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हिन्दी का ऑन लाइन पीडीएफ़ परिवर्तक

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हिन्दी भाषा के दस्तावेज़ों के लिए एक बढ़िया ऑनलाइन पीडीएफ़ परिवर्तक

जमजार - वैसे तो एक ऐसा ऑनलाइन दस्तावेज़ परिवर्तक है जिसके जरिए आप कई किस्म के दस्तावेज़ों को कई अन्य किस्म के दस्तावेज़ों में मुफ़्त में परिवर्तन कर सकते हैं, परंतु यह हिन्दी भाषा के वर्ड फ़ाइलों को बखूबी पीडीएफ़ फ़ॉर्मेट में बदलता है.

यह 100 मेबा तक की फ़ाइलों को परिवर्तित कर सकता है, तथा सारा कार्य वेब इंटरफ़ेस के जरिए होता है. आपको एक आसान इंटरफ़ेस के जरिए फ़ाइल अपलोड करना होता है तथा दिए गए ईमेल पते पर सूचना मिलने के उपरांत आपको दी गई कड़ी से फ़ाइल डाउनलोड करना होता है.

हां, हिन्दी भाषा की फ़ाइलों के नाम अंग्रेज़ी में ही हों, हिन्दी में फ़ाइल नाम यह स्वीकार नहीं करता है.

संबंधित आलेख : यूनिकोड हिन्दी वर्ड फ़ाइलों को पीडीएफ़ में कैसे परिवर्तित करें

मॅड्रिवा लिनक्स पर हिन्दी

मॅड्रिवा लिनक्स पर लिखे आलेख पर पाराशर जी ( parasharas at gmail.com ) की प्रतिक्रिया थी:रवि भाई,
मैंड्रीवा लाईनक्स के बारे में इतना शानदार आपने लिखा तो हमने भी पूरी ४
सीडी का डाऊनलोड कर लिया और उस (लाईनक्स) से ही यह मेल भेज रहा हूं।
ज्यादा तो नहीं करीब १००० मिनत लगे त इस लिए लिखा कि इनस्क्रिप्'पर यह
नहीं आ रहा नियंत्रक शिफ्त की सैंतिंग की तरह कोई विधि बताएं और
मैंड्रीवी शृंखला को एक ही लिंक पर डाल दें खास कर हिंदी में कार्य करना
लोकलहोस्त पीएचपीमाई एडमिन व खास तौर से इसके मोजिला फायरफॉक्स को अपडेत
२.०.१ या आगे अपडेत या इंस्éल करना फिलहाल मशक्कत कर रहे हैं ये भी पता
नहीं चला कि विंडो से जो फोंस लिये थे वे फायरफॉक्स में नहीं आ पाए विंडो
से एक फोंत पर्सनल कर मेल तो लिख ही दी है।

आपका अपना
पाराशर

जो वर्तनी आई हैं वह इंडिक एक्सśंशन की देन हैं माफ करियेगा बस शुरू है
आपके जवाब व हल की प्रतीक्षा.मॅड्रिवा की इस समस्या का विस्तृत समाधान इस आलेख में है:लिनक्स में फ़ॉन्ट कैसे संस्थापित करें
उबुन्टु (जीवंत, बूटयोग्य सीडी) के नए संस्करण में भी यही समस्या है, और इसका विस्तृत समाधान यहाँ पर है: उबुन्टु 6.0 …

मोबाइल मेनिया उर्फ मोबाइल मैनर्स

कौन बोल रिया है?भारत के गांव गांव में मोबाइल पहुँच रहा है. नुक्कड़ की चाय की दुकान पर काम करने वाला छोरा और मुहल्ले का धोबी और खेत में काम करने वाला निरक्षर मजदूर सबके हाथ में मोबाइल दिखने लगा है. मोबाइल पर अभिजात्य वर्ग का अधिकार नहीं रहा. मोबाइल पर काल करना खर्चीला भी नहीं रहा. आपके मोबाइल में काल टाइम नहीं है, कोई बात नहीं. सामने वाले को दो-तीन मिस काल दे मारिये, वह मजबूरन काल बैक कर आपसे पूछेगा - भइये, क्या बात है?मोबाइल पर कभी आप कोई महत्वपूर्ण बात कर रहे होते हैं तभी पता चलता है कि उसकी बैटरी खत्म हो गई, और आस-पास बैटरी चार्ज करने का कोई साधन नहीं होता. कभी किसी मित्र को स्थानीय मोबाइल का नंबर लगाते हैं तो पता चलता है कि वह नंबर तो आज दो हजार किलोमीटर दूर है - और आपको एसटीडी चार्ज लग गया और आपके मित्र को रोमिंग चार्ज (या इसके उलट भी हो सकता है). और आपकी मित्रता इस एसटीडी-रोमिंग चार्ज के चक्कर में खतरे में पड़ती दीखती है. कभी किसी मित्र को मोबाइल लगाते हैं तो उधर से मित्र के बजाए भाभी जी का स्वर सुनाई देता है - "हाँ, भाई साहब, आज ये मोबाइल मेरे पास है - बाजार में कुछ काम था …

