों से सजा संवार सकते हैं और जिन विषयों में आपको रूचि नहीं है, उन्हें आप निकाल बाहर कर सकते हैं.उदाहरण के लिए, तरकश का डिफ़ॉल्ट पन्ना:मेरी रूचि तो, विज्ञान में है -और ये कुछ और विषय बन्द!तो, अगर आपको लगता है कि तरकश सेमी पॉर्न परोस रहा है, तो ऐसे विषयों को नजरों से कर दें बाय-बाय. स्पैनर, एंकर, तीर के निशान और रेडियो चयन बटनों से आप तरकश के अपने होम पेज की अपनी सेटिंग बदल सकते हैं. पूरा, विस्तृत  ट्यूटोरियल यहाँ देखें. ध्यान दें कि यह सुविधा सिर्फ मुख पृष्ठ (होम पेज) पर ही उपलब्ध है, भीतर के पन्नों में नहीं.

पक्षियों की बीट के आकार प्रकार और रूप रंग से भविष्यवाणियाँ

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सबसे पहले एक सत्य कथा. मेरे एक मित्र कलाकार हैं. केनवस पर चित्र उकेरते हैं. बहुत पहले जब वे जमने के लिए संघर्ष कर रहे थे तब का वाकया है. एक मर्तबा अपनी कलाकृतियों को लेकर वे दिल्ली की किसी आर्टगैलरी को जा रहे थे और ऑटो में अपना कैनवास इत्यादि चढ़ा रहे थे. इतने में उनके गहरे रंग के शर्ट पर ऊपर उड़ रही चिड़िया का सफेद बीट गिरा. मित्र परेशान हुए कि ये क्या! उनके कुर्ते का सत्यानाश हो गया. पर ऑटो चालक ने दिलासा दिया – भइए, रंज न करो. आज तुम्हारा भाग्य जग गया. आज तो तुम्हें पैसा मिलेगा. संयोगवश, उस दिन उन मित्र की एक पेंटिंग, किसी प्रदर्शनी में पहली मर्तबा अच्छे, मुंह-मांगे दामों में बिकी.तो, सवाल उठता है कि क्या पक्षियों की बीट से किसी तरह की भविष्यवाणी संभव है? यदि हम अपने कार के शीशे या झक सफेद कुर्ते पर चिड़ियों की बीट पर अपने भाग्योदय संबंधी बात न करें और कुछ वैज्ञानिक आख्यानों के पूर्वानुमानों की बातें करें, तो कह सकते हैं कि हाँ!अचानक ही मेरे हाथ में एक किताब आई, जिसका शीर्षक है – व्हाट बर्ड डिड दैट? इस किताब में बेहद मनोरंजक और ज्ञानवर्धक तरीके से यह बताया गया है कि आपके कार के छत …

पोस्टरस : हिन्दी में ब्लॉग लिखना इतना आसान कभी नहीं रहा…

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वैसे तो पोस्टरस की हिन्दी क्षमता की जाँच परख 23 मई 2009 को ही कर ली गई थी, मगर तब कुछ नुक्स नजर आए थे. अभी दोबारा कुछ जांच परख करने पर पाया गया कि यह हिन्दी ब्लॉग पोस्टिंग के लिए एक दम चुस्त दुरूस्त होकर तैयार हो गया है. जैसा कि पोस्टरस द्वारा दावा किया गया है – ब्लॉग पोस्ट करना इससे आसान नहीं हो सकता. सही है. न तो आपको खाता खोलने की जरूरत न ही पंजीकृत होने की. न टैम्प्लेट, ब्लॉग नाम इत्यादि कि चिंता और झंझट. बस, अगड़म बगड़म पोस्ट लिखकर एक ईमेल post@posterous.com को भेजें और आपकी ब्लॉग प्रविष्टि बन कर तैयार. ब्लॉग प्रविष्टि की लिंक के बारे में आपको वापस ईमेल भेज कर बताया जाएगा. किसी ईमेल खाते से पहली बार भेजेंगे तो आपका ब्लॉग भी स्वयं बन कर तैयार हो जाएगा. और, आप ब्लॉग में चित्र, एमपी3 या वीडियो भी जोड़ सकते हैं – बस अपने ईमेल में इनका अटैचमेंट लगा दीजिए. ब्लॉग पाठ को गाढ़ा, मोटा, रंगीन, तिरछा भी बना सकते हैं.ये रही जाँच पोस्टें -मेरे ईमेल खाते से बनाया व थोड़ा सजाया संवारा गया -http://raviratlami.posterous.com/और ये रचनाकार ईमेल खाते से सादा ईमेल भेज कर बनाया गया ब्लॉग -http://ravish…

भाऊ, तो ये है मेरी दिनचर्या!

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यह बोरीवली, बंबई मुम्बई, भारत महाराष्ट्र के रहने वाले एक मनसे कार्यकर्ता की टॉप सीक्रेट डायरी के कुछ पन्नों के संक्षिप्त अंश हैं.मेरी डायरी का यह पहला पन्ना. परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना है कि मेरी इस डायरी के बारे में मेरे कॉमरेड ताजिंदगी कभी भी न जान पाएँ! क्योंकि यदि उन्हें पता चलेगा कि मैं इसे मराठी में नहीं, बल्कि हिन्दी में लिख रहा हूं, तो वो तो मुझे वडा पाव में दबा कर खा जाएं! हालांकि हिन्दी में लिखने का अलग मजा है क्योंकि बहुत से पार्टी सदस्य हिन्दी से घोर नफरत करते हैं, और उनके सामने इस डायरी को लहराने पर भी वे इसकी ओर देखेंगे भी नहीं. वे तो सिर्फ और सिर्फ मराठी देखने-पढ़ने के लिए प्रोग्राम्ड हैं!कल का दिन हम सभी के लिए बहुत ही विशिष्ट और अच्छा गुजरा! हमने यूपी के दस भैयाओं को सुबह सुबह तब पकड़ लिया जब वे निपटने के लिए समुद्र किनारे जा रहे थे! हमने उन्हें अपने शानदार मराठी अलंकार “हलकट” से पुकारा और वहां से मार भगाया.चूंकि शुरूआत शानदार रही थी, तो बाकी का दिन और भी बढ़िया गुजरना ही था. दोपहर में तो आज गुरूजी का भाषण था ना! गुरु रा* ठाकरे एमएनएस कार्यकर्ताओं की आमसभा को संबोध…

