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2007 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मरफ़ी के नए साल के नए नवेले नियम

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· नया साल नई समस्याएँ लेकर आता है. · नया साल सर्वथा नवीन, नूतन समस्याएँ लेकर आता है. · नया साल पुराने संकल्पों को ही लेकर आता है. . नए साल के संकल्प जिस गंभीरता से लिए जाते हैं वे उससे ज्यादा गंभीरता से निभाए नहीं जाते. · नए साल में पुराने संकल्प ज्यादा गंभीरता से लिए जाते हैं और वे उसी गंभीरता से निभाए नहीं जाते. · नए साल के नए संकल्पों का भी आमतौर पर वही हश्र होते हैं जो आपके पिछले संकल्पों के हुए थे. · नए साल के नए संकल्प लेने में आसान परंतु निभाने में असंभव होते हैं. · नए साल की पहली सुबह हमेशा हैंगओवर लेकर आती है. · नया साल भी पुराने साल की तरह गुजरता है. · नया साल पुरानी चीजों को ही लेकर आता है. · नए साल में भी आपके विचार कोई जादू नहीं करेंगे. · नया साल आता बहुत देर से और गुजरता बहुत जल्दी से है. · नए साल में प्रगति निश्चित है – टैक्सेशन में, प्रदूषण में, महंगाई में, वायरस में, स्पैम में... · नए साल में नए विचार आएंगे जो पहले के विचारों की तरह ही, काम नहीं करेंगे. · नए साल के बीतने का अनुभव भी पुराने साल जैसा ही रहेगा. · मुस्कुराएँ. नया साल क्रूर होता है. · किसी भी…

2007 में इंटरनेटी हिन्दी – कैसे बीता साल?

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इंटरनेटी हिन्दी के लिए वर्ष 2007 अच्छा-खासा घटनाओं भरा रहा और कुल मिलाकर एक विहंगम दृष्टि डालें तो यह वर्ष हिन्दी के लिए बड़ा ही लाभकारी रहा. साल के शुरूआत में ही हिन्दी जगत को नायाब तोहफ़ा मिला था – इंटरनेट के जाने पहचाने, सुप्रसिद्ध साहित्यिक जाल स्थल अभिव्यक्ति और अनुभूति अंततः यूनिकोड में आ गए. इसके ठीक कुछ ही दिनों बाद खबर मिली कि हिन्दी समाचारों की लोकप्रिय साइट प्रभासाक्षी ने नित्य 3 लाख हिट्स पाने का रेकॉर्ड प्राप्त कर लिया. प्रभासाक्षी कृतिदेव श्रेणी के फ़ॉन्ट पर आधारित है और यूनिकोड पर आने हेतु प्रयोग चल रहे हैं. फरवरी 07 आते आते विश्व की सबसे बड़ी वेब पोर्टलों में से एक, याहू ने भी हिन्दी समेत अन्य भारतीय भाषाओं को अपना लिया. बाद के कई महीनों में तो कई बड़ी साइटें और समाचार पत्र स्थल जैसे कि वेब दुनिया से लेकर दैनिक भास्कर तक शामिल हैं, सभी यूनिकोड में परिवर्तित हो गए. तब तक विंडोज विस्ता भी आ चुका था जिसमें हिन्दी का अंतर्निर्मित समर्थन उपलब्ध है – यानी आपको विंडोज एक्सपी की तरह इसके संस्थापना सीडी के जरिए अलग से हिन्दी संस्थापित करने की आवश्यकता नहीं है. और इसके इंटरफेस…

विज्ञापन अच्छे हैं...

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किसी बढ़िया तेज रफ़्तार फ़िल्म के क्लाइमेक्स के ठीक पहले टीवी पर एक छोटा सा ब्रेक ले लिया जाए और अंतहीन विज्ञापनों का सिलसिला प्रारंभ हो जाए तो शर्तिया आपको विज्ञापनों से घृणा होने लगेगी. परंतु रुकिये, हममें से बहुतों के लिए विज्ञापन अच्छे हैं, और, वे और बेहतर होने जा रहे हैं...
गूगल अपना नया नवेला सेलफोन, जिसके बारे में कयास लगाए जा रहे हैं कि वो फरवरी 2008 में आने वाला है, उन लोगों को मुफ़्त में वितरित किए जाएंगे जो विज्ञापनों को पसंद करते हैं – मेरा मतलब है, विज्ञापनों को झेल सकते हैं. माइक्रोसॉफ़्ट भी पीछे नहीं है. माइक्रोसॉफ़्ट का स्लिमट्रिम ऑफ़िस सूट जो कि माइक्रोसॉफ़्ट वर्क्स कहलाता है, बहुत संभव है आपको आपके नए कंप्यूटर पर पहले से संस्थापित मिले, वो भी मुफ़्त. बस, इसके लिए आपको कुछ विज्ञापनों को झेलना होगा, जो कि आपके आनलाइन होने पर रीफ्रेश होते रहेंगे.
किसी उत्पाद को मुफ़्त में प्रयोग के लिए यदि हमें विज्ञापनों को कुछ सेकंड झेलना भी हो तो क्या फ़र्क पड़ता है. अगर लाइसेंस्ड विंडोज और एमएस ऑफ़िस विज्ञापनों के साथ मुफ़्त में मिलें, तो भाई, कोई पायरेटेड क्यों ले?
विज्ञापनों के भरोसे…

हनी, आई श्रंक द पिक्स...

