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October, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

छत्तीसगढ़ी ऑपरेटिंग सिस्टम : अब एक वास्तविकता के बहुत करीब…

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यह मेरा पसंदीदा ड्रीम प्रोजेक्ट था जो बरसों से यहाँ http://cg-os.blogspot.com/ अटका टंगा हुआ था. इस मर्तबा के सराय परियोजना के तहत इसे भी स्वीकृति मिली है. इसके साथ ही अन्य भारतीय भाषाओं मसलन गुजराती, मैथिली, कश्मीरी इत्यादि भाषाओं के विभिन्न परियोजनाओं को भी स्वीकृति मिली है. विवरण यहाँ दर्ज है.http://raviratlami1.blogspot.com/2008/10/chhattisgarhi-operating-system-will-now.htmlअब तो आगू के छै महीना अऊ फुरसत नईं मिलही गा. चलो सब्बो झन काम-बूता में जुर जाओ.

नई, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी : क्या खाक!

नई, ताज़ातरीन तकनॉलाज़ी ने आपको भी अकसर आकर्षित किया होगा. पर, तकनॉलाज़ी के अद्यतन होते रहने की यह रफ़्तार कभी रुकेगी भी? आखिर आप कब तक नई लेटेस्ट तकनॉलाज़ी से कदमताल मिलाते रहेंगे?कोई पंद्रह बरस पहले जब मैंने अपने मुहल्ले का पहला पर्सनल कम्प्यूटर अपने जीपीएफ़ के पैसे से एडवांस लेकर खरीदा था तो उस वक्त की लेटेस्ट तकनॉलाज़ी के लिहाज से 14 इंची कलर मॉनीटर युक्त, 16 मेबा रैम व 1 जीबी हार्ड डिस्क युक्त, 433 मे.हर्त्ज का कम्प्यूटर था, जो उस वक्त के लिहाज से बहुत बड़ी कीमत में आया था.मैं अपनी उस लेटेस्ट तकनॉलाज़ी युक्त कम्प्यूटर की शक्ति से खासा प्रभावित था और चूंकि वो मेरे मुहल्ले का एकमात्र व पहला कम्प्यूटर था, अतः उसकी अच्छी खासी धाक भी थी. लोग-बाग़ सिर्फ उसके दर्शन करने आते – एक दूसरे से चर्चा करते - कलर मॉनीटर वाला कम्प्यूटर है – मल्टीमीडिया वाला, जिसमें गाने भी सुन सकते हैं और फिल्म भी देख सकते हैं. एकदम नेबर्स एन्वी, ओनर्स प्राइड वाला मामला था.मगर, जल्द ही परिस्थितियाँ बदल गईं. उम्मीद से पहले. पड़ोस का कोई बंदा नया लेटेस्ट तकनॉलाज़ी वाला, 450 मे.हर्त्ज युक्त, एमएमएक्स तकनॉलाज़ी वाला,…

मंदी की मार से त्रस्त हैं? आइए, कुछ ग़म ग़लत करें...

चहुँओर मंदी की मार से त्रस्त जनता अपना ग़म ग़लत करने के लिए आर्थिक मंदी और दीवाला से संबंधित ईमेल फारवर्डकरने में लगी हुई है. वैसे तो मेरे पास भी #५००००० ईमेलों की सूची है, जिनमें से अधिकतर लोग-बागों द्वारा मुझे भेजे गए ईमेल फारवर्ड के जरिए संकलित हुए हैं, परंतु फिर भी मैं इस सूची में  निम्न कचरा भेजने के बजाए अपने ब्लॉग में डालना उचित समझता हूँ. चाहें तो एक मुस्कान मारने के लिए पढ़ लें, नहीं तो दन्न से कट लें...

* मुंबई स्टाक मार्केट के सामने खड़ी मारूति ८०० पर बंपर स्टीकर चिपका मिला - बिकाऊ. मेरी दूसरी गाड़ी ब्रांड न्यू मर्सिडीज बैज एस क्लास भी बिकाऊ है. एकदम सस्ते दामों में. आज के आज. तत्काल संपर्क करें. (गाड़ी अभी भी खड़ी है.)

* बैंक से मेरा चेक वापस आ गया. टीप लिखा था - फंड अपर्याप्त है, जिसके कारण चेक लौटाया जा रहा है. फंड अपर्याप्त? उनका या मेरा?

* ७०० बिलियन से नीचे ३० बिलियन प्राइम नंबर हैं, बाकी के सभी सब-प्राइम हैं.

* मैंने चेक इनकेश करवाने बैंक भेजा ही था कि बैंक ही बाउंस हो गया.