इन चेतावनी संदेशों को अनदेखा न करें

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इंटरनेट के फ़िशिंग हमलों से कैसे बचें?पिछले हफ़्ते मुम्बई पुलिस ने कुछ नाइजीरियाई नागरिकों को इंटरनेट पर चार-सौ-बीसी और धोखाधड़ी करने के आरोप में पकड़ा. उन पर आरोप था कि उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक की एक नकली साइट तैयार कर बैंक व ग्राहकों को करोड़ों रुपयों का चूना लगाया. उन्होंने बैंक के ग्राहकों को नकली ईमेल भेजकर कहा था कि कुछ कारणों से वे अपने पास-वर्ड और उपयोक्ता नाम अपडेट करें. ईमेल में कड़ी उस नकली साइट की थी जो हूबहू आईसीआईसीआई बैंक की असली साइट जैसा दिखता था. ग्राहक झांसे में आकर अपनी गोपनीय जानकारियाँ वहाँ डाल देते थे. अपराधियों ने यह जानकारी हासिल कर असली बैंक खातों से करोड़ों रुपए निकाल लिए और इंटरनेट बैंकिंग के ग्राहकों व सेवा प्रदाताओं को करोड़ों रुपयों का चूना लगाया. इस तरह की धोखा-धड़ी, जिसमें नकली साइट बना कर उपभोक्ताओं को ठगा जाता है, फिशिंग कहलाता है.अपना शिकार फांसने के लिए अपराधी नकली साइटें इस तरह बनाते हैं कि वे पूरी असली लगें. एक सामान्य उपयोक्ता के लिए नकली और असली साइट में भेद करना मुश्किल होता है. इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर इंटरनेट ब्राउज़रों के नए संस्करणों…

आय से अधिक, अनुपातहीन संपत्ति भी कोई वस्तु होती है?

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तू कितना कमाता है रे ललुआ?**-**मुझे तो आज तक आय से अधिक संपत्ति का फंडा समझ में ही नहीं आया. मेरी मां मुझसे पूछा करती थी, जब पहले पहल नौकरी लगी थी - तू कितना कमाता है रे ललुआ. मां के लिए उसका बच्चा हमेशा ललुआ ही रहता है. मैं शर्माता था कि मेरी आय मेरे हिसाब से, मेरी औकात से कम है, और मैं उसमें कुछ भत्ते इत्यादि को भी जोड़कर बता देता था. शायद यह था आय से अधिक संपत्ति.
परंतु किसी के पास आय से अधिक संपत्ति कैसे जमा हो सकती है भला. जितनी जिसकी आय होती है, उतनी ही या उससे कम ही तो वह जमा कर पाएगा ना? सरल सा गणित है, मान लो कि आपकी आय एक्स है. अब उस एक्स आय में से आपने वाय खर्च कर दिया तो जो संपत्ति आपके पास जमा होगी तो वो तो एक्स ऋण वाय होगी ना? आप लाख कृपण हों, अपनी आय में से कुछ भी खर्च नहीं करते हैं, तब, मान लिया कि खर्च, यानी कि वाय, शून्य है. ऐसी स्थिति में भी जो संपत्ति आपके पास जमा होगी वह एक्स माइनस जीरो यानी की एक्स - आपकी पूरी आय ही तो होगी, उससे अधिक नहीं. इससे यह सीधे-सीधे सिद्ध होता है कि आय से अधिक संपत्ति तो हो ही नहीं सकती. अगर ऐसा होने लगा तो नया गणित पैदा हो जाएगा, गणित…

मरफ़ी के तकनॉलाज़ी नियम

मरफ़ी के तकनॉलाज़ी नियमबिजली से चलने वाले किसी भी उपकरण को यह कभी भी न पता चलने दें कि आप बहुत जल्दी में हैं.(मरफ़ी के कुछ अन्य, मज़ेदार नियम यहाँ पढ़ें)गलत निष्कर्ष पर पूरे विश्वास के साथ पहुँचने की व्यवस्थित विधि का नाम ही ‘तर्क' है.जब किसी सिस्टम को पूरी तरह से पारिभाषित कर लिया जाता है तभी कोई मूर्ख आलोचक उसमें कुछ ऐसा खोज निकालता है जिसके कारण वह सिस्टम या तो पूरा बेकार हो जाता है या इतना विस्तृत हो जाता है कि उसकी पहचान ही बदल जाती है.तकनॉलाज़ी पर उन प्रबंधकों का अधिकार है जो इसे समझते नहीं.यदि बिल्डिंग बनाने वाले, प्रोग्राम लिखने वाले प्रोग्रामरों की तरह कार्य करते होते तो विश्व के पहले बिल्डर का पहला ही काम संपूर्ण समाज को नेस्तनाबूद कर चुका होता.किसी संस्थान के फ्रंट ऑफ़िस की सजावट उसकी संपन्नता के व्युत्क्रमानुपाती होती है.किसी कम्प्यूटर के कार्य का विस्तार उसके बिजली के तार के विस्तार जितनी ही होती है.विशेषज्ञ वो होता है जो क्षुद्र से क्षुद्र चीजों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी रखता है. सही विशेषज्ञ वह होता है …

जीवन के हर हिस्से पर है अधिभार...