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पिछले दिनों मेरा पॉप3 ईमेल क्लाइंट जाम हो गया. मेरा थंडरबर्ड जाम हो गया, जबकि कनेक्शन बढ़िया था. वो किसी एक ईमेल को डाउनलोड करने का प्रयास कर रहा था. समस्या की जड़ में जाकर देखा तो पता चला कि वो कोई 6 मेबा के एक चित्र को डाउनलोड करने की कोशिश कर रहा था. वह चित्र मेरे एक मित्र ने भेजा था जिसने नया नया हाई एण्ड कैमरा लिया था. हम सभी अपने ईमेल व चिट्ठों में चित्रों का जमकर प्रयोग करते हैं. चाहे वे डिजिटल कैमरे से खींचे गए हों या फिर कम्प्यूटर स्क्रीनशॉट से लिए गए. डिजिटल कैमरों से खींचे गए चित्रों की गुणवत्ता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है और इसी वजह से उनका आकार भी. जब 39 मेगापिक्सल कैमरा कैमरे से कोई चित्र खींचा जाएगा तो जाहिर है उसका आकार 8-10 मेगाबाइट से कम क्या होगा. और, यदि आप जाने अनजाने इस चित्र को किसी मित्र को भेज देते हैं तब? तब उसका ईमेल क्लाइंट यदि डायलअप पर हुआ तो वो जाम ही हो जाएगा. और यदि ब्रॉडबैण्ड पर हुआ तब वो इसे डाउनलोड तो कर लेगा, परंतु यदि उसे देखना भर है, या कहीं जाल-पृष्ठ में प्रयोग करना है, इसका प्रिंटआउट नहीं लेना है तब इतने बड़े आकार के फोटो का कोई अर्थ ही नहीं है. ब…

देखन में छोटे लगें लाभ दें भरपूर...

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ये किसी एडसेंसिया ब्लॉग पोस्ट की बात नहीं हो रही है. दरअसल इस ब्लॉग पोस्ट का आइडिया मोकालू गुरु के भूत ने पिछले दिनों मेरे सपने में आकर दिया था. किताबों की फुटपाथिया दुकानों में आपको ऐसी सैकड़ों किताबें मिल जाएंगीं जिनमें लाल किताब से लेकर तंत्र मंत्र और जादू टोने तक – यानी हर किस्म की सामग्री मिलेगी. और, शायद यही वजह है कि भारत में आज भी जादू टोना और तंत्र मंत्र चल रहा है. कुछ समय पहले तक कादम्बिनी जैसी प्रतिष्ठित हिन्दी पत्रिका में राजेन्द्र अवस्थी वार्षिक तंत्र मंत्र विषेशांक निकाला करते थे जिसकी बिक्री और अंकों की अपेक्षा कहीं ज्यादा होती थी और अंक निकलते ही मार्केट में सोल्ड आउट हो जाता था. और क्यों न हो, आखिर, तंत्र मंत्र की शक्ति ही ऐसी होती है. तो उस सपने से वशीभूत हो एक किताब मैं भी ले आया. किताब है पं. शशि मोहन बहल की लिखी और मनोज पब्लिकेशन्ज, बुराड़ी दिल्ली से प्रकाशित “देखन में छोटे लगें लाभ दें भरपूर – सरल टोनों-टोटकों द्वारा सर्वबाधाओं से मुक्ति” संस्करण 2007 – आईएसबीएन नं. 978-81-313-0315-2 मूल्य 60 रुपए. किताब में कोई बीस खण्डों में विविध प्रकार के टोने टोटके दिए गए ह…

ऑनलाइन चिट्ठा समस्या निराकरण गोष्ठी का सादर निमंत्रण

दोस्तों, हम सभी चिट्ठाकारों को समय समय पर तकनीकी दिक्कतें झेलनी होती हैं. खासकर हिन्दी के मामले में. हममें से कोई भी – फिर से एक बार, कोई भी सर्वज्ञ नहीं है, और आज का विषय विशेषज्ञ कल को बेकार हो जाता है क्योंकि तकनीक नित्य बदलती रहती है. जाहिर है, आज का हमारा लिखा-पढ़ा कल को बेकार हो जाता है. ऐसे में अपने ज्ञान को नित्य ब्रशअप करने के अलावा कोई चारा नहीं होता है. इसी बात को मद्देनजर रखते हुए होशंगाबाद के श्री प्रतीक शर्मा, दिनांक 6 5 जनवरी 2008 दिन शनिवार को दोपहर 3 बजे से 5 बजे तक एक ऑनलाइन चिट्ठा समस्या निराकरण गोष्ठी का आयोजन कर रहे हैं. इस तरह की (परंतु तकनीकी नहीं,) गोष्ठी पहले भी आयोजित की जा चुकी है. यह गोष्ठी ऑनलाइन होगी, और स्काइप के जरिए आपसी वार्तालाप (इंस्टैंट मैसेंजर से नहीं,) के जरिए होगी – यानी ज्ञान का आदान-प्रदान आपस में बोल-बताकर किया जा सकेगा. इस ऑनलाइन गोष्ठी में पूरे समय तक बने रहना आवश्यक नहीं है – आप अपनी सुविधानुसार 10-15 मिनट का भी समय दे सकते हैं. इसके लिए आपको अपने कम्प्यूटर पर स्काइप (यहां से डाउनलोड करें) को संस्थापित करना होगा, और प्रतीक शर्मा के इस …

ओपन ऑफ़िस 2.x में हिन्दी वर्तनी जांचक लगाएँ.

