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April, 2007 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तहलका में हिन्दी ब्लॉग पर आलेख

5 मई 2007 के तहलका के अंक में रविकान्त का आलेख हिन्दी चिट्ठाकारी पर प्रकाशित हुआ है. प्रस्तुत है प्रकाशित आलेख अपने पूरे असंपादित रूप में:LANGUAGEThe New Hindi MediumThe unease among Hindi veterans over the brave new world of Internet blogging is fast being swept aside by young pioneers who view their tongue not as a burden but as an opportunity. Ravikant explores the generation gapThe Hindi blogosphere, running into something like 500 blogs today, is reminiscent of the formative years of the language when it made the transition from the oral and handwritten mode to the print media. But the similarity between the two eras and the two technologies ends here. And, given the Hindi language's notoriously fraught relationship with technology in general and mass-media in particular, it is not surprising that the Hindi bloggers on the Internet are all young - mostly in their twenties and thirties.It is almost a given to think of Hindi as an embattled language, but the fact remains that …

हिन्दी चिट्ठाकारी के लिए जयप्रकाश मानस पुरस्कृत

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(श्री जय प्रकाश मानस)
सृजन-गाथा के चिट्ठाकार श्री जयप्रकाश मानस को उनकी हिन्दी चिट्ठाकारिता के लिए माता सुंदरी फ़ाउंडेशन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.विस्तृत समाचार यहाँ देखें.श्री जयप्रकाश मानस जी को ढेरों बधाईयाँ व शुभकामनाएँ. Tag ,,,

अब गूगल डेस्कटॉप हिन्दी में

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ऑफ़ीशियल गूगल ब्लॉग से आज ही यह खबर मिली कि गूगल डेस्कटॉप यंत्र 29 भाषाओं में, जिसमें हिन्दी भी सम्मिलित है, जारी किया गया है.गूगल डेस्कटॉप में बहुत से अंतर्निर्मित गॅजेट्स तो हैं ही, इसका डेस्कटॉप सर्च फंक्शन भी लाजवाब है और इसमें हिन्दी में सर्च का समर्थन प्रारंभ से ही है. और अब तो इसका तमाम इंटरफ़ेस भी हिन्दी-मय हो गया है.अपने डेस्कटॉप के लिए एक उपयोगी औजार. परंतु ये ध्यान रखें कि यह पृष्ठभूमि में आपके डेस्कटॉप पर ढूंढते रहता है और अपना डाटाबेस बनाता रहता है. कुछ समय के अंतराल में सर्च डाटाबेस 1-2 जीबी का आंकड़ा भी घेर लेता है. इसी लिए इसे किसी ऐसे फ़ालतू पार्टीशन में रखें जहाँ भरपूर जगह हो. वैसे, डिफ़ॉल्ट में यह आपके प्रोफ़ाइल फ़ोल्डर में ही स्थापित होता है.
इसके डाउनलोड पृष्ठ से लेकर संस्थापना प्रक्रिया तक और उसके पश्चात् कार्य व्यवहार में भी यह लगभग हिन्दी मय है. इसके डिफ़ॉल्ट आरएसएस फ़ीड में गीतायन का पृष्ठ जुड़ा है. इसे बड़ी शीघ्रता से मनमाफ़िक बनाया जा सकता है. समाचार भारतीय करने के बाद भी हिन्दी में नहीं आया- जबकि कुछ दिन पूर्व ही गूगल समाचार हिन्दी बीटा जारी किया जा चुका है…

आपके चिट्ठे अब बहुभाषीलिपि में!

