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April, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

लिनक्स चोखेरबालियाँ....

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आप पूछेंगे कि लिनक्स में चोखेरबालियों का क्या काम? थोड़ा धीरज रखिए. आगे पढ़िए.

वैसे तो इस पोस्ट को उन्मुक्त के चिट्ठे पर अवतरित होना चाहिए था, क्योंकि वे लिनक्स प्रेमी तो हैं ही, अपना संपूर्ण कार्य लिनक्स पर ही करते हैं. मैं विंडोज और लिनक्स के बीच डूबता उतराता रहता हूं, क्योंकि अभी भी बहुत से भाषाई औजार जिनपर मैं काम करता हूँ, उनके विकल्प न तो पूरे तौर पर विंडोज विस्ता में मौजूद चलते हैं न लिनक्स पर.

लिनक्स को स्त्रियाँ भी बेहद पसंद करती हैं. और, लिनक्स प्रेमी पुरुषों का तो कहना ही क्या!
लिनक्स प्रेमी स्त्रियों के लिए एक साइट है – अंग्रेज़ी में, जिसका नाम है – लिनक्स चिक्स.ऑर्ग लिनक्स चिक्स.ऑर्ग का भारतीय चेप्टर भी है, जो 2005 से शुरू हुआ था. भारतीय लिनक्स चोखेरबालियों का उनका एक अपना ग्रह भी है.

अब आते हैं, मुद्दे पर. शीर्षक पर. क्या ये हिट खेंचू टाइप शीर्षक है? शायद हाँ, शायद नहीं.
पर, लिनक्स चिक्स का विशुद्ध भारतीयकरण : लिनक्स चोखेरबालियाँ से बेहतर किसी के दिमाग में सूझता हो तो बताएँ :)

ब्लॉग को इन : वर्डप्रेस डॉट कॉम जैसी मुफ़्त ब्लॉग सुविधा एडसेंस के साथ

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वर्डप्रेस में अपने स्वयं के चिट्ठे पर एडसेंस जैसी सुविधा लगाने के लिए आपको स्वयं का डोमेन लेना होता है और स्वयं ही वर्डप्रेस का प्रबंधन करना होता है. हमारे जैसे मुफ़्त खोरों के लिए वर्डप्रेस डॉट कॉम की सुविधा ही ठीक लगती है, परंतु उसमें हम बहुत सी सुविधाएँ मनमर्जी से लगा नहीं सकते – जैसे कि एडसेंस.ब्लॉग.को.इन यह सुविधा प्रदान कर रहा है.मैंने एक जांच खाता खोला और एक जांच पोस्ट बनाया. कुछ प्रयोगों के पश्चात् मेरे निष्कर्ष ये रहे –यह एडसेंस लगाने की सुविधा ब्लॉगरों को दे तो रहा है, परंतु इसमें एडसेंस प्लगइन जैसा कुछ लगा है जो एडसेंस को रेंडमली प्रदर्शित करता है. इसमें लोचा यह है कि कोई तीन दफ़ा पेज लोड करने पर उपयोक्ता का एडसेंस एक बार दिखता है, तो ब्लॉग को इन का दो बार (औसत रूप से, इसका उलटा भी हो सकता है – संभाव्यता कुछ भी हो सकती है). यानी आपके कंटेंट और आपकी सामग्री पर ब्लॉग को इन का फ़ायदा. भई, ये बात स्पष्ट कहीं पर लिख देते तो अच्छा होता. प्रयोक्ता इतने नासमझ भी नहीं हैं!दूसरी बात, जब भी आप इसके किसी भी ब्लॉग का पेज लोड करते हैं तो इसका अंतर्निर्मित स्वचालित आरएसएस सब्सक्रिप्शन पॉप…

टॉम क्रूज़ जैसी शख्सियत लाऊं तो लाऊं कैसे?

