देखन में छोटे लगें लाभ दें भरपूर...

tona totka

ये किसी एडसेंसिया ब्लॉग पोस्ट की बात नहीं हो रही है. दरअसल इस ब्लॉग पोस्ट का आइडिया मोकालू गुरु के भूत ने पिछले दिनों मेरे सपने में आकर दिया था.

किताबों की फुटपाथिया दुकानों में आपको ऐसी सैकड़ों किताबें मिल जाएंगीं जिनमें लाल किताब से लेकर तंत्र मंत्र और जादू टोने तक – यानी हर किस्म की सामग्री मिलेगी. और, शायद यही वजह है कि भारत में आज भी जादू टोना और तंत्र मंत्र चल रहा है. कुछ समय पहले तक कादम्बिनी जैसी प्रतिष्ठित हिन्दी पत्रिका में राजेन्द्र अवस्थी वार्षिक तंत्र मंत्र विषेशांक निकाला करते थे जिसकी बिक्री और अंकों की अपेक्षा कहीं ज्यादा होती थी और अंक निकलते ही मार्केट में सोल्ड आउट हो जाता था. और क्यों न हो, आखिर, तंत्र मंत्र की शक्ति ही ऐसी होती है.

तो उस सपने से वशीभूत हो एक किताब मैं भी ले आया. किताब है पं. शशि मोहन बहल की लिखी और मनोज पब्लिकेशन्ज, बुराड़ी दिल्ली से प्रकाशित “देखन में छोटे लगें लाभ दें भरपूर – सरल टोनों-टोटकों द्वारा सर्वबाधाओं से मुक्ति” संस्करण 2007 – आईएसबीएन नं. 978-81-313-0315-2 मूल्य 60 रुपए.

किताब में कोई बीस खण्डों में विविध प्रकार के टोने टोटके दिए गए हैं जिनमें धन प्राप्ति से लेकर (हिन्दी ब्लॉगों में एडसेंसिया भी संभव है,) दुश्मन पर विजय इत्यादि के टोने-टोटके शामिल हैं. मुझे उम्मीद थी कि नए जमाने के ताजा संस्करण में मेरे हिन्दी ब्लॉग पर काल-मुर्ग-छाया-प्रभाव (जिसके चलते न पाठक पैदा हो रहे हैं न इनकम जनरेट हो रही है) के इलाज का कोई टोना टोटका दिखेगा. मगर किताब के पूरे 103 पन्ने चाट लेने के बाद भी ऐसा कोई टोटका ब्लॉगों के हिट कराने का नहीं मिला. लिहाजा ये किताब चिट्ठाकारों के लिए शर्तिया फालतू है.

मगर, ठहरिये. चिट्ठाकार आखिर मनुष्य तो हैं ही. कुछ टोने इसी किताब से ढूंढ लाया हूँ आपके लिये. हो सकता है इनमें से कुछ आपके भी काम आएँ.

1

आलसी, स्नान से घृणा (जीतू भाई, आप ये स्वीकारते हैं,) करने वालों के लिए-

पुनर्वसु नक्षत्र के दिन मेहंदी की जड़ और चंदन लाकर अपने पास रख लें. आपके शरीर से दुर्गंध नहीं आएगी. (पृष्ठ 99)

(तो, जब शरीर से दुर्गंध नहीं आएगी तो स्नान की आवश्यकता को तो सिरे से नकारा ही जा सकता है. नहाने के साबुन बनाने वाली कंपनियों के व्यापार बाधित होने की संभावना है. शेयर होल्डर्स ध्यान दें.)

2

चिट्ठाकारों का अपना आलस्य दूर करने के लिए-

रविवार के दिन शराब की एक बोतल खरीद लें. सर्वप्रथम उसे भैरव पर अर्पण करें. इसके बाद उस बोतल को 7 बार आलसी व्यक्ति के ऊपर से उतारकर किसी को दान कर दें या दिन ढले किसी चौराहे, मरघट या पीपल के पेड़ के नीचे रख आएं. वह व्यक्ति आलस्य छोड़कर सभी काम करने लगेगा. (पृष्ठ 103)

(ठीक ललल लिक्कखा है. शररराब तो मररररियल लललोगों हिक्क... में भी ज्ज्ज्ज्जान डाल देता है हिक्क...)

