संदेश

May, 2007 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

उम्मीद है आप बुरा नहीं मानेंगे...

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विकास कुमार ने जब अपने चिट्ठे पर लेटेन्ट स्पेस की कड़ी दी तो मीनाक्षी से उनके पोस्ट पर टिप्पणी कर यही पूछा -विकास कुमार said... I've given a link to your blog from mine. I hope you dont mind.http://vikashkablog.blogspot.com/2007/05/iit-jee.htmlअगर विकास ये बात मीनाक्षी से नहीं पूछते तो?हम लोग सभी एक दूसरे के चिट्ठों की कड़ियाँ अंधाधुंध अपने चिट्ठे पर देते हैं. किसी दिन कोई बंदा बुरा मान गया तो? बुरा मान गया तो क्या होगा? वह कोर्ट चला जाएगा जहाँ कोई जयपुरिया या बनारसी या कनाडाई किस्म का कोई जज उस चिट्ठाकार को गिरफ़्तारी के समन्स भेज देगा जिसने अपने चिट्ठे में फरियादी के चिट्ठे की कड़ी दी है.आप कहेंगे कि मैं क्या घाल-मेल बात कर रहा हूँ और ये कनाडाई जज वाली बात कहां से आ गई? क्या भारत के किसी कस्बे का नाम कनाडा है?दरअसल पिछले कुछ समय से यह खबर कहीं कहीं चल रही थी कि ब्रिटिश कोलम्बिया, कनाडा में किन्हीं मिस्टर वायन क्रुक्स ने इंटरनेट पर मानहानि का मुकदमा दायर किया हुआ है. आप कहेंगे इंटरनेट? जी हाँ, उन्होंने इंटरनेट पर मुकदमा दायर किया है जिसमें प्रतिवादी याहू!, विकिपीडिया, माइस्पेस, प…

टंबलर - एक नया, चिट्ठास्क्रैपबुक?

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टंबलर - एक नया, नई-नई ख़ूबियों वाला चिट्ठा स्थलचिट्ठाचर्चा में मैंने अपने टंबलर का जिक्र किया था. उसी टंबलर से मैंने एक विजेट भी बनाया है जिसे आप इस चिट्ठे के बाजू पट्टी में दाहिनी ओर देख सकते हैं.टंबलर क्या है? टंबलर एक नया, नई-नई ख़ूबियों वाला चिट्ठा स्थल है जो आपके ब्लॉग प्रकाशन को और भी सरल बनाता है. और, यह मुफ़्त है - व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए बिलकुल मुफ़्त.सरसरी निगाह में यह वर्डप्रेस और ब्लॉगर - दोनों की ही सम्मिलित ख़ूबियों को अपने में समेटा हुआ प्रतीत होता है. इसकी कुछ ख़ूबियाँ मुझे पसन्द आईं जैसे कि आप इसमें आरएसएस फ़ीड के जरिए पोस्ट कर सकते हैं. और चाहे जितनी फ़ीड डाल सकते हैं. उदाहरण के लिए, यदि मैं नारद की फ़ीड इसमें डाल दूं तो यह स्वयंमेव नारद की प्रविष्टियों को ब्लॉग पोस्ट के रूप में सम्मिलित करता रहेगा.इसकी इसी ख़ूबी को जांचने परखने के लिए मैंने गूगल ब्लॉग सर्च की फ़ीड इसमें डाल दी.नतीजा आपके सामने है. गूगल नए नए ब्लॉगों को ढूंढता है और उसकी फ़ीड टंबलर का मेरा यह चिट्ठा खींच लेता है, व स्वयंमेव प्रकाशित करता रहता है.यही नहीं, इसमें आप फ़्लिकर, यू-ट्यूब, पॉडकास्ट इत्याद…

एक चिट्ठाकार की आखिरी हँसी...री लोडेड...

