संदेश

May, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आप कितने अच्छे चिट्ठा पाठक हैं?

चित्र
आइए, जाँचिए अपने अंक.प्रस्तुत है आपके लिए चिट्ठाकार वर्ग पहेली
चिट्ठाकार और चिट्ठे.सीधे
3. बिस्मिल्लाहिर्रहमानुर्रहीम
5. मानसिक नॉलेज
7. अज्ञानी गुरू, दूसरे का लिखा कूड़ा समझे
8. दिल में, पेट में, मन में जहां कहीं भी हो न हो, उगलना तो पड़ेगा
9. छम्मकछल्लो
10. आदि चिट्ठाकार और वर्तमान व्यंग्यकार में समानता
12. डायरी वाला भारतीय
14. कस्बे का रहवासी
19. शब्दों के बीच सेतु बनाती हैं
20. जहां का हर सेर सस्ता होता है
21. नुकीली दृष्टि
23. आज के जमाने में ठुमरी कौन गाता है
24. हिन्दी का एक मात्र मालदार चिट्ठा
25. कह न सकने के बावजूद

नीचे
1. नेपाली हिन्दी चिट्ठाकार
2. एक यात्री जो अक्षरों का जोड़ घटाना करता है
4. लिखता तो है, कभी कभी, गाहे बगाहे
6. चिट्ठाजगत् की माता
9. इनके तो लब सचमुच आजाद हैं
11. जरा मुस्कुरा दो ब्रदर
12. कबाड़खाने का एक कबाड़िया
13. फटा मुँह, कुछ दूसरे तरीके से
15. राहुल उपाध्याय समेत हम सभी जिसमें लगे होते हैं
16. कीचड़ में मरीचिका देखने दिखाने का साहस
17. चार सौ बीस लेखक
18. चिट्ठाकार का पूरा नाम जो फुरसत में लंबी पोस्टें लिखने के लिए प्रसिद्ध हैं, अलबत्ता पाठकों के पास फुरसत हो न हो
19. हिन्दी ब्ल…

विंडोज एक्सपी / विस्ता में हिन्दी के सैकड़ों प्रोग्राम व अनुप्रयोग चलाएं

चित्र
केडीई 4 के विंडोज वातावरण में सफलतापूर्वक चलाने के बाद आशा बंधी थी कि शीघ्र ही केडीई 4 के सैकड़ों प्रोग्रामों व अनुप्रयोगों को अंग्रेज़ी से इतर, अन्य भाषाई वातावरणों में चलाया जा सकेगा.
(विंडोज में चलते हुए केडीई हिन्दी के कुछ खेल व शिक्षण अनुप्रयोग . बड़े आकार में देखन हेतु चित्र पर क्लिक करें)अब यह संभव है. यही नहीं, केडीई4 अनुप्रयोगों व प्रोग्रामों को विंडोज में वास्तविक बहुभाषाई वातावरण में चलाया जा सकता है, जो कि अब तक विंडोज में असंभव तो नहीं, परंतु अनुपलब्ध था.
केडीई के प्रोग्रामों में संस्थापित भाषाओं को चुनकर बहुभाषाई वातावरण में एक साथ काम किया जा सकता है. दिए गए चित्र में विंडोज़ एक्सपी (डिफ़ॉल्ट वातावरण अंग्रेज़ी) में केडीई 4 के कुछ बेहद लोकप्रिय खेलों को पंजाबी, तमिल, नेपाली और हिन्दी में एक साथ ही चलाया जा रहा है.(बड़े आकार में देखन हेतु चित्र पर क्लिक करें)
एक और भाषाई दीवार ढही. केडीई को विंडोज में संस्थापित करने के लिए विस्तृत निर्देशों के लिए यह तथा यह आलेख पढ़ें.
अद्यतन : नए केडीई4 विंडोज में विंडो स्टार्टअप मेन्यू में संस्थापित प्रोग्रामों की सूची भी शामिल हो जाती है.…

