2008

Stay hungry stay foolish by rashmi bansal

वैसे तो ये बात स्टीव जॉब्स ने कही है. स्टे हंगरी स्टे फ़ूलिश. परंतु अगर यही बात आईआईएम अहमदाबाद से निकले 25 चुनिंदा छात्रों की जीवनी से भी सिद्ध होती हो, तो आप क्या करेंगे?

यकीनन आप भी बने रहेंगे सदैव – मूर्ख और भुक्खड़.

सदा के लिए मूर्ख और भुक्खड़ बने रहने की प्रेरणा पाने के लिए आपको पढ़नी होगी युवाओं की हास्य-व्यंग्य से भरपूर मनोरंजक पत्रिका जैम की संपादिका  यूथ-करी रश्मि बंसल की किताब – स्टे हंगरी स्टे फ़ूलिश.

इस किताब में आईआईएम अहमदाबाद से निकले चुनिंदा 25 छात्रों की संक्षिप्त जीवनी दी गई है कि कैसे उन्होंने पारंपरिक जॉब आफर्स और रुपया और ग्लैमर से भरी नौकरियों को ठुकराकर अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिनाई से भरे चुनौतीपूर्ण पगडंडियों को चुना और इस प्रकार प्रेरणास्पद - नए पायदान, नए रास्ते गढ़े.

सभी पच्चीस की पच्चीस कहानी एक से बढ़कर एक प्रेरणास्पद है तथा हर कहानी मानवीय मूल्यों और मानवीय क्षमताओं की पराकाष्ठा को सिद्ध करती है. हर कहानी पठनीय है, और पाठक के मन में स्फूर्ति और आशा का संचार भरने में सक्षम है.

इस पुस्तक को सेंटर फार इन्नोवेशन इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप – अहमदाबाद तथा वाधवानी फ़ाउंडेशन के सहयोग से, एक परियोजना के तहत प्रकाशित किया गया है, और इसीलिए 325 पृष्ठों की इस अमूल्य किताब की बहुत ही वाजिब, सब्सिडाइज्ड कीमत मात्र 125 रुपए रखी गई है.

पुस्तक की भाषा सरल है और पाठकों को बांधे रखने में सक्षम है. पुस्तक को मोटे तौर पर तीन भागों में विभाजित किया गया है – द बिलीवर्स, द अपार्च्यूनिस्ट और द आल्टरनेट विज़न. हर जीवनी के उपरांत ‘यंग एंटरप्रेन्योर्स के लिए शिक्षा’ नाम से पाठ का प्रेरक संक्षेप भी दिया गया है.

प्रस्तुत है बेतरतीब रूप से चुने गए, इस किताब के पृष्ठ 104 से सुनील हांडा की जीवनी के कुछ चुनिंदा अंश (हिन्दी भावानुवाद)

“ जब मैंने 11वीं में हैदराबाद पब्लिक स्कूल में एडमीशन लिया तो पाया कि वहां हर कोई अपने सिलेबस से अलग कोई न कोई किताब पढ़ रहा है – कोई एनिड ब्लायटन पढ़ रहा है तो कोई बिली बंटर. मैंने आज तक कोर्स से बाहर न कोई किताब पढ़ी थी और न ही समाचार पत्र. मैं लाइब्रेरियन के पास गया और उनके सामने रोते हुए बोला कि क्या वे मुझे इन किताबों को पढ़ने में मदद करेंगी कि शुरूआत किससे करनी चाहिए. लाइब्रेरियन को शुरू में विश्वास ही नहीं हुआ कि 11 वीं क्लास का कोई बच्चा ऐसा भी हो सकता है. मगर जल्द ही मैंने लाइब्रेरी की सारी की सारी किताबें पढ़ डालीं...

कक्षा दसवीं में मेरे 45 % औसत अंक थे. 11 वीं में बच्चे मुझे गंवारु कह कर चिढ़ाते थे. मेरी अंगरेजी भी कमजोर थी. पर मैंने निम्न फंडे को आजमाया –

मैं परिस्थितियों को दोष नहीं दूगा. मैं मौसम को दोष नहीं दूंगा. मैं शासकीय नियम कायदे कानूनों को दोष नहीं दूंगा. मैं ये नहीं कहूंगा कि मेरे पालकों ने मेरे लिए ये किया या ये नहीं किया. मैं कहूंगा कि अब ये हो चुका है, और मुझे कुछ करना होगा, मुझे मेरी जिम्मेदारी समझनी होगी. यदि कुछ अच्छा भला होगा तो मैं अपनी पीठ थपथपाऊंगा, और यदि कुछ बुरा हुआ तो भी मैं अपने आप से मुहब्बत करूंगा. अपनी सफलता-असफलता के पीछे मैं स्वयं हूँ न कि मेरे आसपास का वातावरण या कोई अन्य कारण...”

ठीक है, आप भी अपनी स्वयं की सफलता-असफलता के पीछे खुद आप ही होंगे, मान लिया, मगर कुछ अलग करने के लिए, कुछ नया सा करने के लिए प्रेरणा पाने के लिए इस किताब को दोष तो दे ही सकते हैं. किताब का अन्य विवरण निम्न है:

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स्टे फ़ूलिश स्टे हंगरी

रश्मि बंसल

प्रकाशक – सीआईआईई, आईआईएम अहमदाबाद

आईएसबीएन नं. 978-81-904530-1-1

पृष्ठ – 325, मूल्य रु. 125.00

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nobel bribary1

हर साल, साल दर साल जब भी विविध विषयों – क्षेत्रों में नोबेल पुरस्कारों की घोषणा होती है तो आप भी मेरी तरह बड़े ध्यान से पुरस्कार विजेताओं के बारे में और उनके द्वारा किए गए कार्यों के बारे में पढ़ते तो होंगे ही. पर, क्या आपको पता है कि आप भी अगर ढंग से कोशिश करते होते तो शायद अब तक आपको भी एक नोबेल पुरस्कार साहित्य (या, आप किसी अन्य क्षेत्र में माहिर हैं, तो उसमें,) के क्षेत्र में मिल चुका होता?

मैंने साहित्य के क्षेत्र में कोई तीर नहीं मारे हैं. मेरे सड़ियल व्यंग्य और अड़ियल व्यंज़ल (जिसे ग़ज़ल नहीं माना गया, तो मैंने एक नया ही नाम दे दिया - ) की ले देकर एक-एक किताब प्रकाशित हुई है – वो भी ऑन डिमांड प्रिंट पर, और जिसकी डिमांड मेरे अलावा किसी और ने अब तक नहीं की है. थोड़े मोड़े तकनीकी आलेख मैंने लिखे हैं, जो ज्यादातर पब्लिक के सिर के ऊपर से निकल गए, और जो कचरा अनुवाद मैंने किए, उनसे, पाठकों का कहना है कि मैंने अर्थ का अनर्थ कर डाला है. तो, यदि मैं अपने इन कार्यों की बिना पर मैं नोबल पुरस्कार पाने के सपने देखने लगूं तो लोग मुझे पूरा का पूरा पागल समझने लगेंगे. परंतु नहीं. मैं अब यह सपना देखने की जुर्रत कर सकता हूं. पूरे होशो हवास में!

दरअसल, मैंने नोबल पुरस्कार के लिए सपने ही नहीं देखे थे अब तक. बकौल पाउलो कोएलो, अगर मैं ये सपना देखता होता, तो संसार की तमाम शक्तियाँ मुझे ये पुरस्कार दिलाने षडयंत्र करने लगतीं. इस लिहाज से अब तक तो मुझे ये पुरस्कार कब का मिल चुका होता. मैं मूरख अ-स्वप्नदर्शी!

इस समाचार ने मेरे मन में जबरदस्त आशा जगाई है. नोबल पुरस्कार कमेटी को भी रिश्वत देकर नोबल पुरस्कार खरीदा जा सकता है. मैंने अब यह सपना देख लिया है. विश्व की तमाम भ्रष्ट और रिश्वत-खोर शक्तियाँ मुझे मेरा सपना पूरा करवाने प्रयत्नशील हो गई हैं. अगले वर्ष का साहित्य का नोबल पुरस्कार मेरे नाम पर होगा. अखबारों के शीर्षकों पर निगाहें जमाए रहिए और मुझे बधाई संदेश देने / स्वागत-अभिनंदन समारोहों-जलसों में निमंत्रित करने की तैयारियों में जुट जाइए. आमीन!

20 YEARS

सवाल ये है कि बीस साल में क्या हो सकता है और क्या नहीं.

एक सरकारी नौकर को बीस साल में फायर किया जा सकता है, यदि वो कामचोर निकला तो. बीस साल! इसका अर्थ ये है कि आप उन्नीस साल तक तो आराम से बिना काम धाम किए निकाल सकते हैं. कानूनन कोई आपका बाल बांका नहीं कर सकता. क्योंकि बीस साल से पहले आपको निकाला ही नहीं जा सकता – कम से कम कामचोरी की तोहमत लगाकर. अलबत्ता दूसरे चार्ज हों तो बात दीगर है. फिर आप उन्नीसवें साल के अंत से या अधिक सेफ गेम खेलना है तो, अठारहवें साल से ही सही, काम करना चालू कर दीजिए. अपनी एफ़ीशिएंसी दिखानी चालू कर दीजिए. अब तो आपको वैसे भी निकाला नहीं जा सकता, क्योंकि अब आप काम कर रहे हैं. प्रसंगवश, यहाँ, ये भी दीगर बात है कि सरकारी दफ़्तरों में कामचोरों को भले ही कोई पूछता न हो, एफ़ीशिएंसी दिखाने वालों की ज्यादा दुर्गति होती है. यहाँ तो पासिंग द बक का गेम चलता है. गेम दूसरे के पाले में डालने का खेल चलता है.

ऋणात्मक सोच वालों को जरूर ये तकलीफ़ हो सकती है कि अब तक तो ऐसा कोई क़ानून ही नहीं था. बीस साल क्या, जीवन के पूरे साठ वर्ष तक यानी रिटायर होते तक कामचोरी की बिना पर सरकारी नौकरी से फायर नहीं किया जा सकता था, अब बीस साल का डर आ रहा है. मगर उन्हें शायद ये नहीं मालूम कि बीस साल में दुनिया बदल जाती है, परिस्थितियाँ बदल जाती हैं, और सरकारें पाँच बार अदल-बदल सकती हैं. उन्हें बीस साल में भी अपना स्वर्णिम भविष्य देखना चाहिए. वैसे भी, बीस दिन या बीस महीने की बात तो नहीं की जा रही है! इसीलिए, क्यों न बीस साल का जश्न मनाएँ.

वैसे भी, बीस साल में क्या क्या नहीं किया जा सकता? यदि आपके पास बढ़िया मलाईदार विभाग है तो आप तो पाँच-सात साल में भी बहुत सारा काम कर सकते हैं. अपनी 7 पुश्तों के खाने-पीने का बंदोबस्त कर सकते हैं. यदि आपने प्लानिंग सही की तो बीस साल में तो आपका सुपुत्र भी गबरू जवान होकर खाने-कमाने लायक बन जाएगा और अपनी सुपुत्री के हाथ बढ़िया तरीके से, सरकारी कर्मचारी बने रहते हुए, समय पर, पीले कर सकते हैं.

इस क़ानून के चलते सरकारी दफ़्तरों में रोचक प्रसंग देखने को मिल सकते हैं. दफ़्तरों में हर बाबू की टेबल पर उसका अपना बीस-वर्षीय काउंटडाउन घड़ी टंगा मिल सकता है. किसी कर्मचारी का बॉस उसे किसी काम के लिए डांटेगा तो कर्मचारी उल्टा बॉस पर बिफरेगा – तुम मेरा आने वाले पंद्रह (या, बारह, तेरह...) साल तक कुछ उखाड़ नहीं सकते!

लगता है सरकार ने इस क़ानून को बनाते समय अपने कर्मियों की दशा-दिशा का पूरा खयाल रखा है. आखिर सरकारी कर्मचारी भी तो उनके अपने, इस देश के प्रिय नागरिक हैं. बीस साल से एक दिन भी कम होता तो कर्मियों को कई समस्याएँ हो सकती थीं. अब जब सरकार ने ये कानून बना ही दिया है तो क्यों न सभी सरकारी कर्मचारियों को इसका लाभ आवश्यक रूप से लेना ही चाहिए?

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समाचार कतरन – साभार टाइम्स ऑफ इंडिया

 

हिन्दी स्पेल चेकर अब काल्पनिक चीज नहीं रह गई है. अब आप इसे बहु-प्लेटफ़ॉर्मों और बहु-उत्पादों में प्राप्त कर सकते हैं.

हिन्दी राइटर, एमएस वर्ड हिन्दी तथा गूगल क्रोम में अंतर्निर्मित हिन्दी स्पेल-चेकर है. ओपन-ऑफ़िस तथा मॉजिल्ला फायरफ़ॉक्स में आप इसे एडऑन के रूप में डाल सकते हैं.

इन हिन्दी वर्तनी जांचकों की तुलनात्मक समीक्षा वैसे तो अन्याय होगी, क्योंकि एमएस वर्ड हिन्दी का शब्द भंडार विकसित व थिसारस से पूर्ण है, क्रोम गूगल समर्थित है और हिन्दी राइटर, ओपन-ऑफ़िस व मोजिल्ला का प्लगइन इत्यादि व्यक्तिगत स्तर के प्रयास हैं. मगर फिर भी वर्तनी जाँच क्षमता व गलत हिज्जे को सही करने हेतु उपलब्ध सुझाव की तुलना तो कर ही सकते हैं.

इसके लिए कुन्नू के ब्लॉग-पोस्ट से बढ़िया पाठ और क्या हो सकता है भला? वे हिन्दी वर्तनी की अपनी कमजोरी को खुले-आम स्वीकारते हुए अपने तकनीकी ज्ञान के बल पर इसे अप्रभावी बनाने की कोशिश करते हैं.