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दि लास्ट लाफ़इस चित्र को ध्यान से देखिए. ये इनके जीवन की अंतिम, उन्मुक्त हँसी है.फिर इनके जीवन में दुनियादारी, रिश्तेदारी और न-जाने-क्या-क्या-दारी प्रवेश कर जाएगी और आगे की जो भी हँसी आएगी, वो, यकीन मानिए, नक़ली-सी और बनावटी-सी हँसी होगी. और, बहुत होगी तो विद्रूप की हँसी होगी - दुनियादारी पर ठहाके लगाते हुए...मैं इतने विश्वास के साथ कैसे कह रहा हूँ?भुक्तभोगी जो हूँ!चित्र में ये दो जीव एक जान हैं कौन? देखते हैं कौन सबसे पहले अंदाज़ा लगाता है :) , और सही अंदाज़ा लगाता है!अद्यतन # 1
जब यह पोस्ट प्रकाशित किया गया था तो नारद जी को एक ब्लॉग के गुम हो जाने सेअजीर्ण हो गया और वे उसी को ढूंढते रह गए. लिहाजा यह पोस्ट नारद के पिछले पेजों में बरीड हो गया और इसे मैं फिर से पोस्ट कर रहा हूँ, थोड़ा सा संपादित कर और अब तक पाठकों के आए टिप्पणियों पर प्रतिटिप्पणियाँ कर.जैसा कि समीर जी,अतुल जी,धुरविरोधी जी ने बख़ूबी अंदाज़ा लगा लिया था - यह चित्र मेरी भांजी निवेदिता और हिन्दी ग्राम के चिट्ठाकार - आशीष का है. और उन्मुक्त जी, यह चित्र 20 अप्रैल को हुई सगाई के अवसर का है, पर हाँ, सगाई को आधी शादी तो मानी ह…

सराय फ्लॉस फ़ेलोशिप हेतु प्रस्ताव आमंत्रित

यदि आप अपने व्यक्तिगत पैशन के लिए किसी सॉफ़्टवेयर का विकास कर रहे हैं या मन में ऐसा कोई विचार है और उसे आम जन के लिए ओपन-सोर्स के रूप में जारी करना चाहेंगे तो आपकी उस परियोजना को थोड़ा सा अवलम्बन और थोड़ी सी पहचान सराय फ्लॉस फ़ेलोशिप के जरिए मिल सकती है.राजीव गांधी फ़ाउंडेशन द्वारा समर्थित इस फ़ेलोशिप के तहत स्वीकृत परियोजना को छः महीनों में पूरा करना होगा और इसके लिए 70 हजार रुपयों का अनुदान स्वीकृत किया जाता है.ज्ञातव्य हो कि लिनक्स तंत्रों में गनोम, केडीई व ओपनऑफ़िस के हिन्दी अनुवादों समेत बहुत से अन्य उपयोगी सॉफ़्टवेयर जैसे कि न्यूज़रैक, हिन्दवी इत्यादि को सराय फ्लॉस फ़ेलोशिप का पोषण मिला था.प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तारीख 25 जून 2007 है.विस्तृत विवरण यहाँ देखें. Tag ,,,

ब्लॉग कितने प्रकार के होते हैं?

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या फिर, ब्लॉग कितने प्रकार के हो सकते हैं?
अब ये तो मुझे भी नहीं मालूम, मगर कुछ क़िस्में मुझे मिली हैं -ब्लागरि, ब्लागोतं, ब्लहसनं, ब्लास्यं, ब्लाक्कवित, ब्लाक्कथब्लागुडु, ब्लागुडुगाय, ब्लागु संदडि, ब्लागु शोधनब्लाग्पटिम, ब्लाग्शूरुडु, ब्लाग्दानं, ब्लाग्धोरणि, ब्लागुमायब्लाजकीयालु, ब्लाश, ब्लूतु, सिनी ब्लागु, ब्लोटो (ब्लागु फोटो)कहाँ?आप इस कड़ी को क्लिक कर इस ब्लॉग के बाजू पट्टी में, सबसे निचले, दाएँ कोने में स्वयं देखें :)वैसे, मुझे भी इन शब्दों के अर्थ नहीं मालूम :)
आपके अपने हिसाब से ब्लॉग की अपनी क़िस्में भी होंगीं. क्या होंगी वे क़िस्में भला? Tag ,,,