मॉज़िल्ला थंडरबर्ड प्रयोग करने हेतु एक और नं1 सॉलिड कारण

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अगर आप भी मेरी तरह अकसर अपने संलग्नकों को संलग्न करना भूल जाते हैं, तो इससे निजात पाने के लिए थंडरबर्ड अपना सकते हैं.मॉजिल्ला थंडरबर्ड में नित्य नई ख़ूबियाँ जुड़ती जा रही हैं. सबसे बड़ी खूबी तो यह है कि आप इसमें जीमेल खाते को बड़ी आसानी से सिंक्रोनाइज कर सकते हैं – आईमैप और पॉप3 दोनों ही विधियों से, और ऑफलाइन काम कर सकते हैं. कुछ समय से थंडरबर्ड में जीमेल की तरह ही संलग्नकों के लिए रिमाइंडर सुविधा इसमें जोड़ी गई है. यही नहीं, अब आप इसमें संलग्नकों को जोड़ने से न भूल जाएं इसके लिए आपकी अपनी ही भाषा में कीवर्ड जोड़ने की भी सुविधा दी गई है. यह सुविधा थंडरबर्ड में तो वैसे कुछ समय से उपलब्ध है, मगर हिन्दी कीवर्डों पर यह ठीक से काम नहीं करता था. अब इसके नए संस्करण में हिन्दी कीवर्डों पर भी बढ़िया काम करता है.मैं अकसर संलग्नकों को जोड़ना भूल जाता था और ईमेल लिखने के उपरांत भेजें बटन पर चटका लगा देता था. अब मैंने थंडरबर्ड में संलग्नक हेतु स्मरण दिलाने के लिए हिन्दी में ही संलग्न’ नाम से कीवर्ड जोड़ दिया है. अब जब भी मेरे ईमेल में संलग्न शब्द आता है, और यदि संलग्नक नहीं जुड़ा हुआ होता है तो य…

भारतवंशियों स्वदेश लौटो!

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अंग्रेज़ों भारत छोड़ो की तर्ज पर ये गुहार है. गुहार नहीं, बल्कि एक आंदोलन है. भारत के शीर्ष पर बैठे राजनेता द्वारा छेड़ा गया आंदोलन. ऐसे में भारतवंशियों को भारत लौटना ही चाहिए. वैसे भी, भारतवंशियों को भारत से बाहर किसी सूरत जाना ही नहीं चाहिए, और यदि चले गए हैं तो बिना देरी के, तुरंत वापस आ जाना चाहिए. बिना किसी आंदोलन या गुहार के उन्हें वापस आना चाहिए. भारतवंशियों के वापस भारत लौटने के बढ़िया, कुछ टॉप के कारण ये हो सकते हैं –#1 – भारत की धूल भरी, गड्ढेदार, भीड़ भरी, सांडों और गायों से अटी-पटी, षोडशी नारी की कमर से भी पतली, सदैव जाम युक्त सड़कों का क्या मुकाबिला? सिक्स लेन की खाली सड़क पर गाड़ी दौड़ाने में भी कोई मजा है लल्लू?#2 – सत्यम के राजू की याद है आपको? या ताजातरीन कोडा? बोफ़ोर्स और चारा घोटाला? हजारों करोड़ रुपए देखते ही देखते बना सकने की सुविधा किसी और देश में है? फिर क्यों बुड़बक की तरह बाहर चले गए हो? जल्द लौट आओ. भारतवंशियों, आपके टैलेंट की जरूरत भारत में बहुत है.#3 – राजा-महाराजा तो बीते जमाने की बातें हैं? हो सकता है. पर यहाँ भारत में आप अब भी ठसके से राजा-महाराजा की तरह…

विंडोज 7 में हिन्दी में काम कैसे करें?

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ठीक है, हर तरफ विंडोज 7 की चर्चा है, यह विक्रय के नए कीर्तिमान चहुँओर स्थापित कर रहा है, और आपके नए नवेले कम्प्यूटर पर भी विंडोज 7 आया हुआ है. सवाल ये है कि इसमें हिन्दी में काम कैसे करें?





विंडोज 7 में हिन्दी कुंजीपट कैसे इनेबल करें?

यह बेहद आसान है. विंडोज एक्सपी की तरह आपको हिन्दी कुंजीपट इंस्टाल करने के लिए अलग से इसके इंस्टालेशन सीडी इत्यादि की आवश्यकता नहीं होगी. विंडोज 7 में हिन्दी का अंतर्निर्मित समर्थन है. हिन्दी कुंजीपट इसमें पहले से ही इंस्टाल रहता है. इसे लागू करने के लिए आपको निम्न चरण अपनाने होंगे –

प्रोग्राम मेन्यू > कंट्रोल पैनल > में क्लिक करें, फिर नए विंडो में एडजस्ट योर कम्प्यूटर सेटिंग विंडो पर क्लिक करें. वहाँ पर क्लॉक, लैंगुएज, रीजन पर क्लिक करें तथा रीजन एंड लैंगुएज पर क्लिक करें. यहाँ आपको बहुत से विकल्प मिलेंगे. यहाँ पर चेंज कीबोर्ड आर अदर इनपुट मैथड को चुनें. एक नया विंडो खुलेगा जहाँ चेंज कीबोर्ड बटन पर क्लिक करें.







अब टैक्स्ट सर्विस एंड इनपुट लैंगुएजेस विंडो पर एड बटन पर क्लिक करें. आपके सामने एक नया विंडो प्रकट होगा – एड इनपुट लैंगुएज’ जिसमे…

मैं गरीब हूँ, बहुत गरीब

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अब तक तो घरों के सामने नाम-पट्ट टंगता था, घरों के नाम या उसका अता-पता – गली, मोहल्ले, मकान का नंबर इत्यादि टंगता था. अब आदमी की अमीरी-गरीबी टंगा करेगी.यदि आप गरीब हैं, तो अब आपको अपने घर पर लिख कर ये टाँगना पड़ेगा – ‘मैं गरीब हूं’. अभी तो ‘मैं गरीब हूं’ टंग रहा है. कल को मैं महा-गरीब हूँ, मैं महा-महा गरीब हूं, मैं बिलकुल फटीचर हूँ इत्यादि टंगने के फरमान आएंगे. आखिर सरकार गरीबों को कैसे पहचान पाएगी कि वो गरीब है जब तक कि उसके घर में ये टंगा, लिखा न मिले कि वो गरीब है. बहुत पहले खबर आई थी कि किसी जनप्रतिनिधि के पास बीपीएल कार्ड था. बीपीएल यानी बिलो पावर्टी लाइन. यानी गरीब से भी नीचे. इसके लिए कोई खालिस शब्द भी नहीं है. अपना शब्द भंडार भी इस मामले में कंगाल है. ऐसे लोगों के घरों पर क्या लिखा जाएगा? फिर, जल्द ही इसके उलट, ‘मैं अमीर हूं’, या ‘मैं महा अमीर हूं’, या फिर ‘मैं भारत का या दुनिया का सबसे अमीर हूं’ यह भी टंगने लगेगा. वैसे, अप्रत्यक्ष रूप से तो यह टंगने भी लगा है.और, गरीबी की परिभाषा, उसका लेवल क्या है? मैं अपनी बात करूं तो मैं अंबानीज़, टाटाज़ के सामने तो महागरीब, महा फटीचर हूं. …

ब्लॉगर्स पार्क में आपका स्वागत है...

