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February, 2007 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हिन्दी में व्यावसायिक चिट्ठाकारिता - अमित अग्रवाल की नज़र से

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प्रतिष्ठित, व्यावसायिक रूप से अत्यंत सफल, अंग्रेज़ी चिट्ठाकार अमित अग्रवाल ने हिन्दी चिट्ठों में भी व्यावसायिक संभावनाएँ देखी हैं.उन्होंने अपने चिट्ठा-पोस्ट में हिन्दी भाषा के चिट्ठाकारों के लिए कुछ व्यावसायिक संभावनाओं तो तो तलाशा ही है, कुछ गुर भी बताए हैं.धन्यवाद अमित. आपके दिशानिर्देशों का हमेशा स्वागत है! Tag ,,,del.icio.usDigg this

एक क्लिक का सवाल है बाबा!

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जब से नारद जी ने प्रत्येक चिट्ठों पर क्लिक नुमा तिलक लगाना प्रारंभ किया है तब से मैं कुछ व्यथित सा हूँ और तब से ही अपनी व्यथा कथा लिखने की सोच रहा था. नारद अब पहले जैसा साफ-सुथरा नहीं रहा. अब तो वह पूर्वाग्रह से ग्रस्त हो गया है, पक्षपाती हो गया है. तरह तरह के चिट्ठों पर अजीब अजीब आकारों में तिलक लगाता है. किसी पर उसकी कृपा दृष्टि ज्यादा पड़ती है तो किसी पर कम. अब जब-जब भी मैं नारद के पन्नों पर जाता हूँ, अपने चिट्ठे के माथे कोई तिलक नहीं पाता हूँ या यदा कदा अपवाद स्वरूप छोटा सा तिलक कुछ इस तरह पाता हूँ -तो फिर बड़ी देर तक सोचता रहता हूँ कि मेरे चिट्ठे के माथे पर इतने कम क्लिकों का इतना महीन, न्यून, नगण्य सा तिलक क्यूँ? जबकि बगल में, ऊपर-नीचे चिट्ठों में तिलक का आकार - संख्या में दहाई और सैकड़ा से भी ऊपर जा रहा होता है. और, अकसर मैं, ‘मेरे चिट्ठे के माथे का तिलक - तेरे चिट्ठे के माथे के तिलक से छोटा क्यूं' के चक्कर में उलझ जाया करता हूँ.अपने तिलक का रूपाकार बड़ा करने के लिए कभी सोचता हूँ कि फ़ुरसत में सुंदर, सहज, सरल भाषा में कुछ बढ़िया आख्यान लिखूं. फिर कभी सोचता हूँ कि अपने लेखन-…

फंसने फंसाने का दैत्याकार नेटवर्क

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हिन्दी चिट्ठाजगत में फंसने-फांसने का नेटवर्क दूसरी बार आया है. और, खुदा करे, यह तिबारा-चौबारा, फिर कभी नहीं आए. फंसने-फांसने का क्यों? यह मैं आगे बताता हूं.उन्मुक्त ने मुझे फांसा (टैग किया) तो मैं नादान बनकर कि मैंने उसकी पोस्ट पढ़ी ही नहीं, पीछा छुड़ा सकता था. और छुड़ा ही लिया था...परंतु उन्होंने मुझे ई-मेल किया, और उनका ईमेल मेरे गूगल ईमेल के स्पैम फ़िल्टर से जाने कैसे बचता-बचाता मेरे इनबॉक्स में आ गया. उन्होंने लिखा था-Hi I have a request to make. It is contained here
http://unmukt-hindi.blogspot.com/2007/02/blog-post_18.html

I hope you will not mind.मैंने वह पोस्ट दुबारा पढ़ी (उस पोस्ट को पहले पढ़ कर नादान बन कर भूल चुका था) और यह प्रत्युत्तर लिखा:well, I DO MIND, but will reply not-so-mindfully in my post :)जाहिर है, मैं फुल्ली माइंडफुली प्रत्युत्तर दे रहा हूँ.तो, सबसे पहले फंसने-फांसने का गणित.पहले स्तर पर एक चिट्ठाकार ने फांसा - 5 चिट्ठाकारों को.दूसरे स्तर पर पाँच चिट्ठाकारों ने शिकार फांसे - 25तीसरे स्तर पर पच्चीस चिट्ठाकारों ने फांसे - 125चौथे स्तर पर 125 चिट्ठाकारों ने फांसे -…

याहू! पाइप्स बीटा : अपने हाथों से चुना, छना, साफ-सुथरा नारद?

