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नया साल नया संकल्प

नए साल के नए संकल्प :)

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आज सुबह-सुबह एक मित्र ने दुर्ग से फ़ोन पर बधाईयाँ देते हुए कहा कि तुम्हारा व्यंग्य लेख- ‘नए साल के नए संकल्प’ बहुत ही बढ़िया है, और पढ़ने में मज़ा आया. उसने आगे यह भी कहा कि मैं भी सोच रहा हूँ कि तुम्हारे बताए रास्ते का कोई संकल्प लूँ ताकि उसे निभाने में आसानी तो रहे ही, मजा भी आए.



मुझे कुछ आश्चर्य हुआ. मैंने उससे पूछा कि वह लेख तुमने कहाँ पढ़ा. मुझे लगा कि वह भी अब इंटरनेट पर सैर करता होगा. परंतु उसने कहा कि यहाँ का एक दैनिक अख़बार निकलता है उसमें तुम्हारा यह आलेख रविरतलामी के नाम से छपा है. मुझे सुखद आश्चर्य हुआ.



दरअसल यह आलेख इंटरनेट पर मेरी व्यक्तिगत साइट पर तथा विश्वजाल की हिन्दी पत्रिकाअभिव्यक्ति पर पिछले साल भर से है. अगर यह आलेख कहीं किसी प्रिंट मीडिया में छपा हुआ होता तो कब का किसी रोड साइड ठेले के समोसे-भजिए में लपेटा जाकर गुम हो चुका होता. परंतु अजर अमर इंटरनेट पर एक बार आपने इसे प्रकाशित कर दिया तो फिर यह भी अजर अमर हो गया. उस अख़बार ने इस लेख को इंटरनेट पर से ही उतारा और छाप दिया. धन्यवाद उस अख़बार को कि कम से कम उसने मेरा नाम भी लेख के साथ दि…

अनुगूंज में लालू की गूंज...

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जय हो श्री 1008 श्री लालू महाराजा की
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लालू भगवान:

पिछले दिनों पटना के बहादुरपुर इलाके में लालू भक्तों द्वारा लालू वंदना पंडाल बनाया गया जिसमें लालू, राबड़ी तथा सोनिया के देवी-देवताओं सरीखी तथा अटल बिहारी और आडवाणी की राक्षसों जैसी मूर्तियाँ बनाई गईं और ‘लालू नाम केवलम्’ के मंत्रों के साथ देवताओं के उत्थान और राक्षसों के विनाश की कामना करते हुए यज्ञ किया गया और आहुतियाँ दी गईं. कार्यक्रम में लोगों की अच्छी-खासी उपस्थिति भी रही. चुनाव जो सर पर हैं, और टिकट पाने के ख्वाहिशमंदों की संख्या भी कम नहीं है. जय हो श्री 1008 श्री लालू महाराजा की. इससे पहले लालू चालीसा की रचना हो चुकी है और उसकी प्रतियाँ भी छप-बंट चुकी हैं. लालू को उनके भक्त कृष्णावतार बताते हुए कई यज्ञ पहले भी कर चुके हैं. पर क्या लालू यह भक्ति उनके कुर्सी पर बने रहते रह पाएगी या फिर उनके सत्ताहीन होने के उपरांत भी जारी रहेगी? यह बात लालू स्वयं ज्यादा जानते होंगे.

लालू भगवान और भगवान विश्वकर्मा:

बारंबार हो रही रेल दुर्घटनाओं को देखते हुए लालू जी अपने अख़बार ‘राजद’ (जो लालू का लालू के लिए लालू के द्वारा है) में फर्माते हैं कि …

द ग्रेट इंडियन ट्रेन जरनी

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भारत में एकशानदाररेल यात्रा


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सिर्फ एक ? शायद नहीं. बल्कि भारत में आपको ऐसी कई शानदार यात्राएँ करने के लिए रोज बरोज मिलेंगी. वृत्तांत यूँ है: इनडिफरेंट, चलताऊ रवैये के कारण भारत की एक प्रमुख रेलगाड़ी ‘सम्पूर्ण क्रांति’ जो दिल्ली से पटना (जो सौभाग्य से रेल मंत्री लालू यादव का शहर भी है) के बीच चलती है, पिछले दिनों बिना राशन पानी के पूरे बीस घंटे लगातार चलती रही और यात्री जिसमें नन्हे मुन्ने बच्चे भी थे, भूखे प्यासे परेशान होते रहे.

सम्पूर्ण क्रांति रेलगाड़ी में सभी श्रेणियों में यात्रियों के खाने पीने की व्यवस्था रेलगाड़ी के भीतर ही रसोई भंडार यान में भंडारित सामग्रियों से की जाती है, चूंकि दिल्ली से पटना की 20 घंटे की यात्रा में रेलगाड़ी बीच में सिर्फ दो स्थानों पर कुछ समय के लिए ही रूकती है. खाने पीने की व्यवस्था के लिए रेलवे द्वारा टिकट के साथ ही अलग से पैसा वसूल लिया जाता है.

कोहरे (?) के कारण पटना से दिल्ली आने वाली सम्पूर्ण क्रांति रेलगाड़ी बहुत अधिक देरी से दिल्ली पहुँची. जब यह दिल्ली पहुँची तो इसके वापस पटना लौटने का समय हो गया था. चूंकि यही रैक वापस पटना जाती है, अत: ताब…

चुनाव साड़ी और मिठाइयाँ

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चुनाव आया मिठाईयों का मौसम लाया

चुनाव का मौसम आया तो लालू यादव को याद आया कि अरे, उन्हें रेल मंत्री बने तो साल भर होने जा रहा है और उन्होंने दलित महिलाओं को अभी तक मिठाई नहीं खिलाई है. अत: वे चले मिठाई खिलाने. जेब से करारे नोटों की गड्डियाँ निकालीं और सौ-सौ रूपए मिठाई खाने के लिए बाँटने लगे. अब निगोड़ा चुनाव का मौसम बीच में टपक पड़ा सो वे क्या करें. लोगों ने बेकार ही इसे चुनाव के साथ जोड़ दिया. या शायद अच्छा ही किया. अब बिहार का हर दलित यह उम्मीद तो कर ही सकता है कि लालू के राज में भले ही उसे कुछ न मिले, पाँच साल में कम से कम एक बार सौ रूपए की मिठाई खाने को तो मिल सकेगी.