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भीड़ भड़क्का अधिभारदुनिया एक भीड़ में तबदील होती जा रही है. वैसे, भीड़ में रहने के यूँ तो बहुत मजे हैं, परंतु बहुत से तमाम खतरे भी हैं. अब एक नया खतरा सिर पर आ गया है. अगर आप भारत में हवाई यात्रा करते हैं तो आपको प्रति टिकट एक सौ पचास रुपए अतिरिक्त भुगतान करना होता है. यह एक सौ पचास रुपए अतिरिक्त किसलिए? यह एक सौ पचास रुपए कंजेशन सरचार्ज होता है यानी कि भीड़ भड़क्का अधिभार!अभी तो सिर्फ हवाई यात्रा में यह अधिभार लगाया गया है. भविष्य में इस तरह के अधिभार के अन्य क्षेत्रों में घुसपैठ के पूरे आसार हैं. लंदन के कुछ भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में वाहन ले जाने व पार्क करने के लिए शुल्क वसूला जाता रहा है. इसी तर्ज पर अब अपने यहाँ भी अतिरिक्त अधिभारित शुल्क लगा करेगा. जिस ट्रेन में आप यात्रा करना चाहते हैं, उसमें भीड़ और वेटिंग लिस्ट के अनुसार अधिभार लग सकता है. जो सीधी सपाट गड्ढे रहित सड़क आपके घर को जाती है, और इस कारण अगर उसमें भीड़-भाड़ रहती है तो आपको सरचार्ज देना पड़ सकता है. रोज रोज के अधिभार से बचने के लिए फिर हो सकता है कि आप घर ही नहीं जाएँ. वैसे, यह एक बढ़िया सा बहाना हो सकता है पत्नि…

प्रोग्रामिंग गीत...

कुछ प्रोग्रामिंग गीत मूल फंटूश से अनुवादित:

# लोकल वेरिएबल
मैं पल दो पल का शायर हूंपल दो पल मेरी कहानी हैपल दो पल मेरी हस्ती हैपल दो पल मेरी जवानी है...
# ग्लोबल वेरिएबल
मैं हर इक पल का शायर हूँहर इक पल मेरी कहानी हैहर इक पल मेरी हस्ती हैहर इक पल मेरी जवानी है...
# नल पाइंटरमेरा जीवनकोरा काग़ज़कोरा ही रह गया

# डैंगलिंग पाइंटर्समौत भी आती नहींजान भी जाती नहीं
# गोटूअजीब दास्तान है येकहाँ शुरू कहाँ खतमये मंजिलें हैं कौन सीना वो समझ सके न हम
# दो रीकर्सिव फंक्शन जो एक दूसरे को काल कर रहे हैंमुझे कुछ कहना हैमुझे भी कुछ कहना हैपहले तुम पहले तुम# डिबगरजब कोई बात बिगड़ जाएजब कोई मुश्किल पड़ जाएतुम देना साथ मेरे हम नवाज़
# सी++ से वीबीये हसीं वादियाँये खुला आसमांआ गए हम कहाँ# बग जिसे ढूंढा नहीं जा सकाऐ अजनबीतू भी कहींआवाज दे कहीं से
# अप्रत्याशित बग (विशेषकर ग्राहक को प्रेजेन्टेशन देते समय)ये क्या हुआकैसे हुआकब हुआक्यों हुआ
# फिर, तब ग्राहक -
जब हुआ तब हुआ ओ छोड़ो ये ना सोचो...
# लोड बैलेंसिंग
साथी हाथ बढ़ानाएक अकेला थक जाएगामिल कर बोझ उठाना
# मॉडम - कनेक्शन बिजी मिलने पर
सुनो कहो कहा सुनाकुछ हुआ क्…

हिन्दी कम्प्यूटिंग - दशा व दिशा...

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कम्प्यूटर पर हिन्दी - दशा व दिशा?हिन्दी कम्प्यूटिंग पर एक रपट मैंने व करुणाकर (संयोजक इंडलिनक्स) ने सालेक भर पहले तैयार किया था. पीडीएफ़ फ़ाइल फ़ॉर्मेट में यह रपट गूगल पृष्ठों के सहयोग से आपके अवलोकनार्थ प्रस्तुत है. हिन्दी कम्प्यूटिंग के कुछ अनदेखे अनजाने पहलुओं की ओर इंगित करती यह रपट जानकारी पूर्ण है. यह रपट, जाहिर है, अंग्रेज़ी में है अन्यथा वह इस चिट्ठे पर कब का अवतरित हो जाता. मूलत: इसे अंतर्राष्ट्रीय प्रेक्षकों को ध्यान में रखकर बनाया गया था. यदि कोई बंधु इसका हिन्दी में अनुवाद कर कहीं प्रकाशित करना या अन्य रूप में इस्तेमाल करना चाहें जैसे कि इसे अद्यतन करना, तो इसकी वर्ड फ़ाइल मैं उन्हें भेज सकता हूँ.हिन्दी कम्प्यूटिंग पर यह जानकारी परक रपट (पीडीएफ़ फ़ाइल से) यहाँ पढ़ें.**/** ..

विंडोज़ युक्त अपने पीसी पर लिनक्स कैसे संस्थापित करें?

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विंडोज़ मशीन पर लिनक्स भी संस्थापित कैसे करें?

उन्मुक्त के चिट्ठे पर जब लिनक्स की खूबी के बारे में चर्चा हुई और जब ईशिक्षक पर चिट्ठा तैयार करने का फ्लैश ट्यूटोरियल देखने को मिला तो विचार आया कि लिनक्स संस्थापित करने के लिए भी एक फ़्लैश ट्यूटोरियल क्यों न तैयार किया जाए?

