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September, 2007 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चिट्ठाजगत्.कॉम : भाषाई दीवारों को तोड़ने की एक और नायाब कोशिश

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अंग्रेजी की किसी भी प्रविष्टि को आज आप कम्प्यूटर तकनॉलाजी के जरिए दर्जनों अन्य भाषाओं जिनमें चीनी और अरबी भी शामिल है, में त्वरित और तत्काल परिवर्तन (पढ़ें, अनुवाद), सिर्फ और सिर्फ एक क्लिक से कर सकते हैं. याहू के बेबल फिश और गूगल के औजार तो थे ही, माइक्रोसॉफ़्ट ने कुछ इसी तरह का एक नया लाइव ट्रांसलेटर औजार अभी हाल ही में जारी किया है. संभवतः निकट के कुछ वर्षों में ही हम अंग्रेजी से हिन्दी और हिन्दी से अंग्रेजी भाषा में सिर्फ एक क्लिक से संपूर्ण अनुवाद जैसी कम्यूटिंग सेवाओं की सहायता धड़ल्ले से लेने लगेंगे. जनसंचार की भाषाई दीवार को कम्प्यूटर तकनॉलाजी ने एक तरह से ध्वस्त कर दिया है. भोमियो के जरिए हमारे ब्लॉगों को अंग्रेजी (रोमन) समेत आधे दर्जन से अधिक अन्य भारतीय भाषाओं की लिपि में पहले ही पढ़ा जा रहा था. चिट्ठाजगत् चिट्ठा संकलक ने इसमें एक और नया आयाम जोड़ा है. चिट्ठाजगत्.कॉम के जरिए हिन्दी के समस्त चिट्ठे आसान, पठन-पाठन योग्य रोमन हिन्दी में पढ़े जा सकेंगे. इसका रोमन लिप्यांतरण भोमियो की तुलना में ज्यादा सरल और बेहतर प्रतीत होता है. अब आपके लिखे हिन्दी चिट्ठों को दुनिया के उन तमाम…

विनरार : अब हिन्दी अक्षर नाम युक्त फ़ाइलों को भी आसानी से जिप करें

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यह तो आपको पता ही है कि यूनिकोड हिन्दी समर्थित कम्प्यूटरों में आप फ़ाइलनामों को हिन्दी में भी दे सकते हैं. उदाहरण के लिए अब अपनी किसी वर्ड फ़ाइल को  कहानी.doc नाम दे सकते हैं या चित्र का नाम रचनाकार.jpg दे सकते हैं. हालांकि विंडोज तंत्र में फ़ाइलनाम एक्सटेंशन के तीन अक्षर अनिवार्यतः अंग्रेजी में होना आवश्यक हैं. लिनक्स तंत्र में ऐसी बाध्यता नहीं है- यानी किसी वर्ड फ़ाइल का नाम लिनक्स में सिर्फ कहानी भी दिया जा सकता है. समस्या तब आती है जब हम हिन्दी अक्षर नामधारी फ़ाइलों के साथ कुछ फ़ाइल प्रोसेसिंग का कार्य करते हैं. जैसे कि यदि हम नीरो के जरिए इन हिन्दी अक्षर युक्त फ़ाइलों का सीडी बैकअप बनाना चाहें, तो नीरो के यूनिकोड समर्थित नहीं होने के कारण ये फ़ाइलें नीरो के इंटरफ़ेस में नजर ही नहीं आतीं, और इन फ़ाइलों को आप सीडी पर सीधे बर्न नहीं कर सकते. हिन्दी अक्षरों में लिखी गई नाम वाली फ़ाइलों को इंटरनेट पर ईमेल संलग्नकों के जरिए भेजने में भी खासी असुविधाएँ आती हैं. इसी तरह फ़ाइल संपीडन औजार – जैसे कि विनजिप इत्यादि में भी यूनिकोड का सही समर्थन नहीं होने के कारण हिन्दी अक्षर नामधारी फ़ाइलों …

रविरतलामी@श्री420.इन ?