लालू भाग्यशाली हैं कि मिठाई खाने के लिए पैसे पाने के होड़ में कोई भगदड़ नहीं मची और कोई मरा नहीं. पिछले लोक सभा चुनाव के दौरान (लालजी टण्डन के जन्मदिवस की खुशी में) महिलाओं को अटल बिहारी बाजपेयी के चुनाव क्षेत्र लखनऊ में साड़ी बाँटी गई थी जिसमें भगदड़ मचने से कई महिलाओं की मौत हो गई थी. पिछले दिनों मेरे शहर में नगर निगम चुनाव हुए और पार्षद पद के कुछ प्रत्याशियों ने वोटरों को जम कर मुफ़्त में दारू पिलाई. अब यह जुदा बात …

भारतीय भाषणबाजियाँ

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भारत और भाषण
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इन्फ़ोसिस के नारायणमूर्ति कहते हैं कि नेताओं को भाषण देने के बजाए काम करना चाहिए. भारत में अब भाषणों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए.

बात वाजिब है. परंतु नेताओं का कोई काम भाषण के बगैर हो सकता है क्या? वे खांसते छींकते भी हैं तो भाषणों में. वे खाते पीते ओढ़ते बिछाते सब काम भाषणों में करते हैं. कोई उद्घाटन होगा, कोई समारोह होगा तो कार्यक्रम का प्रारंभ भाषणों से होगा और अंत भी भाषणों से होगा. संसद के भीतर और बाहर तमाम नेता भाषण देते नजर आते हैं, और उससे ज्यादा इस बात पर चिंतित रहते हैं कि उनकी बकवास को हर कोई ध्यान से सुने. दो रेलगाड़ियाँ आपस में भिड़ती हैं तो मांग की जाती है कि रेल्वे मंत्री वक्तव्य दें. कहीं कोई घोटाला होता है तो विरोधी चिल्लाते हैं कि प्रधानमंत्री वक्तव्य दें. राजनेताओं का तो खाना ही हजम नहीं होता होगा जब तक वे भाषण नहीं देते हों. मुझे तो लगता है कि कोई नेता अपनी प्रेयसी से प्रेम का इजहार भाषणों से ही करता होगा. आज भारत की पूरी सियासत वक्तव्यमय-भाषणमय हो गई है.

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ग़ज़ल
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गुम गया मुल्क भाषणों में
जनता जूझ रही राशनों में

नेताओं की है कोई जरूरत

ये इंडियन क़ानून है !

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बाजी.कॉमः प्रा-जी, ये इंडियन क़ानून है !

बाजी.कॉम के सीईओ अवनीश बजाज को पिछले दिनों नई दिल्ली में गिरफ़्तार कर 6 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. उनका जुर्म? उनका जुर्म ये है कि वे बाजी.कॉम जैसे विश्वस्तर के इंटरनेट आधारित स्वचालित ऑनलाइन खरीद-बिक्री केंद्र सुविधा मुहैया करवाने वाले पोर्टल के भारतीय मूल के सीईओ हैं.

किसी व्यक्ति ने बाजी.कॉम पर एमएमएस आधारित अश्लील सीडी बेचने के लिए रख दी, और उसकी कुछ प्रतियाँ बिक भी गईँ. बाजी.कॉम पर जाहिर है, रजिस्ट्रेशन शर्तों को हामी भरने के उपरांत कोई भी रजिस्टर्ड व्यक्ति उन शर्तों का उल्लंघन करते हुए कुछ भी बेच सकता है, चूंकि लाखों की तादाद में खरीदी बिक्री किए जाने वाले सामानों पर व्यक्तिगत निगाह रखना असंभव तो है ही, बल्कि आज के जमाने में ऐसा करना मूर्खता भी है. यही बाजी.कॉम पर हुआ और जिस व्यक्ति ने अश्लील सीडी बेची, उसे तो खैर पकड़ा ही गया, परंतु बाजी.कॉम के सीईओ को भी भारतीय पुलिस ने पकड़ लिया कि भाई अश्लील सीडी बिकी तो तेरी दुकान से ही है !

यानी बाजी.कॉम को करना यह था कि जो भी वस्तु उस पोर्टल पर खरीदी बिक्री के लिए आए, उसे उसका सीईओ व्…
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हिंदीमेंटाइपकरनामुश्किल? कतईनहीं



क्या आपको पता है कि कम्प्यूटर में काम करने के लिए 12 भारतीय भाषाओं हेतु 126 प्रकार के कुंजी पटल विन्यास उपलब्ध हैं? अकेले हिंदी में
ही दर्जनों कुंजीपटल विन्यास -सुषा से लेकर इनस्क्रिप्ट तक हैं. कम्प्यूटरों के
लिए हिंदी का आज भी कोई मानक कुंजी पटल नहीं है. अब तक तो अंग्रेजी फ़ॉन्ट को हिंदी रूप देकर और उसके आधार पर अपना नया कुंजीपटल विन्यास बनाकर लोगों ने छोटा रास्ता निकाला था जिससे भला होने के बजाए नुकसान ही ज्यादा हुआ. फिर किसी ने अपना माल मुफ़्त उपयोग के लिए भी जारी नहीं किया (इसमें सरकारी एजेंसियाँ भी शामिल हैं, जो जनता के टैक्स का भारी भरकम पैसा भकोस लेती हैं – पर यहाँ बेचारे डेवलपरों को न कोसें, बल्कि योजना बनाने वाले सरकारी बाबुओं को कोसें), भले ही लोग पायरेसी के लिए भी उस उत्पाद (उदा. लीप ऑफ़िस) को न पूछें. वो तो भला हो भारतभाषा जैसी भली
जगह से आए शुषा सीरीज के मुफ़्त फ़ॉन्ट का जिसके दम खम पर
आज हिन्दी की कई साइटें बख़ूबी चल रही हैं.