ओपन ऑफ़िस मुफ़्त एवं मुक्त उपलब्ध ऑफ़िस सूट है, जिसे एमएस ऑफ़िस के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. उन्मुक्त इसे प्रारंभ से ही इस्तेमाल करते रहे हैं और लिनक्स तंत्र में मैं भी इसे प्रयोग करता रहा हूँ. ओपन ऑफ़िस में हिन्दी वर्तनी जांच की सुविधा अंतर्निर्मित नहीं है. परंतु आप स्वयं इसे कुछ सरल चरणों के जरिए संस्थापित कर सकते हैं. इसके लिए निम्न चरण हैं- हिन्दी शब्दकोश यहाँ से डाउनलोड कीजिए – http://ftp.services.openoffice.org/pub/OpenOffice.org/contrib/dictionaries/hi_IN.zipइसे आप किसी उपयुक्त फोल्डर/डिरेक्ट्री में अनजिप कर लें.अनजिप करने पर आपको अतिरिक्त फ़ाइलों के साथ ये निम्न दो फ़ाइलें मिलेंगी –hi_IN.aff hi_IN.dic

इन दोनों फ़ाइलों को आपको ओपन ऑफिस के शब्दकोश डिरेक्ट्री/फोल्डर में नकल करना होगा. आमतौर पर ओपन ऑफिस की शब्दकोश फ़ाइलें लिनक्स में इस डिरेक्ट्री में होती हैं – /usr/lib/openoffice/share/dict/ooo
तथा विंडोज तंत्र में प्रोग्राम फ़ाइल/ओपन ऑफ़िस डिरेक्ट्री में किसी dict सब-डिरेक्ट्री में (आरंभिक संस्थापना के समय यदि इसे बदला गया होगा तो यह जुदा भी हो सकता है.)

इसी डिरेक…

ब्लॉग यायावरी में यूनुस खान का कवितामयी दस्तक

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दैनिक भास्कर उज्जैन के आज (गुरूवार 20 दिसंबर 2007) के संस्करण में यूनुस खान (जी हाँ, अपने रेडियोवाणी वाले) की निम्न कविता प्रकाशित हुई है – (मुझे भास्कर की साइट पर रचना की कड़ी खोजने से भी नहीं मिली, हालांकि अब ये साइट यूनिकोड पर आने लगी है. अतः कविता की स्कैन की गई छवि के साथ ही कविता भी प्रस्तुत है:) --------. छोटे शहर के संकोची बच्चेहम छोटे शहर के बच्चे थे अब बड़े शहर के मुंशी हैं और जा रहे हैं और बड़े शहर के मजदूर बनने की तरफ. हमने जवानी में कविताएँ लिखी थीं और कलम चलाते रहने का वादा किया था खुद से. जवानी की डायरी में अभी भी मौजूद हैं वे गुलाबी कविताएँ. पर कलम अब मेज पर पड़ी जंग खा रही है और हम कीबोर्ड के गुलाम बन गए हैं. मित्र हम दुनिया को बदलने के लिए निकले थे और शायद दुनिया ने हमें ही बदल दिया भीतर-बाहर से अब हम नापतौल कर मुस्कराते हैं अपनी पॉलिटिक्स को ठीक रखने की जद्दोजहद करते हैं... झूठी तारीफ़ें करते हैं, वादे करते हैं कोरे और झूठे और हर शाम सिर झटककर दिनभर बोले झूठों को जस्टीफाई कर लेते हैं हम छोटे शहर के बड़े दोस्त थे, जिंदगीभर वाले दोस्त. लेकिन बड़ी द…

हिन्दी कंप्यूटरी की कहानी : वेद प्रकाश की जुबानी

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पुस्तक समीक्षा हिन्दी कंप्यूटरी सूचना प्रौद्योगिकी के लोकतांत्रिक सरोकारहिन्दी कम्प्यूटरी के भूत-वर्तमान-भविष्य की रोचक, उत्तेजक, मनोरंजक, अत्यंत ज्ञानवर्धक, और साथ ही, जाहिर है विडंबना-गाथाओं से भरपूर, कहानी हिन्दी अधिकारी वेद प्रकाश ने अपनी किताब - हिन्दी कंप्यूटरी - सूचना प्रौद्योगिकी के लोकतांत्रिक सरोकार में लिखी है. (वेद प्रकाश) प्रारंभ में ही अपनी बात कहते हुए वेद प्रकाश बताते हैं – .....हमारे कार्यालय में सभी सरकारी कार्यालयों की तरह अंग्रेज़ी का माहौल था. हिंदी के नाम पर प्रतियोगिताएँ, पुरस्कार योजनाएँ, हिंदी बैठकें भी चलती रहती थीं. इनके साथ ही अंदर ही अंदर हिंदी में काम की मात्रा धीरे-धीरे ही सही बढ़ती जा रही थी. इसी बीच कार्यालय में कंप्यूटर का प्रवेश हुआ. शुरू में यह काफी सीमित था. कंप्यूटर पर टाइप मात्र करने वाले लोग किसी टैक्नोक्रेट के समान श्रद्धा से देखे जाते थे. हिंदी विभाग के लोग तो सहम कर उधर ताकते तक न थे. ...अपनी बात को वे कुछ इस तरह आगे बढ़ाते हैं – ...हिंदी अधिकारी होने के नाते मन में कम्प्यूटरों में हिन्दी इस्तेमाल नहीं कर पाने की बातें कहीं कसकती भी थ…

ब्लॉगर, साहित्यकार से आगे है, और रहेगा.

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(पिछले दिनों अनिल ने ब्लॉगर बनाम आम साहित्यकार पर विचारोत्तेजक लेख लिखा था जिसे आगे बढ़ाते हुए दिलीप ने हिन्दी चिट्ठाजगत् में गैंग और माफ़िया की बातें कीं और आरोप लगे कि लोगों ने ब्लॉग दुकानें सजा ली हैं. मगर, मेरा मानना है कि चिट्ठाकारी में गैंग और माफिया जैसी चीजें सिर्फ और सिर्फ काल्पनिक हैं, ठेठ कल्पना की उपज हैं और न कभी हो सकती हैं और न हो सकेंगी. जिसकी दुकान में माल बढ़िया, सार्थक होगा मक्खियों के माफ़िक पाठक और टिप्पणीकार वहीं मंडराएंगे. और, साथ ही, चिट्ठाकार सदैव ही आम साहित्यकार से एक कदम आगे रहेगा. और, यकीन मानिए, भविष्य में चिट्ठाकारी के जरिए ऐसे साहित्य रचे जाएंगे जिसकी कल्पना भी हमें (अब भी!) नहीं होगी. कारण ऑब्वियस है. चिट्ठों में संपादकीय संस्तुति, संपादकीय कैंची जैसी चीजों का सर्वथा अभाव और चिट्ठों की सर्वसुलभता, उसका अमरत्व और चिटठों के बहुआयामी-मल्टीमीडिया युक्त होना. प्रस्तुत आलेख बालेंदु के वृहत आलेख से प्रेरित है और इसे रेडियो वार्ता हेतु बेस के लिए तैयार किया गया था. चूंकि ब्लॉगर बनाम साहित्यकार की बहस कई मंचों पर चल रही है, इसे यहाँ प्रकाशित करना समीचीन होगा)--…