तो, हाथ कंगन को आरसी क्या? चिपकाए गए पाठ की वर्तनी स्वचालित जाँचने में तथा ‘ईस’ शब्द की सही वर्तनी हेतु दाएँ क्लिक से प्राप्त विकल्प देने में  तीन वर्तनी जांचक – क्रमश: फ़ायरफ़ॉक्स, क्रोम व एमएसवर्ड की तुलना आप स्वयं कर लें:

फ़ायरफ़ॉक्स :

hindi spell check in mozilla a

क्रोम :

hindi spell check in chrome a

एम.एस.वर्ड-हिन्दी :

hindi spell check in ms office hindi a

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blackbird-screen shot

ब्राउज़रों, कम्प्यूटरों में भी जातिवाद? कम्प्यूटिंग की दुनिया को भी जातिवाद अपनी गिरफ़्त में लेने को पूरी तरह तत्पर प्रतीत दीखता है. शुरूआत धमाकेदार हो चुकी है. जातिवाद से अब ब्राउज़र भी अछूते नहीं रह गए हैं. वो दिन अब दूर नहीं जब ब्राह्मणों का विंडोज अलग और कायस्थों, हरिजनों का अपना अलग फ्लेवर का विंडोज होगा. लिनक्स के कुछ धार्मिक संस्करण तो आ ही चुके हैं.

फ़ायरफ़ॉक्स ब्राउज़र का एक विशिष्ट संस्करण ब्लैकबर्ड – खास अफ्रीकी-अमरीकी (शुद्ध शब्दों में कहें तो, काले नीग्रो) जनता के लिए जारी किया जा चुका है.

इसी तरह, क्या आपको पता है कि स्त्रियों के लिए उनका अपना ब्राउज़र है – फ्लॉक ग्लास?

glos browser

और, हम अपने भारतीय नेताओं को गरियाते फिरते थे कि वो वोटों की राजनीति के लिए जाति-धर्म-क्षेत्रीय वाद के घटिया गुणाभाग चलाते हैं. परंतु अब तो प्रोग्रामर्स और डेवलपर्स भी इसी रस्ते पर चल निकले हैं!

जातिवाद की जय हो! धर्म, क्षेत्रवाद की जय हो!

slowdown and honda
मंदी की मार ने होंडा को भी नहीं छोड़ा. उसके बगैर टीवी पर फ़ॉर्मूला #1 रेसिंग देखने का मजा ही क्या रहेगा. नतीजतन, फ़ॉर्मूला #1 रेसिंग की और भी वाट लगने वाली है. वहाँ और भी मंदी छाने वाली है. मामला साइक्लिक और एंडलेस सर्कुलर वाला हो गया है. मंदी की मार चिठेरों पर भी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष पड़ रही है. इससे पहले कि होंडा की तरह मंदी की मार से चिट्ठाकारी छोड़कर भागने की नौबत चिठेरों को आए, मंदी की मार से बचने के लिए चिठेरों हेतु सॉलिड #8 तरीके:
1 – नाईजिरियाई फ़िशरों से साझा व्यापार करें. ये धंधा कभी मंदा नहीं पड़ेगा. यकीन मानिए. ऑनलाइन लॉटरी या $12222222.22 को ठिकाने लगाने में मुफ़्त में मिलने वाले नावां का लालच लोगों को होता रहा है और होता रहेगा.
2 – नए, नायाब अनुप्रयोग लाएँ. उदाहरण के लिए, स्वचालित टिप्पणी अनुप्रयोग. आपके ग्राहक चिट्ठाकार जैसे ही चिट्ठा लिखकर पोस्ट करेंगे, आपका यह वेब अनुप्रयोग दन्न से पच्चीस-तीस टिप्पणियाँ विविध नामों व आई डी से ब्लॉग पोस्ट पर डाल देगा. प्रीमियम ग्राहकों के ब्लॉग पर पचास / सौ टिप्पणियों की सुविधा – यानी जितना माल डालो उतना पाओ की तर्ज पर. देखिए, हिन्दी ब्लॉग जगत के सौजन्य से आपका धंधा कितनी जल्दी और कितने बेहतर तरीके से चल निकलता है. और मंदी? काहे की मंदी? ये धंधा सॉलिड मंदी प्रूफ़ रहेगा. ऑलवेज. ग्यारंटीड.
3 – मंदी चिट्ठापोस्टों में न दिखाएँ. मंदी की मार से चिट्ठों से एडसेंस कमाई कम हो गई है? नौकरी पर खतरा दिख रहा है? सेलरी कम हो गई है? ग़म ग़लत करने के लिए चिट्ठा है ना! सुबह एक पोस्ट ठेलो, दोपहर एक, शाम को एक और सोने से पहले एक. अपने सारे गम चिट्ठों में उंडेल कर रख दीजिए फिर देखिए कहाँ है मंदी और कहाँ है मंदी की मार!
4 – चार पुराने ब्लॉग बंद करें, छ: नए खोलें – मुफ़्त के ब्लॉगर-वर्डप्रेस है ना! माना, मंदी की मार सर्वत्र है, मगर ब्लॉग खोलने बंद करने पर नहीं!
5 – लेखन की धार तेज करें, मंद नहीं - मंदी की मार से लिखने की धार कुंद हो गई है? कोई बात नहीं. गूगल अनुवाद औजार है ना. कोई भी साइट लीजिए, उसका स्वचालित अनुवाद कीजिए चाहें तो थोड़ा कांट-छांट कर लीजिए, थोड़ा प्रवचन-ववचन डाल दीजिए, नहीं तो पूरा रॉ मटीरियल भी चलेगा. बस, आपके लंबे, फुरसतिया स्टाइल ब्लॉग पोस्टों के लिए तकनीकी मसाला से भरपूर मसाला मिल गया. वैसे भी तकनीकी मसाला वाले पोस्टों को कौन तो पढ़ता है और कौन समझता है. टिप्पणियों की बात तो दूर की है!
6 – 1 भाषा में लिखें, 25 भाषा में छापें. धन्यवाद गूगल अनुवाद औजार. अब अनुवाद चाहे कचरा हो, सूरज प्रकाश को सन लाइट कर दे, मगर आपका लिखा 25 भाषा में छपेगा तो मंदी कुछ तो दूर होगी – इंटरनेट में सामग्री की मंदी!
7 – सेंसेक्स नहीं चिट्ठाजगत् के आंकड़े देखें : आपके शेयरों, फंडों व स्क्रिपों के दाम जमीन छू रहे हैं, जिन्हें देख देख कर दिमाग खराब हो रहा है? इनके भाव देखना बंद करें और चिट्ठाजगत् के आंकड़े देखते रहें. यहाँ के आंकड़े देखकर सुकून महसूस करेंगे. देख कहाँ है मंदी? इधर तो ग्राफ़ बढ़ता ही जा रहा है. बढ़ते ग्राफ को देखकर सुकून हर किसी को सुकून महसूस होता ही है.
blogs and recession
8 – कोई वेब कंपनी खोलें, उसका दीवालिया निकाल दें. जी हाँ, एकदम सही तरीका है आज के बिजनेस का. या फिर, ज्यादा अच्छा ये है कि किसी दीवालिया होती कंपनी को एक रुपए के टोकन राशि में खरीद लें. सरकार सभी को बेलआउट पैकेज दे रही है. बहती गंगा में आप भी हाथ धोएँ.
mandi ki maar
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समाचार कतरन साभार – दैनिक भास्कर, टाइम्स ऑफ इंडिया

kutta kahan nahi jata

बहुत कुत्ता फ़जीती हो गई. अब ये जुदा बात है कि नेताओं की हुई है या कुत्तों की. फिर भी, जब भी किसी नेता की तुलना किसी कुत्ते से होगी तो यकीनन वहाँ कुत्ते की ही फजीहत होगी.

इस बीच, एक अहम् सवाल उठाया गया है कि कुत्ता कहाँ-कहाँ जाता है और कहाँ-कहाँ नहीं जाता...

कुत्ता कहाँ कहाँ जाता है और कहाँ जा सकता है ये विवाद का विषय भी हो सकता है और सूची लंबी, अंतहीन भी हो सकती है. पर, कुत्ता यकीनन इन 13 जगहों पर तो नहीं ही जाता :

1) पार्लियामेंट – जाता है क्या? किसी ने देखा है क्या?

2) संसद भवन – ठीक है, ठीक है, ये ऊपर दिए गए क्र. 1 का ही हिन्दी रूपांतर है, मगर क्या करें, पहले से लेकर दूसरे क्रम तक एक ही नाम है.

3) विधानसभा

4) चुनाव लड़ने

5) वोट मांगने

6) पार्टी/दल बदलने

7) भाषण देने

8) रैली निकालने

9) खोखले वादे करने

10) स्विस बैंक

11) घूस खोरी, भ्रष्टाचार करने

12) कुर्सी पर बैठने

13) कुर्सी खींचने / कुर्सी से गिराने

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PCMagazine goes out of print

क्या प्रिंट मीडिया के दिन लदने लगे हैं? क्या ऑनलाइन प्रकाशन ही अंतिम विकल्प रहेगा?

पहल और पीसीमैगजीन के प्रिंट संस्करण बंद होने जा रहे हैं. पहल का ऑनलाइन संस्करण न तो था और शायद भविष्य की ऐसी कोई योजना भी नहीं है, मगर पीसीमैगजीन अपने ऑनलाइन संस्करण के जरिए उसी दमदारी और उसी मजबूती से पत्रिका रूप में प्रकाशित होती रहेगी. और आप इस ऑनलाइन पत्रिका को बेहद सस्ते दामों में (एक डिजिटल प्रति के लिए सिर्फ 62 सेंट मात्र) पढ़ सकते हैं.

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साक्षात्कार के संपादक हरि भटनागर से पिछले दिनों औपचारिक चर्चा के दौरान पता चला कि साक्षात्कार की कोई पंद्रह सौ प्रतियाँ निकलती हैं. विज्ञापन रहित पत्रिका साक्षात्कार एक साहित्यिक पत्रिका है, जिसमें हर विधा की रचनाएँ प्रकाशित होती हैं. पत्रिका का कलेवर बहुत ही अच्छा है, बेहतरीन कागज पर छपता है, और इसकी कीमत भी बहुत कम (एक वर्ष के 12 अंकों के लिए रु. 150 मात्र) है. चूंकि यह पत्रिका सरकारी सहायता से निकल रही है, अन्यथा इस कीमत पर ऐसी उच्च गुणवत्ता युक्त पत्रिका किसी सूरत में संभव नहीं है.

आपमें से अधिकतर पाठकों को साक्षात्कार के अस्तित्व का पता ही नहीं होगा. तमाम दृष्टिकोण से पत्रिका अच्छी होते हुए भी आम लोगों की पहुँच में नहीं है. इसमें छपी रचनाएँ, इस पत्रिका को निकालने में किया गया श्रम – सिर्फ पंद्रह सौ प्रतियों तक सीमित हो जाता है. एक प्रति को औसतन चार लोग पढ़ते हों, तो ये मानें कि प्रत्येक संस्करण को सिर्फ छः हजार पाठक मिल पाते होंगे. वर्षों से निकल रही इस पत्रिका के कोई 342 संस्करण निकल चुके हैं, और प्रत्येक संस्करण में पंद्रह रचनाएँ मान लें तो कोई पाँच हजार से अधिक रचनाएँ इसमें छप चुकी हैं. मगर ये पाँच हजार रचनाएँ पत्रिका के प्रकाशन उपरांत पत्रिका के साथ ही दफन हो चुकी हैं – कहीं किसी लाइब्रेरी के किसी आलमारी में पुरानी पत्रिकाओं के बीच पड़ी मिल जाएँ तो बात अलग है. काश! साक्षात्कार जैसी पत्रिका की सामग्री ऑनलाइन उपलब्ध होती.

इसके विपरीत, रचनाकार को अस्तित्व में आए सिर्फ तीन साल हुए हैं. इस दौरान इसमें कोई ग्यारह सौ से ऊपर रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं. रचनाकार को औसतन 700 पेज लोड प्रतिदिन मिल रहे हैं. 125 नियमित ग्राहक हैं जो इसे सब्सक्राइब कर पढ़ते हैं. इस हिसाब से रचनाकार को हर महीने कोई पच्चीस हजार दफा पढ़ा जा रहा है. रचनाकार में प्रकाशित हर रचना प्रत्येक पाठक के लिए निःशुल्क हर कहीं उपलब्ध है. रचनाकार के जरिए कोई दो दर्जन पुस्तकें – जिनमें उपन्यास, कहानी संग्रह, यात्रा वृत्तांत, कविता संग्रह इत्यादि हैं – ई-बुक के रूप में भी प्रकाशित हुए हैं. उपन्यास-कहानी संग्रह के ऑडियो बुक्स तथा कविता-कहानी के जीवंत वीडियो भी प्रकाशित हुए हैं. नतीजतन रचनाकार के पाठक दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं.

अर्थ यही कि प्रिंट मीडिया के दिन अब लदने लगे हैं. ऑनलाइन प्रकाशन ही अंतिम विकल्प रहेगा. ऐसे में रचनाकार जैसे दर्जनों ऑनलाइन प्रकल्प की जरूरत है. पहल के बंद होने के खबरों के बीच उदंती.कॉम के उदय होने की खबर निःसंदेह राहत प्रदान करती है.

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bsnl evdo card

अगर आपको एक ऐसे चलित ब्रॉडबैण्ड कनेक्शन की आवश्यकता है, जो सस्ता भी हो, तो आपके लिए एक नई तकनालाजी की, एक बेहतर सेवा बीएसएनएल ईवीडीओ डाटा कार्ड हाजिर है.