परंतु यूनिकोड के प्रचलन में आने से हम में से प्रत्येक को अंततः यूनिकोड फ़ॉन्ट का रास्ता पकड़ना ही होगा. इंटरनेट पर …
यिप्पी ! याहू ! हुर्रे ! इंडीब्लॉगीमें माइक्रोसॉफ़्ट पुरस्कार ! !

मुझे माफ कीजिएगा यदि मैं उत्तेजना में आकर ज्यादा ही उछलकूद मचा रहा होऊंगा. परंतु बात ही कुछ ऐसी है. इंडीब्लॉगी 2004 में पुरस्कारों की सूची में कुछ और नाम जुड़ गए हैं, और उनमें है माइक्रोसॉफ़्ट द्वारा भी एक पुरस्कार प्रदाय किए जाने की घोषणा. धन्यवाद माइक्रोसॉफ़्ट तथा धन्यवाद दीपक गुलाटी जिनके प्रयासों से माइक्रोसॉफ़्ट द्वारा पुरस्कार प्रायोजित किया गया. अब कुल मिलाकर आधा दर्जन से ज्यादा पुरस्कार हो गए हैं.

तो दोस्तों अपने नॉमिनेशन्स और अपने ब्लॉगों की धार और पैनी कीजिए और शामिल होइए इंडीब्लॉगी 2004 में. एक अच्छी खबर यह भी है कि नॉमीनेशन की तारीख आगे बढ़ कर 31 दिसम्बर हो चुकी है. अतः बन पड़े तो छूट चुके अपने दोस्तों को भी खबर कर दें. अधिक जानकारी के लिए इंडीब्लॉगी देखें.
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इंडिया क्रम्बलिंग ?

इंडियन एक्सप्रेस में पिछले कुछ दिनों से समाचार सीरीज छप रहा है कि किस प्रकार कर्नाटक की नई सरकार सत्ता में आते ही बैंगलोर के लिए लिए गए पिछली सरकार के निर्णयों, कार्यों और खासकर विकास कार्यों को जानबूझ कर रोक रही है. जिसके कारण बैंगलोर बर्बाद होता जा रहा है. यह सब क्षेत्रीय राजनीति के तहत हो रहा है. प्रदेश तथा देश के विकास कार्यों से राजनीतिज्ञों को कोई लेना देना नहीं है.
यह स्थिति कमोबेश भारत भर में है. दरअसल राजनीतिज्ञों को अपनी और अपनी पार्टी के अलावा अन्य किसी के विकास में कोई दिलचस्पी नहीं है. जो भी कार्य किए जाते हैं वह सत्तारूढ़ पार्टी की भलाई के लिहाज से किए जाते हैं. किसी पार्टी की सरकार अगर कोई काम करती है, तो विरोधी पार्टी को उसमें भ्रष्टाचार नज़र आता है. सरकार बदलते ही उसमें मीन मेख निकाल कर उन कार्यों की धज्जियाँ उड़ाई जाती हैं. नतीजतन भारत देश जहाँ साधनों संसाधनों की कोई कमी नहीं है, जहाँ का तहाँ खड़ा है.
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ग़ज़ल
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ईमान का रास्ता और था
मैं चला वो रास्ता और था

चला तो था दम भर मगर
मंजिल का रास्ता और था

तेरी वफा की है बात नहीं
हमारा ही रास्ता और था

क…

हिन्दी समूह

जालघरकेहिन्दीसमूह


जालघर के समूहों की अपनी दुनिया है. भांति-भांति केलोगों ने भांति-भांति के समूहों का सृजन जालघर में किया हुआ है. यहाँ किसी समूहमें आपको किसी क्लिष्ट विषय पर गहन चर्चा में रत लोग मिलेंगे तो वहीं किसी अन्य समूह में हल्के फुलके हास परिहास की बातें चल रही होंगी. कहीं इतिहास पर शोध की
बातें हो रही होंगी तो कहीं तकनालॉजी पर बहसें हो रही होगीं. और यह भी संभव है कि किन्हीं समूहों में स्तरहीन विषयों पर स्तरहीन चर्चाएँ चल रही हों. फिर भी, जालघर के समूह न केवल व्यक्ति के ज्ञान को परिमार्जित करने का अच्छा खासा कार्य रहे हैं बल्कि विचारों के आदान-प्रदान के लिए विश्व-स्तर पर मौलिक मंच प्रदान कर रहे हैं.
जालघर के समूह दरअसल वैश्विक गोष्ठी स्थल हैं जहाँ आप बेझिझक अपनी बात चार लोगों के बीच कह सकते हैं और चार लोगों की बेबाक बातें भी जान सकते हैं.अपनी बात कहने के लिए या अपने विचारों से मिलते जुलते बातों के बारे में जानने के लिए आप भी जुड़ सकते हैं जालघर के किसी ऐसे समूह से जिसे आप समझते हैं आपकी रुचि का है. और अगर आपको आपकी रुचि से मिलता जुलता कोई समूह नहीं भी मिलता है, तो भी कोई बात …
एक और हिंदी ब्राउज़र
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लगता है सचमुच, प्यारी बहना हिंदी के दिन फिर गए हैं. विश्व का सबसे आधुनिक, सबसे ज्यादा सुरक्षित और सबसे ज्यादा तेज़ी से लोकप्रियता की ओर अग्रसर होता हुआ ब्राउज़र- मोज़िला फ़ायरफ़ाक्स 1.0 हिंदी में जारी किया जा चुका है.
इस मर्तबा भी, संयोग से इसके जारी करने वाले हैं छत्तीसगढ़ (पूर्व मध्यप्रदेश) के भिलाई-दुर्ग के पंकज ताम्रकार. इसके हिंदी अनुवाद में पंकज का सहयोग दिया है आसिफ इकबाल ने.