* कल ही मैंने अपने भाई को १० डालर उधार दिए और आज पता चला कि मैं विश्व का तीसरा सबसे बड़ा उधारी…

अंतत: अमिताभ बच्चन ने हिन्दी में ब्लॉग लिखा!

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पाठकों की लगातार मांग के चलते अंतत: अमिताभ बच्चन को हिन्दी में ब्लॉग लिखना ही पड़ा. उनकी पहली हिन्दी ब्लॉग-प्रविष्टि यहाँ पढ़ें.मजेदार बात ये है कि अमिताभ बच्चन के ब्लॉग में आरएसएस फ़ीड सब्स्क्राइब करने की कड़ी पर जाने से वहाँ पंजीकरण बन्द है की सूचना मिलती है. तो क्या उनके पाठक इतने ज्यादा हो गए हैं कि – टू हॉट टू हैंडल?बहरहाल, यदि आप अमिताभ बच्चने के ब्लॉग को ईमेल या आरएसएस रीडर के जरिए सब्सक्राइब करना चाहते हैं तो विवरण यहाँ दर्ज है.
अद्यतन : # 1 आशीष ने याद दिलाया कि अमिताभ की ये हिन्दी इंकब्लॉगिंग की पहली पोस्ट नहीं है. इस साल जुलाई में वे पहले भी हिन्दी में इंकब्लॉगिंग ब्लॉग पोस्ट कर चुके हैं.अद्यतन : # 2 मगर, अंतत: अमिताभ ने हिन्दी में लिखना चालू कर ही दिया. अब इसे तो उनकी असली प्रथम प्रविष्टि मान ही लें हिन्दी की.धन्यवाद आशीष.

प्रिये, मेरे इस कायाकल्प में एक तुम्हारा ही तो हाथ है...

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फुरसत के किसी क्षण यदि आप अपने आप पर गौर फरमाएँगे कि आज से पाँच या दस साल पहले कैसे थे, तो आप पाएंगे कि कुछ मामलों में आपमें तो आमूल चूल परिवर्तन आ गया है. पाँच साल पहले आप वज़न में कोई दस किलो कम थे, दस साल पहले आप कोई बीस किलो कम थे, और पंद्रह साल पहले तीस किलो. वज़न के इस चक्रवृद्धि में जाहिर है, और किसका हाथ होगा भला? यदि आप पुरूष हैं, तो इसमें आपकी पत्नी का हाथ है जो आपके गले तक खा लेने के बाद भी आपकी थाली में एक और फुल्का डालते हुए कहती है – एक और ले लो न जी. गरमागरम. कितने प्यार से बनाया है. गोया प्यार में वज़न तभी आएगा जब आपके भोजन में (और नतीजतन आपके शरीर में) वज़न होगा. और यदि आप स्त्री हैं, तो भी, भले ही आपके पतिदेव आपकी थाली में गरमागरम फुल्का न डालें, मगर ऐन-केन-प्रकारेण आपके शारीरिक वज़न-वृद्धि के लिए शत-प्रतिशत वही जिम्मेदार हैं. आपके पतिदेव आपको जितना खुश रखते हैं, उसी अनुपात में आपका वज़न बढ़ता रहता है. अब आप अनुमान लगा लीजिये कि जीरो साइज फ़िगर में प्यार का अनुपात भला कितना होगा. ---
व्यंज़ल
--- वक्त अब पहले जैसा नहीं रहा
मेरा दोस्त पहले जैसा नहीं रहा निकले…

हिन्दी रचनाकार बनाम रोमनीकृत रचनाकार : तकनीक का बेजा इस्तेमाल?