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मैंने तीन दर्जन से अधिक फ़ीड सब्सक्राइब कर रखे हैं. उनकी फ़ीड सम्हाल कर रखना और समय निकाल कर पढ़ना बड़ा मुश्किल काम है - खासकर तब जब ये एकत्र हो जाएँ. इनफ़ॉर्मेशन ओवरलोड के जमाने में क्या पढ़ें और क्या छोड़ें यही समझने में दिक्कतें होती हैं. अब लगता है, नए नवेले याहू! पाइप्स बीटा, के जरिए मैं उन्हें एक स्थान पर न सिर्फ संजो सकता हूँ, बल्कि उन्हें छांट कर, बीन कर, जमा कर भी रख सकता हूँ, और मेरे पढ़ने के लिए फिर छंटा-छंटाया माल मिलेगा और मेरी प्रकृति और मेरे स्वाद के अनुसार सामग्री एक ही स्थल पर मिला करेगी.याहू! पाइप्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मुझे एक पंक्ति का भी जटिल किस्म का कोड लिखना नहीं है, सारा कुछ ब्राउज़र अनुप्रयोग के जरिए, चित्रमय खींचो-व-छोड़ो (ड्रैग एण्ड ड्रॉप) इंटरफ़ेस के जरिए आसानी से किया जा सकता है. अंतिम परिणाम सादा, परंतु दिमाग को ध्वस्त कर सकने वाला होता है. यही नहीं, मैं अपने मनोनुकूल बनाए गए फ़ीडों को इंटरनेट पर हर किसी के साथ साझा कर सकता हूँ. इसका आउटपुट स्वयं एक आरएसएस फ़ॉर्मेट में होता है - यानी की अब तीन दर्जन फ़ीड के बजाए मेरे पास छना हुआ, चुना हुआ, सभी फ…

निरंतर का नया अंक - पढ़ने को हैं बहुत कुछ...

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विश्व की प्रथम ब्लॉगज़ीन निरंतर के ताज़े अंक में पढ़िए तकनॉलाजी से लेकर सम-सामयिक विषयों पर एक से बढ़कर एक बेहतरीन आलेख. निरंतर - विश्व की प्रथम ब्लॉगज़ीन में पढ़ें मेरे ये दो आलेख...
विकिलीक्स : इंटरनेट पर सैद्धांतिक (सविनय) अवज्ञा आंदोलन की नई गांधीगिरी?तमाम विश्व के हर क्षेत्र के स्वयंसेवी सम्पादकों के बल पर मात्र कुछ ही वर्षों में विकिपीडिया आज कहीं पर भी, किसी भी फ़ॉर्मेट में उपलब्ध एनसाइक्लोपीडिया में सबसे बड़ा, सबसे वृहद एनसाइक्लोपीडिया बन चुका है. कुछेक गिनती के उदाहरणों को छोड़ दें तो इसकी सामग्री की वैधता पर कहीं कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगा. इसी की तर्ज पर एक नया प्रकल्प प्रारंभ किया जाने वाला है विकिलीक्स.विकिलीक्स तकनीक में तो भले ही विकिपीडिया के समान है - विकि आधारित तंत्र पर कोई भी उपयोक्ता इसमें अपनी सामग्री डाल सकेगा, परंतु इसकी सामग्री पूरी तरह अलग किस्म की होगी. इसमें हर किस्म के, बिना सेंसर किए वे गोपनीय दस्तावेज़ हो सकेंगे जिन्हें सरकारें और संगठन अपने फ़ायदे के लिए आम जन की पहुँच से दूर रखती हैं. यही विकिलीक्स का मूल सिद्धान्त है. आगे पढ़ें >>
सुंदरलाल बहुगु…