स्क्रीनशॉट देखें

इसी के साथ ही ई-मेल क्लाएंट मोजिला थंडरबर्ड (थंडरबर्ड नाम का तूफ़ानी पंछी अनुवाद शायद ठीक नहीं है पंकज भाई) भी हिंदी में जारी किया गया है.

पंकज को उनके इस गंभीर प्रयास के लिए हार्दिक बधाई. हिंदी अनुवाद में मात्रा की कुछ ग़लतियाँ तो हैं हीं जिन्हें फिर भी छोड़ा जा सकता है, परंतु अनुवादों में कई मेन्यू शब्दों को माइक्रोसोफ्ट तथा लिनक्स हिंदी से बिलकुल ही अलग, प्रायः सीधा अनुवाद दे दिया गया है जिससे इसके उपयोग में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है. उदाहरण के लिए, बुकमार्क को माइक्रोसोफ्ट तथा लिनक्स में पसंद तथा पसंदीदा शब्द दिया गया है, परंतु थंडरबर्ड में स्मरण संकेत. उम…

कतरनें

कतरी हुई कतरनें
इस ब्लॉग में उपयोग की गई कतरनें प्रायः लोगों को रुचिकर प्रतीत होती हैं. हालाँकि इन कतरनों का प्रयोग संदर्भ वश किया जाता है, परंतु कभी-कभी कतरनों के मूल अवयव ज्यादा ही रोचक होते हैं. कुछ पाठकों ने कतरनों को अधिक स्पष्ट बड़े और पढ़े जा सकने लायक आकार में शामिल करने की मांग की है. बड़े आकारों के चित्रों को लिंक के रूप में देने की कोशिश रहेगी ताकि वेब पृष्ठ अनावश्यक रूप से भारी न हो जाए.

मैंने फ्लिकर, हैलो, पिकासा इत्यादि का उपयोग किया है तथा ये साइटें पता नहीं क्यों चित्रों को फिर से कॉम्प्रेस कर देती हैं जिससे कि वे स्पष्ट नहीं रह पाते. जो जोकर जैसा मेरा चित्र बाजू में दिख रहा है, वह फ्लिकर का किया धरा है. लोगों का कहना है कि मैं इस चित्र में जैसा दिखता हूँ उससे कहीं ज्यादा बेहतर दिखता हूँ :)

बड़े आकारों के सुस्पष्ट चित्रों को मुफ़्त होस्ट करने वाली अन्य उचित साइटों के बारे में अगर आपको पता हो तो कृपया मुझे खबर करें.

हिंदी ब्राउज़र

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गाँव-देहातसेआयाहिंदीमेंब्राउज़रःडांगीसॉफ़्टआई-ब्राउज़र++
कौन कहता है कि आसमान में सूराख़ नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों. मध्य प्रदेश के एक छोटे से कस्बे, गंज बसौदा के रहने वाले जगदीप सिंग डांगी ने कम्प्यूटर जगत के आसमान पर वो पत्थर उछाला है, जिसके फलस्वरूप प्रकाश की जो किरणें फूट रही हैं, वे भारतीय कम्प्यूटर उपयोक्तताओं के कार्य के माहौल को आने वाले दिनों में न सिर्फ खासा प्रभावित करेंगी, आम ग्रामीण जन तक कम्प्यूटरों तथा जालघर की पहुँच को अति आसान भी बनाएँगी. और ग़ज़ब बात यह है कि एक साधारण से किसान के बेटे जगदीप भले ही थोड़े से फ़िजीकली चैलेन्ज्ड हैं, परन्तु मानसिक रूप से बिलकुल नहीं. उनके सभी सहपाठी इंजीनियर बंधु तक यह स्वीकार करते हैं कि जहाँ वे विभिन्न एमएनसीज् में अपना भविष्य बनाने में लगे हैं, निपट देहात में जन्मे-जमे जगदीप निःस्वार्थ भाव से जन-कल्याण के सॉफ़्टवेयर विकसित करने में लगे हैं. उनका सपना है हिंदी में आपरेटिंग सिस्टम तैयार करने का.जगदीप ने गंज बसौदा जैसे छोटे से जगह में रहते हुए ही तीन वर्षों के अथक परिश्रम से हिंदी भाषा इंटरफेस युक्त एक वेब ब्राउज़र तथ…