ऐसा ही एक फ़्लैश ट्यूटोरियल यहाँ पर है जिसे आप अपने विंडोज़ पीसी के अतिरिक्त पार्टीशन पर मॅड्रिवा लिनक्स 2007 संस्थापित करने हेतु काम में ले सकते हैं. मॅड्रिवा लिनक्स छोटे कार्यालय, घरेलू तथा साइबर कैफ़े इत्यादि के लिए बहुत ही अच्छा है चूंकि इसमें मल्टीमीडिया तथा विंडोज पार्टीशन को देखने का समर्थन अंतर्निर्मित है, जबकि फेदोरा या रेडहैट में इसे अलग से संस्थापित करना होता है.

मॅड्रिवा लिनक्स की संस्थापक डीवीडी आप लिनक्स फ़ॉर यू पत्रिका के नवंबर 2006 अंक के साथ प्राप्त कर सकते हैं. यदि आपके शहर में यह अनुपलब्ध हो तो किट्स एंड स्पेयर्स से मंगा सकते हैं. और यदि आपके पास डाउनलोड की सुविधा है तो फिर क्या बात है - मॅड्रिवा सीडी या डीवीडी इमेज डाउनलोड करें आज ही और संस्थापित करें अपने कम्प्यूटर पर मॅड्रिवा लिनक्स 2007 - अत्यंत …

ईमेल के जरिए भेजें 1 गीगाबाइट तक की फ़ाइल!

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ईमेल के जरिए भेजें विशाल, 1 गी.बा. तक की फ़ाइलें!
यूँ तो बहुत सारे औजार व ईमेल / मैसेन्जर प्लगइन्स हैं जिनके जरिए आप (जैसे कि जीमेल के) डिफ़ॉल्ट 10 मेगा बाइट से अधिक आकार की फ़ाइल ईमेल के जरिए भेज सकते हैं, परंतु पांडो विशिष्ट है. यह मुफ़्त है, कार्यकुशल है और नए किस्म का है. यह वेब ईमेल/ ईमेल क्लाएंट तथा मैसेन्जर के प्लगइन के रूप में कार्य करता है तथा बढ़िया कार्य करता है. इसके जरिए आप एक ही बार में 1 गीगा बाइट की एक विशाल फ़ाइल या सैकड़ों फ़ाइलों को ईमेल के जरिए उन खातों को भेज सकते हैं, जो इतनी आकार की फ़ाइलों को स्वीकार करते हैं (जैसे कि जीमेल या आपकी कंपनी का असीमित आकार स्वीकारने वाला ईमेल खाता). पांडो को काम करते हुए कुछ स्क्रीनशॉट नीचे देखें. पांडो का कार्य बहुत सरल है, व स्वयं व्याख्या करने वाला है. आपको *.pando एक्सटेंशन को खोलने के लिए (पांडो आपके ईमेल संलग्नक को इसी नाम से भेजता है) आपके कंप्यूटर पर पांडो संस्थापित (पांडो सिर्फ 3.5 मेबा का डाउनलोड है) होना आवश्यक है अतः आप जिस ईमेल प्राप्त कर्ता को पांडो के जरिए बड़ी फ़ाइल भेज रहे हैं, उसके पास भी पांडो संस्थापित होना …

जब बहे बयार उलटी...

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चलिए, बयार उलटी बहने तो लगी...यूँ तो इस तरह की एकाध घटना पहले भी घट चुकी है, परंतु आज यकायक दो संयोग एक साथ हुए.सुबह-सुबह एक पत्रकार मित्र ने फोन कर बधाई दी कि दिल्ली से निकलने वाले हिन्दी अखबार वीर अर्जुन पर छपा मेरा आलेख उन्हें अच्छा लगा. वीर अर्जुन यहाँ वितरित नहीं होता है, परंतु उन्हें नमून प्रतियां डाक से मिलती हैं. 22 नवम्बर 2006 का अख़बार आज उन्हें मिला था. अख़बार के अंतिम पृष्ठ पर मेरा आलेख छपा था.मैंने उन्हें बताया कि मैंने वीर अर्जुन को कोई आलेख वालेख नहीं भेजा था और हो सकता है कि आलेख किसी ‘दूसरे' रवि का होगा. तब उन्होंने बताया कि यह आलेख माइक्रोसॉफ़्ट के बहुभाषी कुंजीपट के बारे में है.अरे! यह आलेख तो मैंने प्रभासाक्षी के लिए लिखा था व उसे अपने चिट्ठे पर प्रकाशित किया था. हो सकता है कि वीर अर्जुन ने उनमें से किसी एक से लिया हो. बहुत संभावना है कि प्रभासाक्षी से लिया हो, चूंकि अपने यूनिकोडित चिट्ठे को वीर अर्जुन का कोई वीर पढ़ता हो, यह तो मुझे नहीं लगता.दूसरी घटना यह हुई कि मेरे याहू खाते पर नवराही जी का पत्र आया जिसमें उन्होंने नेट पर प्रकाशित रेखा के चित्रों को पंचनाद…

भारत की मुकम्मल तस्वीर...