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पर, मेरे जैसे औसत दिखने वाले, एवरेज लुकिंग लोगों के लिए खुशी की बात ये है कि हम टॉम क्रूज जैसे सुंदर, हैंडसम लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा भरोसेमंद होते हैं. और, ये पुख्ता बात मैं नहीं, एक सर्वेक्षण का परिणाम कह रहा है. वैसे तो सभी की चाहत होती है, सुंदर, हैंडसम दिखने की. युगों युगों से तमाम तरह के उपाय किये जाते रहे हैं अपने आप को सुंदर दिखाने के लिए. इसमें जहाँ प्रकृति भी जेनेटिक रूप से सहयोग देती रही है तो कृत्रिम रूप से सुंदर दिखने हेतु कपड़े, गहने, सौंदर्य-प्रसाधन, ब्यूटी पॉर्लर, सौंदर्य-शल्य-चिकित्सा इत्यादि के बाजार भी दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं और फल फूल रहे हैं. परंतु सुंदर दिखने की इस कोशिश में लोग अपनी क्रेडिबिलिटी, दूसरों का भरोसा तो नहीं खो रहे? सर्वेक्षण के नतीजों से लगता तो ऐसा ही है. यह सर्वेक्षण आपकी सोच में भारी बदलाव ला सकता है. अब आप किसी अत्यंत खूबसूरत, अतिसुंदर व्यक्ति को देखेंगे तो आपके मन में उसके प्रति भरोसे का कोई भाव नहीं उभरेगा. साधारण सुंदर व्यक्ति पर आप साधारण रूप से भरोसा कर सकेंगे और जहाँ भी आपको मेरे जैसे औसत दिखने वाले लोग मिलेंगे, उन पर आ…

भास्कर के ब्लॉग यायावरी में रेडियोवाणी की जमकर, जबर्दस्त दस्तक

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(चित्र को पढ़ने लायक बड़े आकार में देखने के लिए चित्र पर क्लिक करें)

दैनिक हिन्दुस्तान में कल सस्ता शेर की बड़ी मंहगी चर्चा हुई. इधर भास्कर इंदौर के साप्ताहिक पेशकश दस्तक के नियमित स्तंभ ब्लॉग यायावरी में यूनुस खान के रेडियोवाणी के बारे में विस्तार से लिखा गया है. यह आलेख भास्कर के ई-पेपर के इंदौर संस्करण के आज के अंक में पृष्ठ 9 पर भी उपलब्ध है.
इससे पहले यूनुस खान का अपने ब्लॉग रेडियोवाणी पर शमशाद बेगम पर लिखा आलेख इस गुजरे शनिवार के नवरंग में प्रकाशित हुआ था. प्रसंगवश, इसी गुजरे हफ़्ते रविवार को रसरंग में रचनाकार में पूर्व प्रकाशित संजय सेन सागर की कविता भी प्रकाशित हुई है.


मुख्यधारा की मीडिया में चिट्ठों की चर्चाएं व सामग्री का पुनर्प्रकाशन - आई एम लविंग इट!

प्रस्तुत है विश्व का सर्वोत्तम ऑनलाइन अंग्रेज़ी-हिन्दी शब्दकोश...

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विश्व के सर्वोत्तम ऑनलाइन अंग्रेज़ी-हिन्दी शब्दकोश को वायदे के मुताबिक प्रस्तुत कर रहे हैं खांडबहाले.कॉम जिन्होंने विश्व का सर्वप्रथम अंग्रेज़ी-मराठी शब्दकोश प्रस्तुत किया है.

इसका इंटरफेस तीव्र है, बिना किसी तामझाम युक्त. खोज परिणाम भी संतुष्ट करते हैं. परंतु यह सर्वोत्तम है, इस कथन का आधार स्पष्ट नहीं होता.

यह ऑनलाइन ही कार्य करता है. और पूरे समय ऑनलाइन कार्य करने वालों के लिए उत्तम है चूंकि यह मुफ़्त उपलब्ध है, और ब्राउजर आधारित होने के कारण हर प्लेटफ़ॉर्म पर चलता है.

प्रसंगवश, इंटरनेट पर उपलब्ध मुफ़्त के संसाधनों के जरिए ऑफलाइन उपयोग हेतु एक वृहद अंग्रेज़ी-हिन्दी शब्दकोश अनुनाद ने बनाया है जिसे मैंने आज ही अपलो़ड किया है, जिसे आप अपने इस्तेमाल के लिए यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं. यह अपने पूर्व के संस्करण से बहुत ही अच्छा व उन्नत तो है ही, इसका शब्द भंडार भी प्रचुर है.