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लोग-बाग़ भले ही ट्विटर और फेसबुक के कसीदे पढ़ लें, मगर, ब्लॉगिंग इज़ स्टिल इन थिंग. और, अब जब हर संभव विषय पर हर लेवल का कैपेबल व्यक्ति अपने-अपने ब्लॉग पर हर किस्म का मसाला परोसने लग गया है तो उसमें से छांट-बीन कर कुछ माल-मसाला लेकर प्रिंट मीडिया की एक बढ़िया कलेवर वाली पत्रिका निकाल लें तो?ब्लॉगर्स पार्क पत्रिका में यही किया गया है. ब्लॉगर्स पार्क के दूसरे अंक की मानार्थ प्रति मुझे अभी हाल ही में मिली और इसके पन्ने पलटते हुए अजीब खुशनुमा अहसास हो रहा है कि चलिए, सिर्फ और सिर्फ ब्लॉगों में पूर्व प्रकाशित सामग्री से – पोस्ट व पोस्ट की टिप्पणियों समेत, एक संपूर्ण पत्रिका भारत में, वह भी भोपाल से, बाजार में बिक्री के लिए नियमित प्रकाशित होने लगी है. ब्लॉगर्स पार्क की दूसरी ख़ूबी यह है कि यह द्विभाषी है – पत्रिका अंग्रेज़ी व हिन्दी दोनों में ही है – यानी इसमें अंग्रेज़ी व हिन्दी ब्लॉगों की सामग्री प्रकाशित की गई है. अलबत्ता इसकी सारी सामग्री स्क्रेचमाईसॉल.कॉम के ब्लॉगों से ली गई है.जाहिर है, ब्लॉगर्स पार्क को स्क्रेचमाईसॉल.कॉम समूह द्वारा जारी किया गया है जो कि प्रयोक्ताओं को नेट पर वर्डप…

बता, तेरा धर्म क्या है बे?

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जनता जब ज्यादा ही चिल्लाने लगी कि मेरा धर्म तेरे धर्म से ज्यादा सफेद तो बात चाँद पर भी पहुँच गई और आखिर इंस्पेक्टर मातादीन* से रहा नहीं गया तो धरती पर आकर निकल पड़ा जेबी झूठ पकड़ने की मशीन और सच उगलवाने का नार्को टैस्ट में काम आने वाला सीरम-इंजैक्शन लेकर. अब तो जनता से उसका सही धर्म उगलवाना ही पड़ेगा.वो अभी निकला ही था कि सामने ट्रैफ़िक जाम मिला. पता चला कि किसी वीवीआईपी नेता के काफ़िले के लिए ट्रैफ़िक रोका गया है. अब वो तो सुपर कॉप इंस्पेक्टर मातादीन था. उसने अपना डंडा अड़ाया और वीवीआईपी नेता को रोका. उससे बोला – महामहिम, मेरे कन्ने ये झूठ पकड़ने की मशीन भी है और ये नार्को टेस्ट वाला इंजेक्शन. इधर धर्म के नाम पर दुनिया में बड़ा बावेला मच रहा है, दंगे-फ़साद हो रहे हैं, कर्मकाण्ड-जेहाद हो रहे हैं. तो, मेहरबानी होगी, अब आप सच-सच बता दें कि आपका धर्म क्या है?वीवीआईपी नेता पसीने पसीने हो गया. उसकी जुबान से अबतक, जब से वो नेता बना था कभी सच तो निकला ही नहीं था. पर उसे पता था कि जुबान से सच तो निकलना ही है – चाहे झूठ पकड़ने की मशीन से चाहे सच उगलवाने के इंजेक्शन से. तो वो सचमुच में सच बयान …

प्रोफ़ेशनल ब्लॉगर बनें! ब्लॉगिंग से कमाई के लिए यूनीक टेक्नीकल ट्रेनिंग!

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बी योर ओन बॉस. जीवन भर के लिए मंदी-प्रूफ़ कैरियर. यह सब और बहुत कुछ. नीचे का विज्ञापन (डीबीस्टार भोपाल के 9 नवंबर के अंक में प्रकाशित) जरा खुदै बांच लें -



और, यदि लगता है कि इससे मामला कुछ बन(-बिगड़?) सकता है या फिर आजमाना चाहते हैं, तो आपका स्वागत है.
आप हमारी बात पूछेंगे, तो हम कहेंगे भई – ऐसे खतरनाक विज्ञापनों से बचा….ओ!!!

चिट्ठाचर्चा की एक हजार एक वीं पोस्ट तो गब्बर पहले ही लिख चुका है!

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पता चला है कि चिट्टाचर्चा की हजारवीं पोस्ट आई है. पर, एक हजार एक वीं पोस्ट तो चिट्ठाजगत् का गब्बर पहले ही लिख चुका है.  तो गब्बर की चर्चा आप पढ़ना नहीं चाहेंगे?गब्बर - अरे ओ सांभा
सांभा - जी, सरकार...ग.- तो कितने हिन्दी चिट्ठाकार हैं? सां.- जी, सरकार पांच सौ...ग.- और दिन में कितने चिट्ठे चर्चा के लिए आ जाते हैं?
सां.- जी, सरकार, यही कोई पंद्रह बीस...ग.- और तू पंद्रह-बीस चिट्ठों की भी ढंग से चर्चा नहीं कर पाता. ऊपर से बहाने बनाता है कि चिट्ठों पर ताला लगा है? बहूत नाइंसाफी है ये बहूत नाइंसाफ़ी. सां.- सरकार,...ग.- और क्यों क्या तेरे कन्ने कोई और काम धाम नईं था क्या जो तू बेमतलब और फ़ालतू चिट्ठाचर्चा लिख-लिख कर तमाम जनता को बोर करता फिरता है?
सां.- जी, सरकार...ग.- उदर ये भासा ऊसा का क्या चक्कर है? कबी तू बंगाली मोशाय बनके लीखता होय, कबी तू मद्रासी बोन जाता है, कबी तू कविता करता है और कबी तू फ़ोकट का कुंडलियां तो कबी व्यंज़ल मारता है? कबी तू मध्याह्न में आ जाता है तो कबी फुरसत में लिखता बेठा रहेता है और कबी हैदराबादी तो कबी कुवैती बानी बोलता है. तो क्या तू पूरे देस-परदेस में घुमत…