.मानव विकास सूचकांक: मृतप्राय भारतीय राजनीति की मुकम्मल तस्वीर...द संडे इंडियन के 20 - 26 नवंबर के अंक में अरिंदम चौधरी का संपादकीय पठनीय है. अपने संपादकीय में अरिंदम ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा वर्ष 2006 के लिए जारी मानव विकास सूचकांक में भारत की अत्यंत दयनीय स्थिति का वर्णन किया है. भारत की उन्हीं स्थितियों-परिस्थितियों के बारे में इस चिट्ठे पर तो नियमित, व्यंग्यात्मक चर्चा होती ही रहती है जिसके बारे में अरिंदम ने मानव विकास सूचकांक का हवाला देते हुए किया है.प्रस्तुत है उस संपादकीय के कुछ महत्वपूर्ण अंश:"...यह रिपोर्ट मूलतः औसत आयु, वयस्क साक्षरता दर, प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में पढ़ने वालों की संख्या और सकल घरेलू उत्पाद के संदर्भ में जीवन स्तर को दर्शाती है और संयुक्त राष्ट्र के ज्यादातर सदस्य देशों के बारे में उपलब्ध आँकड़ों पर आधारित होती है. किसी भी फिक्रमंद भारतीय के लिए इस रिपोर्ट पर एक निगाह डालना बहुत पीड़ादायक होगा, क्योंकि एक सरसरी निगाह में भी विश्व में भारत की दर्दनाक स्थिति साफ नजर आती है....""...इस वास्तविकता का आभास हो…

क्या है ये जीरो बेस्ड सिस्टम?

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हमें भी चाहिए जीरो बेस्ड सिस्टम...लालू की रेल देश भर में एक दिसम्बर से जीरो बेस्ड समय सारिणी लागू कर रही है. ये जीरो बेस्ड क्या होता है? दरअसल, भारत की सभी ट्रेनों को शून्य यानी रात के बारह बजे पर प्रारंभ होता मान लिया जाता है और फिर कम्प्यूटर सिमुलेशन के जरिए रेल पटरी की उपलब्धता, स्टेशन पर रुकने का समय, गति, कॉशन आर्डर, इत्यादि को ध्यान में रखते हुए नई समय सारिणी बनाई गई है. यही शून्य आधारित समय सारिणी है. बताते हैं कि इसे लागू करने से ट्रेनों की गति में इजाफ़ा होगा और जो ट्रेन 500 किमी की दूरी 8 से 10 घंटे में तय करती थी अब वह 1 दिसम्बर से 5 से 7 घंटे में तय करेगी.अगर सचमुच ऐसा है तब तो यह जीरो बेस्ड सिस्टम बहुत अच्छा है. भारत में सरकार के हर विभाग में इसे लागू करना चाहिए. हर विभाग की गति इधर बहुत धीमी हो गई है. कोई फ़ाइल, सरकारी नियम के अनुसार 5 से 7 दिन में एक सेक्शन से दूसरे में खिसक जाना चाहिए, पर वह बिना वज़न के एक तो खिसकती ही नहीं और बहुत से कॉशन ऑर्डरों के साथ ले देकर 50 से 70 दिन में खिसक पाती है. जीरो बेस्ड सिस्टम से निश्चित ही इसमें कमी आएगी.भारतीय संसद में भी जीरो बेस्…

जैम - जम के पढ़ो...

जस्ट एनॉदर रीव्यू...
गाहे बगाहे, मैडपंच की याद दिलाती पत्रिका - जैम का मैं नियमित ग्राहक हूं. यह पत्रिका भारतीय डाक विभाग के भरोसे घर पर आती है चूंकि इसके मुरीद रतलाम में और नहीं हैं (यह यहाँ के न्यूज़ स्टैंड पर नहीं मिलती). परंतु सिर्फ आठ रुपल्ली (मैंने इसके बारे में पहले भी लिखा है) में मिलने वाली पत्रिका से पैसे कई गुना वसूल हो जाते हैं. और इसी वजह से बहुत बार डाक विभाग वाले मुझ पर अनुग्रह कर देते हैं - पैसा वसूलने ही नहीं देते.इस बार (15-29 नवंबर 06) का अंक और ज्यादा पैसा वसूलने वाला लगा. पिछला दो अंक तो डाक विभाग में गायब ही हो गया था. पता नहीं क्यों इस बार डाक विभाग वालों ने इस अंक को छोड़ दिया. बहरहाल, उनका बहुत-बहुत धन्यवाद. इस अंक में रोमन हिन्दी में (अक्षय बकाया जी बहुत खुश होंगे) ग़ज़ल नुमा एक कविता छपी है, जो मुझे मेरे कॉलेज जीवन की याद दिला गई. आप भी याद कर सकते हैं-इंजीनियरिंग शायरीमैं स्टूडेंट नंबर 786जब कॉलेज की सलाखों से बाहर देखता हूँदिन हफ़्ते महीनों को सेमेस्टर में बदलते देखता हूँइस कैंटीन से किसी सस्ते ढाबे की खुशबू आती हैये बिल्डिंग मुझे सेंट्रल जेल की याद दिल…

ओशोपुरम रतलाम में?

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महा आनंद के साथ महा निर्वाण...अगर आपको ओशो-नुमा, महा-आनंद के साथ-साथ महा-निर्वाण प्राप्त करना है तो आप आमंत्रित हैं रतलाम. यहाँ एक ऐसा ही स्थल है जहाँ आपके लिए यह सुविधा एक ही स्थल पर, एक साथ उपलब्ध है. मसीही कब्रस्तान के ठीक सामने महाकाल छोलेटिकिया और महाकाल पानी पताशे!सचमुच, नायाब जोड़ है कि नहीं?..

