संदेश

March, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ईमेल उईमेल ऊईईई...मेल

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आह! वो भी क्या दिन थे! ईमेल के बिना जिंदगी कितनी आसान थी. जो भी मेल (ईमेल का स्नेल, सर्प रूपी संस्करण) आता था वो डाकिया दे जाता था – दिन में एक बार. सुबह सुबह. वो डाक कभी भी इस मात्रा में नहीं पहुंची कि उन्हें पढ़ा नहीं जा सके या उनका जवाब नहीं दिया जा सके.अब तो आमतौर पर हम सब ने एकानेक ईमेल खाता बनाया हुआ है. और हमारे प्रत्येक खाता के ईमेल बक्से भयानक रूप से हर हमेशा भरे हुए रहते हैं. एकाध दिन की छुट्टी आपने नेट से ली नहीं कि मामला और बिगड़ जाता है. वायग्रा और इंटरनेट लाटरी जैसे स्पैम ईमेलों की गिनती तो खैर अलग ही बात है जो स्पैम फ़ोल्डरों से भी तमाम तिकड़मों से बच निकल कर आपके इनबॉक्स में आए दिन नित्य घुसे चले आते हैं. जब तक आप किसी एक ईमेल को खोल कर पढ़ रहे होते हैं और उसका मर्यादा परक जवाब लिखने की सोच रहे होते हैं इतने में आपके ईमेल-डाकिया का डेस्कटॉप कार्यपट्टी प्रतीक झकझकाने लगता है और बताता है कि आपके आईडाक-बक्से में इस दौरान कोई पाँच ईमेल और आ चुके हैं. अपने आरएसएस फ़ीडों, ओरकुट, फेसबुक, आईएम संदेशों और ट्विटर इत्यादि के संदेशों को मिला लें तो मामला और अकल्पनीय हो जाता है.पिछ…

इंडीनेटर: ब्लॉगवाणी पर चढ़ा गिरगिटिया रंग

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गिरगिट का प्रतिरूप इंडीनेटर लेकर आ रहे हैं ब्लॉगवाणी. शायद ये अभी जांच-पड़ताल अवस्था में है.इस चिट्ठे का गुजराती में इंडीनेटरिया पृष्ठ देखें.निश्चित ही इस तरह की संकल्पनाओं व प्रतिस्पर्धा से भारतीय भाषा इंटरनेट पर समृद्ध होगी.इंडीनेटर को ढेरों शुभकामनाएं.

ब्लॉगिंग के टोटल नॉनसेंस के बारे में जानना चाहते हैं?

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तो, मुम्बई ब्लॉगर बारकैम्प में 29 मार्च को शामिल होने के लिए अपने कैलेण्डर में इस तिथि को दर्ज कर लें.इस बार कैम्प में विविध विषयों पर जिनमें चर्चा होनी है, भारतीय भाषाओं में ब्लॉगिंग का भविष्य भी शामिल है, और, जाहिर है, इस चिट्ठे का दिलचस्प (?) शीर्षक भी एक विषय है.तरूण चन्देल, ब्लॉगकैम्प मुम्बई के संचालक का निमंत्रण स्वरूप ईमेल आपके के लिए प्रस्तुत है:****.प्रिय मित्रों मेरा नाम तरुण चंदेल है तथा में ब्लोग्काम्प मुम्बई का आयोजक हूँ| ब्लोग्काम्प मुम्बई ब्लोग्गेर्स का एक जमावड़ा है जहाँ हम सब मिलकर ब्लोग्गिंग जगत पर विभिन्न दृष्टिकोणों से चर्चा करते हें| अधिक जानकारी आप हमारी विकी से प्राप्त कर सकते हैं| मैं सोच रहा था की क्यों ना ब्लोग्काम्प में हम हिन्दी ब्लोग्गिंग पर एक चर्चा करें| विचार ऐसा है कि बहुत सारे ऐसे लोग हैं (जिनमे मैं भी शामिल हूं) जो हिन्दी ब्लोग्स पढ़ना बहुत पसंद करते हैं पर उन्हें कुछ शंकाए हैं जैसे कि हिन्दी में ब्लोग करना क्या english में करने जितना आसान है? क्या हिन्दी ब्लोग्स google के सर्च रिजल्ट्स में आते हैं? ये कुछ एक सवाल हैं उन अनेक सवालों में से जो अन्य ब्…

सिर्फ 2000 शब्दों की ही तो बात है बाबा!