राग रंग - एक नया पॉडकास्ट

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कोई दो साल पहले मैंने एक पोस्ट लिखा था - ब्लॉग? क्या इतिहास की बातें करते हो, अब तो पॉडकास्ट करो - तब मैंने नहीं सोचा था कि हिन्दी में पॉडकास्टिंग को अपनी पूरी रफ़्तार में आने में इतना समय लग जाएगा.बहरहाल, देर आयद दुरूस्त आयद. उन्मुक्त अपने ऑग फ़ॉर्मेट में विविध विषयों में हिन्दी पॉडकास्टिंग की अलख जगाए हुए थे कि तरकश पर खुशी के पॉडकास्ट से सिलसिला आगे बढ़ा. फिर पॉडभारती का पदार्पण हुआ जो अपने बेहद पेशेवराना अंदाज के कारण बहुत जल्द सफ़लता की सीढ़ियों पर चढ़ेगा ऐसी उम्मीदें हैं.और, अभी हाल ही में प्रगति रथ ने भी अपना पॉडकास्ट ब्लॉग - राग रंग प्रारंभ किया है जो माईपॉडकास्ट.कॉम नामक मुफ़्त पॉडकास्ट सेवा प्रदाता पर स्थित है. प्रगति - श्री जयप्रकाश मानस जी की सुपुत्री हैं. राग रंग के आरंभिक अंकों में जहाँ कुछ बेहद लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी गीतों को पिरोया गया है तो वहीं कुछ हिन्दी फ़िल्मी गाने भी हैं.माईपॉडकास्ट.कॉम के जरिए अपना स्वयं का पॉडकास्ट प्रारंभ करना बहुत आसान है. या तो आप माइक्रोफ़ोन से अपनी स्वयं की बकबक रेकॉर्ड करें - जैसा कि उन्मुक्त करते हैं और उसकी एमपी3 (उन्मुक्त ऑग फ़ॉर्मेट इस्त…

अपने चिट्ठे में स्लाइड शो कैसे लगाएं?

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कैक्टस के फूलों का स्लाइडशो अपने इस चिट्ठा पर मैंने लगाया था. यह फ़्लैश आधारित स्लाइड शो है जो ब्राउज़र में तीव्रता से लोड होता है. कुछ पाठकों ने पूछा कि यह कैसे लगाया गया है.हाल ही में पिकासा, ऑनलाइन चित्र भंडार (पिकासावेब) में यह सुविधा जोड़ी गई है कि आप अपने अपलोड किए चित्रों को एक एलबम के रूप में फ्लैश आधारित स्लाइड शो के रूप में अपने जाल पृष्ठ पर प्रकाशित कर सकते हैं. और बड़ी आसानी से कर सकते हैं.यदि पहले से कोई खाता नहीं है तो आपको पिकासावेब में एक खाता खोलना होगा (यदि आप ब्लॉगर इस्तेमाल करते हैं तो आपके ब्लॉग के सारे चित्र एलबम के रूप में पिकासा में पहले से ही उपलब्ध होते हैं- पिकासा और ब्लॉगर का एकीकरण किया जा चुका है). फिर पिकासावेब में अपने चित्रों को एक एलबम का नाम देकर उसमें अपलोड करें. अपने चित्रों को पिकासावेब में अपलोड करने के लिए आप चाहें तो पिकासा औजार का भी इस्तेमाल कर सकते हैं जो कि यहाँ से डाउनलोड किया जा सकता है. पिकासा औजार अब हिन्दी में भी उपलब्ध है.अपलोड किए चित्रों के एलबम को चुनकर आप निचले दाहिने कोने में Embed Slideshow कड़ी को क्लिक करें. एक नए पॉपअप विंडो …

कौन कहता है कि कैक्टस में सिर्फ कांटे ही कांटे होते हैं?