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यदि आपको, रविरतलामी@भागमभाग.को.इनया रविरतलामी@भांगड़ारॉक्स.इनया रविरतलामी@गुल्लीडंडा.मोबीया रविरतलामी@स्टूडेंटजिंदाबादजैसे नए, फंकी, भीड़ से अगल, उलटे-पुलटे दिखाई देने वाले ईमेल पतों की चाहत है तो तत्काल यहाँ चटखा लगाएँ. इससे पहले कि आपका पसंदीदा, धांसू, झकास, अलग-और-उलटा पुलटा दिखाई देनेवाला ईमेल पता कोई झटक ले, आप अपने लिए उसे आरक्षित कर लें. वैसे, मैंने अपने लिए नया ईमेल खाता रविरतलामी@श्री420.इन बना लिया है. आप सभी से आग्रह है कि मुझसे भविष्य में पत्राचार इसी पते पर करें.पुनश्च: - वैसे, कुछ इस तरह के ईमेल पते तो वास्तव में मजेदार लगेंगे-फुरसतिया@भागमभाग.इनईस्वामी@भांगड़ाराक्स.इनज्ञानदत्त@बुड़बक.इनसंजय.बेंगानी@बेधर्मी.को.इनमैथिली@लंका.इनबैरागी@अनुरागी.इन.... कल्पनाएँ असीमित हैं...(उल्लेखित नामधारी दोस्तों से क्षमा याचना सहित...)
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आप चिट्ठा किसलिए लिखते हैं?

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जाहिर है, आपका उत्तर होगा - पाठकों के द्वारा पढ़े जाने के लिए. आप चाहते हैं कि आपका लिखा पाठक पढ़ें, और अपनी सुविधा से पढ़ें. ऑनलाइन पढ़ें और मर्जी बन पड़े तो ऑफलाइन पढ़ें. ठीक? तो फिर आप अपने चिट्ठे की पूरी फ़ीड उपलब्ध क्यों नहीं करते?शुरुआत में, हो सकता है, आपको लगे कि इससे आपके चिट्ठे को मिलने वाले क्लिक की संख्या में थोड़ी सी कमी नजर आए, परंतु अंततः इस कदम से आपके चिट्ठे को लाभ ही होगा, और आपके चिट्ठे को ज्यादा लोग, और ज्यादा की संख्या में ज्यादा बार पढ़ेंगे. और, ये बात कई मर्तबा सिद्ध की जा चुकी है, और एक बार और इस बात को पुख्ता किया गया है. मेरे स्वयं के सभी चिट्ठों की पूरी फ़ीड उपलब्ध है. हिन्दी के कुछ अच्छे-चर्चित चिट्ठे जिनकी पूरी फ़ीड उपलब्ध हैं, ये हैं – ठहाकाइधर उधर कीई-पंडितकाकेशआलोक पुराणिकसारथीवाह मनीउड़नतश्तरीलिंकित मनशब्दों का सफरउन्मुक्तविनयपत्रिकामोहल्लामानसीरेडियोवाणीनिर्मल आनंदमीडिया व्यूहचवन्नी चैपजो कह न सकेमसिजीवीनई सड़कमेरी कठपुतलियाँइत्यादि, इत्यादि....और भी कई हैं, और इन्हें रेंडमली चुना गया है. तो, सार यह है कि आप भी अपने चिट्ठे की पूरी फ़ीड प्रकाशित …