वैसे तो मेरे पास बीएसएनएल  256 केबीपीएस, असीमित उपयोग वाला, 750 रुपए मासिक किराए वाला ब्रॉडबैण्ड कनेक्शन था, परंतु इसकी गति कम ही मिल पाती थी. साथ ही यात्रा के दौरान प्रयोग के लिए अतिरिक्त रूप से रिलायंस के सीडीएमए मोबाइल के अंतर्निर्मित मॉडम का प्रयोग करता था. रिलायंस मोबाइल के अंतर्निर्मित मॉडम से इंटरनेट प्रयोग करने के तीन नुकसान थे – इसका चार्ज बहुत अधिक था – सामान्य घंटों में कोई तीस रुपए प्रतिघंटा. दूसरा, इंटरनेट से कनेक्ट रहने के दौरान टेलिफोन काल रिसीव नहीं हो पाता था. और, तीसरा सबसे बड़ा नुकसान था – अत्यंत धीमी गति. वैसे तो सीडीएमए 1x से आमतौर पर 144 केबीपीएस की गति प्रदाय करने की बात की जाती है, मगर मोबाइल सिग्नलों की मारामारी के चलते आमतौर पर 5-6 केबीपीएस से ज्यादा बात जाती नहीं थी, जिसके कारण काम धीमा तो होता ही था, आपको बिल अनावश्यक भी भरने होते थे.

इन समस्याओं का समाधान लेकर आया है – ईवीडीओ कार्ड. बीएसएनएल का ईवीडीओ इंटरनेट कनेक्शन आपको 550 रुपए में असीमित ब्रॉडबैण्ड की सुविधा देता है. अधिकतम 2 एमबीपीएस तक. यह बैकवर्ड कम्पेटिबल भी है, यानी सीडीएमए 1x नेटवर्क से भी जुड़ सकता है – इसका अर्थ है कि आप दूरस्थ गांवों में भी इस कार्ड का प्रयोग कर सकते हैं. इसे लोकल नेटवर्क पर कहीं भी ले जा सकते हैं, और अतिशीघ्र ही इसकी नेशनल रोमिंग की सुविधा भी प्रदान की जाने वाली है. इसमें आपको वायफ़ाय के हाट-स्पाट जैसी समस्या से भी जूझना नहीं पड़ता. मोबाइल सेवाएँ आजकल तमाम देश में छोटे से छोटे गांव में भी उपलब्ध है, और यह ईवीडीओ कार्ड आपको भारत के हर कोने में अबाधित इंटरनेट सेवा प्रदान कर सकता है.

मैंने ईवीडीओ ब्रॉडबैण्ड प्रयोग किया तो पाया कि इसमें कनेक्शन की गति घटते बढ़ते रहती है, परंतु आमतौर पर औसत 300 केबीपीएस की गति तो मिल ही रही है. यानी मेरे पूर्व के असीमित होम प्लान के कनेक्शन से ज्यादा. यदि आपका कार्य स्थल बीएसएनएल टावर के दो-तीन किलोमीटर के दायरे में आता है तो इसकी गति 2 एमबीपीएस तक प्राप्त की जा सकती है. अधिक दूर होने पर अतिरिक्त रूप से इसमें एंटीना भी लगाया जा सकता है.

ईवीडीओ कार्ड यूएसबी मेमोरी पेन स्टिक जैसा ही आता है, बस थोड़ा सा आकार में बड़ा होता है.

विंडोज एक्सपी पर इसके सेटअप को संस्थापित करने के उपरांत यह आसानी से बिना किसी परेशानी के चला. परंतु यदि आपके पास विंडोज विस्ता 64 बिट है (32 बिट विस्ता पर मैंने जाँचा नहीं,) तो इस ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए इसका ड्राइवर कम्पेटिबल नहीं है, और इसलिए यह इसमें नहीं चला.

इसके उलट, तमाम नए लिनक्स (मैंने उबुंटु 8.10 के 64 बिट संस्करण में जाँचा) संस्करणों में इसका ड्राइवर अंतर्निर्मित है और इसे चलाने के लिए डबल्यूवीडायल या केपीपीपी में बस आपको मॉडम कन्फ़िगर करना होता है. लिनक्स में कनेक्शन की गति भी तुलनात्मक रूप से अधिक मिलती है.

इसी का तो इंतजार था. हिन्दी का पहला फ़िशिंग संदेश आखिर प्रेषित हो ही गया...

तकनीक का बेजा इस्तेमाल एक बार फिर से. गूगल अनुवाद औजार से इंटरनेट में तमाम किस्म के कचरे (एक उदाहरण - http://freebetting-online.com/?p=4854) लोग-बाग़ फेंके जा रहे हैं, और अब तो हद ही हो गई.

नाईजीरियाई फ़िशरों ने अब गूगल अनुवाद औजार का प्रयोग फिशिंग के नए टारगेटों पर करना शुरु कर दिया है. जी हाँ, फ़िशरों ने हिन्दी भाषी कम्प्यूटर प्रयोक्ताओं को भी अपने संभावित शिकारों में शामिल कर लिया है.

कल जब जीमेल पर स्पैम संदेशों पर संभावित सही संदेशों पर सरसरी नजर डाली जा रही थी, तब टूटी फूटी हिन्दी भाषा में आए इस संदेश पर नजर पड़ी –

phishing in hindi

और, अचानक मेरे मुंह से निकल पड़ा – आह! विश्व का पहला “हिन्दी में फ़िशिंग संदेश”!

पूरा संदेश निम्न है और जाहिरा तौर पर इसे गूगल के स्वचालित अनुवाद औजार का प्रयोग कर हिन्दी में अनुवाद किया गया है और हिन्दी वालों को भेजा गया है.

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From: <peterduke194@aol.com>
Date: 2008/11/15
Subject: आपके नि��ि दिया ग���ा है (संपर्क अपन�¾ प्रत्य���ी एजेंट का दावा ��ै) को मंज���री दी
To: undisclosed-recipients

बधाई हो!!
हम आपके पर जीतने की आपको सूचित करने के लिए खुश हैं कि नवंबर, 2008 के संयुक्त राज्य अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय लॉटरी क्रमादेशित की ओर से 15 वीं जो आंशिक रूप से विजेताओं का एक इलेक्ट्रॉनिक चयन पर अपने ईमेल पते का उपयोग आधारित है.
अपने ईमेल पते टिकट संख्या के साथ संलग्न कर रहा था; 575061725 8056490902 सीरियल नंबर 6741137002. यह बैच के रूप में भाग्यशाली संख्या दिलाता है: 4-13-33-37-42 बोनस संख्या 17 है, जो फलस्वरूप दूसरी श्रेणी में लॉटरी जीती.
सभी प्रतिभागियों से एक कंप्यूटर balloting प्रणाली नौ लाख E-कनाडा, =0 Aआस्ट्रेलिया, एशिया, यूरोप से मेल के पते से खींचा के माध्यम से चयन किया गया, मध्य पूर्व, अफ्रीका और हमारी अंतरराष्ट्रीय संवर्धनो के कार्यक्रम के भाग के रूप में जो लॉटरी में पदोन्नत किया गया था और प्रायोजित annually.This आयोजित किया जाता है इस समुदाय में नागरिकों को उनकी सामEजिक जिम्मेदारी के एक हिस्से के कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एक पिंड के रूप में जहां वे बेस और परिचालन आप अपने जीते पुरस्कार के रूप में ($ 600000.00USD) नौ सौ हजार संयुक्त राज्य अमेरिका डॉलर की कुल विशाल राशि के साथ हकदार हैं है
दावों आवश्यकताएँ / सत्यापन फार्म:
1.
पूरा नाम:
2.
नागरिकताः:
3.
जन्म तिथि:
4.
लिंगः:
5.
वैवाहिक स्थिति:
6.
सम्पर्क का पता:
7.
टेलीफोन नंबर:
8.
रिश्तेदार के अगले:
9.
व्यवसाय:
10.
वार्षिक आय USD में:
11.
रेफरी संख्य4:
12. BATCH
संख्या:
13. NUMBER
जीतने:
14.
कुल राशि जीता:
तुम्हारे दावे के लिए फाइल करने के लिए: बस, नीचे जानकारी के साथ हमारे Fiducially दावा एजेंट से संपर्क करें;
नाम: श्री जॉन Cardow
E-mail: john_cardow1@hotmail.com
Tel #: +447031908599
,
तुरंत नीचे के भी दावों की आवश्यकताओं के साथ आदेश में अनावश्यक देरी और जटिलताओं से बचने के लिए ऊपर दिए गए ईमेल पते को ईमेल करें.
बधाई एक बार फिर अपनी जीत पर!
सादर.
Mr.David
क्वेस्ट
(
लॉटरी की समन्वयक)
कॉपीराइट © 1968-2008 संयुक्त रा9 C्य अमेरिका लॉटरी इंक सभी अधिकार के आरक्षित.

----.

धन्यवाद मि. डेविड क्वेस्ट और धन्यवाद गूगल! – हिन्दी के सर्वप्रथम फ़िशिंग संदेश के लिए!

महत्वपूर्ण सलाह :

यदि आपको इस किस्म के किसी भी तरह के लुभाने वाले संदेश मिलते हैं तो उसकी रपट तुरंत ही एंटीफ़िशिंग.ऑर्ग को यहाँ - http://www.antiphishing.org/report_phishing.html पर दें

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1 इंटरनेट के फ़िशिंग हमलों से कैसे बचें

2 कुछ आजमाए हुए धन बनाने के विचार

world's top 11 worst blog

अब जब हर कोई – जी हाँ, हर कोई माने हर कोई – पांचवी फेल व्यक्ति से लेकर बिग बी तक – तमाम दुनिया को अपनी बकवास पढ़वाने के लिए कीबोर्ड लेकर ब्लॉग लेखन के मैदान में कूद पड़े हैं, तो जाहिर है इनमें चंद बेहतरीन लाजवाब होंगे तो चंद निहायत सड़ियल भी.

क्या आपने कभी पड़ताल की है कि हिन्दी के शीर्ष के 11 सड़ियल ब्लॉग कौन से हैं? मुझे तो (भई, मेरे अपने एंगल से, जिसमें मेरा यह चिट्ठा भी शामिल समझें ;) ) मालूम है, मगर मैं हेट-मेल और मुफ़्त मिलने वाले छीछालेदर से कन्नी काटना चाहूंगा. अगर-मगर आप मेरे विपरीत, कुछ हिम्मत वाले हैं तो जरा जाहिर कीजिए अपनी सूची?

बहरहाल, अंग्रेज़ी के शीर्ष के 11 सड़ियल चिट्ठों की चर्चा तो कर ही सकते हैं. वहां से हेट-मेल और गाली-गलौज युक्त प्रतिक्रिया की भी उम्मीद नहीं है. तो, ये रही अंग्रेज़ी के शीर्ष 11 सड़ियल ब्लॉगों की सूची.

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  हिन्दी समेत विश्व की तमाम भाषाओं के पुराने फ़ॉन्टों को यूनिकोड में परिवर्तित करने के ढेरों सॉफ़्टवेयर अब उपलब्ध हैं. शुक्र इस बात का है कि इनमें से ज्यादातर मुफ़्त उपलब्ध हैं. कुछ प्रोप्राइटरी सॉफ़्टवेयर काम में अच्छे तो हैं, परंतु वे बेहद महंगे हैं.

तकनीकी हिन्दी समूह के फ़ाइल खंड में कई हिन्दी फ़ॉन्टों को यूनिकोड से व उसके उलट परिवर्तित करने के ब्राउज़र आधारित बहुत ही आसान  मुफ़्त के अनुप्रयोग हैं. परंतु उनमें ये खामियाँ हैं कि फ़ॉर्मेटिंग बिगड़ जाती है, तथा शुद्धता 90-95% मिल पाती है.

इन समस्याओं को दूर करता है – सिल कन्वर्टर. इसके डिफ़ॉल्ट संस्थापना में सिर्फ निम्न हिन्दी फ़ॉन्टों को यूनिकोड में परिवर्तित करने की सुविधा है –

कृतिदेव 010

कृतिदेव 011

कृतिदेव 290

शुषा

प्रीति देवनागरी

आईलीप

इस्की

कांतिपुर देवनागरी

यह औजार एमएस वर्ड के साथ काम करता है. इसे यहाँ (विथएक्स्ट्राज.ईएक्सई) से डाउनलोड करें व किसी डिरेक्ट्री में इसे एक्स्ट्रैक्ट कर लें. उस डिरेक्ट्री के अंदर एक सब-डिरेक्ट्री SIL Converters होगी. उसमें जाएँ व वहां से SetupEC.msi फ़ाइल को चलाकर इसे संस्थापित करें. (अन्य विधि से संस्थापित करने पर त्रुटि बताता है)

sil converter ms word menuअब आप एमएस वर्ड खोलें. वहाँ आपको टूल्स मेन्यू में Data Conversion मेन्यू दिखाई देगा. उसे क्लिक करें. जो विंडो प्रकट होगी उसमें Select बटन पर क्लिक करें. फिर Converter Installer पर क्लिक करें. वहां आपको विश्व की तमाम भाषाओं सहित भारतीय भाषाओं गुजराती-पंजाबी-तमिल और हिन्दी के विकल्प भी मिलेंगे. हिन्दी से संबंधित तमाम फ़ॉन्टों को चुन लें. और OK पर क्लिक करें. 

sil converter ms conversion menu अब आप एमएस वर्ड डाक्यूमेंट के अंदर किसी पाठ को चुनें जिसे आप परिवर्तित करना चाहते हैं. उदाहरण के लिए कृतिदेव में लिखा कोई पाठ. आप चाहें तो आंशिक या फिर समस्त दस्तावेज़ ही चुन सकते हैं. ध्यान रखें कि टेबल या ज्यादा फ़ॉर्मेटिंग युक्त पाठ को यह बहुत धीमे से परिवर्तित करता है, परंतु परिवर्तन 100 प्रतिशत शुद्धता से होता है. बड़े दस्तावेज़ों को अलग अगल हिस्सों में तोड़ कर परिवर्तित करें. पाठ को चुनकर Tools मेन्यू में Data Conversion मेन्यू पर जाएँ तथा वहाँ से Select बटन के जरिए KrutiDev010<>UNICODE चुनें. वहाँ पर विविध विकल्प भी हैं जिनके जरिए परिवर्तन को फ़ाइनट्यून किया जा सकता है. वैसे डिफ़ॉल्ट सेटिंग पर्याप्त है. OK पर क्लिक करें. यदि आपका पाठ 4-6 पेज का होगा तो आप पाएंगे कि पलक झपकाते ही आपका कृतिदेव में लिखा पाठ यूनिकोड में परिवर्तित हो गया है – वो भी शतप्रतिशत शुद्ध! कोई संपादन आवश्यक नहीं!