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गरमी की छुट्टियाँ हो गई हैं और सभी कहीं न कहीं सैर का प्रोग्राम बना रहे हैं. घर में भी इस दफ़ा बाल-बच्चों ने उत्पात मचाया कि चलो कहीं सैर को चलें.अब समस्या ये आई कि कहाँ चलें? किसी ने सुझाया कोवलम् के बैकवाटर पर चलें तो किसी ने टेहरी की पहाड़ियों की बात की. किसी ने मलेशिया-सिंगापुर या फिर दुबई का सुझाव दिया तो किसी ने मॉट्रियल का.हर सुझाव पर कुछ न कुछ समस्या आती रही और मामला खारिज होता रहा. अचानक दिमाग की बत्ती जली. एक सुझाव मैंने फेंका - सुनकर किसी को मजा नहीं आया. मगर, फिर कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था किसी के पास. जाहिर है, सब सफर की तैयारी में जुट गए.जब हम मंजिल पर पहुँचे तो दोपहर के दो बज रहे थे. धूप तेज थी और हवा कहीं ठहर-सी गई थी. हर तरफ़ कांटे ही कांटे नज़र आ रहे थे. मगर यह क्या? कांटों के बीच कहीं-कहीं संसार की तमाम ख़ूबसूरती सिमट कर झलकने की, फ़ूट पड़ने की कोशिश-सी कर रही थी.हम सैलाना के कैक्टस गार्डन में थे. कोई बीसेक साल पहले धर्मयुग के किसी अंक में इस पर एक विस्तृत फ़ोटो-फ़ीचर भी छपा था. यहां के भूतपूर्व महाराजा ने अपने महल के बाग़ीचे में सिर्फ कैक्टस के ही पौधे रोप रखे थे. …

कान्ट सी हिन्दी? लुकिंग एट टोटल गार्बेज?

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कुछ समय पहले तक यह जुमला अमूमन और आमतौर पर हर हिन्दी चिट्ठे के ऊपरी कोनों में दिख ही जाता था. और उसमें हिन्दी कैसे देखें, कम्प्यूटर को कैसे सेट करें इत्यादि के लिंक होते थे.आजकल बहुत से चिट्ठों में यह दिखाई नहीं देता (मेरे चिट्ठों में से भी यह ग़ायब हो चुका था), परंतु अभी भी लोगों को जिनके पास पुराने विंडोज़ 98 तरह के या नए लिनक्स तंत्र जिनमें इंडिक-हिन्दी समर्थन पहले से संस्थापित नहीं होता है उसमें हमारे ब्लॉग के यूनिकोड हिन्दी दिखाई ही नहीं देते. और, यकीन मानिए, ऐसे प्रयोगकर्ताओं की संख्या हमारे ब्लॉग पाठकों की वर्तमान संख्या से लाखों गुना - जी हाँ, लाखों गुना ज्यादा है!अब आपकी इस समस्या का समाधान पीयूष भट्ट लेकर आए हैं. पीयूष ने पहले ही भोमियो नाम का एक भारतीय भाषाई ऑनलाइन ट्रांसलिट्रेशन औजार बनाया है. जिसके जरिए आप किसी भी हिन्दी चिट्ठे को रोमन लिपि में पढ़ सकते हैं और काट-चिपका कर उसका अन्य इस्तेमाल - जैसे कि मैंने रचनाकार के चुटकुलों के संग्रह व अपने व्यंग्य रचनाओं का किया है - कर सकते हैं. अब उसमें उन्होंने अतिरिक्त ख़ूबियाँ जोड़ी हैं और उसमें आपके लिए अब प्रॉक्सी सुविधा का समा…

जी-मेल के इस्तेमाल के कुछ और पुख़्ता कारण

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अब तक तो हम जी-मेल का इस्तेमाल इंटरनेट पर अ-खंडित हिन्दी के लिए प्रमुख तौर पर और साथ ही साथ इसकी कुछ और अन्य ख़ूबियों - जैसे कि बेहतर स्पैम हैंडलिंग के लिए करते थे. अब इसके इस्तेमाल के कुछ और पुख़्ता कारण सामने आए हैं.क्या हैं ये सॉलिड - पुख़्ता कारण?अब ये आप स्वयं पढ़ें. :)# अद्यतन 1 - इसी तेवर की एक और ख़बर
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'मां' के लिए...