कष्ट, क्रोध और उदासी भरा एक दिन...

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सुबह 6 बजे अलार्म की घंटी बजी तो मजबूरन ठंड में ठिठुरते हुए उठना पड़ा. सुबह 6 बजे नल आता है. वह भी एक दिन छोड़कर. आज नल आने की बारी थी. और कभी तो ये भी होता है कि उठ कर नल को निहारते रहो... और वो आता नहीं. थोड़ी देर बाद नगर निगम का पोंगा चिल्लाता है - नल शाम को या दोपहर आएगा. और अपनी कमी छुपाने के लिए बहाने भी बनाता है - बिजली सप्लाई सही नहीं मिलने के कारण पानी की टंकिया पूरी भर नहीं पाईँ....

यूँ तो घर पर ट्यूबवेल भी है. पर, जब यह भवन बना था तबके भू-जल स्तर के अनुरूप इसे कोई 175 फीट गहरा किया गया था. आज स्थिति यह है कि 400 फीट में भी पानी नहीं है. लिहाजा फरवरी के बाद ट्यूबवेल सूखने लग जाता है और जब मई जून में वास्तविक में पानी की आवश्यकता होती है, तब यह मुँह चिढ़ाता पूरी तरह सूखा बना रहता है.

तो, बात सुबह की हो रही थी. जैसे ही जमीन में कोई दो फुट नीचे टंकी में लगा नल (उससे ऊपर तो ससुरा पानी का प्रेसर ही नहीं आता!) खोल कर उठना चाहा, टंकी का भारी भरकम लोहे का ढक्कन मेरे घुटने पर धाड़ से गिर पड़ा. दर्द की अनुगूंज सिर तक पहुँच गई और मेरा सिर चकरा गया. तब समझ में आया कि लोग-बाग "दिमाग घ…

एमएस ऑफ़िस हिन्दी 2007 – एक त्वरित नजर

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यूँ तो हिन्दी एमएस ऑफ़िस 2007 के लिए मैंने कोई तीन-चार महीने से पंजीकरण करवाया हुआ था. माइक्रोसॉफ़्ट की साइट पर वादा किया गया था कि वो सीडी या डीवीडी पंजीकृत पते पर भेजेंगे. परंतु इंतजार करता रहा था – कब वो मिले और कब उसे जांचें-परखें. इससे पहले एमएस ऑफ़िस 2007 का अंग्रेज़ी संस्करण देख चुका था और, उसमें उसके ऊटपटांग किस्म के, कन्फ़्यूजिंग रिबन इंटरफेस के अलावा कोई नई चीज मेरे जैसे साधारण उपयोक्ता के लिए काम की नहीं मिली थी.

आलोक ने कुछ दिन पहले बताया कि अब हिन्दी एमएस ऑफ़िस 2007 ऑनलाइन उपलब्ध है तो फिर से उत्सुकता जगी और सुखद आश्चर्य हुआ कि हिन्दी एमएस ऑफ़िस 2007 डाउनलोड कर इवेल्यूएशन प्रयोग के लिए उपलब्ध है. इसका कोई 450 मेबा डाउनलोड उपलब्ध है जिसे आप यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं. परंतु हो सकता है कि आपको पहले यहाँ पर पंजीकरण करवाना पड़े.

इसकी संस्थापना आसान है और आरंभिक संस्थापना स्क्रीन से लेकर अंत तक हिन्दी में ही मेन्यू प्रकट होता है. पूर्व के संस्करणों (एमएस ऑफ़िस हिन्दी 2003) की अपेक्षा इस नए संस्करण की खासियत यह है कि आप इसके इंटरफेस को हिन्दी या अंग्रेजी में जरूरत के अनुसार ब…

मुझे इस पोस्ट से नफ़रत है...

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आउटब्रेन - एक नो नॉनसेंस ब्लॉग रेटिंग सेवा आपके लिए अब पूरी तरह हिन्दी में अपनी सेवा लेकर आ गए हैं.इसे अब आप अपने ब्लॉग पर लगाइए, और औरों की रेटिंग एक क्लिक पर पाइए. और, यदि आपको कहीं पर किसी चिट्ठे पर आउटब्रेन की रेटिंग लगी हुई दिखाई देती है, जैसे कि इस चिट्ठे पर, और उस पोस्ट से आपको नफ़रत है तो बजाए एक पेजी विवादित टिप्पणी लिखने के, बस एक चटखा वहां पर लगाइए जहाँ यह उभर कर आता है - मुझे इस पोस्ट से नफ़रत है...
और, आउटब्रेन को लगाना है अत्यंत आसान. इस साइट पर जाएँ, ब्लॉगर या वर्डप्रेस जो भी हो वो प्लेटफ़ॉर्म चुनें, हिन्दी भाषा चुनें, और अपने ब्लॉग का नाम चुनें. यदि आवश्यक हो तो उपयोक्ता नाम और पास वर्ड भरें, औरइंस्टाल रेटिंग आन योर ब्लॉग पर क्लिक करें. बस हो गया.इस पोस्ट पर अपने विचार अपनी टिप्पणियों से नहीं, यहाँ पर चमकते सितारों पर क्लिक करके दें तो उत्तम! बताएँ कि आप इस पोस्ट से नफ़रत करते हैं या नहीं. या फिर ये पोस्ट बेकार है, उबाऊ है या फिर ठीक-ठाक?