हैप्पी कन्वर्शन!

raviratlami's election guide

पता नहीं बराक ओबामा ने इस किताब की सहायता ली थी या नहीं, मगर अमरीकी चुनावों के दौरान माइकल मूर की किताब – माइक्स इलेक्शन गाइड 2008 की भरपूर बिक्री हुई. माइकल ने अपनी किताब में चुनाव जीतने के एक से एक बेहतरीन अंतर्राष्ट्रीय फंडे दिए हैं.

मगर, भारतीय संदर्भ में माइकल मूर के चुनावी फंडे पूरे असफल साबित होंगे. उनका चुनावी गाइड घोर असफल साबित होगा. यहाँ तो रविरतलामी के फंडे चलेंगे. कुछ फंडे अभी हालिया चुनावों में तमाम पार्टियाँ अपना चुकी हैं, और बाकी बचे फंडे आने वाले लोकसभा चुनावों में अपनाए जाएंगे. मतदाता तो जागरूक हो ही रहा है, लिहाजा चुनाव जीतने के लिए नेताओं को डबल जागरूक होना होगा. तमाम चुनावी गाइड और फंडों को यहाँ प्रकाशित करना संभव नहीं है, अलबत्ता हैप्पी चुनाव के लिए कुछ श्योर शॉट, आजमाए, अनुभूत नुस्ख़े यहाँ दिए जा रहे हैं –

1 – जनता जनार्दन बहुत दुःखी है. दुखी जनता को टीवी की बहुत आवश्यकता है. मुफ़्त में रंगीन टीवी देने का वादा अपने चुनावी घोषणापत्र में करें. इस एक घोषणा मात्र से तख्ता-पलट हो सकता है.

2 – भारत में गरीबी बहुत है. गरीबी बनाए रखना जरूरी है. वहीं से तो वोट हासिल होते हैं. चुनाव में वादा कीजिए दो रुपए किलो चावल देने का. यदि सामने वाली विरोधी पार्टी ने ये वादा पहले ही कर दिया है तो एक रुपए किलो में चावल देने का वादा करें.

3 – जातिवाद, क्षेत्रवाद, वंशवाद का गेम प्लान लाएं. दक्षिण से उत्तर भारतीयों और उत्तर से दक्षिण भारतीयों को (उदाहरण के तौर पर महाराष्ट्र से यूपी-बिहारी भाई को भगाने का नारा) भगाने का नारा लाएँ.

4 – मतदाताओं को शराब, करेंसी बांटें. एक एक वोट के लिए आप कितना बांट देंगे? मगर सोचिए, जीत गए तो कितने मिलेंगे!

5 – चुनाव में स्टार प्रचारकों का जमकर प्रयोग करें!

6 – कुछ दिमागदार मतदाता पप्पू बनने की सोचने लगे हैं. उन्हें लुभाने के नए तरीके अपनाएँ, नए चक्कर चलाएँ.

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sadti hui nyaya pranali

शायद नहीं.
मैं, अपना स्वयं का उदाहरण देना चाहूंगा.
रतलाम में बिजली चोरी का एक प्रकरण बनाया गया था. सालों पहले – शायद सात-आठ साल पहले. उस प्रकरण में मेरी भी गवाही थी चूंकि बिजली के मीटर की टेस्टिंग मेरे ऑफ़िस से की गई थी. बाद में मैंने नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी 2003 में. न्यायालय में तब तक केस की सुनवाई ही नहीं हुई. पिछले वर्ष 2007 में ताबड़तोड़ तिथियाँ लगने लगीं – शायद यहाँ के कोर्ट में कोई स्पेशल ड्राइव (उसके बगैर शायद कोई काम नहीं होता...) चलाया गया था. मैं कोई तीन पेशियों पर गया, मगर कभी वकील के नहीं रहने से, तो कभी किसी और वजह से गवाही ही नहीं हो सकी.

पिछले दिनों मेरे भोपाल निवास पर एक हेड कांस्टेबल वारंट लेकर उपस्थित हुआ. वो ठेठ रतलाम से सिर्फ और सिर्फ इसी काम के लिए आया था. वो उसी बिजली चोरी के प्रकरण में गवाही की सूचना देने आया था. मैंने उससे पूछा कि आज के इलेक्ट्रॉनिक जमाने में आप स्वयं क्यों आ गए. इसकी प्रतिलिपि स्थानीय पुलिस को देते तो वहां से भी यह मुझ तक पहुँच जाता. मुझे फोन, फैक्स पर या ईमेल से सूचना देते तब भी बात बन सकती थी. रजिस्ट्री डाक, स्पीड पोस्ट या कूरियर से तो दूसरे-तीसरे दिन सूचना की डिलीवरी हो सकती थी.

मगर ये बातें कांस्टेबल की समझ में नहीं आईं. वो बोला – साहब, कोर्ट का मामला है. वहां तो ऐसे ही चलता है!

कोर्ट के वारंट से भय खाकर मैं गिरता पड़ता, आठ घंटे की निहायत तकलीफ़देह यात्रा पूरी कर नियत समय पर रतलाम पहुँचा तो पाया कि जज आकस्मिक अवकाश पर हैं.

गवाही उस दिन भी नहीं हो सकी. यूँ लगा शायद अपराधी मैं होऊं और सज़ा मुझे मिल रही है.

 

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व्यंज़ल
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सारा कुछ तो सड़ गया
जो चलता था अड़ गया

सबकी आँखों का तारा
मेरी आँख में गड़ गया

मरता क्या न करता
मैं भी पैरों पे पड़ गया

नहीं थी फितरत मेरी
जाने कैसे मैं लड़ गया

जमाने की मार से रवि
सूखे पेड़ सा झड़ गया

----

कोई दिन आपके लिए दिल डुबाने वाला संदेश लेकर आता है.

कल ये दो संदेश मेरे इनबॉक्स में मिले -

Dear Member:

This is to notify you that we have removed or disabled access to the following material as a result of a third-party notification by Sify Technologies Limited claiming that this material is infringing:

Real Indian Idols - 1: http://www.youtube.com/watch?v=PKJ7hEboaGM

Please Note: Repeat incidents of copyright infringement will result in the deletion of your account and all videos uploaded to that account. In order to prevent this from happening, please delete any videos to which you do not own the rights, and refrain from uploading additional videos that infringe on the copyrights of others. For more information about YouTube's copyright policy, please read the Copyright Tips guide.

If you elect to send us a counter notice, please go to our Help Center to access the instructions.

Be aware that there may be adverse legal consequences in your country if you make a false or bad faith allegation of copyright infringement by using this process.

Sincerely,
YouTube, Inc.

तथा -

Dear Member:

This is to notify you that we have removed or disabled access to the following material as a result of a third-party notification by Sify Technologies Limited claiming that this material is infringing:

The real Indian Idols 2: http://www.youtube.com/watch?v=RV3oFy51QU0

Please Note: Repeat incidents of copyright infringement will result in the deletion of your account and all videos uploaded to that account. In order to prevent this from happening, please delete any videos to which you do not own the rights, and refrain from uploading additional videos that infringe on the copyrights of others. For more information about YouTube's copyright policy, please read the Copyright Tips guide.

If you elect to send us a counter notice, please go to our Help Center to access the instructions.

Be aware that there may be adverse legal consequences in your country if you make a false or bad faith allegation of copyright infringement by using this process.

Sincerely,
YouTube, Inc.

उक्त दोनों वीडियो मेरे लेख – द रीयल इंडियन आइडल्स (http://raviratlami.blogspot.com/2007/11/blog-post_16.html)  के अभिन्न अंग के रूप में दिए गए थे. अपने आलेख में मैंने यह बताया था कि चलती ट्रेनों में शोर शराबे के बीच गवैये किस तरह गाना गाकर अपना पेट पालते हैं, और कई मामलों में गुणवत्ता में इनका गायन कितना श्रेष्ठ होता है. इन दोनों वीडियो को मैंने अपने स्वयं के कैमरे से खींचे थे, और स्वयं ही अपलोड किये थे. इन वीडियो में किसी तरह के कॉपीराइट सामग्री का इस्तेमाल भी नहीं हुआ था. पता नहीं सिफी टेक्नॉलाजी को इसमें कौन सी आपत्ति नजर आई. ऊपर से यूट्यूब ने इसे बिना प्रति-पुष्टि किए प्रतिबंधित कर दिया. द रीयल इंडियन आइडल्स प्रतिबंधित. हद है!

 

मैंने प्रतिवाद नोटिस तो दे दिया है, उम्मीद करें कि ये वीडियो फिर से दिखाए जाने लगें. यकीनन कहीं न कहीं कुछ भूल चूक हुई होगी.

free windows apps

माइक्रोसॉफ़्ट ने विद्यार्थियों के लिए अपने कुछ उत्पाद विद्यार्थियों के लिए मुफ़्त जारी किए हैं – और उसमें शामिल है – जरा सांस रोकिए, - लाइसेंस शुदा विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम.

जो उत्पाद विद्यार्थी मुफ़्त में प्राप्त कर सकते हैं उनमें से कुछ हैं-

विजुअल स्टूडियो 2005 / 2008

विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम - विंडोज सर्वर 2003 स्टैंडर्ड एडीशन

एसक्यूएल सर्वर 2005

माइक्रोसॉफ़्ट एक्सप्रेशन स्टूडियो इत्यादि.

आपको इसके लिए एक विद्यार्थी के रुप में पंजीकृत होना होगा. ऑनलाइन पंजीकरण भारतीय विद्यार्थियों के लिए वर्तमान में लागू नहीं है. अलबत्ता ऑफ़लाइन पंजीकरण के लिए आप इस साइट http://www.dreamsparkindia.com/dreamspark/ पर जाकर अपने (निकट के) शहर के पार्टनर लोकेशन का पता हासिल कर वहाँ अपने स्कूल-कॉलेज के आइडेंटिटी कार्ड के साथ पहुंच जाएँ. आपको इन सॉफ़्टवेयरों की डीवीडी मुफ़्त में दे दी जाएगी. जिसका लाइसेंस उत्पाद कुंजी विंडोज लाइव आईडी के जरिए साइट पर लॉगिन कर प्राप्त कर सकते हैं. अधिक विवरण के लिए यहाँ देखें- http://www.dreamsparkindia.com/dreamspark/GetDreamTools.aspx?Tab=1#

 

what is the pursuit of happiness

आप अपनी खुशी कहाँ तलाशते हैं? आपको सर्वाधिक खुशी किस बात में मिलती है? मित्र के साथ गर्म चाय (या, बियर के साथ चीयर्स में?) और पकौड़ों के बीच गप्पबाज़ी में? या फिर शांत तालाब में डंगनी लगाकर मछली फांसने में?

चलिए, व्यक्तिगत तौर पर हर एक के खुशियों के रास्ते में विविधताएँ भले ही हों, हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में हुए एक हैप्पीनेस इंडेक्स सर्वे की मानें, तो आमतौर पर पुरुषों को सर्वाधिक प्रसन्नता तब होती है – जी हाँ, और इसी कारण आप इसे अपने कम्प्यूटर पर पढ़ पा रहे हैं – जब वे इंटरनेट से चिपके हुए होते हैं और यत्र-तत्र-सर्वत्र क्लिक करते फिरते हैं.

जबकि स्त्रियाँ अपने परिवार के साथ समय बिता कर खुश होती हैं.

अब समझ में आया कि आपकी अर्धांगिनी क्यों हर-हमेशा आपको टोकते फिरती है कि भई, बहुत हो गया. कम्प्यूटर से थोड़ा तो बाहर निकलो, घर परिवार के लिए समय दो. पर आप हैं कि कम्प्यूटर छोड़ते ही नहीं!

अपनी-अपनी खुशी का मामला जो है!

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व्यंज़ल

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मेरे यत्न थे उनकी खुशी के लिए

न कि मेरी अपनी खुशी के लिए


सारा ब्रह्मांड तो छान लिया मैंने

महज एक टुकड़ा खुशी के लिए


सोचता हूं कभी सचमुच जी लूं

शायद दूसरों की खुशी के लिए


मेरी ग़ज़लें रूह दुखाती हों भले

असल में हैं उनकी खुशी के लिए


रवि एक पागल दीवाना हुआ जो

जिया मरा यार की खुशी के लिए

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(समाचार कतरन – साभार डिजिट- नवंबर08)

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बिल गेट्स कल (5 नवंबर 2008 दोपहर दिन में 2 से 3.30 बजे) को नई दिल्ली में विशेष रूप से भारतीय आईटी प्रोफ़ेशनलों को संबोधित करेंगे. उनके आख्यान का जीवंत वीडियो प्रसारण इंटरनेट पर उपलब्ध रहेगा. इसके लिए आपको माइक्रोसॉफ़्ट ड्रीमस्पार्क की निम्न साइट पर पंजीकृत होना होगा :

http://www.dreamsparkindia.com/billgateslive/registration.aspx

पंजीकरण के पश्चात् निम्न साइट पर आप निर्धारित समय पर बिल गेट्स का जीवंत वीडियोकास्ट देख सकेंगे:

http://www.dreamsparkindia.com/billgateslive/billg_live.aspx

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माइक्रोसॉफ़्ट द्वारा जारी रिलीज नोट :

माइक्रोसॉफ़्ट कैप्शंस लैंग्वेज इंटरफ़ेस पैक (CLIP) एक सरल भाषा अनुवाद समाधान है जो टूलटिप कैप्शन का उपयोग करके अंग्रेज़ी उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस वाक्यांशों के अनुवाद प्रदर्शित करता है.
CLIP उन विजुअल स्टूडियो उपयोगकर्ताओं के लिए तैयार किया गया है जिनकी अंग्रेज़ी बहुत अच्छी नहीं है. विजुअल स्टूडियो  इंटिग्रेटेड डेवलपमेंट एन्वायरनमेंट (IDE) के सबसे सामान्य उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस तत्वों का अनुवाद उपलब्ध करा कर CLIP उन उपयोगकर्ताओं को विजुअल स्टूडियो 2008 सीखने और उसका उपयोग करने में मदद कर सकता है. CLIP स्थानीय शैक्षणिक समुदायों और माइक्रोसॉफ़्ट बीच सहयोग का नतीजा है.
इसका उपयोग करने के लिए बस अपने माउस को स्क्रीन पर घुमाते हुए ऐसे किसी भी पाठ पर कुछ समय के लिए रोकें जिसका आप अनुवाद चाहते हैं. उपयोगकर्ता अपने स्वयं के अनुवाद भी जोड़ सकते हैं और किसी भी अनुवाद परिणाम को कॉपी और पेस्ट कर सकते हैं.