चलिए, हम भाषा प्रेमियों के लिए अब ढेरों विकल्प मौजूद हैं - और वो भी एक से बढ़कर एक!
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अद्यतन #यह बात ध्यान में लाई गई है कि शब्दकोश का निर्माण मेरे द्वारा उपलब्ध करवाई गई जीपीएल सामग्री से लेकर फ्रीवेयर रूप में जारी किय…

आपकी खुशियों में आपकी उमर का भी, यकीनन, कुछ तो है हाथ...

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दुःखी, क्रोधित, बेजार, परेशान दिखाई देते रहकर आखिर आप क्या सिद्ध करना चाहते हैं? बात भले ही बहुतों के गले न उतरे, मगर ये तो सिद्ध हो ही गया है. खुशियाँ यूँ ही आपके पास चली नहीं आतीं. खुशियाँ पाने के लिए आपको अपने बाल सफेद करने होते हैं. और यदि आप मेरी तरह के हुए, तो, अच्छे खासे बाल खोने भी पड़ते हैं.वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का तो काम ही यही है. चंद सेंपल ले लिया, उस पर जमकर अध्ययन कर डाला, निरीक्षण पत्रक बनाया, और दन्न से निष्कर्ष निकाल लिया. इसी बिना पर अब वे कहते हैं कि उम्र के साथ साथ आदमी ज्यादा खुश होता जाता है – यानी वो ज्यादा खुश होता है बनिस्वत अपने पहले के उम्र के. तो क्या हमारे जैसे लोगों को, जो अपने जीवन के अर्ध शती की ओर तेजी से दौड़ लगा रहे हैं, इस निष्कर्ष को पढ़ कर ज्यादा खुश होना चाहिए कि भइए, अब हम भी ज्यादा खुश रहने लगे हैं. पर, फिर साठ-सत्तर वाले नहीं कहेंगे - मूर्खों, ज्यादा खुश मत हो, यह अधिकार हमारा है. अभी तो हम ज्यादा खुश हो रहे हैं. तुम्हें उस स्तर तक पहुँचने में दस-पंद्रह बसंत और पार करने होंगे. और, युवा? क्या वे यह सोच सोच कर दुःखी न हो रहे होंगे…

अभिव्यक्ति की वास्तविक स्वतंत्रता : बेवर्ड्स

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आप ब्लॉगर पर कुछ ऐसा लिख मारते हैं जो किसी अन्य को पसंद नहीं आता है. आपके विचार दूसरे को किसी सूरत नहीं जमते. नतीजतन वो आपके चिट्ठे को फ्लैग करता है. इसमें देरी सिर्फ चंद अन्यों द्वारा ऐसे ही फ्लैग लगाने की होती है और आपका चिट्ठा प्रतिबंधित कर दिया जाता है. मिटा दिया जाता है. बहुत सी जगह सरकारें भी चिट्ठों को प्रतिबंधित कर देती हैं जो उनके कार्यों की आलोचनाएं करते हैं.परंतु अब आप इस तरह के प्रतिबंधों की चिंता किए बगैर, अपने अनसेंसर्ड विचारों वाले चिट्ठे लिख सकते हैं व उन्हें धड़ल्ले से प्रकाशित कर सकते हैं. आपके चिट्ठे को पूरी सुरक्षा प्रदान की जाएगी. यह वादा एक नई ब्लॉग सेवा बेवर्ड्स द्वारा किया जा रहा है.बेवर्ड्स सेवा वही, पुराने द पाइरेट बे वाले ला रहे हैं जो तमाम दुनिया के असली सॉफ़्टवेयर निर्माताओं को अरसे से ठेंगा दिखाते हुए अपने सर्वरों पर तमाम किस्म के पाइरेटेड सॉफ़्टवेयर लोड कर रखे हैं और जिनके नियमित उपयोक्ता लाखों की तादाद में हैं. द पाइरेट बे पर आप बाबा आदम के जमाने के डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम से लेकर ताजातरीन विस्ता तक प्राप्त कर सकते हैं. बेवर्ड्स सेवा वर्डप्रेस पर आधारित है,…