सबसे भ्रष्ट...

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उत्तर प्रदेश आईएएस अफसरों के यूनियन के नए, चुने गए अध्यक्ष वही हैं, जिन्हें पूर्व में साथी आईएएस अफसरों ने सर्वाधिक भ्रष्ट अफसर के रूप में चुना था. चुनावों के हालिया रूपरंग से – चाहे वे लोकसभा-विधानसभा के हों या किसी कॉलेज छात्रसंघ के या फिर आईएएस अफसरों के यूनियन के – कोई भी आसानी से अंदाजा लगा सकता है कि कौन जीतेगा. जीतेगा वही, जो सबसे बड़ा .... होगा. व्यंज़ल
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मैंने तो सारे काम किए थे भ्रष्ट
जाने कैसे समझा नहीं गया भ्रष्ट कौन सा ये गुनाह किया है मैंने
मेरी नजर में पूरी दुनिया है भ्रष्ट इस दौर का ये नियम है नया
मरता है ईमानदार जिंदा है भ्रष्ट किसकी इबादत करूं कैसी पूजा
मेरा ईश मेरा खुदा हो गया भ्रष्ट थोड़ा तो ईमान बाकी है रवि में
खुलेआम बताता है खुद को भ्रष्ट
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अगर मर जाऊँ तो रोने मत आना...

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अगर मर जाऊँ तो रोने मत आना... क्या आपने अपनी मृत्योपरांत के लिए कोई वसीयतनामा कर लिया है? यदि हाँ, तो उसे बदलने के लिए, और यदि नहीं तो एक लिख डालने के लिए आपके सामने प्रस्तुत है एक उत्तम विचार. उज्जैन के श्री महावीर प्रसाद लोहिया ने मृत्योपरांत का एक वसीयतनामा लिखा है, जो कई मामलों में अनुकरणीय है. उन्होंने अपने मृत देह का दान चिकित्सा महाविद्यालय को तो सौंपा ही है, कुरीतियों को भी सिरे से नकारा है. कुछ प्रेरणा मुझे भी मिली है. और मैं अपना यह वसीयत नामा इंटरनेट पर, अपने ब्लॉग पर टांगता हूँ. इससे महफ़ूज जगह और क्या हो सकती है भला? मृत्यु पर कोई भी क्रियाकर्म, पिंडदान, ब्राह्मण-भोज, गरूड़पुराण पाठ, बारहवां, तेरहवां, पगड़ी आदि रूढ़िवादी रीतिरिवाज कतई नहीं किया जाए. मेरे मृत देह को चिकित्सा महाविद्यालय को दान में दे दिया जाए. पत्नी को विधवा नहीं माना जाए. (मैं सिर्फ शरीर छोड़ूंगा, पत्नी को नहीं. मेरी आत्मा पत्नी के इर्द-गिर्द सदैव भटकेगी,)बच्चों के सिर नहीं मुंडवाए जाएं. (इसी बहाने डैंड्रफ़ से छुटकारा पाना हो तो बात अलग है,)घर में अथवा कहीं भी बैठक नहीं की जाए. मातमपुर्सी करने किसी क…

हिन्दी ब्लॉगिंग के 3 आदम

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ताज़ातरीन टिप्पणी विवाद से अनायास बापू के तीन बंदर याद नहीं आ जाते? परंतु ब्लॉगिंग में, खासकर हिन्दी ब्लॉगिंग में वे फिट नहीं होंगे. हिन्दी ब्लॉगिंग को बापू के 3 बंदरों के परिवर्तित रूप - इन 3 आदमों की खासी आवश्यकता होने लगी है... बुरा मत लिखो, बुरा मत पढ़ो, बुरा मत लिंक करो तो भइए, अब कहीं कुछ बुरा सा होने लगे हिन्दी ब्लॉगिंग में, तो कट ले. आजू से कटले, बाजू से कट ले. ऊपर से निकल ले. अब तो, हजारों लिखवाल हैं हिन्दी ब्लॉगजगत् में!

दोस्त, आपका हिंदी प्रेम जाइज है लेकिन...

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अचानक ही धड़ाधड़ गोस्टैट हिन्दी के बारे में (स्पैम?) कमेंट मिलने लगे और साथ ही ई-मेल से सूचना भी कि गो-स्टैट साइट के जरिए आप अपने ब्लॉग के स्टेटिस्टिक्स हिन्दी में भी प्राप्त कर सकते हैं...सचमुच हिन्दी अब इंटरनेट की स्थापित भाषा बन गई है और अब इसमें चहुँओर व्यावसायिकता की घोर संभावनाएँ दिखाई देने लगी हैं. हो सकता है, भविष्य में कुछ ऐसे नए नायाब वेब अनुप्रयोग इस्तेमाल करने को मिलें जो पहले पहल हिन्दी में ही जारी किए जाएंगे और फिर वे भले ही बाद में अंग्रेजी में पोर्ट हों.हिन्दी में स्टेटकाउंटर के नाम पर मैं किलकता और खुश होता हुआ गोस्टैट हिन्दी पर पहुँचा तो मेरी खुशी वहाँ काफूर हो गई.आप पूछेंगे क्यों?(हिन्दी का गोस्टैट)(अंग्रेजी का गोस्टैट)(चित्रों को बड़े आकार में देखने के लिए उस पर क्लिक करें)तमाम साइट हिन्दी के गलत-सलत अनुवादों और वर्तनी की गलतियों से अटा पड़ा है.भाई साहब, मित्र, आपका हिन्दी प्रेम जाइज है, लेकिन जरा हिन्दी ठीक-ठाक तो रखें. गोस्टैट साइट कोई व्यक्तिगत ब्लॉग साइट नहीं है, बल्कि एक व्यावसायिक संगठन है जिसका कुछ तो उत्तरदायित्व है. आपसे अनुरोध है कि किसी अच्छे अनुवादक को …