सीखें एमएस ऑफ़िस 2003/2007 ऑनलाइन हिन्दी में

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नेट पर हिन्दी सामग्री का बाजार अब तेजी की ओर है. माइक्रोसॉफ़्ट द्वारा अपने बेहद लोकप्रिय उत्पाद ऑफ़िस 2003/ 2007 को हमारी अपनी हिन्दी भाषा में ऑनलाइन सिखाने के लिए हिन्दी भाषा में प्रशिक्षण पाठ पिछले कुछ समय से उपलब्ध करवाया गया है. इसका होम पेज यहाँ है.ऑनलाइन प्रशिक्षण में चरणबद्ध तरीके से चित्रों व स्क्रीनशॉटों के जरिए हिन्दी भाषा में बढ़िया प्रशिक्षण तैयार किया गया है जिसमें आपको वर्ड, एक्सेल, पावरपाइंट, आउटलुक इत्यादि पर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं.हालाकि हिन्दी प्रशिक्षण पाठ की भाषा बड़ी ही अजीब प्रतीत होती है, क्योंकि अनुवाद सीधा और सपाट सा, यंत्रचालित प्रतीत होता है. वर्तनी की गंभीर किस्म की गलतियाँ हैं. फिर भी, प्रशिक्षण का सार ग्रहण करने में समस्या तो नहीं ही होती और उम्मीद करते हैं कि  भविष्य में भाषा भी परिष्कृत कर ली जाएगी. भाषा का एक नमूना देखें -पहली बार देखने पर, आप शायद Word के पिछले संस्करण से कोई निश्चित आदेश नहीं देखेगें. क्षुब्ध न हों. कुछ समूहों में निचले-दाँए कोने में छोटा डायगोनल तीर है .तीर, संवाद बॉक्स लॉन्चर कहलाता है. यदि आप उसे क्लिक करेंगे, तो आप समूह से…

एमपी3 व अन्य मीडिया फ़ाइलों को ऑनलाइन प्ले हेतु नेट पर अपलोड करने का बढ़िया, आसान तरीका

लाइफ़लागर के तंबू उखड़ने और ई-स्निप जैसी सेवा के भरोसेमंद नहीं रहने के कारण इलाहाबाद राष्ट्रीय संगोष्ठी के तकनीकी सत्र में इरफ़ान ने जब यह प्रश्न किया कि एमपी3 फ़ाइलों को इंटरनेट पर लोड करने का बढ़िया तरीका क्या है तो अफ़लातून ने अपने स्वयं के अनुभवों को वहाँ पर साझा किया कि एमपी3 फ़ाइलों को बेहतर तरीके से नेट पर कैसे अपलोड किया जा सकता है.

आपके लिए एक और बढ़िया विकल्प है - आर्काइव.ऑर्ग पर मीडिया फ़ाइलों को अपलोड करने का. आर्काइव.ऑर्ग के साथ ख़ूबी यह है कि यह कोई निजी कंपनी नहीं है, बल्कि यह अनुदान प्राप्त संस्था है जो कि नेट की सामग्री को अपने सर्वरों पर भंडारित करते रहती है. मीडिया फ़ाइलों को आप आसानी से भंडारित कर सकते हैं सदा सर्वदा के लिए, और इसके तंबू उखड़ने या सेवाओं को बन्द करने, खत्म करने, सीमित करने जैसी संभावना यहाँ अत्यंत क्षीण हैं. (कॉपीराइट वस्तुओं का ध्यान तो ख़ैर रखना ही होगा.)

आर्काइव.ऑर्ग पर एमपी3 फ़ाइलें ऑनलाइन प्लेयर हेतु अपलो़ड करना अत्यंत आसान है. इसकी विधि निम्न है -

अपने एमपी3 फ़ाइल को http://archive.org पर अपलोड करें. यदि आपने अपना खाता नहीं बनाया हो तो वहा…

नेविगेशन पट्टी रहित ब्लॉगर ब्लॉग को फ्लैग कैसे करें?

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इलाहाबाद संगोष्ठी में चर्चा के दौरान यह तकनीकी प्रश्न किया गया था कि उन ब्लॉगर ब्लॉगों को फ़्लैग कैसे करें जिनमें नेविगेशन पट्टी को हटा दिया गया होता है. ब्लॉगस्पाट के ब्लॉगों में यह सुविधा दी गई है कि यदि आपको लगता है कि किसी ब्लॉग में आपत्तिजनक सामग्री है, तो ब्लॉगस्पाट ब्लॉग के सबसे ऊपरी खंड में दिए गए नेविगेशन पट्टी में ‘रिपोर्ट एब्यूज’ को क्लिक कर अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकते हैं. और यदि आवश्यक परिपूर्ण मात्रा में ऐसी शिकायतें ब्लॉगस्पाट को मिलती हैं तो उस पर कार्यवाही की जाकर उस सामग्री को वे हटा भी देते हैं.जिन ब्लॉगस्पाट ब्लॉगों में नेविगेशन पट्टी दिखती है, उसमें तो कोई समस्या नहीं, मगर बहुत से ब्लॉगों में सजावट के नाम पर उसे हमेशा के लिए हटा दिया गया होता है. और आप ऐसे ब्लॉगो को चाह कर भी फ्लैग नहीं कर सकते जिनमें नेविगेशन पट्टी नहीं होता है. ऐसे ब्लॉगों को फ्लैग कैसे करें?इसके लिए दो विधियाँ हैं –1) पहली आसान सी विधि है – यदि आप फ़ायरफ़ॉक्स प्रयोग करते हैं तो ब्लॉगस्पाट नेवबार रिस्टोरर नाम के इस ग्रीजमंकी स्क्रिप्ट का प्रयोग करें. इस स्क्रिप्ट के जरिए आमतौर पर प्राय: सभी ब्लॉग…