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हिन्दी ब्लॉगों में वर्तनी की ग़लतियों के लिए गाहे-बगाहे नुक्ता चीनी होती रही हैं. इसके लिए सबसे बड़ा कारण है, हर प्लेटफ़ॉर्म पर चल सकने वाले हिन्दी वर्तनी जांचक प्रोग्राम की घोर अनुपलब्धता.मुक्त स्रोत के आस्पैल में हिन्दी वर्तनी जांच की सुविधा उपलब्ध तो है, परंतु वो अभी आधी अधूरी है और स्वयं गलतियों से भरपूर है. अतः इसका कोई अर्थ नहीं है. इसमें अभी कोई अस्सी हजार शब्द हैं, जिन्हें कई स्रोतों से एकत्र किया गया है – बहुधा स्वचालित तरीके से. वर्तनी जांच हेतु पूर्व में एक प्रयास हो चुका है, जिसमें चिट्ठाकार समूह से जुड़े कुछ सदस्यों ने सक्रिय रूप से भूमिका निभाई थी, परंतु वह कार्य अधूरा ही रह गया था. हंसपैल में उपलब्ध हिन्दी वर्तनीजांचक भी मात्र पंद्रह हजार हिन्दी शब्दों का है, जो बहुत काम का नहीं है.
इन अस्सी हजार शब्दों की वर्तनी की जांच की जानी आवश्यक है ताकि आस्पैल हिन्दी वर्तनी जांचक भी स्वयं परिपूर्ण हो सके. आस्पैल हिन्दी वर्तनी जांचक का ओपनऑफ़िस प्लगइन अप्रैल 2008 में जारी किया जाना प्रस्तावित है तथा इसी समय फ़ॉयरफ़ॉक्स व विंडोज के लिए भी इसका इंस्टालर बनाया जाना प्रस्तावित है. जिसस…

दस्तावेज़ फ़ॉर्मेट युद्ध : ओडीएफ़ या ओपनएक्सएमएल?

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आपकी पसंद क्या है?कल्पना करें कि आपने आज अपने कम्प्यूटर पर किसी अनुप्रयोग में कोई बढ़िया सा आलेख लिखा है और उसे किसी ऑफ़िस दस्तावेज़ फ़ॉर्मेट में सहेज कर रख लिया है. इसे कोई सौ बरस बाद आपका पड़-पोता कहीं से ढूंढ निकालता है, और उसे वो पढ़ना चाहता है. तब तक दुनिया बहुत बदल चुकी होगी. अनुप्रयोग बदल चुके होंगे. पठन-पाठन के तरीके बदल चुके होंगे. पर, एक चीज शर्तिया नहीं बदली होगी, वो है आपके दस्तावेज़ का फ़ॉर्मेट. और आपके उस दस्तावेज़ को सौ साल बाद भी पढ़ने के, उसके उपयोग करने के ठोस तरीके रहने चाहिए होंगे. यहाँ, इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ना चाहिए कि आपने आज किस प्लेटफ़ॉर्म पर, किस अनुप्रयोग के जरिए कौन सा दस्तावेज़ बनाया है. सौ साल बाद आपके पड़पोते को वो प्रयोग में आने लायक होना ही चाहिए. और, सौ साल बाद क्यों, अभी आप उस दस्तावेज़ को अपने मित्र या संबंधी को जो आपसे भिन्न कम्प्यूटर प्लेटफ़ॉर्म प्रयोग करता है, भेजें तो भी यही स्थिति होनी चाहिए. मगर नहीं है. ओपन ऑफ़िस का ओडीटी फ़ॉर्मेट में सहेजा गया दस्तावेज़ आप एमएसऑफ़िस 2007 में नहीं खोल सकते तो एमएसऑफ़िस 2007 में नवीनतम फ़ॉर्मेट में सहेजा…

ब्लॉगर सहायता : पूरा हिन्दी में?