हिन्दी वर्तनी जाँचक का नया संस्करण डाउनलोड करें

चित्र
अब आप अपने ब्लॉग पोस्टों को बगैर वर्तनी की गलती के लिख सकते हैं. हिन्दी वर्तनी जाँचक के नए संस्करण में कोई एक लाख के आसपास शब्द हैं. हालाकि इसमें अभी भी बहुत से शब्दों की प्रूफ़ रीडिंग बकाया है, मगर, इसे बीटा संस्करण मानकर इसकी खामियों को एक हद तक नजर अंदाज किया जा सकता है. आप अपने नए हिन्दी शब्दों को भी जोड़ सकते हैं तथा गलत वर्तनी को सुधारने हेतु दिए गए विकल्पों में से उचित शब्द चुन सकते हैं.
नया संस्करण अब फ़ॉयरफ़ॉक्स 3 पर भी बढ़िया चलता है.
कुछ प्रयोग हैं -
गूगल ट्रांसलिट्रेशन के जरिए लिखे गए हिन्दी शब्दों की वर्तनी जाँच सकते हैं.
गूगल ब्लॉगर (या वर्डप्रेस) पोस्ट संपादक में लिखे गए या कॉपी - पेस्ट किए गए पाठ की वर्तनी जाँच सकते हैं. यह नीचे दिया गया पाठ चिट्ठा - शास्त्र वार्ता से लिया गया है:

गलत वर्तनी के लिए वैकल्पिक शब्दों में से चुन सकते हैं.

वर्तनी जाँचक यहाँ से डाउनलोड करें.
इसे काम में कैसे लें? विस्तृत निर्देशों के लिए यह आलेख पढ़ें.
एकीकृत हिन्दी शब्दकोश संकलित करने हेतु जी. करुणाकर का धन्यवाद.
# अद्यतन - और हाँ, ये कमेंट विंडो (जहाँ टिप्पणी लिखते हैं) में भी बढ़िया काम …

क्या आप वेब पते (web address) की दोहरी जांच (double check) करते हैं?

चित्र
यदि नहीं, तो आज से ही शुरू करें. खासकर उन स्थलों के वेब पते जहां आप अपनी जानकारियाँ भरते हैं. ये है गूगल एडसेंस खाता का पृष्ठ. एकदम असली दिखता. परंतु है नक़ली. पूरा का पूरा. आपको फ़िशिंग जाल में फ़ांसने के लिए पूर्णतः सुसज्जित. चित्र को बड़े, पूर्णाकार में देखने के लिए उस पर क्लिक करें.
यदि आपको कोई संदिग्ध किस्म का साइट या पता लगता है तो उसे आप फ़िश टैंक पर जाकर जांच सकते हैं.
चित्र सौजन्य एफ़-सेक्योर

मोज़िल्ला फ़ॉयरफ़ॉक्स में हिन्दी वर्तनी जांचक प्लगइन संस्थापित करें

चित्र
जब आप मोजिल्ला के जरिए किसी पृष्ठ पर अंग्रेज़ी में कुछ पाठ लिखते हैं तो उसका डिफ़ॉल्ट अंग्रेज़ी वर्तनी जांचक आपकी सहायता करता है और आपके अंग्रेज़ी के गलत हिज्जों को वह लाल रंग से रेखांकित कर देता है. आप उस शब्द पर क्लिक करते हैं तो उसका संभावित सही वर्तनी सुझाता है. और आप सही, अच्छी अंग्रेज़ी लिख लेते हैं. जबकि हिन्दी लिखते समय आपकी हिन्दी हीन्दि हो जाती है और आपकी सहायता के लिए कोई औजार नहीं है.

पर, हिन्दी के लिए भी एक फ़ॉयरफ़ॉक्स प्लगइन जारी किया गया है. इस प्लगइन (hi-IN-dictionary.xpi फ़ाइल) को यहाँसेhttp://www.esnips.com/r/hmfl/doc/b5589890-42aa-45fe-99f9-f04ebd71ae4d/hi-IN-dictionary डाउनलोड करें. ( यह प्लगइन अभी फ़ॉयरफ़ॉक्स की साइट पर उपलब्ध नहीं है. तथा यह संस्करण 1.5 से 2.x पर काम करती है. फ़ॉयरफ़ॉक्स 3 बीटा पर अभी काम नहीं करती.)


डाउनलोड के पश्चात इसे फ़ॉयरफ़ॉक्स से खोलें व इसे इंस्टाल हेतु चुनें.

संस्थापित होने के बाद फ़ॉयरफ़ॉक्स ब्राउजर के किसी भी इनपुट विंडो में हिन्दी लिखें या नक़ल कर चिपकाएं व दिए गए चित्रानुसार इनपुट बक्से में दायाँ क्लिक करें व भाषा में हिन्दी/इंडिया चुन…

चिट्ठापठन आंकड़ों के खेल -2

चित्र
चिट्ठा पठन-पाठन के पिछले विश्लेषण में मैथिली गुप्त की टिप्पणी के जरिए ब्लॉगवाणी का एक छोटा सा प्रायोगिक हथियार मिल गया. आप भी आंकड़ों का ये खेल स्वयं खेल सकते हैं. आप देख सकते हैं कि किसी चिट्ठे को ब्लॉगवाणी ने अब तक कितने पाठक भेजे. आप औसत निकाल सकते हैं कि आपके अब तक के लिखे गए चिट्ठों पर औसतन प्रति चिट्ठा कितने पाठक ब्लॉगवाणी के जरिए आए.