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कहावत है कि आदमी तब तक ही ज्ञानी बना रह सकता है जब तक कि वह अपना मुँह न खोले. और, ये बात जानते हुए भी हम कई दफ़ा अपना मुँह जबरन और जबरदस्ती खोलते हैं जग हँसाई का पात्र बनते हैं.बहरहाल, मैंने भी अपना मुंह खोला था और मुझे तत्काल मेरी अज्ञानता का अहसास दिलाया गया. मैंने प्रभु को याद किया - हे प्रभु! मुझे माफ़ करना क्योंकि मुझे खुद नहीं मालूम था कि मैंने ये क्या कह दिया था! प्रायश्चित और पश्चाताप् स्वरूप मैंने सोचा , कि चलिए, रोमन-हिन्दी चिट्ठों की संभावनाएँ तलाशी जाएँ... और, ये क्या - यहाँ तो संभावनाओं के द्वार के द्वार दिखाई दिए...
मनीष ने जब बताया कि रोमन लिपि में लिखे उनके हिन्दी सामग्री पर हिन्दी यूनिकोड पन्नों से ज्यादा हिट मिलते हैं तो मेरा माथा ठनका था.हमारे पास आज तमाम तरह के औजार हैं जिनसे हम हिन्दी को रोमन-हिन्दी तथा रोमन-हिन्दी को हिन्दी में बदल सकते हैं.और, अब तो अपने पास भोमियो.कॉम ऑनलाइन औजार भी हैं जिनके जरिए अपना पूरा का पूरा जाल-पृष्ठ हिन्दी से रोमन-हिन्दी (आईट्रांस स्कीम में) परिवर्तित कर पढ़ सकते हैं. इसके उलट भी हो सकता है यानी रोमन-हिन्दी में लिखी सामग्री को हिन्दी …

क्या मिल सकेंगी आपकी दुआएँ ?

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(श्री जगदीप डांगी)
इससे पहले कि मैं आपसे दुआ मांगूं, थोड़ा सा प्राक्कथन.इस दफ़ा की डिज़िट पत्रिका (अप्रैल 2007) के सॉफ़्टवेयर डीवीडी में जगदीप डांगी द्वारा तैयार किया गया, हिन्दी के दो सॉफ़्टवेयर संलग्न हैं.1 - डांगी सॉफ़्ट हिन्दी अंग्रेज़ी डिक्शनरी तथा2 - डांगी सॉफ़्ट ग्लोबल वर्ड ट्रांसलेटर ये दोनों ही सॉफ़्टवेयर विंडो विंडोज़ 98 तथा विंडोज़ एक्सपी के लिए अलग-अलग संस्थापक फ़ाइलों के साथ संलग्न है. यह इनका डेमो संस्करण है जिसे आप 30 दिनों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.ग्लोबल वर्ड ट्रांसलेटर की ख़ूबी यह है कि इसके जरिए आप विंडोज़ के किसी भी अनुप्रयोग में अंग्रेज़ी के शब्दों का हिन्दी अर्थ देख सकते हैं. बस आपको उस शब्द को दोहरा क्लिक करना होता है. परंतु ये फ़ॉयरफ़ॉक्स या ऑपेरा ब्राउज़र में नहीं चलता. हाँ, आप इसका इस्तेमाल इंटरनेट एक्सप्लोरर, एमएस वर्ड तथा यहाँ तक कि नोटपैड में भी काम में ले सकते हैं. अगर आप इंटरनेट एक्सप्लोरर का इस्तेमाल करते हैं और अंग्रेज़ी पृष्ठ पढ़ रहे हैं और किसी अंग्रेज़ी शब्द का अर्थ नहीं मालूम तो उस शब्द पर क्लिक करिए , आप…

ब्रह्माण्ड का सर्वश्रेष्ठ हिन्दी पृष्ठ...

