शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

दिल को बहलाने के लिए ग़ालिब, खयाल अच्छा है...

ओह, अब पता चला आज सुबह सुबह सिर घुटवा के क्यों चले आए....

फ़ेसबुक कौन जात हौ?

फ़ेसबुक का धर्म, उसकी जाति क्या है? किसी को पता है? आपको भले ही फ़ेसबुक का धर्म, उसकी जाति पता हो न हो, फ़ेसबुक आपकी जाति और आपके धर्म के बा...

पायरेसी जिंदाबाद!

और, ये आखिर किस ने कह दिया भाई कि पायरेसी नुकसानदायक होती है. आजतक हमें तो फायदा ही फायदा मिलता रहा है, नुकसान कभी हुआ ही नहीं!

मंगलवार, 12 सितंबर 2017

व्यंग्य जुगलबंदी - 51 – आलोकित जुगाड़

(2007 में आलोक पुराणिक ब्लॉगों में इस तरह हंसते-हंसाते हुए पाए गए थे) सूचना – यह आलोक पुराणिक पर संस्मरण भी है. इसे जुगाड़ का व्यंग्य भी कह ...

शनिवार, 2 सितंबर 2017

व्यंग्य जुगलबंदी 50 : नोटबंदी, जीडीपी और आर्थिक विकास

अस्वीकरण – यह टोटल व्यंग्य (परिपूर्ण व्यंग्य भी लिख मार सकता था, पर, फिर कितने लोगों को समझ में आता?) है. अतः तद्नुसार ग्रहण करें. नोटबंदी प...

शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

इतना सस्ता मेरे किस काम का?

12 लाख के बजाए 15 होता और अपने हिस्से का परसेंटेज भी इतना ही बढ़ता तो बात फिर भी ठीक थी!

सोमवार, 28 अगस्त 2017

व्यंग्य जुगलबंदी 49 - बाबागिरी के मरफ़ी के नियम

(चित्र - साभार - काजल कुमार ) मरफ़ी का नियम हर जगह लागू होता है. बाबागिरी में भी. कुछ नियम ये हैं – · दुनिया में कुछ नहीं बदलता. बाबागिरी भ...

शुक्रवार, 25 अगस्त 2017

व्यंग्य जुगलबंदी - 48 : तकनीक और हवापानी

प्राचीन काल में आदमी स्वास्थ्य लाभ करने के नाम पर हवापानी बदलता था. तपेदिक जैसी बीमारियाँ हवापानी बदलने से खुद-ब-खुद ठीक हो जाती थीं. आजकल, ...

गुरुवार, 17 अगस्त 2017

खबर एक, नज़र अनेक

जाकी रही भावना जैसी....

रविवार, 13 अगस्त 2017

व्यंग्य जुगलबंदी 47 : साराह से छेड़छाड़

साराह से प्राप्त संदेशों को दुनिया सगर्व अपने फ़ेसबुक, वाट्सएप्प, ब्लॉग आदि आदि पर डाल रही है. प्रकटतः बड़ी ईमानदारी से. परंतु हमारे पास एआई...

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