---

डाउनलोड यहाँ से करें :

http://www.microsoft.com/downloads/details.aspx?FamilyID=4e5258d2-52f4-46b8-8b74-da2dbec7c2f7&displaylang=hi

 

यह भाषाई इंटरफेस पैक तमिल भाषा के लिए भी जारी किया गया है.

make money from hindi internet

आह, बस इसी बात की तो देर थी. हिन्दी इंटरनेट और हिन्दी ब्लॉग जगत वाकई जवान हो चला है लगता है. शुरूआत  (http://realmoney2earn.blogspot.com/2008/07/blog-post.html) तो हो ही गई है, और दर्जनों स्कीमें, दर्जनों तरीकों से आपको फांसने को चले आएंगे जल्दी ही.

 

क्या आप भी देखते ही देखते करोड़पति बनना चाहते हैं? बिना किसी अतिरिक्त प्रयास व पूंजी के? तो फिर इस सड़ियल ब्लॉग को क्यों पढ़ रहे हैं! जल्दी जाइए, किसी इंटरनेट नेटवर्क  मनी प्लान में शामिल हो जाइए. और ज्यादा, गारंटीड 100 प्रतिशत प्रतिफल के लिए अपना खुद का कोई नया नायाब नेटवर्किंग मनी प्लॉन शुरू करिए. आपको मेरी ढेरों शुभकामनाएं.

बिगबनियानट्री जिन्दाबाद – लोगों में सपने जगाने व उनके सपनों को सपने ही बने रहने देने के लिए. और साथ में लाखों लोगों को टोपी पहनाने के लिए नेटवर्क मार्केटरों को प्रणाम, आभार व धन्यवाद.

cg os 1

यह मेरा पसंदीदा ड्रीम प्रोजेक्ट था जो बरसों से यहाँ http://cg-os.blogspot.com/ अटका टंगा हुआ था. इस मर्तबा के सराय परियोजना के तहत इसे भी स्वीकृति मिली है. इसके साथ ही अन्य भारतीय भाषाओं मसलन गुजराती, मैथिली, कश्मीरी इत्यादि भाषाओं के विभिन्न परियोजनाओं को भी स्वीकृति मिली है. विवरण यहाँ दर्ज है.

http://raviratlami1.blogspot.com/2008/10/chhattisgarhi-operating-system-will-now.html

अब तो आगू के छै महीना अऊ फुरसत नईं मिलही गा. चलो सब्बो झन काम-बूता में जुर जाओ.

नई, ताज़ातरीन तकनॉलाज़ी ने आपको भी अकसर आकर्षित किया होगा. पर, तकनॉलाज़ी के अद्यतन होते रहने की यह रफ़्तार कभी रुकेगी भी? आखिर आप कब तक नई लेटेस्ट तकनॉलाज़ी से कदमताल मिलाते रहेंगे?

कोई पंद्रह बरस पहले जब मैंने अपने मुहल्ले का पहला पर्सनल कम्प्यूटर अपने जीपीएफ़ के पैसे से एडवांस लेकर खरीदा था तो उस वक्त की लेटेस्ट तकनॉलाज़ी के लिहाज से 14 इंची कलर मॉनीटर युक्त, 16 मेबा रैम व 1 जीबी हार्ड डिस्क युक्त, 433 मे.हर्त्ज का कम्प्यूटर था, जो उस वक्त के लिहाज से बहुत बड़ी कीमत में आया था.

मैं अपनी उस लेटेस्ट तकनॉलाज़ी युक्त कम्प्यूटर की शक्ति से खासा प्रभावित था और चूंकि वो मेरे मुहल्ले का एकमात्र व पहला कम्प्यूटर था, अतः उसकी अच्छी खासी धाक भी थी. लोग-बाग़ सिर्फ उसके दर्शन करने आते – एक दूसरे से चर्चा करते - कलर मॉनीटर वाला कम्प्यूटर है – मल्टीमीडिया वाला, जिसमें गाने भी सुन सकते हैं और फिल्म भी देख सकते हैं. एकदम नेबर्स एन्वी, ओनर्स प्राइड वाला मामला था.

मगर, जल्द ही परिस्थितियाँ बदल गईं. उम्मीद से पहले. पड़ोस का कोई बंदा नया लेटेस्ट तकनॉलाज़ी वाला, 450 मे.हर्त्ज युक्त, एमएमएक्स तकनॉलाज़ी वाला, 32 मेबा रैम युक्त, 2 जीबी हार्डडिस्क सहित, डिजिटल कलर मॉनीटर वाला डेस्कटॉप कम्प्यूटर ले आया. मजे की बात ये कि वो इस नए, ताज़ा, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी वाले, ज्यादा उच्च शक्ति वाली मशीन को उसने अपेक्षाकृत कम पैसे में खरीदा. अब, जाहिर है, जलने की बारी मेरी थी.

कुछ और समय बीतते न बीतते हुआ ये कि हार्डवेयरों और सॉफ़्टवेयरों में नई, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी के लगातार पदार्पण के चलते मेरे कम्प्यूटर ने नए अनुप्रयोगों को चलाने से मना कर दिया और उसका हार्ड डिस्क गले तक भर भर कर मर खप गया. मजबूरी में मुझे पेंटियम 3 श्रेणी का 1.6 गीगा हर्त्ज प्रोसेसर, 256 मेबा रैम व 20 जीबी हार्डडिस्क वाला कम्प्यूटर खरीदना पड़ा. ये भी, उस वक्त के लिहाज से लेटेस्ट था. मैं और मेरा कम्प्यूटर फिर से एकबार लेटेस्ट हो चुके थे. तमाम क्षेत्र में महंगाई के रोने के बावजूद मैंने इसे अपनी पहली मशीन की कीमत से आधे कीमत में खरीदा.

कुछ अरसा बीता ही था कि चहुँओर आईटी और कम्प्यूटरों ने जोर मारा तो पूरे मुहल्ले में पेंटियम 4 की धूम मच गई. अब जो भी कम्प्यूटर लाता, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी युक्त पेंटियम 4 की मशीन लाता. रैम 1 जीबी से कम नहीं. हार्डडिस्क तो 120 जीबी तक चली गई. एक बंदा 250 जीबी हार्डडिस्क वाली, 17 इंच एलसीडी मॉनीटर युक्त लेटेस्ट मशीन लाया तो उत्सुकता वश मैं भी उसे देखने गया. उस भारी भरकम लेटेस्ट मशीन को छूकर देखने से कुछ अलग सा अहसास हुआ. और, ये मेरे कुछ महीने पहले खरीदे गए इससे आधी शक्ति और कॉन्फ़िगुरेशन वाले लेटेस्ट मशीन से सस्ता ही था.

इस बीच मुझे एक लैपटॉप की जरूरत पड़ी तो मैंने लेटेस्ट 64 बिट प्रोसेसर युक्त मशीन खरीदा था. ये मशीन इतना लेटेस्ट निकला था कि कंपनी के पास इसमें डालने के लिए 64 बिट ऑपरेटिंग सिस्टम ही कम्पेटिबल नहीं था, लिहाजा कंपनी ने इसमें 32 बिट ऑपरेटिंग सिस्टम डाला हुआ था.

अभी गुजरे धनतेरस पर मैंने सोचा कि कुछ लेटेस्ट गॅजेट या नेटबुक खरीदा जाए. बहुत दिनों से लेटेस्ट तकनॉलाज़ी का कुछ खरीदा नहीं था. वैसे विंडोज विस्ता ने बहुतों को लेटेस्ट तकनॉलाज़ी की मशीन ले लेने के लिए मजबूर कर दिया ही था, परंतु धन्य है कि वो स्वयं ही फेल हो गया बेचारा. मैंने नेटबुक के लिए लेटेस्ट तकनॉलाज़ी वाले मशीन की तलाश की. पता चला कि छः माह पहले सोलह हजार में जो मशीन जितने रुपए में मिल रही थी, उससे कम कीमत में उससे ज्यादा अच्छी मशीन आज मिल रही है. मैंने नेटबुक में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में कुछ अता-पता किया तो पता चला कि अभी जो मशीनें मिल रही हैं, उनमें कोल्ड कैथोड का प्रयोग होता है. नई आने वाली मशीनों में बैक लाइट के लिए कोल्ड कैथोड के बजाए एलईडी का प्रयोग होगा जिससे मशीनें बिजली कम खाएंगी और इनकी बैटरी की उम्र भी ज्यादा होंगी. नई मशीनों में 120 जीबी तक सॉलिड स्टेट डिस्कें होंगी. मैंने लेटेस्ट तकनॉलाज़ी के आते तक अपनी यह खरीद मुल्तवी रखी है. देखें, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी और क्या-क्या लेटेस्ट लाती है – वो भी सस्ते में! मोबाइल फ़ोनों की बात तो आप पूछिए ही मत. मेरे अब तक के आधे दर्जन, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी युक्त मोबाइल फोन दुकान से खरीद कर नीचे उतरते ही लेटेस्ट तकनॉलाज़ी के कारण पुराने पड़ गए तब से मैंने अपने मोबाइल (को अद्यतन करने) की ओर झांका भी नहीं है.

इस बीच रेखा ने फ़रमाइश की कि अपना 21 इंची सीआरटी टीवी पुराना हो गया है (जबकि वो महज चार साल पहले आया है, और जब आया था, तो लेटेस्ट तकनॉलाज़ी युक्त फ्लैटस्क्रीन वाला था) उसे बदल कर नया 29 इंची बड़ी स्क्रीन का टीवी ले आते हैं. पड़ोस में 29 इंची, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी का टीवी जो आ चुका था, अत: बच्चों को भी इस छोटी स्क्रीन में टीवी सीरियल देखने में उतना मजा नहीं आ रहा था. इससे भी बड़ी बात ये थी उनके लिहाज से तकनॉलाज़ी में पुराने पड़ चुके 21 इंची टीवी को ड्राइंग रूम में रखना शर्म की बात थी. अलबत्ता घर का सेकंड टीवी हो तो उसे घर में रखा जा सकता है. लिहाजा, मैंने नए, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी वाले टीवी के बारे में मालूमात किए तो पता चला कि एलसीडी स्क्रीन वाले 27 इंची टीवी लेटेस्ट तों हैं. परंतु इनसे भी अधिक लेटेस्ट तकनॉलाज़ी के, ओएलईडी, प्लाज़्मा और पेपर थिन तकनॉलाज़ी के उत्पाद आ रहे हैं और आने वाले हैं. मैं किसी बढ़िया कम्पनी का बढ़िया, लेटेस्ट तकनॉलाज़ी का एलसीडी टीवी पसंद करता इससे पहले ही मेरी नज़र इस खबर पर पड़ी कि सैमसुंग ने कार्बन नैनोट्यूब युक्त रंगीन ई-पेपर नामक डिस्प्ले बनाया है जिससे टीवी देखने का अंदाज ही बदल जाएगा. मैं घर में बीवी-बच्चों को मनाने में लगा हुआ हूं कि भई लेटेस्ट तकनॉलाज़ी की ये टीवी आने दो, ले लेंगे.

परंतु फिर, जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे लगता है – लेटेस्ट तकनॉलाज़ी – क्या खाक!

चहुँओर मंदी की मार से त्रस्त जनता अपना ग़म ग़लत करने के लिए आर्थिक मंदी और दीवाला से संबंधित ईमेल फारवर्डकरने में लगी हुई है. वैसे तो मेरे पास भी #५००००० ईमेलों की सूची है, जिनमें से अधिकतर लोग-बागों द्वारा मुझे भेजे गए ईमेल फारवर्ड के जरिए संकलित हुए हैं, परंतु फिर भी मैं इस सूची में  निम्न कचरा भेजने के बजाए अपने ब्लॉग में डालना उचित समझता हूँ. चाहें तो एक मुस्कान मारने के लिए पढ़ लें, नहीं तो दन्न से कट लें...

* मुंबई स्टाक मार्केट के सामने खड़ी मारूति ८०० पर बंपर स्टीकर चिपका मिला - बिकाऊ. मेरी दूसरी गाड़ी ब्रांड न्यू मर्सिडीज बैज एस क्लास भी बिकाऊ है. एकदम सस्ते दामों में. आज के आज. तत्काल संपर्क करें. (गाड़ी अभी भी खड़ी है.)

* बैंक से मेरा चेक वापस आ गया. टीप लिखा था - फंड अपर्याप्त है, जिसके कारण चेक लौटाया जा रहा है. फंड अपर्याप्त? उनका या मेरा?

* ७०० बिलियन से नीचे ३० बिलियन प्राइम नंबर हैं, बाकी के सभी सब-प्राइम हैं.

* मैंने चेक इनकेश करवाने बैंक भेजा ही था कि बैंक ही बाउंस हो गया.

* कल ही मैंने अपने भाई को १० डालर उधार दिए और आज पता चला कि मैं विश्व का तीसरा सबसे बड़ा उधारी देने वाला व्यक्ति बन गया हूं.

* घोर सकारात्मकता की पराकाष्ठा - इनवेस्टमेंट बैंकर रविवार को अपने पांच ड्रेस इस्तरी करने को देता है.

* वड़ा पाव और इनवेस्टमेंट बैंकर में अंतर - वड़ा पाव से तो फिर भी एक आदमी का एक वक्त का भोजन का जुगाड़ हो गया समझो.

* तालाब में डूबे हुए पांच इनवेस्टमेंट फंड मैनेजरों को आप क्या कहेंगे? एक बढ़िया, शानदार शुरूआत.