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रचनाकार का रोमनीकृत (फ़ॉनेटिक अंग्रेज़ी) सामग्री वाया चिट्ठाजगत फ़ीड स्वचालित तरीके से यहाँ प्रकाशित होता रहा है. रोमनीकृत रचनाकार के अपने पाठक हैं, और वे आमतौर पर गूगल सर्च से आते हैं. बहुत से हिन्दी के पाठक जो अंग्रेज़ी रोमन लिपि (जो देवनागरी लिपि से अनभिज्ञ रहते हैं, जैसे कि दक्षिण भारतीय – जो थोड़ा-बहुत हिन्दी बोल समझ लेते हैं) को ही समझ पाते हैं, या फिर जिनके कम्प्यूटरों में यूनिकोड हिन्दी दिखाई ही नहीं देती; उनके लिए रोमनीकृत हिन्दी पाठ का कोई विकल्प नहीं है.परंतु जिस तकनीक के सहारे रोमनीकृत रचनाकार प्रकाशित होता रहा था, उस तरह की तकनीक का बेजा इस्तेमाल भाई लोगों ने चालू कर दिया है. उदाहरण के तौर पर, माना कि अंग्रेज़ी की कोई लोकप्रिय तकनालाजी साइट है, और उसे गूगल के मुफ़्त अनुवादक एपीआई के जरिए हिन्दी समेत अन्य तमाम भाषाओं में अनुवाद (या ट्रांसलिट्रेट कर – यानी लिपि बदल कर) कर उसका फ़ीड जेनरेट कर स्वचालित तरीके से प्रकाशित करने लगें तो? ऐसा प्रकाशक तो बस एक बार थोड़ा सा सेटअप कर ले, बाकी का सारा मसाला अपने आप अपडेट होता रहेगा, घर भरता रहेगा.यदि ऐसा स्वयं प्रकाशक या सामग्री का मा…

स्क्रीमर रेडियो अब हिन्दी में

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स्क्रीमर रेडियो के मुरीद तो आप हो ही गए होंगे. इसका नया संस्करण जो ज्यादा बढ़िया (स्टेबल) चलता है जारी हो चुका है.अब आप इसे अपनी मनपसंद भाषा – हिन्दी में भी चला सकते हैं. इसके इंटरफेस का अनुवाद हिन्दी में पूर्ण हो चुका है, और बहुत संभव है कि इसके अगले संस्करण में आधिकारिक तौर पर हिन्दी में भी जारी हो जाए.परंतु आप अभी ही अपने स्क्रीमर रेडियो को हिन्दीमय कर सकते हैं. यह फ़ाइल (lang.english.xml) डाउनलोड कीजिए और इसे स्क्रीमर रेडियो के इंस्टालेशन फ़ोल्डर (डिफ़ॉल्ट रूप में यहाँ होगा - %Program Files/screamer radio/languages) के लैंग्वेजेस नाम के सब-फ़ोल्डर में नक़ल कर दें. वहाँ पहले से इस नाम की फ़ाइल होगी. आपसे उसे बदलने के लिए पूछा जाएगा. हाँ करें, और बस. स्क्रीमर रेडियो फिर से चालू करें – यह हिन्दी भाषा में चलता दिखेगा – कुछ इस तरह:

भयंकर चेतावनी- इस साइट पर जाना आपके कम्प्यूटर के लिए नुकसानदेह हो सकता है!

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क्रैकरों के निशाने पर बड़ी, प्रचलित साइटें हमेशा रहती हैं. ताकि वे उसके जरिए अपना ऑनलाइन फ्रॉग का धंधा जमाए रख सकें. कुछ समय से माइक्रोसॉफ़्ट भाषाइंडिया की डाउनलोड http://bhashaindia.com/ साइट पर जहाँ हम भारतीय भाषाई कम्प्यूटिंग वालों को बहुत-कुछ काम के डाउनलोड मुफ़्त मिलते हैं, वहाँ कुछ अटैक-स्क्रिप्ट्स और मालवेयर किस्म के डाउनलोडर अपना अड्डा जमाए बैठे हैं. इस समस्या की रपट माइक्रोसॉफ़्ट को 19 सितम्बर 08 को ही दे दी गई थी, परंतु गूगल सेफ ब्राउजिंग की रपट को मानें तो समस्या अभी भी  याने ताजा ताजा, 7 अक्तूबर 08 तक बरकरार है.मजेदार बात ये है कि यदि आप इस साइट पर इंटरनेट एक्सप्लोरर से भ्रमण करते हैं तो कहीं कोई चेतावनी नजर नहीं आती. इसका अर्थ ये है कि इंटरनेट एक्सप्लोरर के प्रयोक्ता (जो कि कम नहीं हैं,) हमेशा खतरे पर होंगे. जबकि ऑपेरा और फ़ायरफ़ॉक्स में आपको बाकायदा चेतावनी मिलती है. इंटरनेट एक्सप्लोरर पर डाउनलोड पृष्ठ खुल गया, जबकि फ़ायरफ़ॉक्स (ऑपेरा में भी) में (सभी ब्राउज़र डिफ़ॉल्ट सेटिंग में,) निम्न चेतावनी मिली :फ़ायरफ़ॉक्स प्रयोग करने का एक और ठोस कारण?बहरहाल, जब तक ये समस्या दूर …

लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के सृजक लिनुस टॉरवाल्ड्स का ब्लॉग : सादा जीवन उच्चविचार?