इसके लिए ब्लॉगवाणी में जाकर उस विशिष्ट चिट्ठे का ब्लॉगवाणी आईडी प्राप्त करना होगा. यह उस चिट्ठे के लिंक पर माउस रखने पर ब्राउजर के स्थिति पट्टी पर प्रकट होगा. आप चाहें तो यह कड़ी नोटपैड पर नकल कर चिपका कर भी पढ़ सकते हैं. अब उस आईडी को इस लिंक http://blogvani.com/Bloggerdetail.aspx?BlogID= के = चिह्न के बाद भरें और ब्राउजर में खोलें. उदाहरण के लिए हिन्द युग्म की आईडी है 388. तो http://blogvani.com/Bloggerdetail.aspx?BlogID=388 कड़ी को खोलने पर आपको उस चिट्ठे का अब तक का ब्लॉगवाणी के द्वारा भेजे गए पाठक की जानकारी मिलेगी.


इस तरह की सुविधा संभवतः चिट्ठाजगत् में भी होनी चाहिए, परंतु वह आमजन के पहुँच में है, इसका मुझे ज्ञान नहीं है.


मैंने कुछ ऐसे चिट्ठो…

गूगल हेल्थ : अगले दस सालों में हृदयाघात से आपके मरने के कितने खतरे हैं?

चित्र
गूगल हेल्थ का बीटा संस्करण आपके लिए तमाम स्वास्थ्य संबंधी सूचनाएं व निदान लेकर हाजिर हो गया है.

इसमें आप अपने जीमेल खाते से पंजीकरण कर सकते हैं और अपनी निजी चिकित्सकीय व पैथॉलाजी जांच इत्यादि जानकारी यहाँ भर सकते हैं. उन जानकारियों के अनुसार समय समय पर आपको स्वास्थ्य संबंधी जानकारियाँ व रोगों के निदान संबंधी परामर्श तो दिए ही जाएंगे, जाल स्थल पर उपलब्ध स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं की सुविधा भी गूगल हेल्थ से मिलेगी.



मैंने अपनी कुछ जानकारियाँ अपने प्रोफ़ाइल में भरीं और देखना चाहा कि अगले दस सालों में मेरे हृदयाघात से मरने का कितना खतरा है. यह कुछ डाटा प्रोसेसिंग सा करता रहा और इधर मेरे हृदय की धड़कन बढ़ती गई. जैसे जैसे इसकी प्रक्रिया पूर्ण होने का कम्प्लीशन बार भरता गया, मुझे लगा कि ये तो आज घंटे भर बाद की भविष्यवाणी करने वाला है. और....



और, ये लीजिए. एक पॉपअप विंडो प्रकट हुआ. जिसमें लिखे को पढ़कर मेरे हृदय को सुकून मिला. एप्लीकेशनघात हो गया था. मेरा हार्ट फेल होने के बजाए एप्लीकेशन फेल हो गया था. दोबारा इसे आजमाने की हिम्मत ही नहीं हुई. मगर, गूगल हेल्थ के जरिए यह जानना दिलचस्प होगा कि चिट्ठा…

कंटेंट इज द किंग बनाम आंकड़ों की बाजीगरी

चित्र
100?200?500?1000?

आपके चिट्ठे आखिर कितने लोग पढ़ते हैं? इस पर लिखने की जिम्मेदारी जब अंतत मुझ पर ठेल दी गई (बॉल अगले की कोर्ट में फेंक दी गई,) तो इस विषय में भले ही मेरी जानकारी सीमित हो, परिपूर्ण न हो, मेरी अपनी जानकारी के अनुसार मामले में कुछ उलटा सीधा दरियाफ़्त करने की कोशिश तो कर ही सकता हूं.

जैसे ही आप अपना चिट्ठा प्रकाशित करते हैं, इसमें लगे हुए यंत्र और स्क्रिप्ट तमाम दुनिया को सूचना (पिंग) देते हैं कि भाई एक नया चिट्ठा प्रकाशित हो गया है. आइए इसे पढ़िए. सर्च इंजनों, चिट्ठा संकलकों से लेकर व्यक्तिगत ग्राहकों - सभी तक ये अलग अलग जरिए से पहुँचता है. यहां से शुरू होता है आंकड़ो का अजूबा खेल.