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कल ब्रह्माण्ड के सर्वश्रेष्ठ पृष्ठ के बारे में लिखते समय ध्यान आया कि ब्रह्माण्ड का सर्वश्रेष्ठ हिन्दी का पृष्ठ कौन सा है या कौन सा हो सकता है या किसे होना चाहिए?तो, जिस तरह एक मां को उसका और सिर्फ उसका अपना ही बच्चा सर्वश्रेष्ठ, सर्वप्रिय होता है, वैसा ही एक ब्लॉगर को उसका और सिर्फ उसका अपना ही ब्लॉग पृष्ठ सर्वश्रेष्ठ और सर्वप्रिय होता है. दूसरे शब्दों में, हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ जाल-स्थल की पहचान तो हो ही गई थी, अब सर्वश्रेष्ठ पृष्ठ की पहचान बाकी थी.इसी ऊहापोह के बीच ब्लॉगर डैशबोर्ड पर नजर पड़ी. अरे! यह क्या? यहां तो 299 का फेर चल रहा है. यानी कि अब तक मेरे इस चिट्ठे में 299 पोस्ट प्रकाशित हो चुके हैं और यह अगर प्रकाशित हो गया तो 300 वां पोस्ट होगा. (वैसे ये कोई तीर मारने वाली बात नहीं है चूंकि मेरा पन्ना का 600 वां पोस्ट बहुत पहले से प्रकाशित हो चुका है, और ताज़ा आंकड़ा 709 है!)इस बीच हिंदिनी में कोई पंद्रह महीनों में छींटे और बौछारें में कोई 196 पोस्टें भी लिखी गईं, रचनाकार के शुरूआती दिनों में अधिकतर पोस्टें मेरे हाथों की टंकित की हुईं थी और आज उसका भी आंकड़ा 349 पर पहुँच रहा है.…

ब्रह्माण्ड के सर्वश्रेष्ठ पृष्ठ का भी यही तो कहना है...

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चौ-तरफ़ा हमलों के बाद, शुक्र है कि एक दफ़ा फिर मोहल्ले में शांति की बातें की जा रही हैं.यूं तो मोहल्ले ने पहले भी एक दफ़ा सुर बदलने की कोशिशें की थीं. उम्मीद है, इस दफ़ा की ये शांति चिर-स्थायी रहेगी. आखिर, ब्रह्माण्ड के सर्वश्रेष्ठ पृष्ठ का भी यही कहना है. उस स्थल के बारंबार-पूछे-जाने-वाले-सवाल पृष्ठ की एक प्रश्नोत्तरी का उदाहरण यहाँ देना अत्यंत समीचीन होगा -प्रश्न : आप धर्म के बारे में कोई एक पृष्ठ क्यों नहीं लिखते? उन मूर्ख मूर्तिपूजकों, ईसाईयों, बुद्धिस्टों, नास्तिकों, मोरमॉनों, हिन्दुओं, मुसलमानों, यहूदियों के बारे में आपका क्या खयाल है? क्या आप यह समझते हैं कि वे सभी सचमुच के मूर्ख हैं? उत्तर : नहीं, उन्हें शांति से रहने दें. मैं अपने वेब साइट पर दो उत्तेजक पैरा लिख कर किसी की मूल-भूत अवधारणाओं को बदल देने में यकीन नहीं करता. आप जिसमें विश्वास करते हैं उस पर करते रहिए और भगवान के लिए चुप रहिए. पूरा का पूरा अ-धार्मिक, अनास्तिक और अ-कुछ-भी अब चुक-सा गया है; अब कोई नई बात कहें. यदि आप पुराने फ़ैशन के, धर्म-संबंधी वाद-विवादों को चाहते हैं तो कहीं और तलाशें. मुझे विश्वास है, आपको ब…

बधाईयाँ! आपके मोबाइल फोन ने जीता है करोड़ों का पुरस्कार...