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नेट की दुनिया पर अगर आपका वजूद है, तो यकीनन आपका कोई न कोई एक ब्लॉग होगा. लिनुस टॉरवाल्ड्स का भी होगा? अब तक तो नहीं था, मगर, लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के सृजक, लिनुस टॉरवाल्ड्स भी अंतत: पिछले हफ़्ते से ब्लॉग लेखन में कूद पड़े. और वे नक़ली स्टीव जॉब्स की तरह नक़ली नहीं हैं, पूरे असली हैं.उनका ब्लॉग – लिनुस का ब्लॉग सादा जीवन उच्च विचार को इंगित करता है. ब्लॉगर प्लेटफ़ॉर्म पर एकदम सादे, सरल टैम्प्लेट पर बिना किसी साज सज्जा के है उनका ब्लॉग. और उन्होंने अपने इस पोस्ट में एक सतर्क पिता के रूप में अपने बच्चों को इंटरनेट के उचित उपयोग संबंधी विचार लिखे हैं.अब आप वहां आई टिप्पणियों का आनंद लें – लोग बाग़ लिनुस को सीख दे रहे हैं पट्टी पढ़ा रहे हैं कुछ इस तरह:एक ने टिप्पणी लिखी – आपने ब्लॉगर का प्रयोग क्यों किया? वर्डप्रेस क्यों नहीं? वर्डप्रेस तो मुफ़्त उपलब्ध, ओपन सोर्स ब्लॉग अनुप्रयोग है, जबकि ब्लॉगर का प्रयोग सिर्फ गूगल के सर्वरों पर ही किया जा सकता है.एक का कहना था – आप सादा सरल ब्लॉगर का प्रयोग ब्लॉग के लिए क्यों कर रहे हैं? आपको तो गिट (git) का प्रयोग करना था – वो ज्यादा गीकी होता!एक दूसर…

तो, आखिर क्या हैं असली साहस की बातें?

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महिलाओं का देर रात घर से बाहर निकलना साहस की बात नहीं है. चलिए, मान लिया. तो, आखिर वे क्या-क्या बातें हो सकती हैं जिन्हें, बकौल शीला दीक्षित, साहस की बात कही जा सकती है? चलिए एक राउंडअप लेते हैं –एक नेता के लिए : 25 करोड़ लेकर भी दल नहीं बदलना या क्रास वोटिंग नहीं करना. एक अफसर के लिए : रिश्वत लेकर भी काम नहीं करना. एक पुलिसिया के लिए : किसी को भी गोली मार कर एनकाउंटर की थ्योरी स्थापित कर देना. एक विद्यार्थी के लिए : नकल की बात कौन करे, उत्तर पुस्तिका किसी विषय विशेषज्ञ से लिखवा कर बदल देना. एक शिक्षक के लिए : आजकल के विद्यार्थी को पढ़ा सकना. एक सर्जन के लिए : एपेण्डिक्स के ऑपरेशन के नाम पर किडनी निकाल लेना. किसी सरकारी बाबू के लिए : कोई फ़ाइल हाथ के हाथ (दैन एंड देअर) सरका देना. अगर लिखते जाएं तो जाहिर है सूची समाप्त ही नहीं होगी, अंतहीन होगी. साहस के काम दुनिया में सैकड़ों हैं. भारतीयता के तारतम्य में एवरेस्ट पर चढ़ना या एंटार्कटिका पर अकेले जाना या दिल्ली में रात में अकेले घूमना साहस नहीं है. ये सबको समझ में आ जाना चाहिए. ठीक से!व्यंज़ल-----.मैंने की है कभी साहस की बातजो कहूंगा अभी…

स्क्रीमर रेडियो : गाने सुनो जी भरके!

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एफ़ एम रेडियो में बारंबार बजते वही गाने, पुराने सड़ियल चुटकुले, फोकट की बकवास और विज्ञापन सुन सुनकर दिमाग पक गया है?अपने मोबाइल एमपी3 प्लेयर के 8 जीबी संग्रह के गाने पचासों बार शफल कर सुन सुन कर दिमाग सड़ गया है और आपको अपने संग्रह के उन गानों से नफरत होने लगी है?तो आपके पके और सड़े हुए दिमाग के लिए आ गया है एक शानदार इलाज.स्क्रीमर रेडियो. 4 मेबा से कम का एक छोटा सा फ्रीवेयर प्रोग्राम. डाउनलोड करिए, और इसके प्रीसेट में से तमाम विश्व के इंटरनेट रेडियो में से छांटकर बस एक क्लिक से गाने सुनिए. चाहें तो एक और क्लिक से सुने जा रहे गीतों को सीधे एमपी3 में रेकॉर्ड भी करें हाँ, इंटरनेट कनेक्शन बढ़िया होना चाहिए.इस्तेमाल में बेहद आसान. यानी इसके लिए किसी तरह के डमी या ईडियट गाइड की आवश्यकता नहीं.और यदि किसी चैनल से बोर हो गए तो बस, इसके प्रीसेट इंटरनेट रेडियो की सूची में जाएं और झट से चैनल बदल लें. भारत के लिए ही कोई चालीसेक रेडियो पहले ही संग्रहित हैं. यदि आप अंग्रेज़ी गानों के शौकीन हैं तो, सूची एक तरह से अनंत है.तो, देर किस बात की? स्क्रीमर रेडियो अभी ही डाउनलोड करिए!