3

बेनामी टिप्पणीकारों का परिचय जानने के लिए-

उल्लू का सिर, मैनसिल और हरताल – तीनों को पीसकर एक गुटिका तैयार कर लें. इसे अपने पास रखने से अंधेरे में भी दिखाई देता है. (पृष्ठ 100)

(भारतीय सेना बुड़बक है जो दुश्मन की गतिविधि पर रात्रि में निगाह रखने के लिए सॉफ़िस्टिकेटेड, अत्यंत महंगे नाइट विजन दूरबीन खरीदती है. और, इस तरह की गुटिका, ब्लॉगों में बेनामी टिप्पणियाँ करने वालों को पहचानने के लिए बनाई जानी चाहिए. यानी ऐसी गुटिका चिट्ठाकार पहन ले तो उसे बेनामियों के आईपीपते समेत नामपता भी दिखाई दे जाए. उम्मीद है, ग्राहकों की अच्छी खासी मांग पर संभवतः किताब के अगले संस्करण में यह टोटका सम्मिलित कर लिया जाएगा)

4

हिन्दी चिट्ठाकारी में सफलता प्राप्ति के लिए-

पीपल के वृक्ष के नीचे शाम को 7 दीपक जलाकर 7 बार परिक्रमा करें. उसके पश्चात् 7 लड्डू कुत्ते को खिलाएँ. ऐसा करने से मन प्रफुल्लित रहेगा और समस्त कार्यों में सफलता प्राप्त होगी. (पृष्ठ 42)

(क्या हिन्दी ब्लॉग लेखन में भी? टोटका तो ठीकेठाक लगता है, चलिए, आने वाले साल 2008 के लिए, इसे आज, अभी ही आजमाते हैं.)

-----------

एक टिप्पणी भेजें

7 लड्डू, ऊ भी कुकुर को खिलाएं? हमरी मति मारी गई है का. इससे तो अच्‍छा होई कि सात चिट्ठों पर जाय के 7-7 कमेंट लिख देई. कोई भला मानुस तो आएगा ना लौटाने की खातिर. चलो ना भी आए, पर उनको तो अच्‍छा लगेगा ना जिनका चिट्ठा पर कमेंट जाएगा. अब पिराबलम तो ससुरी ई है के एतना काम करेगा कौन? हम तो ठहरे अलालों के सरदार. कोई ऐसा टोटका बताएं जिसमें कुछ करना नहीं पड़े.

तिसरा टोटका पढ़ कर हँसते हँसते पेट में बल पड़ गये. उल्लू का सर...अंधेरे में दिखेगा....हा हा हा

अरे, ई, कौन हमको नींद से उठाया,

पता नही...नहाना और नहाने की बाते करना वर्जित है इधर....वैसे भी अब बोतल तो खत्म..... हो... चुकी...

अंधेरे मे देखने वाला टोटका अचूक दिखता है....आजमाने वाले अपने अनुभव शेयर करें।

रवि भाई, आप तो पूरी किताब पढ चुके हो(बड़े सहनशील हो, मानना पड़ेगा) जरा पता करो कि कपड़ो के अंदर देखने वाला भी कोई टोटका है क्या?....हीहीही

चलऊआ चल गया है!
अब भूत-प्रेत-चुड़ैल-इन्द्रजाल-काला जादू-लाल किताब - सब पर दनादन पोस्टें लिखने का मौसम है!

यह चिट्ठी तो हिट है ही।

हा हा हा , मजा आ गया

बेनामी

AAP BHI KABHI KABHI MAZHAK KE MOOOD MEI RAHATE HO, PATTA NAHI THA VARNA HUM ROZ ROZ HASNE KE LIYA BAGH ME NAHI JATE AAP KO HI NET PER CHAT KAR KE HANS LIYA KARTE THANX - RAKESH

बेनामी

idhar germany mi bej dijiye... sbhi anpar hai. ab to jago 21 sadi mi ho yaar

maja aa gaya thanks

बेनामी

hahh

Bhaiya India ka sabse bada kalank hai yeh bhutmari k

Bhaiya mazak mat karo humein sahi mantra batao

MANTRA,TANTRA,YANTRA SRADHA KA BISYA HAI PARNTU AAJ LOK PAISA KAMANE KA MADHYAM BANA LIYE HAIN.YEH SACH HAI KI GURU BINA GYAN MILTA NAHIN ,AUR SACHA GURU MILTE BHI NAHIN,GURU KE VES MEIN ANEK GURU GHANTAL HI AABTAK JIBIT HAIN.YEHI LOG HINDUTVA KO BADNAM KAR RAHEN HAI.

बेनामी

Ye toh lolwa ho gya re babua

बेनामी

BHAI, EXAM ME PASS HONE KA KOI TOTKA HAI KYA.......
HAHAHAHA.........

Are yar mere< bade papa>or sale sale sb ke sb pagal ho gye hai sale kahte hai mere ghar me bhut pret hai or wahi bimar banate hai > or hm >kahte hai ki jb bhut pret bimar karte hai to doctor ke pas kyo jate ho jawo kisi ojha ke pas wo thik kr dega < i am mahavir from gorkhapur

Are yar mere< bade papa>or sale sale sb ke sb pagal ho gye hai sale kahte hai mere ghar me bhut pret hai or wahi bimar banate hai > or hm >kahte hai ki jb bhut pret bimar karte hai to doctor ke pas kyo jate ho jawo kisi ojha ke pas wo thik kr dega < i am mahavir from gorkhapur

id kitab ki pdf milegi kya ?

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