यूज़ इट आर लूज़ इट

जी हाँ, और, ये बात ब्लॉगिंग में भी लागू होती है और लिनक्स कमांडों में भी! इस बात को सिद्ध करने के लिए आपको अभी हाल ही की एक मजेदार घटना सुनाता हूं. दिलकार नेगी की किताब ब्लॉगिंग छोड़ें सुख से जिएं से प्रेरित एकोऽहम् श्री विष्णु बैरागी कल रात एक वैवाहिक प्रीतिभोज समारोह में टकरा गए. अभी वे राइटर्स ब्लॉक की स्थिति में हैं और ब्लॉग लेखन बंद है. हालांकि स्थानीय समाचार पत्र में उनका नियमित स्तंभ नियमित प्रकाशित हो रहा है. परंतु वे हिन्दी ब्लॉगों का अध्ययन मनन करते रहते हैं. चिट्ठा-पठन के दौरान विस्फ़ोट के किसी प्रविष्टि ने उन्हें प्रेरित किया कि वे भी अपनी राय टिप्पणियों के माध्यम से रखें. विष्णु बैरागी पहले कुछ समय तक सक्रिय चिट्ठाकार रह चुके हैं, और उनकी धारदार टिप्पणियाँ भी चिट्ठों को मिलती रही थीं. परंतु, अरे, यह क्या? वे भूल गए कि टिप्पणी देने के लिए हिन्दी कैसी लिखी जाती है! जबकि सक्रिय ब्लॉगिंग से वे ज्यादा दिनों से दूर नहीं हैं. है कि नहीं यूज़ इट ऑर लूज़ इट का परफ़ेक्ट मामला?और, इस बात को तो धुरंधर लिनक्स मास्टर भी स्वीकार रहे हैं. एकदम बोल्ड और पूरे अपरकेस में! इस लेख की स…

दिन में 24 के बजाए 31 घंटे!

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क्या आप भी जब तब समय का रोना रोते रहते हैं? क्या आप इस बात पर दुःखी रहते हैं कि आपके पास करने को बहुत कुछ हैं, मगर समय का सदैव टोटा लगा रहता है? दूसरी तरफ एक अध्ययन ये सिद्ध करता है कि ज्यादा नहीं, सिर्फ कोई दस साल पहले के आपके जीवन के मुकाबले आपके पास दिन के चौबीस के बजाए इकत्तीस घंटे हैं! यह अध्ययन ये बताता है कि आज का मनुष्य बेहतर उपकरणों, नए नायाब किस्म के गॅजेटों इत्यादि की सहायता से बहुत से मल्टीटास्किंग किस्म के कार्य एक ही समय में करता है और इस वजह से वो इतना सारा कार्य कर लेता है जो आज से दस साल पहले का आदमी इकत्तीस घंटे में भी न कर सकता था. यानी दूसरे शब्दों में आज आपके पास दिन के इकत्तीस घंटे होते हैं. और, कमाल ये है कि आप फिर भी समय के टोटे का रोना रोते रहते हैं!आप कम्प्यूटर पर अपने चिट्ठे टाइप कर रहे होते हैं तो साथ में चल रहा विनएम्प मीडिया प्लेयर छोड़ गए बालम हाय अकेला छोड़ गए गाना बजा रहा होता है. एक तरफ थंडरबर्ड का विंडो खुला होता है जिसमें ईमेल का आदान प्रदान चल रहा होता है तो दूसरी तरफ चैट विंडो खुला होता है जिसमें दोस्तों से गप बाजी चल रही होती है. ऊपर एक छोटे से व…

हिन्दी वर्डनेट ब्राउज़र अपने कम्प्यूटर पर संस्थापित कीजिए

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हिन्दी शब्दों के अर्थ व उनके प्रयोगों के उद्धरणों युक्त विशाल शब्द भंडार हिन्दी वर्डनेट आईआईटी मुम्बई द्वारा तैयार किया गया है और यह ऑनलाइन प्रयोग के लिए एक अरसे से उपलब्ध है. इस वर्डनेट को आप अपने कम्प्यूटर पर ऑफलाइन प्रयोग के लिए एक अनुप्रयोग के तौर पर संस्थापित कर सकते हैं. यह निजी व गैर व्यवसायिक प्रयोग के लिए मुफ़्त उपलब्ध है. हिन्दी वर्डनेट अनुप्रयोग की जिप फ़ाइल यहां से डाउनलोड करें. फिर इसे किसी डिरेक्ट्री में अनजिप करें. उस डिरेक्ट्री में जाएं और यदि आप विंडोज पर हैं तो RUN.BAT नामक फ़ाइल पर दोहरा क्लिक करें. यदि आप लिनक्स इस्तेमाल कर रहे हैं तो कमांड टर्मिनल से run.sh चलाएं.वर्डनेट खिड़की प्रारंभ होगा जिसमें आप इनपुट विंडो में हिन्दी शब्दों को भर कर उनके अर्थ व प्रयोगों को भली प्रकार समझ सकेंगे. शब्दों के संज्ञा, विशेषण, क्रिया और क्रिया विशेषण के रूप में अलग-अलग छांट कर भी देख सकते हैं. इसके इनपुट विंडो में हिन्दी अक्षर डालने हेतु एक ऑनलाइन कुंजीपट भी है जिसमें क्लिक करके हिन्दी इनपुट किया जा सकता है. आप चाहें तो शब्द सूची में से भी शब्द छांट सकते हैं.