करोड़ पति नेता

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करोड़ पतिएमपी - एमएलए

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महाराष्ट्र के पिछले चुनाव में एक तिहाई एमएलए ऐसे विजयी हुए हैं जो करोड़ पति हैं. करोड़ो रुपयों की संपत्ति जो उन्होंने मजबूरन घोषित की है वह चुनाव आयोग की अनिवार्यता के कारण घोषित की है. भारत के मौजूदा एमपी के बारे में इंडिया टुडे, आउटलुक और इंडियन एक्सप्रेस जैसे समाचार पत्र पत्रिकाओं ने पहले ही प्रकाशित किया है कि इनमें से सौ से ऊपर ऐसे हैं जिनके ऊपर किसी न किसी वजह से मुक़दमे चल रहे हैं और कइयों पर तो हत्या जैसे गंभीर अपराधिक प्रकरण चल रहे हैं. वैसे भी अब एक चुनाव में लड़ने के लिए जहाँ लाखों रुपयों की आवश्यकता होती है, एक आम आदमी के किसी चुनाव में खड़ा होकर उसका जीत पाना अब असंभव हो गया है. ऐसी स्थिति में अगर हमारे एमपी और एमएलए करोड़ पति या बाहुबली नहीं होंगे तो और क्या होंगे. आम आदमी की स्थिति तो एक सच्चे वोटर की भी नहीं रह गई है. जब वह वोट देने जाता है तो पता चलता है कि उसका वोट तो कोई लठैत पहले ही डाल चुका है, या उस आम आदमी का वोट एक एद्धा दारू की बोतल में पहले ही बिक चुका है या फिर उस आम आदमी का वोट जाति, धर्म, क्षेत्रवाद ने पहले ही खरीद लिया है.
चल…

रेडहैट लिनक्स हिंदी में

रेडहैटलिनक्सहिंदीसमेत 5 भारतीय भाषाओं में जारी
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रेडहैट का फेदोरा कोर 3, हिंदी समेत 5 भारतीय भाषाओं, यथा- बंगाली, पंजाबी, गुजराती तथा तमिल में जारी किया जा चुका है तथा यह संपूर्ण सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम अपने साथ ढेरों अन्य अनुप्रयोगों सहित मुफ़्त डाउनलोड हेतु अब यहाँ सेः http://fedora.redhat.com/download/mirrors.html उपलब्ध है. फेदोरा कोर 3 में प्रारंभिक संस्थापना स्क्रीन से लेकर प्रायः सभी प्रकार के अनुप्रयोगों तक पूर्णतः आपको भारतीय भाषा का वातावरण प्राप्त होगा. इसमें केडीई 3.2 , एक्सएफसीई 4.2 के लगभग सभी मॉड्यूल्स तथा साथ ही गनोम 2.8 सहित कुछ अन्य अनुप्रयोग जैसे कि गेम इंसटैंट मैसेंजर के प्रायः अधिकतर हिंदी अनुवादों का कार्य हमारी टीम ने किया है. यूँ इससे पूर्व रंगोली नाम से भारतीय भाषाओं का एक जीवंत लिनक्स सीडी का बीटा संस्करण भी जारी किया जा चुका है जिसमें ऊपर दी गई भाषाओं के अलावा मराठी, कन्नड़, मलयालम इत्यादि भाषाओं के आंशिक समर्थन भी हैं. उड़िया तथा तेलुगु भाषा में भी कार्य जोरों से जारी है. शायद लिनक्स में भारतीय भाषाओं की सक्रियता को देखते हुए माइक्रोसोफ्ट की भी नींद उड़ी ह…

उम्र का तक़ाज़ा

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ये तो उम्र कातक़ाज़ा है भाई…



बचपन में मैं इंद्रजाल कॉमिक्स पढ़ने में मज़ा लेता था. जैसे ही किशोरावस्था में कदम पड़े, रानू, गुलशन नंदा और मिल्ज़ बून की रोमांटिक किताबें मज़ा देने लगीं. पता नहीं कब इयॉन फ्लेमिंग, जेम्स हेडली चेईज़, इरविंग वैलेस (सेकेण्ड वूमेन तो अभी भी याद है), फ्रेडरिक फोरसाइथ और अपने शुद्ध देसी सुरेन्द्र मोहन पाठक तक कैसे पहुँच गया. इस बीच हंस, सारिका, प्रेमचंद, हरिशंकर परसाई, कुरआन शरीफ़, बाइबल, पुराण और पता नहीं क्या क्या बाँच डाले. और, प्रायः हर अलग अलग समय में इन चीज़ों को पढ़ने में बड़ा मज़ा आया. पर अब न कॉमिक्स, न रोमांटिक उपन्यास और न चेइज़ पढ़ा जाता है. अब तो कोई आई टी तकनॉलाज़ी से संबंधित कोई चीज आकृष्ट करती है या फ़िर ऊपर दी गई जैसी ग़ज़लें (माणिक वर्मा की लिखी ग़ज़ल (कविता?) जो नई दुनिया के दीपावली विशेषांक 2004 में छपी है.)

ग़ज़ल
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माणिक वर्मा की ग़ज़लः
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जो सच बोले उसे सूली चढ़ा दो
ये तख्ती हर कचहरी में लगा दो

हमें दुनिया का नक्शा मत बताओ
हमारा घर कहाँ है ये बता दो

करो तुम कत्ल जब भी आस्था का
बजाकर शंख चीखों को दबा दो

यक़ीनन कल जलेगा घर में चूल…
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ये भारतीय क़ानून हैं....

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क़ानून के किस्से बड़े निराले हैं. कहा जाता है कि क़ानून अंधा होता है. यह भी कहा जाता है कि बड़े और पैसे वालों के लिए क़ानून नाम की कोई चीज़ नहीं होती. कुछ लोगों के अपने क़ानून होते हैं. कहीं क़ानून तो होता है, परंतु क़ानून के पालन हार ही उसे तोड़ते फ़िरते हैं. आज जीवन के हर क्षेत्र के लिए इतने क़ायदे क़ानून हो गए हैं कि हममें से हर कोई हर पग पर क़ानून तोड़ता चलता है. जब कोई नेता शासक बनता है तो विरोधियों को अंदर कर देता है और कहता है क़ानून अपना काम करेगा. जब वह विरोधी पार्टी में होता है तो चिल्लाता है कि क़ानून को शासकों ने बंधक बना लिया है और मनमाना क़ानून लगा रहे हैं. बहुत से क़ानून हैं जिसे हम आप रोज तोड़ते हैं पर खुदा का शुक्र है कि हम में से अधिकतर नेता नहीं हैं. अन्यथा या तो क़ानून के काम के कारण या तो अंदर होते या क़ानून को काम देने के नाते अपने विरोधियों को अंदर कर रहे होते.