मंड्रिवा लिनक्स 2007 - बढ़िया, बहुभाषी, लिनक्स

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मंड्रिवा लिनक्स 2007 : बहुभाषी लिनक्स हेतु एक शानदार विकल्प.मंड्रिवा लिनक्स 2007 में 65 से अधिक भाषाओं का समर्थन है. हिन्दी, गुजराती, पंजाबी, तमिल इत्यादि समेत कई अन्य भारतीय भाषाओं का भी इसमें समर्थन है. मंड्रिवा संस्थापक का हिन्दी अनुवाद धनञ्जय शर्मा का है. मंड्रिवा को अपने कम्प्यूटर पर हिन्दी में संस्थापित करने के लिए निम्न, आसान चरण अपनाएँ-मंड्रिवा लिनक्स 2007 संस्थापना के सबसे पहले चरण में भाषा चयन संवाद में जाने के लिए (जैसा कि नीचे दिए गए चित्र में दिया गया है) F2 कुंजी को दबाएँ. अगले स्क्रीन पर आपको मंड्रिवा 2007 में उपलब्ध समर्थित भाषाओं की सूची दिखाई देगी. उस भाषा को चुनें जिसे आप डिफ़ॉल्ट अंग्रेज़ी के अतिरिक्त संस्थापित करना चाहते हैं. यदि आप एक से अधिक भाषा संस्थापित करना चाहते हैं तो Multi Languages टैब पर क्लिक करें. फिर उसमें उपलब्घ जितनी भाषाओं को संस्थापित करना चाहते हैं, उसे चुनें. ..
परंतु यह ध्यान रखें कि कुंजीपट भाषा खाका को अंग्रेज़ी में ही रखें, चूंकि टर्मिनल पर आपको हिन्दी में कमांड देने की सुविधा अभी नहीं है, और हो सकता है कि संस्थापना के दौरान कमांड देने क…

कितना खोखला है आदमी अंदर से...

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आदमी आतंकित है बंदर सेदिल्ली में बंदर का आतंक इतना ज्यादा हो गया कि एक राष्ट्रीय दैनिक के संपादकीय पृष्ठों में इस आतंक को जगह मिल गई. लगता है कि संपादक का व्यक्तिगत आतंक का अनुभव रहा होगा. कोई बंदर उनके दफ़्तर में घुस आया होगा और बोला होगा कि अरे! संपादक, तुम्हारे बंधु-बांधवों ने हमारे रहने के ठौर ठिकाने - जंगलों को काट लिया है और उस पर यह दफ़्तर बना दिया है तो अब हम कहाँ रहने जाएँ. दफ़्तर खाली करो. और यह कह कर बत्तीसी निकाल कर चिढ़ाया होगा. ऐसे में आतंक का संपादकीय निकलना ही है. और इससे पहले कि बंदर मुझे आकर आतंकित करे, बंदर के आतंक को समर्पित है यह व्यंज़ल -व्यंज़ल*****आदमी आतंकित है बंदर सेकितना कमजोर है अंदर से
वो गए जमाने की बातें थींअब सब मिलता है नंबर से
प्यार की परिभाषाएं बहुत हैंसोच मिलता नहीं चंदर से
कुछ नहीं होगा यकीन करोजिंदा है अब तक लंगर से
कम या ज्यादा का है फर्क?पराजय तो हुआ है अंतर से
रवि मानता है कि व्यवस्थाअनुकूल हो जाता है जंतर से*****चंदर = धर्मवीर भारती के उपन्यास ‘गुनाहों का देवता' का एक पात्रजंतर = रिश्वत..
सप्ताह के कुछ कार्टून :-









इंडीब्लॉगीज़ 2006 पुरस्कारों का आगाज़...

इंडीब्लॉगीज़ चिट्ठा पुरस्कारों 2006 के लिए आपने अपनी कमर कस ली है कि नहीं...दोस्तों, प्रतिष्ठित चिट्ठा पुरस्कार इंडीब्लॉगीज़ 2006 के लिए सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है. आप बहुत से मामलों में मदद कर सकते हैं, और इस पुरस्कार से सम्बद्ध हो सकते हैं, जैसे- आप अपने आप को निर्णायक के रूप में पंजीकृत कर सकते हैं, कोई पुरस्कार प्रायोजित कर सकते हैं, या फिर कोई चिट्ठा ही नामांकित कर सकते हैं. आप यह भी सुझा सकते हैं कि इस वर्ष किन किन वर्गों में पुरस्कार होने चाहिएँ और किनमें नहीं!इंडीब्लॉगीज़ पुरस्कार की प्रतिष्ठा इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि पिछले वर्ष माइक्रोसॉफ़्ट ने इंडिक-ब्लॉगर पुरस्कार बांटे. इनमें हिन्दी पुरस्कारों में ही बड़ी भ्रांतियाँ रहीं, और आमतौर पर यह माना गया कि पुरस्कार देने में कुछ अहम बातों का ध्यान नहीं रखा गया. पुरस्कार के साथ दिए जा रहे गुडीज़ भी माइक्रोसॉफ़्ट के आकार और इंडीब्लॉगीज़ के आकार के अनुरूप सम्मानजनक नहीं थे.और, आपको विश्वास हो या न हो, इनाम मिलना तो दूर की बात, आज तक माइक्रोसॉफ़्ट की तरफ से किसी तरह की आधिकारिक सूचना इनके विजेताओं को नहीं मिली है. जबकि माइक्रोसॉफ़्…

आदम और हव्वा की सामयिक टिप्पणियाँ...

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सप्ताह के कार्टून...



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आइए चिट्ठों में कुछ व्यावसायिकता की बातें करें...