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मदर्स डे पर यह ईमेल फ़ॉरवर्ड अंग्रेज़ी में, पश्चिमी ग्राफ़िक के साथ आया. लगा कि इसे हिन्दी में भी होना चाहिए. पृष्ठभूमि चित्र रेखा के स्केच-स्क्रैप बुक से लिया है.(चित्र को पढ़ने लायक बड़े आकार में देखने के लिए इस पर क्लिक करें)
इसका पीडीएफ़ फ़ाइल यहाँ है. तथा मूल आकार का चित्र (1.2 मेबा) यहां है.
यूनिकोड रंगीन पाठ को इस चित्र के ऊपर चस्पा करने में बहुत समय जाया हो गया. पर, अंतिम परिणाम एक अच्छे हिन्दी ईमेल फ़ॉरवर्ड के लायक तो लगता है बन ही गया.‘मां' के लिए, जिनके लिए मैं अभी भी 50 वर्षीय ‘बाबा' ही हूं!***********.*********** Tag ,,,

आपने इन जाल स्थलों को देखा क्या?

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1 - हिन्दी का एक और ख़ूबसूरत जाल स्थल. हिन्दी मीडिया चैनल डॉट कॉम - हिन्दी प्रेमियों को समर्पित. इस चैनल में टेलिविजन और फ़िल्म मीडिया की चटपटी खबरें आमतौर पर दिखाई दे रही हैं जिनकी जनता दीवानी होती है. यदि इसमें स्टारडस्ट के पूर्व स्तम्भकार शोभा डे की नीता की नटर जैसा चटपटा कॉलम आ जाए तो यकीन मानिए इसके रातों रात लोकप्रिय होने में ज्यादा देर नहीं लगेगी. साथ ही, यह यूनिकोड हिन्दी इंटरनेट को जन-जन तक पहुँचाने में एक अहम् हिस्सा भी बन जाएगी. नेहा धूपिया से मुलाकात इस सिलसिले की आरंभिक कड़ी है. हिन्दी मीडिया चैनल को छवि मीडिया ग्रुप ने बनाया है - जैसा कि इसके नीचे दाएँ कोने पर दिखाई दे रहा है.2 - सब तरफ आई - यानी की आईपॉड, आईट्यून और हर चीज़ आई के बाद गूगल क्यों न पीछे रहे? आईगूगल सुना-देखा है? नहीं तो अभी ही, तत्काल देखें. यह भी विजेट से भरा पूरा आपका अपना गूगल खोज पृष्ठ है जिसे आप अपने मनचाहे रूपआकार दे सकते हैं. इसके हेडर में थीम चयन कर चित्र डाल सकते हैं और बहुत से उपलब्ध विजेटों को चुनकर इसके पन्नों में जोड़ सकते हैं.3 - एक ब्लॉगर की, ब्लॉग के जरिए दिन भर की कितनी कमाई हो सकती है - …

बबली तेरो मोबाइल...

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पिछले दिनों एक चिट्ठे पर अधिकतम टिप्पणीप्राप्त हिन्दी चिट्ठा पोस्ट कौन है इस पर उत्तर-प्रत्युत्तर हुए थे. नारद की टिप्पणी फ़ीड हमें हर दूसरे दिन उत्तरांचल के बबली तेरो मोबाइल पर किसी न किसी पाठक की टिप्पणी दिखाती ही है. आज की स्थिति में उस पोस्ट को 84 टिप्पणियां प्राप्त हो चुकी हैं और ... स्टिल काउंटिंग. आखिर वो क्या चीज है जो पाठकों को बबली तेरो मोबाइल नामक वह पोस्ट आकर्षित कर रही है. वह है लोक गीत. लोक संगीत. मनुष्य हर हमेशा अपनी जड़ों से, अपनी संस्कृति से जुड़ा हुआ ही रहता है. उसे अपना बचपना, बचपन के दिन, बचपन में बिताए लम्हे हमेशा पुकारते रहते हैं. वह अपनी संस्कृति से जुड़कर एक अजीब तरह की खुशी महसूस करता है. छत्तीसगढ़ी भी एक अलग बोली, बानी और संस्कृति है. मेरा बचपना भी वहीं, छत्तीसगढ़ में गुजरा है. अब भी छत्तीसगढ़ से संबंधित कोई भी वस्तु आकर्षित करती है. आइए, आपको छत्तीसगढ़ी संस्कृति की कुछ झलक दिखलाएँ.यू ट्यूब पर छत्तीसगढ़ी के कुछ वीडियो हैं. आमतौर पर इन वीडियो को झारखंड.ऑर्ग ने अपलोड किया है. इनमें से कुछेक में ही आपको छत्तीसगढ़ी संस्कृति की कुछ झलक मिलेगी. बाकी वीडियो…

इंडिया स्फ़ीयर हिन्दी : एक नया नारद?