आइए, देखते हैं कि रचनाकार की रचनाओं को कौन, कितना पढ़ता है.

ब्लॉगवाणी के जरिए रचनाकार के किसी चिट्ठे में पहुँचने वाले पाठक शायद ही कभी दो अंकों की संख्या को पार कर पाए होंगे. चित्र गवाह है – विवादित विषय पर भी संख्या 14 से पार नहीं गई.


रचनाकार के नियमित ग्राहक जो फ़ीडबर्नर से सब्सक्राइब करते हैं उनकी औसत संख्या है – 80.

यदि आप अपने चिट्ठे की पूरी फ़ीड प्रकाशित करते हैं, जैसे कि रचनाकार में होता है, …

लीक से हटकर कुछ हिन्दी पत्रिकाएं

चित्र
(1) कोंगु निधि
नाम आपको थोड़ा अजीब सा प्रतीत हो सकता है. यह हिन्दी पत्रिका कर्मचारी भविष्य निधि संगठन कोयंबत्तूर की गृह पत्रिका है. इसके प्रधान संपादक हैं युगमानस के चिट्ठाकार डॉ. सी. जयशंकर बाबु. यह पत्रिका कोयंबत्तूर क्षेत्र की राजभाषा गृह पत्रिका है जो मूलत: इस संगठन के ऑफ़िस में आंतरिक वितरण के लिए प्रकाशित होती है. इसकी ख़ूबी ये है कि इसमें प्रकाशित रचनाओं के प्रायः तमाम लेखक दक्षिण भारतीय हैं. इस वजह से भाषागत अनगढ़ता भले ही प्रकट होती हो, मगर कथ्य और भावों में उथलापन कहीं से नजर नहीं आता. कोंगु निधि भले ही सरकारी गृह पत्रिका के रूप में प्रकाशित हो रही हो, परंतु इसका कलेवर शानदार है. 60 पृष्ठों की पत्रिका (मार्च 08 अंक) में हर किस्म की रचनाओं को स्थान दिया गया है. हिन्दी तमिल सीखें पर एक पूरा आलेख है तो पूरा एक पृष्ठ हिन्दी के जालस्थलों की कड़ियों पर समर्पित है. पत्रिका विक्रय हेतु नहीं है, परंतु नमूना प्रतियों के लिए संपादक से संपर्क किया जा सकता है.

कहीं कहीं हिन्दी भाषा की अपरिपक्वता नजर आती है – जैसे कि कुरुक्किया काइन नाम के पकवान बनाने की विधि के लेखक का नाम कुछ यूँ दिया …

बस, एक अदद डिजाइनर पैरेंट की दरकार है बाबा...

चित्र
आप सभी माता-पिताओं, पालकों के लिए खुशखबरी है कि अब आप विज्ञान और तकनीक के सहारे डिजाइनर बच्चे पा सकते हैं. स्टेम सेल पर हालिया हुई खोजों और जेनेटिक इंजीनियरिंग के बलबूते डिजाइनर बच्चे अब कल्पना की वस्तु नहीं रह गए हैं.

ऐसे में कुछ मजेदार परिस्थितियों की कल्पना क्या आप कर सकते हैं? दो डिजाइनर बच्चे आपस में झगड़ेंगे तो एक दूसरे के जेनेटिक क्वालिटी की मीनमेख कुछ यूँ निकालेंगे – मेरे में तीव्र बुद्धि का, जीनियस बनने का जीन है – तू मुझसे मैथ्स में पार नहीं पा सकता. दूसरा प्रतिकार करेगा - मुझमें सुपर एथलीट बनने का जीन है – एक मुक्का मारूंगा तो बत्तीसी बाहर आ जाएगी. एक कहेगा - मेरे पालक ने दस लाख खर्च कर ब्यूटी और ब्रेन का जीन डलवाया है. दूसरा बगलें झांकेगा और शाम को अपने पालकों से झगड़ा करेगा कि यदि उनमें अपने बच्चों में स्पेशल जीन डलवाने की, बच्चों को डिजाइनर बनवाने की कूवत नहीं थी तो आखिर उन्होंने बच्चे पैदा ही क्यों किए.