ब्राउज़र बुकमार्कलेट्स से लिखें हिन्दी - कहीं भी, कभी भी

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हिन्दी लिखने की सुविधाओं में दिनोंदिन इजाफ़ा होता जा रहा है. हाल ही में ब्राउज़र टूलबार पिटारा के जरिए हिन्दी लिखने की एक और जुगत जोड़ी गई थी. तमाम और भी नए नए औजार बेहतरीन खासियतों के साथ जुड़ते जा रहे हैं. इस बीच हिन्दी लिखने की सुविधाओं में एक और नाम जुड़ा है ऐक्य का.ऐक्य (Ekya) क्या है?आपके लिए यह एक आसान वेब एप (जाल अनुप्रयोग) सुविधा है जिसके जरिए आप ब्राउजर के इनपुट विंडो में हिन्दी (चाहें तो अन्य भारतीय भाषाएं) लिख सकते हैं. यह भी पिटारा हिन्दी औजार की तरह गूगल इंडिक लेखन औजार के एपीआई का प्रयोग करता है. मगर इसके लिए आपको किसी टूलबार को डाउनलोड कर संस्थापित करने की आवश्यकता नहीं है. इसकी कड़ी को आप अपने ब्राउज़र के बुकमार्कलेट में लगा लें और आपका काम एक क्लिक में हो गया समझिए.यदि आप फ़ायरफ़ॉक्स ब्राउजर प्रयोग करते हैं तो यह आपके लिए बहुत आसान है. इस कड़ी में जाकर वहाँ हिन्दी वाली कड़ी को अपने ब्राउज़र बुकमार्क पट्टी पर खींच ले जाकर छोड़ दें बस. फिर कहीं भी ब्राउजर के इनपुट विंडो में हिन्दी लिखें. अंग्रेजी हिन्दी में टॉगल के लिए कंट्रोल+g बटन का प्रयोग करें. इंटरनेट एक्सप्लोरर म…

स्मार्ट फ़ोनों (गूगल एण्ड्रायड?) में अनुपलब्ध सुविधाएँ

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हमारे मोबाइल फोन दिनोंदिन स्मार्ट होते जा रहे हैं. इतने स्मार्ट कि आमतौर पर उपयोक्ता को ही पता नहीं होता कि वो अपने मोबाइल से एसएमएस और वीडियो देखने के अलावा और क्या कुछ नहीं कर सकता. बाजार में गूगल एण्ड्रॉयड युक्त स्मार्ट फ़ोन टीमोबाइल जी1 जबरदस्त स्मार्ट तरीके से बाजार में हाल ही में जारी किया गया.  परंतु इसमें (बल्कि हर स्मार्ट फ़ोन में) निम्नलिखित जबरदस्त खामियाँ हैं-ये आपको गूगल मैप्स की सहायता से जीपीएस सिस्टम के जरिए आपका लोकेशन बता सकता है, आपका स्थान बता सकता है और आपको रास्ता भी बता सकता है. ठीक है, मुझे तो मेरा स्थान बखूबी पता है. पर क्या ये सामने वाले का लोकेशन बता सकता है कि बंदा वाकई बाथरूम से या फिर बम्बई से बोल रहा है? क्योंकि अकसर होता ये है कि किसी को फोन करो तो बोलेगा – भाई, बाहर हूं, रोमिंग पर हूं, अत: जितनी जल्दी माफ़ कर दें उतना अच्छा... ये आपको सामने वाले का परिचय बता सकता है – जो कि साधारण फ़ोन भी बता सकता है – कि कॉल किसका आया. परंतु ये सामने वाले का मूड नहीं बता सकता. आप अपनी पत्नी या प्रेमिका के फोन का इंतजार रोमांटिक मूड में करते हैं, बॉस को बढ़िया, खुशनुमा…

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