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बधाईयाँ! आपके मोबाइल फोन ने जीता है करोड़ों का पुरस्कार...इंटरनेट पर धूम मचाने के बाद फ़िशरों ने अपने पाँव मोबाइल फ़ोनों की ओर मोड़ दिए हैं.अब आपके मोबाइल फ़ोनों पर किसी भी समय कुछ इस तरह के एस एम एस संदेश आ सकते हैं -"माइक्रोसॉफ़्ट से आधिकारिक घोषणा. बधाईयाँ. आपके मोबाइल फोन नंबर ने यूएस डॉलर 10 मिलियन का इनाम जीता है. कृपया अपना ईनाम प्राप्त करने के लिए कल सुबह आठ बजे इस नंबर पर फोन करें - XXXXXXXXXX . धन्यवाद. "जाहिर है, ऐसे संदेशों से सावधान रहें व इन्हें तत्काल मिटा दें. यदि संभव हो तो बताए गए नंबर की रपट पास के थाने में दर्ज कराएँ.एफ़-सीक्योर एंटीवायरस के एक चिट्ठे में एक ऐसे ही मोबाइल फ़िशिंग आक्रमण के बारे में मजेदार विवरण दिया गया है. वैसे, इसकी विधि कुछ ऐसे ही होगी जैसी कि आमतौर पर नाइजीरियन किस्म के फ़िशिंग हमलों में होता है - आपको ईनाम का या बड़ी रकम को ठिकाने लगाने का लालच दिया जाता है और फिर लिखा-पढ़ी के खर्चे इत्यादि के लिए रुपए ऐंठे जाते हैं.अद्यतन - # रक्षकों को भी जरूरत होती है सुरक्षा की! - जी हां, एक मजेदार खबर के मुताबिक एक फ़िशिंग साइट ने जो पेपॉल का र…

इंडिया ब्लॉग्स...

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भारत के सर्वकालिक-सर्वाधिक सफल (व्यावसायिक रूप से भी!) ब्लॉगर अमित अग्रवाल ने इंडिया ब्लॉग्स नाम से भारत और भारतीयों से संबंधित सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले ब्लॉगों की सूची हाल ही में जारी की है. सूची विषयवार है और सूची में हर विषय के बहुत से अच्छे चिट्ठे सम्मिलित हैं. मुझे कुछ ऐसे चिट्ठे मिले जिन्हें पढ़कर लगा कि ये तो मुझे पहले से पढ़ना चाहिए था.इस सूची में, जाहिर है, इस चिट्ठे का भी नाम सम्मिलित है.हिन्दी के अन्य चिट्ठे जो इस सूची में हैं वे हैं -नुक्ता चीनी, मेरा पन्ना,कुछ बूंदें कुछ बिन्दु,फ़ुरसतिया,उड़न-तश्तरी,ई-पंडित,दुनिया मेरी नज़र सेपहले तो मुझे लगा कि ये सूची तो कुछ गलत सलत बना दी गई है. परंतु फिर देखा कि इस सूची में फ़ुरसतिया, ई-पंडित, उड़न-तश्तरी, मेरा-पन्ना, नुक्ताचीनी इत्यादि इत्यादि भी हैं तो लगा कि नहीं, ये सूची तो एकदम सही है. उड़न-तश्तरी को तो दो-दो ईनाम मिल चुके हैं, मेरा-पन्ना हिन्दी का सर्वाधिक पोस्ट-और-पाठक वाला सर्वविदित चिट्ठा है ही, ई-पंडित ने गिनती के चार महीने में ही हिन्दी ब्लॉगिंग की दिशा बदल दी है और जहाँ कहीं मैं ब्लॉग और हिन्दी ब्लॉग की चर्चा करता हूँ क…

जूस्ट : टीवी जैसा कि आप हमेशा से देखना चाहते थे!