दो पालक कभी आमने सामने होंगे तो उनके मन में पहला प्रश्न ये उठेगा कि सामने वाले ने अपने बच्चे में क्या क्या डिजाइनर गुण डलवाए हैं. वे एक दूसरे के निर्णय का उपहास करेंगे – ह…

तीन साल पहले के हिन्दी चिट्ठाकार और उनकी चिट्ठियाँ

चित्र
आज से ठीक तीन वर्ष पहले हिन्दी चिट्ठासंसार में ले देकर सिर्फ पचास चिट्ठाकार थे. आइए देखते हैं कि उस दौरान चिट्ठाकार क्या और कैसे लिख रहे थे.प्रस्तुत है 30 मई 2005 को छींटे और बौछारें में प्रकाशित मूल प्रविष्टि :
10 वीं अनुगूँज: चिट्ठियाँ लिखने के दिन, लगता है सचमुच लद गए.
**//**

*-*-*
जब मैंने 10 वीं अनुगूँज के लिए विषय दिया था तो उत्साहित था कि लोग-बाग जी भर के चिट्टियाँ लिखेंगे, चिट्ठियाँ लिखकर अपने पुराने दिनों की यादों को ताज़ा करेंगे या भविष्य का जायजा लेंगे, और चिट्ठियाँ लिखने की अपनी भूलती-बिसरती कला को एक बार फिर याद कर उसे परिष्कृत परिमार्जित करने की कोशिश करेंगे.परंतु, साहबान, मैं गलत था, मेरा यह खयाल गलत था. मेरा यह विचार सिरे से ख़ारिज कर दिया गया. दरअसल, दुनिया अब तेज़ी से प्रगति पथ पर है और चिट्ठी लिखने पढ़ने का माद्दा लोगों के पास से ख़त्म होता जा रहा है.इससे लगता है कि चिट्ठियाँ लिखने के दिन सचमुच लद गए. भले ही उसे हमें अपने कम्प्यूटर पर लिखने कहा जाए, चिट्ठियाँ लिखना हम भूलते जा रहे हैं. यही वजह है कि हिन्दी के पचास से ऊपर चिट्ठाकारों में से बमुश्किल आधा दर्जन चिट्ठियाँ ह…

कुछ आजमाए हुए धन बनाने के विचार

चित्र
कुछ लोगों के लिए ये तकनीक का बेजा इस्तेमाल हो सकता है, परंतु कुछ शातिरों के लिए धन बनाने की एक शानदार मशीन.पर, क्या ये धंधा चल निकलेगा? मेरे विचार में ये धंधा क्या ऐसे किसी भी धंधे के ज्यादा दिन तक चल सकने की किसी तरह की कोई उम्मीद नहीं है. बकरे की अम्मा कब तक ख़ैर मनाएगी आखिर.गूगल के अनुवाद औजार जैसे स्वचालित मशीनी तकनीक का सहारा लेकर एक ही आलेख के हर संभव भाषा में अनुवाद कर एक ऐसा ही बहुभाषी ब्लॉग साइट बनाया गया है. जिसका प्राथमिक उद्देश्य ही प्रतीत होता है कि हर संभव तरीके से गूगल सर्च ट्रैफ़िक खींच कर एडसेंसी कमाई की जाए.यह ब्लॉग स्थल भी हिन्दी के किसी वाक्यांश के गूगल में खोज के दौरान मिला. परंतु एक बार प्रयोक्ता के वहां जाकर देख आने के बाद क्या कभी गलती से भी दोबारा उसके द्वारा कदम वहां रखा जाएगा? शायद नहीं. भले ही आलेखों में कुछ सार तत्व हों (प्राथमिक दृष्टि से तो ऐसा कुछ ज्यादा नजर नहीं आता) मगर हर संभव भाषा में अनुवाद कर उन्हें एक ही (ब्लॉग) स्थल पर रखने का शातिराना तकनीकी खिलवाड़ वाकई नायाब, नए किस्म का है!वैसे, दूसरी निगाह में, क्या ये विचार शानदार नहीं है? क्यों न हम भी अ…

इन्फ़ोसिस में एक साक्षात्कार

यह साक्षात्कार इतना प्रसिद्ध है कि अंग्रेज़ी में इसकी कोई दस कड़ियाँ (1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10) कॉपीस्केप के जरिए हासिल हो चुकी हैं. वैसे, मूल लेखक (कौन हैं?) को साधुवाद सहित इसका हिन्दी तर्जुमा प्रस्तुत है:

इन्फ़ोसिस में एक साक्षात्कार

परीक्षक : अपने बारे में कुछ बताएं.
परीक्षार्थी: मेरा नाम कोनदेश कुलकर्णी है. मैंने बबनराव ढोले-पाटिल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलाजी से टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में बीई किया है.