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और, यह नया नारद तो ज्यादा ही चपल चतुर और व्यावसायिक दीखता है!इंडिया स्फ़ीयर - पल्स ऑन द इंडियन ब्लॉगस्फ़ीयर में एक खंड है हिन्दी ब्लॉग का. यह लगभग नारद जैसे रूप में दिखता है, बस स्टेटकाउंटर का मुँह चिढ़ाता प्रश्न वाचक चिह्न भर नहीं है इसमें. परंतु यह नारद से ज्यादा साफ़ सुथरा, सुघड़ और अच्छा है. उदाहरण के लिए, काल चिंतन की प्रविष्टि - कविता आह्वान को नारद में आप अपठनीय पाते हैं क्योंकि यह कविता को गद्य रूप में बदल देता है जबकि इंडिया स्फ़ीयर में यह अपने पूरे फ़ॉर्मेटिंग के साथ उपलब्ध है. मूलतः भारतीय अंग्रेजी ब्लॉगमंडल को प्रस्तुत करने वाले इस स्थल में हिन्दी ब्लॉगों के इस खण्ड से हिन्दी ब्लॉगों के नए मुरीद पैदा होंगे इसमें कोई शक नहीं.काल चिंतन - नारद पर


काल चिंतन इंडिया स्फ़ीयर पर
हाँ, इसमें कुछ अतिरिक्त, शातिराना खूबियाँ जोड़ी गई हैं जो इसके एडसेंस युक्त बिजनेस मॉडल के लिए जरूरी भी लगती हैं - जैसे कि चिट्ठा पोस्टों के आगे रीड मोर की कड़ी जिसमें आपको पोस्ट का सारांश या पोस्ट का अच्छा खासा हिस्सा नए पेजलोड के उपरांत वहीं पर पढ़ने को मिल जाता है. जिस पोस्ट की फ़ीड उपलब्ध नहीं होती वहां …

आपके चिट्ठों पर नौटंकी?

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देसी चिट्ठों को कमाई करने का एक और साधन हाल ही में सुलभ हुआ है. अमित ने अपने चिट्ठे में खबर दी है कि नौटंकी टीवी नाम का एक नया ऑनलाइन वीडियो प्लेयर जारी किया गया है जो चिट्ठों व जाल-स्थलों को छोटे छोटे विज्ञापन युक्त मनोरंजक वीडियो फ़िल्में दिखाने के एवज में भुगतान करेगा. यह कुछ कुछ यू-ट्यूब जैसा है, परंतु इसका विजेट नुमा कोड लगाने के बाद इसमें जो विज्ञापन युक्त वीडियो क्लिपें दिखाई जाएंगी, उसमें शायद आपका नियंत्रण न रहे. वैसे, नौटंकी टीवी वालों का कहना है कि वे संदर्भित (कांटेक्स्चुअल) सामग्री ही दिखाएंगे. नौटंकी टीवी के वीडियो विज्ञापन अपने चिट्ठे में दिखाने हेतु आपको नौटंकी टीवी में पंजीकृत होना होगा और वे पहले आपके साइट को स्वीकृत करेंगे उसके पश्चात् ही आप अपने चिट्ठे पर वे विज्ञापन दिखा सकेंगे.विज्ञापन युक्त चिट्ठा कैसा होगा और विज्ञापन कैसा होगा? और, क्या सचमुच लोग इन विज्ञापनों को देखेंगे? और सचमुच इनसे कमाई हो सकेगी?ये बात तो भविष्य ही बताएगा.अभी तो नौटंकी टीवी के विज्ञापन युक्त चिट्ठा यहाँ देखें.
नौटंकी टीवी का ऑफ़ीशियल ब्लॉग यहाँ देखें