अपने अजदकी भाषा के चिट्ठे में लगाएं वेबस्टर हिन्दी अंग्रेज़ी हिन्दी डिक्शनरी

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अब आप अपने हिन्दी के चिट्ठों में वेबस्टर शब्दकोश की सुविधा अंतर्निर्मित कर सकते हैं. जरा यह कड़ी देखें. इसमें दिए गए पाठ के किसी भी हिन्दी शब्द पर दोहरा (डबल) क्लिक करें. जैसे कि सरल शब्द पर. फिर थोड़ा सा इंतजार करें. एक पॉपअप विंडो कुछ इस तरह प्रकट होगा.है न कमाल? और, यदि आपका मानना है कि आप मेरी तरह सरल भाषा में लिखते हैं तो आप दूसरे तरह की सुविधा भी लगा सकते हैं, जैसे कि इस चिट्ठे के बाजू पट्टी में लगा है – वेबस्टर शब्दकोश खोज का विंडो. इसमें आपके पाठक अंग्रेज़ी तथा हिन्दी समेत अन्य बहुत सी भाषाओं में शब्दों के अर्थ खोज सकते हैं. कोड प्राप्त करने व निर्देशों के लिए वेबस्टर की साइट पर यहाँ जाएँ. शब्दकोश खोज का कोड आप लेआउट के जरिए लगा सकते हैं, परंतु पाठ पर दोहरा क्लिक कर अर्थ बताने वाली सुविधा के लिए आपको अपने टैम्प्लेट का एचटीएमएल संपादित करना होगा. आप कोड को body टैग के बीच कहीं भी डाल सकते हैं, परंतु सबसे आखीर में डालें तो यह सुविधा जनक होगा. जैसे कि नीचे चित्र में दिया हुआ है-

बिकॉज़, आई वॉज़.

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क्या आप ऐसी कोई आत्मकथा पढ़ना चाहेंगे जिसमें अगाथा क्रिस्टी के लेखन जैसा सस्पेंस हो, जेम्स हेडली चेईज़ की किताबों जैसा टाइट कथानक हो, गुलशन नंदा के उपन्यासों जैसा रोमांस (भले ही कार्य के प्रति) हो, स्वेट मार्डेन की किताबों जैसा प्रेरणास्पद हो और जे. के. रोलिंग के पॉटर सिरीज जैसा मजेदार, जादुई कथानक हो? हो सकता है, आपका टेस्ट मुझसे जुदा हो, परंतु अभी हाल ही में मैंने एक किताब पढ़ी, जिसमें मुझे कुछ ऐसा ही आनंद आया. कोई 300 पृष्ठों की इस बेहद दिलचस्प, पाठकों को बाँध कर रखने वाली किताब को मैं एक ही बैठक में पढ़ गया.इस किताब का नाम है – जी, हाँ, आपने सही कयास लगाया : आई वॉज. जिसे लिखा है, जी हाँ, एपल कम्प्यूटर के जन्मदाता स्टीव वॉजनिक ने.यह किताब स्टीव के उर्वर मस्तिष्क की महा-गाथा है. उन्होंने विस्तार से, परंतु कहीं भी तकनीकी नहीं होते हुए, ताकि आम पाठकों को भी ये समझ में आ जाए, अपने कई पहले-पहल आविष्कारों की कहानी लिखी है. इस प्रयास में कहीं कहीं स्टीव अतिवादी भी हो गए हैं – मैं पहला, मैं प्रथम, विश्व का मैं अद्भुत प्रथम (चाहे तीन रिमोट एक साथ चलाने वाले पहले व्यक्ति के रूप मे…