* एक कबूतर तथा एक इनवेस्टमेंट बैंकर में अंतर - कबूतर तो फिर भी अपने बीट से किसी ब्रांड न्यू मर्सिडीज बैंज पर नए रंग की नई डिजाइन बना सकता है.

* सभी एमबीए वापस कॉलेज की ओर क्यों दौड़ लगा रहे हैं? अपनी फीस वापस मांगने.

* यह विपदा तो तलाक से भी ज्यादा बड़ी है. मेरा धन एक चौथाई हो गया और मेरी बीवी अभी भी मेरे पास है.

(सामग्री द इंडियन एक्सप्रेस से साभार अनुवादित)

पाठकों की लगातार मांग के चलते अंतत: अमिताभ बच्चन को हिन्दी में ब्लॉग लिखना ही पड़ा. उनकी पहली हिन्दी ब्लॉग-प्रविष्टि यहाँ पढ़ें.

मजेदार बात ये है कि अमिताभ बच्चन के ब्लॉग में आरएसएस फ़ीड सब्स्क्राइब करने की कड़ी पर जाने से वहाँ पंजीकरण बन्द है की सूचना मिलती है. तो क्या उनके पाठक इतने ज्यादा हो गए हैं कि – टू हॉट टू हैंडल?

बहरहाल, यदि आप अमिताभ बच्चने के ब्लॉग को ईमेल या आरएसएस रीडर के जरिए सब्सक्राइब करना चाहते हैं तो विवरण यहाँ दर्ज है.


अद्यतन : # 1 आशीष ने याद दिलाया कि अमिताभ की ये हिन्दी इंकब्लॉगिंग की पहली पोस्ट नहीं है. इस साल जुलाई में वे पहले भी हिन्दी में इंकब्लॉगिंग ब्लॉग पोस्ट कर चुके हैं.

अद्यतन : # 2 मगर, अंतत: अमिताभ ने हिन्दी में लिखना चालू कर ही दिया. अब इसे तो उनकी असली प्रथम प्रविष्टि मान ही लें हिन्दी की.

धन्यवाद आशीष.

cause of women weight gain

फुरसत के किसी क्षण यदि आप अपने आप पर गौर फरमाएँगे कि आज से पाँच या दस साल पहले कैसे थे, तो आप पाएंगे कि कुछ मामलों में आपमें तो आमूल चूल परिवर्तन आ गया है. पाँच साल पहले आप वज़न में कोई दस किलो कम थे, दस साल पहले आप कोई बीस किलो कम थे, और पंद्रह साल पहले तीस किलो.

वज़न के इस चक्रवृद्धि में जाहिर है, और किसका हाथ होगा भला? यदि आप पुरूष हैं, तो इसमें आपकी पत्नी का हाथ है जो आपके गले तक खा लेने के बाद भी आपकी थाली में एक और फुल्का डालते हुए कहती है – एक और ले लो न जी. गरमागरम. कितने प्यार से बनाया है. गोया प्यार में वज़न तभी आएगा जब आपके भोजन में (और नतीजतन आपके शरीर में) वज़न होगा. और यदि आप स्त्री हैं, तो भी, भले ही आपके पतिदेव आपकी थाली में गरमागरम फुल्का न डालें, मगर ऐन-केन-प्रकारेण आपके शारीरिक वज़न-वृद्धि के लिए शत-प्रतिशत वही जिम्मेदार हैं. आपके पतिदेव आपको जितना खुश रखते हैं, उसी अनुपात में आपका वज़न बढ़ता रहता है. अब आप अनुमान लगा लीजिये कि जीरो साइज फ़िगर में प्यार का अनुपात भला कितना होगा.

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व्यंज़ल
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वक्त अब पहले जैसा नहीं रहा
मेरा दोस्त पहले जैसा नहीं रहा

निकले थे दुनिया खरीदने पर
भाव अब पहले जैसा नहीं रहा

रहे होंगे किस्से लैला मजनूं के
प्यार यारों पहले जैसा नहीं रहा

कैसे कहें कि दवा और दारू में
फर्क अब पहले जैसा नहीं रहा

शिकायत फिजूल थी दरअसल
रवि खुद पहले जैसा नहीं रहा

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(समाचार कतरन – साभार टाइम्स ऑफ़ इंडिया)

Rachanakar in Roman

रचनाकार का रोमनीकृत (फ़ॉनेटिक अंग्रेज़ी) सामग्री वाया चिट्ठाजगत फ़ीड स्वचालित तरीके से यहाँ प्रकाशित होता रहा है.

रोमनीकृत रचनाकार के अपने पाठक हैं, और वे आमतौर पर गूगल सर्च से आते हैं. बहुत से हिन्दी के पाठक जो अंग्रेज़ी रोमन लिपि (जो देवनागरी लिपि से अनभिज्ञ रहते हैं, जैसे कि दक्षिण भारतीय – जो थोड़ा-बहुत हिन्दी बोल समझ लेते हैं) को ही समझ पाते हैं, या फिर जिनके कम्प्यूटरों में यूनिकोड हिन्दी दिखाई ही नहीं देती; उनके लिए रोमनीकृत हिन्दी पाठ का कोई विकल्प नहीं है.

परंतु जिस तकनीक के सहारे रोमनीकृत रचनाकार प्रकाशित होता रहा था, उस तरह की तकनीक का बेजा इस्तेमाल भाई लोगों ने चालू कर दिया है. उदाहरण के तौर पर, माना कि अंग्रेज़ी की कोई लोकप्रिय तकनालाजी साइट है, और उसे गूगल के मुफ़्त अनुवादक एपीआई के जरिए हिन्दी समेत अन्य तमाम भाषाओं में अनुवाद (या ट्रांसलिट्रेट कर – यानी लिपि बदल कर) कर उसका फ़ीड जेनरेट कर स्वचालित तरीके से प्रकाशित करने लगें तो? ऐसा प्रकाशक तो बस एक बार थोड़ा सा सेटअप कर ले, बाकी का सारा मसाला अपने आप अपडेट होता रहेगा, घर भरता रहेगा.

यदि ऐसा स्वयं प्रकाशक या सामग्री का मालिक करे (जैसे कि, उदाहरण के रूप में - यहाँ) तब तो ठीक है. परंतु यदि कोई दूसरा व्यक्ति तकनीक का बेजा इस्तेमाल (तकनीक का बेजा इस्तेमाल कुछ इस तरह भी है) कर किसी और के माल को इस तरह से रूपांतरित या अनुवादित कर प्रकाशित करने लगे तब?  ऐसे मसालों की खोज होते रहती है, और इन्हें ढूंढ ढूंढ कर खत्म किया जाता है. प्रायः ऐसी खोजें स्वचालित बॉट द्वारा की जाती हैं. बहुत से मामलों में व्यक्तिगत रूप से शिकायत भी दर्ज की जाती हैं. गूगल-ब्लॉगर भी डंडा लेकर ऐसे फर्जी प्रकाशकों के पीछे निकल पड़ा है.

परंतु रचनाकार का रोमनीकृत रूप तो रचनाकार के पाठकों की सुविधा व सहूलियत के लिए ही बनाया गया था और उसे रचनाकार के प्रकाशक द्वारा ही स्वचालित औजारों के जरिए प्रकाशित किया जा रहा था. इसके बावजूद गूगल ने यह आरोप मढ़ दिया कि रोमनीकृत रचनाकार की चंद चुनिंदा पोस्टें डिजिटल मिलेनियम कॉपीराइट एक्ट (डीएमसीए) का उल्लंघन कर रही हैं अतः उन्हें हटाया जा रहा है, और यदि भविष्य में इनका उल्लंघन पाया गया तो आपका गूगल खाता बन्द कर दिया जाएगा.

गूगल से प्राप्त नोटिस का मजमून ये है:

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Blogger has been notified, according to the terms of the Digital Millennium Copyright Act (DMCA), that certain content in your blog infringes upon the copyrights of others. The URL(s) of the allegedly infringing post(s) may be found at the end of this message.

The notice that we received, with any personally identifying information removed, will be posted online by a service called Chilling Effects at http://www.chillingeffects.org. We do this in accordance with the Digital Millennium Copyright Act (DMCA).

Please note that it may take Chilling Effects up to several weeks to post the notice online at the link provided. The DMCA is a United States copyright law that provides guidelines for online service provider liability in case of copyright infringement. We are in the process of removing from our servers the links that allegedly infringe upon the copyrights of others. If we did not do so, we would be subject to a claim of copyright infringement, regardless of its merits.

See http://www.educause.edu/Browse/645?PARENT_ID=254 for more information about the DMCA, and see http://www.google.com/dmca.html for the process that Blogger requires in order to make a DMCA complaint. Blogger can reinstate these posts upon receipt of a counter notification pursuant to sections 512(g)(2) and 3) of the DMCA. For more information about the requirements of a counter notification and a link to a sample counter notification, see http://www.google.com/dmca.html#counter .

Please note that repeated violations to our Terms of Service may result in further remedial action taken against your Blogger account. If you have legal questions about this notification, you should retain your own legal counsel. If you have any other questions about this notification, please let us know.

Sincerely,

The Blogger Team

Affected URLs: http://desitoons.blogspot.com/2008/10/posts-of-blog-rachanakar_19.html

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हास्यास्पद? निहायत हास्यास्पद. चोरों को पकड़ो भाई, मगर ईमानदारों को तो बख्श दो! वैसे भी न्यायिक सिद्धांत है – दस अपराधी भले ही छूट जाएं, मगर किसी मासूम को सजा न हो.

गूगल के स्वचालित बॉट पहले भी कुछ जेनुइन हिन्दी चिट्ठों की वाट लगा चुके हैं.

 

रोमनीकृत रचनाकार की निरंतरता, जाहिर है, यहीं समाप्त होती है.

स्क्रीमर रेडियो के मुरीद तो आप हो ही गए होंगे. इसका नया संस्करण जो ज्यादा बढ़िया (स्टेबल) चलता है जारी हो चुका है.

अब आप इसे अपनी मनपसंद भाषा – हिन्दी में भी चला सकते हैं. इसके इंटरफेस का अनुवाद हिन्दी में पूर्ण हो चुका है, और बहुत संभव है कि इसके अगले संस्करण में आधिकारिक तौर पर हिन्दी में भी जारी हो जाए.

परंतु आप अभी ही अपने स्क्रीमर रेडियो को हिन्दीमय कर सकते हैं. यह फ़ाइल (lang.english.xml) डाउनलोड कीजिए और इसे स्क्रीमर रेडियो के इंस्टालेशन फ़ोल्डर (डिफ़ॉल्ट रूप में यहाँ होगा - %Program Files/screamer radio/languages) के लैंग्वेजेस नाम के सब-फ़ोल्डर में नक़ल कर दें. वहाँ पहले से इस नाम की फ़ाइल होगी. आपसे उसे बदलने के लिए पूछा जाएगा. हाँ करें, और बस. स्क्रीमर रेडियो फिर से चालू करें – यह हिन्दी भाषा में चलता दिखेगा – कुछ इस तरह:

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bhasha india in warning page in opera (Small)

क्रैकरों के निशाने पर बड़ी, प्रचलित साइटें हमेशा रहती हैं. ताकि वे उसके जरिए अपना ऑनलाइन फ्रॉग का धंधा जमाए रख सकें. कुछ समय से माइक्रोसॉफ़्ट भाषाइंडिया की डाउनलोड http://bhashaindia.com/ साइट पर जहाँ हम भारतीय भाषाई कम्प्यूटिंग वालों को बहुत-कुछ काम के डाउनलोड मुफ़्त मिलते हैं, वहाँ कुछ अटैक-स्क्रिप्ट्स और मालवेयर किस्म के डाउनलोडर अपना अड्डा जमाए बैठे हैं.

bhasha india in opera (Small)

इस समस्या की रपट माइक्रोसॉफ़्ट को 19 सितम्बर 08 को ही दे दी गई थी, परंतु गूगल सेफ ब्राउजिंग की रपट को मानें तो समस्या अभी भी  याने ताजा ताजा, 7 अक्तूबर 08 तक बरकरार है.

मजेदार बात ये है कि यदि आप इस साइट पर इंटरनेट एक्सप्लोरर से भ्रमण करते हैं तो कहीं कोई चेतावनी नजर नहीं आती. इसका अर्थ ये है कि इंटरनेट एक्सप्लोरर के प्रयोक्ता (जो कि कम नहीं हैं,) हमेशा खतरे पर होंगे. जबकि ऑपेरा और फ़ायरफ़ॉक्स में आपको बाकायदा चेतावनी मिलती है.

bhasha india in IE (Small)

इंटरनेट एक्सप्लोरर पर डाउनलोड पृष्ठ खुल गया, जबकि फ़ायरफ़ॉक्स (ऑपेरा में भी) में (सभी ब्राउज़र डिफ़ॉल्ट सेटिंग में,) निम्न चेतावनी मिली :

 

bhashaindia in firefox (Small)

फ़ायरफ़ॉक्स प्रयोग करने का एक और ठोस कारण?

बहरहाल, जब तक ये समस्या दूर नहीं होती, इस साइट पर न विचरें, और सुरक्षित ब्राउज़िंग का प्रयोग करें.

linus torwalds blog 2

नेट की दुनिया पर अगर आपका वजूद है, तो यकीनन आपका कोई न कोई एक ब्लॉग होगा. लिनुस टॉरवाल्ड्स का भी होगा? अब तक तो नहीं था, मगर, लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के सृजक, लिनुस टॉरवाल्ड्स भी अंतत: पिछले हफ़्ते से ब्लॉग लेखन में कूद पड़े. और वे नक़ली स्टीव जॉब्स की तरह नक़ली नहीं हैं, पूरे असली हैं.

उनका ब्लॉग – लिनुस का ब्लॉग सादा जीवन उच्च विचार को इंगित करता है. ब्लॉगर प्लेटफ़ॉर्म पर एकदम सादे, सरल टैम्प्लेट पर बिना किसी साज सज्जा के है उनका ब्लॉग. और उन्होंने अपने इस पोस्ट में एक सतर्क पिता के रूप में अपने बच्चों को इंटरनेट के उचित उपयोग संबंधी विचार लिखे हैं.