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टेलिविजन का जादू - इंटरनेट की अंतर्निर्मित शक्ति के साथ. जूस्ट आपको अपने टेलिविजन चैनलों का आनंद देने के लिए संपूर्ण नियंत्रण प्रदान करता है जिससे टेलिविजन की आपकी दुनिया बदल कर रह जाती है.ये कुछ पंक्तियाँ आप पाएंगे जूस्ट के मुख पृष्ठ पर. यू-ट्यूब, ब्लिंक्स इत्यादि वीडियो आधारित वेब साइटों में जहाँ आप अपने पसंद के हर संभव वीडियो और टेलिविजन चैनलों के एपीसोड्ड ढूंढ ढांढ कर आराम से और आसानी से मुफ़्त में देख सकते हैं, जूस्ट में ऐसा नया क्या है?जूस्ट की कल्पना आपको इंटरनेट के जरिए एक सामान्य टेलिविजन चैनल की सुविधा प्रदान करने की है. और, आरंभिक जांच परख में यह अपने काम में सफल प्रतीत होता है - बशर्ते आपके पास भरोसेमंद ब्रॉडबैण्ड सेवा हो - कम से कम 1 एमबीपीएस डाउनलोड सुविधा सहित.कोई दो-तीन महीने पूर्व मैंने जूस्ट बीटा टेस्टिंग के लिए पंजीकरण किया था. कल उनका आमंत्रण प्राप्त हुआ तो कुछ जांच परख किया गया. मैंने रेंडमली एक चैनल पर एक एपीसोड चुना - वर्ल्ड ऑफ़ स्टुपिड. मेरे बीएसएनएल के ब्रॉडबैण्ड में जो कहने को तो 2 एमबीपीएस सेवा है, यह भयंकर रूप से अटक अटक कर चला. एक वर्कअराउण्ड है - आप इस एप…

अब आप हिन्दी में ब्लॉग कर सकते हैं!

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तो क्या हम पिछले चार साल से तो भाड़ भूंज रहे थे?गूगल ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में लिखा है कि अब आप हिन्दी में ब्लॉग कर सकते हैं. शीर्षक और साथ में दिए लेख से तो लगता है कि अब तक हिन्दी में ब्लॉग ही संभव नहीं था. दरअसल ब्लॉगर में हिन्दी ट्रांसलिट्रेशन औजार जोड़ने वाली बात को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बताने के लिए इस लेख को लिखा गया और उत्साहजन्य अतिरेक में तो अति हो गई.अप्रैल 2004 में हिन्दी चिट्ठाजगत् की पहली पोस्टिंग नौ दो ग्यारह में आलोक द्वारा की गई और जून 2004 से मैंने हिन्दी में ब्लॉग लिखना शुरू किया. और ये सभी ब्लॉगर ब्लॉग में ही खोले गए थे!
गूगल जो तमाम दुनिया से सामग्री ढूंढ ढांढ कर लाता है - वहाँ ऐसी अज्ञानता युक्त अर्ध-सत्य बातें - भाई ये बात कुछ हज़म नहीं हुई! Tag ,,,

पीपल बीटा : एक नया, बढ़िया ऑनलाइन ऑफ़िस सूट

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और, आपके लिए बिलकुल मुफ़्त.!पीपल बीटा को एक नज़र में देखने पर इसमें एक अत्यंत उम्दा ऑनलाइन ऑफ़िस सूट बनने की पूरी संभावना दिखाई देती है. यह आम, व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए मुफ़्त है. इसमें पंजीकरण भी अत्यंत आसान है – बस आपको उपयोक्ता-नाम तथा पासवर्ड भरना होता है और एक वैध ई-मेल खाता पुष्टिकरण के लिए आवश्यक होता है बस.पीपल बीटा में शब्द संसाधक और एक्सेल जैसा प्रोग्राम तो है ही, ऑनलाइन केलकुलेटर भी है तथा उपयोक्ता के ऑनलाइन भंडारित फ़ाइलों के प्रबंधन के लिए फ़ाइल प्रबंधक भी है. यह गूगल के राइटली या ऐसे ही अन्य प्रोग्रामों की अपेक्षा तीव्र गति से चलता है तथा पीएचपी आधारित होने के बावजूद तीव्रता में एजेक्स आधारित अनुप्रयोगों जैसा कमाल दिखाता है.इसमें हिन्दी (यानी यूनिकोड) का पूर्ण और बढ़िया समर्थन है. आप फ़ाइलों को हिन्दी नामों से भी ऑनलाइन सहेज सकते हैं तथा उनका प्रबंधन कर सकते हैं.इसका शब्द संसाधक पीपल वेबराइटर तो लगभग पूर्ण है और सभी आवश्यक औजारों से युक्त है. परंतु इसका एक्सेल जैसा प्रोग्राम - पीपल वेबशीट बहुत ही साधारण किस्म का है और एक तरह से यह अनुपयोगी ही है क्योंकि इसमें आपको कक्षो…