कम्प्यूटर / मोबाइल उपकरणों के लिए संस्कृत – अंग्रेज़ी शब्दकोश

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अंग्रेज़ी हिन्दी शब्दकोश की चर्चा छिड़ने पर जैसे ही हिमांशु ने तकनीकी-हिन्दी चिट्ठा समूह में यह बताया कि मोनियर विलियम्स रचित संस्कृत-अंग्रेज़ी शब्दकोश फ़ाइल डाउनलोड कर ऑफ़लाइन प्रयोग किया जा सकता है, अनुनाद ने उसे तत्काल एक सुंदर सा आमुख (इंटरफ़ेस) प्रदान कर दिया. परंतु उसमें इनपुट आईट्रांस में ही दे पा रहे थे, यूनिकोड हिन्दी में नहीं. फिर पी.के. शर्मा ने कमान संभाली और, ये हो गया तैयार एक बढ़िया – संस्कृत – अंग्रेजी शब्दकोश. इन कर्मयोगियों को धन्यवाद. संस्कृत अंग्रेज़ी शब्दकोश यहाँ से डाउनलोड कर प्रयोग करें. यह मुफ़्त उपलब्ध शब्दकोश भी ब्राउज़र आधारित है और इसीलिए इसे किसी भी प्लेटफ़ॉर्म में और मोबाइल उपकरणों में भी प्रयोग में लिया जा सकता है. पिछली पोस्ट में अंग्रेज़ी-हिन्दी ऑफ़लाइन शब्दकोश की कड़ियाँ गलत चली गई थीं. कड़ियों को ठीक कर दिया गया है. आपकी सुविधा के लिए कड़ी फिर से दी जा रही है- अंग्रेज़ी हिन्दी शब्दकोश डाउनलोड कड़ी

आपके कम्प्यूटर / मोबाइल के लिए मुफ़्त हिन्दी अंग्रेज़ी शब्दकोश

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अनुनाद ने एक पुराने, मुफ़्त उपलब्ध हिन्दी - अंग्रेज़ी शब्दकोश के एचटीएमएल फ़ाइल पर कुछ जावा स्क्रिप्ट कोड डाल कर उसे एक बढ़िया रूप प्रदान किया है, जो कि न सिर्फ तेज चलता है, बल्कि ऑन-द-फ़्लाई शब्दों को खोजबीन कर आपके सामने लाता है. एक और सुंदर, उपयोगी कार्य के लिए उन्हें धन्यवाद.इस शब्दकोश की खासियत ये है कि चूंकि यह ब्राउज़र आधारित है, अतः यह हर प्लेटफ़ॉर्म पर चलता है - यानी विंडोज पर भी, लिनक्स पर भी और मॅक पर भी. यहाँ तक कि आपके मोबाइल फ़ोन के ऑपेरा मिनी में भी यह चल सकता है (?).इसका देबाशीष का बनाया ऑनलाइन संस्करण पहले से ही उपलब्ध है, परंतु आपके कम्प्यूटर पर बैठा (संस्थापित), हमेशा मौजूद ऑफ़लाइन शब्दकोश जाहिर है, हर हाल में ज्यादा काम का है. हालाकि इसकी शब्द सीमा परिपूर्ण नहीं कही जा सकती है, मगर आम प्रयोग के लगभग सभी अंग्रेज़ी शब्दों के अर्थ इसमें वाक्य प्रयोग सहित मिल जाते हैं.अभी तक इस शब्दकोश फ़ाइल का प्रयोग मैं लिनक्स तंत्र (क्योंकि विंडोज तंत्र पर बहुत से हिन्दी-अंग्रेज़ी शब्दकोश उपलब्ध हैं) पर पाठ फ़ाइल के रूप में प्रयोग करता था व शब्दों के अर्थ ढूंढने के लिए जी…

केडीई हिन्दी टीम : अ लेबर ऑफ़ लव

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(चित्र में दी गई सामग्री पढ़ने के लिए चित्र पर क्लिक कर इसे बड़े आकार में देखें)