इलाहाबाद चिट्ठाकार सम्मेलन के कुछ हा हा ही ही , हाय हैलो के ऑडियो - वीडियो

आइए, आग को कुछ और हवा दें. दूर-सुदूर प्रांतों-देशों में कान-नाक-मुँह खोलकर अपने कम्प्यूटर के सामने चिंतित होकर ब्लॉगियाती-टिपियाती जनता के लिए, कि इलाहाबाद में क्या क्या न हुआ और क्यों न हुआ और हुआ तो क्यों हुआ इत्यादि के लिए   प्रस्तुत है सम्मेलन के कुछ हा – हा – ही – ही , हाय हैलो के ऑडियो वीडियो.सबसे पहले मनीषा पाण्डेय को सुनें. उनका ओजस्वी वक्तव्य पूरा रेकॉर्ड न कर पाया इसका अफसोस है. – कारण - वही : हार्डवेयर फ़ेल्योर.अब विनीत कुमार को सुनें. ऑडियो क्वालिटी बहुत खराब है – (सेमिनार हाल में ही ऑडियो गूंज रहा था बेसबब) मगर विनीत को सुनना उनको पढ़ने से ज्यादा आनंददायी है. यकीन मानें.आगे विनीत से लिया गया छोटा सा साक्षात्कार. छोटा इसलिए, कि साक्षात्कार के बीच में ही बैटरी जाने कैसे माशाअल्ला हो गई और एक वीडियो करप्ट हो गया. फिर भी, जो थोड़ा सा बचा है वह भी इसलिए महत्वपूर्ण है कि विनीत ने जब से ब्लॉग लिखना शुरू किया, उनका लेखन, उनकी लेखनी का तेवर, उनकी शैली सबकुछ कूदती फांदती नित्य नई ऊँचाईयाँ पाती गई. उन्होंने बातों बातों में बताया कि पिछले साल-डेढ़ साल में ही उन्हें कई-कई प्रमुख जगहों…

आइए आज शाम को ऑनलाइन सीखें कि विंडोज़ 7 पर हिन्दी में काम कैसे करें

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जैसी कि पूर्व सूचना आपको थी, आज 28 अक्तूबर 2009 को भारतीय समयानुसार शाम 4 बजे से लेकर 5.30 बजे तक एक ऑनलाइन वेबकास्ट है. वेबकास्ट यानी इंटरनेट के जरिए ऑनलाइन ट्यूटोरियल. इसमें वीडियो (स्क्रीनकास्ट) के जरिए विंडोज़ 7 को हिन्दी के लिए सेट करने व उनमें विभिन्न कुंजीपटों व इंटरनेट, हिन्दी फ़ॉन्टों में काम करने के बारे में विस्तार (ऑडियो वीडियो के माध्यम से) से बताया जाएगा. आपके प्रश्नों के उत्तर चैट के माध्यम से भी वहीं, तत्काल दिया जाएगा. जाहिर है, यह वेबकास्टिंग मेरे द्वारा होस्ट की जा रही है.इस वेबकास्ट में शामिल होने के लिए इस कड़ी पर 3.45 बजे शाम (भारतीय समयानुसार, इससे पहले यह कड़ी उपलब्ध तो होगी, पर काम नहीं करेगी) को क्लिक करें -http://msevents.microsoft.com/cui/Register.aspx?culture=en-IN&EventID=1032429276&CountryCode=INपर, इससे पहले आपको अपने विंडोज में विंडोज लाइव मीडिया प्रोग्राम (LMSEtup.exe) इंस्टाल करना होगा जो आपको वेबकास्टिंग दिखाता है. यह प्रोग्राम यहाँ से डाउनलोड करें -http://download.microsoft.com/download/4/F/7/4F712B94-C6A5-4A66-AD8F-53E04085B939/LMSetup.exe

चिट्ठाकारी (हिन्दी?) में निहित ख़तरे…

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इलाहाबाद में मैंने अपनी प्रस्तुति में चिट्ठाकारी में निहित खतरों के बारे में भी बताया था. अभिषेक ओझा ने कई पोस्टों में ब्लॉगिंग के खतरे के बारे में विस्तृत विवरण दिए हैं. इनमें से एक है – अनर्गल, व्यक्तिगत आक्षेप. यह टिप्पणी सुरेश चिपलूणकर के चिट्ठे से ली गई है. मुलाहिजा फरमाएँ :)





Vishal Pandey said...



सुरेश जी आपने सही मुद्दा उठाया है। जैसे नामवर जी मठाधीश है वैसे ही हमारे हिन्दी ब्लाग जगत के भी कुछ मठाधीश है। इनमे से दो को हम सब बखूबी जानते है। एक गंजी होती खोपडी वाला मरियल सा शख्स और दूसरा बाहर निकले दाँतो वाला हँसोड। आप यदि इन दोनो के चमचे नही तो हिन्दी ब्लाग जगत की मलाई कभी नही खा सकते।
आज हिन्दी बलाग जगत का विकास क्यो नही हुआ। ऐसे लोगो के कारण जो भाई-भतीजावाद को बढावा देते रहे और गूगल से हिन्दी प्रोमोशन के नाम पर पैसे उगाहते रहे। पैसे तो पा गये पर कुनबा बढाओ की नीति छूटी नही। आप ही बताये क्यो चिठठा-चर्चा मे खास ब्लागो की ही चर्चा होती है। यदि ये हिन्दी के सेवक है और उस नाम से पैसे कमा रहे है तो सभी चिठ्ठो की चर्चा करे।
मरियल से दूसरे मठाधीश को हिन्दी ब्लागिंग के नाम …

द अदर साइड ऑफ अ ब्लॉगर

क्या आप जानते हैं कि अजित वडनेरकर कभी अहमद हुसैन – मोहम्मद हुसैन के शिष्य हुआ करते थे और वे एक उम्दा गायक भी हैं? देखिए उनके लाइव परफ़ॉर्मेंस का वीडियो – जब से हम तबाह हो गए, तुम जहाँपनाह हो गए.----(वीडियो – साभार अनूप शुक्ल के कैमरे से)

विंडोज 7 सीखने के लिए आपके लिए कुछ मुफ़्त वेबकास्ट

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विंडोज का हर संस्करण चलने चलाने में अपने पूर्व के संस्करणों से बहुत कुछ भिन्न होता है. विंडोज 7 में हिन्दी कैसे चलाएँ? विंडोज 7 में नया क्या है? विंडोज 7 में इंटरनेट-नेटवर्किंग कैसे करें? इत्यादि. यह सब और बहुत कुछ जानिए मुफ़्त वेबकास्ट से.अब तक का सर्वश्रेष्ठ, चलने में तीव्र और आसान, अत्यधिक सुरक्षित विंडोज संस्करण 7 बस आने वाला ही है. 22 अक्तूबर 09 को इसे अधिकृत रूप से तमाम विश्व में जारी किया जा रहा है. इसके कुछ शानदार पहलुओं के बारे में तथा इसमें कैसे काम करें इत्यादि के बारे में जीवंत वेबकास्टों की शृंखला 23 से 30 अक्तूबर 09 के बीच चलेगी. विवरण निम्न है –(चित्र बड़े आकार में देखने के लिए उस पर क्लिक करें)23 अक्तूबर - विंडोज 7 खेल-खेल में – अभिषेक कांत व अन्य विशेषज्ञ 26 अक्तूबर - विंडोज 7 परफ़ॉर्मेंस के नये आयाम – शांतनु कौशिक 27 अक्तूबर - विंडोज 7 इंटरनेट व होम नेटवर्किंग – एलन बी तुलादार व रमेश के. 28 अक्तूबर - विंडोज 7 में हिन्दी में काम कैसे करें – रविशंकर श्रीवास्तव 29 अक्तूबर - विंडोज 7 मनोरंजन व मीडिया सेंटर – सौमित्र सेनगुप्ता 30 अक्तूबर - विंडोज 7 एसेंशियल्स: विंडोज लाइव…

आपकी एक अदद टिप्पणी की कीमत महज़ पांच 5.00 रुपए?