अब आप वहां आई टिप्पणियों का आनंद लें – लोग बाग़ लिनुस को सीख दे रहे हैं पट्टी पढ़ा रहे हैं कुछ इस तरह:

एक ने टिप्पणी लिखी – आपने ब्लॉगर का प्रयोग क्यों किया? वर्डप्रेस क्यों नहीं? वर्डप्रेस तो मुफ़्त उपलब्ध, ओपन सोर्स ब्लॉग अनुप्रयोग है, जबकि ब्लॉगर का प्रयोग सिर्फ गूगल के सर्वरों पर ही किया जा सकता है.

एक का कहना था – आप सादा सरल ब्लॉगर का प्रयोग ब्लॉग के लिए क्यों कर रहे हैं? आपको तो गिट (git) का प्रयोग करना था – वो ज्यादा गीकी होता!

एक दूसरे बंधु लिनुस को सलाह देने लगे – आप अपने फोटो इंटरनेट पर टांगने के लिए फ्लिकर या पिकासा का प्रयोग कर सकते हैं.

अगली टिप्पणी है – आपने ब्लॉगर का प्रयोग ब्लॉग लेखन के लिए क्यों किया? आपको तो अपना स्वयं का डोमेन लेकर वर्डप्रेस इत्यादि (या गिट के प्रयोग से) के जरिए ब्लॉग लिखना चाहिए.

एक और टिप्पणी है – आपने ब्लॉगर का चुनाव रेंडमली कर लिया या देख-परख कर किया? यदि आप इसबारे में बताएंगे तो बढ़िया स्टोरी बनेगी.

संबंधित आलेख:

लिनुस टॉरवाल्ड्स से साक्षात्कार (हिन्दी में)

लिनुस टॉरवाल्ड्स ने ब्लॉग लिखना क्यों शुरू किया (साक्षात्कार अंग्रेज़ी में)

लिनुस टॉरवाल्ड्स फैक्ट शीट (अंग्रेज़ी में)

चित्र : साभार – लिनुस टॉरवाल्ड्स फैक्ट शीट

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tag – linus torwalds blog, linus’ blog

saahas ki baat 1

महिलाओं का देर रात घर से बाहर निकलना साहस की बात नहीं है. चलिए, मान लिया. तो, आखिर वे क्या-क्या बातें हो सकती हैं जिन्हें, बकौल शीला दीक्षित, साहस की बात कही जा सकती है? चलिए एक राउंडअप लेते हैं –

  • एक नेता के लिए : 25 करोड़ लेकर भी दल नहीं बदलना या क्रास वोटिंग नहीं करना.
  • एक अफसर के लिए : रिश्वत लेकर भी काम नहीं करना.
  • एक पुलिसिया के लिए : किसी को भी गोली मार कर एनकाउंटर की थ्योरी स्थापित कर देना.
  • एक विद्यार्थी के लिए : नकल की बात कौन करे, उत्तर पुस्तिका किसी विषय विशेषज्ञ से लिखवा कर बदल देना.
  • एक शिक्षक के लिए : आजकल के विद्यार्थी को पढ़ा सकना.
  • एक सर्जन के लिए : एपेण्डिक्स के ऑपरेशन के नाम पर किडनी निकाल लेना.
  • किसी सरकारी बाबू के लिए : कोई फ़ाइल हाथ के हाथ (दैन एंड देअर) सरका देना.

अगर लिखते जाएं तो जाहिर है सूची समाप्त ही नहीं होगी, अंतहीन होगी. साहस के काम दुनिया में सैकड़ों हैं. भारतीयता के तारतम्य में एवरेस्ट पर चढ़ना या एंटार्कटिका पर अकेले जाना या दिल्ली में रात में अकेले घूमना साहस नहीं है. ये सबको समझ में आ जाना चाहिए. ठीक से!

व्यंज़ल

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मैंने की है कभी साहस की बात

जो कहूंगा अभी साहस की बात

 

वक्त ने बेवक्त मार दिया मुझे भी

वरना करता अभी साहस की बात

 

मुर्दों के मेरे शहर में क्या दोस्तों

करेगा कोई कभी साहस की बात

 

करता धरता यहाँ कोई कुछ नहीं

पर करते हैं सभी साहस की बात

 

हो गया एनकाउन्टर रवि का भी

कही उसने कभी साहस की बात

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(समाचार कतरन – साभार डीबी स्टार)

screamer radio

एफ़ एम रेडियो में बारंबार बजते वही गाने, पुराने सड़ियल चुटकुले, फोकट की बकवास और विज्ञापन सुन सुनकर दिमाग पक गया है?

अपने मोबाइल एमपी3 प्लेयर के 8 जीबी संग्रह के गाने पचासों बार शफल कर सुन सुन कर दिमाग सड़ गया है और आपको अपने संग्रह के उन गानों से नफरत होने लगी है?

तो आपके पके और सड़े हुए दिमाग के लिए आ गया है एक शानदार इलाज.

स्क्रीमर रेडियो. 4 मेबा से कम का एक छोटा सा फ्रीवेयर प्रोग्राम. डाउनलोड करिए, और इसके प्रीसेट में से तमाम विश्व के इंटरनेट रेडियो में से छांटकर बस एक क्लिक से गाने सुनिए. चाहें तो एक और क्लिक से सुने जा रहे गीतों को सीधे एमपी3 में रेकॉर्ड भी करें हाँ, इंटरनेट कनेक्शन बढ़िया होना चाहिए.

इस्तेमाल में बेहद आसान. यानी इसके लिए किसी तरह के डमी या ईडियट गाइड की आवश्यकता नहीं.

और यदि किसी चैनल से बोर हो गए तो बस, इसके प्रीसेट इंटरनेट रेडियो की सूची में जाएं और झट से चैनल बदल लें. भारत के लिए ही कोई चालीसेक रेडियो पहले ही संग्रहित हैं. यदि आप अंग्रेज़ी गानों के शौकीन हैं तो, सूची एक तरह से अनंत है.

तो, देर किस बात की? स्क्रीमर रेडियो अभी ही डाउनलोड करिए!

ekya type anywhere in browser1

हिन्दी लिखने की सुविधाओं में दिनोंदिन इजाफ़ा होता जा रहा है. हाल ही में ब्राउज़र टूलबार पिटारा के जरिए हिन्दी लिखने की एक और जुगत जोड़ी गई थी. तमाम और भी नए नए औजार बेहतरीन खासियतों के साथ जुड़ते जा रहे हैं. इस बीच हिन्दी लिखने की सुविधाओं में एक और नाम जुड़ा है ऐक्य का.

ऐक्य (Ekya) क्या है?

आपके लिए यह एक आसान वेब एप (जाल अनुप्रयोग) सुविधा है जिसके जरिए आप ब्राउजर के इनपुट विंडो में हिन्दी (चाहें तो अन्य भारतीय भाषाएं) लिख सकते हैं. यह भी पिटारा हिन्दी औजार की तरह गूगल इंडिक लेखन औजार के एपीआई का प्रयोग करता है. मगर इसके लिए आपको किसी टूलबार को डाउनलोड कर संस्थापित करने की आवश्यकता नहीं है. इसकी कड़ी को आप अपने ब्राउज़र के बुकमार्कलेट में लगा लें और आपका काम एक क्लिक में हो गया समझिए.

यदि आप फ़ायरफ़ॉक्स ब्राउजर प्रयोग करते हैं तो यह आपके लिए बहुत आसान है. इस कड़ी में जाकर वहाँ हिन्दी वाली कड़ी को अपने ब्राउज़र बुकमार्क पट्टी पर खींच ले जाकर छोड़ दें बस. फिर कहीं भी ब्राउजर के इनपुट विंडो में हिन्दी लिखें. अंग्रेजी हिन्दी में टॉगल के लिए कंट्रोल+g बटन का प्रयोग करें. इंटरनेट एक्सप्लोरर में अपने फेवराइट लिंक में इसे जोड़ें.

विस्तृत विवरण के लिए, और यह कैसे काम करता है, इसके लिए इस कड़ी को देखें.

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tag : how to write hindi anytime anywhere

5 biggest flaws in google android mobile phone

हमारे मोबाइल फोन दिनोंदिन स्मार्ट होते जा रहे हैं. इतने स्मार्ट कि आमतौर पर उपयोक्ता को ही पता नहीं होता कि वो अपने मोबाइल से एसएमएस और वीडियो देखने के अलावा और क्या कुछ नहीं कर सकता. बाजार में गूगल एण्ड्रॉयड युक्त स्मार्ट फ़ोन टीमोबाइल जी1 जबरदस्त स्मार्ट तरीके से बाजार में हाल ही में जारी किया गया.  परंतु इसमें (बल्कि हर स्मार्ट फ़ोन में) निम्नलिखित जबरदस्त खामियाँ हैं-

  1. ये आपको गूगल मैप्स की सहायता से जीपीएस सिस्टम के जरिए आपका लोकेशन बता सकता है, आपका स्थान बता सकता है और आपको रास्ता भी बता सकता है. ठीक है, मुझे तो मेरा स्थान बखूबी पता है. पर क्या ये सामने वाले का लोकेशन बता सकता है कि बंदा वाकई बाथरूम से या फिर बम्बई से बोल रहा है? क्योंकि अकसर होता ये है कि किसी को फोन करो तो बोलेगा – भाई, बाहर हूं, रोमिंग पर हूं, अत: जितनी जल्दी माफ़ कर दें उतना अच्छा...
  2. ये आपको सामने वाले का परिचय बता सकता है – जो कि साधारण फ़ोन भी बता सकता है – कि कॉल किसका आया. परंतु ये सामने वाले का मूड नहीं बता सकता. आप अपनी पत्नी या प्रेमिका के फोन का इंतजार रोमांटिक मूड में करते हैं, बॉस को बढ़िया, खुशनुमा मूड में गुडमॉर्निंग की सोचते हैं तो पता चलता है कि सामने वाला किचकिच करने की पूरी तैयारी से आया है. हुंह, काहे का स्मार्ट!
  3. स्मार्ट फ़ोन? पर क्या ये इतना स्मार्ट है कि वो खुद-ब-खुद बता सके कि भुलक्कड़ भाई, मुझे आपने यहाँ-वहाँ लावारिस छोड़ दिया है!
  4. ठीक है, ये गुम जाने पर अपने अंदर का सेंसिटिव डाटा लॉक कर लेगा. परंतु क्या ये इतना स्मार्ट है कि गलत हाथ में लगने पर या किसी फोरेंसिक वाले के हाथ लगने पर सेंसिटिव डाटा सहित अपने आप को मटियामेट कर ले?
  5. चलो, मान लिया कि ये आपका ढेरों काम कर सकता है – आपका वीडियो-ऑडियो-गेम से मनोरंजन कर सकता है, आपके ऑफ़िस के काम बखूबी कर सकता है, पिज्जा हट को पिज्जा के लिए ऑर्डर दे सकता है, पर क्या ये इतना स्मार्ट है कि आपके लिए आपके अख़बार का पन्ना पलट सकता है? ये तो आपके लिए गर्मागर्म चाय भी नहीं बना सकता.

क्या आप अब भी इसे स्मार्ट कहेंगे? अभी तो ये उतना नहीं है, कौन जाने आने वाले किसी दिन ये सचमुच का स्मार्ट हो जाए!

(चित्र साभार - गिज्मोडो)

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कैसी जानकारियाँ? नफा नुकसान का विवरण पिछली दफा आयोजित बार कैम्प3  में मौजूद रहे अनिल रघुराज के चिट्ठे पर यहाँ पढ़ें. और यदि आपको लगता है कि वास्तव में बार कैम्प में जानकारियाँ मिलती हैं, वो भी बिलकुल मुफ़्त, तो आईआईटी पवई मुम्बई में 4 और 5 अक्तूबर को होने जा रहे मुम्बई बार कैम्प 4 में अवश्य सम्मिलित हों. पिछला आयोजन एक दिनी था. अब यह दो दिन का आयोजन है – इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आपके ब्लॉगीय ज्ञान में कितनी वृद्धि संभावित है.

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   mumbai bar camp

संबंधित चिट्ठा – बार कैम्प मुम्बई – क्या आप भी आ रहे हैं? http://ullu.wordpress.com/2008/09/27/barcamp-mumbai-4/

हिन्दी समेत अन्य भारतीय भाषाओं के फ़ॉयरफ़ॉक्स 3.02 बीटा संस्करण यहाँ से डाउनलोड करें :

 

http://en-us.www.mozilla.com/en-US/firefox/all.html#beta_versions

 

डाउनलोड विंडोज, मॅक तथा लिनक्स तीनों प्लेटफ़ॉर्म के लिए उपलब्ध है.

हिन्दी का डायरेक्ट डाउनलोड लिंक विंडोज के लिए:

http://download.mozilla.org/?product=firefox-3.0.2&os=win&lang=hi-IN

तथा लिनक्स के लिए:

http://download.mozilla.org/?product=firefox-3.0.2&os=linux&lang=hi-IN

 

फ़ॉयरफ़ॉक्स 3 का संस्करण जब जारी हुआ था तब इसमें हिन्दी नहीं होने पर खूब हल्ला मचा था. इसी वजह से नए संस्करण में हिन्दी को शामिल करने के लिए ताबड़तोड़ कोशिशें की गईं और प्रतिफल सामने है.