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. हर चिट्ठाकार व्यावसायिक है...चिट्ठाकारिता पर व्यावसायिकता की बातें होने लगे तो मेरे कान खड़े होना स्वाभाविक है. और इससे पहले कि देबाशीष की लिखी रीव्यू-मी की समीक्षा मैं पूरा पढ़ पाता, मैंने अपने आप को रीव्यू-मी की साइट पर पंजीकृत पाया.रीव्यू-मी पर पंजीकरण का सारा सिलसिला अत्यंत आसान है. बस अपना नाम पता और अपने चिट्ठे का नाम भरें, वैध ई-मेल भरें और बस हो गया. हाँ, आपको यहां पंजीकृत होने के लिए, पहली और अंतिम आवश्यकता, अपने जीवन के कम से कम 14 वसंत देख चुके होने चाहिएँ.पंजीकरण के बाद बारी आती है अपने ब्लॉग को रीव्यू-मी पर समीक्षा लिखने हेतु जमा करने व उसे स्वीकृत करवाने की. आपके ब्लॉग को स्वीकृत करने के लिए रीव्यू-मी की कुछ शर्तें हैं. मैंने अपना हिन्दी चिट्ठा जमा किया तो पता चला कि यह तो पहले ही स्वीकृत है! फिर अंग्रेज़ी चिट्ठे को जमा करना चाहा तो पता चला कि यह भी पहले से ही स्वीकृत है! मेरे दो-दो चिट्ठों को रीव्यू-मी के लिए समीक्षा लिखने लायक पहले से ही मान लेने के पीछे क्या राज है यह सही-सही तो नहीं पता, परंतु लगता है कि इसमें पहले से लगे गूगल एडसेंस का बड़ा योगदान है. जो हो, मुझे …

मुझे क्षमा कीजिए... ओह, नहीं, परम क्षमा कीजिए...

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ब्लॉगर की परम क्षमा?
ब्लॉगर की लोकप्रियता के कारण और इसके विशाल उपयोक्ता, डाटाबेस और स्पैमरों की मार के चलते यह हमेशा ही भार से दबा चलता है. इसी वजह से इसमें हमेशा कुछ न कुछ तकनीकी समस्याएँ होते रहती हैं जिससे औसतन, ब्लॉगर दिन में दो बार डाउन होता ही है.पिछले दिनों भी बहुत समस्याएँ हुईं. ऐसे में सभी ब्लॉगर उपयोक्ताओं को ब्लॉगर स्टेटस की ताजा जानकारी रखना उचित होगा. अपने न्यूज रीडर पर ब्लॉगर स्टेटस फ़ीड का ग्राहक बनना ज्यादा उचित होगा. फ़ीड का यूआरएल यह है-http://blogger-status.blogspot.com/atom.xmlब्लॉगर भी शराफ़त दिखाता है. जब भी समस्या होती है, अपने उपयोक्ताओं से क्षमा मांगता है. जब ज्यादा समस्या होती है तो ज्यादा क्षमा मांगता है. और जब परम (सुपर) समस्या होती है तो?वह परम (सुपर) क्षमा मांगता है!
अद्यतन: ब्लॉगर की तरफ से ब्लॉगर बज़ में भी क्षमा प्रार्थना की गई है, और विस्तार से पिछले सप्ताह की लगातार हो रही समस्या के बारे में बताया गया है. यह भी बताया गया है कि ब्लॉगर के सर्विस इंजीनियर, विश्वास कीजिए, ब्लॉगरों से ज्यादा परेशान रहे!हाँ, सुकून की खबर यह है कि अब ब्लॉगर बीटा इस्तेमाल क…

इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए

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इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए - गौरवशाली 150 वां अंक
विज्ञान और सूचना तकनीक का ज्ञान बांटने वाली पत्रिका - ‘इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए' भोपाल (मध्यप्रदेश) से पिछले 19 वर्षों से लगातार प्रकाशित हो रही है. 7 नवंबर को इसके 150 वें अंक के लोकार्पण के अवसर पर मेरा भी एक प्रस्तुतिकरण था. विषय था - ‘हिन्दी कम्प्यूटिंग - भूत, वर्तमान और भविष्य'. रवीन्द्र भवन के खचाखच भरे हाल में जब हिन्दी की गाथा सुनाई गई, तो सुई-टपक सन्नाटा छाया रहा. लोग कम्प्यूटरों का इस्तेमाल करते तो हैं, परंतु कम्प्यूटरों में हिन्दी भी छा चुकी है, यह उन्हें पता ही नहीं है!प्रस्तुतीकरण में विंडोज, लिनक्स तथा गूगल (खोज व मेल) के साथ साथ हिन्दी चिट्ठा जगत के कुछ स्क्रीनशॉट दिखाए गए तो सभागार प्रफुल्लित हो उठा. और देर तक तालियाँ बजती रहीं.‘इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए' पत्रिका का प्रकाशन भोपाल की संस्था आईसेक्ट (आल इंडिया सोसाइटी फ़ॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड कम्प्यूटर टेक्नॉलाज़ी) करती है. आईसेक्ट की परिकल्पना आज से बीस वर्ष पूर्व संतोष चौबे ने की थी. वे अभियांत्रिकी में स्नातक थे और आईएएस के जरिए भारतीय प्रशासनिक सेवा में थे. उन्होंन…

मरफ़ी के नए नए नियम कुछ ऐसे ही तो बनते हैं...