मिसाल : दोस्ती हो तो ऐसी

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(अंतर्देशीय दोस्त : शरद व सुधाकर) एक दूसरे पर जान तक न्यौछावर कर देने की दोस्ती की मिसालें यूँ तो कई मिलेंगीं परंतु एक दूसरे पर पिछले तीस वर्षों से अंतर्देशीय पत्रों की नियमित, नित्य न्यौछावर करने की ऐसी मिसाल अन्यत्र कहीं नहीं मिलेगी. जी हां, यह मिसाल है दो दोस्तों सुधाकर जोशीशरद भारद्वाज की, जो पिछले तीस वर्षों से नित्य, नियमित, बिना ब्रेक किए, एक दूसरे को अंतर्देशीय पत्र लिखते चले आ रहे हैं. इंदौर के अभ्यंकर क्लासेज में साथ-साथ पढ़ने वाले इन दो दोस्तों के बीच नित्य अंतर्देशीय पत्र लेखन सफर 1 जुलाई 1977 में प्रारंभ हुआ जब शरद भारद्वाज नौकरी के सिलसिले में भोपाल चले गए. रेडियो कॉलोनी इंदौर में सुधाकर जोशी के घर के सामने क्रिकेट से जुड़े ए. डब्ल्यू. कनमडीकर रहते थे. उनके घर नित्य पोस्टमैन आता और पत्रों का पुलिंदा लाता. सुधाकर को लगा कि मेरे घर पोस्टमैन क्यों नित्य नहीं आता? उसने अपने दोस्त शरद से बात की और इस तरह उनके बीच नित्य अंतर्देशीय पत्र लेखन का सिलसिला चल निकला. (श्री सुधाकर जोशी, अपनी धर्मपत्नी व पत्रों के पुलंदों के साथ) सुधाकर बताते हैं कि शुरुआत में अंतर्देशीय पत्र 15…

एक और मुफ़्त ऑफ़िस औज़ार: आईबीएम लोटस सिंफनी

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हाल ही में विश्व की नामी सॉफ़्टवेयर-हार्डवेयर कंपनी आईबीएम ने अपने एक नए नवेले ऑफ़िस सूट का बीटा संस्करण आम जनता के मुफ़्त इस्तेमाल हेतु जारी किया. आईबीएम लोटस सिंफनी नाम का यह ऑफिस सूट एक नजर में एक और मुफ़्त उपलब्ध और लोकप्रिय ऑफिस सूट - ओपन ऑफ़िस का प्रतिद्वंद्वी जान पड़ता है. सिंफनी में वर्ड, प्रजेंटेशन और स्प्रेडशीट प्रोग्रामों को एकीकृत किया गया है. स्टार ऑफ़िस को गूगल ने मुफ़्त इस्तेमाल के लिए हाल ही में जारी किया है. लगता है दुनिया मुफ़्त के लंच और मुफ़्त के बीयर की ओर तीव्र-गति से अग्रसर हो रही है. आईबीएम लोटस सिंफनी को आप मुफ़्त डाउनलोड कर संस्थापित कर सकते हैं. परंतु इसकी डाउनलोड प्रक्रिया बहुत ही लंबी और उबाऊ है. डाउनलोड के लिए आपको इसके साइट पर पंजीकृत होना पड़ता है, जो दो-चरणों में होती है, और वो भी अनर्थक और उबाऊ होती है. आईबीएम की साइट पर दो बार पंजीकृत करने की मेरी कोशिश अधूरी रहने पर मैंने विकल्प की तलाश की. आईबीएम के साइट पर लोटस सिंफनी की डाउनलोड कड़ी ढूंढने पर परिणाम शून्य नजर आया. लिहाजा डायरेक्ट डाउनलोड कड़ी के लिए मैंने गूगल की शरण ली. और मुझे सॉफ़्टपीडिया की …

राम सेतु बनाम सेतुसमुद्रम : 147 वर्षों से लटकी परियोजना

इस परियोजना को प्रारंभ होने में 145 साल लगे.

तो इसके पूरे होने में कितने साल लगेंगे?

इससे पहले कि आप कुछ भविष्यवाणी करें, कुछ फ़ैक्ट फ़ाइल के लिए यहाँ देखें.

विंडोज़ विस्ता की असफलता से त्रस्त होकर अंततः माइक्रोसॉफ़्ट ने दारू बेचना प्रारंभ किया...