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कैफ़े हिन्दी टाइपिंग औजार - एक नया बढ़िया और आसान औजार

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यूनिकोड हिन्दी टाइपिंग समस्या का निदान अंततः अब संभवकैफ़े हिन्दी ने एक नया, यूनिकोड हिन्दी टाइपिंग औजार बीटा संस्करण के रूप में प्रस्तुत किया है.यह औजार अंततः अब आपकी यूनिकोड हिन्दी टाइपिंग की समस्या का निदान एक हद तक करने में सक्षम प्रतीत होता है.यह औजार करीब 400 किबा डाउनलोड है तथा संस्थापना में कोई 1 मेबा जगह घेरता है. इसकी संस्थापना बहुत आसान है, सिर्फ दो-तीन क्लिक से संस्थापित हो जाता है और फिर आप इसे प्रोग्राम मेन्यू में जाकर सक्रिय कर सकते हैं.एक बार सक्रिय हो जाने के उपरांत यह आपके सिस्टम ट्रे में जमा रहता है जिसे आप F11 कुंजी या माउस क्लिक के जरिए इसे सक्रिय-अक्रिय करने हेतु टॉगल कर सकते हैं. आपको अपने विंडोज तंत्र में अन्य किसी भी तरह की भाषा संबंधी सेटिंग को बदलने की आवश्यकता ही नहीं होती.इसमें अंतर्निर्मित इनस्क्रिप्ट, रेमिंगटन (कृतिदेव तथा डेवलिस श्रेणी) तथा फ़ोनेटिक कुंजी पट हैं तथा भविष्य में शुषा तथा अन्य हिन्दी कुंजीपटों के समावेश की योजना है.इस औजार के जरिए आप यूनिकोड कम्पायलेंट समस्त अनुप्रयोगों यथा - नोटपैड, वर्ड तथा ब्राउज़रों के इनपुट बक्सों यथा ब्लॉग तथा टिप्पणि…

मई फूल

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अप्रैल फूल तो बहुत से लोगों ने बनाया.चलिए, मैं आपको मई फूल बनाता हूँ :)25 अप्रैल 2007
27 अप्रैल 2007
29 अप्रैल 2007
30 अप्रैल 2007
1 मई 2007बन गए न, मई फूल!संबंधित चिट्ठा - आसमां से टपका एक हीरा मेरे अंगने!
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हसन जमाल का तहलका

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शेष के संपादक हसन जमाल ने ऐसा आखिर क्या कह दिया था कि उसकी गूंज तहलका तक में सुनाई पड़ गई. इससे पहले अनूप ने अक्षरग्राम पर तथा मसिजीवी ने अपने चिट्ठे पर भी इसकी चर्चा की है. हसन जमाल ने नया ज्ञानोदय के फरवरी 07 के अंक में मनीषा कुलश्रेष्ठ के इंटरनेट पर आलेख के सम्बन्ध में अपने पत्र में कुछ मुद्दों को उठाया था. हसन जमाल के उस पत्र के जवाब में अप्रैल 07 के अंक में कटघरे में हसन जमाल शीर्षक से तीन पत्र प्रकाशित हुए, जिनमें हसन जमाल के विचारों को सिरे से खारिज कर दिया गया. संभवतः ऐसे और भी पत्र नया ज्ञानोदय को मिले होंगे, परंतु स्थान की सीमितता स्थानाभाव के कारण इन तीन पत्रों को ही प्रकाशित किया गया. हसन जमाल के प्रकाशित पत्र की स्कैन की गई छवि निम्न है -(चित्र को बड़े आकार में देखने के लिए इस पर क्लिक करें)

प्रत्युत्तर में मैंने नया ज्ञानोदय को एक पत्र प्रेषित किया था जो कि निम्न है -हसन जमाल की अंतर्जालीय कूप मंडूकतामनीषा कुलश्रेष्ठ के आलेख - ‘इंटरनेट और हिन्दी साहित्य' पर हसन जमाल की प्रतिक्रिया (नया ज्ञानोदय, फ़रवरी 2007, पृ. 108) उनकी अंतर्जालीय कूप मंडूकता को गहरे में बिम्बित करत…

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