चंद दीवाने हैं मेरे शहर के मोहल्ले में भी

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भोपाल में एक प्रेमी जोड़े ने आपस में अंतर्जातीय-अंतर्धर्मीय विवाह क्या कर लिया, सांप्रदायिक तत्वों ने, समाज के तथाकथित कर्णधारों ने जो मनुष्य को मनुष्यता की नहीं, धार्मिक चश्मे से, जाति और वर्ण से, ऊंच-नीच से देखते हैं, सांप्रदायिकता और सौहार्द्रता की बुझती हुई चिंगारी में घी के कनस्तर डाल दिए हैं.इतना ही नहीं, समाज के वे अज्ञानी तत्व जो अपने कूप मंडूकों से निकलना ही नहीं चाहते, अपने समाज की लड़कियों में तालिबानी किस्म की बंदिशें लगाने की पहल कर रहे हैं - और जिसकी गूंज रतलाम जैसे छोटे से कस्बे में भी सुनाई दे रही है.शुक्र इस बात का है कि इन तालिबानी निर्णयों पर विरोध के पुख्ता स्वर तमाम क्षेत्रों से निकल चले आ रहे हैं. वह दिन दूर नहीं जब मेरे शहर के मुहल्ले में मनुष्य, मनुष्य रहेगा, वो किसी जाति-धर्म-वर्ण का नहीं रहेगा.**-**व्यंज़ल**-**चंद दीवाने तो हैं मेरे मुहल्ले में भीबातें बहुत हैं कुछ पड़ें पल्ले में भी
आखिर किस तरह आएगा इंकलाब तुम तो चुपचाप बैठे हो हल्ले में भी
सच तो ये है मेरे यार मेरे दोस्तइज्जत की दरकार है दल्ले में भी
कितने नासमझ हैं ये मुहल्ले वालेधर्म ले आए प्यार के छल्ले मे…

इस स्पॉम मेल को हर कोई पढ़ना चाहेगा...

कल यह ई-मेल मुझे मिला तो लगा कि यह भी आम स्पॉम मेल ही है जिसमें किसी कड़ी पर जाकर कुछ करने-धरने के निर्देश होते हैं- जिसमें पाठकों को तमाम तरह से उल्लू बनाया जाता है.परंतु फिर लगा कि यह जरा हटके है. थोड़ा ध्यान से पढ़ा तो कुछ नाम जेहन में आए. इस ईमेल की भाषा ने भी थोड़ा आकर्षित किया था. और फिर जब इस ईमेल की तह में गया तो लगा कि इसे तो हर व्यक्ति को पढ़ना चाहिए. फिर सोचा कि इसे अपने एड्रेस बुक में उपलब्ध सभी संपर्कों को अग्रेषित कर दूं - जैसा कि इस ईमेल में अनुरोध किया गया था.परंतु लगा कि इससे बात बनेगी नहीं. एक तो यह मेरे विचारों के विरूद्ध काम होगा - आज तक मैंने कोई भी अवांछित मेल किसी को अग्रेषित नहीं किया है, तथा दूसरा - यह ईमेल आगे कहीं कुछ कड़ियों पर जाकर दब खप जाता, जबकि विषय जीवंत है - दृष्टि से भरपूर. इसीलिए विचार आया कि इसे सीधे इस चिट्ठे पर ही क्यों न उतार दूं.यह ईमेल मूल अंग्रेज़ी में है. और बहुत लंबा है वैसे इसकी लंबाई बाद में अपडेट की गई तथ्यों के कारण है. अतः मूल ई-मेल जो कि संभवतः सबसे पहले भेजा गया होगा, उसका अनुवाद प्रस्तुत है. पढ़ें व सबको पढ़वाएं -******एक जैसे विच…

मुझे इस पोस्ट से नफ़रत है...