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वैसे तो हर पोस्ट की हर टिप्पणी (स्पैम को छोड़ दें) अमूल्य और अनमोल होती है, मगर किसी ब्लॉग पर आपकी एक टिप्पणी के बदले पाँच रुपए का दान दिया जा रहा है तो वहाँ आप एक टिप्पणी तो दे ही सकते हैं?अनघ देसाई इस दफ़ा दीपावली कुछ खास तरीके से मना रहे हैं. वे अपने ब्लॉग पर 15 अक्तूबर से 19 अक्तूबर 2009 के बीच मिले प्रत्येक टिप्पणी के बदले 5 रुपए का दान देंगे. इसी तरह इस दौरान फेसबुक/ईमेल/ट्विटर पर (स्पैम नहीं) मिले शुभकामना संदेशों पर वे 0.25 रुपए का दान देंगे तथा प्रत्येक एसएमएस पर वे 0.50 रुपए का दान देंगे. उनके इस विचार को लोगों ने हाथों हाथ लिया है और बहुत से लोग अनघ के साथ दान देने के लिए जुड़ गए हैं और मामला इन पंक्तियों के लिखे जाने तक रुपए 17.50 प्रति शुभकामना संदेश तक जा चुका है. ये दान बालिका शिक्षा (एजुकेटिंग गर्ल चाइल्ड) के लिए दिए जाएंगे.अनघ के इस पोस्ट पर टिप्पणी करेंअनघ को ईमेल से शुभकामना संदेश भेजें. ईमेल पता उनके प्रोफ़ाइल से यहाँ से हासिल करें.ट्विटर पर शुभकामना संदेश #deepwish विषय से भेजें (अपने ट्विटर पोस्ट में #deepwish जोड़ दें बस). अनघ का ट्विटर पृष्ठबूंद बूंद से घट भरता…

भारत में कार्पोरेट ब्लॉगिंग

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आदमी की (सद्यः संशोधित?) मूल भूत आवश्यकताओं में अब शामिल हैं – रोटी, कपड़ा, मकान और जी हाँ, सही पहचाना - ब्लॉगिंग! बहुत पहले की मजाक में कही गई बात अब सत्य प्रतीत होती दीखती है. आदमी (और, औरतों की भी,) की मूलभूत आवश्यकताओं में अब रोटी, कपड़ा और मकान के साथ साथ इंटरनेट तो जुड़ ही गया है. फ़िनलैण्ड विश्व का ऐसा पहला देश बन गया है जहाँ इंटरनेट – वो भी 1 एमबीपीएस ब्रॉडबैण्ड को अब व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताओं में शामिल मान लिया गया है और इसके लिए क़ानून बना दिया गया है. इधर, इंटरनेट से ब्लॉगिंग जुड़ा हुआ है. तो हम आगे क्यों न एक बात मजाक में ही सही, कहें – आदमी की मूल भूत आवश्यकताओं में अब शामिल हैं – रोटी, कपड़ा, मकान और ब्लॉगिंग!और, जब चहुँओर ब्लॉगिंग की धूम मच रही हो तो कार्पोरेट जगत में, कार्पोरेट स्टाइल में कार्पोरेट ब्लॉगिंग क्यों नहीं? कार्पोरेट ब्लॉगिंग नाम के किताब में राजीव करवाल और प्रीति चतुर्वेदी ने इसी विषय को केंद्र में रखते हुए बहुत सी काम की बातें बताईं हैं. डेढ़ सौ पृष्ठों की इस किताब का मूल्य तीन सौ पैंतालीस रुपए है जो कि थोड़ा ज्यादा प्रतीत होता है, मगर जब बात कार्पोरेट…

आपको अपने आप पर भरोसा है या नहीं?

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--.ये भरोसे का बड़ा चक्कर है. आपको भले ही अपने आप पर भरोसा न हो, मगर दुनिया है कि आप पर पूरा भरोसा करती है. ठीक वैसे ही जैसे आप अपने बच्चे के ऊपर भरोसा करते हैं कि वो बड़ा होकर पढ़ लिख कर आई.ए.एस. अफ़सर बनेगा. बड़ा नाम और नांवा कमाएगा. भरोसा बाद में टूटे या रहे – जिसके कि बहुतेरे कारक और कारण हो सकते हैं, जैसे कि उसे तो बड़ा होकर सलमान बनने का भरोसा है जिसे आपका आई.ए.एस अफ़सर बनने-बनाने का भरोसा खुद टूटते टूटते तोड़ देगा. मगर, जैसा भी हो, भरोसा अभी तो बना रहता है ना! पालक के मन में भी और बालक के मन में भी.मुझे भी अपने आप पर भरोसा भले ही नहीं हो, मगर मैं भी दूसरों पर पूरा भरोसा करता हूं, और दूसरे भी अपने आप पर भले न करें, मुझ पर पूरा, पक्का भरोसा करते हैं. वैसे, भरोसा रिलेटिव होता है. सापेक्ष. निरपेक्ष वो कतई नहीं होता. किसी का भरोसा तोड़ने टूटने के उतने ही ज्यादा चांसेज होते हैं जितना ज्यादा भरोसा होता है. किसी शासकीय कार्यालय में किसी काम के लिए जाओ तो आपको अपने काम के होने का कितना भरोसा होता है? यदि कोई ईमानदार अफ़सर मिल गया तो काम होने को भरोसा तो नहीं होता है, मगर इस बात का पूरा …

अगर गिनती के दस लोग भी मेरा ब्लॉग पढ़ते रहें तो मैं ताउम्र ब्लॉग लिखता रहूंगा – राजकुमार केसवानी