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माइक्रोसॉफ़्ट ने अब हार्डकोर लिकर बेचना प्रारंभ किया ठीक है, मान लिया, माइक्रोसॉफ़्ट के इस नए प्रकल्प – ब्लू मॉन्स्टर शराब बेचने के पीछे विंडोज़ विस्ता की सफलता-असफलता का कोई लेना देना भले ही न हो, मगर विंडोज़ विस्ता इस्तेमाल करने वाले मेरे जैसे फ्रस्टेटेड लोगों के लिए यह खबर बड़ी राहत देने वाली हो सकती है. अब हम अपने विंडोज़-विस्ता अ-समर्थित हार्डवेयर-सॉफ़्टवेयर का ग़म ग़लत ब्लू मॉन्सटर मदिरा के जरिए तो कर ही सकते हैं!और, यदि ब्लू मॉन्स्टर में जरा सा भी गुण विंडोज़ का आ गया तो दारूबाजों को इसका इस्तेमाल संभल कर करना चाहिए. उदाहरण के लिए, कभी भी आपका नशा क्रैश हो सकता है, इस दारू के साथ रतलामी नमकीन का कोई ब्रांड कम्पेटिबल नहीं होगा - यानी उसके साथ इस्तेमाल करने पर अव्वल तो नशा ही नहीं चढ़ेगा या चढ़ेगा तो दन्न से उतर जाएगा, इत्यादि इत्यादि...
(बाजू का चित्र - साभार टेकक्रन्च)Technorati tags: , , , , , , , , ,

फ़िफ्टीन सेकण्ड्स ऑफ़ फ़ेम रीवाइन्डेड…

‘पचहत्तर सेकण्ड मात्र’ यदि एकदम सटीकता से कहें तो... कोई सालेक भर पहले सहारा समय में मैं पहली मर्तबा टीवी कैमरे के रूबरू हुआ था. उस वक्त लाइव प्रोग्राम में मैं एक तरह से अपनी बात कहने में असफल ही रहा था. इस बार सीएनएन-आईबीएन के प्रोग्राम पर भी इसीलिए मैं ज्यादा उत्साहित नहीं था. क्योंकि मेरा कुंजीपट भले ही थोड़ा सा धनी प्रतीत होता हो, परंतु वाणी पूरी कंगाल और फटेहाल है. और इसका जीवंत उदाहरण इससे बड़ा और क्या हो सकता है? हालांकि देबाशीष ने अक्षरग्राम पर वीडियो पहले ही दिखा दिया था और नितिन व्यास ने इसकी कड़ी पहले ही उपलब्ध कर दी थी, मगर आधे घंटे के प्रसारित प्रोग्राम (इसे सीएनबीसी आवाज पर हिन्दी में डब कर टेलिकास्ट किया गया था, बाद में मेरे एक मित्र ने फोन कर मुझे बताया) में से रतलामी सेव को कवर करती डेढ़ मिनट की स्टोरी आप एक बार फिर से नीचे यू-ट्यूब के एम्बेडेड वीडियो कड़ी पर देख सकते हैं. इस बीच, केडीई4 के हिन्दीकरण के लिए राजीवगांधी फ़ाउन्डेशन व सराय के संयुक्त तत्वावधान में मेरी (लगातार, चौथी) परियोजना स्वीकृत की गई है. छः महीने की इस परियोजना में कोई डेढ़ लाख से ऊपर हिन्दी वाक्…