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आउटब्रेन - एक नो नॉनसेंस ब्लॉग रेटिंग सेवा आपके लिए अब पूरी तरह हिन्दी में अपनी सेवा लेकर आ गए हैं.इसे अब आप अपने ब्लॉग पर लगाइए, और औरों की रेटिंग एक क्लिक पर पाइए. और, यदि आपको कहीं पर किसी चिट्ठे पर आउटब्रेन की रेटिंग लगी हुई दिखाई देती है, जैसे कि इस चिट्ठे पर, और उस पोस्ट से आपको नफ़रत है तो बजाए एक पेजी विवादित टिप्पणी लिखने के, बस एक चटखा वहां पर लगाइए जहाँ यह उभर कर आता है - मुझे इस पोस्ट से नफ़रत है...
और, आउटब्रेन को लगाना है अत्यंत आसान. इस साइट पर जाएँ, ब्लॉगर या वर्डप्रेस जो भी हो वो प्लेटफ़ॉर्म चुनें, हिन्दी भाषा चुनें, और अपने ब्लॉग का नाम चुनें. यदि आवश्यक हो तो उपयोक्ता नाम और पास वर्ड भरें, औरइंस्टाल रेटिंग आन योर ब्लॉग पर क्लिक करें. बस हो गया.इस पोस्ट पर अपने विचार अपनी टिप्पणियों से नहीं, यहाँ पर चमकते सितारों पर क्लिक करके दें तो उत्तम! बताएँ कि आप इस पोस्ट से नफ़रत करते हैं या नहीं. या फिर ये पोस्ट बेकार है, उबाऊ है या फिर ठीक-ठाक?

गूगल ब्लॉग खोजक बीटा : अब सिर्फ चिट्ठों पर खोजिए

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चिट्ठों पर अब तमाम तरह की सामग्री मिलने लगी है - या फिर भविष्य में मिलने लगेगी - ऐसा अंदाजा लगाया जा सकता है. क्योंकि गूगल ने सिर्फ चिट्ठों में खोज के लिए ब्लॉग सर्च का बीटा संस्करण जारी किया है.मैंने कुछ आम प्रचलित शब्दों मसलन आईना, अनुभूति, कहानी और हां, ‘रवि' की तलाश इस ब्लॉग खोजक बीटा के जरिए करने की कोशिश की.अरे! मुझे तो बहुत से नए नवेले हिन्दी चिट्ठों का पता चला.
कुछ तो बहुत ही अच्छे हैं, जो अभी भी हिन्दी ब्लॉग जगत के गुमनामी के अंधेरों में हैं. कुछ कड़ियों पर आप भी भ्रमण कर सकते हैं. और हां, ब्लॉग सर्च बीटा के जरिए अन्वेषण कर आप भी हमें नया-2 बहुत कुछ बता सकते हैं.http://meenuzpoem.blogspot.com/2007/03/blog-post_04.htmlhttp://imthbst.blogspot.com/2007/03/thats-how-i-crack-mirrors.htmlhttp://sudeep-swadesh.blogspot.com/index.htmlhttp://shikha12.wordpress.com/http://musafirpoetry.blogspot.com/index.htmlhttp://protrude.blogspot.com/2007/02/blog-post.htmlhttp://hallucinations-in-loveville.blogspot.com/2007/01/blog-post_30.html Tag ,,,