व्यावसायिक चिट्ठाकारिता - बारंबार पूछे जाने वाले प्रश्न

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चाहे जो हो, चिट्ठा लेखन सोद्देश्य होता है. अब वह भले ही आमतौर पर स्वांतः सुखाय, छपास की पीड़ा के मारे हुओं का, मन की भड़ास निकालने का यह मात्र एक साधन ही क्यों न हो. और, यदि इसमें कुछ व्यावसायिक संभावनाएँ जोड़ दी जाएँ तब? सोने में सुहागा.अंग्रेज़ी के कई चिट्ठाकार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यावसायिक रूप से बेहद सफल हुए हैं, और उनमें से एक तो भारतीय, अमित अग्रवाल हैं. उन्हें उनकी चिट्ठाकारी के दम पर ही माइक्रोसॉफ़्ट मोस्ट वेल्यूएबल प्रोफ़ेशनल का सम्मान मिला है. वे प्रतिदिन 10-12 घंटे चिट्ठाकारी में बिताते हैं और प्रतिदिन 5-6 चिट्ठा-पोस्ट लिखते हैं, वह भी सारगर्भित और उम्दा सामग्री युक्त. उनके चिट्ठे के छः हजार से ऊपर नियमित पाठक हैं जो आरएसएस फ़ीड के जरिए सब्सक्राइब कर पढ़ते हैं तथा उनका पेज हिट्स महीने में दस लाख से ऊपर होता है - जिनमें अधिकतर गूगल सर्च के जरिए आते हैं.क्या हिन्दी चिट्ठाकारी में ऐसी सफलता की संभावना है? हाँ, बिलकुल है. परंतु जरा ठहरिये, अभी नहीं. निकट भविष्य में तो नहीं. शायद 2015 तक हिन्दी चिट्ठा जगत से सफलता की ऐसी इक्का-दुक्का कहानियाँ पढ़ने-सुनने को मिलने लगें.हिन्दी…

बॉस पर पहली दृष्टि - पूर्णतः भारतीय लिनक्स

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बॉस - ( BOSS ) भारत ऑपरेटिंग सिस्टम सॉल्यूशन - लाइव सीडी संस्करण 1.0 (तरंग) के जांच परख इस्तेमाल करने के बाद मेरा अंतिम मत कुछ-कुछ निम्न रहा- प्रभावशाली, इस्तेमाल में आसान तथा भारतीय भाषाओं का आउट-ऑफ़-द-बॉक्स समर्थन. बॉस एक नया लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम वितरण है जिसे आपके लिए सीडॅक लेकर आए हैं. बॉस का प्रमुख ध्येय है भारतीय भाषाओं में कम्प्यूटिंग संबंधी समस्याओं का समाधान, वह भी जीएनयू - यानी मुक्त व मुफ़्त स्रोत के संसाधनों से. इस वितरण में आपको वर्तमान में मुक्त स्रोत में मौजूद भारतीय भाषाओं के संसाधनों को संजोने की कोशिश की गई है. इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें स्किम (एससीआईएम - स्मार्ट कॉमन इनपुट मेथड) को भारतीय भाषाओं के लिए पूर्व नियोजित व पूरी तरह सक्षम कर रखा गया है. इसमें निम्न लिखित भाषाओं तथा संबंधित कुंजीपटों का समर्थन है-भाषा उपलब्ध कुंजीपट:हिन्दी : इनस्क्रिप्ट, फ़ॉनेटिक, रेमिंगटन बंगाली : इनस्क्रिप्ट, प्रोभात (फ़ॉनेटिक)गुजराती : इनस्क्रिप्ट, फ़ॉनेटिककन्नड़ : इनस्क्रिप्ट, केजीपीमलयालम : इनस्क्रिप्टनेपाली …

विंडोज़ विस्ता पर हिन्दीमयी प्रथम नज़र...

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**-**यूँ तो इंटरनेट में हर संभव स्थल पर तथा तमाम तकनीकी पत्र-पत्रिकाओं में विंडोज़ विस्ता पर हजारों समीक्षाएँ आ चुकी हैं और हर एक ने अपने-अपने हिसाब से विंडोज़ विस्ता को समान रूप से भला और बुरा कहा है. परंतु हिन्दी में, तथा विंडोज़ विस्ता की हिन्दी भाषा की काबिलियत और सुविधाओं के बारे में बातें करती समीक्षा अब तक कहीं पढ़ने में नहीं आई थी.तो लीजिए आपके लिए प्रस्तुत है विंडोज़ विस्ता पर हिन्दी में, हिन्दी के हिसाब से समीक्षा.हालांकि विंडोज़ विस्ता के लिए हार्डवेयर की न्यूनतम आवश्यकताएँ मुझे पता थीं, परंतु फिर भी मैंने अपने 2.8 मे. हर्त्ज, 256 रैम युक्त पीसी पर इसे संस्थापित करने की कोशिश की जो कि जाहिर है नाकाम रही. विंडोज़ विस्ता के लिए न्यूनतम रैम 512 मे.बा. है, अन्यथा इसकी संस्थापना आरंभिक स्क्रीन के पश्चात् आगे ही नहीं बढ़ती. मजबूरन मुझे बाजार की ओर दौड़ना पडा - रैम खरीदने. यह समीक्षा जो लिखनी थी.कम्प्यूटर का रैम 512 मे.बा. बढ़ाने के बाद संस्थापना फिर से चलाया गया. आगे के दो चरणों के बाद इसके संस्थापक ने न्यूनतम हार्डडिस्क की जगह 6.8 गी.बा. बताई (संस्तुति तो 8.3 गी.बा. की की गई थ…