कबाड़ी, भड़ासी और भवानी नामधारी हिन्दी चिट्ठे

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बीलेटेड हिन्दी दिवस पर लीजिए पेश है कुछ कबाड़ी, भड़ासी और भवानी टाइप-नामधारी हिन्दी चिट्ठे भीड़ से अलग कुछ करने का, अलग कुछ दिखने का अपना अलग ही मजा है. इसी क्रम में कुछ नेगेटिव आइकन - कुछ ऋणात्मक प्रतीकों जोड़ दिया जाए तो बात और भी बन जाती है. पिछले कुछ अरसे से हिन्दी चिट्ठों में ऐसे ही, ढेरों की संख्या में कबाड़ी और भड़ासी नामधारी चिट्ठों/चिट्ठाकारों का प्रादुर्भाव हुआ है. इसकी शुरूआत संभवत: पंगेबाज नाम के चिट्ठे/चिट्ठाकार से हुई थी. अब ये बात जुदा है कि नाम में क्या रखा है और यथा-नाम-विपरीतो-गुणः की तर्ज पर चिट्ठों/चिट्ठाकारों के नाम से उसकी सामग्री का कोई लेना देना भले ही न हो. आइए, ऐसे ही कुछ चिट्ठों/चिट्ठाकारों पर एक नजर डालते हैं. इनमें से बहुत से चिट्ठे टंबलर के जरिए स्वचालित ढूंढे गए हैं, और हो सकता है कि इनमें से कई अभी चिट्ठा-संकलकों पर दर्ज भी न हों. बाथरूम सिंगर शोयूजलेस मीहिलहिलेरियस.वर्डप्रेस.कॉम2वेजिटेरियनिज्मचिट्ठाचोर (सिर्फ आमंत्रितों के लिए. इसे पढ़ने हेतु आपको इनका निमंत्रण आवश्यक होगा) शाई-टू-थिंक का डिमाइस-ऑव-लवनाम में क्या रखा है? तो इस चिट्ठे के नाम MBM 1…

करम करे तो फल की इच्छा क्यों न करे चिट्ठाकार?

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कर्मा-फैन हमारे जैसे लोगों के लिए ही है. जो कर्म करते हैं तो लागत से दो-गुना, तीन गुना, कई-कई गुना फल की इच्छा पालते हैं. कर्मा-फैन इंटरनेट पर बेहद उम्दा, नया और नायाब विचार है. कम से कम चिट्ठाकारों के लिये तो है ही. वैसे तो यह दो तरफा  काम करता है, परंतु इसका टैग-लाइन है- गेट सपोर्ट फ्रॉम योर फैन्स!यानी अपने चिट्ठा फैनों से आप कर्मा-फैन के जरिए सहयोग व भरणपोषण स्वरूप नकद राशि प्राप्त कर सकते हैं. जब आप अपने अनवरत चिट्ठा-पोस्टों से अपने पाठकों का मनोरंजन करते हैं, उनके ज्ञान में वृद्धि करते हैं तो क्या उनका दायित्व नहीं बनता कि वे भी आपको कुछ वापस दें? इस काम के लिए कर्मा-फैन चिट्ठाकारों व चिट्ठापाठकों के सहयोग के लिए तत्पर है. आप कर्मा-फैन से जुड़कर अपने चिट्ठे में अपने पाठकों से सहयोग प्राप्त तो कर ही सकते हैं, आप अपने पसंदीदा चिट्ठाकारों को नकद राशि देकर उनका उत्साहवर्धन भी कर सकते हैं. तो, यदि आपको इस चिट्ठाकार को कुछ गिव-बैक, कुछ धन्यवाद स्वरूप वापस करना है तो कर्मा-फैन में अभी ही खाता बनाएँ. यदि आप चिट्ठाकार हैं और अपने पाठकों से कुछ आशीर्वाद (मात्र आशीर्वचन नहीं,) स्वरूप, …

नए विंडोज़लाइव राइटर बीटा 3 से ब्लॉगर में सीधे ही चित्रों को पोस्ट करें.

जी हाँ, अब यह सुविधा विंडोज लाइव राइटर के नए संस्करण बीटा 3 में उपलब्ध है. अब आपको अपने चित्रों को ब्लॉगर पर अपलोड करने के लिए किसी अन्य तीसरे औजार की आवश्यकता ही नहीं है. बस चित्र को कॉपी पेस्ट कर उचित स्थान पर लाइव राइटर में पोस्ट पर चिपका दें और अपना पोस्ट पब्लिश कर दें. ठीक जैसा का तैसा वह ब्लॉगर पर प्रकाशित हो जाएगा. रचनाकार पर यह ब्लॉग पोस्ट चित्र समेत विंडोज लाइव राइटर के जरिए ही किया गया है. ब्लॉगिंग एक कदम और आसान बना दिया है लाइव राइटर ने. विंडोज लाइव राइटर बीटा 3 (नया, ताजा तरीन संस्करण) संस्करण यहाँ से डाउनलोड करें ------------ Technorati tags: ,

क्या आप चिट्ठाकार स्टेपनी बनना चाहते हैं?