परीक्षक: बबनराव ढोले-पाटिल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलाजी? आज से पहले इसका नाम मैंने नहीं सुना था!
परीक्षार्थी: बढ़िया! मैंने भी इसका नाम तब तक नहीं सुना था जब तक मैंने इसमें दाखिला नहीं लिया था. हुआ ये था कि क्रिकेट मैचों के कारण मेरी 12वीं का ग्रेड बिगड़ गया और इंजीनियरिंग एंट्रेंस सड़ गया. मुझे अच्छे कॉलेज में पेड सीट मिल रही थी. परंतु मेरे पिताश्री -मैं उन्हें ‘बाप’ कहना ज्यादा पसंद करता हूं- ने कहा “मेरे पास इतना ज्यादा पैसा तुम्हारी पढ़ाई में लगाने के लिए नहीं है”. दरअसल वे सही में ये कहना चाह रहे थे और मैं जानता था – “मैं कभी भी इतना सारा पैसा तुम पर लगा नहीं सकता”. तो मेरे पा…

कहीं आप भी एजेंट तो नहीं...

चित्र
पुराने दिनों को लोगबाग याद करते हैं तो क्या बुरा करते हैं. हर गुजरा हुआ पुराना दिन मीठी याद लिए हुए होता है और वो शर्तिया वर्तमान और आने वाले दिनों से ज्यादा अच्छा होता है.

अब, बीमा के मामलों को ही ले लें. ज्यादा नहीं, अभी चार-पाँच साल पुरानी बात ही ले लें. क्या खुशनुमा दिन थे वो भी. ले देकर इक्का दुक्का सरकारी बीमा कंपनियां होती थीं भारत में और उसके पूर्णकालिक-अंशकालिक एजेंट होते थे जो आमतौर पर वर्ष के आखिरी महीनों में टैक्स प्लानिंग और इंश्योरेंस और कभी कभी बचत के नाम पर इंश्योरेंस हेतु आग्रह करते दिखाई पड़ते थे.

मगर, बेड़ा गर्क हो इन मनमोहनी और चिदंबरमी आर्थिक सुधारों का कि दर्जनों बीमा कंपनियाँ देखते ही देखते चली आई हैं और कई चली आने की कवायद में हैं. गली मुहल्लों में इनके लकदक और चकाचक करते ऑफ़िस पे ऑफ़िस खुलते चले आ रहे हैं.

बात इन बेहिसाब कंपनियों और गली मुहल्ले में खुलते बीमा कंपनियों के ऑफ़िसों तक सीमित नहीं है. समस्या ये नहीं हैं. समस्या की जड़ दूसरी है. पुराने दिनों की मीठी यादों को और मीठी करती वर्तमान की समस्याएँ कुछ और ही हैं.

आप किसी पार्टी में गए हुए होते हैं. वहां कोई परि…

मैरे ईमैल में वर्तनि कि गलति अब नहिं होगि…

चित्र
गूगल बाबा की सौगातें हिन्दी के लिए जारी हैं. गूगल डॉक्स में कुछ समय पूर्व उपलब्ध हिन्दी वर्तनी जांच की सुविधा जो वापस ले ली गई थी, उसे बहाल कर दिया गया है और क्या ख़ूब किया गया है. यह एमएस ऑफ़िस हिन्दी की वर्तनी जांच सुविधा से सीधे टक्कर ले रहा है, और किसी मामले में कम नहीं है. बल्कि यह कहा जाए कि एमएस वर्ड से हिन्दी वर्तनी जांच से कुछ मामले में यह बीस है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. हाथ कंगन को आरसी क्या? नीचे स्क्रीनशॉट देखें.


एमएस वर्ड का हिन्दी वर्तनी जांच


जीमेल का हिन्दी वर्तनी जांच



गूगल डॉक्स का हिन्दी वर्तनी जांच

हाँ, पर इसमें एमएस वर्ड हिन्दी में उपलब्ध थिसॉरस की सुविधा नहीं है. पर, उसकी जरूरत आम प्रयोक्ता को उतनी नहीं है जितनी मूलभूत हिन्दी वर्तनी जांच की. हिन्दी वर्तनी जांच की यह सुविधा जीमेल में भी उपलब्ध है. यानी मेरे ईमेल में वर्तनी की गलती अब नहीं होगी. हाँ, ये लिखते लिखते ही वर्तनी नहीं जांचता. पूरा लिखने के बाद वर्तनी जांच पर क्लिक करने पर यह जांचता है. वर्तनी जांच हेतु विकल्प में हिन्दी भाषा चुनें. नए शब्दों पर क्लिक करने पर यदा कदा यह वैकल्पिक शब्द भी सुझाता है तथा आपके शब्द…

गुरुजी संगीत खोज – इंटरनेट पर हिन्दी फ़िल्मी संगीत ढूंढने हेतु एक त्वरित और भरोसेमंद सेवा.