बहरहाल, चर्चा भारत के एक विचित्र क़ानून की हो रही है. इसके लिए एक घटना सुनिए.
एक भारतीय व्यक्ति अपने विदेशी मेहमान की मेहमान नवाज़ी के लिए फ़ाइव स्टार होटल ले गया. ज़ाह…

इंडीब्लॉग अवॉर्ड

इंडीब्लॉग अवॉर्ड 2004
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भारतीय तथा भारत से जुड़े अंग्रेजी भाषा में तथा भारतीय भाषाओं में लिखे जाने वाले ब्लॉगों के लिए इस साल के इंडीब्लॉग अवॉर्ड के लिए तैयारियाँ ज़ोरों से चल रही हैं. (धन्यवाद इंडीब्लॉगी,आपके तारीफ़े काबिल प्रयास के लिए :). तो दोस्तों आप भी कमर कस कर मैदान में कूद पड़िए. आखिर आपके ब्लॉग में भी तो कोई न कोई अवॉर्ड पाने की खासियत मौजूद है ही और वैसे भी आपका ब्लॉग किसी से कम है क्या? ऊपर से इंडीब्लॉग में दर्जन भर से ज्यादा वर्ग/श्रेणियाँ हैं जिन में अवॉर्ड दिया जाना है. अतः आपके ब्लॉग को कोई न कोई अवॉर्ड मिलने की पूरी संभावना है. न भी मिले तो क्या, ओलंपिक की तरह इसमें भी शामिल होना ज्यादा महत्वपूर्ण है, बजाय इनाम प्राप्त करने के.
अवॉर्ड में शामिल होने के अलावा आप यह भी कर सकते हैं:

** आप चाहें तो अवॉर्ड के लिए जूरी मेम्बर बन सकते हैं
** आप चाहें तो कोई पुरस्कार प्रायोजित कर सकते हैं
** आप चाहें तो अपना स्वयं का या किसी अन्य ब्लॉग के लिए केनवासिंग कर सकते हैं – इसके लिए जूरी सदस्यों को ई-मेल करना होगा.
** आप अन्य इंडियन ब्लॉगर्स को इसके बारे में बता सकते हैं

अधिक जानक…

भारत में सब बरोबर !

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भारत में अमीर-ग़रीब सब बराबर



विश्व प्रसिद्ध कार्टूनकार आर. के. लक्ष्मण का एक कार्टून 22 नवंबर के अंक में छपा है.

वे अपने पैने व्यंग्य की कूची चलाते हुए स्पष्ट करते हैं कि भारत में क्या अमीर क्या ग़रीब सब

बराबर हैं. सभी भुगतने के लिए अभिशप्त हैं. ग़रीब रोटी कपड़ा मकान की समस्या से त्रस्त

है तो अमीर पावर कट, लोड शेडिंग, गड्ढे और धूल युक्त सड़कों, ट्रैफिक जाम, पानी की

कमी, स्कैम इत्यादि समस्याओं से त्रस्त है.

समाजवादी / साम्यवादी लोगों को खुश होना चाहिए कि कम से कम भुगतने के मामले में तो

भारत में सभी बराबर हैं. अमीरी-ग़रीबी का फ़र्क़ वास्तव में यहाँ मिट गया है.

पर, अगर कोई फ़र्क़ कहीं नज़र आता है तो वह राजा और रंक (बक़ौल अमिताभ बच्चन) के

बीच है. और यह फ़र्क़ दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है.
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ग़ज़ल
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आदमी है आदमी के पीछे बराबर
सोचता नहीं होना है हिसाब बराबर

चाँदी का चम्मच ले के आया पर
चार दिन की जिंदगी सबकी बराबर

रत्न जटित ताबूत है तो क्या हुआ
भीतर कीड़े और दुर्गंध सभी बराबर

सच है कि अपने आवरणों के अंदर
कहीं कोई फ़र्क़ नहीं है बाल बराबर

काल को तुम भूल गए रवि शायद
कल दुर्ग था …

भारत में भगदड़...

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या भगदड़ में भारत?



नई दिल्ली के रेल्वे स्टेशन पर पिछले दिनों जन साधारण एक्सप्रेस ट्रेन में चढ़ने उतरने के

दौरान मची भगदड़ में आधा दर्जन व्यक्तियों की मौत हो गई तथा कई गंभीर रूप से घायल हो

गए. जाहिर है, ऐसे भगदड़ में मरने तथा घायल होने वालों में अधिकतर महिलाएँ एवं बच्चे

ही थे.
भारत में भगदड़ कोई नई बात नहीं है. हर जगह भगदड़ मची रहती है. चाहे वह रेल्वे स्टेशन

हो, हवाई अड्डा हो या फिर मरीन ड्राइव. जहाँ भीड़ है, और सुविधाओं का अभाव हो वहाँ

भगदड़ तो मचेगी ही.
फिर नई दिल्ली, जो भारत देश की राजधानी है, वहाँ के रेल्वे स्टेशन पर भगदड़ मचना इस

बात की गवाही देता है कि यहाँ की जनता किस हाल में गुज़र बसर करने को अभिशप्त है. नई

दिल्ली रेल्वे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर आपको कहीं भी सूचना पट्ट देखने को नहीं मिलेंगी जो

बताएँगी कि कौन सी ट्रेन किस समय पर और कब उस पर आएगी और जाएगी. सुविधाओं का

घोर अभाव है. भीड़ नियंत्रित करने का कोई प्लान ही नहीं है. ऐसे में भगदड़ तो मचना ही

है.
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ग़ज़ल
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क्या मिलना है भगदड़ में
जीना मरना है भगदड़ में

मित्रों ने हैं कुचले हमको
अच्छा बहाना है भगदड़ में

लूटो या खुद लु…

माइ हार्ट इज़ हाइजैक्ड...