आदम और हव्वा...

osama bin laden was a poet

 

व्यंज़ल :

जमाने की दुश्वारियाँ रही होंगी
वरना हम भी तो एक कवि थे

जलसे में उस दिन हादसा हुआ
सुना है वहाँ बहुत से कवि थे

कोई ये कैसे स्वीकारेगा भला
संगीन लिए लोग कभी कवि थे

कुपोषण से मर गया शहर मेरा 
क्योंकि शहर में सभी कवि थे

तुम क्या बताओगे हक़ीक़त रवि
सबको मालूम है तुम कवि थे
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(समाचार कतरन – साभार टाइम्स ऑफ इंडिया)

tag  : osama bin laden’s poetry book, poet osama, osama’s book of poems

ठेठ भारतीय भाषा में प्रोग्रामिंग की सुविधा उपलब्ध करवाने वाले औजार हिन्दवी  का ऑनलाइन, नया संस्करण http://hindawi.in/online/  जारी किया गया है. यानी आप सीधे ही अपने ब्राउजर के जरिए भारतीय भाषाई प्रोग्रामिंग कॉसेप्ट को न सिर्फ सीख सकते हैं, वरन उसमें महारत भी हासिल कर सकते हैं. ऑनलाइन प्रोग्रामिंग औजार की खासियत ये है कि इसमें आपको अपने कम्प्यूटर में संस्थापित करने की आवश्यकता नहीं है, आप किसी भी जावा सक्षम ब्राउजर (चिंता मत कीजिए, सभी आधुनिक ब्राउजर इसमें सक्षम हैं) के जरिए अपने कम्प्यूटर, लैपटॉप पर और कुछ खास मोबाइल उपकरणों पर भी हिन्दी में प्रोग्रामिंग कर सकते हैं.

hindawi online hindi programming tool

हिन्दवी के ऑनलाइन कमांड टर्मिनल पर मदद टाइप करें व एंटर बटन दबाएं. आप देखेंगे कि आंतरिक कमांड की सूची दिखाई देगी. किसी भी कमांड का प्रयोग कर देखें. जैसे कि दिन कमांड से आपको टर्मिनल दिन व समय प्रदर्शित करेगा. सूची कमांड से सूची दिखेगी, इत्यादि. सारा कुछ मदद व अन्य जानकारी स्क्रीन पर भी दिखाई देती है.

हिन्दवी सीखने के लिए ऑनलाइन वीडियो ट्यूटोरियल भी उपलब्ध है, और भविष्य में इसमें और भी विस्तार करने की योजना है.

हिन्दवी प्रोग्राम परियोजना को पिछले वर्षों में कई विशिष्ट पुरस्कार मिल चुके हैं, और ये अपने तरह की विशिष्ट परियोजना है – भारतीय भाषाई क्लिष्ठता को देखते हुए कई विद्वानों ने हिन्दवी जैसी प्रोग्रामिंग परिकल्पना को असंभव सा करार दिया था. मगर अब यह ऑनलाइन भी उपलब्ध है.

 

इस परियोजना के विकासकर्ता अभिषेक और श्वेता चौधरी को बधाई व शुभकामनाएँ.

 

tag  : hindawi, programming in hindi, indian language programming, online hindi programming tool

swami vivekanand liberary

किसी ने कहा है कि आप मुझे किताबें दे दीजिए और बियाबान जंगल में छोड़ दीजिए. मैं ताजिंदगी तब तक कभी बोर नहीं होउंगा, जब तक कि मेरे पास पढ़ने के लिए किताबें रहेंगी. इंटरनेट युग में आपका पीसी, लेपटॉप और मोबाइल उपकरण इस जरूरत को पूरी करने में कुछ हद तक सक्षम तो है, परंतु वे भौतिक पुस्तकों का स्थान कभी ले पाएंगे अभी इसमें संदेह है.

भोपाल आते ही मेरे सबसे पहले के कार्यों में शामिल था पुस्तकालयों को तलाशना. मुझे यहाँ के पुराने, प्रसिद्ध सेंट्रल लाइब्रेरी के बारे में बताया गया. सेंट्रल लाइब्रेरी यहाँ के भीड़ भरे इलाके पुराना भोपाल, इतवारिया के पास है. पूछते पाछते वहाँ पहुँचा तो पाया कि सेंट्रल लाइब्रेरी का सामने का गेट रोड से दिखाई ही नहीं देता. लोहे का गेट जर्जर होकर जमीन में धंस गया है. एक पतली सी पगडंडी इमारत तक जा रही थी. अंदर पहुँचे तो जर्जर होती इमारत में पूरा पुस्तकालय उतने ही जर्जर हालत में मिला. पुस्तकालय के कार्यालयीन समय 3 बजे दोपहर (कार्यालयीन समय सुबह 11 से 5, रविवार एवं अन्य शासकीय अवकाश पर बन्द) के समय वहाँ कोई पाठक नहीं था. वहाँ मौजूद कुल जमा तीन स्टाफ में दो आपस में बातें करते बैठे थे व तीसरा अपनी कुरसी पर पैर फैलाए ऊंघ रहा था. सदस्यता बाबत पूछताछ की गई तो पता चला कि आपको अपनी आइडेंटिटी प्रूफ (?) बतानी होगी और 750 रुपए जमा करने होंगे जिसमें 500 रुपए डिपाजिट के रहेंगे और 250 रुपए सालाना सदस्यता शुल्क. सदस्य कोई 2 किताबें 500 रुपए मूल्य तक की ले जा सकता है.

इस पुस्तकालय का हिसाब किताब यानी इसके संकलन व इसकी सेवा मुझे कुछ जमी नहीं और मैंने दूसरे विकल्पों को तलाशा. पॉलिटेक्नीक चौराहे पर हिन्दी भवन में पंडित मोतीलाल नेहरू शासकीय पुस्तकालय के बारे में पता चला. वहां सदस्यता के लिए 550 रुपए देने होते हैं, कोई आइडेंटिटी प्रूफ आवश्यक नहीं है. 500 रुपए डिपाजिट के, 50 रुपए वार्षिक शुल्क जिसके एवज में 250 रुपए मूल्य की चाहे जितनी किताबें आप जारी करवा सकते हैं. संकलन में अधिकतर किताबें जर्जर हालत में रखी हुई व पुरानी दिखाई दे रही थीं. हाँ, हिन्दी व कुछ अंग्रेजी की पत्रिकाएँ भी थीं जिन्हें सदस्य जारी करवा सकते हैं. इसका कार्यालयीन समय सुबह 9.30 से शाम 6 बजे तक है. रविवार व अन्य शासकीय छुट्टियों में बंद. जब मैं वहाँ बारह बजे पहुंचा तो इस लाइब्रेरी में सिर्फ दो पाठक थे. वे रोजगार और निर्माण के पुराने अंकों को पढ़ रहे थे.

इस बीच किसी ने मुझे सुझाव दिया कि भोपाल की ब्रिटिश कौंसिल लाइब्रेरी क्यों नहीं देखते. इस लाइब्रेरी के बारे में पड़ताल किया तो पता चला कि इसका नया नामकरण विवेकानंद पुस्तकालय हो गया है और अब यह मप्र सरकार के अधीन है. न्यू मार्केट स्थित इस पुस्तकालय में पहुँचा तो उसके चकाचक कांच के गेट पर कड़क ड्रेस पहने दरबान ने सैल्यूट ठोंका और मेरे लिए दरवाजा खोला. मुझे लगा कि मैं किसी होटल में तो नहीं आ गया हूं. मैंने उससे दोबारा तसदीक की कि क्या मैं विवेकानंद लाइब्रेरी में ही हूं?

सामने रिसेप्शन पर कम्प्यूटरों पर दो व्यक्ति बैठे थे. इस लाइब्रेरी का सारा कार्य कम्प्यूटरों से होता है और आप किताबों को वहां रखे कम्प्यूटरों से सर्च भी कर सकते हैं. उनमें से एक से सदस्यता संबंधी पूछताछ करने पर उसने मेरे सामने एक शानदार ब्रोशर प्रस्तुत किया. उसमें सदस्यता के विविध विकल्प दिए हुए थे. उदाहरण के लिए, पारिवारिक सदस्यता में आपको 2300 रुपए वार्षिक जमा करवाने होते हैं और (कोई डिपाजिट नहीं,) आप एक बार में निम्न सामग्री जारी करवा सकते हैं –

  • बच्चों की 5 किताबें
  • 2 सीडी
  • 4 सामान्य किताबें
  • 2 आडियो
  • 2 पत्रिका
  • 2 डीवीडी
  • असीमित इंटरनेट का प्रयोग – मूल्यों का कोई बंधन नहीं

इस पुस्तकालय में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रायः सभी तरह की नई पुरानी किताबें, पत्र-पत्रिकाएँ, समाचार पत्र इत्यादि सभी उपलब्ध हैं. पुस्तकालय पूरी तरह एयरकंडीशंड है, व इसे पूरा कारपोरेट लुक दिया गया है. बीच में बच्चों का खंड है जहाँ उनसे संबंधित किताबें हैं जिन्हें इस तरह से जमाया गया है जिसे देख कर ही बड़ों के भी बचपन के दिनों के लौट आने का अहसास होता है. पुस्तकालय में अच्छी खासी चहल पहल थी. इसका कार्यालयीन समय सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक है व रविवार को खुला रहता है व सोमवार को बन्द रहता है. समय समय पर यहाँ सेमिनार इत्यादि होते रहते हैं तथा यहाँ शिक्षा व नौकरी से संबंधित एक अलग खंड भी है. इसका जालस्थल भी है http://svl.nic.in

अब आपसे इनमें से किसी एक पुस्तकालय की सदस्यता लेने को कहा जाए तो आप किसकी सदस्यता लेंगे?

मगर ठहरिये. एक समस्या है. कारपोरेट लुक वाली, एयरकंडीशंड विवेकानंद लाइब्रेरी में सिर्फ और सिर्फ अंग्रेज़ी भाषा की ही किताबें और पत्र-पत्रिकाएं मिलती हैं. हिन्दी के लिए आपको या तो सेंट्रल लाइब्रेरी जाना होगा या मोतीलाल नेहरू पुस्तकालय.

तो क्या अंग्रेज़ी का पाठक ही सालाना ढाई हजार वार्षिक सदस्यता भर सकता है? और क्या उसे ही फ़ाइव स्टार सुविधा मिलेगी? हिन्दी के पाठक के पास क्या ऐसी काबिलीयत नहीं है कि वो दो-ढाई सौ रुपए सालाना से ज्यादा खर्च कर सकता हो और क्या उसे रद्दी सेवा, घटिया सुविधाओं और पुराने जर्जर पुस्तकों से ही संतोष करना होगा?

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इससे बेहतर समय हो ही नहीं सकता था. 19 20 सितम्बर सॉफ़्टवेयर मुक्ति दिवस है और साथ ही साथ हिन्दी पखवाड़ा भी चल रहा है. संयोगवश, भारतीय भाषाई लिनक्स पर समर्पित संस्था इंडलिनक्स की आठवीं वर्षगांठ भी इसी हफ़्ते (16 सितम्बर) गुजरा है.

इस अवसर पर हिन्दी की एक साहित्यिक-सांस्कृतिक पत्रिका लिटरेचरइंडिया http://literatureindia.com/hindi/ (ये द्विभाषी है यानी अंग्रेज़ी में भी है, इसीलिए नाम अंग्रेज़ी में है, इसीलिए कोई पंगा नहीं;) जो पूरी तरह मुक्त सॉफ़्टवेयर ज़ूमला पर आधारित है, उसका लोकार्पण समारोह आईआरसी चैनल फ्रीनोड (ये भी मुक्त जाल अनुप्रयोग है) पर #sarai चैनल पर होगा, जिसमें तमाम विश्व के पाठक इंटरनेट के जरिए शामिल हो सकते हैं

इसका लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार, लेखक, कवि, अनुवादक ओर संप्रति वाणी प्रकाशन में संपादकीय सलाहकार नीलाभ करेंगे. यदि आपने अस्सी के दशक में बीबीसी हिन्दी सुना होगा तो नीलाभ की खनकदार आवाज उनकी शानदार, दमदार रिपोर्टिंग के साथ आपके कानों में अवश्य गूंजी होगी.

लिटरेचरइंडिया का इंटरनेटी लोकार्पण समारोह अपने किस्म का पहला व अनोखा आयोजन होगा जिसमें आप भी सादर आमंत्रित हैं.

यह समारोह 19 20 सितम्बर, शनिवार को शाम 4 बजे (भारतीय समय) आईआरसी फ्रीनोड (freenode) के चैनल #sarai पर आयोजित है. आप इस समारोह में इस चैनल पर ऑनलाइन रिले चैट सुविधा http://mibbit.com/ के जरिए आसानी से भाग ले सकते हैं. आपको किसी अन्य चैट क्लाएंट को अपने कम्प्यूटर पर संस्थापित करने की आवश्यकता ही नहीं. आपने इसे पहले प्रयोग नहीं किया है तो आपकी सुविधा के लिए इसकी विधि बता रहे हैं जी करुणाकर :

mibbit - online irc chat

जिन्होंने IRC का पहले उपयोग न किया हो

1) http://www.mibbit.com/ पर जाएँ

2) Connect to IRC: की सूची में Freenode.net चुनें

3) अगर आपके ब्राउज़र में हिन्दी ठीक दिखता हो ठीक है नहीं तो Charset पर क्लिक करके सुनिश्चित करें कि वो UTF-8 ही है.

4) Nick: में अपना नाम या उपनाम अंग्रेजी में भरें, पूरा नहीं बस एक शब्दमें हो जैसे - ramlakhan, akbarali, mungerilal..इत्यादि

5) Channel(s): में #sarai भरें , फिर Go पर क्लिक करें बस

इसके बाद अगर आपके इन्टरनेट की गति कछुए से तेज हो तो, एक नया पेज लोड होगा जहाँ दाएँ और ऑनलाइन लोगों की सूची होगी , बीच के बडे डब्बे में वार्तालाप दिखेगा , और नीचे की पट्टी में आप अपना संदेश लिख कर उसे भेजने के लिए एंटर बटन दबाएँ. यदि सीधे हिन्दी में लिख सकें तो ठीक, नहीं तो कट-पेस्ट भी चलेगा, और अंग्रेज़ी और रोमन हिन्दी भी प्रयोग कर सकते हैं.

किसी एक व्यक्ति को संबोधित करने के लिए, दिख रहे नाम को पूरा लिखें या आलस दिखाते हुए नाम के शुरुआती अक्षर टाइप करें फिर टैब दबा कर नाम पूरा करें

बाकी चैट प्रक्रिया वही जैसा याहू , जीमेल आदि में करते हैं !

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