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ब्लॉगर सहायता यहाँ पर अब पूरा हिन्दी में उपलब्ध है. परंतु अभी इस पर कार्य जारी है ऐसा प्रतीत होता है. कहीं कड़ियाँ छूटी हैं (28 वीं कड़ी के बाद काम नहीं कर रहा) तो कहीं चित्र के लिंक नहीं दिए गए हैं. भाषा भी सपाट, जल्दी से समझ में जल्दी नहीं आने लायक व ज्यादा ही तकनीकी प्रतीत होती है. मगर फिर भी, चलिए हिन्दी में सम्पूर्ण सहायता (लगभग सभी विषयों को शामिल किया गया है) ब्लॉगर में अब उपलब्ध हो ही गई है तो इसके लिए साधुवाद तो देना ही होगा!ब्लॉगर सहायतानीचे हमारे सबसे ज़्यादा अकसर पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं. आपको निम्नलिखित भाषाओं में और अधिक विस्तृत सहायता सामग्री मिल सकती हैःEnglish (US)
अकसर पूछे जाने वाले प्रश्नःमैं ब्लॉगर खाता कैसे बनाऊँ?मैं ब्लॉगर ब्लॉग कैसे बनाऊँ?मैं ब्लॉगर कैसे पोस्ट करूँ?मैं तस्वीरें कैसे पोस्ट करूँ?मैं लॉगइन नहीं हो पा रही/रहा. मैं क्या करूँ?मैं ब्लॉग कैसे हटाऊँ?मैं अपना खाता कैसे रद्द करूँ?क्या मेरा ऐसा ब्लॉग हो सकता है, जिस पर एक से अधिक व्यक्ति पोस्ट करें?मैं अपनी प्रोफ़ाइल में अपनी तस्वीरें कैसे जोड़ सकती/सकता हूँ?मैं अपने बाहरी वेब होस्ट में …

एजुकल्ट : शिक्षा, रुचि, मनोरंजन से संबंधित प्रोग्रामों व पठन-पाठन सामग्रियों का भंडार

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एजुकल्ट : शिक्षा, रुचि, मनोरंजन से संबंधित प्रोग्रामों व पठन-पाठन सामग्रियों का भंडारअपनी पुरानी, बैकअप की गई फ़ाइलों में खोजबीन करते समय यह फ़ाइल दिख गया, जिसे मैंने कोई सात-आठ साल पहले इंटरनेट से उतारा था. सैकड़ों काम की सामग्रियों को देखकर मैंने इसकी कड़ियों की एक फ़ाइल बना कर सुरक्षित रख छोड़ा था. तब से इसमें और भी सामग्रियाँ जुड़ गई हैं. इस साइट पर आपको ढेरों प्रोग्राम, रुचिकर – मनोरंजक पाठ, चित्र, सबक, विविध विषयों पर बारंबार पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर और न जाने क्या क्या मिलेंगे.साइट चूंकि एंटीवायरस बनाने वाली कंपनी की है, अतः सारे प्रोग्राम व सामग्रियाँ हानिरहित तो हैं हीं, हममें से प्रत्येक के लिए कुछ न कुछ काम का निकल ही जाएगा. आज की स्थिति में वहां पर 1800 से ज्यादा फ़ाइलें (जिप या ईएक्सई फ़ॉर्मेट में) उपलब्ध हैं, जिन्हें डाउनलोड कर प्रयोग किया जा सकता है.चूंकि यह साइट बहुत लंबे समय से प्रचलन में है, इसमें बहुत से प्रोग्राम विंडोज 95 के जमाने के हैं जो हो सकता है कि आपके नए कम्प्यूटर पर न चलें. मगर फिर भी बहुत से नए प्रोग्राम व जानकारियों के भंडार यहाँ हैं ही. (हालांक…

भोमियो ने गिरगिटी रंग बदला...

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(दक्षिण भारतीय भाषा का एक चिट्ठा. यदि ये लिपि आपको नहीं आती तो भी क्या आप इसे पढ़ सकते हैं? पढ़ कर समझ सकते हैं?)