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एअरपोर्ट का अपहरण
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बैंगलोर में एक अंतर्राष्ट्रीय एअरपोर्ट बनाए जाने की योजना पिछले दस साल (जी हाँ,

पिछले दस साल !) से चल रही है, और अभी भी मामला विभिन्न सरकारों और

सरकारी विभागों की स्वीकृति की प्रतीक्षा में उलझा पड़ा है. तारीफ़ की बात तो यह है कि

कर्नाटक की पिछली काँग्रेस सरकार ने इस परियोजना को स्वीकृति दे दी थी, परंतु नई

सरकार जो काँग्रेस की ही है (क्या बात करते हैं, मंत्री तो बदल गए हैं न भाई), इस

परियोजना की स्वीकृति पर पुनर्विचार कर रही है !
इस परियोजना की शीघ्र स्वीकृति के लिए इन्फ़ोसिस के नारायण मूर्ति भी लगे रहे हैं.

उनके प्रयासों से इसमें थोड़ी गति भी आई, परंतु और भी कई अन्य परियोजनाओं की

तरह यह भी हाईजैक हो गया राजनीतिबाजों, अफसरशाहों और लालफ़ीताशाहों के द्वारा.

परियोजनाओं पर विचार और पुनर्विचार करते-करते ये अपहृत हो जाते हैं और भारत का

इन्फ्रास्ट्रक्चर जहाँ का तहाँ पड़ा रह जाता है- ठस. भूले भटके कभी कोई परियोजना पूरी

होती भी है तो वह भ्रष्टाचार के चलते लड़खड़ाती / दम तोड़ती ही चलती है...

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ग़ज़ल
**+**
मूल्यों में गंभीर क्षरण हो गया
मुल्क का भी अपहरण हो गया

भ्र…

इबादत कीजिए

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आइए, थोड़ी पूजा-अर्चना करें
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पहले मिग 21 और अब मिराज विमानों के दुर्घटना ग्रस्त होने की अधिक संख्या को देखते

हुए एअरफोर्स द्वारा पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठान करवाया जा रहा है, ताकि ऐसी वारदातों

को, प्रभु की कृपा से रोका जा सके.

वाह भाई क्या बात है. फ़्लाइट इंजीनियर प्रभु से प्रार्थना करता होगा कि हे प्रभु, आज मैंने

अपनी व्यस्तता के कारण मिराज का आवश्यक मेंटेनेंस नहीं किया है, अतः कृपा करना,

आज दुर्घटना नहीं होने देना. खरीदी विभाग का चीफ़ प्रार्थना करता होगा कि हे दयालु प्रभु

तूने अब तक विभिन्न खरीदी में कमीशन पाने में साथ दिया है, अब डुप्लीकेट पार्ट्स के साथ

विमानों को बढ़िया उड़ने में मदद करना.

मैं अपना एक अनुभव बताता हूँ. कुछ समय पूर्व की बात है जब 11 किलो-वोल्ट के कुछ

सर्किट ब्रेकर्स के कॉन्टेक्ट्स बुशिंग के साथ ही ज्यादा संख्या में, अकारण ही जलने लगे थे.

सब तरह की जाँच के बाद भी कुछ पता नहीं चल पा रहा था कि कॉन्टेक्ट्स क्यों भीषण गर्म

होकर जलने लगे हैं. बारीकी से छानबीन की गई तो पाया गया कि एक खास बैच के

कॉन्टेक्ट्स में ये समस्या है. तह में उतरा गया तो पाया गया कि लोहे के पार…

मेड फॉर इंडिया

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मेड फॉर इंडिया, रीयली?
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नोकिया ने अपने आर एंड डी टीम में अरबों डालर निवेश कर भारतीय परिवेश के लिए

अलग प्रकार का सेलफ़ोन ईज़ाद किया है. यह सेलफ़ोन टॉर्च लाइट युक्त है ताकि भारतीय

घनघोर अंधियारा में खासा काम आ सके. इसमें धूल सुरक्षा भी है ताकि भारत के सर्वत्र

अत्यंत धूल भरे इलाकों में यह सुरक्षित रह कर काम कर सके. इसमें ना फिसल ग्रिप

भी है, ताकि चोर उचक्कों की छीना झपटी से सुरक्षा मिल सके. भाई वाह ! क्या

बात है. पर कुछ और ऐसी ही ईज़ादें भारतीयों के लिए हो जाए तो मज़ा आ जाए.
मेरी कुछ इच्छाएँ (विश लिस्ट) हैं –

1 ऐसे वाहन ईज़ाद किए जाएँ जो गड्ढों युक्त, भीड़ भरे, जाम लगे भारतीय सड़कों पर

भी फर्राटा से दौड़ सकें, तथा घासलेट, कुकिंग गैस, नेफ्था, साल्वेंट इत्यादि (वैसे

भी ये पेट्रोल/डीज़ल/सीएनजी में तो धड़ल्ले से मिलाए ही जाते हैं) से भी चल सकें.