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देश-विदेश के जाने-माने पत्रकार-संपादक-स्तंभकार राजकुमार केसवानी ताज़ा-ताज़ा हिन्दी ब्लॉग जगत में कूदे हैं. बाजे वाली गली नाम का उनका हिन्दी ब्लॉग देखते ही देखते अच्छा खासा चर्चित हो गया है. संगीत को ओढ़ते बिछाते फिरते और संगीत में रमते से प्रतीत होते राजकुमार केसवानी के संग्रह में पुराने जमाने के विनाइल और लाख के बने एलपी, एसपी, ईपी के हजारों रेकार्ड हैं. उनके पास अभी भी चालू हालत में गियर से चलने वाला बाजा है जिसे चाभी भरकर बजाया जाता है. इसमें गाना सीधे सुई-और-डायाफ्राम से घूमते रेकार्ड के जरिए बजता है. ध्वनि पैदा करने के लिए इसमें इलेक्ट्रॉनिक सर्किटरी नहीं है – और इस वजह से जादुई संगीत का वातावरण पैदा होता है. जिन्होंने रूबरू इसे सुना है (मैंने अभी अभी ही इसे सुना है,), वही इसके जादू को महसूस कर सकते हैं.
हाल ही में राजकुमार केसवानी से लंबी बातचीत हुई. उनके हिन्दी ब्लॉग जगत के थोड़े से समय के अनुभव तथा उनके प्रिय शगल संगीत पर हुई बातचीत और उनके बाबा आदम के जमाने के मगर अभी भी बढ़िया काम कर रहे चाबी वाले बाजे पर बजते गाने के बेहद दिलचस्प वीडियो आप भी देखें -


भाग 1 :  हिन्दी ब्लॉग …

सब ज़ीरो से सुपर हीरो : बनवारी लाल चौकसे की कहानी उनकी अपनी जुबानी

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वैसे तो बनवारी लाल चौकसे की आत्मकथात्मक किताब ‘श्रमिक से पद्मश्री’ स्मरणिका के रूप में ज्यादा नजर आती है मगर स्वेट मार्डेनों, दीपक चोपड़ाओं और जमात में ताज़ा तरीन शामिल हुए रश्मि बंसलों जैसे तमाम प्रेरणास्पद लेखकों की तमाम किताबों के जैसी प्रेरणा यह एक किताब पाठक के मन में भर सकती है. किताब बहुत ही सहज और बेहद सरल भाषा में लिखी गई है. शुरुआत के पन्नों में कुछ अनावश्यक से बधाई संदेशों को स्थान दे दिया गया है, और आखिरी के पृष्ठों में चित्रों के चयन में तारतम्यता नहीं बरती गई है, बावजूद इसके पूरी किताब पठनीय और बेहद प्रेरणास्पद है. किताब में बनवारी लाल चौकसे ने ये बताया है कि किस तरह उन्होंने एक दिहाड़ी श्रमिक – दैनिक वेतनभोगी मजदूर के रूप में अपना कैरियर एक नामालूम सी प्राइवेट कंपनी में प्रारंभ किया और अपनी लगन, अपनी क्षमता, नित्य सीखने की ललक, हर कार्य में, हर जाब में अपना शतप्रतिशत झोंक देने की प्रतिबद्धता के बल पर न सिर्फ बहुत ही कम समय में बीएचईएल व भारत के सर्वोच्च श्रम पुरस्कारों को प्राप्त किया, बल्कि भारत सरकार के बेहद प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार भी प्राप्त किया. अगर आप समझते हैं क…

द रीअल थिंग…

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यदा कदा हम सभी का सामना रीअल, वास्तविक चीजों से हो जाता है, और हम सन्न खड़े देखते रह जाते हैं. ऐसे ही कुछ वास्तविक चीजों से सामना पिछले दिनों अनायास हो गया. आप भी दर्शन-लाभ लें. यह है द रीअल कैटल क्लास -पौराणिक महत्व की, दैव नगरी – उज्जयिनी के रेलवे विश्रामगृह का 30 सितम्बर 09 की रात्रि का चित्र है यह. बताने की जरूरत नहीं कि हम भी शामिल थे रीअल कैटल क्लास में – झाबुआ तक के रात्रिकालीन सफर के दौरान क्षणिक विश्राम की तलाश में :)और, यह हैं  असली मदर मैरी.एक और एंगल से नहीं सराहेंगे?--(सभी चित्र – सौजन्य :  रेखा)

15 लाख रुपए की गाँधी की लँगोटी

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हमारी नामी कंपनी 'सो फ्लां' ने एक लिमिटेड एडीशन गाँधी लँगोटी बाजार में पेश किया है. लिमिटेड एडीशन की सिर्फ 3000 लँगोटियाँ तैयार की गई हैं. इन लँगोटियों की ढेरों ख़ासियतें हैं जो इन्हें व इनके खरीदारों और प्रयोगकर्ताओं को विशिष्ट बनाती हैं. पहली खासियत तो ये है  कि इन्हें अति विशिष्ट किस्म के खद्दर से बनाया गया है. वही खद्दर, जो देश के नेताओं को आजादी के पहले और आजादी के बाद बहुत ही मुफीद बैठता आ रहा है अब तक. खद्दर के लिए कच्चा माल खासतौर पर ऑस्ट्रेलिया के वर्जिन जंगलों से आयातित किया गया है. इसकी रुई प्राकृतिक रूप से उगे पौधों से तैयार की गई है और पूर्णतः जैविक पैदावार है, न कि रासायनिक और कृत्रिम रूप से उगी. इसे खास तौर पर डिजाइन किए गए हीरा मोती माणिक्य मढ़े करघे की सहायता से हाथ से बुना गया है. लँगोटी का डिजाइन प्रसिद्ध फ्रेंच फ़ैशन डिजाइनर 'विव सेंट फोरें' द्वारा रीडिजाइन कर बनाया गया है.
इसके बॉर्डर में विशेष किस्म के प्लेटिनम अलॉय का प्रयोग किया गया है जिससे लँगोटी सुन्दर, आकर्षक तो दिखती ही है, इस्तेमाल में नर्म और मुलायम भी होती है. इसकी ड्यूरेबिलिटी के लिए व…