वेलेंटाइन दिवस के लिए दस सर्वोत्तम उपहार

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अगर आप मुझ पर विश्वास करें, तो दस सबसे उत्तम उपहार जैसी चीज़ें वेलेंटाइन दिवस के लिए नहीं होतीं. दीपावली और जन्म दिवस के लिए भी नहीं. हर अवसर के लिए सिर्फ और सिर्फ एक ही सबसे उत्तम उपहार ( पुरुष तथा महिला के लिए अलग-अलग यदि विशिष्टता में कहें,) होता है. यदि आप अब भी मेरे कहे पर विश्वास कर रहे हैं तो आगे पढ़ें -पुरुष के लिए वेलेंटाइन दिवस का सर्वोत्तम उपहार:पुरुष को गॅज़ेट्स और हाई टैक उपकरण बहुत अच्छे लगते हैं. उपकरण जितने ज्यादा जटिल और पेचीदे होंगे, पुरुष उन्हें उतने ही ज्यादा पसंद करेंगे. यदि पुरुष को आधे पैरा के दर्जन भर वाक्य लिखने के लिए किसी जटिल प्रोग्राम को अपने कम्प्यूटर पर संस्थापित कर चलाने में डेढ़ दिन लग जाता है तब भी उसे बहुत आनंद आता है और बड़ी खुशी मिलती है. सीधी सरल चीजों में पुरूष को कतई मजा नहीं आता. यदि आप अपने पुरुष मित्र को कोका कोला की बोतल के ढक्कन को खोलने के लिए माइक्रोप्रोसेसर नियंत्रित, सचमुच जटिल दिखाई दे रहा, वास्तविक जटिल औजार उपहार में देंगीं तो वह आपका लाख-लाख शुक्रिया अदा करेगा, आपको लाख गुना अधिक प्यार करेगा और अपने इस नायाब उपकरण को हर एक को गर्व स…

ब्लॉगिंग एथिक्स बनाम कार्पेल टनल सिंड्रोम

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आप पूछेंगे कि दोनों में क्या समानता है?पहले पूरा आलेख तो पढ़िए जनाब. समानता है भी या नहीं आपको खुद-बख़ुद पता चल जाएगा.तो आइए, पहले बात करें कार्पेल टनल सिंड्रोम की. मेरे एक बार निवेदन करने पर ही फुरसतिया जी ने मेरी फ़रमाइश पूरी कर दी. उन्होंने दो-दो बार फ़रमाइशें दे कर मुझे शर्मिंदा कर दिया कि मैं कार्पेल टनेल सिंड्रोम के बारे में लिखूं. अब भले ही मैं कार्पेल टनल सिंड्रोम के बारे में ज्यादा बोलने बताने का अधिकारी नहीं हूं, मैं स्वयं मरीज हूँ - चिकित्सक नहीं, मगर उनका आग्रह तो मानना पड़ेगा.मगर, फिर, कार्पेल टनल सिंड्रोम के बारे में बात करने से पहले चर्चा कर ली जाए ब्लॉगों की - खासकर हिन्दी ब्लॉगों की. पिछला हफ़्ता हिन्दी ब्लॉगों के लिए कई महत्वपूर्ण मुकाम लेकर आया. एनडीटीवी पर हिन्दी चिट्ठों के बारे में नियमित क्लिप दिए जाने हेतु कुछ चिट्ठाकारों की बात अभी हुई ही थी कि याहू हिन्दी ने अपने पृष्ठ पर नारद के सौजन्य से हिन्दी चिट्ठों को जोड़ लिया. बीबीसी से भी प्रस्ताव आया है और इधर जीतू भाई बता रहे हैं कि उनकी सीक्रेट बातचीत गूगल से भी चल रही है. एमएसएन पिछड़ क्यों रहा है यह मेरी मोटी बुद…