क्या आपको चिट्ठा फैटीग्यू हो गया है? क्या आपको अपना चिट्ठा लिखने के लिए माल मसाला नहीं मिलता या माल-मसाले का भंडार है, परंतु उससे कोई नावां नहीं मिलता? क्या आप अपने चिट्ठे को धांसू पोस्टों से भर देना चाहते हैं? या आप चिट्ठा लिख-लिख कर एडसेंस की कमाई को भी मात देना चाहते हैं?तो आपके लिए एक शानदार मौका है.आज ही अपनाएँ ये  धांसू आइडिया. इसके लिए बस यहाँ चटका लगाएँ और अपनी तकदीर बदल कर रख दें. और, यकीन मानिए, ये कड़ी किसी अंग्रेजी चिट्ठे की नहीं है.

एक मरीज का चिकित्सा-यात्रा संस्मरण 2

(भाग 1 में आपने पढ़ा कि सीएमसी वेल्लोर में चिकित्सकीय परीक्षण के लिए आवश्यक राशि जमा करवाने के लिए हम टोकन लेकर काउन्टर पर इंतजार कर रहे थे...) मैंने चारों ओर जरा बारीकी से निगाहें फिराईं. मेरे बाजू की कुर्सी पर एक सज्जन बैठे थे. वो बिहार से आए थे. मैंने जरा सी बात छेड़ी कि लाइन तो बहुत लंबी है. पता नहीं कब नंबर आएगा. बस फिर क्या था. वह तो जैसे भरे बैठे थे - फट पड़े. उन्होंने बताया कि वे कोई पंद्रह दिन से वहां डेरा डाले बैठे हैं. उनकी पत्नी को किडनी स्टोन संबंधी कुछ जांच पड़ताल व चिकित्सा करवानी थी. इसके लिए वे कोई छटवीं दफा जांच फीस जमा करवाने के लिए लाइन में बैठे हैं. और हर बार कोई दो से पाँच घंटे की लाइन में उन्हें लगना पड़ा है. यही नहीं, परीक्षण केंद्रों की तो और भी बुरी गत है. एक-एक परीक्षण के लिए बहुत लंबी लाइन लगती है और वो भी बेहद उबाऊ और बीमार कर देने वाली होती है. भीड़ में आधी से अधिक संख्या में बिहार, झारखंड और विशेष कर बंगाल के मरीज दिखाई दे रहे थे. बंगाली मरीजों की अधिकता के कारण अस्पताल में कई स्थानों पर अंग्रेजी, तमिल के साथ बंगाली भाषा में भी निर्देश दर्ज थे. बंगाल …

एक मरीज का चिकित्सा-यात्रा संस्मरण

मैं पिछले दिनों देश के पहले नंबर के चिकित्सा संस्थान क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर जो कि सीएमसी वेल्लोर के नाम से जाना जाता है, की चिकित्सा यात्रा (मेडिकल टूरिज़्म) पर था. मेरे लिए तो यह चिकित्सा यात्रा ही थी. मैं कोई छत्तीस घंटे की अनवरत रेल यात्रा कर अपनी चिकित्सकीय जाँच करवाने देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में पहुँचा जो था. दरअसल मुझे कुछ समय से – बल्कि कहिए कि कुछ वर्षों से अपने दोनों कान में कुछ भारी-पन सा महसूस होता आ रहा है और खासकर तब जब मैं करवट लेकर सोता हूं. और यदा कदा कान में दर्द भी होता है. स्थानीय नाक-कान-गला रोग चिकित्सक तो दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाई देने के अलावा ज्यादा कुछ कर नहीं पा रहे थे तो कोई तीन साल पहले इंदौर के विशेषज्ञ को भी दिखाया था. वहाँ पर सीटी स्कैन के जरिए भी ‘कुछ’ नहीं निकला. परंतु अभी कुछ दिनों से परेशानी इतनी ज्यादा हो रही थी कि मुझे एलीवेटेड बैड का सहारा लेना पड़ रहा था. इसी बीच मेरे एक मित्र ने बताया कि सीएमसी वेल्लोर का ईएनटी विभाग बहुत अच्छा है. उन्होंने अपने स्वयं के अनुभव भी बताए. और, उनसे वार्तालाप खत्म होने के पहले ही मैंने अपन…