एक लैपटॉप प्रतिबच्चा को चाहिए स्वयंसेवी हिन्दी अनुवादक

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(चित्र को बड़े आकार में देखने के लिए इस पर क्लिक करें) यदि आपके मन में विश्व के तमाम गरीब बच्चों को के प्रति कुछ कर गुजरने की तमन्ना है तो इससे बढ़िया काम और कुछ नहीं हो सकता. एक लैपटॉप प्रतिबच्चा (OLPC) एक अति महात्वाकांक्षी परियोजना है जिसके तहत अत्यंत सस्ती कीमत में (वर्तमान में 6000 रुपए में,) बहुत ही उम्दा, मजबूत किस्म के लैपटॉप तमाम विश्व के गरीब बच्चों को (एक तरह से) मुफ़्त में (सरकारी व गैर-सरकारी तथा व्यक्तिगत सहयोग से) प्रदान किया जा रहा है. आप भी कई तरीके से इस परियोजना का हिस्सा हो सकते हैं. जैसे कि, आप जिस भाषा के जानकार हैं – उस भाषा में एक्सओ (ओएलपीसी का ऑपरेटिंग सिस्टम तथा प्रोग्राम) अनुप्रयोगों व मैनुअल/मदद फ़ाइलों को अनुवाद करके. हिन्दी भाषा में एक्सओ के कुछ आरंभिक फ़ाइलों का अनुवाद आप आनलाइन यहां पर कर सकते हैं. इसके लिए वहां पर आपको एक खाता खोलना होगा. खाता खोलने के बाद लॉगइन करें, फिर जिस फ़ाइल का अनुवाद करना है, या अनुवाद परिवर्धित करना है, उसे क्लिक कर खोलें व अनुवादित/गैर अनुवादित शब्दों/वाक्यों को चुनें. आपके सामने एक बक्सा प्रकट होगा जिसमें आप हिन्दी में अनुव…

मियाँ फेंकू, बाई मलाई, इंडिया सिंग और भक्त हरवक्त

आज जब मैं यू ट्यूब पर रचनाकार का पहला वीडियोकास्ट चढ़ा रहा था तो बाजू में मियाँ फेंकू का वीडियो लिंक प्रकट हुआ. थोड़ी सी दिलचस्पी जागी तो पाया कि ऐसे कुछ और वीडियो हैं. इन्हें यू-ट्यूब उपयोक्ता पॉकिटबड्डीस ने संकलित किया है.थोड़ा सा और अनुसंधान करने पर पाया कि 1-2 मिनट से भी कम समय के इन शानदार, बेहतरीन मनोरंजक वीडियो को फ़ोनेटिक्स.इन द्वारा बनाया गया है.आपके लिए पेश है यू-ट्यूब से कुछ एम्बेड कड़ी. वैसे, इन वीडियो के पूरे, हाई-फ़ाई मजे के लिए (यू-ट्यूब में गुणवत्ता थोड़ी सी कम है) फ़ोनेटिक्स.इन पर जाएँ. मियाँ फेंकू का ईद-दीवाली बधाई फरमाओ जान का अब के बारिश इंडिया सिंग का इंडियन रेलवेभक्त हरवक्त और बाई मलाई आप स्वयं जा देखें :), और हाँ, वहां पर मि. माधुरी भी हैं, बड़ी प्यारी सी.इसी तरह के, घोर मनोरंजक कोई चालीस से भी अधिक यू-ट्यूब वीडियो की कड़ियाँ आपको यहाँ से मिल सकती है -वीडियो 1-20वीडियो 20-40वीडियो 40 व आगेइनमें कुछेक को छोड़ कर आमतौर पर बाकी सभी आपका घंटों मनोरंजन करने में अच्छे खासे समर्थ हैं, कुछेक को तो आप बारंबार देखना व मित्रों को फारवर्ड करना चाहेंगे.पॉकेटबड्डीज को इस मजेद…

बदहूहवा = यूट्यूब उर्फ आई एम लेज़ी!

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बहुत पहले मसिजीवी ने अपनी ऑल्ट-शिफ़्टी नितांत निजी पीड़ा को सार्वजनिक किया था. यह पीड़ा मुझे भी है. शुरू से. देखिए ना, कल ही मैं जब रीयल इंडियन आइडलों के लिए यू ट्यूब पर फ़ाइलें चढ़ाने के लिए जाना चाहा तो मुझसे यू-ट्यूब की जगह ये टाइप हो गया – बदहूहवा. दरअसल, मैं अंग्रेजी में टाइप कर रहा था youtube. परंतु मेरा कुंजीपट हिन्दी में था, और टाइप हो गया बदहूहवा. मैंने कुंजी दबाया था youtube, परंतु इनस्क्रिप्ट पर सेट होने के कारण इनपुट आया बदहूहवा. हम सभी को, जो कि कम्प्यूटर पर एक से अधिक भाषाओं में काम करते हैं, इस समस्या से नित्य दो-चार होना पड़ता है. कुंजीपट टॉगल किए बगैर बिना देखे धड़ाधड़ कभी कभी तो आधा-पूरा पैराग्राफ छाप डालते हैं और तब पता चलता है कि ये तो किसी एलियन भाषा में टाइप हो गया, और अकसर कई बार बड़ी झुंझलाहट भी होती है. परंतु फिर, कल एक जादू हो गया. बदहूहवा से सचमुच एक कड़ी मिली. इस बार गूगल सर्च बक्से ने ये नहीं कहा कि आपका यह अजीबोगरीब शब्द कहीं नहीं मिला. गूगल ने बदहूहवा => यूट्यूब की कड़ी पेश की. और बोपदद! मेरे जैसे आलसी जीवों के लिए काम बन गया जो यूआरएल के छोटे से हिस…

द रीयल इंडियन आइडल्स...