अपने अंग्रेज़ी कीबोर्ड के लिए इनस्क्रिप्ट हिन्दी कीबोर्ड स्टीकर छापें

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जो लोग इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड से हिन्दी टाइपिंग सीखना चाहते हैं, उनके लिए बाजार में इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड स्टीकर आसानी से नहीं मिलता. जो हिन्दी स्टीकर बाजार में मिलते हैं वो रेमिंगटन (कृतिदेव) के ही होते हैं. इस समस्या के हल के लिए अर्जुन राव चावला ने एक बढ़िया गूगल डॉक बनाया है, जिसमें तेलुगु इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड को छापा जा सकता है. इसका आसान प्रयोग चिट्ठाजगत-गिरगिट के जरिए मैंने किया है जिससे आप हिन्दी इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड स्टीकर छाप  सकते हैं. यही नहीं इसके जरिए गिरगिट समर्थित अन्य निम्न भारतीय भाषाओं में भी इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड स्टीकर छापा जा सकता है. Bangla, Devanagari, Gujarati, Gurmukhi, Kannada, Malayalam, Oriya, Roman(eng), Tamil, Teluguस्टीकर छापने के लिए पीछे की ओर गोंद लगे काग़ज़ का प्रयोग करें, या फिर सादे काग़ज़ पर छाप कर फ़ेविकोल इत्यादि से चिपकाएं. ध्यान रहे कि गोंद ज्यादा न लगाएं, अन्यथा आपका कुंजीपट खराब हो सकता है. आप चाहें तो इसे सादे काग़ज़ पर छाप कर अपने कीबोर्ड के बाजू में संदर्भ के लिए रख सकते हैं.अद्यतन : -सुधन्व जोगलेकर ने बताया है कि हिन्दी/मराठी के लिए एक बढ़िया प्…

आदमी के सड़ा अचार बनने की तथा कथा...

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वैसे, यूं तो आदमी, आदमी ही होता है. मगर कभी वो कुत्ता, कभी उल्लू, कभी गधा और कभी सूअर बन जाता है. यदा कदा कुछ अतिरेकी मामलों में वो बैल या शेर भी बन जाता है. मगर सड़ा अचार?आधुनिक, कलियुग में वो सड़ा अचार भी बनने लगा है. यही तो कलियुग की पराकाष्ठा है कि अब आदमी हर काल्पनिक रूप से संभव निम्नतम रूप धारण कर सकता है. वो यह भी बन सकता है, वो वह भी बन सकता है और वो सड़ा अचार भी बन सकता है. खासकर भारत की धरती पर. यहाँ की मिट्टी और पानी में कुछ ऐसी खासियत है कि आदमी देखते देखते, दन्न से सड़ा अचार बन जाता है. एक दिन पहले तक वो पूज्यनीय, आदरणीय होता है, मगर किसी शानदार सुबह को पता चलता है कि अरे! वो तो सड़ा अचार हो गया है! आइए, जरा पड़ताल करें कि आदमी आखिर सड़ा अचार कब और क्यूं बन जाता है.आदमी अगर बड़ा नेता है तो वो सड़ा अचार तब बन जाता है जब उसका करिश्मा खतम हो जाता है. उसके उठाए मुद्दे वोट खैंचू रूप से प्रभावी नहीं रहते. वो अपने दम पर अपने दल के, अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को चुनाव नहीं जितवा सकता. ठीक इसके उलट, आदमी अगर वोटर है, तो वो नेताओं के नजरों में भले ही हर पांचवें साल ऐन चुनावों के वक…

अनपढ़ मच्छरों के लिए क़ानून?

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नए क़ानून के मुताबिक, अब अगर आपके घर में कोई मच्छर दरियाफ़्त किया जाएगा, यदि आप मच्छरों को अपने घरों में प्रश्रय दे रहे होंगे तो आपके ऊपर शुद्ध 500 रुपयों का जुर्माना किया जाएगा. %$#@ बहुत हो गया. मच्छरों से तो अब क़ानून बनाकर ही निपटा जा सकेगा. मेरे नगर की म्यूनिसिपल कमेटी ये क़ानून बना रही है. कल को सारे देश में ये लागू किया जाएगा. इतने बढ़िया क़ानून से देश का कौन सा राज्य, कौन सा शहर और कौन सा गांव अछूता रह सकेगा भला? वो तो इन %#@ अनपढ़ मच्छरों का कसूर है, वरना मच्छरों के लिए क़ानून तो कब का बन चुका होता कि मनुष्यों को काटना मना है और खासकर नेता टाइप को तो कतई नहीं. वैसे भी सरकारें किसी समस्या से निपटने में अक्षम रहती हैं तो वो नए क़ानून बना डालती हैं. कम से कम सरकारों को कोई दोष तो नहीं दे सकता कि वे अकर्मण्य बैठी रहती हैं. तो नया क़ानून बन गया. जनता को अब चाक चौबन्द चौकन्ना रहना होगा. म्यूनिसिपल कमेटी का कोई दारोगा – डॉग शिट स्क्वॉड किस्म का ही – अब आपके घर पर कभी भी दस्तक दे सकता है. रात को बारह बजे, जब आप अपनी मसहरी में शांति की, चैन की नींद सो रहे होंगे, आपके घर की डोर बैल की …

हिन्दी दिवस विशेष : गूगल में रीयल टाइम हिन्दी में सर्च कैसे करें?

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हिन्दी में सर्च करने की बढ़िया सुविधा गूगल में है. परंतु आम प्रयोग के दौरान सर्च विकल्प में पिछले चौबीस घंटों या किसी मामले में पिछले बारह घंटों का सर्च विकल्प ही मौजूद रहता है. सवाल ये है कि ट्विटर की तरह गूगल में भी हिन्दी में रीयल टाइम सर्च कैसे करें.


रीयल टाइम सर्च माने कि पिछले पाँच मिनट के दौरान (या पिछले चालीस सेकण्ड के दौरान,) प्रकाशित हुए हिन्दी पन्नों में किसी खास शब्द से ढूंढना.

एक छोटा सा गूगल हैक है. आप भी आजमाएँ. कुछ मजेदार परिणामों (या शून्य परिणाम,) के लिए तैयार रहें.
नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट के अनुसार ब्राउजर के एड्रेस बार में गूगल सर्च स्ट्रिंग भरें. जिस हिन्दी शब्द को खोजना है, उसे ‘है’ के बदले प्रतिस्थापित करें. यहाँ पर qdr:n5 का प्रयोग पिछले पाँच मिनट के दौरान प्रकाशित हिन्दी के नए पन्नों में ‘है’ शब्द को ढूंढने के लिए किया गया है. यदि आप पिछले 25 या 47 मिनट के दौरान खोजबीन करना चाहते हैं तो उसे 5 के बदले 25 या 47 कर दें.


कुछ ब्राउज़रों में सर्च स्ट्रिंग भरने के बाद एंटर करने पर यह कमांड कुछ यूँ दिख सकता है:
http://www.google.com/search?q=%E0%A4%B9%E0%A5%88…

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