सबसे पहले आपके लिए कुछ होम वर्क. जरा ये कड़ीदेखें. अब इसकड़ीपर जा कर देखें. हो गए न चमत्कृत?भोमियो में ऐसी सेवा पहले से ही थी. परंतु वह अज्ञात कारणों से अकाल मौत मर गया. अब चिट्ठजगत् में यह सुविधा आ चुकी है.(हाँ, अब पढ़ सकते हैं. धन्यवाद गिरगिट!)
जिन चिट्ठाकारों ने अपने चिट्ठों में विविध भाषाओं में पढ़ने के भोमियो की कड़ियाँ लगा रखी हैं, उन्हें बदल कर यहां दी गई विधि से चिट्ठाजगत के फ़ॉन्ट परिवर्तक लगा लें. कौन जाने किस भाषा का मुरीद आपके चिट्ठे को पढ़ने को बेचैन हो रहा हो?

हिन्दी का एक और अंतर्जाल खोजक

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हिन्दी का एक और (गूगल कस्टमाइज़) इंटरनेट सर्च इंजिनइंटरनेट पर खास हिन्दी सामग्री ढूंढने के लिए आज दर्जनों सर्च इंजिन हैं. इसी कड़ी में गूगल सर्च एपीआई तथा फ़ोनेटिक हिन्दी इनपुट को विशेष पसंदीदा तरीके से जमाकर एक नया हिन्दी खोजक प्रस्तुत किया गया है- यंतरमइस खोजक की खासियत ये है कि इसके इनपुट फ़ील्ड में सीधे ही फोनेटिक हिन्दी से टाइप कर सकते हैं.(या दूसरी भारतीय भाषा में हैं, तो उस भाषा में, फोनेटिक सीधे ही सर्च बक्से में टाइप कर सकते हैं). यानी यह उन प्रयोक्ताओं के लिए खासा उपयोगी होगा जो सर्च इंजिन के इनपुट फ़ील्ड में सीधे ही टाइप नहीं कर पाते हैं और उन्हें सर्च टर्म को कट-पेस्ट कर झंझट भरा इस्तेमाल करना होता है.
मैंने सेल्फ गूगल करते हुए रवि नाम का सर्च किया. जैसा कि आप ऊपर के चित्र में देख सकते हैं, परिणाम ठीकठाक ही रहे. जाहिर है, यह कस्टमाइज सर्च इंजिन खास हिन्दी व भारतीय हिन्दी साइटों के लिए ऑप्टीमाइज़्ड है.इसमें डिफ़ॉल्ट हिन्दी तथा अंग्रेज़ी के अलावा कन्नड़, तेलुगु में भी इंटरनेट पर खोजा जा सकता है.अपनी साइट पर इसकी सर्च पट्टी लगाने हेतु इसका कोड आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं

कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन...

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बचपन के दिन, अगर सटीकता में कहें तो. अभी चिट्ठाकार समूह पर हिन्दी के भविष्य के बारे में बात करते-करते रुख़ कुछ मुड़ा और बचपन और कॉमिक्स विषय पर बहुत ही बढ़िया चर्चा चली. इसी तारतम्य में मेरा पन्ना पर अपने जमाने के कॉमिक्स के बारे में मजेदार आलेख पढ़ने को भी मिला. आजकल के हिन्दी कॉमिक्स में सुपर कमांडो ध्रुव, तिरंगा, भोकाल डोगा, (डोगा के कुछ मुफ़्त ईकॉमिक्स डाउनलोड यहाँ से करें) इंसपेक्टर स्टील, नागराज, फ़ाइटर टोड्स इत्यादि बड़े ही ऊटपटांग नाम सहित ऊटपटांग कैरेक्टर्स आते हैं. इनमें एक्शन और विजुअल्स तो ग़ज़ब के होते हैं, परंतु स्टोरी लाइन बहुत ही बकवास होती है. जो मजा फैंटम और मैनड्रेक को पढ़ने में आता था वो इनमें नहीं आता. और, चाचा चौधरी, उनका दिमाग तो कम्प्यूटर से भी तेज चलता है. मगर बच्चे, उन्हें तो कॉमिक्स चाहिए चाहे वो जैसा भी हो. उन्हें ये भी, और वो भी, और पढ़ा-बिनपढ़ा सब बड़े अच्छे लगते हैं और जाहिर है, छीना-झपटी मचती रहती है. नए कॉमिक्स चरित्रों में गमराज और बांकेलाल मुझे भी पसंद हैं क्योंकि वे हास्य व्यंग्य बिखेरते हैं. आर्ची तो आज भी पसंद है :)बाल-पत्रिकाओं में चंपक का अपना अ…