नाम – नामालूमउम्र – 7-8 वर्ष पता – भारतीय रेल का कोई डिब्बा व्यवसाय – गायन ------------- नाम – नामालूमउम्र – 25-30 वर्ष पता – भारतीय रेल का कोई डिब्बा व्यवसाय – गायन इंडियन आइडल, सारेगामापा संगीत का विश्वयुद्ध और स्टार वाइज ऑफ इंडिया जैसे रीयलिटी शो में सुर-ताल से पीछे छूट गए गायक अकसर जनता के एसएमएसिया वोटों के चलते जीत जाते हैं और उनसे बीस पड़ रहे कलाकार हार जाते हैं. मोटी फीस ऐंठे हुए कठपुतली निर्णायक मगरमच्छी टेसुए बहाते हैं, वोटरों को कोसते हैं और फिर जनता से और-और वोट मांगते हैं. ऊपर के दोनों वीडियो में ट्रेन की गति और शोर के बीच, जहाँ गले को ही माइक्रोफ़ोन और स्पीकर का रूप दिया गया है, न तो सुर टूटा है और न ताल. ताल भी एसबेस्टास की चादर के दो छोटे से टुकड़ों और फटी, पैबंद लगी हुई ढपली से जमाई जा रही है. हैं न ये रीयल इंडियन आइडल्स? और, ऐसे एक से बढ़कर एक आइडल आपको हर कहीं, हर शहर में, चलते फिरते मिल जाएंगे. क्या कोई चैनल इन्हें चुनकर इनके बीच गायन प्रतियोगिता का रीयलिटी शो आयोजित कर सकता है? मेरा दावा है कि इस शो को हाईप और हूपला तो मिलेगा ही, देश को चंद सर्वकालिक श्रेष…

चिट्ठाकारी और व्यक्तित्व परिवर्तन

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क्या चिट्ठाकारी से व्यक्तित्व परिवर्तन संभव है? संभवत:, हाँ. आज जब मैं इस परिवर्तन के बारे में पढ़ने-जानने के लिए चिट्ठे पर गया तो क्या देखता हूँ कि चिट्ठाकार तो क्या, पूरा का पूरा चिट्ठा ही व्यक्तित्व परिवर्तन का शिकार हो गया है. कहाँ ज्ञानदत्त शान से रेलगाड़ी चलाते थे अपने चिट्ठे के बाजू पट्टी में. वहाँ शीर्ष पट्टी में, सबसे ऊपर, देखा कि हवाई जहाज उड़ रहा है.और, साथ ही साथ, यात्रा के लिए बीमा करवाने हेतु एक विज्ञापन भी आगाह कर रहा था. रेलगाड़ी के परिचालन से जुड़े ज्ञानदत्त के रेल दुर्घटनाओं के कुछ अंदरूनी किस्सों वाले चिट्ठापोस्टों को पढ़ कर बगैर बीमा करवाए भला कौन बहादुर रेल यात्रा करने का साहस करेगा! (बीमा कंपनी ने अपना उत्पाद विज्ञापित के लिए कितना सही स्थल चुना है). वैसे, एक और अदृश्य इशारा हो रहा है – अब तो रेलगाड़ी छोड़ो, अपने व्यक्तित्व में परिवर्तन लाओ, और हवाई यात्रा करो! ज्ञानदत्त ने स्वयं माना है कि चिट्ठाकारी ने उनके व्यक्तित्व को परिवर्तित कर दिया है. उनके चिट्ठे का व्यक्तित्व तो खैर बदल ही गया है. उनके व उनके चिट्ठे के नए इनकारनेशन के लिए बधाई. मानसिक हलचल के एक चिट्ठ…

जब वी मेट एट रतलाम: चवन्नी की बातों में है अठन्नी का दम...

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जब वी मेट फ़िल्म अभी मैंने नहीं देखी है. जब वी मेट पर लिखी गई अपनी समीक्षात्मक ब्लॉग प्रविष्टि में चवन्नी चैप ने फ़िल्म में रतलाम शहर के गंदे प्रस्तुतिकरण को लेकर कुछ वाजिब से सवाल उठाए थे तो मैंने अपनी टिप्पणी में लिखा भी था – रतलाम रेलवे स्टेशन पर रोजी-रोटी की तलाश में रतलाम-झाबुआ-निमाड़ अंचलों से गरीब ग्रामीणों की पलायन करती भीड़ दिखती है, न कि रक्कासाओं की... और तो और, यहाँ पर ज्ञात-अज्ञात क़िस्म के लाल बत्ती क्षेत्र भी नहीं हैं. यह शहर आमतौर पर साफ सुथरा है, और इक्का-दुक्का अपवादों को छोड़ दें तो छेड़-छाड़ जैसी घटनाएँ भी नहीं होतीं. इसके बावजूद इस फ़िल्म में इन बातों को दिखाया गया है. जब यह फ़िल्म हाल ही में रतलाम में रिलीज हुई तो जाहिर है, रतलामियों को यह नागवार गुजरा और फ़िल्म में रतलाम के इस गंदे प्रस्तुतिकरण पर विरोध जताया. इस विरोध प्रदर्शन की मजेदार बात यह रही कि विरोध प्रदर्शन करने वालों ने किसी टॉकीज पर जाकर नहीं, बल्कि शहर के एकमात्र महिला महाविद्यालय के सामने प्रदर्शन किया. चर्चे हैं कि इस फ़िल्म पर किसी संगठन की तरफ से कोई मुकदमा ठोंका जाएगा. मगर मेरा मानना है कि फ़ि…

एक और हिंदी ब्राउज़र का अवतरण...