लिनक्स फ़ॉर यू के अप्रैल 2008 के अंक में फ़ॉस.इन 2008 परियोजना विजेता - केडीई हिन्दी टोली के बारे में एक संक्षिप्त आलेख प्रकाशित हुआ है. आलेख दिलचस्प है. परंतु कुछ बिन्दु छूट से गए लगते हैं. टोली के एक महत्वपूर्ण स्तम्भ राजेश रंजन की तस्वीर नहीं लगी है. राजेश ने अभी हाल ही में क्रमश: नाम से चिट्ठा लेखन प्रारंभ किया है और उनकी लेखन शैली भी उनके जैसी ही ग़ज़ब की है.
( हिन्दी टीम के महत्वपूर्ण सदस्य राजेश रंजन)

हिन्दी टीम के जी. करूणाकर भारतीय भाषाई लिनक्स में स्तम्भ स्वरूप माने जाते रहे हैं और शुरूआती नींव उन्हीं के द्वारा डाली गई है. भाषाई तकनीक की जानकारी व विशेषज्ञता के बारे में सभी उनका लोहा मानते हैं. और, मैं उनके पर्सनल टेलिस्कोप का लोहा मानता हूँ, जिससे वे मंगल ग्रह के गड्ढों व शनि के छल्लों का अध्ययन करते रहते हैं.
डॉ. गोरा मोहंती अमेरिका में एस्ट्रोफ़िजिक्स के वैज्ञानिक रहे हैं, और जब उनका भाषाई प्रेम जागा तो वे वापस आकर इंडलिनक्स टोली से जुड़े और अभी वे फ्लॉस और भाषाई तकनीक पर इतने काम कर रहे हैं कि …

प्रचार दिस : हिन्दी का नया पुस्तचिह्न सेवा

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अब तक आप पुस्तचिह्न सेवाओं का प्रयोग अंग्रेज़ी में ही करते आए हैं. इस चिट्ठे के नीचे लगा हुआ पुस्तचिह्न सेवा भी अभी अंग्रेज़ी वाला है. परंतु हिन्दी चिट्ठे में अंग्रेज़ी पुस्तचिह्न का क्या काम? विकल्प नहीं होने से यह अब तक लगा हुआ है.

इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए खालिस हिन्दी में भी पुस्तचिह्न सेवा प्रारंभ की गई है. प्रचार दिस नाम की यह ताज़ातरीन सेवा कितनी काम की निकलती है, यह इसके प्रयोग के पश्चात ही पता चल सकेगा.
वैसे तो आप इसके विजेट को अपने चिट्ठे में बगैर पंजीकरण के लगा सकते हैं, परंतु इसका पूरा लाभ लेने-देने के लिए इसमें पंजीकरण अनिवार्य है. मैंने प्रयोग करने हेतु एक खातानाम व ईमेल से पंजीकरण की कोशिश की. आधा घंटा बीत जाने के बाद भी प्रामाणीकरण हेतु ईमेल नहीं आया, जो कि अनावश्यक रूप से आवश्यक है. मुझे लगा कि शायद पंजीकरण में कुछ समस्या हो गई होगी. दुबारा कोशिश की तो प्रचार दिस के मजेदार आभासी व्यक्तित्व श्रीमान् एन गोपालकृष्णन ने मेरा कुछ यूँ स्वागत किया :

फिर मैंने फ़ीडबैक देने की कोशिश की. हिन्दी में सेवा है तो हिन्दी में फ़ीड बैक तो स्वीकारनी ही चाहिए. इनपुट बक्से ने हिन्द…

अगर बीमार नहीं पड़ना है तो... मानसिक हलचल की जुगलबंदी कीजिए.

ज्ञानदत्त पाण्डेय ने बड़ी मेहनत से कोई पाँच घंटे में यह गर्दभ-ऊंट स्लाइड शो बनाया है. बहुत ही शानदार. उद्धरण योग्य. परंतु इसमें एक झमेला है. आप पहले डाउनलोड करें, फिर उसे चलाकर देखें. तो हममें से बहुत से अलालों को (मैं इसे छोड़कर जाने वाला ही था, परंतु जाने क्या सोचकर क्लिक कर डाउनलोड कर ही लिया) ये झंझटिया काम लगता है. वैसे भी आजकल यू-ट्यूब के जमाने में पावरपाइंट प्रेजेन्टेशन किसी सेमीनार के अलावा अपने कम्प्यूटर पर कौन देखता होगा भला?