इंटरनेट पर सर्वाधिक लोकप्रिय हिन्दी पृष्ठ

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(चित्र को बड़े आकार में देखने के लिये इस पर क्लिक करें)
इंटरनेट पर आज का सर्वाधिक लोकप्रिय हिन्दी पृष्ठ कौन सा है?अज़दक और अलेक्सा (एलेक्सा?) में अ के अलावा एक और चीज कॉमन है. लोकप्रियता. आज का अलेक्सा का सर्वाधिक लोकप्रिय 101 और आगे हिन्दी साइट का पन्ना खोलेंगे तो पाएंगे कि वहां पर अज़दक विराजमान हैं. जी, हाँ, प्रमोद सिंह का ब्लॉगस्पॉट का अज़दक!दूसरे नंबर पर है वेब दुनिया हिन्दी खेल पृष्ठ.जानकार लोग तमाम तर्क गढ़ लें, या अलेक्सा की रैंकिंग को लानत-मलामत भेजें, सही ग़लत ठहराएँ, हम तो कहेंगे, अज़दक है नंबर वन! (101 वां) अब भले ही अज़दक की बहुत सी पोस्टों का अर्थ समझने के लिए सिर खुजाने पड़ते हैं (सिर के बाल कम होने का एक कारण ये भी तो नहीं, ऐं?)अज़दक को ढेरों बधाईयाँ.मेरे इस ब्लॉग का नंबर अज़दक के बाद, एक सौ आठवें अनुक्रम पर है.

वैसे, सबसे पहले नंबर #1 पर है जीमेल, 2 पर है वेब दुनिया तथा 3रे नंबर पर है गूगल हिन्दी वेब खोजक.
और, चौथे नंबर पर है, होल्ड कीजिए, अल शिया. इससे पहले तो मैंने हिन्दी की इस वेबसाइट का नाम नहीं सुना था, पर, जाहिर है, है यह प्रसिद्ध !
संबंधित प्रविष्टि : इंटरनेट का स…

विश्व का पहला अंग्रेज़ी-मराठी ऑनलाइन शब्दकोश

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(चित्र को बड़े आकार में देखने के लिए इस पर क्लिक करें)
खांडबहाले, जो कि हिन्दी-अंग्रेज़ी-हिन्दी बोलता शब्दकोश के निर्माता भी हैं, ने अपने सीडी रॉम पर उपलब्ध कम्प्यूटरीकृत अंग्रेज़ी-मराठी शब्दकोश को ऑनलाइन मुफ़्त इस्तेमाल के लिए जारी किया है.खांडबहाले का अंग्रेज़ी-मराठी ऑनलाइन शब्दकोश अत्यंत परिष्कृत है, इसका इंटरफ़ेस गूगल खोज जैसे पृष्ठ की याद दिलाता है – साफ सुथरा, और तेज. जब आप good शब्द से ढूंढते हैं, तो आगे पीछे good युक्त सारे शब्दों के अर्थ बताता है, जो कि बहुत ही उपयोगी है. सबसे नीचे did you mean के रूप में मिलते जुलते शब्दों को भी इंगित करता है.खांडबहाले के पास हिन्दी-अंग्रेज़ी-हिन्दी का बोलता शब्दकोश भी है. इसमें कोई चार लाख से ऊपर अंग्रेज़ी शब्दों के हिन्दी अर्थ हैं. उनसे आग्रह है कि हिन्दी का यह परिष्कृत शब्दकोश वे इंटरनेट पर उपलब्ध करवाएँ. मैंने आग्रह कर दिया है, आप भी उनसे उनके इस ईमेल पर आग्रह कर सकते हैं - sales@khandbahale.comअंग्रेज़ी-मराठी ऑनलाइन शब्दकोश यहाँ देखें

एक म्यान में 145 तलवारें!