चित्र
पिछले हफ़्ते भारतीय भाषाओं के खोजक गुरुजी खोज द्वारा भारतीय फ़िल्म संगीत खोज के लिए एक नई सेवा प्रस्तुत किया गया.

वैसे तो हिन्दी फ़िल्मी गीतों को इंटरनेट पर ढूंढने के लिए कई प्रकल्प हैं, जिनमें एक प्रमुख, बढ़िया सेवा की कड़ी इस चिट्ठे की बाजू पट्टी में उपलब्ध है. यह सेवा भी अच्छे परिणाम देती है. परंतु आरंभिक जांच परख में गुरुजी संगीत खोज के परिणाम ज्यादा बेहतर रहे.

मैंने एक हिन्दी गाना उसके बोलों से ढूंढने की कोशिश की. जिसके बोल हैं – रेखा ओ रेखा जिसने तुम्हें देखा.


गुरूजी संगीत खोज इस गीत की कोई तीन कड़ियाँ खोज लाया और उसमें से कोई दो कड़ी पर उसके ऑनलाइन प्लेयर पर सुना भी जा सका. तीसरी कड़ी, बस देर तक लोड होती रही और बजी नहीं.


गुरुजी संगीत खोज में आप गानों के बोल, गायक, संगीत कार, फ़िल्म, गीत कार, कलाकार (एक्टर), एलबम इत्यादि के आधार पर भी खोज सकते हैं. 1932 से लेकर 2008 तक के हिन्दी (अन्य भारतीय भाषाओं के गाने भी) आप ढूंढ सकते हैं.

गुरुजी संगीत खोज में अभी आप हिन्दी गानों को सिर्फ रोमन में ही खोज सकते हैं. इसके पीछे कारण ये है कि अधिकतर सर्वरों में इन गानों को इनके रोमन नामों व उच्चारणों…

ग्रांड थेफ़्ट ऑटो 4 : कामुक, खूनी खेल?

चित्र
ग्रांड थेफ़्ट ऑटो 4 : हिंसा व यौन अपराधों से भरपूर, नया ताज़ातरीन वीडियो गेम

स्पेस वार और पांग जैसे शुरूआती कम्प्यूटर और वीडियो गेमों के प्रेमियों ने कभी ये अनुमान नहीं लगाया होगा. वीडियो गेम के पुरातन हीरो मारियो ब्रदर्स जैसे प्यारे व्यक्तित्व का ग्रांड थेफ़्ट ऑटों के आधुनिक निको बैलिक जैसे अपराधी और कामुक ख़ूनी के रूप में परिवर्तन - जिसका काम ही, यथा-नाम-तथा-गुण, मोटर-बाइकों और कारों की चोरी से प्रारंभ होता हो – निश्चित ही हाहाकारी है.
(ग्रांड थैफ़्ट ऑटो का हीरो - निको बैलिक)


(प्यारा सा, छुन्ना सा मारियो)

मगर, खेल प्रेमियों ने इसे हाथों हाथ लिया है. ये सचमुच आश्चर्य है कि दुनिया अपराध से इतना प्यार क्यों करती है? 29 अप्रैल 2008 को इसके जारी होने के पाँच दिनों के भीतर ही प्लेस्टेशन और एक्सबॉक्स 360 के लिए एक साथ जारी ग्रांड थेफ़्ट ऑटो 4 की 9 लाख 26 हजार प्रतियाँ हाथों हाथ बिक गईं और यह वीडियो खेलों में अब तक का सबसे ज्यादा बिकने वाला वीडियो गेम बन गया. चंद शुरूआती दिनों में ही इसके निर्माता रॉकस्टार नॉर्थ को कोई 200 करोड़ रुपए की आय हो चुकी है. एक अनुमान के अनुसार यह पाइरेट्स ऑफ कैरिबियन…

धनवान कौन?

चित्र
आपसे मेरा एक छोटा सा सवाल है - धनवान कौन?