मरफ़ी के कुछ चौपहिया नियम

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अंततः जब आप अपनी नई कार खरीदने लायक पैसा बचा लेते हैं, तभी आपकी जमी जमाई नौकरी छूट जाती है. कोई भी कार तभी खराब होती है जब बहुत जरूरी में कहीं जाना होता है और दूसरा कोई विकल्प नहीं होता. और प्रायः वह मामूली सी खराबी होती है, जिसको ठीक करने के लिए इंजिन बाहर निकालना जरूरी होता है.भले ही आप अपनी कार को कितने ही अच्छे तरीके से मेंटेन कर रखते हों, पेंदे से तेल तो तब भी टपकेगा.कार से आ रही अजीब सी आवाजों से चिंतित होकर जब आप अपनी कार को मेकेनिक के पास दिखाने ले जाते हैं तो वह आवाज आश्चर्य जनक रूप से उस वक्त गायब हो जाती है और आपके पास उस आवाज को, उस खराबी को वर्णन करने के लिए शब्द नहीं रहते.हर बार, जब आप सार्वजनिक वाहन से जाते हैं तो कार पार्किंग खाली रहता है परंतु जब आप कार लेकर जाते हैं तो पार्किंग में जगह नहीं रहती.

यदि आप कार के हुड के नीचे कुछ काम कर रहे होते हैं तो कुछ न कुछ ऐसा उसमें गिर ही जाता है जो पहुँच से बाहर हो जाता है.

कार ढंकने के लिए प्रयोग में आने वाले विनाइल शीट का तापक्रम आपके हाथों के तापक्रम के व्युत्…

आपकी शुद्ध हिन्दी पढ़ने में नहीं आ रही....

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ब्लॉग टैम्प्लेट (चाहे वर्ड प्रेस हो या ब्लॉगर) में यदि सीएसएस में कैरेक्टर स्पेसिंग या कैरेक्टर जस्टीफ़ाई हेतु कुछ कोड डाल दिया जाता है तो फ़ॉयरफ़ॉक्स में कबाड़ा हो जाता है. उदाहरण स्वरूप तीन चिट्ठों के ताजा स्क्रीन शॉट हैं- सुनील का चिट्ठामनीषा का चिट्ठाश्रीश का चिट्ठायूं तो फ़ॉयरफ़ॉक्स के लिए कई एक्सटेंशन हैं जिससे यह समस्या दूर की जा सकती है, और यदि पेज व्यू बेसिक कर दिया जाए, तो भी सामग्री पढ़ने में आ जाती है. परंतु एक आम कम्प्यूटर उपयोक्ता से यह उम्मीद नहीं रखी जा सकती कि वह एक्सटेंशन इस्तेमाल कर आपके चिट्ठे को पढ़े. यूं तो आमतौर पर लोग-बाग़ इंटरनेट एक्सप्लोरर ही इस्तेमाल करते हैं, परंतु मेरे जैसे कुछ लोग बाइ डिफ़ॉल्ट फ़ॉयरफ़ॉक्स भी इस्तेमाल करते हैं.टैम्प्लेट में मामूली फेरबदल कर यह समस्या दूर की जा सकती है, या फिर समूचा टैम्प्लेट ही बदल दिया जाए (जिसमें कैरेक्टर स्पेसिंग व जस्टीफ़ाई डिफ़ाइन न हों) तब भी यह समस्या दूर हो सकती है.यह सब कैसे करें? अधिक जानकारी के लिए यह कड़ी देखेंऔर, हाँ, जब भी टैम्प्लेट में कोई फेर बदल करें, एक बार फ़ॉयरफ़ॉक्स में अपना चिट्ठा चलाकर अवश्य देख लें…

याहू! अब हिन्दी, गुजराती, पंजाबी, तमिल... में...

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पता नहीं कब चुपके से भारतीय भाषाओं का याहू! बीटा अवतरित हो गया. हो सकता है आपको पहले से पता हो, मुझे तो आज ही पता चला :) नजारा मजेदार है. आप भी देखें व आनंद लें.कड़ी है-http://in.hindi.yahoo.com/ Tag ,,,del.icio.usDigg this

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