2 ऐसी घड़ियाँ बनाई जाएँ जो इंडियन स्टैंडर्ड टाइम का लिहाज रखें. यानी की किसी

समारोह के उद्घाटन पर नियत समय पर या किसी नेता के लंबे उबाऊ भाषण पर वह रूक

जाए जब तक कि उद्धाटन न हो जाए और भाषण समाप्त न हो जाए ताकि लोगों को यह

आभास न हो कि वे ले…

धन्य धान्य धर्माचार्य – भाग 2

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चोला राम का दिल रावण रावण
यही है रवि हाहाकारी असलियत




भाग 1 में मैंने बोहरा समाज के धर्मगुरु का परिवार मुम्बई के कामा हाउस को 1 अरब से अधिक रुपयों में खरीदे जाने के बारे में लिखा था. वह तो भला हो कुछ समाचार पत्रों का जिसमें इस विवादास्पद सौदे का हल्ला मचा और वह रद्द हो गया. भाग 2 तो और भी कलंकित है. काँची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य को हत्या के अपराध में मुख्य अभियुक्त क्रमांक 1 के रूप में विगत दिनों गिरफ्तार किया गया. मामला पीठ के पाँच हजार करोड़ रूपयों से अधिक की सम्पत्ति का है, जिसके दुरुपयोग के बारे में मृतक बरसों से शंकराचार्य पर उंगली उठाते रहे थे.

मैं फिर से एक बार कहना चाहूँगा कि ये धार्मिक गुरु चाहे जिस पंथ, रीति और धर्म के हों, वे खतरनाक परजीवी हैं जो समग्र विश्व को चूसकर उसके विकास में बाधा डालते रहे हैं. उम्मीद करते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ इनकी असलियत को पहचान लेंगीं.

ग़ज़ल
****
खुद की नहीं पहचानी असलियत
तलाश में हैं औरों की असलियत

यहीं तो है उस लोक की हकीकत
जनता कब पहचानेगी असलियत

मत मारो उस दीवाने को पत्थर
पहले देख लो अपनी असलिय…

अपसाइड डाउन इंडिया

उल्टा पुल्टा इंडिया
********
जग सुरैया ने टाइम्स ऑफ इंडिया (नवंबर ७, २००४) में इंडिया के बारे में काफी कुछ लिखा है. जग सुरैया पत्रकारिता से ताउम्र जुड़े रहे हैं और उन्होंने विश्व के तमाम देशों की यात्राएँ भी की हैं. अपने अनुभवों को वे बेबाकी से लिखते रहे हैं. उस लेख का छोटा सा हिस्सा प्रस्तुत हैः

इंडिया उल्टा पुल्टा देश है. यहाँ की हर चीज उल्टी पुल्टी है. विश्व के अन्य प्रजातंत्रों में प्रजा शासकों को चुनती है ताकि प्रजा खुशहाल हो सके. इंडिया में प्रजा शासकों को चुनती है ताकि शासक, प्रजा के खर्चे से खुशहाल हो सकें. अन्य जगह पानी, बिजली, स्कूलों और हस्पतालों की व्यवस्था हर एक की सुगम पँहुच में हो इस पर ध्यान दिया जाता है. इंडिया में इन यूटिलिटीज़ को गोली मारो, अपना हिस्सा पार करो का नारा चलता है. अन्य जगहों पर सिस्टम इस लिए चलता है चूंकि वहाँ सिस्टम मौज़ूद है और हर व्यक्ति उससे बंधा है- चाहे लाइन में लगना हो, रास्ते पर चलना हो, टैक्स जमा करना हो... पर अरबों की जनसंख्या वाले देश इंडिया में तो सिस्टम है ही नहीं फालों क्या करें, वह भी तब जब इंडिया का हर बंदा अपने कर्मों से बंधा है!

***
ग़…

हिंदी शब्दकोश

जालघर के अँग्रेज़ी -हिंदी शब्दकोश



पढ़ने लिखने के लिए कंप्यूटरों पर हमारी निर्भरता बढ़ती ही जा रही है.

निकट भविष्य में अधिसंख्य जन, प्रायः अधिसंख्य कार्यों हेतु, अधिसंख्य समय
कंप्यूटरों का ही उपयोग करने लगेंगे. अच्छे लेखन के लिए तथा लिखे हुए को अच्छे ढंग

से समझने के लिए प्रायः शब्दकोशों की आवश्यकता होती है. अब चूंकि हम अपने कार्य
कंप्यूटर पर ही करने लगे हैं, तो फिर मोटे-मोटे शब्दकोशों के पन्ने पलटने आवश्यकता

कतई नहीं है. अब आपके कंप्यूटर पर ही ढेरों, विभिन्न भाषाओं के शब्दकोश और समांतर
कोश उपलब्ध हैं. कंप्यूटर पर उपलब्ध संस्थापन योग्य तथा ऑनलाइन शब्दकोशों के द्वारा

शब्दों को ढूंढा जाना न सिर्फ आसान होता है, वरन कई प्रकार के सहायक अनुप्रयोगों
यथा ‘काट तथा चिपका’ इत्यादि का उपयोग कर अपने कार्य को और भी आसान बनाया जा सकता

है. हिंदी भाषा के लिए कुछ समय पूर्व तक जालघर में तथा कंप्यूटर पर संस्थापन योग्य
अँग्रेज़ी-हिंदी-अँग्रेज़ी शब्दकोश इक्का-दुक्का ही उपलब्ध थे. परंतु अब स्थितियाँ

तेजी से बदली हैं और आज हमारे पास बहुत से विकल्प उपलब्ध हैं, और प्रायः हर
प्लेटफॉर्म चाहे विंडोज़9x / …

विशाल लाइब्रेरी में से पढ़ें >

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