प्रसंगवश, आज ही डॉ. अनिल चड्ढा ने अपने चिट्ठे में पूछा है - भिखारी कौन?

भिखारी कौन है ये जानने के लिए आपको डॉ. अनिल चड्ढा के चिट्ठे के ऊपर दिए गए लिंक पर जाना होगा. और धनवान कौन है ये जानने के लिए शेयर बाजार के खबरों व विश्लेषणों पर आधारित विश्व के पहले हिन्दी पोर्टल मोलतोल.इन पर जाना होगा. यदि आप समझते हैं कि आप धनवान नहीं हैं, तो धनवान बनने के लिए टिप्स और युक्तियाँ पाने के लिए यहाँ जाएं. और यदि आप समझते हैं कि आप धनवान हैं, तो अति-धनवान बनने के लिए, और अधिक धनवान कैसे बनें इस हेतु जानकारियाँ प्राप्त करने के लिए उपयोगी मोलतोल.इन से बेहतर कोई और जगह हो सकती है भला!

मोलतोल.इन का आरंभिक कलेवर और सामग्री स्तरीय दिखाई देता है. पाठकों व निवेशकों को शेयर बाजार में निवेश के प्रभावी तरीकों के बारे में, उम्मीद करें कि यह साइट नियमित रूप से अपडेट करती रहेगी.

मोलतोल.इन को शुभकामनाएं.

तो फिर, अब जरा सोच समझ कर बताएं, आप अपने आप को धनवान मानते हैं कि नहीं?

चिट्ठाकारों के लिए मूढ़मतियों का गाइड

चित्र
हम सभी के भीतर एक मूढ़मति छुपा हुआ होता है. किसी कार्य को, किसी ट्रिक को, किसी टिप को आजमाने के लिए हमें तरीके ढूंढने होते हैं, जुगाड़ लगाने होते हैं. और, बहुधा, आसान से लगने वाले कार्य भी सीधे-सीधे पल्ले नहीं पड़ते.

इन्हीं बातों के मद्देनजर लिखी गईं तमाम विषयों के डमी के गाइड और परिपूर्ण ईडियट की गाइडें बाजार में अच्छी खासी संख्या में बिकती रही हैं.

मेरा शुरूआती कम्प्यूटिंग ज्ञान डमीज गाइड टू यूनिक्स और डमीज गाइड टू विंडोज के सहारे ही परवान चढ़ा था. अभी भी कभी कहीं पर अटकता हूं तो ये किताबें काम आती हैं क्योंकि कभी स्मृत्तिलोप यदा कदा होता ही रहता है, तो कभी अब तक नहीं आजमाए गए नए पुराने जुगाड़ों के लिए भी उनके पन्ने पलटने पड़ते हैं.

ब्लॉगर के लिए भी एक डमीज गाइड है. यह ऑनलाइन है और मुफ़्त है. हालाकि अभी ये किसी सूरत में परिपूर्ण नहीं है, मगर फिर भी कुछ शुरूआती विस्तृत गाइड तथा टिप्स और ट्रिक्स इसमें उपलब्ध हैं, जो ब्लॉगर के चिट्ठाकारों के लिए बहुत काम के हैं.

और, यदि आप वर्डप्रेस इस्तेमाल करते हैं तो फिर तो आपके लिए पूरे का पूरा वर्डप्रेस फ़ॉर डमीज किताब उपलब्ध है. अभी खरीद लाएँ…

विशाल लाइब्रेरी में से पढ़ें >

अधिक दिखाएं

---------------

छींटे और बौछारें का आनंद अपने स्मार्टफ़ोन पर बेहतर तरीके से लें. गूगल प्ले स्टोर से छींटे और बौछारें एंड्रायड ऐप्प image इंस्टाल करें.

इंटरनेट पर हिंदी साहित्य का खजाना:

इंटरनेट की पहली यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित व लोकप्रिय ईपत्रिका में पढ़ें 10,000 से भी अधिक साहित्यिक रचनाएँ

हिन्दी कम्प्यूटिंग के लिए काम की ढेरों कड़ियाँ - यहाँ क्लिक करें!

.  Subscribe in a reader

इस ब्लॉग की नई पोस्टें अपने ईमेल में प्राप्त करने हेतु अपना ईमेल पता नीचे भरें:

FeedBurner द्वारा प्रेषित

ऑनलाइन हिन्दी वर्ग पहेली खेलें

***

Google+ Followers

फ़ेसबुक में पसंद करें