तो मैंने इसे फ्री पावरपाइंट-वीडियो कनवर्टर प्रोग्राम से वीडियो में परिवर्तित कर दिया, और एक छोटी सी तबले की जुगलबंदी का ऑडियो भी वीडियो में डाल दिया ताकि प्रस्तुतिकरण थोड़ा और मनोरंजक लगे.तो, अब इस शानदार प्रस्तुति को अपने मित्रों को पावरपाइंट संलग्नक के रूप में नहीं, बल्कि फंकी यू-ट्यूब कड़ी के रूप में भेजें. बदले में उनका आभार (मन ही मन दी गई गाली नहीं,) आपको मिलने की पूरी गारंटी, नहीं तो इस पोस्ट को पढ़कर बरबाद हुआ आपका समय आपको वापस लौटाने की भी पूरी गारंटी :)







सबसे बड़ा बेवकूफ़ कौन? मैं!

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सबसे बड़ा बेवकूफ़ कौन? एक अख़बार का सर्वे बता रहा है कि संसार का सबसे बड़ा बेवकूफ़ बुश है. पर वो तो अमरीका का है. उससे हम भारतीयों का क्या लेना देना. तो चलिए दूसरे स्थान के विजेता पर नज़र मारते हैं. अरे, वहां तो आप विराजमान हैं! आम आदमी का झंडा लेकर पगुराए बैठे हैं. पहले लगा कि ये सर्वे बकवास है – ऐसा कैसे कोई सर्वे आपके या मेरे जैसे ‘आम आदमी’ को सबसे बड़ा बेवकूफ़ कह सकता है भला? इससे पहले कि मैं सर्वेयरों और उस अख़बार को गरियाता और उन्हें लानतें मलामतें भेजने के लिए कुंजीपट टकटकाता, मेरे ज्ञान चक्षु कुछ खुले और मुझे मेरी बेवकूफ़ियाँ एक-एक कर नज़र आने लगीं. कल ही की तो बात है. चौराहे से स्टेशन तक का ऑटो किया. ऑटो वाले ने बड़े ही शराफत से मीटर डाउन किया और बिना कोई मोल तोल किए ले चला. स्टेशन पर पहुँचा तो देखा कि मीटर पर किराया सामान्य से डेढ़ गुना बता रहा था. मैं शराफत से बेवकूफ़ बन चुका था. जाहिर है, ऑटो का मीटर टैम्पर किया हुआ था, और रीडिंग ज्यादा बता रहा था.लौटते में जाने कैसे याद आ गया कि घर पर मूंग खत्म हो गया है. वरना जेब में परची डालकर खरीदारी को निकलता हूँ तो भी भूल …

आइए, अग्निलोमड़ को हिन्दीमय करें...

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राजेश ने अपने पिछले पोस्ट में फ़ॉयरफ़ॉक्स के हिन्दीकरण के बारे में विस्तार से लिखा है. राजेश इस समय सक्रिय रूप से फ़ॉयरफ़ॉक्स के नवीनतम संस्करण को हिन्दीकृत करने में लगे हुए हैं, और उनका कार्य लगभग समाप्ति पर है. उम्मीद करें कि फ़ॉयरफ़ॉक्स 3 में संस्थापना के दौरान ही हिन्दी चयन के विकल्प की अंतर्निर्मित सुविधा आपको मिले.

मगर, फिलहाल आप अपने फ़ॉयरफ़ॉक्स (जो भी संस्करण चला रहे हों,) को फ़ॉयरफ़ॉक्स हिन्दी इंटरफ़ेस एडऑन के जरिए हिन्दीमय कर सकते हैं. और बड़ी आसानी से. हिन्दी इंटरफ़ेस का अनुवाद वैसे तो ठीक-ठाक है पर कहीं अटपटा लग सकता है - जैसे कि, लिंक स्थान कॉपी करें. मगर हिन्दी में काम करने का मजा ही अलग है.

फ़ॉयरफ़ॉक्स को हिन्दीमय कैसे करें?

फ़ॉयरफ़ॉक्स ब्राउज़र में काम करते हुए यहां क्लिक करें व जो विंडो खुलेगी उसमें ब्राउज़र एड आन संस्थापित करने का विकल्प चुनें. फ़ॉयरफ़ॉक्स फिर से चालू करें. बस हो गया!

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