आपका मोबाइल और आपका व्यक्तित्व

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शास्त्रों में लिखा है कि व्यक्ति का व्यक्तित्व उसके भोजन पर निर्भर करता है - याने कि यदि व्यक्ति तामसी भोजन करता है तो वह तामसी विचारों का होगा, और यदि वह सादा भोजन करता है तो उसका जीवन भी सादा, स्वच्छ होगा. अब ये अलग बात है कि सादा-भोजन-उच्च-विचार में सादे और तामसी भोजन में किस हिसाब से कैसी भिन्नता मानें - अगर मेनका गांधी की मानें तो दुनिया में दूध से बड़ा मांसाहारी भोजन और कोई है ही नहीं!मोबाइल फ़ोनों के बारे में आपके क्या विचार हैं? आप पूछेंगे कि मोबाइल फ़ोन और व्यक्ति के व्यक्तित्व में क्या समानता है? भई, समानता भले ही न हो, कुछ अध्ययनों से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि आपके मोबाइल फ़ोन से आपके व्यक्तित्व का पता लगाया जा सकता है.गणित साफ है. यदि आपका मोबाइल तामसी गुणों वाला होगा तो आपकी भी प्रवृत्ति तामसी होगी. आपका मोबाइल यदि राक्षसी गुणों युक्त होगा तो आपके भीतर भी राक्षसी गुण होंगे ही.अब आप पूछेंगे कि ये तामसी और राक्षसी गुण मोबाइल फ़ोनों में कहाँ से आ गए. रुकिए. मामला अभी साफ किए देते हैं. परंतु पहले एक छोटी सी सच्ची कहानी -कल ही की तो बात है. मैं चौराहे के फुटपाथिया बाजार पर …

आइए, श्रीमान्, प्रवेश करें

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यह है गूगल समूह पर प्रवेश के लिए मजेदार खिड़की. यूँ तो पूरा पृष्ठ हिन्दी में ही है, परंतु आधी से ज्यादा प्रविष्टियाँ रोमन हिन्दी में हैं!(बड़े आकार में देखने के लिए चित्र पर क्लिक करें - अरे नहीं, चित्र पर "टिकटिकाएं" जैसा कि ऊपर गूगल के चित्र पर कहा गया है)
लगता है गूगल हर किस्म, हर उपाय से हिन्दी मय होने की तीव्रता और तत्परता में लगा हुआ है!
या फिर कहीं पर तो उसका हिन्दी ट्रांसलिट्रेशन औजार काम कर गया और कहीं पर नहीं?
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मरफ़ी के बस अड्डे के नियम

मरफ़ी के कुछ अन्य नियम यहाँ देखेंयदि पानी गिर रहा है या कोहरा छाया है या दोनों ही एक साथ हो रहा है या दोनों एक साथ नहीं हो रहा है - कंडीशन कोई भी हो - बस देर से ही आएगी.यदि आपको देर हो रही होती है तब बस और भी देरी से चलती है, और हर संभावित-असंभावित स्टॉप पर रुकती है. यदि आप सोचते हैं कि आपको अपनी बस पकड़ने में बहुत समय बचा है तो या तो आपने कोई गलत समय सारिणी देख ली हुई होती है या फिर वह सारिणी पुरानी पड़ चुकी होती है.यदि आप समय से जल्दी पहुँच जाते हैं तो बस लेट हो जाती है और यदि आप लेट होते हैं तो बस समय से पहले छूट चुकी होती है. बस स्टॉप पर इंतजार में बिताए गए उस प्रत्येक पल में बस के पहुँचने की संभावना नगण्य ही होती है. यदि किसी दिन आपके पास चिल्लर नहीं होता है तो उस दिन कंडक्टर के पास भी चिल्लर नहीं होता है.बस का कंडक्टर किसी भी यात्री को बिना कोई सफाई दिए किसी भी समय कहीं पर भी उतार सकता है. बस स्टॉप पर इंतजार करते समय एक ही स्थान के लिए दो बस एक साथ ही आ जाती हैं परंतु आपको जाना कहीं और होता है. बस के सामने छपा हुआ गंतव्य स्थल सिर्फ बस की …

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