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ठीक है, तलवारें नहीं, और म्यान भी नहीं. आपके पर्सनल कम्प्यूटर में कितने ऑपरेटिंग सिस्टम हैं? आपको अपने पीसी में कितने ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता है? उदाहरण के लिए, मेरे पीसी में कोई 4-5 ऑपरेटिंग सिस्टम हैं (एकाध घटत बढ़त होते रहती है,), और लॅपटॉप पर 3 – इसके साथ आया विंडोज़ विस्ता जो प्रारंभ से ही हाइबरनेशन पर है, क्योंकि वो इनकेइनके तरह मेरे भी बहुत से काम नहीं आता, 2 - विंडोज़ एक्सपी तथा 3- सबायो लिनक्स. वैसे, आमतौर पर पर्सनल कम्प्यूटर या लॅपटॉप पर एक से अधिक ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता आपको नहीं ही होती है, यदि आप कुछ सॉफ़्टवेयर जांच-परख इत्यादि में शामिल नहीं होते हैं.परंतु साइकी नामक इन सज्जन ने अपने कम्प्यूटर पर 145 (जी हाँ, पूरे एक सौ पैंतालीस!) ऑपरेटिंग सिस्टम लगाया हुआ है. और ये वर्चुअल मशीन पर नहीं हैं. एक ही मशीन के फिजिकल हार्डडिस्क पर है, और इनमें से किसी में भी बूट किया जा सकता है. इनमें से अधिकांश, जाहिर हैं, लिनक्स के वितरण हैं. संक्षिप्त विवरण कुछ यूं है-3 तरह के डॉस – डॉस 6.22, डॉस 7.1 तथा फ्री-डॉस5 तरह के विंडोज – विंडोज़ 3.1, विंडोज़ 98, विंडोज 2000, विंडोज एक्…

मच्छर-चरितमानस

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इस बेहद दिलचस्प, मजेदार, मच्छर-चालीसा को मेरे एक जहीन मित्र ने मुझे ईमेल फ़ॉरवर्ड से भेजा है. इसके मूल रचयिता का नाम नहीं मालूम है, परंतु उन अज्ञात अनाम रचनाकार को सलाम. उनके प्रति बेहद आदर, सम्मान व आभार सहित इसे यहाँ पुनर्प्रकाशित कर रहा हूँ. यदि वे इन पंक्तियों को पढ़ पा रहे हों तो कृपया सूचित करें, ताकि उन्हें श्रेय दिया जा सके. या सुधी पाठकों को पता हो कि ये पंक्तियाँ किनकी हैं? ------.
मच्छर चालीसा

जय मच्छर बलवान उजागर, जय अगणित रोगों के सागर ।
नगर दूत अतुलित बलधामा, तुमको जीत न पाए रामा ।

गुप्त रूप घर तुम आ जाते, भीम रूप घर तुम खा जाते ।
मधुर मधुर खुजलाहट लाते, सबकी देह लाल कर जाते ।

वैद्य हकीम के तुम रखवाले, हर घर में हो रहने वाले ।
हो मलेरिया के तुम दाता, तुम खटमल के छोटे भ्राता ।

नाम तुम्हारे बाजे डंका ,तुमको नहीं काल की शंका ।
मंदिर मस्जिद और गुरूद्वारा, हर घर में हो परचम तुम्हारा ।

सभी जगह तुम आदर पाते, बिना इजाजत के घुस जाते ।
कोई जगह न ऐसी छोड़ी, जहां न रिश्तेदारी जोड़ी ।

जनता तुम्हे खूब पहचाने, नगर पालिका लोहा माने ।
डरकर तुमको यह वर दीना, जब तक जी चाहे सो जीना ।

भेदभाव तुमको नही भाव…

विशाल लाइब्रेरी में से पढ़ें >

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