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मोजिल्ला के रूप रंग को (जैसे कि फ्लॉक में इसका रूप रंग पूरी तरह बदल दिया गया है,) निखार संवार कर बहुत से प्लेटफ़ॉर्म में इसे सीमंकी के रूप में जारी किया गया है और हाल ही में इसका हिन्दी रूप – हिन्दी सीमंकी को उत्तंक सॉफ़्टवेयर ने जारी किया है. सीमंकी हिन्दी चूंकि मोजिल्ला का ही प्रतिरूप है और ब्राउजर इंजिन मॉजिल्ला का ही इस्तेमाल करता है, अतः आपको सीमंकी में मॉजिल्ला की पूरी खूबियाँ मिलेंगीं. इसके हिन्दी प्रतिरूप के आरंभिक जांच परख में अनुवादकों की मेहनत तो अच्छी खासी झलकती है, परंतु साथ ही अनुवाद में भाषागत त्रुटियाँ और कमियाँ भी नजर आती हैं. उम्मीद है इन ग़लतियों को इसके अगले संस्करण में ठीक कर लिया जाएगा. और अनुवाद की भाषा भी परिष्कृत कर ली जाएगी. कहीं कहीं पर अधूरा अनुवाद भी है. इसी प्रकार अभी सिर्फ इसका यूआई (उपयोक्ता इंटरफ़ेस) ही अनुवादित हुआ है. इसकी मदद फ़ाइलें अंग्रेज़ी में ही हैं. जाहिर है, कार्य बड़ा है. फिर भी, शुरूआत हो चुकी है. इससे पूर्व इनके द्वारा मॉजिल्ला 1.5 का हिन्दी संस्करण जारी किया जा चुका है. हिन्दी सीमंकी की संस्थापना अत्यंत आसान है. बस फ़ाइल डाउनलोड करें व स…

दीपावली की कुछ अहार्दिक क़िस्म की अबधाईयाँ...

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दीपावली आया और मेरे लिए मुसीबतों का पहाड़ ले आया. अब देखिए ना, मेरा मेल बॉक्स जेनुइन क़िस्म के (कतई स्पैम नहीं!) ईमेलों से अटा पड़ा है. और नित्य कोई तीन-चार गुना ज्यादा ईमेल चला आ रहा है इन दिनों. सबमें घुमा-फिरा कर एक ही बात कही जा रही है – दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ! लफ़्जों के खेल, चित्रों के अखाड़ों, मल्टीमीडिया ऑडियो-वीडियो संलग्नकों के सर्कसों का - सबका सार यही होता है दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ! मोबाइल का इनबॉक्स भी हर घंटे फुल हो जा रहा है. एक अतिरिक्त झंझट कि इसे पढ़ते रहें और खाली करते रहें नहीं तो यह हर एसएमएस पर अतिरिक्त रूप से आगाह करता है कि बक्सा खाली करो! बक्सा खाली करो! – उलटी-सीधी किस्म की भाषाओं, बोलियों और मल्टीमीडिया युक्त इन एसएमएसों का अंततः यही संदेश होता है – दीपावली की हार्दिक बधाईयां!अब मुझे भी हर एक को प्रत्युत्तर में धन्यवाद देना होगी, बदले में हार्दिक बधाईयाँ टिकाना ही होगी अन्यथा क्या पता अगला बुरा मान जाए. भई, मुझे तो लगता है, पर, प्रत्याशित-अप्रत्याशित बधाईयों का प्रत्युत्तर देना मुसीबत से कम अगर किसी को लगता हो तो वो व्यक्ति सचमुच वंदनीय है. इसीलि…

जीतो इनाम दबाके : आइए, शुरू करें एसएमएस मोबाइल बिजनेस

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आपने अख़बारों, पत्रिकाओं में, पैम्प्लेटों में वर्गाकार पहेली आधारित नेटवर्क-गैरनेटवर्क व्यापार के विज्ञापन देखे सुनें होंगे, और हो सकता है कि हममें से कोई भला-मानुष कभी इनके ट्रैप में फंसा भी होगा. 0 0 0 0 0 0 0 0 0(ऊपर दिए खाने में प्रत्येक में शून्य अंक इस तरह भरें कि आड़ा तिरछा खड़ा किसी भी रूप में तीनों खानों का योग शून्य ही आवे. पहला ईनाम - 29 इंची रंगीन टीवी व लाखों रुपयों के  अन्य पुरस्कार. सही उत्तर वाली सभी प्रविष्टियों को गारंटीड आकर्षक ईनाम - कैमरा/घड़ी चैन सिस्टम के अनुसार आधी कीमत में दिया जाएगा)अब तैयार रहिए कुछ नए, नायाब, एसएमएस-मोबाइल बिजनेस के जालों में फंसने के लिए. वैसे, आप चाहें तो आप स्वयं इस तरह के कई बिजनेस शुरु कर सकते हैं.हाल ही में एक अख़बार में ऐसा ही एक विज्ञापन मुझे देखने को मिला जिसमें कुछ इसी किस्म का खेल है. आपको बस एक सड़ियल किस्म के सवाल का जवाब एसएमएस से भेजना है. सही उत्तर वाली प्रविष्टियों में से एक लकी ड्रॉ निकाला जाएगा और उसके विजेता को एक मोबाइल फ़ोन ईनाम में दिया जाएगा. प्रश्न सड़ियल है, तो हर कोई उसका उत्तर जानता है और चूंकि दाम सिर्फ लग रहे …

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