अभिव्यक्ति-हिन्दी.ऑर्ग द्वारा इंटरनेट के हिन्दी लेखक पुरस्कृत

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(डॉ. गुरदयाल प्रदीप व डॉ. जगदीश व्योम)
शारजाह, 15 अगस्त 2005 को अभिव्यक्ति (www.abhivyakti-hindi.org) के सात वर्ष पूरे करने के उपलक्ष्य में "सहयोग पुरस्कार" प्रदान करने का निश्चय लिया गया। ये पुरस्कार पिछले वर्षों में अभिव्यक्ति के लिए निरंतर सहयोग देने वाले लेखकों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं का सम्मान करने के लिए प्रदान किए गए हैं. श्रेष्ठ स्तंभकार पुरस्कार के लिए दो नामों को चुना गया है। प्रौद्योगिकी के लेखक रविशंकर श्रीवास्तव तथा विज्ञान वार्ता के लेखक डॉ गुरुदयाल प्रदीप। निरंतर सहयोग पुरस्कार के लिए डॉ जगदीश व्योम को चुना गया है जो साहित्य की विभिन्न विधाओं में अनेक प्रकार से अभिव्यक्ति व अनुभूति के लिए सहयोग करते रहे हैं। ये सभी रचनाकार अपने अपने विषय के जाने माने विशेषज्ञ हैं और विश्वजाल की दुनिया में अपने अमूल्य योगदान के लिए पहचाने जाते हैं। पुरस्कार में 25,000 भारतीय रुपए नकद, स्मृतिचिह्न तथा प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाएगा। अभिव्यक्ति के लेखकों की सूची में इन लेखकों के नाम गतिमान नक्षत्र से तारांकित किए गए हैं।
ये पुरस्कार हर वर्ष प्रदान किए जाएँगे। (समाचार स्रोत - अभ…

बैंक ऑफ इंडिया के जाल-स्थल में सेंध मारी

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आमतौर पर बैंकिंग संस्थाओं के जाल-स्थलों पर सुरक्षा के हर संभव उपाय किए जाते हैं और उनमें अत्यंत सुरक्षित – वेरीसाइन जैसी सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता है. इसके बावजूद जाल-स्थल के लुटेरे अच्छी खासी सुरक्षित साइटों में भी सेंध लगाने में यदा कदा सफल हो ही जाते हैं. कुछ समय पहले हिन्दी-ब्लॉग्स.ऑर्ग को हैक कर लिया गया था, और हाल ही में मॉनस्टर.कॉम की साइट को हैक कर लिया गया था और उसमें पंजीकृत उपयोक्ताओं के डाटा चुरा लिए गए थे. जब मॉनस्टर.कॉम और बैंक ऑफ इंडिया जैसी साइटें हैक हो सकती हैं तो हिन्दी-ब्लॉग्स.ऑर्ग की क्या बिसात? कम्प्यूटर सुरक्षा सेवा एफ़-सेक्यूर के अनुसार, बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य पन्ने पर एक अदृश्य आई-फ्रेम घुसा दिया गया था जो कि उपयोक्ता के कम्प्यूटर पर किसी अन्य जाल-स्थल के यूआरएल को स्वचालित लोड कर लेता था. यह यूआरएल फिर तीन अन्य यूआरएल को लोड कर लेता था. इन्हीं में से एक जाल-स्थल से एक जावा-स्क्रिप्ट फ़ाइल loader.exe आपके कम्प्यूटर पर स्वचालित डाउनलोड किया जाता था जो कि आपके कम्प्यूटर पर कोई दो-दर्जन से अधिक अतिरिक्त मालवेयर व ट्रोजन फ़ाइलों को - जो आपके उपयोक्ता नाम व प…

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