मरफ़ी के नए नियमों का जन्म...पिछले सप्ताह एक कार्यशाला के सिलसिले में मैं प्रवास पर था. सोचा था कि समय चुराकर कुछ कार्यों तो इस बीच निपटा ही लिया जाएगा - मसलन साप्ताहिक, सोमवारी चिट्ठाचर्चा लेखन - चूंकि अब जालस्थल पर बहुत से औजार उपलब्ध हैं जिनसे ऐसे कम्प्यूटरों पर भी हिन्दी में काम किया जा सकता है जिनमें हिन्दी की सुविधा नहीं भी हो. परंतु कार्यक्रम बहुत ही कसा हुआ था, और अंतिम क्षणों में अनूप जी से निवेदन करना पडा.कितना सही है मरफ़ी का यह नियम: जब आप सोचते हैं कि कोई कार्य आप जैसे भी हो कर ही लेंगे, तो किसी न किसी बहाने, हर हाल में वह कार्य नहीं ही हो पाता है!कार्यशाला के आयोजकों ने हमें इंटरनेशनल हॉस्टल पर ठहराया था, जहाँ सुविधाएँ अंतर्राष्ट्रीय स्तर की थीं. इसका स्नानागार ही मेरे मकान के लिविंग रूम जितना बड़ा था, जिसका फर्श इटालियन मार्बल का था, और डिजाइनर शॉवर लगा हुआ था - यानी सब कुछ भव्य, क्लास था.भले ही मैं अपने घर में पत्नी द्वारा स्नान के लिए स्नानागार में अकसर धकिया कर भेजा जाता हूँ, परंतु इस भव्य स्नानागार को देखते ही लगा कि अरे! मैं तो सदियों से नहीं नहाया हूँ, और रात्रि क…

अपने चिट्ठे पर पुस्तचिह्नक कैसे लगाएँ?

अपने चिट्ठे पर पुस्तचिह्नक लगाएँ देबाशीष से उनके इस पोस्ट पर पुस्तचिह्नकों की सुंदर सी लड़ी के बारे में पूछा तो पता चला कि यह कार्य वर्डप्रेस के एक प्लगइन के जरिए उन्होंने किया है. ब्लॉगर के लिए प्लगइन की आवश्यकता तो नहीं है, हाँ, अगर आप गूगल पर खोजें तो आपको पता चलेगा कि पुस्तचिह्नकों की लड़ियों के लिए ब्लॉगर टैम्प्लेट डालने हेतु बहुत से जाल स्थलों पर ढेरों तैयार स्क्रिप्ट तथा कोड उपलब्ध तो हैं ही, आपके मनपसंद पुस्तचिह्नकों की लड़ियों के लिए स्वचालित रूप से स्क्रिप्ट तैयार करने की बहुत सी साइटें भी हैं. अगर आप इस चिट्ठे पर तथा रचनाकार पर लगे पुस्तचिह्नकों का जैसा का तैसा इस्तेमाल करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए कोड को नकल कर अपने ब्लॉगर टैम्प्लेट में चिपकाएँ. अब सवाल है किस स्थान पर. पुस्तचिह्नकों का इस्तेमाल चिट्ठा प्रविष्टि या संपूर्ण चिट्ठा के लिए किया जा सकता है. यह कोड चिट्ठा प्रविष्टि के लिए है. अतः बेहतर होगा कि इसे चिट्ठा प्रविष्टि के अंत में जहाँ टिप्पणियां खत्म होती हैं, वहां इसे चिपकाएं (वैसे आप चिट्ठे के आरंभ में भी, शीर्षक के ठीक बाद इसे चिपका सकते हैं, या बाजू पट्टी में…

सॉफ़्टवेयर इंजीनियर जगदीप डांगी से एक खास साक्षात्कार

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ग्रामीण परिवेश में कार्यरत हिन्दी भाषा के लिए समर्पित सॉफ़्टवेयर इंजीनियर जगदीप डांगी का एक खास साक्षात्कार(जगदीप डांगी मध्यप्रदेश के एक छोटे से कस्बे गंजबासौदा में रहकर हिन्दी सॉफ़्टवेयर विकास में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं. अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें) 1) क्या आप पाठकों को अपने बारे में कुछ बता सकते हैं? ग्रामीण पृष्ठभूमि से होते हुए भी कम्प्यूटर के प्रति आपके अनुराग और उत्साह के पीछे कौन से कारण रहे?मैं म.प्र. के विदिशा जिला के एक छोटे से शहर गंजबासौदा का निवासी हूँ। पांच भाइयों में मैं सबसे छोटा व अपने माता-पिता का सबसे लाड़ला बेटा हूँ। मैंने सन् 2001 में एस.ए.टी.आई. विदिशा से बी.ई. स्नातक सी.एस.ई. शाखा के तहत उत्तीर्ण की। मेरी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा हिंदी माध्यम से हुई। हायर सैकेण्डरी शिक्षा गणित-विज्ञान विषयों के साथ की और प्रथम श्रेणी में 84 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की और जिला प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान व म.प्र. प्रावीण्य सूची में तीसवाँ स्थान प्राप्त किया। इसके उपरान्त घर पर ही पी.ई.टी. परीक्षा की तैयारी की और इसे उत्तीर्ण किया जिससे मेरा बी.ई., सी.एस.ई. शाखा के तहत …

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